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ट्रंप को मारने आया था पाकिस्तानी, ईरान ने दी थी ट्रेनिंग: US के कई बड़े नेता थे निशाने पर, हुआ गिरफ्तार

अमेरिका के न्याय विभाग ने पिछले महीने एक पाकिस्तानी को गिरफ्तारी किया था। पाकिस्तानी का नाम आसिफ मर्चेंट है। उसके ऊपर आरोप है कि उसने ईरान के साथ मिलकर अमेरिका से जुड़े कई नेताओं की हत्या की साजिश रची।

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, आसिफ मर्चेंट को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के शीर्ष कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या का बदला लेने के लिए अमेरिका भेजा गया था। वह अमेरिका जाने से पहले लंबे वक्त तक ईरान में रहा। बाद में इसी साल अप्रैल में उसे पाकिस्तान से अमेरिका भेजा गया।

बताया जा रहा है कि 46 साल के आसिफ मर्चेंट ने अपने मंसूबों को अंजाम देने के लिए दो लोगों को ढूँढकर 5000 डॉलर का भुगतान भी किया था। हालाँकि बाद में पता चला कि वो दो लोग कोई और नहीं बल्कि एफबीआई के सीक्रेट एजेंट थे।

उन्होंने आसिफ मर्चेट की सूचना पुलिस को दी और फिर उसे हिरासत में लिया गया। 16 जुलाई को अमेरिका की फेडरल कोर्ट ने उसे गिरफ्तार करने का आदेश दिया। आसिफ मर्चेंट की गिरफ्तारी को लेकर FBI के डायरेक्टर क्रिस्टोफर ने कहा मर्चेंट एक खतरनाक हत्या की साजिश रच रहा था, जिसे नाकाम कर दिया गया।

उन्होंने बताया कि मर्चेंट का ईरान से सीधा कनेक्शन है। उसे ईरान ने ही अमेरिकी नेताओं की हत्या करने के लिए भेजा था। पूछताछ में उसने अमेरिका से अपने कनेक्शन पर कहा कि उसकी दो बीवियाँ हैं एक पाकिस्तान में और दूसरी ईरान में। दोनों जगह उसके बच्चे हैं इसलिए वो आता जाता है।

हालाँकि मीडिया रिपोर्टों में जो अदालती दस्तावेज का हवाला देते हुए जानकारी दी गई है उसमें कहा गया है कि साजिश में कुछ निश्चित घरों से यूएसबी ड्राइव व डॉक्यूमेंट्स को चुराना, नेताओं की हत्या करना, प्रदर्शन करना आदि शामिल था।

उसने इन सभी करतूतों को अंजाम देने के लिए कोड नेम बनाए थे। जैसे-  विरोध प्रदर्शन के लिए “टी-शर्ट”, दस्तावेजों की चोरी के लिए “फलालैन शर्ट”, हत्या के लिए “ऊन जैकेट” और उनकी बैठकों के लिए “यार्न-डाई।”

अदालत में पेश किए गए दस्तावेज में भले ही किसी अकेले नेता की हत्या की साजिश का नाम नहीं है लेकिन मीडिया में इसे ट्रंप से जोड़कर बताया जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि आसिफ को सुलेमानी की हत्या का बदला लेने के लिए भेजा गया था और जब सुलेमानी को मारा गया था उस समय डोनाल्ड ट्रंप ही अमेरिका के राष्ट्रपति थे। इसलिए इस मामले में डोनाल्ड ट्रंप का नाम उन नेताओं की लिस्ट में रखकर देखा जा रहा है जो आसिफ के निशाने पर थे।

इसके अलावा ईरान ने पिछले साल भी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को मारने की धमकी दी थी। ईरान के रिवॉल्यूश्नरी गार्ड एयरोस्पेस फोर्स के हेड अमीराली हाजीजादेह ने कहा था, “अल्लाह ने चाहा तो हम ट्रम्प को जरूर मारेंगे। हम उन सभी मिलिट्री कमांडर को मारना चाहते हैं, जो ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या में शामिल थे।”

गौरतलब है कि ईरान द्वारा रची जा रही ट्रंप की हत्या की साजिश पर इसलिए भी इतनी बात हो रही है क्योंकि कुछ समय पहले ही ट्रंप पर एक रैली के दौरान जानलेवा हमला हुआ था। इसके अलावा ट्रंप ने कुछ दिन पहले ईरान को लेकर कहा भी था अगर ईरान ने ईरान कभी भी उनकी हत्या करने में कामयाब होता है तो उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका उसे खत्म कर देगा।

24 लोगों को जिंदा जलाया, बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों की बर्बरता: होटल में सामान लूटने वालों की भी मौत, शेख हसीना की पार्टी के नेता का था होटल

