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सारे दलित-आदिवासी एक जैसे पिछड़े नहीं, SC/ST आरक्षण में लागू हो सकता है कोटा: सुप्रीम कोर्ट ने 6-1 से दिया फैसला, कहा- जिनको फायदा मिला, उनको करो बाहर

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दलित और आदिवासियों को मिलने वाले आरक्षण के भीतर अधिक पिछड़े SC-ST जातियों के लिए कोटा लागू किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दलितों और आदिवासियों में पिछड़ी जातियों को राज्य आरक्षण के भीतर अधिक आरक्षण दे सकते हैं। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान बेंच ने किया है।

गुरुवार (1 अगस्त, 2024) को CJI डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली 7 सदस्यीय संविधान बेंच ने यह निर्णय दिया। इस निर्णय में 6 जज एकमत थे जबकि जस्टिस बेला त्रिवेदी ने इस पर अपनी असहमति जताई। कोर्ट ने कहा कि राज्य SC-ST को दिए जाने वाले आरक्षण के भीतर ऐसी जातियों को ज्यादा तरजीह दे सकते हैं, जो आर्थिक-सामाजिक रूप से अधिक पिछड़ गई हैं।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि SC-ST कोई एक एक सजातीय समूह नहीं है और इस बात के सबूत भी हैं। उन्होंने कहा कि आरक्षण के भीतर आरक्षण देने से संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं होता। उन्होंने कहा कि इस मामले में 6 निर्णय पहले भी आ चुके हैं और सभी में इस बात को माना गया है कि आरक्षण के भीतर आरक्षण देना सही है।

कोर्ट ने यह निर्णय सुनाने के साथ ही साफ़ कर दिया कि किसी एक जाति को 100% आरक्षण ना दिया जाए। साथ ही कोर्ट ने यह साफ किया आरक्षण के भीतर आरक्षण देने के दौरान जातियों को सूची से अंदर-बाहर करने का निर्णय तुष्टिकरण के लिए ना लिया जाए। कोर्ट ने कहा कि किसी भी जाति को तरजीह देने से पहले आँकड़े और ऐतिहासिक तथ्य जुटाए जाएँ।

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस BR गवई ने कहा कि यह राज्य सरकार का कर्तव्य है कि वह अधिक पिछड़ी जातियों को तरजीह दे। उन्होंने कहा कि SC-ST समुदाय में भी केवल कुछ ही लोग आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि SC-ST आरक्षण में भी क्रीमी लेयर पहचानी जाए और जिन जातियों को लाभ मिल चुका है, उन्हें इससे बाहर कर दिया जाए।

कोर्ट का यह निर्णय पंजाब राज्य के बनाए गए एक कानून के मामले में आया है। पंजाब ने 2006 में यह कानून बनाया था कि वह राज्य में SC-ST को दिए जाने वाले आरक्षण में भी वर्गीकरण करेगा। इस कानून को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था। इसके बाद पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट के पास पहुँची थी।

पंजाब सरकार के कानून को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के एक निर्णय के आधार पर चुनौती दी गई थी। इस निर्णय में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा था कि सारे SC-ST एक सजातीय समूह हैं और उनके आरक्षण का वर्गीकरण नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हुई सुनवाई में इस निर्णय को सही नहीं माना।

यह मामला 2020 में संविधान बेंच के पास पहुँचा था। इस मामले में केंद्र सरकार भी पंजाब के पक्ष में थी। इस निर्णय से पंजाब और तमिलनाडु जैसे राज्यों को फायदा होगा। इन राज्यों में आरक्षण के भीतर कोटा दिए जाने का प्रावधान किया गया है।

गौरतलब है कि यह माँग लम्बे समय उठ रही है कि अब उन जातियों को आरक्षण में अधिक तरजीह दी जाए जो पिछड़ी हुई हैं। वहीं उन जातियों को अब आरक्षण में कम हिस्सा दिया जाए जो इस सुविधा का लाभ उठा चुके हैं। ऐसे में कोर्ट का यह निर्णय इसका रास्ता प्रशस्त करेगा।

भारी बारिश ने फिर खोली दिल्ली की पोल, नाले में माँ-बेटे की डूबने से मौत; हिमाचल में बादल फटा: वायनाड में अब तक 250+ मौतें, 1000+ बचाए गए

बारिश और भूस्खलन के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में भारी नुकसान हुआ है। केरल के वायनाड में मंगलवार (30 जुलाई, 2024) को हुए भूस्खलन में मौतों का आँकड़ा 250 के पार पहुँच गया है। वहीं बुधवार को भी दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में बारिश से कई लोगों की मौत हुई है। देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर पानी में डूब गई है। वहीं हिमाचल प्रदेश में भी बादल फटने के कारण नुकसान की सूचना है।

वायनाड में 250 पार मौतें, 1000 बचाए

केरल के वायनाड में भूस्खलन के कारण हुई मौतों का आँकड़ा 250 पार कर गया जबकि लगभग 240 लोग अब भी लापता हैं। सेना, वायुसेना और NDRF समेत बाकी राहत बचाव दल 1000 से अधिक लोगों को इस भूस्खलन से निकाल लाए हैं। राहत बचाव का काम लगातार चल रहा है। 200 लोग घायल हैं जिन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। 8000 से अधिक लोगों को सुरक्षित इलाके में ले जाया गया है और वह राहत शिविरों में रह रहे हैं।

