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हिंदू देवताओं का करता था अपमान, छात्रों को देता था कुर्बानी की धमकी: जम्मू-कश्मीर में टीचर आरिफ इकबाल सस्पेंड, पुलिस कर रही आरोपों की जाँच

जम्मू-कश्मीर के भद्रवाह में मंथला हाई स्कूल के छात्रों के विरोध के बाद स्कूल के शिक्षक आरिफ इकबाल को सस्पेंड कर दिया गया। आरिफ पर आरोप था कि वह हिंदू धर्म के बारे में अपमानजनक बातें करता था, उनकी धार्मिक भावनाओं का अपमान करता था और मानसिक रूप से प्रताड़ित भी करता था। एक आरोप आरफि पर यह भी है कि उसने बच्चे को धमकाकर कहा था कि वह बच्चे के पिता को 15-20 हजार रुपए देगा ताकि वह उसकी कुर्बानी दे सके। अब इकबाल के खिलाफ मामले की जाँच की जा रही है।

छात्रों ने आरिफ इकबाल के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए- ‘हमें इंसाफ दो’ के नारे लगाए। साथ ही कहा कि पुलिस रोजाना सिर्फ बयान लेने आती है कार्रवाई नहीं हो रही। वहीं प्रदर्शन कर रहे बच्चों के साथ मौजूद एक शख्स ने कैमरे पर इस मामले में कहा,

“वह शिक्षक था या तबलीगी जमात का कोई मिशन पर था? वह अपने मजहब का बखान करता था। उसने दसवीं कक्षा की छात्राओं से अपना थूक में नाक रगड़ने तक को कहा था। बच्चों ने कई दिनों तक उसके अत्याचार सहे। शुक्रवार को किसी ने कक्षा के बाहर या अंदर से सीटी बजाई उसके लिए उसने सभी छात्रों पर हाथ उठा दिया और सभी छात्रों को पीटा। उसने उन्हें जानवरों की तरह पीटा।”

आगे उस व्यक्ति ने कहा कि आरिफ ने छोटी-छोटी बच्चियों की भी पिटाई की थी। उनके कान की बालियाँ तक निकल गई थीं। उन्हें इतना पीटा था कि वो क्रूरता के कारण बेहोश हो गईं थी। बाद में उनके माता-पिता को आश्वासन देकर शांत कराया गया था। उस समय भी बड़ा प्रदर्शन हुआ था। छात्र चाहते हैं कि आरोपित शिक्षक को गिरफ्तार किया जाए।

बता दें कि इन्हीं प्रदर्शनों को देखते हुए डोडा के मुख्य शिक्षा अधिकारी के कार्यालय ने आदेश पारित करते हुए आरिफ इकबाल को उनके पद से हटा दिया है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जाँच में सामने आया कि आरिफ इकाबल बच्चों को पीटते तो थे और हिंदू धर्म के बारे में अभद्र बातें भी करते थे।

इसके साथ बता दें कि आरिफ इकबाल के खिलाफ पीड़ितों के माता पिता ने भी  भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 299 (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य, किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने का इरादा) के तहत एफआईआर संख्या 128/2024 यू/एस 115(2) के तहत स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) भद्रवाह द्वारा एक प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की गई। 

ऐसे में आरिफ इकबाल को निर्देश दिए गए हैं कि जब तक मामले की जाँच चल रही है तबतक वह बिना अनुमति के स्टेशन से बाहर न जाएँ और जाँच में मदद के लिए हमेशा उपलब्ध रहें। आदेश में कहा गया है कि चूँकि आरोपों की गंभीरता और चल रही जांच के कारण, यह आदेश दिया जाता है कि श्री आरिफ इकबाल, शिक्षक, हाई स्कूल मंथला, जोन भद्रवाह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया जाता है, आगे की जांच लंबित है और निलंबन अवधि के दौरान वह इस कार्यालय से जुड़े रहेंगे। “निलंबन की अवधि के दौरान, वह लागू नियमों के अनुसार निर्वाह भत्ता पाने के हकदार होंगे। यह आदेश अनुशासन बनाए रखने और शैक्षणिक संस्थान की गरिमा को बनाए रखने के हित में जारी किया गया है।”

इस मामले की जाँच हेतु तीन हायर सेकेंड्री स्कूलों की प्रिंसिपलों की समिति बनाई गई है। कहा गया है, “जाँच समिति निलंबित व्यक्ति द्वारा कथित उल्लंघन के कृत्य की गहन जांच करेगी और 21 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट इस कार्यालय को विशेष सिफारिशों के साथ प्रस्तुत करेगी।”

‘चाय बनी है या नहीं?’: सुनते ही निहंग ने तलवार से हाथ-पाँव पर किया वार, फिर हुआ फरार: घायल युवक के परिजन बोले – नशे का आदी है गुरुद्वारा का सेवादार हैप्पी सिंह

अब पंजाब के अमृतसर में निहंग सिखों का आतंक सामने आया है। मामला बाबा बकाला स्थित एक गुरुद्वारा का है। एक निहंग सिख ने एक युवक पर हमला कर दिया, जिसके बाद वो घायल हो गया। उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। युवक ने गुरुद्वारा साहिब के सेवादार से चाय माँगी थी, इतनी सी बात पर सेवादार हैप्पी सिंह ने तलवार से उस पर हमला कर दिया। इसके बाद उक्त युवक खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर गया। पीड़ित की पहचान निशान सिंह के रूप में हुई है। सेवादार हैप्पी सिंह घटना के बाद वहाँ से भाग खड़ा हुआ।