बांग्लादेश में जारी हिन्दू विरोधी हिंसा के बीच इस्लामी कट्टरपंथियों ने जशूर शहर में एक होटल में आग लगा दी। इस होटल में आग लगने के कारण 24 लोग जल गए। जिस होटल में आग लगाई गई, वह इस्तीफ़ा देकर भारत आने वाली प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग के एक नेता का था।

बांग्लादेशी मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (5 अगस्त, 2024) को जशूर में स्थित जबीर होटल को इस्लामी दंगाइयों ने आग के हवाले किया। यह एक फाइव स्टार होटल था। इसके मालिक आवामी लीग के नेता शाहीन चकलादर हैं। वह जशूर में पार्टी के महासचिव थे। दंगाई इस होटल में घुसे और पेट्रोल डाल कर आग लगाई।

यह घटना शाम 4 बजे के करीब हुई। इस्लामी कट्टरपंथियों ने होटल के निचले हिस्से में घुस कर उत्पात मचाया और लूटपाट भी की। इसके बाद वह एजी लगाकर यहाँ से चले गए। इस होटल में इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। होटल में आग लगने और दम घुटने के कारण 24 लोगों की मौत हुई।

कुछ ऐसे लोग भी होटल के भीतर मारे गए, जो यहाँ लूट मचाने के लिए घुसे थे। वह भी यहाँ फंस गए और जल कर मर गए। जल कर मरने वालों में एक पीड़ित इंडोनेशियाई नागरिक है। इस घटना में 150 से अधिक लोग घायल हुए हैं, उनका इलाज चल रहा है।

राहत बचाव टीमें मौके पर पहुँच कर केवल 25-30 लोगों को बचा पाई। होटल के जलने की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इसमें दिखता है कि होटल में ऊपर से नीचे तक आग लगी हुई है और काफी धुआँ उठ रहा है। होटल के अलावा इस इलाके में आवामी लीग का दफ्तर भी जलाया गया।

होटल जलने की घटना से एक भारतीय नागरिक भी बाल बाल बचा। असम के रहने वाले शाहिद और उनके भाई फैजान इसी होटल में रुके हुए थे। उन्हें होटल के मेनेजर ने अंदर ही रुकने की सलाह दी थी क्योंकि बाहर भारी हिंसा जारी थी। शाहिद के भाई फैजान इस दौरान भारत वापसी के लिए टिकट लेने गए थे।

शाहिद ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया कि वह जब शोर सुन कर बाहर आए तो देखा कि होटल में आग लग चुकी है। वह होटल की तीसरी मजिल पर रुके हुए थे। नीचे की मंजिलों पर आग लगने के कारण उन्हें कोई रास्ता नहीं सूझा। इसके बाद शाहिद ने छलाँग लगाने का फैसला किया।

ऊँचाई से कूदने के कारण शाहिद के दोनों पाँव टूट गए। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया। हालाँकि शाहिद ने बांग्लादेश में इलाज ना लेकर एक एम्बुलेंस ली और भारत आ गए। वर्तमान में उनका कोलकाता में इलाज चल रहा है। उन्होंने बांग्लादेश से बाहर आने पर खुद को भाग्यशाली बताया है।

गौरतलब है कि बांग्लादेश में जुलाई महीने से ही आरक्षण खत्म करने की माँग को लेकर प्रदर्शन चल रहे थे। इस प्रदर्शन को इस्लामी कट्टरपंथियों ने हाइजैक कर लिया और इसके बाद भारी हिंसा हुई। यह हिंसा अगस्त में और बढ़ गई और प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा। शेख हसीना सोमवार (5 अगस्त, 2024) को ढाका छोड़ कर भारत आ गईं। वर्तमान में वह भारत में हैं।

बांग्लादेश में इस्लामी भीड़ ने हिंदू गायक के 140 साल पुराने घर में लगाई आग, 3000 वाद्ययंत्र जलकर खाक: दावा- 200-300 हिंदुओं के घरों और दुकानों में हो चुकी तोड़फोड़

बांग्लादेश में हसीना सरकार के विरोध में शुरू प्रदर्शन अब हिंदू विरोधी हिंसा में तब्दील हो चुका है। जगह-जगह हिंदू मंदिरों और हिंदुओं के घरों को निशाना बनाया जा रहा है। इसी क्रम में इस्लामी कट्टरपंथियों की एक भीड़ कल बांग्लादेश के मशहूर गायक राहुल आनंद के घर में जा घुसी। यहाँ उन्होंने पहले घर से जमकर लूटपाट की उसके बाद इसे आग के हवाले कर दिया।

बताया जा रहा है कि भीड़ के घर में घुसने से पहले राहुल अपने पत्नी और बेटे के साथ एक जोड़े कपड़े में कही और चले गए थे जिसकी वजह से वो शारीरिक रूप से तो सुरक्षित हैं लेकिन उनके साथ घटित घटना के कारण मानसिक रूप से तबाह हो गए हैं। सोशल मीडिया के अनुसार राहुल आनंद ने जीवन भर सेकुलर होने का रास्ता अपनाया। अपने मुल्क के मुस्लिमों से प्यार किया। मगर बदले में उन्हें क्या मिला।