वायनाड हादसे में सबसे अधिक नुकसान चूरलमला और मुनदाक्कई गाँवों को हुआ है। यहाँ बनी सारी इमारतें ध्वस्त हो गई हैं। इन्हीं गाँवों से सबसे अधिक मौते भी दर्ज हुई हैं। केरल सरकार ने वायनाड में आपातकालीन यात्रा के अलावा बाहर निकलने पर रोक लगा दी है। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन भी गुरुवार (1 अगस्त, 2024) को वायनाड के दौरे पर जा रहे हैं। इस बीच गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा में बताया कि वायनाड के लिए पहले ही चेतावनी भेजी गई थी लेकिन उसे नजरअंदाज किया गया।

हिमाचल में भी बारिश का प्रलय

तेज बारिश और बादल फटने के कारण हिमाचल प्रदेश में भी भारी नुकसान हुआ है। बुधवार को हिमाचल प्रदेश के कुल्लू और मंडी जिलों में बादल फट गए। इस कारण कई इमारतें जमींदोज हो गई जबकि कई जगह सड़क भी टूट गई। 19 लोगों के लापता होने की भी सूचना है। यह सभी कुल्लू में एक बिजली संयंत्र के लिए काम कर रहे थे। कुल्लू में लगभग 20 मकानों के जमींदोज होने की खबर है। कई जगहों पर नदियों में अत्यधिक पानी आ गया है।

वहीं हिमाचल के ही मंडी जिले में भी बादल फटने से नुकसान हुआ है। यहाँ भी 2 लोगों की मौत की सूचना है। मंडी में बादल फटने के कारण 1 मौत भी हुई है। यहाँ पर बादल फटने से तीन घर भी बह गए हैं। कई जगहों पर राहत बचाव के लिए पहुँचने वाले रास्ते भी कट गए हैं। अब राहत बचाव के लिए वायु सेना से भी सम्पर्क किया जा रहा है।

दिल्ली में फिर बुरा हाल

बुधवार को हुई बारिश ने एक बार फिर दिल्ली लचर पानी निकासी व्यवस्था को उजागर कर दिया। दिल्ली के करोल बाग़, राजेन्द्र नगर और गाजीपुर समेत कई इलाकों में काफी पानी भर गया। इस कारण यातायात ठप हो गया। दिल्ली में तीन मकानों के गिरने की भी सूचना है। इसके अलावा गाजीपुर इलाके में एक माँ और बेटा एक नाले में गिर गए, इस कारण उनकी मौत हो गई। दिल्ली लक्ष्मी नगर, गणेश नगर और अन्य कई इलाकों में गलियों में भी पानी भरने की सूचना है।

24 जुलाई, 2024 को दिल्ली की एक कोचिंग में पानी भरने के कारण 3 छात्रों की मौत हुई थी। इसके बाद भी उस इलाके का हाल नहीं बदला। AAP सरकार के दिल्ली की जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने के सभी दावे फेल हो गए। भारी बारिश के कारण गुरुवार को दिल्ली के सभी स्कूलों को बंद कर दिया गया है।

‘जो हम हैं, उसे बताने में दिक्कत क्या’: काँवड़ मार्ग के हिन्दू व्यापारियों को स्वीकार है प्रशासन का आदेश, बोले- वे (मुस्लिम) फर्जी नाम रख छीनते हैं हमारा काम

उत्तर प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र में इस बार काँवड़ यात्रा के मार्ग में प्रशासन ने दुकानदारों को उनके असली नाम और पहचान के साथ दुकानदारी करने के निर्देश दिए थे। इस फैसले पर काफी हो हल्ला मचा और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया। सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन के फैसले पर अंतरिम रोक लगाते हुए शासन से अपना पक्ष रखने को कहा है। ऑपइंडिया ने इस मामले की जमीनी पड़ताल की तो सारांश में सामने आया कि पश्चिम उत्तर प्रदेश के सिर्फ अधिकतर मुस्लिम दुकानदारों को ही प्रशासन के इस फैसले से आपत्ति थी। ज्यादातर हिन्दू दुकानदार इस फैसले से खुश हैं और इसे परमानेंट लागू करने की चाहत रखते हैं।

फेब्रिकेशन के काम में भी नकली नाम

काँवड़ यात्रा में खींचे जाने वाले रथों को तैयार करने वाले दिनेश कुमार ने ऑपइंडिया से बात की। दिनेश कुमार द्वारा तैयार किए गए रथ मुज़फ्फरनगर, मेरठ और हरिद्वार में दर्जनों की संख्या में देखे जा सकते हैं। उनकी दुकान का नाम माँ हरसिद्धि देवी फेब्रिकेशन है। यह दुकान गाजियाबाद में मौजूद है। दिनेश कुमार ने बताया कि उनके काम में लोहे की कटाई और वेल्डिंग आदि प्रमुख है। उनका दावा है कि अब उनके व्यापर में भी मुस्लिम पक्ष के लोग नाम बदल कर बड़ी तादाद में शामिल हो चुके हैं।

मुस्लिमों के घरों में आबादी ज्यादा इसलिए कारोबार पर उनकी पकड़ मजबूत

दिनेश कुमार ने हमें बताया कि फेब्रिकेशन के काम में उनको लगातार घाटा हो रहा था क्योंकि मुस्लिम दुकानदार अपनी दुकानों का नाम हिन्दू देवी-देवताओं पर रख कर कारोबार कर रहे हैं। इस वजह से भी दिनेश के ग्राहक टूट कर उनके पास जा रहे हैं। वहीं दिनेश कुमार का यह भी कहना है कि उनके घर में मात्र 2 भाई है जिस वजह से लेबर आदि बाहर से मैनेज करना पड़ता है। वहीं बकौल दिनेश मुस्लिम कारोबारियों के घरों में दर्जनों लोग होते हैं और उन्हें मजदूर घर में ही मिल जाते हैं।