घायल निशान सिंह को बेहद गंभीर स्थिति में सिविल अस्पताल बाबा बकाला साहिब में भर्ती कराया गया है। घटना खिलचिया थाने के अंतर्गत आने वाले इलाके में हुई है, पुलिस ने मामले की जाँच भी शुरू कर दी है। ये इस तरह का कोई पहला मामला नहीं है। हाल ही में तरनतारन जिले के कस्बा पट्टी में 6 निहंगों ने तलवार से काट कर एक व्यक्ति की हत्या कर दी थी। घटना मंगलवार (6 अगस्त, 2024) की ही है। उससे पहले ऐसा ही एक मामला लुधियाना से सामने आया था, जहाँ शिवसेना नेता संदीप थापर पर हमला कर दिया गया था। वो हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

वहीं अमृतसर वाले ताज़ा मामले की बात करें तो पीड़ित निशान सिंह मनरेगा मजदूर है। वो बुटारी का रहने वाला है। उसका बयान पुलिस ने दर्ज कर लिया है और FIR में हैप्पी सिंह को आरोपित बनाया है। निशान सिंह ने शिकायत में बताया कि सोमवार (4 अगस्त, 2024) को वो गुरुद्वारा में गया था, इस दौरान उसने हैप्पी सिंह से सिर्फ इतना पूछा कि क्या चाय बनी है तो उसने बहस करना शुरू कर दिया। हाथ-पाँव पर तलवार से 4 बार वार किए

निशान सिंह ने जब शोर मचाया तो उसका चचेरा भाई वहाँ दौड़ा आया। उसने किसी तरह पीड़ित को वहाँ से छुड़ा कर अस्पताल में भर्ती करवाया। फ़िलहाल वहीं पर उसका इलाज चल रहा है। घायल के परिजनों ने माँग की है कि गुरुद्वारा के सेवादार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। आरोपित नशे का भी आदी है। पुलिस ने कहा है कि आरोपित को जल्द ही काबू किया जाएगा। निहंग सिखों को अक्सर टोल नाकों पर भी कर्मचारियों पर हमला करते हुए देखा गया है।

लाश का लिंग देख (खतना हुआ है या नहीं) हिन्दू-हिन्दू चिल्लाए कट्टरपंथी… फिर मुस्लिम भीड़ ने किया अट्टाहास: बांग्लादेश से सामने आया भयावह वीडियो

बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के खिलाफ चालू हुआ विरोध प्रदर्शन अब हिन्दू समुदाय के विरुद्ध हिंसा में बदल गया है। हिन्दुओं के कई मंदिरों, घरों और दुकानों को निशाना बनाया गया है। अनगिनत हिन्दू बांग्लादेश के कट्टरपन्थी मुस्लिमों के हाथों मारे जा चुके हैं। इस बीच, कट्टरपन्थियों की हिंदुओं के प्रति बर्बरता और घृणा को दिखाता हुआ एक वीडियो वायरल हुआ है। कट्टरपन्थी, खतना जाँच कर हिन्दुओं को मार रहे हैं।

वीडियो में मुस्लिम कट्टरपन्थियों को जमीन पर पड़े एक मृत व्यक्ति को घेरे हुए देखा जा सकता है। मृतक के घायल सिर के नीचे खून बह रहा है, और उसके हाथ हथकड़ी से बंधे हुए हैं। उसके चारों ओर कई लोग जमा हैं। एक आदमी, जिसका चेहरा वीडियो में नहीं देखा जा सकता, एक छड़ी की मदद से मृतक व्यक्ति को नंगा कर देता है और उसके गुप्तांग की जाँच करता है, कि क्या उसका खतना हुआ था। इस लाश के चारों तरफ खड़े लोग ‘हिन्दू, हिन्दू’ चिल्लाते हैं और हँसते हैं।

गौरलतब है कि इस वीडियो को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों से हटा लिया गया है, इसलिए हम इसे यहाँ साझा नहीं कर रहे।

बांग्लादेश में निशाना बनाए जा रहे हिन्दू

बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण को लेकर लगातार राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है। इस मौके का फायदा उठाकर इस्लामी कट्टरपंथियों ने देश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमले शुरू कर दिए हैं। 5 अगस्त, 2024 को यह बात भी सामने आई कि शेख हसीना सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की आड़ में जिहादियों ने बांग्लादेश में हिंदुओं के घरों, दुकानों और मंदिरों पर हमला किया।

प्रधानमंत्री पद से हसीना के इस्तीफे के बावजूद विरोध प्रदर्शन जारी रहे और हिंदुओं पर हमले भी चलते रहे। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने भी संसद में बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों पर चिंता जताई है। इससे पहले ऑपइंडिया ने बांग्लादेश हिन्दू बौद्ध ईसाई एकता परिषद द्वारा जारी 54 हमलों की सूची और बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार द्वारा रिपोर्ट किए गए हमलों के बारे में बताया था।

सोशल मीडिया पर हिंदुओं पर हमलों के कई वीडियो और तस्वीरें सामने आईं हैं। जैसे-जैसे समय निकल रहा है, तस्वीरों और वीडियो के साथ हमलों की और जानकारी सामने सामने आ रही है। पहले बताए गए 54 हमलों के अलावा, 6 अगस्त, 2024 को भी हिन्दुओं के विरुद्ध हमले हुए, जिनके बारे में ऑपइंडिया ने जानकारी दी।

