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मेडिकल की पढ़ाई करने आया, पुणे में बीवी-बच्चे के साथ बस ही गया खालिद मोहम्मद: बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा- पाकिस्तान जाओ, भारत की उदारता का फायदा न उठाओ

बॉम्बे हाई कोर्ट ने अवैध रूप से भारत में बीवी-बच्चे के साथ रह रहे एक मुस्लिम प्रवासी से कहा है कि वह शरण लेने के लिए पाकिस्तान जा सकता है। कोर्ट ने उसे भारत में शरण देने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि भारत उदार है, इसका फायदा खालिद ना उठाए।

बॉम्बे हाई कोर्ट की रेवती मोहित-डेरे और पृथ्वीराज चव्हान वाली वाली बेंच ने बुधवार(31 जुलाई, 2024) को इस मामले में की सुनवाई की। कोर्ट ने कहा, “आप पाकिस्तान जा सकते हैं, जो पड़ोस में है या फिर आप किसी खाड़ी देश में जा सकते हैं। भारत के उदार रवैये का गलत फायदा ना उठाइए।”

हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी एक यमनी प्रवासी को लेकर कही। यह यमनी नागरिक खालिद गोमेई मोहमद हसन भारत में कई वर्षों से बिना वीजा रह रहा था। उसके साथ उसकी एक पत्नी और बेटी भी भारत में रह रही थी। उसका वीजा कई वर्ष पहले खत्म हो चुका था लेकिन वह भारत छोड़ नहीं रहा था।

पुणे पुलिस ने इस संबंध में उसे देश छोड़ने का नोटिस थमाया था, इसके खिलाफ वह बॉम्बे हाई कोर्ट चला गया था। खालिद का कहना था कि उसके पास संयुक्त राष्ट्र द्वारा दिया गय शरणार्थी कार्ड है। उसका कहना था कि यदि उसे भारत से बाहर किया गया तो यह भारतीय संविधान और संयुक्त राष्ट्र के नियमों का उल्लंघन होगा।

खालिद 2014 में पढ़ाई करने के लिए भारत आया था और 2015 में उसकी बीवी भी भारत आ गई थी। उनकी एक बेटी भी है जिसका जन्म भारत में ही हुआ है। उसका वीजा 2017 में खत्म हो गया था। इसके बाद भी वह भारत में रह रहा था। फरवरी, 2024 में उसे पुणे पुलिस ने देश छोड़ने का नोटिस दिया था।

इसके बाद अप्रैल में भी उसे नोटिस दिया गया लेकिन वह यहाँ से नहीं गया। खालिद का कोर्ट से कहना था कि वह ऑस्ट्रेलिया में शरण माँग रहा है, जिसके लिए वह कागज तैयार कर रहा है और जब तक उसे ऑस्ट्रेलिया में शरण न मिले, उसे भारत में रहने दिया जाए।

कोर्ट ने खालिद से कहा कि जब उसके पास UNHCR का दिया कार्ड है तो वह विश्व के 129 देशों में जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि वह खालिद को ज्यादा से ज्यादा 15 दिन दे सकता है ताकि जिसके बाद वह भारत छोड़ दे। खालिद ने इस दौरान अपनी बेटी के लिए भारत की नागरिकता माँग ली, इस पर भी कोर्ट ने उसे कोई राहत नहीं दी।

आसिफ कुरैशी ने राहुल बन हिंदू युवती से बढ़ाई नजदीकी, रेप का वीडियो बना करने लगा ब्लैकमेल: मुस्लिम नहीं बनने पर वायरल करने की देता था धमकी, केस दर्ज

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में आसिफ कुरैशी नाम के एक मुस्लिम युवक ने नाम बदलकर एक हिंदू लड़की को अपने प्रेम जाल में फँसा लिया। इस दौरान उसने लड़की से कई बार रेप किया और उसकी अश्लील तस्वीरें एवं वीडियो बना ली। बाद में उसने इन अश्लील वीडियो एवं तस्वीरों के जरिए लड़की पर धर्मांतरण करके इस्लाम अपनाने का दबाव डालने लगा। इस मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

मामला मथुरा जिले के डीगगेट थाना क्षेत्र का है। यहाँ की रहने वाली एक युवती ने मंगलवार (30 जुलाई 2024) को थाने में तहरीर दी। उसने आरोप लगाया कि आसिफ कुरैशी उसकी दुकान पर आता था। इस दौरान वह बातचीत करने की कोशिश करता है। उसने अपना नाम राहुल बताया था। एक दिन बहाने से उसने लड़की का मोबाइल नंबर ले लिया और उस पर कॉल करने लगा।

मथुरा के नाटूनगर थाना कोसी का रहने वाला राहुल बना आसिफ कुरैशी धीरे-धीरे युवती से प्यार करने का नाटक करने लगा। वह कहता था कि वह युवती से बहुत प्यार करता है। वह धमकी भी देता था, जिससे लड़की डरकर उसकी बातों में आ गई। परिजनों ने बेटी के साथ लव जिहाद का आरोप लगाते हुए कहा कि आसिफ कुरैशी उनकी बेटी को इमोशनल ब्लैकमेल करता था।