पूरे प्रदेश में हमेशा के लिए लागू हो ये नियम

प्रशासन द्वारा लागू किए गए फैसले से खुश हो कर दिनेश कुमार ने दावा किया कि इस निर्णय से उनका कारोबार वापस लौट रहा है। उनका दावा है कि जब से प्रशासन ने सख्ती दिखाई है तब से जनता भी जागरूक हुई है और अब कारीगरों के आधार कार्ड चेक किए जा रहे हैं। दिनेश कुमार ने यह भी उम्मीद जताई है कि जल्द ही पूरे प्रदेश में और हमेशा के लिए यह नियम लागू हो जाएगा कि सभी लोग अपने असल नामों से अपना कारोबार करें। नकली नाम से हो रहे धंधे की वजह से दिनेश कुमार ने अपने साथ कई अन्य हिन्दू दुकानदारों को पीड़ित और प्रताड़ित बताया।

जो हम हैं उसको बताने में क्या दिक्कत ?

गाजियाबाद-मेरठ रोड पर पहलवान ढाबा चला रहे अश्वनी सैनी ने ऑपइंडिया से बात की। अश्वनी सैनी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अपनी दुकान के आगे अपना नाम और रेटलिस्ट लगा रखी है। वो अपने ढाबे के शुद्ध शाकाहारी होने का दावा करते हैं। अश्वनी ने हमें बताया कि एक दुकान मालिक होने के तौर पर उनको नाम लिखने के मुद्दे पर उठाए जा रहे विवाद की वजह नहीं समझ में आ रही है। अश्वनी का कहना है कि जो ढाबा मालिक असल में है उसको लिखने में दिक्क्त क्या है।

पैसा ही नहीं बल्कि पुण्य भी कमाते हैं हम काँवड़ यात्रा में

मेरठ रोड पर देशी ठाठ शुद्ध वैष्णो भोजनालय चलाने वाले रामकुमार चौहान ने ऑपइंडिया से बात की। रामकुमार चौहान ने हमें बताया कि काँवड़ यात्रा में कारोबार के दौरान वो और अधिक जिम्मेदारी का एहसास करते हैं। उन्होंने कहा कि एक हिन्दू होने के नाते काँवड़ यात्रा उनके लिए महज पैसे कमाने का समय नहीं है बल्कि वो इस त्यौहार में पुण्य भी कमाते हैं। अपना ढाबा दिखाते हुए रामकुमार ने हमें बताया कि काँवड़ के दौरान वो न सिर्फ काँवडियों के नहाने-धोने की फ्री में व्यवस्था करते हैं बल्कि इसी दौरान उनके निशुल्क इलाज आदि का भी ख्याल रखते हैं।

प्रशासन द्वारा नाम लिखने के मुद्दे पर खड़ा किए गए विवाद को गैरजरूरी बताते हुए रामकुमार ने कहा कि वो प्रशासनिक फैसले का पूरी तरफ से स्वागत करते हैं। हमें यह भी बताया गया कि काँवड़ यात्रा के दौरान तमाम कारीगरों को भी सभ्यता और सलीके से खाना बनाने के लिए व्यवहार में भी और अधिक मृदुता लगाने के लिए समझाया जाता है। रामकुमार ने माना कि दिल्ली से हरिद्वार की तरफ जाने वाला हाइवे नाम बदल कर चलाए जा रहे ढाबों से बुरी तरफ से प्रभावित हैं। उन्होंने इस पर लगाम लगाने की माँग भी उठाई।

बंद हो चुका मुज़फ्फरनगर का सावरकर ढाबा

ऑपइंडिया ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में मुज़फ्फरनगर जिले में सावरकर ढाबा का बोर्ड देखा। यह बोर्ड मुज़फ्फरनगर-मेरठ हाइवे पर चीनी मिल के पास है। ढाबा बंद हो चुका है और बोर्ड पर धूल की परत चढ़ी हुई थी। इसके मालिक सत्य प्रकाश को हमने जैसे-तैसे खोजा और बात की। सत्य प्रकाश ने बताया कि वीर सावरकर के नाम से ढाबा खोलने के पीछे उनका मकसद न सिर्फ ग्राहकों को बेहतर खाना-पीना उपलब्ध करवाना था बल्कि उन्हें देश के एक महान क्रांतिकारी के नाम से परिचित भी करवाना था।

हालाँकि सत्य प्रकाश अब अपना ढाबा बंद होने से काफी निराश हैं। नाम न ले कर परोक्ष इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ खास सोच रखने वालों को उनके ढाबे का नाम पसंद नहीं आया। ढाबे पर न सिर्फ ग्राहक आने बंद हो गए थे बल्कि चोरी जैसी वारदातें भी हुईं। बंद हो चुके सावरकर ढाबे के मालिक ने यह भी माना कि मुज़फ्फरनगर और आसपास के इलाकों में फर्जी नाम और पहचान से कई ढाबे चल रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन इस दिशा में कड़े कदम उठाएगा।

जिनके नाम पर सांसद बना रावण, उनकी भी मदद नहीं कर रही भीम आर्मी; क्योंकि सुमित की साली की हत्या करने वाला आलम है: पीड़ित से सुनिए क्या होता है मुस्लिम वोट का डर