राहुल आनंद का घर धानमंडी 32 पर स्थित था। इस्लामी भीड़ ने उनके 140 साल पुराने इस आवास को लूटने के बाद जलाया। इस लूटपाट और आगजनी में उनके 3000 म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स भी बर्बाद हो गए जिनमें से कई को उन्होंने अपने हाथ से बनाया था।

राहुल आनंद गीत बैंट जोलेर गान चलाते हैं। इस बैंड से जुड़े एक पुराने साथी सैफुल जरनल ने मीडिया को बताया, “हमारे प्रिय राहुल दा के 3000 से अधिक संगीत वाद्ययंत्र, जिन्हें उन्होंने वर्षों से प्यार और देखभाल के साथ डिजाइन और बनाया था, नष्ट कर दिए गए हैं और जलाए गए वाद्ययंत्रों और अन्य घरेलू चीजों का अनुमानित मूल्य 10 लाख टका से अधिक है।”

लोग इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर दुख जता रहे हैं। कहा जा रहा है कि बांग्लादेश का यह बहुत बड़ा नुकसान है। यह असहनीय है। बिलकुल गलत है। वो घर नहीं रचनात्मक केंद्र था। गायक ने वहाँ खुद अपने हाथ से उन संगीत वाद्ययंत्रों को बनाया था। भीड़ ने उन वाद्ययंत्रों को जलाया है जिनमें बांग्लादेश की ध्वनि कैद थी।

मालूम हो कि जिन राहुल आनंद के घर को आग में झोंककर बांग्लादेश के इस्लामी कट्टरपंथी इतना नाज कर रहे हैं वो घर लंबे समय तक बांग्लादेश का नाम विदेशों में रौशन करता रहा था। पिछले साल फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो यहाँ आए थे। ये खबर हर मीडिया हाउस में चली भी थी। आज सांंप्रदायिकता की आग में कट्टरपंथियों ने इसे एक हिंदू का घर समझ जला डाला क्योंकि शेख हसीना के इस्तीफे के बाद उनकी नजर सिर्फ हिंदुओं के घर-मकान-दुकान लूटने पर ही है।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश की स्थिति पर हाल में बांग्लादेश हिंदू बुद्धिस्ट क्रिस्चियन यूनिटी काउंसिल (BHBCUC) ने कहा कि कई घरों, दुकानों और मंदिरों को निशाना बनाया गया है। BHBCUC का दावा है कि करीब 200-300 हिंदू घरों और दुकानों में तोड़फोड़ की जा चुकी है। महासचिव राणा दासगुप्ता ने रॉयटर्स को बताया था कि बांग्लादेश में करीब 15-20 हिंदू मंदिरों को नुकसान पहुँचाया गया था और समुदाय के करीब 40 लोग घायल हैं।

बांग्लादेश से भारतीय सीमा पर पहुँचा शरणार्थियों का पहला जत्था, सभी गरीब और पिछड़े समूह के: दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क ने भी इस्लामी क्रूरता के खिलाफ उठाई आवाज़

बांग्लादेश में सत्ता विरोधी आंदोलन को शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने और मुल्क छोड़ने के साथ ही खत्म हो जाना चाहिए था, लेकिन इसने आखिरकार हिन्दू विरोधी दंगों का रूप ले लिया। हिन्दू पार्षद और पत्रकार की हत्या की गई, ISKCON और काली मंदिरों पर हमले किए गए और हिन्दुओं को वहाँ से भगाया जाने लगा। इसके साथ ही प्रताड़ित हिन्दू शरणार्थियों का पहला जत्था भारतीय सीमा पर पहुँच गया है। दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क ने भी इस वीडियो पर ‘!!’ लिख कर दुःख जताया है।

पोलैंड के मीडिया संस्थान ‘Visegrád 24’ ने इसका वीडियो शेयर किया, जिस पर ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) के मालिक एलन मस्क ने रिप्लाई दिया। ‘Visegrád 24’ ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “बांग्लादेश से पहले हिंदू शरणार्थी उत्तरी बांग्लादेश में भारत की सीमा पर पहुँचे। इस्लामवादियों द्वारा हिंसा से प्रभावित हज़ारों हिंदू अपने गाँवों से बाहर निकाले जाने के बाद भारत की ओर बढ़ रहे हैं, जो बांग्लादेशी हिंदुओं ने 1971 के बाद से पहले कभी नहीं देखा था।” ISKCON के प्रवक्ता राधारमण दास ने भी हिन्दुओं के लिए आवाज़ उठाने हेतु एलन मस्क को धन्यवाद दिया है।

