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रुखसार ने प्रेमी समीर संग मिलकर शौहर इमरान की कर दी हत्या: 5 साल के बच्चे ने खोला राज, बोला- अम्मी और चाचा ने मिलकर अब्बू को मार दिया

उत्तर प्रदेश के हापुड़ में एक महिला ने अपने पति की हत्या प्रेमी के साथ मिलके कर दी। महिला ने अपने आशिक के साथ मिल पति का गला घोंटा और पीट-पीट कर उसकी हड्डियाँ भी तोड़ दी। पुलिस ने आरोपित पत्नी और आशिक को गिरफ्तार कर लिया है। मामले का खुलासा महिला के ही 5 वर्षीय बच्चे ने कर दिया।

हापुड़ पुलिस ने शुक्रवार (30 अगस्त, 2024) को रुखसार और समीर को गिरफ्तार किया है। हापुड़ पुलिस ने यह कार्रवाई मंगलवार (27 अगस्त, 2024) को थाना बाबूगढ़ इलाके में हुई एक हत्या के मामले में की है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके आगे की कार्रवाई चालू कर दी है।

दरअसल, 27 अगस्त को हापुड़ के छपरौली के रहने वाले इमरान की लाश बरामद हुई थी। उसकी बीवी रुखसार ने दावा किया था कि इमरान की मौत सीने में तेज दर्द होने के कारण हुई है। हालाँकि, उसकी थ्योरी पर आसपास के लोगों को शक हुआ था। उन्होंने पुलिस से इस मामले में दूसरे एंगल से जाँच करने को कहा था। पुलिस ने इसके बाद मृतक का पोस्टमार्टम करवाया था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इमरान की दो पसलियाँ टूटी हुई मिली थीं और उसकी मौत गला घोंटने के कारण बताई गई थी। पुलिस घटनास्थल पर जाकर सबूत इकट्ठा किए थे। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में इमरान की पत्नी के अलावा अकेले गवाह उसके 5 वर्षीय बेटे विहान से पूछताछ चालू की।

इमरान का बेटा इस मामले में पहले डरा हुआ था। बाद में उसे पुलिसकर्मियों ने समझाया बुझाया तो उसने सारा राज बता दिया। बच्चे ने पुलिस को बताया कि घटना वाले दिन उसका पिता इमरान घर से बाहर था। इस दौरान रुखसार पड़ोस में ही रहने वाले समीर के साथ कमरे में मौजूद थी।

इस बीच इमरान अचानक घर आ गया और इससे विवाद की स्थिति पैदा हो गई। इसके बाद रुखसार और समीर ने इमरान को मारने का फैसला किया। बच्चे ने पुलिस को बताया कि रुखसार ने इमरान की छाती पर मुक्के बरसाए और इस दौरान समीर उसके हाथ पैर पकड़े रहा।

बच्चे ने पुलिस को बताया कि इसके कुछ देर बाद उसकी माँ रुखसार ने पिता इमरान का मुंह दबा दिया और उनकी मौत हो गई। बच्चे के बयान के आधार पर पुलिस ने शुक्रवार को दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। बताया गया कि रुखसार और समीर का 4 साल से संबंध था। पुलिस अब मामले में आगे जाँच कर रही है।

पूर्व CRPF जवान ने MLA रफीक खान पर पत्नी को परेशान करने का लगाया आरोप, कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ताओं ने उसे बुरी तरह पीटा: सामने आया वीडियो

राजस्थान की राजधानी जयपुर में गुरुवार (29 अगस्त) को कॉन्ग्रेस नेता रफीक खान के साथ उनके घर के बाहर मारपीट की गई। यह घटना उस समय हुई, जब वे कुछ लोगों के साथ विधानसभा जा रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, रफीक को एक महिला को परेशान करने के आरोप में एक व्यक्ति ने पीटा है। हमलावर ने पहले रफीक से बहस की, इसके बाद उनका कॉलर पकड़कर थप्पड़ मारने की कोशिश की।

घटना के वक्त रफीक खान के घर में मौजूद लोगों ने हमलावर को पकड़ लिया और उसकी पिटाई कर दी। इसके बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में कॉन्ग्रेस विधायक के कई समर्थक हमलावर को पीटते हुए दिखाई दे रहे हैं। कुछ देर बाद पुलिस मौके पर पहुँची और उसे हिरासत में ले लिया। हमलावर पूर्व CRPF जवान बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि पकड़े गए व्यक्ति की पहचान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के पूर्व सहायक कमांडेंट विकास जाखड़ के रूप में हुई है। विकास जाखड़ को अपनी सेवा के दौरान शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था। हालाँकि, कहा जाता है कि उन्होंने साल 2021 में उन्होंने अपनी सेवा से इस्तीफा दे दिया था। इस घटना को भाजपा नेताओं ने भी उठाया है।

राजस्थान भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने इस घटना का वीडियो शेयर करते हुए कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी पर हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “कॉन्ग्रेस विधायक रफीक खान के साथ मारपीट का कोई समर्थन नहीं करता, पर एक शौर्य चक्र विजेता को कॉन्ग्रेस के गुंडों द्वारा इस तरीक़े से मारना कहाँ तक उचित है राहुल गाँधी?”

रफीक खान जयपुर के आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र से दो बार कॉन्ग्रेस विधायक रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जाखड़ ने उनकी छाती पर मुक्का मारा और उनका दम घोंटने की कोशिश की। खान ने कहा, “जब मैं अपनी कार में बैठने वाला था तो उसने मुझ पर अचानक हमला कर दिया। मैंने खुद को बचाने के लिए उसके दोनों हाथ पकड़ लिए, जिसके बाद मेरे समर्थक और वहाँ मौजूद लोग उसे वहाँ से ले गए।”

विधायक रफीक खान ने आगे कहा, “मुझे इस व्यक्ति या उसकी पृष्ठभूमि और उसके इरादे के बारे में कोई जानकारी नहीं है, लेकिन केवल आपराधिक मानसिकता वाला व्यक्ति ही ऐसा कृत्य कर सकता है।” बता दें कि रफीक खान ने साल 2023 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के रवि नैयर को 14,073 मतों के अंतर से हराया था।