गाजियाबाद में मोहम्मद आलम ने कुछ दिन पहले अपनी लिव-इन पार्टनर पूजा का गला घोंटकर उसे मौत के उतार दिया था। अब इसी मामले में आगे पता चला है कि पूजा, भीम आर्मी के सदस्य सुमित कुमार की साली थी। सुमित ने दावा किया है कि वो दलित संगठन भीम आर्मी के वरिष्ठ सदस्य थे। उनकी साली के साथ जब इतनी बड़ी घटना घटी तो वो संगठन के पास मदद के लिए गए लेकिन वहाँ उन्हें जीरो समर्थन मिला।

ये जानकारी स्वराज्य की वरिष्ठ पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा के ट्वीट से सामने आई है। अपने ट्वीट में स्वाति ने इस केस के संबंध में बताया, “8 साल से सुमित कुमार भीम आर्मी के वरिष्ठ सदस्य रहे। एक दलित संगठन जिसके मुखिया सांसद चंद्र शेखर रावण है और इसका नाम भीम राव अंबेडकर के नाम पर रखा गया है। पिछले हफ्ते जब पूजा की हत्या आलम ने की तब सुमित संगठन के पास मदद के लिए गए, लेकिन वहाँ उन्हें जीरो सपोर्ट मिला।”

वह बताते हैं कि घटना के बाद वह आजाद समाज पार्टी के कार्यालय गए, वहाँ उन्होंने अलग-अलग लोगों से बात की लेकिन किसी ने उनकी कोई मदद नहीं की। वो कहते हैं कि उन्हें लगता है कि उनकी मदद इसलिए नहीं की गई क्योंकि चुनाव आ रहे हैं और हो सकता है इलेक्शन की वजह से किसी ने उनका साथ नहीं दिया क्योंकि कोई मुस्लिम वोट नहीं हारना चाहता।

स्वाति गोयल शर्मा ने आगे लिखा- “मैं पूजा के परिजनों से मिली। वो अपने पीछे अपने पहले पति से तीन बच्चे छोड़ गई है। परिवार को उनकी परवरिश के लिए वित्तीय सहायता की जरूरत है।”

बता दें कि गाजियाबाद में पिछले हफ्ते पूजा की हत्या का मामला सामने आया था। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया था कि लंबे समय से पूजा और मोहम्मद आलम साथ थे लेकिन कुछ समय से पूजा अपने पति के साथ रहने की बात कहने लगी थी इसलिए आलम ने उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी।

हालाँकि पुलिस ने जब आरोपित को पकड़कर पूछताछ की तो उसने बताया कि पूजा और उसका निकाह 6 माह पहले हो चुका था ऐसे में वो आलम पर दबाव बनाती थी कि वो उसी के साथ रहे। एक दिन आलम का बेटा अस्पताल में भर्ती हुआ तो पूजा कहने लगी कि आलम ने उसका हाल नहीं पूछा लेकिन बेटे के पास चला गया। इसी के बाद उनका विवाद हुआ और आलम ने पूजा को बुलाकर सैंट्रो कार में बिठाया, फिर उसा गला चुन्नी से घोंट दिया। बाद में शव नहर में डालकर भाग आया और डरकर थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने जाँच की तो पूरा मामला सामने आया, फिर मोहम्मद आलम को गिरफ्तार किया गया।

गुजरने वाली होती है ट्रेन, रेल की पटरियों पर साइकिल- सिलेंडर-मुर्गा-पत्थर… रख देता है गुलजार शेख: Video वायरल होने के बाद यूट्यूबर पर एक्शन की माँग

बीते कुछ दिनों में देश में रेल हादसों में बढ़ोतरी आई है। इन रेल हादसों के पीछे के कारण जाँच के बाद स्पष्ट होंगे लेकिन ट्रेनों को खतरे में डालने के कुछ वीडियो वायरल हो रहे हैं। गुलजार शेख नाम का एक शख्स ‘एक्सपेरिमेंट’ के नाम पर ट्रेन की पटरियों पर सिलेंडर और साइकिल जैसी चीजें रख रहा है।

गुलजार शेख यूट्यूब पर व्यूज बढ़ाने के लिए लगातार वन्दे भारत जैसी ट्रेनों के आगे भी ऐसे सामान रख रहा है, जिससे रेल यात्रियों का जीवन खतरे में पड़ सकता है। उसके रेल पटरी पर साइकिल, सिलेंडर, मोटर और ऐसी ही केई वस्तुएँ रखते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं।

गुलजार शेख ने यूट्यूब पर खुद को ‘हैकर’ और ‘एक्सपेरिमेंट’ करने वाला बता रखा है। उसका यूट्यूब पर गुलजार इंडियन हैकर नाम से चैनल है, इस पर 2.35 लाख सब्सक्राइबर हैं। वह इसी पर वीडियो डालने के लिए ट्रेनों के आगे सामान रखता है और फिर उनसे सोशल मीडिया पर व्यूज बटोरता है।

गुलजार शेख की ऐसी ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इसमें वह ट्रेन आने के पहले पटरी के बीचोंबीच एक बड़ी साइकिल डाल देता है। जब ट्रेन पूरी गुजर जाती है तो वह साइकिल दिखाता है। हालाँकि, इस मामले में कोई टक्कर नहीं हुई लेकिन यदि ऐसा होता तो ट्रेन सवार यात्रियों की जान को खतरा हो सकता था।

