Home Blog Page 696

दुकान से लौट रही 7 साल की बच्ची का यौन शोषण, TMC नेता ने दिया मामले को रफा-दफा करने का ऑफर: RAF तैनात, बीरभूम और हावड़ा के बाद अब नॉर्थ 24 परगना में घटना

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में RG Kar मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार कर के हत्या कर दी गई। इसे लेकर जनाक्रोश थमा भी नहीं कि बीरभूम में अब्बासुद्दीन नामक शख्स द्वारा अस्पताल में भर्ती होकर नर्स के साथ छेड़खानी करने की घटना सामने आई। इसके बाद हावड़ा के एक अस्पताल में 13 साल की बच्ची के यौन शोषण का मामला सामने आया। वहीं अब नॉर्थ 24 परगना में नाबालिग लड़की के साथ यौन प्रताड़ना की घटना को अंजाम दिया गया है। लड़की की उम्र मात्र 7 वर्ष है।

मध्यमग्राम में आक्रोशित लोगों ने इस घटना के बाद आरोपित के घर पर हमला कर दिया और उसके रिश्तेदारों की दुकानें भी तहस-नहस कर दी। मामला तब बढ़ गया जब सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के एक स्थानीय नेता ने पीड़िता के परिजनों को मामले को रफा-दफा करने का ऑफर दिया। पीड़िता के पिता ने बताया कि उनकी बेटी दुकान से लौट रही थी, इसी दौरान आरोपित ने यौन शोषण किया। आरोपित उसी गाँव का रहने वाला है। पीड़ित परिवार ने उसे कड़ी सज़ा दिए जाने की माँग की है।

पीड़िता के पिता ने कहा कि उन्होंने विश्वास ही नहीं हुआ कि आरोपित इस तरह की हरकत कर सकता है। आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना रोहांडा पंचायत के राजभरी क्षेत्र की है। शनिवार (31 अक्टूबर, 2024) की रात को सामने आई। आरोपित के घर के बाहर स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया। जिस TMC नेता के बयान को लेकर हंगामा हुआ, वो पंचायत सदस्य का पति है। उसके घर को भी प्रदर्शनकारियों ने निशाना बनाया, जिसके बाद RAF (रैपिड एक्शन फोर्स) को तैनात करना पड़ा

पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस के गोलों का भी इस्तेमाल किया। पंचायत सदस्य के परिवार ने विपक्षी दल CPM पर इस हमले का आरोप लगाया है। उधर पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले में एक अस्पताल के अंदर नर्स के साथ छेड़छाड़ की घटना सामने आई। आरोपित का नाम अब्बासुद्दीन बताया जा रहा है। वहीं हावड़ा के एक अस्पताल में एक बच्ची के साथ यौन शोषण की घटना सामने आई है। लड़की की उम्र मात्र 13 वर्ष है, CT स्कैन के दौरान उसके साथ इस तरह की हरकत की गई। उसका पैंट खोला गया, किस किया गया और पूछा गया कि क्या वो पॉर्न देखती है।

इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया अब्बासुद्दीन, नर्स से ही करने लगा छेड़खानी: दी गंदी-गंदी गालियाँ, कोलकाता और हावड़ा के बाद बीरभूम की घटना

पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले में एक अस्पताल के अंदर नर्स के साथ छेड़छाड़ की घटना सामने आई है। छेड़छाड़ का आरोप एक मरीज पर लगा है जिसका नाम अब्बासुद्दीन बताया जा रहा है। बुखार की दिक्कत बता कर भर्ती हुए अब्बासुद्दीन ने नर्स के दुर्व्यवहार शुरू कर दिया था। घटना शनिवार (31 अगस्त, 2024) की है। मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई है जिस पर जाँच की जा रही है। आरोपित पर कार्रवाई न होने पर अस्पताल के स्टाफ ने काम बंद करने की भी चेतावनी दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना वीरभूम जिले के इल्लामबाजार की है। यहाँ शनिवार को पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में बताया गया है कि घटना की रात अब्बासुद्दीन इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था। वह स्ट्रेचर पर लाया गया था। उसके साथ तीमारदार के तौर पर उसके परिवार के अन्य सदस्य भी थे। इलाज के लिए अब्बासुद्दीन को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती करवाया गया। थोड़ी देर बाद डॉक्टरों के निर्देश पर एक नर्स को ड्रिप चढ़ाने के लिए वहाँ गई।

आरोप है कि वार्ड में अब्बासुद्दीन ने नर्स के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी। अब्बासुद्दीन की इस हरकत पर नर्स बेहद डर गई और विरोध किया। विरोध से भड़क अब्बासुद्दीन ने पीड़िता को गंदी-गंदी गालियाँ देना शुरू किया। नर्स वार्ड से लौट आई और अपने अन्य सहकर्मियों को इस घटना की जानकारी दी। अस्पताल के अन्य स्टाफ अब्बासुद्दीन की हरकत से खफा हो गए। उन्होंने मामले की तहरीर में पुलिस में दी है। आरोपित पर कड़ी कार्रवाई न होने पर उन्होंने काम बंद करने की चेतावनी भी दी है।

मामले में एक आरोपित को गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।

बताते चलें कि अस्पतालों की महिला स्टाफ की सुरक्षा को ले कर पश्चिम बंगाल में इस समय आंदोलन जोरों पर है। राजनैतिक दलों से ले कर छात्र संगठनों ने महिलाओं की सुरक्षा बेहतर करने के लिए सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन किया है। यह प्रदर्शन RG कर मेडिकल कॉलेज की वारदात के बाद शुरू हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट तक ने अस्पतालों में काम करने वाली महिलाकर्मियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की नियुक्ति का आदेश दिया है।