अधिकारियों के अनुसार, झुंझुनू जिले के 39 वर्षीय विकास जाखड़ ने शिकायत की थी कि रफीक खान उनकी पत्नी को परेशान कर रहे थे। विकास जाखड़ की पत्नी एक सरकारी स्वास्थ्य कर्मचारी है और विधायक ने उनकी पत्नी को परेशान किया था और उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया। इसलिए गुस्से में उन्होंने ऐसा किया। पुलिस ने उन्हें शांति भंग के आरोप में हिरासत में लिया था।

शौहर कमाने जाता सऊदी अरब तो बीवी प्रेमी संग उड़ाती गुलछर्रे: नाजनीन खातून ने रोहित को गहने और ₹3 लाख देकर आफताब की करा दी हत्या​, दोनों गिरफ्तार

बिहार के मोतिहारी में एक शादीशुदा महिला ने अपने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर अपने शौहर की हत्या करा दी। महिला का नाम नाजनीन खातून है। उसका शौहर आफताब आलम सऊदी अरब में रहकर नौकरी करता था। वह हाल ही में अपने गाँव आया था। इसी बीच उसकी बीवी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर उसकी हत्या करा दी। नाजनीन बाल-बच्चेदार औरत है।

बिहार पुलिस ने बताया कि सिकरहना में 35 साल के आफताब आलम की हत्या में उसकी बीवी नाजनीन खातून खुद शामिल थी। पुलिस का कहना है कि यह हत्या उसने प्रेम प्रसंग में कराई है। इसके लिए उसने अपने प्रेमी को कुछ गहने और रुपए भी उसने दिए थे। इस पूरे मामले में पुलिस ने आफताब की बीवी एवं तीन बच्चों की अम्मी नाजनीन को गिरफ्तार कर लिया है।

दरअसल, 4 अगस्त 2024 को आफताब आलम की हत्या को अंजाम दिया गया था। उसका शव घोड़ासहन थाना क्षेत्र के बगहा गाँव में मिला था। महिला का प्रेमी रोहित स्कॉर्पियो से घूमने के बहाने आफताब को लेकर गया था। इसके बाद उसने उसकी हत्या कर दी थी। शव देखने से पता चल रहा था कि चाकू से गोदकर और ईंट-पत्थर से कूचकर उसकी हत्या की गई है। 

बताया जाता है कि जब आफताब आलम विदेश में रहता था, उसी दौरान उसकी बीवी नाजनीन का रोहित नाम के लड़के से प्रेम-प्रसंग शुरू हो गया। करीब तीन साल पहले दोनों के बीच प्रेम प्रसंग एक मिस्ड कॉल से शुरू हुआ था। शौहर के विदेश रहने पर नाजनीन ससुराल में ना रहकर अपने मायके रहती थी। यहाँ पर वह अपने प्रेमी से खूब मिला करती थी। दोनों शादी करने की योजना भी बना रहे थे।

इस बीच आफताब आलम घर आ गया। दोनों को लगा था कि हर बार की तरह आफताब इस बार भी जल्दी विदेश चला जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब दोनों को लगा कि आफताब जल्दी विदेश जाने वाला नहीं है तो उसने यह बात अपने प्रेमी को बताई। उसने प्रेमी रोहित से अपने शौहर की हत्या करने। के लिए कहा। इसके लिए नाजनीन ने रोहित को गहने और करीब तीन लाख रुपए भी दिए थे।

अपने प्रेमी को अपने गहने और रुपए देते हुए नाजनीन ने उससे कहा था कि इसे बेचकर शूटर हायर कर लेना और उससे आफताब की हत्या करवा देना। आफताब आलम और नाजनीन की करीब 10 साल पहले निकाह हुआ था और उनके तीन बच्चे भी हैं। हत्या के बाद नाजनीन अपने प्रेमी रोहित से शादी करके नेपाल चले जाने और वहीं जीवन-यापन करने की योजना बनाई थी।

रोहित ने पूरी योजना के तहत 4 अगस्त की शाम को अपने दोस्तों के साथ मिलकर आफताब को घुमाने के बहाने स्कॉर्पियो में बैठा कर ले गया। घोड़ासहन थाना क्षेत्र के बगहा बैंक टोला के पास चाकू से गोदकर और ईंट पत्थर से कुचलकर आफताब की हत्या कर दी। इससे पहले की रोहित वहाँ से भाग पाता, वहाँ जुटी भीड़ ने उसे पकड़ लिया और पिटाई करने के बाद पुलिस के हवाले कर दिया।

घटना के बाद SP ने जाँच के लिए SIT की टीम का गठन किया था। पुलिस को पता चला कि रोहित का नाजनीन के साथ अवैध संबंध था और इसलिए हत्या की गई है। खुलासे के बाद पुलिस ने नाजनीन को शेखौना स्थित उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। वहीं, घोड़ासहन बाजार निवासी उसके प्रेमी रोहित को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस ने रोहित के स्कॉर्पियो को भी जब्त कर लिया है।

‘सिखों को मारो, इन्होंने हमारी माँ को मार डाला’: इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद भीड़ को उकसा रहा था कॉन्ग्रेस नेता जगदीश टाइटलर, 40 साल बाद चलेगा मुकदमा

1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में कॉन्ग्रेस नेता जगदीश टाइटलर पर हत्या और दंगे भड़काने समेत कई मामलों में मुकदमा चलेगा। दिल्ली की एक अदालत ने टाइटलर के विरुद्ध आरोप तय करनेके आदेश दिए हैं। जगदीश टाइटलर के खिलाफ कार्यवाही चलाने का कोर्ट को पर्याप्त आधार मिला है।

दिल्ली के राउज अवेन्यु कोर्ट ने शुक्रवार (30 अगस्त, 2024) को सिख दंगा मामले में अपना आदेश सुनाया। कोर्ट ने अपना आदेश सुनाते हुए कहा कि टाइटलर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की अलग-अलग धाराओं के अंतर्गत हत्या, दंगा भड़काने समेत अन्य कई आरोपों पर मामला चलाने के लिए पर्याप्त आधार हैं।

कोर्ट ने टाइटलर के खिलाफ दंगा, समुदायों में दुश्मनी बढ़ाना, पूजास्थल को नुकसान पहुँचना,और हत्या समेत अन्य मामलों में पर्याप्त आधार पाया गया हैऔर मामले को आगे बढ़ाने के आदेश दिए हैं। टाइटलर के खिलाफ सितम्बर, 2024 में आरोप तय होने पर सुनवाई होगी।