उन्होंने लिखा, “बांग्लादेशी हिंदू, बौद्ध और ईसाई अल्पसंख्यकों की चीखें सुनने के लिए एलन मस्क का बहुत-बहुत धन्यवाद। कृपया उनकी चीखें सुनें ताकि बहरी दुनिया अपनी नींद से जाग सके।” इस दौरान लोगों ने रिप्लाई में एलन मस्क को ये जानकारी भी दी कि भारत में बांग्लादेशी हिन्दुओं के लिए आवाज़ उठाने वाले ‘X’ हैंडलों को प्रतिबंधित किया जा रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि बांग्लादेश से भारतीय सीमा पर शरण के लिए पहुँचे हिन्दुओं में अधिकतर ग़रीब हैं, पिछड़े हैं।

उधर बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने ‘एंटी-डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट्स मूवमेंट’ के प्रतिनिधियों के साथ ‘बंग भवन’ में मुलाकात की। अंतरिम सरकार के गठन को लेकर छात्र नेताओं ने राष्ट्रपति के साथ चर्चा की। 16 जुलाई से लेकर अब तक 500 लोगों के मारे जाने की खबर है। बांग्लादेश में 15 साल की तानाशाही का अंत बता कर इस आंदोलन को सफल बताया जा रहा है। नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार हो सकते हैं। वो अमेरिका के करीबी हैं। इस आंदोलन में भी अमेरिका का हाथ बताया जाता है।

जिन्होंने पाकिस्तान की क्रूरता से बचा कर अलग मुल्क दिया, उनके नाम पर बने कल्चरल सेंटर को फूँक दिया: बांग्लादेश में बचा इंदिरा गाँधी का सिर्फ G, A और N

जब पूर्वी पाकिस्तान को मुक्त कराया गया और बांग्लादेश नामक एक अलग मुल्क का गठन हुआ, तब भारत में इंदिरा गाँधी प्रधानमंत्री थीं। उनके द्वारा सैन्य मदद का निर्णय लिए जाने के कारण ही शेख मुजीबुर रहमान के नेतृत्व में चले मुक्ति आंदोलन को विजय प्राप्त हुई। बांग्लादेश को अलग मुल्क का दर्जा दिलाने के लिए भी भारत ने प्रयास किया। आज उसी बांग्लादेश की राजधानी ढाका में इंदिरा गाँधी के नाम पर बने ‘कल्चरल सेंटर’ को जला दिया गया है। ‘इंदिरा गाँधी कल्चरल सेंटर’ को आग के हवाले कर दिया गया है।

फिर भी भारत में पत्रकारों का एक गिरोह पड़ोसी मुल्क में चल रही इस अराजकता को ‘लोकतंत्र की जीत’ और ‘युवा शक्ति की विजय’ बताते नहीं थक रहा। इंदिरा गाँधी के नाम का सिर्फ G, N और A ही दिख रहा है अब कल्चरल सेंटर के ऊपर। कहीं टूटी हुई खिड़कियाँ दिख रही हैं तो कहीं मोड़ डाले गए रॉड्स। भीतर कचरों का ढेर लगा हुआ है। कुछ फाइलें जल कर राख हो गई हैं। वहाँ एक गिफ्ट शॉप भी था, उसे भी आग के हवाले कर दिया गया। आर्काइव सेक्शन में कई टेप पड़े हुए थे, वो भी जला दिए गए। ‘इंदिरा गाँधी कल्चरल सेंटर’ का उद्घाटन 2010 में हुआ था।

यहाँ सेमिनार और वर्कशॉप के अलावा भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय रिश्तों को बढ़ावा देने के लिए योग क्लास और संगीत व कत्थक-मणिपुरी जैसी नृत्य विधाओं की शिक्षा भी दी जाती थी। इसे ‘इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशन्स’ द्वारा संचालित किया जाता था। बता दें कि इंदिरा गाँधी के कार्यकाल में ही पाकिस्तान को 2 हिस्सों में विभाजित कर वहाँ की 60% जनसंख्या को बांग्लादेश दिया गया था। तब पाकिस्तान के जनरल टिक्का खान द्वारा पूर्वी पाकिस्तान में नरसंहार हो रहा था, इंदिरा गाँधी ने जर्मनी, फ़्रांस, ब्रिटेन, बेल्जियम और अमेरिका का दौरा कर इस क्रूरता के बारे में वहाँ के नेताओं को बताया।

इंदिरा गाँधी ने कोलकाता से ‘आवामी लीग’ को निर्वासन वाला सरकार चलाने की अनुमति दी, हालाँकि तब इसे आधिकारिक दर्जा नहीं दिया गया था। दिसंबर 1971 में पाकिस्तान ने भारत पर हमला बोल दिया। युद्ध शुरू होने के 3 दिन बाद ही इंदिरा गाँधी ने बांग्लादेश को अलग राष्ट्र होने की मान्यता दे दी। युद्ध शुरू होने के 13 दिन बाद कमांडर जनरल अमीर अब्दुल्ला खान नियाजी ने ढाका सरेंडर कर दिया। जिन इंदिरा गाँधी के कार्यकाल में ये सब हुआ, आज बांग्लादेश उन्हीं नेता के नाम पर बने कल्चरल सेंटर को जला रहे हैं।

‘केंद्र सरकार को आपके कंटेंट से आपत्ति है’: भारत में बैन किए जा रहे बांग्लादेशी हिन्दुओं के लिए आवाज़ उठाने वाले हैंडल, पूछा – इस्लामी क्रूरता के खिलाफ आवाज़ उठाना गलत?