कल ताजमहल को वक्फ संपत्ति बताएँगे, फिर पूरे हिंदुस्तान को: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने वक्फ बोर्ड को जमकर लताड़ा, बुरहानपुर के किले एवं महलों पर कर दिया था दावा

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मंगलवार (6 अगस्त) को राज्य वक्फ बोर्ड के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें बुरहानपुर किले पर मालिकाना हक बताया था। वक्फ बोर्ड ने दावा किया था कि शाह शुजा का मकबरा, नादिर शाह का मकबरा, बीबी साहब की मस्जिद और बुरहानपुर किले में स्थित महल वक्फ की संपत्ति है। कोर्ट ने कहा कि कल पूरे भारत को वक्फ संपत्ति घोषित करके उस दावा कर देंगे।

दरअसल, साल 2013 में वक्फ बोर्ड ने इन पर अपना स्वामित्व जताते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से इन स्थलों को खाली करने के लिए कहा। इस पर ASI ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की। इसमें कहा गया कि बुरहानपुर के एमागिर्द गाँव में लगभग 4.448 हेक्टेयर में फैली यह संपत्ति पहले से ही प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम 1904 के तहत संरक्षित है।

ASI ने कहा कि संरक्षित स्मारकों के रूप में इनका दर्जा हटाए बिना इन संपत्तियों को वक्फ संपत्ति के रूप में पुनर्वर्गीकृत नहीं किया जा सकता। दूसरी ओर, वक्फ बोर्ड ने तर्क दिया कि उसने उचित नियम के तहत इन संपत्तियों को वक्फ संपत्ति घोषित किया था। इसलिए ASI को परिसर हटाने का उसके पास अधिकार है। बोर्ड ने कहा कि ASI को वक्फ ट्रिब्यूनल में जाना चाहिए थी।

न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया की पीठ ने 26 जुलाई के अपने आकलन का उल्लेख किया कि ये 1913 और 1925 में प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम, 1904 के तहत अधिसूचित किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि यह दिखाने के लिए कोई दस्तावेज नहीं है कि इन संपत्तियों को इससे कभी भी अलग नहीं किया गया था, जैसा कि प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम, 1904 की धारा 11 में प्रावधान है।

इसमें कहा गया है कि वक्फ बोर्ड ने वक्फ अधिनियम 1995 की धारा 5(2) के तहत जारी अधिसूचना के आधार पर अपना स्वामित्व दावा पेश किया था। हालाँकि, बोर्ड पूरी अधिसूचना अदालत को सौंपने में विफल रहा। हालाँकि किसी भी पक्ष ने अधिसूचना को चुनौती नहीं दी। न्यायालय ने कर्नाटक वक्फ बोर्ड बनाम भारत सरकार (2004) मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का भी हवाला दिया।

कोर्ट ने कहा कि प्राचीन संरक्षित स्मारकों के स्वामित्व और रखरखाव सिर्फ भारत सरकार के पास है। किसी संपत्ति को अगर एक बार संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया जाए तो उसे वक्फ अधिनियम 1995 की तिथि पर वक्फ संपत्ति नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि भले ही किसी संपत्ति को वक्फ संपत्ति घोषित करने वाली अधिसूचना जारी की गई हो, लेकिन यह प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम 1904 के तहत जारी अधिसूचनाओं को रद्द नहीं करेगी।

उच्च न्यायालय ने कहा, “किसी संपत्ति के संबंध में जारी की गई गलत अधिसूचना, जो वक्फ अधिनियम के लागू होने की तिथि पर मौजूदा वक्फ संपत्ति नहीं है, उसे वक्फ संपत्ति नहीं बनाती है, जिससे वक्फ बोर्ड को प्राचीन और संरक्षित स्मारकों से केंद्र सरकार से बेदखल करने की माँग करने का अधिकार क्षेत्र मिल जाता है।”

न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया ने आगे टिप्पणी की, “ताजमहल को वक्फ संपत्ति क्यों नहीं माना जाए? कल आप कह सकते हैं कि पूरा भारत वक्फ संपत्ति है। यह इस तरह से नहीं चलेगा कि आप अधिसूचना जारी करेंगे और संपत्ति आपकी हो जाएगी।” अदालत ने फैसला सुनाया कि मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के सीईओ ने स्मारक की वक्फ संपत्ति पर विचार करके और एएसआई को इसे हटाने का आदेश देकर महत्वपूर्ण अवैधता की है।

बताते चलें कि एनडीए सरकार वक्फ अधिनियम, 1995 में 40 से अधिक संशोधन लाने की तैयारी कर रही है। मुस्लिमों के बोहरा और आगाखानी फिरकों को विशेष मान्यता से लेकर किसी भी संपत्ति को वक्फ संपत्ति घोषित करने की शक्तियों पर अंकुश लगाना। केंद्रीय वक्फ परिषद में सरकार गैर-मुस्लिम को भी सदस्य नियुक्त करने पर विचार कर सकती है।