साले की घर वाली पर ही आ गया रमज़ान का दिल, इनकार करने पर पेट्रोल छिड़क ससुराल में लगा दी आग: 4 की मौत, मृतकों में वो खुद और एक बच्चा भी शामिल

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में एक युवक ने अपने साले की बीवी से निकाह न होने पर ससुराल वालों सहित खुद को भी आग लगा दी है। इस आगजनी ने आरोपित रमजान सहित कुल 4 लोगों की मौत हो गई है जबकि 2 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मृतकों में एक बच्चा भी शामिल है। घटना शुक्रवार (30 अगस्त, 2024) की है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना मुर्शिदाबाद जिले के थानाक्षेत्र सागरदिघी की है। यहाँ के गाँव बहालनगर में रमज़ान का काफी समय पहले निकाह हुआ था। 2 साल पहले रमज़ान की बीवी की मौत हो गई थी। बीवी के मरने के बाद भी रमज़ान अपनी ससुराल आता-जाता रहा। इसी दौरान रमज़ान का दिल अपने साले की बीवी पर आ गया। वह मन ही मन अपने साले की बीवी से निकाह करने के सपने पालने लगा। इसी सपने को हकीकत में बदलने के लिए रमज़ान शुक्रवार को अपनी ससुराल पहुँच गया।

ससुराल पहुँच कर रमज़ान ने अपने मन की बात जाहिर की। उसके साले की बीवी सहित अन्य ससुरालीजन इस प्रस्ताव से हैरान हो गए। उन्होंने रमज़ान के इस ऑफर को ख़ारिज कर दिया। अपने सपने चूर-चूर होता देख कर रमज़ान का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसने पहले गालियाँ बकनी शुरू कर दीं और इसके विरोध होने पर वो मारपीट पर उतारू हो गया। आरोप है कि रमज़ान किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की साजिश पहले ही रच कर आया था। वो अपने साथ पेट्रोल भी ले कर पहुँचा था।

अपनी मंशा पूरी तरह से ख़ारिज होने से खफा रमज़ान ने पेट्रोल छिड़क कर अपनी ससुराल में आग लगा दी। कुछ ही देर में आग की चपेट में पूरा मकान आ गया। आसपास के लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की। जब तक आग पर काबू पाया गया तब तक रमज़ान सहित 4 लोगों की जल कर मौत हो चुकी थी। इन चार मृतकों में एक नाबालिग बच्चा भी शामिल है। वहीं इसी घटना में 2 अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। पुलिस पूरे मामले की जाँच और अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।

Kiss किया, पैंट खोला, पूछा – पॉर्न वीडियो देखती हो? RG Kar के बाद अब हावड़ा के अस्पताल में 13 साल की लड़की का यौन शोषण, रोती निकली पीड़िता

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित RG Kar मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में एक महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की घटना को लेकर अभी आक्रोश थमा भी नहीं था कि अब हावड़ा के एक अस्पताल में एक बच्ची के साथ यौन शोषण की घटना सामने आई है। लड़की की उम्र मात्र 13 वर्ष है, CT स्कैन के दौरान उसके साथ इस तरह की हरकत की गई। आरोपित अमन राज को गिरफ्तार कर लिया गया है। वो सीटी स्कैन डिपार्टमेंट में अस्थायी कर्मचारी के रूप में तैनात था।

13 वर्षीय बच्ची को न्यूमोनिया की शिकायत के कारण हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था। बुधवार (28 अगस्त, 2024) को उक्त बच्ची को अस्पताल लाया गया था। शनिवार की रात को बच्ची को CT स्कैन के लिए ले जाया गया। इसके थोड़ी देर बाद ही लड़की को रोती हुई वहाँ से बाहर आते हुए देखा गया। रोती हुई पीड़िता ने एक अन्य मरीज के परिजन से मदद माँगी। लड़की की माँ अस्पताल के बाहर थी, वो ये सब देख कर दौड़ती हुई अंदर आई और बच्ची से सारी बात पूछी।

इसके बाद अस्पताल परिसर में इस घटना की खबर फैल गई और स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए। इसके बाद लड़की के परिजन और अन्य रिश्तेदार अस्पताल पहुँच गए और उन्होंने आक्रोश प्रकट किया। आरोपित को पकड़ कर पीटने की कोशिश भी की गई। हावड़ा पुलिस घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुँची और भीड़ से बचा कर आरोपित को हिरासत में लिया गया। परिजनों की शिकायत पर FIR दर्ज कर ली गई है। घटना की जाँच की जा रही है।

लड़की ने बताया है कि आरोपित ने उसका पैंट खोलने की कोशिश की और पूछा कि क्या उसने गंदे वीडियो देखे हैं। साथ ही उसने लड़की को किस भी किया था। कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जिम्मेदारों से भाग रही हैं और इसीलिए CBI को दोष दे रही हैं। गायिका श्रेया घोषाल ने भी सितंबर में होने वाले अपने कंसर्ट को आगे बढ़ा दिया है। TMC सरकार की पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल-प्रयोग भी किया था।

डायरेक्टर ने सेक्स के लिए एडजस्टमेंट करने को कहा, प्रोड्यूसर ने रेप के लिए साड़ी खींची: हिरोइन चार्मिला ने बताई मलयालम फिल्मों की एक और गंदी बात