बांग्लादेश में शेख हसीना के विरोध में हुए प्रदर्शनों की आड़ में हिन्दुओं पर भी जम कर हमले किए जा रहे हैं। एक हिन्दू पार्षद और एक हिन्दू पत्रकार को मार डाला गया है। सबसे बड़ी बात कि सोशल मीडिया पर जो लोग इन पीड़ित हिन्दुओं के लिए आवाज़ उठा रहे हैं, उन्हें भारत में प्रतिबंधित किया जा रहा है। ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर ‘Voice of Bangladeshi Hindus’ ने जानकारी दी है कि ‘VoiceOfHindu71’ और ‘Hindu8789’ यूजरनेम वाले 2 हैंडलों को भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया है।

‘वॉइस ऑफ बांग्लादेशी हिंदूज’ ने बताया कि ‘Hindu8789’ नामक हैंडल को उसके द्वारा ही चलाया जा रहा था। इस हैंडल से बांग्लादेश में मंदिरों पर लगातार हो रहे हमलों की तस्वीरें और वीडियो शेयर किए जा रहे थे। साथ ही उसने वो लीगल नोटिस भी शेयर किया है, जो उसे ‘X’ ने भेजा है। ‘VoiceOfHindu71’ हैंडल को बताया गया है कि भारत सरकार की तरफ से उसके हैंडल को हटाए जाने के लिए नोटिस आया है। जिस कंटेंट पर भारत सरकार ने आपत्ति जताई उसे भारत में बैन कर दिया गया है।

अब हिन्दुओं के लिए आवाज़ उठाने वाले पूछ रहे हैं कि आखिर भारत सरकार हिन्दुओं के लिए आवाज़ उठाने से क्यों रोक रही है। बांग्लादेशी हिन्दुओं की आवाज़ बनने वाले हैंडल ने पूछा है कि जब उसका भारतीय मुस्लिमों, बुद्धिजीवियों और वामपंथियों से कोई लेना-देना नहीं है, वो बस अपने समुदाय के साथ बांग्लादेश में हो रही क्रूरता के लिए आवाज़ उठा रहा है, फिर भारत सरकार को क्यों समस्या है? वो भी तब जब भारत में भाजपा की सरकार है जो हिन्दू हितैषी पार्टी है।

सोशल मीडिया पर जारी की गई तस्वीरों में बताया गया है कि बांग्लादेश में एक डॉक्टर के घर में इस्लामी भीड़ ने आग लगा दी। इसके अलावा हिन्दुओं की दुकानों पर भी हमले किए जा रहे हैं। एक हिन्दू डॉक्टर के मेडिकल शॉप पर हमला किया गया। जबकि मोहम्मद ज़ुबैर जैसे भारत के इस्लामी कट्टरपंथी तस्वीरों के जरिए ये दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि बांग्लादेश के मुस्लिम मंदिरों को बचा रहे हैं। हालाँकि, वो ये नहीं बता रहे कि किससे।

मुहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार की कमान देना चाहते हैं बांग्लादेश के प्रदर्शनकारी , अमेरिका के करीबी नोबेल विजेता अभी हैं पेरिस में: उधर ‘विदेशी हाथ’ पर बोले S जयशंकर

बांग्लादेश में अराजकता के बीच संसद भंग कर दिया गया है। प्रदर्शनकारियों की माँग है कि नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस को सत्ता की कमान सौंपी जाए। प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं का कहना है कि वो फ़ौज के नेतृत्व वाले शासन को पसंद नहीं करेंगे। संसद भंग किए जाने के बाद इस्लामी मुल्क में फिर से चुनाव हो सकते हैं। शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा और उनके भारत में शरण लेने के बाद बांग्लादेश में सड़कों पर प्रदर्शनकारी जश्न मनाते हुए निकले। बताया जा रहा है कि अब तक लगभग 500 लोग ताज़ा हिंसा में मारे जा चुके हैं।

प्रदर्शन के संयोजकों में से एक नाहिद इस्लाम ने कहा कि छात्र किसी भी सूरत में फौज के नेतृत्व वाले या फिर फौज द्वारा बनाई गई सरकार का समर्थन नहीं करेंगे। उन्होंने राष्ट्रपति शहाबुद्दीन से अपील की कि नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनिस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनाई जाए। मुहम्मद यूनुस माइक्रोलेंडिंग का कॉन्सेप्ट लाने के लिए लोकप्रिय हैं, जिससे बांग्लादेश में कई लोग गरीबी से बाहर निकले। छात्र नेताओं ने उनसे बात भी की है, 84 वर्षीय अर्थशास्त्री अंतरिम सरकार के नेतृत्व के लिए राजी हैं। वो फ़िलहाल पेरिस में हैं।