जगदीश टाइटलर के खिलाफ यह मामला तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद दिल्ली के एक इलाके में लोगों को भड़काने के लिए चल रहा है। इस मामले में CBI ने मई, 2023 में चार्जशीट दाखिल की थी। CBI ने टाइटलर पर गंभीर आरोप लगाए थे।

इस चार्जशीट में गवाहों के हवाले से कहा गया था कि टाइटलर ने भीड़ को उकसाया था और दंगों का नेतृत्व किया था। इस चार्जशीट में दिए गए एक गवाह के बयान में कहा गया ”जगदीश टाइटलर ने भीड़ से पहले सिखों को मारने और फिर उनकी दुकानें एवं कीमती सामान लूटने के लिए कहा”

चार्जशीट में यह भी कहा गया था कि जगदीश टाइटलर ने दंगाइयों को आश्वासन दिया कि उनके खिलाफ कोई भी कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र में हुई हत्याओं की तुलना दूसरी जगहों से की और अपने फॉलोअरों से अधिक-से-अधिक सिखों पर हमला करने के लिए कहा।

चार्जशीट में दर्ज एक प्रत्यक्षदर्शी के बयान में कहा गया है कि कॉन्ग्रेस नेता जगदीश टाइटलर अपनी सफेद एम्बेसडर कार से बाहर निकले और भीड़ को उकसाना शुरू कर दिया और दंगाइयों से दुकानें लूटने के लिए कहा। गवाहों ने बताया कि उन्होंने अपनी गाड़ी से उतर कर कहा, “सिखों को मारो, इन्होने हमारी माँ को मार दिया।”

इसी चार्जशीट में एक और गवाह का जिक्र किया गया है। गवाह के बयान में कहा गया है कि तत्कालीन सांसद टाइटलर ने दिल्ली के आज़ाद मार्केट में गुरुद्वारा पुल बंगश पर हमले को भी उकसाया था। इसके परिणामस्वरूप भीड़ ने गुरुद्वारा पुल बंगश को आग लगा दी और 1 नवंबर 1984 को सिख समुदाय के तीन लोगों की हत्या कर दी।

असम में जुम्मे की नमाज पढ़ने के लिए मिलने वाला 2 घंटे का ब्रेक खत्म: हिमंता सरकार का फैसला, CM सरमा ने कहा- यह नियम मुस्लिम लीग की सोच थी

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार (30 अगस्त 2024) को यानी जुम्‍मे के दिन एक महत्वपूर्ण फैसला लिया। उन्होंने असम में जुम्‍मे की नमाज के लिए दिए जाने वाले दो घंटे के ब्रेक को खत्‍म कर दिया है। सीएम सरमा ने कहा कि इस तरह का नियम बनाना मुस्लिम लीग की सोच थी और अब इसे खत्म कर दिया गया है।

इसकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर भी शेयर की। एक्‍स पर पोस्‍ट में उन्होंने लिखा, “2 घंटे के जुम्मा ब्रेक को खत्म करके असम विधानसभा ने उत्पादकता को प्राथमिकता दी है और औपनिवेशिक बोझ के एक और निशान को हटा दिया है। यह प्रथा मुस्लिम लीग के सैयद सादुल्ला ने 1937 में शुरू की थी।” उन्होंने स्पीकर बिस्वजीत दैमारी और विधायकों का आभार व्यक्त किया।

आधिकारिक आदेश में कहा गया है, “असम विधानसभा के निर्माण के बाद से मुस्लिम सदस्यों को नमाज के लिए जाने की सुविधा देने के लिए शुक्रवार को विधानसभा की बैठक सुबह 11 बजे स्थगित कर दी जाती थी। विधानसभा दोपहर के भोजन के बाद अपनी कार्यवाही फिर से शुरू करती थी। मुस्लिम सदस्यों के नमाज़ से वापस आने के बाद सत्र आयोजित किया जाता था।”

इस तरह अब असम में विधायकों को नमाज के लिए मिलने वाला दो घंटे का ब्रेक अब नहीं मिलेगा। भाजपा विधायक बिस्वजीत फुकन ने कहा कि ब्रिटिश काल से असम विधानसभा में नमाज पढ़ने के लिए हर शुक्रवार को दो घंटे का ब्रेक मिलता था। यह ब्रेक 12 बजे से लेकर 2 बजे तक का होता था। अब यह नियम बदल गया है।

विधायक फुकन ने कहा, यह स्पीकर के साथ बैठक में फैसला लिया गया। इस फैसले का सभी विधायकों ने स्वागत किया। यह फैसला लिया गया कि जब लोकसभा, राज्यसभा या देश के किसी भी राज्य के सदन में जुम्मे का ब्रेक नहीं है तो यहाँ क्यों है। उन्होंने कहा कि इसके बाद स्पीकर ने तय किया कि यह परंपरा बदली जाए।

बता दें कि इससे पहले असम विधानसभा में गुरुवार (29 अगस्त) को मुस्लिमों के विवाह और तलाक के पंजीकरण के कानून को निरस्त करने के लिए एक बिल पास किया गया। राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री जोगेन मोहन ने असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम 1935 को खत्म करने के लिए 22 अगस्त को असम निरसन विधेयक 2024 को पहली बार पेश किया था।

इस बिल पर राज्य के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा था, “हमारा उद्देश्य केवल बाल विवाह को खत्म करना नहीं है। हमारा उद्देश्य काजी प्रथा को भी खत्म करना है। हम मुस्लिम विवाह और तलाक के पंजीकरण को सरकारी प्रणाली के तहत लाना चाहते हैं।” उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सभी शादियों का रजिस्ट्रेशन किया जाना है.