निर्देशक हरिहरन के खिलाफ अभिनेत्री चार्मिला द्वारा लगाए गए आरोपों की अभिनेता विष्णु ने पुष्टि की है। विष्णु के अनुसार, निर्देशक ने उनसे पूछा था कि ‘क्या वह एडजस्ट करेंगी’? विष्णु ने बताया कि उन्हें चार्मिला से यह पूछने के निर्देश दिए गए थे कि क्या वह कुछ माँगों को पूरा करेंगी। जब चार्मिला ने मना तो विष्णु ने यह बात हरिहरन को बताई। आखिरकार, चार्मिला को फिल्म ‘परिणयम’ में निकाल दिया गया।

चार्मिला ने आरोप लगाया था कि निर्देशक हरिहरन ने उनसे पूछा कि क्या वह ‘एडजस्टमेंट’ (सेक्स के लिए तैयार होने के संदर्भ में) के लिए तैयार हैं। चार्मिला ने कहा, “उन्होंने मेरे दोस्त और अभिनेता विष्णु से पूछा कि क्या मैं एडजस्टमेंट के लिए तैयार हूँ। चूँकि, मैंने ‘नहीं’ कहा, इसलिए हरिहरन ने हम दोनों को अपनी फिल्म ‘परिणयम’ से हटा दिया।”

उन्होंने सन 1997 में आई फिल्म ‘अर्जुनन पिल्लयम अंचू मक्कलम’ के सेट पर हुई एक भयानक घटना का भी जिक्र किया। इसको लेकर अभनेत्री ने दावा किया कि सेट पर उनकी सहयोगी के साथ रेप और उनके साथ मारपीट क की गई थी। चार्मिला ने बताया कि निर्माता एमपी मोहनन और प्रोडक्शन मैनेजर दोनों ने उनकी साड़ी खींचकर रेप की कोशिश की थी।

35 से ज़्यादा मलयालम फ़िल्मों में काम कर चुकी चार्मिला ने बताया, “साल 1997 में ‘अर्जुनन पिल्लयम अंजु मक्कलम’ की शूटिंग के दौरान निर्माता एमपी मोहनन, प्रोडक्शन मैनेजर शानमुखन और उनके दोस्तों ने मेरे साथ सामूहिक बलात्कार करने की कोशिश की थी। मैं किसी तरह होटल के कमरे से भागने में कामयाब रही। उन्होंने मेरी साड़ी उतारने की कोशिश की।”

ऑनमनोरमा की रिपोर्ट के मुताबिक, अभिनेत्री ने आगे बताया, “उन्होंने मेरे असिस्टेंट के साथ भी यौन उत्पीड़न किया। एक पुरुष असिस्टेंट के साथ मारपीट की गई। जिस होटल में मैं ठहरी थी, वहाँ की रिसेप्शनिस्ट भी इसमें शामिल थी। एक ऑटो-रिक्शा ड्राइवर ने हमें बचाया। हालाँकि मैं बच गई, लेकिन उन्होंने उस फ़िल्म में काम कर रहे जूनियर आर्टिस्ट के साथ बलात्कार किया।”

उन्होंने यह भी बताया कि निर्देशक हरिहरन ने उनसे पूछा कि क्या वह ‘एडजस्टमेंट’ (सेक्स के लिए तैयार होने के संदर्भ में) के लिए तैयार हैं। चार्मिला ने कहा, “उन्होंने मेरे दोस्त और अभिनेता विष्णु से पूछा कि क्या मैं एडजस्टमेंट के लिए तैयार हूँ। चूँकि, मैंने ‘नहीं’ कहा, इसलिए हरिहरन ने हम दोनों को अपनी फिल्म ‘परिणयम’ से हटा दिया।”

अभिनेत्री ने कहा, “मैंने चार भाषाओं में काम किया है। ऐसी समस्याएँ मुख्य रूप से मलयालम उद्योग में हैं।” चार्मिला ने कहा कि वह शिकायत करने के लिए आगे नहीं आना चाहती थीं, क्योंकि उनका एक बेटा भी है। चार्मिला ने स्वीकार किया कि अनुचित माँगों को पूरा करने से इनकार करने के कारण उन्हें कम फिल्में आदि ऑफर की जा रही हैं।

बांग्लादेश में हिंदू टीचर-प्रोफेसरों से जबरन इस्तीफा ले रहे कट्टरपंथी: प्रिंसिपल शुक्ला रानी हलदर को ऑफिस में घेरा, धमकी देकर सिर्फ 4 शब्द लिखवाया- ‘मैं इस्तीफा देती हूँ’

भारत समर्थक माने जाने वाली प्रधानमंत्री शेख हसीना के तख्ता पलट के बाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर कहर जारी है। एक तरफ हिंदू ग्रामीणों के घर-मकानों में लूट-पाट करके उन्हें आग के हवाले किया जा रहा है तो दूसरी तरफ महिलाओं से बलात्कार की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। अब सरकारी नौकरी में शामिल हिंदुओं को इस्तीफा देने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

5 अगस्त 2024 को हसीना सरकार के पतन के बाद हिंदू सरकारी शिक्षकों को इस्तीफा के लिए मजबूर किया जा रहा है। सामने आई रिपोर्ट में अब तक कम-से-कम 50 हिंदू शिक्षकों को नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किया गया है। हालाँकि, वास्तविक संख्या बहुत अधिक है। ऐसे ही एक मामले में बरिशाल के बेकरगंज सरकारी कॉलेज की प्रिंसिपल शुक्ला रानी हलदर को इस्तीफा के लिए मजबूर किया गया।

बांग्लादेशी दैनिक प्रोथोम अलो ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 29 अगस्त 2024 को छात्रों और बाहरी लोगों की भीड़ ने उनके कार्यालय पर धावा बोल दिया और उनसे इस्तीफे की माँग करने लगे। इस दौरान उन्हें तरह-तरह से धमकी दी गई। इन धमकियों के बीच हलदर ने एक सादे पर ‘मैं इस्तीफा देती हूँ’ लिख दिया। इस तरह उन्हें सरकारी नौकरी से हटने के लिए मजबूर कर दिया गया।