वहीं से उन्होंने बयान जारी किया कि हमारे ऊपर जो शैतान बैठा हुआ था वो अब चला गया है, अब हम सब आज़ाद हैं। उन्होंने इसे एक ज्वालामुखी विस्फोट बताते हुए कहा कि युवा शक्ति के रूप में एक नई ताकत का जन्म हुआ है। बता दें कि शेख हसीना की सरकार में मुहम्मद यूनुस पर धोखाधड़ी से लेकर भ्रष्टाचार तक के कई मामले चल रहे थे। उन्होंने इन मुकदमों को फर्जी बताते हुए उम्मीद जताई कि अब इन्हें वापस लिया जाएगा। फौज ने सरकार का साथ देना बंद कर दिया था, जिसके बाद शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा।

बांग्लादेश के पूर्व विदेश मंत्री हसन महमूद को ढाका एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया गया है, वो मुल्क छोड़ने की कोशिश कर रहे थे। उधर बांग्लादेश की अराजकता में विदेशी हाथ होने के राहुल गाँधी के सवाल पर केंद्रीय विदेश मंत्री S जयशंकर ने कहा कि एक पाकिस्तानी राजनयिक ने अपने सोशल मीडिया हैंडल की फीचर इमेज बांग्लादेश के आंदोलन के समर्थन में बदली थी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार बांग्लादेश की सेना से भी संपर्क में है, साथ ही शेख हसीना से बातचीत से पहले उन्हें समय दिया जा रहा है क्योंकि वो अभी भी परेशान हैं।

मुहम्मद यूनुस को अमेरिका का करीबी माना जाता है। अमेरिका के व्हार्टन बिजनेस स्कूल ने उन्हें दुनिया की शीर्ष 25 बिजनेस हस्तियों में रखा था, वहीं Time ने मैगजीन ने उन्हें शीर्ष 12 बिजनेस लीडर्स में रखा था। अमेरिका के ‘मिडल टेनेसी स्टेट यूनिवर्सिटी’ में वो पढ़ा चुके हैं। उन्होंने वाशिंगटन में एक बार हिलेरी क्लिंटन सहित कई वैश्विक नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें गरीबी से लड़ने को लेकर विचार-विमर्श किया गया। उस दौरान शेख हसीना ने उनकी तारीफ़ की थी। वो बांग्लादेश के ‘ग्रामीण बैंक’ के संस्थापक भी हैं।

‘केस वापस लो, वरना गाँव छोड़ कर भागो’: संभल में वाल्मीकि परिवार को धमका रहा हसनैन , साथियों को लेकर घुस जाता है घर में

उत्तर प्रदेश के सम्भल जिले में एक मुस्लिम बहुल गाँव में दलित परिवार को पलायन के लिए धमकाने का मामला सामने आया है। पीड़ितों को पर 11 जून, 2024 में हुए एक मारपीट और SC/ST एक्ट के मुकदमें पर समझौता करने का भी दबाव बनाया जा रहा है। इस मामले में मुख्य आरोपित का नाम हसनैन है जिसने 25 जुलाई 2024 साथियों सहित पीड़ितों के घर में घुस कर अभद्रता की और जान से मार डालने की धमकी भी दी। सोमवार (5 अगस्त 2024) को पुलिस ने बताया कि हसनैन के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है।

हसनैन व उसके साथियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश जारी है। पीड़ित परिवार ने घर के आगे पलायन के पोस्टर भी लगा लिए थे जिसे पुलिस द्वारा दिए गए सुरक्षा के आश्वासन के बाद हटा लिया गया है।

यह मामला सम्भल जिले के थाना क्षेत्र ऐंचोड़ा कंबोह का है। यहाँ के गाँव नहरौली की रहने वाली अशोक वाल्मीकि की पत्नी मुन्नी देवी ने मंगलवार (11 जून 2024) को पुलिस ने शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में उन्होने बताया था कि उनके गाँव के हसनैन, रिज़वान, जीशान, तौहीद का बेटा छिदिया और इकराम ने 11 जून (मंगलवार) को उनकी बेटी काजल को लात-घूँसों से मारा और जान से मार डालने की धमकी दी। इस दौरान आरोपितों ने काजल वाल्मीकि को गाँव से भगाने का भी एलान किया। तब पीड़िता ने इस हमले को अपने घर पर कब्ज़े की साजिश बताया था।