प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, वक्फ़ बोर्डों द्वारा संपत्तियों पर किए गए या किए जाने वाले दावों का सत्यापन अनिवार्य किया जाएगा। वक्फ़ बोर्ड की विवादित संपत्तियों के लिए भी सत्यापन करना अनिवार्य होगा। इससे विभिन्न राज्यों के वक्फ बोर्डों द्वारा जमीनों एवं अन्य संपत्तियों को किए जाने वाले दावों पर अंकुश लगेगी। इससे विवादों को रोकने में भी मदद मिलेगी।

वक्फ के पास 9.4 लाख एकड़ संपत्ति

सूत्रों ने बताया कि मुस्लिम बुद्धिजीवियों, महिलाओं और शिया एवं बोहरा जैसे विभिन्न फिरकों की ओर से मौजूदा कानून में बदलाव की माँग की गई थी। संशोधन लाने की तैयारी 2024 के लोकसभा चुनावों से काफी पहले ही शुरू हो गई थी। सूत्र ने यह भी कहा कि ओमान, सऊदी अरब जैसे किसी भी इस्लामी देश में इस तरह की इकाई को इतने अधिकार नहीं दिए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न राज्यों के वक्फ़ बोर्डों के पास इस समय करीब 8.7 लाख संपत्तियाँ हैं। इन संपत्तियों का क्षेत्रफल करीब 9.4 लाख एकड़ है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले केंद्र सरकार ने राज्य में वक्फ बोर्डों की इस शक्ति के दुरुपयोग का संज्ञान लिया था। वक्फ बोर्डों द्वारा किसी भी संपत्ति पर दावा करने पर अधिकांश राज्यों में इन संपत्ति के सर्वे में देरी होती थी।

इसके बाद केंद्र सरकार ने वक्फ संपत्तियों की निगरानी में जिला मजिस्ट्रेटों को शामिल करने की संभावना पर भी विचार किया था। वक्फ बोर्ड के किसी भी फैसले के खिलाफ अपील सिर्फ कोर्ट के पास हो सकती है। ऐसी अपीलों पर फैसले के लिए कोई समय-सीमा नहीं होती है। कोर्ट का निर्णय अंतिम होता है। वहीं हाईकोर्ट में PIL के अलावा अपील का कोई प्रावधान नहीं है।

कॉन्ग्रेस ने वक्फ को दिए असीमित अधिकार

यहाँ बताना जरूरी है कि साल 1954 में पंडित जवाहरलाल नेहरू की सरकार के समय वक्फ अधिनियम पारित किया गया। इसके बाद इसका केंद्रीकरण हुआ। वक्फ एक्ट 1954 वक्फ की संपत्तियों के रखरखाव का काम करता था। इसके बाद से इसमें कई बार संशोधन हुआ। साल 2013 में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने बेसिक वक्फ़ एक्ट में संशोधन करके वक्फ बोर्डों को और अधिकार दिए थे।

‘आप भारत की गर्व हो’: विनेश फोगाट के लिए PM मोदी ने IOA को सारे घोड़े खोलने के दिए आदेश, PT उषा को फोन पर बोले – दर्ज कराइए कड़ा विरोध

भारतीय पहलवान विनेश फोगाट पेरिस ओलंपिक 2024 में स्वर्ण पदक से सिर्फ एक जीत दूर थीं, इसी बीचा अचानक से खबर आई कि फाइनल मैच से पहले किए गए परीक्षण में उनका वजन तय मानक से 100 ग्राम अधिक पाया गया है। इसके बाद उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। उन्होंने अपने पिछले मैच में जापान की युई सुसाकी को हरा दिया गया जो पिछले ओलंपिक की गोल्ड मेडलिस्ट थीं। हरियाणा की 29 वर्षीय पहलवान 50 किलोग्राम वर्ग में खेलती हैं। अब उन्हें अयोग्य घोषित किए जाने के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सक्रिय हो गए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘भारतीय ओलंपिक संघ’ (IOA) अध्यक्ष PT उषा से फोन पर बातचीत की और उन्हें सारे उपलब्ध विकल्प आजमाने के लिए कहा। पीएम मोदी ने उनसे विनेश फोगाट मामले को लेकर सारी जानकारी ली। उन्होंने ये निर्देश भी दिया कि IOC के समक्ष विनेश फोगाट को अयोग्य घोषित किए जाने के खिलाफ मजबूर विरोध दर्ज कराया जाए, अगर इससे भारतीय महिला पहलवान को मदद मिलती है तो। बता दें कि मोदी सरकार लगातार खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और संसाधन मुहैया कराने को लेकर सजग रहती है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने भारतीय खेल प्रशंसकों के लिए दुःख की इस घड़ी में सोशल मीडिया के जरिए कहा, “विनेश, आप चैंपियनों में चैंपियन हैं! आप भारत का गौरव हैं और हर भारतीय के लिए प्रेरणा हैं। आज की ये खबर दुःखी करने वाली है। काश मैं शब्दों में उस निराशा को व्यक्त कर पाता जो मैं अनुभव कर रहा हूँ। साथ ही, मैं जानता हूँ कि आप सामर्थ्य की प्रतिमूर्ति हैं। चुनौतियों का सामना करना हमेशा से आपका स्वभाव रहा है। और मजबूत होकर वापस आओ! हम सब आपके लिए प्रार्थना कर रहे हैं।”