ऐसी ही एक और वीडियो में और ट्रेन की पटरी पर गैस सिलेंडर रखते हुए देखा जा सकता है। एक अन्य वीडियो में वह लोहे का मोटर पटरियों पर रखता है। एक और वीडियो में वह पटरी पर बाल्टी रखता है। इन सब वीडियो के बाद वह दिखाता है कि क्या नुकसान उस वस्तु को हुआ है।

उसके कुछ वीडियो काफी वायरल हुए हैं। अब उसके खिलाफ एक्शन की माँग हो रही है। उसके अधिकांश वीडियो प्रयागराज जिले के लालगोपालगंज इलाके के हैं। एक्स (पहले ट्विटर) पर भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला से लेकर तमाम लोगो उसके खिलाफ रेलवे और पुलिस से कार्रवाई करने को कह रहे हैं।

दलित बच्ची के मुँह में कपड़ा ठूँस कर गैंगरेप: महफूज, राजा (जाने का बेटा), इजरायल और रिजवान को 25-25 साल की सज़ा, पुलिस पर भी हुई थी गोलीबारी

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की एक अदालत ने दलित समुदाय की नाबालिग लड़की से गैंगरेप के आरोप में मुस्लिम समुदाय के 4 युवकों को 25-25 साल की सजा सुनाई है। इन सभी पर 30-30 हजार रुपए का जुर्माना भी ठोंका गया है। चारों आरोपितों के नाम राजा, रिज़वान, इजरायल और महफूज़ हैं। घटना 10 फरवरी 2022 की थी। तब इन चारों ने कक्षा 8 में पढ़ने वाली एक मासूम लड़की को अपनी हवस का शिकार बनाया था। सजा का एलान मंगलवार (30 जुलाई, 2024) को हुआ है। चारों आरोपितों को जेल भेज दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामले की सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश नारायण मणि त्रिपाठी की अदालत में हुई। लगभग ढाई साल चले इस मुकदमे में पुलिस ने अपनी तरफ से आरोपितों को सजा दिलाने की भरसक कोशिश की थी। समय पर आरोपितों को गिरफ्तार करने के साथ उनके खिलाफ चार्जशीट भी कोर्ट में दाखिल की गई। इसके बाद अभियोजक पक्ष ने इस केस की लगातार पैरवी की। बचाव पक्ष ने भी खुद की बेगुनाही में तमाम दलीलें दीं। हालाँकि अंत में कोर्ट ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूतों को सजा के लिए पर्याप्त माना।

अदालत ने राजा, महफ़ूज़, रिज़वान और इजरायल को पीड़िता से हुए गैंगरेप का दोषी पाया। इन सभी को 25-25 साल कैद के साथ 30-30 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। सजा के बाद चारों आरोपितों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

गुप्तांग से आ गया था खून

यह मामला गोंडा जिले के थानाक्षेत्र कोतवाली नगर का है। यहाँ 29 मार्च 2022 को एक दलित महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि 10 फरवरी 2022 को उनकी कक्षा 8 में पढ़ने वाली बेटी सुबह लगभग 8:30 पर एक सरकारी स्कूल में एक्जाम देने गई थी। रास्ते में स्कूल से लगभग 11:30 बजे दोपहर को लौटने के दौरान पीड़िता को जाने का बेटा राजा मिला। उसने लड़की का हाथ पकड़ा और जबरन शालीमार मैरिज हाल के पास एक सुनसान जगह पर ले गया। यहाँ उसने पीड़िता के मुँह में कपड़ा ठूस दिया और अपने 3 अन्य दोस्तों को बुला लिया।

इन तीन अन्य आरोपितों के नाम महफूज़, रिज़वान और इजरायल बताए जा रहे हैं। इन सभी ने बारी-बारी पीड़िता से गैंगरेप किया। पीड़िता रो कर रहम की भीख माँगती रही पर आरोपितों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। सामूहिक दुष्कर्म की वजह से पीड़िता के गुप्तांगों से खून निकलने लगा था। पीड़िता मानसिक रूप से पीड़ित भी बताई गई थी। तब उसका इलाज भी एक स्थानीय डॉक्टर इरशाद आलम के यहाँ चल रहा था। पीड़िता की माँ ने सभी 4 आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की थी। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

पुलिस पर भी बरसाईं थीं गोलियाँ

पुलिस ने यह FIR गैंगरेप की धाराओं के साथ पॉक्सो और SC/ST एक्ट के तहत दर्ज की थी। FIR दर्ज कर के आरोपित राजा की तलाश शुरू कर दी गई थी। 31 मार्च को पुलिस को मुख्य आरोपित राजा की लोकेशन गोंडा के उतरौला रोड पर मिली थी। तब पुलिस ने दबिश दे कर राजा की घेराबंदी की थी। खुद को घिरता देख कर राजा ने पुलिस टीम पर गोलियाँ बरसानी शुरू कर दी थीं। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोली चलाई थी। एक गोली राजा के पैर में लगी थी और उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।

उगल दिए थे साथियों के भी नाम

राजा की तलाशी के दौरान उसके पास से बाइक, तमंचा और कारतूस बरामद हुआ था। उसका अस्पताल में इलाज करवाया गया था और बाद में उस से पूछताछ की गई थी। पूछताछ में उसने गैंगरेप में शामिल अपने अन्य साथियों के नाम महफूज़, रिज़वान और इजरायल के तौर पर बताए थे। पुलिस ने बारी-बारी दबिश दे कर इन तीन अन्य आरोपितों को भी गिरफ्तार कर लिया था। मुठभेड़ में राजा को गिरफ्तार करने वाली टीम को तब जिले के SP की तरफ से 25 हजार रुपए का इनाम भी दिया गया था।