मुन्नी देवी ने यह ही बताया था कि उन्हें रास्ते में जाता देख कर इकराम नाम का व्यक्ति गालियाँ भी देता है। पीड़िता ने तब पुलिस से अपने परिवार के जान-माल की सुरक्षा की गुहार लगाई थी। पुलिस ने इस मामले में 13 जून, 2024 को IPC की धारा 147, 148, 323, 504 और 506 के साथ SC/ST एक्ट में केस दर्ज कर लिया था। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। इस FIR में हसनैन, रिज़वान, छिदिया, जीशान और इकराम को नामजद किया गया था।

आरोप है कि तब से हसनैन और उसके साथी पीड़िता और उसके परिवार पर यह केस वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। जब वाल्मीकि परिवार ने यह केस वापस लेने से साफ इनकार कर दिया तो 25 जुलाई को हसनैन फिर अपने कुछ साथियों के साथ पीड़िता के घर में घुसा। उसने अंतिम चेतावनी देते हुए कहा कि या तो दलित परिवार उनका केस वापस ले वरना गाँव छोड़ कर क्ला जाए। ये दोनों बातें न मानने पर पीड़ित परिवार को जान से मार डालने की धमकी दी गई। आखिरकार रोज-रोज की धमकियों से तंग हो कर मुन्नी देवी और उनके पति अशोक वाल्मीकि ने गाँव से पलायन करने का मन बना लिया।

बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने घर के आगे पोस्टर लगा दिए। पोस्टर में घर बिकाऊ है लिखा हुआ था। इस बीच मामले की जानकारी पुलिस को मिली तो वो फ़ौरन गाँव में पहुँची। इलाके के डिप्टी एसपी आलोक सिद्दू पुलिस ने पीड़ित परिवार से बातचीत की और उन्हें पूरी सुरक्षा का भरोसा दिया। पुलिस द्वारा मिले भरोसे के बाद अशोक वाल्मीकि ने घर पर लगा पलायन का पोस्टर हटा लिया है। हसनैन और उसके साथियों द्वारा 25 जुलाई को पीड़ित परिवार को दी गई धमकी पर FIR दर्ज कर ली गई है। घटना एक बाद आरोपित फरार हैं जिनकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।

मदरसे में लड़कियों के रूम में कैमरे, SDM ने दे दी क्लीन चिट तो भड़का बाल आयोग, कहा – ये बन गई मदरसे की प्रवक्ता, इन्हें ट्रेनिंग दो

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग रतलाम में एक मदरसे में लड़कियों की हालत पर भड़क गया है। बाल संरक्षण आयोग के मुखिया प्रियंक कानूनगो ने मदरसे में लड़कियों के कमरे में कमरे में कैमरे को लेकर जानकारी माँगी है। उन्होंने इस मामले में स्थानीय SDM के मदरसे को क्लीन चिट देने को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

मध्य प्रदेश के रतलाम में राज्य बाल संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ निवेदिता शर्मा ने दारुल उलूम आयशा सिद्दीका मदरसे का निरीक्षण हाल ही में किया था। इस निरीक्षण में कई खामियाँ मदरसे में पाई गई थीं। निवेदिता शर्मा को मदरसे में कई बाहरी राज्यों से लाई गई लडकियाँ मिली थीं।

मदरसे वाले इन लड़कियों को जमीन पर सुला रहे थे। इसके अलावा इस कमरे में कैमरा भी लगाया था। बच्चों की सुविधा के लिए यहाँ कोई इंतजाम नहीं थे। यहाँ एक बच्ची बुखारग्रस्त मिली थी। जाँच में पाया गया था कि इस मदरसे में मौजूद 100 में से 40 बच्चियों को ही स्कूल भेजा जा रहा था।

बाल संरक्षण आयोग को इस मदरसे की मध्य प्रदेश मदरसा बोर्ड से मान्यता नहीं होने की बात भी पता चली। बाल संरक्षण आयोग ने पाया कि महाराष्ट्र के एक स्कूल से मदरसे ने मान्यता ले रखी है जो वैध नहीं है। मदरसे में पाई गई कमियों को लेकर बाल संरक्षण आयोग ने स्थानीय प्रशासन को कार्रवाई करने को कहा था।

इसके बाद यहाँ की SDM जाँच के लिए पहुँची थी। SDM को यहाँ की अधिकांश व्यवस्थाएँ दुरुस्त मिली। उन्होंने मीडिया को इस विषय में बताया कि मदरसे ने बोर्ड के साथ इसलिए पंजीयन नहीं करवाया क्योंकि वेबसाइट बंद थी। इसके अलावा SDM ने कागज इकट्ठा करने की बात कही थी। इसके अलावा बच्चियों की शिक्षा को लेकर भी स्पष्ट बात SDM ने नहीं बताई थी।

SDM ने कैमरे के पीछे के कारणों को मदरसे की सुरक्षा बताया था। SDM के इस बयान के बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के प्रमुख प्रियंका कानूनगो भड़क गए। उन्होंने इस मामले में एक ट्वीट मंगलवार (6 अगस्त, 2024) को किया। उन्होंने कहा कि मदरसे की कैमरा DVR भी मंगवाई गई है।