बुधवार (7 अगस्त, 2024) की दोपहर में विनेश फोगाट को अयोग्य घोषित किए जाने की खबर आने के बाद विनेश फोगाट के ससुर राजपाल राठी ने कहा कि उन्हें फोन के जरिए इस खबर के बारे में पता चला है। उन्होंने कहा कि पूरे देश को पता है कि राजनीतिक खेल हो रहा है, 100 ग्राम अधिक वजन होना बड़ी बात नहीं है। उन्होंने इसे षड्यंत्र बताते हुए कहा कि इसमें बृजभूषण शरण सिंह और सरकार का हाथ है। उन्होंने कहा कि बाल कटा देने से 100 ग्राम वजन कम हो जाता है। उन्होंने कहा कि विनेश फोगाट के बाल कटवा दिए जाने चाहिए थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि विनेश फोगाट के साथ जो सपोर्ट स्टाफ हैं उन्होंने कोई मदद नहीं की। राजपाल राठी ने कहा कि विनेश फोगाट अपने पसंद के जिन लोगों को साथ ले गई थीं उन्हें पोडियम तक जाने ही नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि विनेश फोगाट ने पहले भी बार-बार कहा है कि उनके साथ षड्यंत्र रचा जा सकता है, अब ये साबित हो गया है। हरियाणा की महिला पहलवान के ससुर ने कहा कि लोग सड़क जाम करेंगे और तोड़फोड़ करेंगे तो इसकी गारंटी परिवार नहीं लेगा। उन्होंने कहा कि वो अपने घर के अंदर हैं, लेकिन बाहर क्या होगा इससे उनका कोई लेना-देना नहीं।

राजपाल राठी ने कहा कि उनके पास फोन आ रहे हैं कि आंदोलन होगा, लेकिन हम इसके खिलाफ हैं और इसका समर्थन नहीं करते, हम सिर्फ प्रतिक्रिया दे रहे हैं और अपनी नाराज़गी दिखा रहे हैं। बता दें कि विनेश फोगाट के पति सोमवीर राठी भी पहलवान हैं। सोमवीर के पिता राजपाल ने कहा कि 1 दिन पहले भी वजन किया गया था लेकिन उसमें कोई गड़बड़ी नहीं निकली। उन्होंने कहा कि 1 दिन पहले जो मुकाबले हुए हैं उन्हें कैसे रद्द किया जा सकता है। उनका मानना था कि विनेश फोगाट को चाँदी तो मिलनी चाहिए थी क्योंकि वो फाइनल में पहुँच चुकी थीं।

क्यों फाइनल में पहुँचकर अयोग्य घोषित हो गईं विनेश फोगाट, सेमीफाइनल में कैसे हुई थी एंट्री: जानें सारे सवालों के जवाब, PM मोदी ने भी दुख जताया

भारतीय पहलवान विनेश फोगाट को पेरिस ओलंपिक के फाइनल मुकाबले से बाहर कर दिया गया है। उन्हें पेरिस ओलंपिक के लिए अयोग्य पाया गया है। विनेश फोगाट का वजन 50 किलोग्राम से कुछ अधिक मिला है। अब उन्हें पेरिस ओलंपिक से बिना कोई मेडल लिए लौटना पड़ेगा।

बुधवार (7 अगस्त, 2024) को पेरिस ओलंपिक में कुश्ती के 50 किलोग्राम वर्ग के फाइनल मुकाबले से ठीक पहले 100 ग्राम वजन अधिक होने के कारण विनेश फोगाट को अयोग्य घोषित किया गया। उन्हें फाइनल मुकाबले में रात 11 बजे सारा हिल्डब्राट से भिड़ना था। इससे पहले मंगलवार (6 अगस्त, 2024) को क्वालिफिकेशन और सेमीफाइनल जीत कर फाइनल में पहुँची थी।

क्यों बाहर हुईं, क्या है नियम?

विनेश फोगाट को वजन अधिक होने के कारण बाहर किया गया। दरअसल, कुश्ती के नियमों के अनुसार, किसी भी खिलाड़ी का वजन दो बार तोला जाता है। पहले सबसे शुरुआती क्वालिफिकेशन स्तर पर उसका वजन तोला जाता है। इसके बाद अगर वह इनमें जीतता है तो फाइनल मुकाबले से पहले उसका वजन दोबारा तोला जाता है।

विनेश फोगाट मंगलवार को शुरूआती मुकाबले से पहले वजन सीमा के भीतर थीं। इसके बाद वह जीत गईं तो बुधवार को उनका वजन दोबारा तोला गया लेकिन इसमें वह वजन सीमा से 100 ग्राम अधिक निकलीं। इस कारण उन्हें अयोग्य घोषित किया गया।

2 किलो अधिक था, घटाने की कोशिश भी हुई

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि मंगलवार को जीतने के बाद उनका वजन संभवतः 2 किलोग्राम बढ़ गया था। विनेश फोगाट और उनकी टीम ने बुधवार की पूरी रात इस बात के लिए मेहनत की कि उनका वजन सीमा के भीतर आ जाए। वह काफी हद तक इसमें सफल हुईं लेकिन जब बुधवार सुबह उनका वजन तोला गया तो वह 100 ग्राम अधिक निकलीं। इस कारण से ओलंपिक से उनको बाहर कर दिया गया और वह अब फाइनल नहीं खेलेंगी।

अब कौन सा मेडल मिलेगा?