राम मंदिर के खिलाफ झूठा वीडियो शेयर कर दलितों को भड़काया, हिन्दू युवक को हत्या की धमकी: ‘फूट डालो’ की मंशा वाले शान-ए-आलम को यूपी पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में पुलिस ने भगवान राम के मंदिर के बारे में भ्रामक खबर फैला रहे एक मुस्लिम युवक को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपित का नाम शान ए आलम है। शान ए आलम ने एक वीडियो वायरल की थी जिसमें बताया जा रहा था कि भगवान राम के मन्दिर में दलित समुदाय के लोगों को घुसने नहीं दिया जा रहा है। पुलिस की जाँच में ये आरोप निराधार और वीडियो में कही गई बातें झूठी पाई गईं थीं। बाद में शान ए आलम ने खिलाफ शिकायत करने वाले व्यक्ति को भी जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने बुधवार (31 जुलाई 2024) को शान ए आलम को गिरफ्तार कर लिया है।

यह मामला अयोध्या जिले के थानाक्षेत्र रामजन्मभूमि का है। यहाँ 9 जून 2024 को एक हिन्दू युवक ने पुलिस में तहरीर दी है। शिकायतकर्ता ने बताया कि 9 जून 2024 को वह अपनी फेसबुक प्रोफ़ाइल देख रहा था। तभी उसे शान ए आलम नाम के युवक की ID दिखी। अपनी ID से शान ए आलम ने 6 जून 2024 को एक वीडियो शेयर कर रखी थी। इस वीडियो में यह झूठा फैलाया गया था कि रामजन्मभूमि मंदिर में अनुसूचित जाति के लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।

शान ए आलम द्वारा शेयर हुई इस वीडियो में SC वर्ग की कई जातियों के नाम भी लिए गए थे। तब शिकायतकर्ता ने बताया था कि वो अयोध्या में साधु-संतों की सेवा में लगा रहता है इसलिए उन्हें काफी तकलीफ हुई। पुलिस ने इस तहरीर पर 9 जून को शान ए आलम के खिलाफ IPC की धारा 505 और 505 (2) के तहत FIR दर्ज कर ली थी। अपने खिलाफ हिन्दू शिकायतकर्ता द्वारा दर्ज करवाई गई FIR की जानकारी मिलते ही शान ए आलम आग बबूला हो उठा था।

आरोप है कि मंलगवार (30 जुलाई) को शान ए आलम शिकायतकर्ता के घर 2 साथियों को ले कर पहुँच गया। उसने शिकायतकर्ता से कहा, “मेरे खिलाफ तुम्ही नेता बन कर मेरी पोस्ट पर मुकदमा लिखवाए हो। तुम अपना मुकदमा वापस ले लो नहीं हो जान से हाथ धो बैठोगे।” इतना कह कर शान ए आलम ने पीड़ित को गंदी-गंदी गालियाँ भी दीं। शिकायतकर्ता ने आरोपित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। पुलिस ने शान ए आलम के खिलाफ इस मामले में भी भारतीय न्याय संहिता की धारा 352 के साथ आईटी एक्ट में केस दर्ज कर लिया।

ऑपइंडिया के पास दोनों FIR कॉपी मौजूद हैं। पुलिस ने आरोपित की तलाश शुरू कर दी और बुधवार (31 जुलाई) को शान ए आलम को गिरफ्तार कर लिया। अयोध्या के एसएसपी राज कुमार नैय्यर ने बताया कि शान ए आलम द्वारा की गई भ्रामक और आधारहीन पोस्ट से न सिर्फ अयोध्या और आसपास रहने वाले निवासियों की धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं हैं बल्कि इस से सामाजिक विद्वेष फैलने की भी आशंका हो गई थी। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपित के खिलाफ जाँच व अन्य कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

ये 1990 नहीं, 2024 है… धू-धू कर जले कश्मीरी पंडितों के 5 घर, जाँच के लिए पुलिस ने बनाई टीम: घाटी लौट रहे हिन्दुओं को डराने की साजिश?

जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में 5 कश्मीरी पंडितों के घर धू-धू कर जल उठे। जी हाँ, आप 1990 के दशक की नहीं, बल्कि 2024 की खबर पढ़ रहे हैं। इस घटना की जाँच का आदेश दिया गया है, क्योंकि जम्मू कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में अनायास ऐसा होना काफी संदेह पैदा करता है। आशंका जताई जा रही है कि घाटी लौट रहे उन कश्मीरी पंडितों को डराने के लिए ऐसा किया गया है, जिन्हें कभी यहाँ से पलायन करना पड़ा था। उनका नरसंहार हुआ था, उनकी महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ था।

ये घटना मट्टन स्थित लोन मोहल्ला का है। जम्मू कश्मीर पुलिस ने एक टीम गठित की है, जो इस आग का कारण पता लगाएगी। कश्मीरी पंडितों के एक खाली घर में आग लगी, फिर ये अगल-बगल फैल गई। घटना सोमवार (29 जुलाई, 2024) को रात 1 बजे की है। स्थानीय लोगों ने अग्निशमन विभाग को सूचित किया, जो पौने 2 बजे मौके पर 5 ट्रकों के साथ पहुँचा। एक मकान तो पूरी तरह जमींदोज हो गया। आग बुझाने में कर्मचारियों को 5 घंटे लग गए।