CM सुक्खू साहब, सिर्फ आपके तनख्वाह छोड़ने से नहीं सुधरेगी हिमाचल की माली हालत, खटाखट वाली राजनीति भी छोड़ दीजिए: जानें कैसे बने हैं बदतर हालात

हिमाचल प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार के मुखिया सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ऐलान किया है कि वह अगले 2 माह तक अपनी तनख्वाह नहीं लेंगे। उनके साथ हिमाचल सरकार के अन्य मंत्री और मुख्य संसदीय सचिव ने भी अगले दो महीने तनख्वाह-भत्ते ना लेने का निर्णय लिया है। CM सुक्खू का कहना है कि यह निर्णय उन्होंने हिमाचल प्रदेश के आर्थिक संकट को देखते हुए किया है। हालाँकि, जिस आर्थिक संकट से निकलने की बात CM सुक्खू कर रहे हैं, वो राज्य पर लेकर भी कॉन्ग्रेस की खटाखट राजनीति आई है।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने गुरुवार (29 अगस्त, 2029) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “मंत्रिमंडल में चर्चा करने के बाद सभी सदस्यों ने फैसला किया है अगले 2 महीने तक वह ना तनख्वाह लेंगे, ना ही DA लेंगे और ना ही TA लेंगे। यही अनुरोध CPS साथियों ने भी मान लिया है। उन्होंने भी अगले दो महीने तक कोई भी तनख्वाह और TA-DA ना लेने का निर्णय किया है। यह छोटी धनराशि है, लेकिन इसका महत्व बड़ा है। मैंने सभी विधायकों से भी यही अनुरोध किया है।”

राजनीतिक स्टंट है तनख्वाह छोड़ने का ऐलान

CM सुक्खू ने इसके बाद बताया कि उन्होंने सुधरती अर्थव्यस्था को और आगे बढ़ाने के लिए यह निर्णय लिया है ताकि इस प्रक्रिया में कोई बाधा ना पड़े। दरअसल, हिमाचल प्रदेश इस वक्त बड़ी आर्थिक समस्या में फंसा हुआ है। दो साल पहले सत्ता में आई कॉन्ग्रेस सरकार लगातार उधार पर उधार लेती जा रही है। इससे भी कोई उपाय नहीं निकल रहा है। हिमाचल सरकार की हालत इतनी खराब हो गई है कि राज्य के सरकारी कर्मचारियों का पैसा भी रुक रहा है।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री इस मर्ज का इलाज तनख्वाह छोड़ने से कर रहे हैं। हालाँकि, इससे आर्थिक समस्या में कोई बदलाव तो नहीं पड़ेगा। हाँ, कुछ अखबारों में मुख्यमंत्री सह्रदयता की हेडलाइन जरूर छप जाएँगी। दरअसल, यह मर्ज इस बात की है ही नहीं कि कौन अपनी तनख्वाह ले या ना ले। बल्कि असल मुद्दा है उनकी पार्टी की खटाखट राजनीति। हिमाचल प्रदेश में कॉन्ग्रेस सरकार बड़े-बड़े वादे करके सत्ता में आई थी। चाहे वह मुफ्त बिजली हो या फिर 18 से 60 वर्ष की महिलाओं को हर महीने ₹1500 देने का वादा हो।

इसके अलावा उन्होंने राज्य कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का वादा भी कर दिया था। अब यही सब दाँव उलटे पड़ रहे हैं। हिमाचल प्रदेश एक छोटा राज्य है, इसके आय के साधन सीमित हैं। इसका खर्चा अपनी आय और केंद्र से मिलने वाली सहायता से पूरा होता है। बाकी की कमी कर्ज लेकर पूरी की जाती है। इन सब के बीच राज्य का कर्ज इतना बढ़ गया है कि उसको चुकाने के लिए नए कर्ज लेने पड़ रहे हैं। हिमाचल की आर्थिक स्थिति को आँकड़ों से समझा जाना चाहिए।

आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया की है स्थिति

हिमाचल की बदहाल आर्थिक स्थिति इसके 2024-25 के बजट से समझी जा सकती है। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए ₹58,444 करोड़ का बजट सुक्खू सरकार ने पेश किया था। इस बजट में भी सरकार का राजकोषीय घाटा (सरकार की आय और खर्चे के बीच का अंतर, जिसे कर्ज लेकर पूरा किया जाता है) ₹10,784 करोड़ है।

इस बजट का बड़ा हिस्सा तो केवल पुराने कर्जा चुकाने और राज्य के कर्मचारियों की पेंशन और तनख्वाह देने में ही चला जाएगा। इस बजट में से ₹5479 करोड़ का खर्च पुराने कर्ज चुकाने, ₹6270 करोड़ का खर्च पुराने कर्ज का ब्याज देने में करेगी। यानी पुराने कर्जों के ही चक्कर बजट का लगभग 20% हिस्सा चला जाएगा।

इसके अलावा सुक्खू सरकार तनख्वाह और पेंशन पर ₹27,208 करोड़ खर्च करेगी। इस हिसाब से देखा जाए तो ₹38,957 का खर्च तो केवल कर्ज, ब्याज, तनख्वाह और पेंशन पर ही हो आएगा। यह कुल बजट का लगभग 66% है। अगर नए कर्ज को हटा दें तो यह हिमाचल के कुल बजट का 80% तक पहुँच जाता है। यानी राज्य को बाकी खर्चे करने की स्वतंत्रता ही नहीं है।

हिमाचल प्रदेश 2024-25 में लगभग ₹1200 करोड़ सब्सिडी पर भी खर्च करने वाला है। यह धनराशि सामान्य तौर पर छोटी लग सकती है, लेकिन आर्थिक संकट में फंसे हिमाचल के लिए यह भी भारी पड़ रही है। इस सब्सिडी में सबसे बड़ा खर्चा बिजली सब्सिडी का है।

क्यों बन गए आर्थिक संकट के हालात

हिमाचल प्रदेश में आर्थिक संकट की इस स्थिति के पीछे कई कारण हैं। इसका एक बड़ा कारण सुक्खू सरकार का आय के नए स्रोतों पर ध्यान ना देना भी हो सकता है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश ने अपने चुनावी वादे के अनुसार पुरानी पेंशन स्कीम लागू कर दी थी। इस कारण से उसको मिलने वाली मदद में भी कमी आई है।

स्थिति यहाँ तक पहुँच गई है कि हिमाचल सरकार NPS में डाला गया कर्मचारियों का पैसा भी वापस माँग रही है। इसके अलावा वह बिगड़े आर्थिक हालातों के बीच राज्य की महिलाओं को भी ₹1500 दे रही है। यह भी उसके बजट पर असर डाल रहा है। हिमाचल सरकार 125 यूनिट बिजली भी मुफ्त देती है, यह भी राज्य पर एक बोझ बन रहा है।