अयोग्य घोषित होने से पहले तक विनेश फोगाट का सिल्वर मेडल पक्का था। यदि वह फाइनल में जीत जातीं तो उन्हें गोल्ड मेडल मिलता। लेकिन अयोग्य घोषित होने के बाद उन्हें कोई भी मेडल नहीं मिलेगा और उन्हें ओलंपिक के कुश्ती रैंकिंग में सबसे नीचे रखा जाएगा। उन्हें कोई रैंकिंग भी नहीं दी जाएगी। ओलंपिक कमेटी अब कुश्ती के 50 किलो वर्ग में एक गोल्ड मेडल और दो ब्रान्ज मेडल दिए जाएँगे। विनेश फोगाट को अगले ओलंपिक के लिए तैयारी करनी पड़ेगी।

विनेश फोगाट के ओलंपिक से अयोग्य घोषित होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी दुख जताया है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “विनेश, आप चैंपियनों की चैंपियन हैं। आप भारत का गौरव हैं और हर भारतीय के लिए प्रेरणा हैं। आज की हार दुखी करने वाली है। काश मैं शब्दों में उस निराशा को व्यक्त कर पाता जो मैं अभी मैं महसूस कर रहा हूँ। मैं जानता हूँ कि आप बेहद दृढ़ हैं। चुनौतियों का सामना करना आपका स्वभाव रहा है। आप मजबूत होकर वापस आइए। हम सब आपके लिए प्रार्थना करेंगे।

अयोध्या गैंगरेप पीड़िता का अस्पताल में अबॉर्शन, डॉक्टर बोले- 12 साल की बच्ची का शरीर नहीं था डिलीवरी लायक: अब भ्रूण की DNA जाँच से पता चलेगा आरोपित का नाम

अयोध्या के गैंगरेप मामले में 12 साल की पीड़िता का लखनऊ के केजीएमयू अस्पताल में मंगलवार (7 अगस्त 2024) की शाम अबॉर्शन करवा दिया गया। डॉक्टरों का कहना था कि पीड़िता का शरीर डिलीवरी लायक नहीं है इसलिए यह फैसला लिया गया। डॉक्टरों ने बताया कि पीड़िता की हालत स्थितर है। आरोपित की पहचान के लिए अस्पताल ने भ्रूण का सैंपल संभाल कर रख लिया है। आगे इसकी डीएनए जाँच होगी और रिपोर्ट आने के बाद आगे कार्रवाई होगी।

बताया जा रहा है कि पीड़िता 12 हफ्ते की गर्भवती थी। उसे अयोध्या महिला जिला अस्पताल से लखनऊ के केजीएमयू में भर्ती करने के बाद अबॉर्शन से पहले परिवार से सहमति ली गई और डॉक्टरों की सलाह पर उसका गर्भपात कराया गया।

अब वह एक हफ्ते डॉक्टरों की निगरानी में रहेगी। रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि पुलिस ने आरोपित की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट करवाने का निर्णय लिया है। मगर इस संबंध में आधिकारिक बयान नहीं जारी किया गया है।

उल्लेखनीय है कि अयोध्या में ओबीसी लड़की से रेप का मामला अयोध्या के थाना क्षेत्र पूराकलंदर का है। मीडिया में इसकी जानकारी 29-30 जुलाई को हुई थी। बताया गया था कि कैसे एक OBC समुदाय की एक मजदूर महिला की 12 वर्षीया नाबालिग बेटी के साथ मोईद खान ने गलत किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना खुलने से लगभग 75 दिन पहले पीड़िता अपनी माँ के साथ मजदूरी कर के लौट रही थी। तभी रास्ते में मोईद की दुकान में काम करने वाले नौकर राजू खाँ ने पीड़िता को टोस्ट लेने के लिए अपनी दुकान पर बुलाया। लड़की पहले भी मोईद की दुकान पर आती जाती रही थी इसीलिए वो विश्वास कर के वहाँ चली गई।

बताया जा रहा है कि दुकान में राजू और उसके मालिक मोईद ने पीड़िता से बारी-बारी सामूहिक दुष्कर्म किया। इसी दौरान आरोपितों द्वारा रेप का वीडियो भी बना लिया गया। किसी को बताने पर वीडियो वायरल करने की धमकी भी दी गई। बाद में इसी वीडियो से डरा-धमका कर पीड़िता से 2 महीने तक दोनों आरोपितों ने गैंगरेप किया। इस वजह से पीड़िता गर्भवती हो गई। लड़की के पेट में दर्द होने पर माँ को शक हुआ। जब यह बात लड़की की माँ को पता चली तो उसने पूरी वजह पूछी। पीड़िता ने सारी बात अपनी माँ को बता दी। आखिरकार मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई।

मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर हिन्दू संगठनों का जमावड़ा शुरू हो गया। भाजपा और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के साथ निषाद पार्टी के सदस्य भी थाने पर जमा हो गए और नारेबाजी करने लगे। मौके पर पुलिस फोर्स पहुँची और नाराज लोगों को समझा कर शाँत करवाया। जाँच के दौरान यह भी पता चला कि जिस भदरसा पुलिस चौकी क्षेत्र की यह घटना है वह आरोपित मोईद खान की ही प्रॉपर्टी में चल रही थी। रात भर में ही पुलिस चौकी को मोईद खान की प्रॉपर्टी से अलग जगह शिफ्ट किया गया। इस मामले में अखिलेश यादव ने डीएनए जाँच की माँग की थी। वहीं अयोध्या के सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा था कि उन्हें इस मामले में जानकारी नहीं है। बात पता चलने पर वो कोई कमेंट करेंगे। हालाँकि उनकी तस्वीरें इस बीच मोईद खान के साथ खूब चर्चा में रहीं।