स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, प्रिंसिपल हलदर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व स्थानीय बीएनपी नेता के बेटे ने किया, जो कॉलेज में छात्र है। उसके साथ अधिकतर लोग बीएनपी के ही कार्यकर्ता थे। बीएनपी खालिदा जिया की पार्टी है, जो कट्टरपंथी गतिविधियों में संलिप्त रही है। वह शेख हसीना की विरोधी है। सेना को वर्तमान में इसका समर्थन प्राप्त है।

हिंदुओं के खिलाफ नफरत के कुख्यात बीएनपी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने प्रिंसिपल शुक्ला रानी हलदर पर वित्तीय भ्रष्टाचार, अनियमित उपस्थिति और अन्य कदाचार का आरोप लगाते हुए उनसे इस्तीफ़े की माँग की। कुछ प्रदर्शनकारियों ने उनके दफ़्तर पर धावा बोल दिया और उन्हें तरह-तरह से धमकाते हुए अपने पद से इस्तीफ़ा देने का दबाव बनाया।

आखिरकार दोपहर 2:00 बजे शुक्ला रानी हलदर को एक खाली कागज़ पर “मैं इस्तीफ़ा देती हूँ” लिखने के लिए मजबूर किया गया। फिर उन्हें कागज़ पर हस्ताक्षर करने और मुहर लगाने के लिए मजबूर किया गया। प्रिंसिपल शुक्ला रानी हलदर ने कहा, “मेरे कुछ छात्रों ने मुझे बहुत अपमानित किया है। हालाँकि, इसमें छात्रों से ज़्यादा बाहरी लोग शामिल थे।”

उन्होंने आगे कहा, “उन्हें शांत करने में असमर्थ होने के बाद मेरे पास इस्तीफ़ा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। अब, पूरे मामले का फ़ैसला शिक्षा मंत्रालय के उच्च अधिकारियों द्वारा किया जाएगा।” अपने खिलाफ़ लगे आरोपों पर उन्होंने कहा, “किसी भी आरोप के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है। शिक्षकों के बीच आपसी लड़ाई है और एक गुट ने मेरे खिलाफ़ छात्रों और बाहरी लोगों का इस्तेमाल किया है।”

प्रिंसिपल हलदर के समर्थन में उतरे शिक्षक एवं छात्र-छात्राएँ

सरकारी बीएम कॉलेज में प्रबंधन विभाग की पहली महिला शिक्षिका एवं अध्यक्ष प्रोफेसर शाह साजेदा ने इस मामले पर कहा, “जब मैंने देखा कि मेरी जूनियर सहकर्मी शुक्ला के साथ कैसा व्यवहार किया गया तो मेरी आँखों से आँसू छलक आए। जब ​​से मैंने सोशल मीडिया पर उनकी असहाय और हताश छवि देखी है, मैं खुद को माफ नहीं कर पा रही हूँ। एक महिला शिक्षिका के साथ ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य है।”

दरअसल, 14वें बीसीएस शिक्षा संवर्ग की अधिकारी शुक्ला रानी हलदर ने 2022 के मध्य में बेकरगंज सरकारी कॉलेज की प्रिंसिपल के रूप में अपना पद-भार संभाला। इससे पहले, उन्होंने बरिशाल में सरकारी ब्रोजोमोहन (बीएम) कॉलेज में अंग्रेजी की प्रोफेसर के रूप में काम किया। हलदर की तस्वीरें वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर सोशल मीडिया पर बांग्लादेशी सरकार की खूब आलोचना हो रही है।

बीएम कॉलेज की पूर्व छात्रा मीता मिटू ने फेसबुक पर निराशा व्यक्त करते हुए लिखा, “शुक्ला रानी मैडम बीएम कॉलेज में अंग्रेजी विभाग में मेरी पसंदीदा शिक्षिका थीं। वह वर्तमान में बेकरगंज सरकारी कॉलेज में प्रिंसिपल हैं। उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया है। वह एक असाधारण व्यक्ति हैं, जो हमेशा खुश एवं मुस्कुराती रहती हैं। मैडम, आप जैसे लोग इस तरह के व्यवहार के लायक नहीं हैं। उन्हें माफ़ करें।”

बरिशाल गवर्नमेंट आईएचटी के एक अन्य पूर्व छात्र एमएम जुबैर ने फेसबुक पर लिखा, “जब मैं बरिशाल गवर्नमेंट आईएचटी में था, तब मैडम ने हमें अतिथि शिक्षक के रूप में पढ़ाया था। वह एक गर्मजोशी से भरी, छात्रों के अनुकूल शिक्षिका हैं, जो हमेशा मुस्कुराती रहती हैं। बीएम कॉलेज में सेवा देने के बाद वह अब बेकरगंज गवर्नमेंट कॉलेज में प्रिंसिपल हैं।”

बांग्लादेश की वर्तमानन स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए एमएम जुबैर ने आगे लिखा, “मेरा मानना ​​है कि कोई अपने फायदे के लिए छात्रों का शोषण कर रहा है। उनके पूर्व छात्र और बांग्लादेश के एक चिंतित नागरिक के रूप में मैं इस घटना का विरोध करता हूँ और उचित जाँच की माँग करता हूँ। कृपया उन्हें माफ कर दें, मैडम।” फेसबुक पर छात्र-छात्राओं के बयान भरे पड़े हैं, जो उनके आक्रोश को दिखाते हैं।