फायर ब्रिगेड ऑफिसर निस्सार अहमद ने बताया कि जैसे ही विभाग को सुचना मिली, दमकल की गाड़ियाँ वहाँ के लिए निकल गईं। कश्मीरी पंडितों का आरोप है कि ये जानबूझकर किया गया है। फारूक अब्दुल्लाह की पार्टी ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस’ ने इस घटना पर दुःख जताते हुए कहा कि तबाह हुए घरों में से एक उसके अतिरिक्त प्रवक्ता रहे उमेश ताशी के ननिहाल का घर है। साथ ही पार्टी ने जाँच की माँग करते हुए न्याय सुनिश्चित करने की अपील पुलिस से की।

‘द कश्मीर फाइल्स’ के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “इस वीडियो को सेव कर लें। कश्मीरी हिंदुओं की विरासतों को जलाया जा रहा है। ये 1990 नहीं है, बल्कि 29 जुलाई 2024 है। इसे सेव करके हर रविवार को देखें और विश्लेषण करें कि जब धार्मिक आतंकवाद को राजनीतिक और बौद्धिक संरक्षण दिया जाता है तो क्या हो सकता है।” ‘ऑल टेम्पल्स एन्ड श्राइन साउथ कश्मीर’ के अध्यक्ष अशोक कुमार ने कहा कि हम डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने पीड़ितों के लिए प्रशासन से मुआवजे की माँग की।

कॉन्ग्रेस नेता ने वोहरा समुदाय की लड़की को चाकुओं से गोदा, MP पुलिस ने दबोचा: कहा – ‘प्यार कर के धोखा देती है, लड़कियाँ पैसे खाती हैं’

मध्य प्रदेश के नीमच में एक लड़की को बीच सड़क पर चाकुओं से गोद डाला गया है। चाकूबाजी का आरोप कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़े एक नेता पर लगा है। आरोपित का नाम कुलदीप वर्मा बताया जा रहा है जिसकी उम्र 23 साल है। कॉन्ग्रेस नेता के हमले में 20 वर्षीया पीड़िता बुरी तरह से घायल हो गई है। आरोपित ने पीड़िता पर खुद को प्यार में धोखा दिए जाने का आरोप लगाया है। कुलदीप को गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना बुधवार (31 जुलाई 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना नीमच जिले के थानाक्षेत्र कैंट की है। यहाँ के गाँधी वाटिका क्षेत्र में बुधवार की दोपहर वोहरा बाजार की रहने वाली लड़की कुछ काम से जा रही थी। तभी केसपुरा का निवासी कुलदीप वर्मा वहाँ पहुँच गया। उसके हाथ में चाकू था। कुलदीप ने सबके आगे ही पीड़िता से चीख-चीख कर बहस शुरू कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कुलदीप पीड़िता से बोला, “प्यार करके धोखा देती है। ये लड़कियाँ पैसा खाती हैं। तुमने मुझे छोड़ा। कितने बॉयफ्रेंड हैं तेरे। अयान, रियान, आजाद, हर्षित।”

बताया जा रहा कि कुछ ही देर बाद कुलदीप वर्मा ने पीड़िता पर चाकुओं से वार शुरू कर दिया। लगभग 7 चाकुओं के वार से पीड़िता बुरी तरह से घायल हो गई। हमले से घटनास्थल पर अफरातरफरी का माहौल हो गया। लोगों को जुटता देख कर कुलदीप मौके से फरार हो गया। लोगों ने पीड़िता को अस्पताल में भर्ती करवाया। पीड़िता की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। डॉक्टर उसे बचाने की जीतोड़ कोशिश कर रहे हैं। एडिशनल एसपी नवल सिंह सिसोदिया के मुताबिक कुलदीप को गिरफ्तार कर लिया गया है।

पीड़िता वोहरा समुदाय की बताई जा रही है जबकि आरोपित कुलदीप वर्मा कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़ा बताया जा रहा है। कॉन्ग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह राठौर के मुताबिक हमलावर NSUI से ज्ञानोदय महाविद्यालय में कॉलेज का अध्यक्ष रह चुका है। इसके अलावा कुछ अन्य कॉन्ग्रेसियों के अनुसार कुलदीप को हाल ही में यूथ कांग्रेस की जिला कार्यकारिणी में शामिल किया गया था।

मुस्लिमों पर एकतरफा कार्रवाई नहीं, हिन्दुओं के ढाबों की भी जाँच कर रही यूपी पुलिस: टूलकिट गैंग की पोल खोलते हुए दुकानदारों ने बताया – नहीं पूछा गया जाति या धर्म

पश्चिम उत्तर प्रदेश के लिए काँवड़ यात्रा सबसे बड़े सामूहिक पर्व के समान है। इस दौरान खासकर पूरे उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और पंजाब तक के हिन्दुओं का जमावड़ा हरिद्वार को केंद्र बिंदु मान कर होता है। सदियों से चले आ रहे इस त्यौहार से अनगिनत लोगों को रोजगार मिलता है। इसमें बोल-बम के कपड़े, काँवड़, बर्तन आदि बेचने वालों के साथ ढाबे वाले भी शामिल हैं। इस बार सुरक्षा की दृष्टि से UP के प्रशासन ने सभी दुकानदारों से अपने असली नामों से व्यापार करने को कहा जो कुछ कट्टरपंथियों को नागवार गुजरा है।