विनेश फोगाट अयोग्य घोषित, नहीं मिलेगा कोई मेडल: फाइनल में पहुँचने के बाद हुईं डिस्क्वालिफाई, 50kg से ज्यादा निकला वजन

महिला कुश्ती के 50 किग्रा. वर्ग के फाइनल में पहुँचने के बाद भारतीय पहलवान विनेश फोगाट को ओलंपिक में अयोग्य करार दे दिया। रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि उनका वजन 50 किलो से ज्यादा होने की वजह से उन्हें डिस्क्वालिफाई किया गया। नियमों के अनुसार, किसी भी रेसलर को किसी भी वर्ग में सिर्फ 100 ग्राम ज्यादा वजन की छूट दी जाती है लेकिन विनेश का वेट इससे ज्यादा था।

भारतीय ओलंपिक संघ ने इस संबंध में मीडिया में कहा भारतीय पहलवान विनेश फोगट को अधिक वजन होने के कारण महिला कुश्ती 50 किग्रा से अयोग्य घोषित कर दिया गया। भारत को उनके अयोग्य करार दिए जाने पर खेद है। रात भर टीम द्वारा किए गए बेहतरीन प्रयासों के बावजूद, आज सुबह उनका वजन 50 किग्रा से कुछ ग्राम अधिक पाया गया। टीम द्वारा आगे इस समय कोई टिप्पणी नहीं की जाएगी। भारतीय टीम अनुरोध करती है कि अब विनेश की निजता का सम्मान किया जाए और आने वाले खेलों पर ध्यान दिया जाए।

स्वाति मालीवाल की पिटाई के बाद बिभव कुमार के साथ मौजूद थे CM केजरीवाल, दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में खुलासा: संजय सिंह और आतिशी के बयान बदलने को लेकर भी जाँच

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल अपने पूर्व सचिव बिभव कुमार के साथ राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल पर हमले के बाद मौजूद थे। यह जानकारी दिल्ली पुलिस की चार्जशीट से निकल कर आई है। बिभव कुमार ने दिल्ली मुख्यमंत्री आवास में AAP की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल पर हमला किया था।

आजतक की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस इस मामले में जाँच करके पता लगा रही है कि क्या स्वाति मालीवाल पर हमले के पीछे कोई बड़ी साजिश थी। दिल्ली पुलिस ने मामले के सभी एंगल को जाँचते हुए हाई कोर्ट में चार्जशीट दायर की है। दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में बताया गया है कि जब बिभव कुमार ने स्वाति मालीवाल को पीट दिया, उसके बाद CM केजरीवाल भी घटनास्थल पर आ गए। चार्जशीट में बिभव पर स्वाति मालीवाल को 7-8 चांटे मारने का आरोप लगा है।

दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि घटना के बाद AAP नेताओं ने अपने बयान बदले। दिल्ली पुलिस ने कहा कि AAP राज्यसभा सांसद संजय सिंह और दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी मार्लेना ने पहले बिभव कुमार की निंदा की लेकिन बाद में पूछताछ के दौरान अपने पुराने बयान को नहीं दोहराया और बिभव कुमार को बचाने का प्रयास किया। दिल्ली पुलिस इसी कारण से इस मामले में बड़ी साजिश का एंगल तलाश रही है।

पुलिस ने यह भी कहा है कि जहाँ मारपीट हुई, वहाँ के कुछ CCTV फुटेज मीडिया में जानबूझ कर लीक किए गए। दिल्ली पुलिस ने इसी के साथ उस ऑटो ड्राईवर का बयान भी इस घटना के विषय में लिया है, जिसने मारपीट के बाद स्वाति मालीवाल को CM आवास से उनके घर तक पहुँचाया था।

इससे पहले बिभव कुमार के CM आवास में मौजूद होने को लेकर कोर्ट ने भी प्रश्न उठाए थे। सुप्रीम कोर्ट ने बिभव कुमार की इस मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि एक गुंडे की CM आवास में क्या जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने स्वाति मालीवाल पर हमले को लेकर बिभव कुमार से शर्म करने को कहा था और जमानत याचिका ठुकरा दी थी।

बिभव कुमार पर आरोप है कि उन्होंने 13 मई, 2024 को CM केजरीवाल से मिलने आई AAP की राज्यसभा सांसद से मारपीट की। स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया है कि उन पर बिभव कुमार ने हमला किया और उनको जमीन पर गिरा कर मारा। स्वाति मालीवाल ने कहा कि उनकी पिटाई के दौरान CM केजरीवाल के आवास में मौजूद लोगों ने उनकी मदद नहीं की।

बांग्लादेश में पुलिस भी नहीं सुरक्षित, 29 थाने जलाए, 50 सुरक्षाकर्मियों की हत्या: जो पहले संभालता था ट्रैफिक, अब वो बना पुलिस का मुखिया

बांग्लादेश में जारी इस्लामी कट्टरपंथी हिंसा के कारण पुलिस भी असुरक्षित महसूस कर रही है। हिंसक भीड़ देश भर में चुन चुन कर पुलिस थानों को निशाना बना रही है। बांग्लादेश में लगभग 30 थानों में तोड़फोड़ और आगजनी की है। राजधानी ढाका में पुलिस और दंगाइयों के बीच हुई झड़प के कारण एक ही दिन में दर्जनों लोग मारे गए हैं। बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही पुलिस के मुखिया को हटा कर नए व्यक्ति की नियुक्ति की गई है।