वहीं, बीसीएस कैडर के एक अधिकारी ने प्रोथोम एलो नाम के मीडिया हाउस से नाम नहीं छापने की शर्त पर बात करते हुए कहा, “हलदर मैडम मेरी शिक्षिका थीं। उनका अपना कोई बच्चे नहीं है। छात्र-छात्राएँ ही उनके बच्चों की तरह थे। मैं ऐसे आदर्श शिक्षक के साथ किए गए क्रूर व्यवहार को स्वीकार नहीं कर सकता।” बांग्लादेश का संभ्रांत वर्ग भी वर्तमान सत्ता और उसके क्रूर व्यवहार की आलोचना कर रहा है।

उन्होंने ट्वीट किया, “बांग्लादेश में शिक्षकों को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। पत्रकार, मंत्री, पूर्व सरकार के अधिकारी मारे जा रहे हैं, परेशान किए जा रहे हैं, जेल में बंद किए जा रहे हैं। जनरल जेड ने अहमदिया मुसलमानों के उद्योग जला दिए हैं। इस्लामी आतंकवादियों ने सूफी मुसलमानों की मजारें और दरगाहें ध्वस्त कर दी हैं। यूनुस इसके खिलाफ कुछ नहीं कहते।”

प्रिंसिपल हलदर ही नहीं, 50+ शिक्षक-शिक्षिकाओं से इस्तीफा

इसी तरह 18 अगस्त को अजीमपुर सरकारी गर्ल्स स्कूल एवं कॉलेज की लगभग 50 छात्राओं ने प्रिंसिपल गीतांजलि बरुआ और सहायक प्रिंसिपल गौतम चंद्र पाल को घेर कर उनसे इस्तीफा माँगने लगीं। इनमें शारीरिक शिक्षक शहनाज अख्तर भी थीं। गीतांजली ने डेली स्टार को बताया, “18 अगस्त से पहले उन्होंने मेरा इस्तीफा नहीं माँगा। उस दिन वे मेरे कार्यालय में घुस आईं और मुझे अपमानित किया।”

इसी तरह कबि नज़रूल विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन और शासन अध्ययन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर संजय कुमार मुखर्जी को भी इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया। मुखर्जी ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा, “मुझे प्रॉक्टर और विभागाध्यक्ष के पद से इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर किया गया। हम इस समय बहुत कमज़ोर स्थिति में हैं।” हालाँकि, इन शिक्षकों में से 19 को फिर बहाल कर दिया गया है।

बता दें कि देश भर में ऐसी कई घटनाएँ हुई हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फोटो में छात्रों द्वारा शिक्षकों और अकादमिक प्रशासकों को त्यागपत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर करते हुए देखा जा सकता है। दिन-पर-दिन बिगड़ती जा रही स्थिति के बीच बांग्लादेश में हिंदू शिक्षकों के साथ-साथ अन्य सरकारी सेवाओं में काम करने वाले लोगों के बीच भय और असहाय होने की भावना बढ़ती जा रही है।

बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई ओइक्या परिषद की छात्र शाखा ‘बांग्लादेश छात्र ओइक्या परिषद’ ने शनिवार (31 अगस्त 2024) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान हिंदू सहित अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ कार्रवाइयों की निंदा की और उनके खिलाफ बढ़ती असहिष्णुता पर बात की। निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा नहीं करने के लिए मुहम्मद यूनुस सरकार पर निशाना साधा।

संगठन के समन्वयक साजिब सरकार ने कहा कि शेख हसीना सरकार के पतन के बाद धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों को हमलों, लूटपाट, महिलाओं पर हमले, मंदिरों में तोड़फोड़, घरों और व्यवसायों पर आगजनी और हत्याओं का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा, अल्पसंख्यक शिक्षकों पर शारीरिक हमला किया गया है और उनमें से 50 को 30 अगस्त तक इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया है।

15800 फ़ीट पर दुनिया की सबसे ऊँची सुरंग, चीनी सैनिकों की आक्रामकता को काबू करने के लिए ऑल-वेदर रोड: BRO के काम में तेजी

केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के लेह में पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देशों की ओर से भारत लगातार घुसपैठ का सामना करना पड़ रहा है। इसको देखते हुए भारत अपनी बुनियादी ढाँचे को मजबूत कर रहा है। सीमा सड़क संगठन (BRO) अगले कुछ हफ़्तों में चीन से लगी सीमा पर विशेष बुनियादी ढाँचे का काम पूरा कर लेगा। इसमें लेह के लिए वैकल्पिक रास्ता भी है, जो हर मौसम के लिए उपयुक्त है।

इन सबके अलावा, रक्षा मंत्रालय के तहत काम करने वाले इस संगठन ने भारत-चीन सीमा सड़क कार्यक्रम के तहत नामित परियोजनाओं पर काम को प्राथमिकता दी है। उत्तराखंड में मानसरोवर यात्रा मार्ग पर लिपुलेख दर्रे तक संपर्क को पूरी तरह से स्थापित किया है। वर्तमान में लेह तक पहुँचने के लिए तीन रास्ते हैं। पहला रास्ता जम्मू और कश्मीर में श्रीनगर-जोजिला-कारगिल होकर जाता है।

दूसरा रास्ता हिमाचल प्रदेश में मनाली-रोहतांग से होकर जाता है। यह सड़क दारचा नामक स्थान पर विभाजित हो जाती है। यहाँ से एक रास्ता पदम और निमू के माध्यम से लेह से जुड़ता है और दूसरा हिमाचल प्रदेश में बारालाचा ला और लद्दाख में तंगलांग ला के पहाड़ी दर्रों से होकर कारू के माध्यम से लेह से जुड़ता है। वर्तमान में लेह जाने वाले दोनों रास्ते सभी मौसम के लिए उपयुक्त नहीं हैं।