आगे भी नहीं सुधरेगी स्थिति

राज्य सरकार ने हाल ही में बताया है कि वर्ष 2030-31 तक उसका पेंशन पर होने वाला खर्च ₹19,728 करोड़ हो जाएगा। यह वर्तमान में लगभग ₹10,000 करोड़ से भी कम है। वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच कुल ₹90,000 करोड़ का खर्चा हिमाचल प्रदेश को पेंशन पर ही करना पड़ेगा।

कॉन्ग्रेस के OPS के वादे से राज्य के अन्य विकास कार्यों के बजट में कटौती होने की आशंका है। ऐसा इसलिए है क्योंकि राज्य के बजट में पहले पेंशन का हिस्सा मात्र 13% था जो कि OPS के बाद बढ़कर 17% हो जाएगा। पुरानी पेंशन के कारण होने वाला यह खर्च राज्य सरकार के कर्मचारियों को दी जाने वाली तनख्वाह पर खर्च के लगभग बराबर होगा।

2026-27 में राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को ₹20,639 करोड़ तनख्वाह देगी। 2026-27 में दी जाने वाली पेंशन की धनराशि ₹16,728 करोड़ होगी। राज्य में पेंशन पाने वालों की संख्या भी आने वाले सालों में नौकरी कर रहे कर्मचारियों से ज्यादा हो जाने के कयास हैं।

यह भी बात सामने आई है कि 2030-31 तक राज्य में 2.38 लाख पेंशनर हो जाएँगे। यह संख्या आने वाले समय में राज्य कर्मचारियों से भी अधिक होगी क्योंकि औसतन हर वर्ष 10,000 कर्मचारी रिटायर हो रहे हैं। इसकी तुलना में नए कर्मचारी भर्ती नहीं हो रहे।

हिमाचल प्रदेश को 2026-27 से 2030-31 बीच तनख्वाह और पेंशन पर कुल मिलाकर ₹2.11 लाख करोड़ खर्चने पड़ेंगे। राज्य सरकार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह अनुमान लगाया गया है कि वह इस बोझ को अकेले सहन नहीं कर पाएगी। इसके लिए उसे विशेष मदद की जरूरत होगी।

कॉन्ग्रेस ने 2022 के हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में जोर-शोर से पुरानी पेंशन स्कीम का वादा किया था और इसे राजनीतिक हथियार बनाया था। हालाँकि, अब इसके दुष्परिणाम सामने दिखने लगे हैं। आर्थिक बोझ के कारण राज्य की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है।

कर्ज का बढ़ रहा है बोझ

कॉन्ग्रेस सरकार का धुआंधार तरीके से कर्ज लेने का मुद्दा इस बीच जोर पकड़ रहा है। हिमाचल प्रदेश पर वर्तमान में ₹88,000 करोड़ से भी अधिक का कर्ज है। कॉन्ग्रेस सरकार बीते डेढ़ वर्ष में ही लगभग ₹19,000 करोड़ का कर्ज राज्य पर चढ़ाया है। लोकसभा में दिया गया जवाब बताता है वित्त वर्ष 2024-25 खत्म होते-होते राज्य का कर्ज ₹94000 करोड़ के पार हो जाएगा।

राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने खुद माना है कि उनके राज्य को कर्ज चुकाने के लिए ही नया कर्ज लेना पड़ रहा है। राज्य का कर्ज उसकी GDP का 40% से अधिक हो चुका है। उसका राजकोषीय घाटा भी GDP का लगभग 5% है। जबकि नियमों के मुताबिक़, किसी भी राज्य का कर्ज GDP का 20% जबकि राजकोषीय घाटा 3% से अधिक नहीं होना चाहिए।

राज्य की सत्ता में रेवड़ी वादे करके आई कॉन्ग्रेस अब राजनीतिक स्टंट में जुटी है। कॉन्ग्रेस शासित अन्य राज्यों का भी हाल कोई ख़ास अच्छा नहीं है। कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार भी दलितों के विकास के फंड में से अपनी गारंटियाँ पूरी करने में जुटी हुई हैं। यह राजनीति राज्यों के लिए घातक तो है ही, देश के आर्थिक विकास में भी रोड़े डालने वाली है।

‘पाकिस्तान से बातचीत का दौर खत्म हो चुका है’: जयशंकर का सख्त रूख, कहा- रिश्ते सुधारने के लिए भारत आतंकवाद को नजरअंदाज नहीं कर सकता

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि पाकिस्तान से बातचीत का दौर खत्म हो चुका है। उसके साथ रिश्तों की कल्पना नहीं की जा सकती। जयशंकर ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का हवाला देते हुए कहा कि ‘कार्रवाई के परिणाम होते हैं’। उन्होंने भारत के इस रूख को दृढ़ता के साथ रखा कि आतंकवाद और वार्ता एक साथ नहीं चल सकते।

शुक्रवार (30 अगस्त 2024) को दिल्ली में एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, “पाकिस्तान के साथ लगातार होने वाली बातचीत का युग समाप्त हो चुका है। जहाँ तक ​​जम्मू-कश्मीर का सवाल है तो अनुच्छेद 370 समाप्त हो चुका है। इसलिए, मुद्दा यह है कि हम पाकिस्तान के साथ किस तरह के रिश्ते पर विचार कर सकते हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले पर कोई समझौता नहीं होगा।

विदेश मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि पाकिस्तान के साथ अपने व्यवहार में भारत निष्क्रिय नहीं रहेगा। उन्होंने कहा, “मैं यह कहना चाहता हूँ कि हम निष्क्रिय नहीं हैं। घटनाएँ चाहे सकारात्मक दिशा में हों या नकारात्मक दिशा में, हम निश्चित तौर पर प्रतिक्रिया देंगे।” विदेश मंत्री का यह बयान भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव को दिखाता है।

उन्होंने कहा, “हमने अतीत में पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए कई प्रयास किए, लेकिन आतंकवाद के मुद्दे पर उनकी दोहरी नीति के कारण यह संभव नहीं हो सका। अब समय आ गया है कि पाकिस्तान समझे कि बातचीत के लिए उसे आतंकवाद को पूरी तरह से खत्म करना होगा।” उन्होंने कहा कि आतंकवाद के साथ बातचीत संभव नहीं है।

जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान की मुख्य रणनीति भारत को बातचीत के लिए लाने के लिए सीमा पार आतंकवाद का उपयोग करना रही है। हालाँकि, भारत ने उन शर्तों पर बातचीत करने से इनकार करके उस नीति को अप्रभावी बना दिया है, जिन शर्तों पर पाकिस्तान बातचीत करना चाहता था। पाकिस्तान को अपनी नीति पर पुनर्विचार करना होगा, यदि वह भारत के साथ बातचीत करना चाहता है।

इससे पहले जयशंकर ने कहा था कि केंद्र सरकार पाकिस्तान के साथ संबंधों को सुधारने के प्रयास में आतंकवाद को नजरअंदाज नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में आतंकवाद लगभग ‘उद्योग स्तर’ का मुद्दा बन गया है और भारत का वर्तमान मूड ऐसे खतरों को बर्दाश्त करने का नहीं है।

वहीं, बांग्लादेश के मुद्दे पर जयशंकर ने कहा, “यह स्वाभाविक है कि हम मौजूदा सरकार से बात करेंगे। हमें यह स्वीकार करना होगा कि वहाँ राजनीतिक बदलाव हुए हैं और वे खतरनाक हो सकते हैं। जाहिर है, यहाँ हमें एक दूसरे के हितों की पारस्परिकता पर ध्यान देना होगा।”

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया के हर देश के लिए उसका पड़ोसी एक समस्या है। पूरी दुनिया को अगर ध्यान से देखा जाए तो ऐसा कोई देश नहीं है, जिसकी अपने पड़ोसी के साथ समस्याएँ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हर देश की उसके पड़ोसी के साथ कुछ न कुछ समस्याएँ जरूर सामने आएँगी।
 

छत्रपति शिवाजी हमारे लिए अराध्य देव, प्रतिमा गिरने पर सिर झुकाकर माफी माँगता हूँ: पालघर में बोले मोदी, वधावन बंदरगाह की रखी आधारशिला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले के राजकोट किले में स्थापित छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा गिरने पर माफी माँगी है। पीएम मोदी महाराष्ट्र दौरे पर हैं। जहाँ वो पहले मुंबई और फिर पालघर गए। पीएम मोदी ने मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान माफी माँगते हुए कहा, ‘मैं इस घटना पर सिर झुका कर माफी माँगता हूँ। हमारे लिए शिवाजी आराध्य देव हैं।”

पालघर में पीएम मोदी ने कहा, “2013 में बीजेपी ने मुझे पीएम उम्मीदवार बनाया था। सबसे पहले मैंने रायगढ़ में छत्रपति शिवाजी महाराज की समाधि के सामने एक भक्त के तौर पर बैठकर एक नई यात्रा शुरू की।”

पीएम मोदी ने कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज हमारे लिए सिर्फ एक नाम नहीं हैं…आज मैं सिर झुकाकर अपने भगवान छत्रपति शिवाजी महाराज से माफी माँगता हूँ। हमारे मूल्य अलग हैं, हम वो लोग नहीं हैं जो भारत माता के महान सपूत, इस भूमि के सपूत वीर सावरकर को गाली देते रहें और उनका अपमान करते रहें। वे माफी माँगने के लिए तैयार नहीं हैं, वे अदालत में जाकर लड़ने के लिए तैयार हैं।”

मुंबई के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पालघर पहुँचे। पीएम मोदी ने यहाँ 76,000 करोड़ रुपये की वधावन बंदरगाह की आधारशिला रखी। उन्होंने लगभग 1,560 करोड़ रुपये की 218 मत्स्य पालन परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया।

बता दें कि 26 अगस्त को 35 फीट ऊंची छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा ढह गई थी। इसके बाद बाद राज्य में इसे लेकर सियासत तेज हो गई थी। इस मामले में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार सिंधुदुर्ग ज़िले के राजकोट किला पहुँच कर हालात का जायज़ा लिया था। उन्होंने 2 दिन पहले एक जनसभा के दौरान माफी माँगी थी। वहीं, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी इस मामले में माफी माँग चुके हैं।

शुक्रवार (30 अगस्त 2024) को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने दौरे की तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा था, “जो कुछ भी हुआ, उससे हर कोई दुखी है। छत्रपति शिवाजी महाराज हमारे देवता हैं और उनके इतिहास पर हर किसी को गर्व है। इस बारे में मुख्यमंत्री ने मीटिंग की है। एक स्मारक बनाए जाने की कोशिशें हो रही हैं। दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी। वे कहीं भी जाएँ, उन्हें पकड़ा जाएगा।”

कंसल्टेंट की हो चुकी है गिरफ्तारी

महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा गिरने के मामले में शुक्रवार (30 अगस्त 2024) को पहली गिरफ्तारी हुई है। कोल्हापुर से स्ट्रक्चरल कंसल्टेंट को गिरफ्तार किया गया है। कोल्हापुर क्राइम ब्रांच ने सिंधुदुर्ग केस में शुक्रवार तड़के तीन बजे के आसपास स्ट्रक्चरल कंसल्टेंट चेतन पाटिल को गिरफ्तार किया।

गौरतलब है कि सिंधुदुर्ग में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का अनावरण 4 दिसंबर, 2023 को किया गया था, जब सिंधुदुर्ग में पहली बार नौसेना दिवस समारोह का आयोजन किया गया था। प्रतिमा का मकसद मराठा नौसेना की विरासत और छत्रपति शिवाजी महाराज के समुद्री रक्षा और सुरक्षा में योगदान के साथ-साथ आधुनिक भारतीय नौसेना के साथ इसके ऐतिहासिक संबंध का सम्मान करना था। इस प्रोजेक्ट का कॉन्सेप्ट और नेतृत्व इंडियन नेवी ने राज्य सरकार के सहयोग से किया था।

15 साल की लड़की को परेशान कर रहा था कलाम मंसूरी, जहर खाकर दे दी जान: नासिक की घटना, परिजनों से भी दिलवाता था धमकी-10 पर केस

महाराष्ट्र की नासिक पुलिस ने 29 अगस्त 2024 को 15 साल की नाबालिग लड़की के आत्महत्या के केस में 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पीड़ित लड़की को 22 साल का कलाम इजहार मंसूरी नाम का मुस्लिम युवक लगातार परेशान करता था। उसके धमकाने से परेशान होकर लड़की ने जान दे दी। रिपोर्ट के मुताबिक, कलाम इजहार मंसूरी के परिवार के लोगों ने भी लड़की को धमकाया था, जिसके बाद उसने जहर खाकर 23 अगस्त को अपनी जान दे दी।