उन्होंने प्रशासन पर कई तरह के आरोप मढ़ने शुरू कर दिए। इन्हीं आरोपों में एक यह भी है कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी जाँच के नाम पर सिर्फ मुस्लिम दुकानदारों के यहाँ जा रहे हैं।

पुलिस की कार्रवाई को एकतरफा और एक ही वर्ग पर बताने की साजिश रचने वालों में मोहमद जुबैर, अरफ़ा खानम, मिल्लत टाइम्स जैसे इस्लामी हैंडल सबसे आगे रहे। इसके अलावा अजीत अंजुम जैसे वामपंथी पत्रकारों ने भी इस मामले में अपनी दस्तक दी। उन्होंने कई मुस्लिम होटल ढाबों पर बने खाने के चटकारे लिए और यह नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की है कि प्रशासनिक अधिकारियों ने निशाने पर महज उन होटल-ढाबों को लिया है जिसके मालिक मुस्लिम हैं।

बीच में कुछ ऐसी खबरें भी आईं जिसमें बताया गया कि प्रशासन की सख्ती से कुछ मुस्लिम कारीगरों को निकाल दिया गया। ऑपइंडिया ने इन आरोपों की जमीनी स्तर पर पड़ताल की।

हिन्दू दुकानदारों को भी जाँच रही है पुलिस

ऑपइंडिया की टीम ने पश्चिम उत्तर प्रदेश के कई जिलों में काँवड़ मार्ग का निरीक्षण किया। इस दौरान हमें गाजियाबाद के पहलवान ढाबा और देसी ठाठ भोजनालय जैसे खाने के ठिकाने मिले जिसके मालिक हिन्दू हैं। इन दोनों ने हमें बताया कि उनकी दुकानों पर पुलिस स्टाफ ने आ कर बाकायदा सारी व्यवस्थाओं को चेक किया और जरूरी दिशा निर्देश दिए। हमें यह भी बताया गया कि पुलिसकर्मियों का व्यवहार उनके प्रति सहयोगात्मक और अपनेपन जैसा रहा।

दोनों दुकानदारों ने हमें बताया कि वो प्रशासन के व्यवहार से पूरी तरह से संतुष्ट हैं।

न किसी की जाति पूछी और न ही किसी का धर्म

सहारनपुर जिले में हमें अम्बाला-देहरादून हाईवे पर बाबे का ढाबा और श्याम होटल और रेस्टोरेंट के मालिक मिले। ये दोनों हिन्दू हैं। इन दोनों ने हमें बताया कि न सिर्फ सावन माह में बल्कि पुलिस तो उनके ढाबों पर नियमित तलाशी और सुरक्षा के मद्देनजर पूरे साल समय-समय पर आती रहती है। इन दोनों ने हमें बताया कि पुलिस ने कभी भी यह नहीं पूछा कि उनके होटल-ढाबों पर काम करने वाले कारीगर किस जाति या धर्म से हैं। हाँ, पुलिस ने इन होटल मालिकों को यह निर्देश बार-बार दिए कि उनके यहाँ काम करने वालों का वेरिफिकेशन करवा लिया जाए।

इस आदेश को ढाबा मालिक अपने साथ समाज की सुरक्षा के लिए भी सही मानते हैं।

प्रशासन तो दूर साथी हिन्दू कारीगरों ने कभी नहीं किया भेद

मेरठ मार्ग पर मुख्य कांवड़ मार्ग पर मौजूद एक ढाबा मालिक ने नाम न छापने की शर्त पर हमसे बातचीत की। इस हिन्दू मालिक ने हमें अपना ढाबा दिखाया जिसमें लगभग 1 दर्जन कारीगर काम कर रहे थे। इन कारीगरों में उन्होंने तंदूर पर रोटी बना रहे व्यक्ति की तरफ इशारा किया। वह इत्मीनान से रोटियाँ बना रहा था। हमें बताया गया कि लगभग 1 दर्जन कारीगरों में रोटी बना रहा व्यक्ति मुस्लिम है। ढाबा मालिक ने कहा कि इस कारीगर का रहना और खाना-पीना भी बाकी हिन्दू कारीगरों के साथ ही होता है।

उन्होंने दावा किया कि किसी प्रशासनिक अधिकारी, किसी कारीगर या खुद उनकी तरफ से भी कभी भी धर्म या जाति के नाम पर उस मुस्लिम कारीगर से कोई भी भेदभाव नहीं हुआ।

प्रशासन पर लग रहे आरोप बेबुनियाद

मुज़फ्फरनगर के कांवड़ मार्ग पर स्थित वंश जूस और भोजनालय के मालिक ने हमें बताया कि प्रशासन पर जो भी एकतरफा कार्रवाई के आरोप लग रहे है वो बेबुनियाद हैं। उन्होंने दावा किया कि असली नाम लिखने के आदेश का अधिकतर दुकानदारों ने समर्थन किया था। हालाँकि उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय के तौर पर सुप्रीम कोर्ट से जो भी निर्देश मिलेंगे वो उनका पालन करेंगे। इसी के साथ मुज़फ्फरनगर के ही देव पंजाबी भोजनालय, सुधीर फ्रोजेन स्टॉल आदि दुकानों के हिन्दू मालिकों ने भी प्रशासन के खिलाफ फैलाए गए प्रोपोगेंडा को झूठा करार दिया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का कार्य भेदभाव से रहित और सबके लिए एक जैसा है।