श्रीनगर-लेह मार्ग देश के सबसे लोकप्रिय मार्गों में से एक है। इन परियोजनाओं के बारे में जानकारी रखने वाले वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि निमू-पदम-दारचा सड़क के 4 किलोमीटर के कटे हुए हिस्से को जोड़ना और मनाली-दारचा-पदम-निमू अक्ष पर 4.1 किलोमीटर लंबी ट्विन ट्यूब शिंकू ला सुरंग का निर्माण कार्य शुरू करना BRO की प्राथमिकता वाली सूची में शामिल हैं।

नीमू-पदम-दारचा सड़क के 4 किलोमीटर लंबे कटे हुए हिस्से को जोड़ने का काम पूरा होने वाला है। सड़क के अधिकांश हिस्से पर तारकोल बिछा दिया गया है। बाकी का काम कुछ हफ़्ते में पूरा हो जाएगा। पीएम मोदी ने जुलाई में द्रास यात्रा के दौरान शिंकुन ला सुरंग परियोजना का शुभारंभ किया था। इस पर जल्दी ही काम शुरू होगा। यह 15,800 फ़ीट की ऊँचाई पर दुनिया की सबसे ऊँची सुरंग होगी।

इस परियोजना पर लगभग 1,681 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इस सुरंग से हिमाचल प्रदेश के मनाली और लद्दाख के लेह के बीच की दूरी 60 किलोमीटर कम हो जाएगी। यह निमू-पदम-दारचा सड़क के 4 किलोमीटर लंबे कटे हुए हिस्से से भी कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी। यह तीसरा ऑल-वेदर रूट होगा, जो लेह के लिए अन्य दो पुराने मार्गों का विकल्प होगा।

मौजूदा 255 किलोमीटर लंबी दुरबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी (डीएस-डीबीओ) सड़क के अलावा, दो अन्य सड़कें अलग-अलग स्थानों पर एलएसी के समानांतर चलती हैं। ये एक सड़क है जो लेह और डेमचोक को कारू और न्योमा के माध्यम से जोड़ती है और दूसरी सड़क दुरबुक को चुशुल के माध्यम से न्योमा से जोड़ती है जो पैंगोंग त्सो झील के दक्षिण में स्थित है।

एक अधिकारी ने कहा कि पूर्वी लद्दाख में लेह-डेमचोक सड़क से संपर्क स्थापित करने को प्राथमिकता दी गई है और इस सड़क पर अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इन सड़कों को अंततः डबल लेन करने की योजना है। अधिकारियों का कहना है कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के समानांतर चलने वाली सड़कों में से एक तक संपर्क स्थापित करना भी बीआरओ की प्राथमिकता है।

बीआरओ ने चार सड़कों को भी सूचीबद्ध किया है, जिन्हें वह आईसीबीआर परियोजना के पहले दो चरणों के तहत पूरा करना चाहता है। इनमें आईसीबीआर के दूसरे चरण के तहत कुल 330.95 किलोमीटर की तीन सड़कें और ज़ेमीथांग के पास भारत-चीन सीमा पर अंतिम सीमा चौकी सुरवा सांबा में एक और सड़क शामिल है। सूचीबद्ध सभी चार सड़कें अरुणाचल प्रदेश में हैं।

आईसीबीआर कार्यक्रम के पहले दो चरणों के तहत भारत-चीन सीमा पर 4,643 किलोमीटर लंबी कुल 73 रणनीतिक सड़कें बनाई जानी थीं, जिनमें से 61 बीआरओ द्वारा और 12 केंद्रीय निर्माण लोक विभाग द्वारा बनाई जानी थीं। ये सड़कें जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में फैली हुई हैं।

अगले कुछ महीनों में बीआरओ को ICBR चरण III के तहत कुल 320.71 किलोमीटर लंबी 14 सड़कों की परियोजना रिपोर्ट देनी है। इनमें पूर्वी लद्दाख में LAC के लिए संपर्क सड़कें भी शामिल हैं। जैसे चुशुल-लुकुंग को ठाकुंग से जोड़ने वाली सड़क, डीएस-डीबीओ रोड ट्रैक जंक्शन, गैपशान से डीएस-डीबीओ सड़क और अरुणाचल प्रदेश में सीमावर्ती सड़कें जैसे टूटिंग-मुर्बो-बाने और बिशिंग-तिनाली क्षेत्र आदि।

अरुणाचल प्रदेश में लगभग 1,800 किलोमीटर लंबे फ्रंटियर हाईवे पर अगले कुछ महीनों में काम शुरू हो जाएगा। यह हाईवे म्यांमार सीमा के करीब बोमडिला, नफरा, हुरी और विजयनगर को जोड़ेगा। इसके कुछ हिस्सों के लिए 6,000 करोड़ रुपए आवंटित हुए थे। जम्मू-कश्मीर में अखनूर-पुंछ राष्ट्रीय राजमार्ग पर 2.79 किलोमीटर लंबी सुंगल सुरंग का कार्य तथा मानसरोवर यात्रा मार्ग के भारत-चीन सीमा पर स्थित लिपुलेख दर्रे तक पूर्ण सम्पर्क स्थापित करना प्राथमिकता में शामिल है।