ऑपइंडिया के पास घटना की एफआईआर कॉपी मौजूद है। लड़की के माता-पिता की शिकायत के आधार पर मामले में दर्ज अन्य आरोपितों में नाना खाला (कलाम की माँ), जहाँगीर शेख, बबलू शेख, मुन्ना शेख, लादेन मंसूरी, समीर बबलू शेख, नड्डा मंसूरी शेख, अंजुम सैय्यद और साहिल सैय्यद शामिल हैं। आरोपितों पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 107, 351 (2), 3 (5) और 78 तथा POCSO अधिनियम, 2012 की धारा 12 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

एफआईआर के मुताबिक, पीड़ित लड़की को मुख्य आरोपित कलाम वर्ष 2022 से परेशान कर रहा था। उस समय लड़की स्कूल में पढ़ती थी। आरोपित लड़की के घर से स्कूल आने-जाने का रास्ता रोकता था और कहता था कि वह उसे पसंद करता है। कई बार उसने लड़की को बात करने के लिए मजबूर किया और बातचीत के लिए उसका फोन नंबर भी ले लिया। हालाँकि इस बात की शिकायत लड़की ने अपने घर पर की थी, जिसके बाद परिजनों ने बच्ची का ख्याल रखना शुरू कर दिया। उन्होंने आरोपित कलाम के परिजनों से भी उसकी शिकायत की थी और चेतावनी भी दी थी कि वो बच्ची को परेशान न करे। हालाँकि आरोपित ने पीड़िता का पीछा करना और उसे परेशान करना जारी रखा।

कलाम की वजह से परेशान लड़की ने घर से ही 10वीं की बोर्ड परीक्षा दी थी। इसके बाद लड़की को नासिक में 11वीं कक्षा में दाखिला मिल गया था। 23 अगस्त को वो अपने घर से दोपहर के समय निकली थी, लेकिन घर नहीं लौटी। एक घंटे बाद बच्ची की माँ को कॉल आया, जिसमें पता चला कि बच्ची पुलस के पास बेहोश मिली है। ये कॉल आरोपित अंजुम और साहिल सैय्यद ने की थी। दोनों ने बच्ची की माँ से तुरंत अस्पताल पहुँचने के लिए कहा, लेकिन जब तक वो अस्पताल पहुँची, तब तक दोनों लड़के भाग चुके थे।

एफआईआर की कॉपी

एफआईआर के मुताबिक, लड़की ने अपनी माँ से कहा था कि उसे डर लग रहा है। पीड़ित की माँग ने बताया, “डॉक्टरों ने जाँच के बाद दवा दी थी, लेकिन वापस लौटते समय उसे उल्टी होने लगी और उसकी मौत हो गई। उसने बताया कि कलाम और उसका परिवार उसे परेशान कर रहा था। शादी के लिए मजबूर करता था। उसकी माँ भी लड़की को धमकाती थी। लड़की ने ही जहाँगीर, बबलू, मुन्ना, लादेन, समीर और नड्डा के नाम भी बताए जो उसे कलाम से शादी करने के लिए मजबूर करते थे।”

लड़की की 23 अगस्त को ही मौत हो गई थी। हालाँकि 25 अगस्त को अंजुम सैय्यद के घर के पास लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज सामने आई। जिसमें अंजुम और साहिल लड़की को स्कूटी पर लेकर जाते दिख रहे हैं। जबकि उन्होंने दावा किया था कि उन्हें लड़की पुल के पास सड़क पर बेहोश मिली थी, जिसके बाद वे उसे अस्पताल ले गए। शक के आधार पर लड़की के माता-पिता ने दोनों पर मामला भी दर्ज कराया है।

ऑपइंडिया को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के अनुसार, लड़की के माता-पिता का मानना ​​है कि लड़की को आरोपी और उसके रिश्तेदारों ने जहर दिया है और फिर साहिल और अंजुम सैय्यद ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया। सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि दोनों आरोपित उसे बाइक पर ले जा रहे हैं। ऑपइंडिया के पास एफआईआर कॉपी के साथ ही सीसीटीवी फुटेज भी है। हालाँकि पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फोन पर कुछ भी जानकारी देने से मना कर दिया।

10 दिन पहले एक नाबालिग लड़की ने कर ली थी आत्महत्या, यासीन कर रहा था परेशान

बता दें कि महाराष्ट्र में 10 दिनों के भीतर इस तरह का यह दूसरा मामला है। 18 अगस्त 2024 को 16 वर्षीय लड़की ने कासिम यासीन पठान नाम के आरोपित से 8 माह तक उत्पीड़ना झेलने के बाद आत्महत्या कर ली थी। लड़की ने महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले के अहेर गाँव में एक कुएँ में कूदकर अपनी जान दे दी थी।

पीड़ित नाबालिग 11वीं में साइंस स्ट्रीम से पढ़ती थी, जबकि आरोपित स्थानीय गैराज में मैकेनिक का काम करता था। लड़की शहर में रह रही थी क्योंकि उसे पढ़ाई के लिए एक निजी कोचिंग सेंटर में दाखिला मिला था। हालाँकि वो रक्षाबंधन के त्योहार के लिए अपने गाँव गई थी।

जानकारी के मुताबिक, आरोपित लड़की को पसंद करता था और उसे अपने प्रेम प्रस्ताव स्वीकार करने के लिए मजबूर करता था। पिछले आठ महीनों में उसने लड़की को धमकाया था कि वो उसका प्रस्ताव मान ले, वर्ना वो उसके भाई की हत्या कर देगा। लड़की ने बचने की बहुत कोशिश की, लेकिन परेशान होकर उसने जान दे दी। अगर वो उसके प्रेम प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेगी, तो वो उसके भाई को मार देगा। लड़की ने आरोपी से बचने के लिए हर संभव कोशिश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। परिजनों ने आरोपित को सख्त सजा देने की माँग की है।

जिस देश में हर 5वें दिन बन रहा एक अरबपति, उस देश के सबसे कम उम्र के अमीर को जानते हैं आप: हुरुन लिस्ट में बीजिंग पीछे, मुंबई नंबर 1