देश भर में पुलिस थानों पर हमला

बांग्लादेश के भीतर सभी जगह पुलिस थानों पर हमला हो रहा है। बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, कम से कम 29 थानों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया गया है। यहाँ के सामान और गोला-बारूद को लूट लिया गया है और आगजनी भी की गई है। इसके अलावा भी कई थानों को निशाना बनाया गया है। राजधानी ढाका के अलावा मीरपुर, खुलना और चट्टोग्राम जैसे शहरों में भी पुलिस वालों के खिलाफ हिंसा हुई है। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि सोमवार (5 अगस्त, 2024) को सत्ता परिवर्तन के बाद से अब तक कम से कम 50 पुलिसवालों को मारा जा चुका है।

देश के अधिकांश थाने खाली पड़े हैं और पुलिसवाले अपनी सुरक्षा के लिए भाग गए हैं। अधिकांश अपने रिश्तेदारों के यहाँ छुपे हुए है। इस्लामी भीड़ के हमले से बांग्लादेश पुलिस का मुख्यालय भी अछूता नहीं रहा है। इसे भी हमलवारों ने तोड़फोड़ दिया है। इस्लामी कट्टरपंथी पुलिस से बदला लेना चाहते हैं क्योंकि शेख हसीना के राज के दौरान पुलिस ने उनके दंगे रोकने की कोशिश की थी। ढाका के जत्राबाड़ी स्टेशन को पूरी तरह बर्बाद कर दिया गया जबकि मीरपुर से हथियार लूट लिए गए। कई जगह थानों के बाहर पुलिस वालों की लाशें मिली हैं।

पुलिस के साथ झड़प में 31 की मौत

ढाका के सवर इलाके में पुलिस के साथ झड़प में 31 लोग मारे गए हैं। यहाँ एक पिकप में जा रहे दो लोगों को जला कर मार दिया गया, यह संभवतः पुलिसकर्मी थे। इस हिंसा के दौरान कई आम लोगों के गोलीबारी से मौत होने की बात भी सामने आई है। सिलहट में भी तीन पुलिसकर्मियों को मार दिया गया है। बताया गया कि शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद भी लगभग 100 मौतें हुई हैं। पुलिस के अलावा आम लोगों को भी इस्लामी कट्टरपंथी मार रहे हैं। ढाका में ही दो लोगों को मर कर उनकी लाश लटका दी गई।

पुलिस के मुखिया को भी हटाया

बांग्लादेश में झड़प और पुलिस के आवामी लीग सरकार के लिए काम करने के आरोपों के बीच पुलिस मुखिया IGP चौधरी अब्दुल्लाह अल ममून को हटा दिया गया है। वह लगातार कई साल से इस पद पर बने हुए थे। उनकी जगह ट्रैफिक के मुखिया मैनुल इस्लाम को अब IGP पुलिस बनाया गया है। उनकी नियुक्ति वर्तमान में सत्ता संभाल रही सेना और अंतरिम सरकार ने की है। पुराने मुखिया को इसीलिए हटाया गया है क्योंकि उनकी नियुक्ति हसीना सरकार में हुई थी।

हिंसा करने वाले 2400 जेल से छूटे

बांग्लादेश में हसीना सरकार गिरने के बाद जमात-ए-इस्लामी और BNP के कट्टर इस्लामी नेताओं समेत 2400 लोगों को जेल से रिहा कर दिया गया है। इन लोगों को जून-जुलाई माह में बांग्लादेश में हिंसा फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इन सभी को हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ जैसे 178 मामलों में गिरफ्तार किया गया था। इनमें से कई पुलिसकर्मियों पर हमला करने के आरोपित भी थे। जिन लोगों को छोड़ा गया है, उनमें जमात के कई बड़े नेता हैं।

देश में जरूरी सेवाएँ ध्वस्त

बांग्लादेश में जारी हिंसा और तोड़फोड़ के कारण अधिकांश जरूरी सेवाएँ ध्वस्त हो चुकी हैं। सबसे बुरा प्रभाव बैकिंग सेवाओं पर पड़ा है। बैंक और ATM में पैसा नहीं मिल रहा है। ATM में भी इसलिए पैसे नहीं डाले जा रहे क्योंकि लगातार लूटपाट की घटनाएँ हो रही हैं। जो बैंक खुल भी रहे हैं उनमें काम नहीं हो पा रहा। बैंकों के अलावा अधिकांश दुकानें भी बंद हैं। इसके कारण आम जनता को खाने-पीने के सामान को लेकर भी दिक्कत हो रही है।

गौरतलब है कि बांग्लादेश में जुलाई महीने से ही आरक्षण खत्म करने की माँग को लेकर प्रदर्शन चल रहे थे। इस प्रदर्शन को इस्लामी कट्टरपंथियों ने हाइजैक कर लिया और इसके बाद भारी हिंसा हुई। यह हिंसा अगस्त में और बढ़ गई और प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा। शेख हसीना सोमवार (5 अगस्त, 2024) को ढाका छोड़ कर भारत आ गईं। वर्तमान में वह भारत में हैं।