पिछले चार वर्षों में इन क्षेत्रों में सड़कों, पुलों, आवास, सुरंग, गोला-बारूद डिपो के निर्माण के साथ-साथ अन्य बुनियादी ढाँचे के निर्माण में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, ताकि सैनिकों एवं सामानों की तेज़ आवाजाही हो सके। इस वित्त वर्ष में बीआरओ को आवंटित बजट में भी दिखता है। BRO के इस साल के बजट में पिछले वर्ष की तुलना में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस वर्ष यह बजट 6,500 करोड़ रुपए हो गया है।

‘क्या असम तुम्हारे बाप का है’: बांग्लादेशी प्रदर्शनकारियों की गीत की तर्ज पर अल्ताप हुसैन ने गाया गाना, पुलिस ने दबोचा; गैंगरेप के बाद ‘मियाँ’ के खिलाफ बढ़ रहा विरोध

असम पुलिस ने शनिवार (31 अगस्त) को अल्ताप हुसैन नाम के एक युवा गायक को हिरासत में ले लिया। धुबरी जिले का रहने वाला अल्ताप हुसैन अपने गीतों के माध्यम से स्थानीय समुदायों में शत्रुता भड़काने का काम कर रहा था। उसके गीत के बोल एथुन बाबू और मौसमी के बांग्लादेशी विरोध गीत ‘देश ता तोमर बापर नाकी’ से मिलते-जुलते हैं। उसके इस गीत को सोशल मीडिया पर खूब देखा जा रहा है।

यह घटना नागाँव जिले में तीन मुस्लिम युवकों द्वारा हाल ही में एक नाबालिग लड़की से रेप के बाद ‘मियाँ’ और स्थानीय समुदायों के बीच बढ़ते तनाव के बीच हुई है। गौरीपुर थाने के ओसी जे बैश्य ने कहा, “उसके खिलाफ गौरीपुर थाने में बीएनएस की धारा 196/299 के तहत मामला दर्ज किया गया था। आज हमने अल्ताप को हिरासत में लिया है।” सूत्रों का कहना है कि उसे जल्दी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

अंग्रेजी मीडिया हाउस टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, गायक अल्ताप पर भारतीय न्याय संहिता 2023 (BNS) की धारा 196/299 के तहत ‘धर्म और जाति के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने’ और ‘किसी भी वर्ग, धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के इरादे से दुर्भावनापूर्ण कार्य करने’ का आरोप लगाया

अल्पताप हुसैन का यह गाना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ज़रिए लाखों लोगों तक पहुँच चुका है। इस गाने में ‘मियाँ’ (ऐसे मुस्लिम, जो बांग्लादेश से आकर असम में असम में बसे हैं) को निशाना बनाए जाने को चुनौती दी गई है। इन गानों के हिंदी बोल हैं- ‘क्या असम तुम्हारे बाप की ज़मीन है जो तुम हमेशा मियाँ को भगाना चाहते हो?’ और ‘हर कोई अपराध करता है लेकिन तुम सिर्फ़ मियाँ में ही दोष ढूंढ़ते हो।’ है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि वे पक्षपात के आरोपों के बावजूद ‘मियाँ’ को राज्य पर कब्ज़ा नहीं करने देंगे। विधानसभा में बोलते हुए सरमा ने अपराध दर और नागाँव में 14 वर्षीय लड़की के साथ हाल ही में हुए सामूहिक बलात्कार पर चर्चा की। उन्होंने महिलाओं के खिलाफ़ अपराधों पर ‘शून्य-सहिष्णुता’ की नीति पर जोर दिया और अपराधियों के खिलाफ़ सख्त कार्रवाई का वादा किया।

गैंगरेप के बाद मियाँ के खिलाफ प्रदर्शन

दरअसल, असम के ढिंग में 22 अगस्त 2024 को कक्षा 8 में पढ़ने वाली एक नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप हुआ था। इस गैंगरेप का आरोप मुस्लिम समुदाय के 3 लोगों पर लगा था। इस घटना के बाद राज्य भर में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए थे और लोगों ने मियाँ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। प्रदर्शन में शामिल कई संगठनों ने मियाँ को ऊपरी असम खाली कर देने का अल्टीमेटम दिया था।

प्रदर्शनकारियों ने मियाँ को समाज के लिए नासूर बताया था और उन्हें 7 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए इलाका छोड़ने के लिए कहा था। ताई अहोम युवा परिषद नाम के संगठन ने कहा, “पूरी घटना मियाँ मुस्लिमों द्वारा की गई है। मियाँ अब असम के लिए नासूर बन गए हैं। निचले असम में भी कई मियाँ हैं। वे बलात्कार, डकैती, मादक पदार्थों की तस्करी जैसे अपराधों में शामिल हैं। इनसे लोग बेहद परेशान हैं।”

वहीं, असम से कॉन्ग्रेस विधायक अब्दुर रशीद मंडल द्वारा मियाँ को निकालने का ऐलान कर रहे संगठनों को चुनौती दी गई है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी ऊपरी असम से मियाँ को नहीं निकाल पाएँगे। ढिंग की घटना की निंदा करते हुए अब्दुर रशीद ने आगे कहा कि कुछ लोगों की गलती के लिए सबको दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मियाँ असम के विभिन्न क्षेत्रों में अपना योगदान दे रहे हैं।

जनता की समस्याएँ सुन रहे थे गिरिराज सिंह, AAP पार्षद शहज़ादुम्मा सैफी ने कर दिया हमला: दाढ़ी-टोपी का नाम ले बोले केंद्रीय मंत्री – डरने वाला नहीं