‘हुरुन इंडिया’ ने भारत के अमीर हस्तियों की नई लिस्ट जारी की है। लिस्ट में वैसे तो गौतम अडानी, मुकेश अंबानी समेत 300 से अधिक अरबपति भारतीयों के नाम शामिल हैं, लेकिन जो सबसे ज्यादा गौर करने वाला नाम इस लिस्ट में है वो एक 21 साल के उद्यमी का है- Zepto के संस्थापक कैवल्य वोहरा। रिपोर्ट के मुताबिक 21 वर्षीय कैवल्य की कुल संपत्ति तकरीबन 3600 करोड़ रुपए की है। वहीं दूसरे नंबर के कम उम्र वाले युवा उन्हीं के साथी आदित पालिचा हैं। पालिचा के पास 4300 करोड़ रुपए की संपत्ति है।

दोनों दोस्तों ने कोविड महामारी के दौरान आवश्यक वस्तुओं की जल्द और संपर्क रहित डिलीवरी की बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए 2021 में Zepto की शुरुआत की। इसके बाद मात्र 19 साल की उम्र से कैवल्य वोहरा ने वेल्थ-हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2022 में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, तब से हर साल वह इस सूची में शामिल होते रहे हैं।

कैवल्य के बारे में मौजूदा जानकारी बताती है कि उन्होंने दुबाई कॉलेज से स्कूली पढ़ाई पूरी की। इसके बाद स्टैनफोर्ड में कंप्यूटर साइंस प्रोग्राम में एडमिशन लिया। वहीं उनकी मुलाकात आदित से हुई और दोनों ने पढ़ाई छोड़कर जेप्टो कंपनी की शुरुआत की।

कंपनी के भारत में स्विगी, इंस्टामार्ट, जोमैटो जैसे कई प्रतिद्वंद्वी है लेकिन फिर भी ये कंपनी उन्हें बरामबर टक्कर देती है। वहीं इसके संस्थापकों का कंपनी को मार्केट के हिसाब से उत्कृष्ट बनाने का प्रयास और भी ज्यादा लोगों को इस कंपनी की ओर आकर्षित करता है।

और भी युवा है लिस्ट में शामिल

इस लिस्ट में भारत पे वाले शाश्वत नकरानी का भी नाम है जिनकी उम्र मात्र 26 साल है और उनकी संपत्ति 1300 करोड़ रुपए। इसी तरह अलख पांडे का नाम भी इस लिस्ट में है उनके पास 4500 करोड़ की संपत्ति है, ओयो के फाउंडर रितेश अग्रवाल जिनके पास 4500 करोड़ की संपत्ति है वो भी युवा उद्यमियों में आते हैं। लेकिन सबसे कम उम्र की बात करें तो वो कैवल्य वोहरा की ही है।

Zepto कंपनी की बढ़ रही वैल्यूएशन

उनकी कंपनी जेप्टो इसी मकसद से अस्तित्व में लाई गई थी कि कोरोना के बाद जब हर कोई बाहर निकलने से हिचकता था तब इस कंपनी ने 10 मिनट के भीतर घरों पर सब्जी और जरूरी सामान भेजने शुरू किए। इसके बाद इसकी बाजार में वैल्यू बढ़ती गई। आज ये कंपनी देश के विभिन्न इलाकों में सामान पहुँचाने का काम कर रही है। 1000 से ज्यादा इनके पास वर्कफोर्स है और 5000 से ज्यादा प्रोडक्ट से साइट डिलिवर करवाते हैं।

जेप्टो आज और भी ज्यादा चर्चा में है। खबरें बताती हैं कि डिलीवरी ऐप जेप्टो की वैल्यूएशन 40% बढ़कर 5 बिलियन डॉलर (₹41,931 करोड़) हो गई है। कंपनी ने बताया कि इस फंडिंग राउंड में कंपनी ने 340 मिलियन डॉलर (₹2,851 करोड़) जुटाए हैं। पिछले महीने (जून ) प्राइमरी फंडिंग राउंड में 3.6 बिलियन डॉलर (₹30,190 करोड़) की वैल्यूएशन पर 665 मिलियन डॉलर यानी ₹5,577 करोड़ का फंड जुटाया था। ये कंपनी भारत की सबसे तेजी से बढ़ती कंज्यूमर इंटरनेट कंपनियों में से एक है।

मुंबई में रहते हैं सबसे ज्यादा अरबपति

वहीं जिस जगह से इस कंपनी की शुरुआत हुई है वो जगह भी अमीरों वाली इस लिस्ट में पीछे नहीं है। हम बात कर रहे हैं मुंबई की है। मुंबई में इतने अरबपति हैं कि हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2024 के अनुसार, मुंबई ने चीन को पीछे छोड़ दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन में अरबपतियों की संख्या में 25% की गिरावट आई है, वहीं भारत में इनकी संख्या में 29% की वृद्धि हुई है। पहले वहाँ की राजधानी शहर बीजिंग में सबसे ज्यादा अरबपति रहते थे पर अब भारत के मुंबई में हैं। लिस्ट के मुताबिक एशिया के 25% अरबपतियों का घर मुंबई में है। इसी के साथ भारत में अरबपतियों की संख्या रिकॉर्ड 334 तक पहुँच गई है। बताया जा रहा है कि भारत को हर पाँचवे दिन एक नया अरबपति मिला और पिछले साल के मुकाबले देश में 75 नए अरबपति जुड़े। लिस्ट में भी 142 नए बिलेनियर शामिल हुए, जो रियल एस्टेट, इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन बिजनेस से जुड़े हैं।

क्या है हुरुन लिस्ट

बता दें कि हुरुन इंडिया की यह लिस्ट, जिसमें भारतीय उद्यमियों का नाम प्रकाशित हुआ है वो अपनी सूची और रिसर्च से भारत में आंत्र्प्रन्योरशिप को बढ़ावा देने पर कार्य करती है। भारत में इसकी लीडरशिप ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से स्नातक पास अनस रहमान जुनैद के हाथ में है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर भी हुरुन की रिपोर्ट अमीरों की सूची के बारे में बताती है। ये अपनी रिपोर्ट भारत के अलावा, चीन, फ्रांस, यूके, यूएसए, ऑस्ट्रेलिया, जापान, कनाडा और लक्जमबर्ग में जारी करती है।