प्रियंका कानूनगो ने इस ट्वीट में लिखा, “मध्यप्रदेश बाल आयोग की सदस्य ने निरीक्षण के दौरान रतलाम में एक अवैध मदरसे में लड़कियों के कमरों में कैमरे लगे पाये हैं । दूसरे शहरों/राज्यों से ला कर लड़कियों को वहाँ रख कर उनको स्कूल नहीं भेजा जा रहा है यह संविधान का उल्लंघन है।”

उन्होंने इस मामले में SDM के रवैये पर नाराजगी जताते हुए लिखा, “ये मैडम जो कि वहाँ की SDM बतायी जा रही हैं ने मदरसे पहुँच कर मदरसे की प्रवक्ता की तरह बयान दे कर मदरसे को क्लीनचिट दे दी है। इस मामले में प्रशासन को नोटिस जारी कर रहे हैं साथ ही बाल अधिकार क़ानूनों पर इन एसडीएम को प्रशिक्षण दिये के लिए भी सरकार को अनुशंसा कर रहे हैं।”

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में वर्तमान में अवैध रूप से चलने वाले मदरसों पर एक्शन चल रहा है। बाल संरक्षण आयोग लगातार इन मदरसों के कागज और उनकी व्यवस्थाएँ जाँच रहा है। इसी क्रम में रतलाम में भी मदरसों की जाँच की गई है।

कौन हैं नाहिद इस्लाम समेत 3 चेहरे जिनके कारण बांग्लादेश में हुआ तख्तापलट: अब बोले- सेना वाली सरकार मंजूर नहीं, अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस बनें PM

बांग्लादेश में बीते दिनों आरक्षण के खिलाफ शुरू हुए छात्र आंदोलन ने मुल्क में तख्तापलट करवा दिया है। ऐसे में कई सारे सवाल हैं जो लोगों के जहन में आ रहे हैं लेकिन जो सबसे बड़ा सवाल है वो ये कि आखिर इस प्रदर्शन की शुरुआत की किसने और कौन इसके पीछे था।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस पूरे प्रदर्शन के पीछे ढाका यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले तीन छात्रों का हाथ था। ये तीन छात्र बांग्लादेश में शुरू हुए आरक्षण विरोधी प्रदर्शन का प्रमुख चेहरा थे। इनके नाम नाहिद इस्लाम, आसिफ महमूद और अबू बकर मजूमदार हैं। इन तीनों की उम्र 25 के आसपास है। इनमें से नाहिद इस्लाम ढाका यूनिवर्सिटी का छात्र हैं। इसके साथ ही नाहिद को मानवाधिकार एक्टिविस्ट के तौर पर भी जाना जाता है। नाहिद इस्लाम छात्र संगठन ‘स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन’ के को-ऑडिनेटर भी हैं। वहीं अबू मजूमदार ढाका यूनिवर्सिटी में भूगोल पढ़ते हैं और आसिफ महमूद भाषाशास्त्र।

इन तीनों ने ही आरक्षण के विरोध में भीड़ इकट्ठा करके प्रदर्शन करना शुरू किया। 19 जुलाई को पुलिस ने इन्हें पकड़कर इनसे पूछताछ भी की। हालाँकि फायदा कोई नहीं हुआ। 26 जुलाई को ये रिहा हुए तो बताया कि पुलिस ने हिरासत में रखखर इन्हें उत्पीड़ित किया। इसके बाद और लोग इनसे जुड़े। आंदोलन और तेज होना शुरू हुआ और 10 दिन बाद ही क्या हुआ आज नतीजा सबके सामने है।

हसीना सरकार जाने के बाद इन तीन लड़कों ने ऐलान किया है कि नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री डॉ यूनस अंतरिम सरकार के मुखिया होंगे। पहले उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था, “हम सेना द्वारा नामित बांग्लादेश अंतरिम सरकार को स्वीकार नहीं करेंगे। हम बातचीत के बाद एक रूपरेखा प्रस्तावित करेंगे। हमें सरकार के गठन में दिलचस्पी नहीं है। हम अपनी क्लास में लौटेंगे लेकिन कठपुतली सरकार को झेलकर हम 300 लोगों के शहीदों के खून का मजाक नहीं बनने देंगे।”

बता दें कि एक तरफ जहाँ बांग्लादेश में अंतरिम सरकार बनने की तैयारी हो रही है। वहीं दूसरी तरफ बांग्लादेश में अब हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं। शव जगह-जगह फेंके और लटकाए जा रहे है।

शेख हसीना के बेटे ने ऐलान कर दिया है कि वो लोग अब लौटकर बांग्लादेश नहीं जाएँगे। उनका परिवार थक गया है देश की रक्षा करते हुए। अब देश अपनी समस्या खुद संभाले। उन्होंने जानकारी दी है कि बांग्लादेश में हिंदुओं के मंदिरों को निशाना बनाया जा रहा है।