बिहार के बेगूसराय जिले केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह पर हमले की कोशिश की गई है। यह प्रयास उनके जनता दरबार के दौरान हुआ जिसे सुरक्षाकर्मियों ने नाकाम कर दिया। आरोपित का नाम शाहजादुम्मा उर्फ़ सैफी बताया जा रहा है जिसे हिरासत में ले कर पूछताछ की जा रही है। सैफी आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता है जिसने गिरिराज सिंह को घूँसा मारने का प्रयास किया। गिरिराज सिंह के साथ मौजूद लोगों ने सैफी की पिटाई भी की है। घटना शनिवार (31 अगस्त, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना बेगूसराय के बलिया प्रखंड की है। शनिवार को यहाँ जनता दरबार के कार्यक्रम में गिरिराज सिंह भी मौजूद थे। शहजादुम्मा उर्फ़ सैफी ने गिरिराज सिंह से कुछ सवाल-जवाब किए। कार्यक्रम खत्म होने के बाद गिरिराज सिंह ने सैफी से कहा कि उसे तमाम सवालों के जवाब दे दिए गए हैं। इसके बाद सैफी जोर-जोर से नारे लगाने लगा और अचानक ही गिरिराज सिंह की तरफ मुक्का तान कर आगे बढ़ा। हालाँकि केंद्रीय मंत्री के साथ चल रहे सुरक्षाकर्मियों की वजह से सैफी अपने मंसूबों में सफल नहीं हो पाया।

इस बीच गिरिराज सिंह के तमाम समर्थकों ने सैफी की पिटाई शुरू कर दी। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने शहजादुम्मा को लोगों से बचा कर अपनी हिरासत में लिया और थाने ले गई। यहाँ उसे से पूछताछ की जा रही है। शहजादुम्मा मूल रूप से बेगूसराय के लखमिनिया का रहने वाला है। वह आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता है जो वर्तमान में लखमिनिया से वार्ड पार्षद भी है। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में लोगों को सैफी की पिटाई करते देखा जा सकता है।

खुद पर हुए इस हमले के बाद गिरिराज सिंह का बयान आया है। उन्होंने कहा, “मैं गिरिराज हूँ और मैं हमेशा समाज के हितों के लिए बोलता रहूँगा, संघर्ष करता रहूँगा। इन हमलों से मैं डरने वाला नहीं। दाढ़ी-टोपी देखकर उनको पुचकारने और सहलाने वाले लोग आज देख लें कि किस प्रकार बेगूसराय बिहार सहित पूरे देश में लेंड जिहाद-लव जिहाद और साम्प्रदायिक तनाव पैदा किया जा रहा है।” माना जा रहा है कि यहाँ दाढ़ी-टोपी को पुचकारने वालों से उनका इशारा तेजस्वी यादव की तरफ था।

चुनाव आयोग ने मानी बिश्नोई समाज की माँग, आगे बढ़ाई मतदान और काउंटिंग की तारीखें: जानिए क्यों राजस्थान में हर वर्ष जमा होते हैं श्रद्धालु

चुनाव आयोग ने जम्मू कश्मीर और हरियाणा में विधानसभा चुनाव के मतदान और मतगणना की तारीखों में बदलाव किया है। बिश्नोई समाज और भाजपा की हरियाणा यूनिट ने ये माँग की थी। पहले हरियाणा में मतदान के लिए 1 अक्टूबर की तारीख़ तय की गई थी, लेकिन अब इस दिन मतदान नहीं होगा। दोनों ही राज्यों के लिए मतगणना 8 अक्टूबर को होगी और चुनाव परिणाम भी उसी दिन जारी किए जाएँगे। चुनाव आयोग ने बिश्नोई समाज के मतदान के अधिकार और उनके परंपराओं के सम्मान के लिए ये फैसला लिया है।

बिश्नोई समाज हर वर्ष गुरु जम्भेश्वर को याद करते हुए आसोज अमावस्या का त्योहार मनाता है। ये एक सदियों पुरानी प्रथा है, जो निरंतर चली आ रही है। ‘अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा’ ने चुनाव आयोग को ज्ञापन देकर चुनाव की तारीखों को बदलने की माँग की थी। न सिर्फ हरियाणा, बल्कि पंजाब और राजस्थान में भी बिश्नोई समाज के परिवार बड़ी संख्या में इस त्योहार को मनाते हैं। राजस्थान के बीकानेर में हर वर्ष वो इकट्ठा होते हैं और वहीं पर वार्षिक उत्सव में भाग लेते हैं।

वहाँ स्थित मुकाम गाँव बिश्नोई समाज का पैतृक स्थल माना जाता है और वो वहाँ जाकर दर्शन करते हैं। इस बार ये त्योहार 2 अक्टूबर को पड़ रहा है। ऐसे में सिरसा, फतेहाबाद और हिसार में रहने वाले हजारों बिश्नोई परिवार उस दौरान राजस्थान की यात्रा पर रहेंगे। 1 अक्टूबर को वोटिंग होता तो वो अपने मताधिकार से वंचित हो सकते थे। हालाँकि, ये पहली बार नहीं हुआ है जब किसी त्योहार के कारण तारीखों में बदलाव किया गया हो। 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान गुरु रविदास जयंती के कारण मतदान एक सप्ताह आगे बढ़ाया गया था।

इसी तरह 2022 में मणिपुर विधानसभा चुनाव के दौरान ईसाई समाज की रविवार के प्रेयर को लेकर तारीख बदली गई थी। राजस्थान में 2023 में ऐसा किया गया था। वहाँ देवउठनी एकादशी विवाह के लिए बहुत बड़ा अवसर होता है और इसीलिए उस दिन लोग जश्न में व्यस्त रहते हैं। इसी तरह 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बारावफात के लिए तारीख बदली गई थी। हालाँकि, अब कॉन्ग्रेस जैसों ने इस फैसले पर राजनीति शुरू कर दी और इसका विरोध कर रहे हैं।