आसिफ कुरैशी ने 2 मई 2024 को युवती को मिलने के लिए बुलाया और बहाने से उसके साथ शारीरिक संबंध बना लिया। इस दौरान उसने लड़की के वीडियो और तस्वीरें भी छिप करके ले लीं। कुछ दिन बाद लड़की को पता चला कि राहुल का असली नाम आसिफ कुरैशी है। इसके बाद आसिफ उस पर धर्मांतरण करके मुस्लिम बनने का दबाव बनाने लगा।

लड़की का आरोप है कि जब उसने धर्मांतरण करने से इनकार कर दिया, तब आसिफ ने उसके अश्लील फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देने लगा। उसके प्रताड़ना से तंग आकर आखिर में लड़की ने थाने पहुँचकर उसके खिलाफ तहरीर दी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने रेप, हत्या की धमकी और धर्मांतरण सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज करके आसिफ की तलाश शुरू कर दी है।

‘पहला अपराधी पवन यादव और दूसरा मोहम्मद अरबाज…’: लखनऊ में महिला के साथ बदसलूकी पर CM योगी ने पूरी चौकी को किया सस्पेंड, कहा- अब बुलेट ट्रेन चलाएँगे

लखनऊ के गोमतीनगर में जल-जमाव के बीच बाइक से जा रही लड़की से छेड़छाड़ करने वाले अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ये चारों 31 जुलाई 2024 को मरीन ड्राइव के पास पुल के नीचे पानी में हुड़दंग मचा रहे थे। इसके साथ ही उस इलाके की चौकी के पूरे पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सदन में बेहद गुस्से में दिखे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में गुरुवार (1 अगस्त 2024) को कहा, “गोमतीनगर की घटना की जवाबदेही हमने तय की है। उस घटना के अपराधियों की सूची भी मेरे पास आई है। पहला अपराधी है पवन यादव। दूसरा अपराधी है मोहम्मद अरबाज। ये सद्भावना वाले लोग हैं। अब इनके लिए सद्भावना ट्रेन चलाएँगे। इनके लिए बुलेट ट्रेन चलेगी। चिंता मत करो। उस बुलेट ट्रेन की तैयारी की जा रही है।”

उन्होंने आगे कहा, “महिला सुरक्षा हमारे लिए सर्वोच्च महत्व रखता है। कोई खिलवाड़ करेगा तो उसका खामियाजा भुगतेगा। इस बारे में हम लोगों ने आश्वस्त किया है एक-एक बेटी को, एक-एक बहन को। इस घटना को हमने बहुत गंभीरता से लिया है और गंभीरता से लेने का परिणाम है कि पूरी चौकी को सस्पेंड किया है।”

बेहद गुस्से में नजर आ रहे सीएम योगी ने सदन में आगे कहा, “हमने इंस्पेक्टर को सस्पेंड किया है। डिप्टी एसपी… एडिशनल एसपी… और डीसीपी…. इन सबको वहाँ से चेंज करके इनके खिलाफ भी कार्रवाई हमने प्रारंभ की है। हम सबका सम्मान करेंगे, सबको सुरक्षा देंगे, लेकिन जो भी व्यक्ति इस प्रदेश के अंदर अराजकता और अव्यवस्था पैदा करने का प्रयास करेगा, उसका भुक्तभोगी उसे बनना ही पड़ेगा।”

सीएम योगी ने कहा, “मैं यहाँ नौकरी करने नहीं आया हूँ। मैं यहाँ इस बात के लिए आया हूँ कि जो करेगा वो भुगतेगा। हम इसके लिए लड़ेंगे। ये हमारी सामान्य लड़ाई नहीं है। ना ही प्रतिष्ठा की लड़ाई है। मुझे प्रतिष्ठा प्राप्त करनी होती तो मुझे इससे ज्यादा प्रतिष्ठा अपने मठ में मिल जाती। इसकी कोई आवश्यकता नहीं है मेरे लिए।”

जिन अधिकारियों को हटाया गया है उनके नाम हैं- प्रबल प्रताप सिंह, अमित कुमावत, शशांक सिंह, पंकज कुमार सिंह, कृपा शंकर, राघवेंद्र सिंह, विकास कुमार जायसवाल और अंजु जैन। वहीं, जिन अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है उनमें इंस्पेक्टर गोमतीनगर दीपक कुमार पांडेय, चौकी इंचार्ज दारोगा ऋषि विवेक, दारोगा कपिल कुमार, सिपाही वीरेंद्र कुमार शामिल हैं।

DGP प्रशांत कुमार ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि 31 जुलाई को ताज होटल के निकट गोमतीनगर थाना क्षेत्र में बने अंडरपास के पास बारिश से जल भराव हो गया था। वहाँ से आने-जाने वाले राहगीरों और वाहनों के साथ कुछ अराजक तत्वों द्वारा हुड़दंगई तथा आपत्तिजनक गतिविधियाँ की गई थी।

पुलिस ने बताया कि सूचना का संज्ञान लेते हुए थाना गोमती नगर में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस मामले में फिलहाल चार लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं, वीडियो फुटेज के आधार पर बाकी लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। दरअसल, घटना के दिन एक युवती अपने दोस्त के साथ बाइक से जा रही थी। उस दौरान उससे छेड़छाड़ की गई और उसे पानी में गिरा दिया गया था।

सपा MP अवधेश प्रसाद की टीम का मेंबर है OBC बच्ची से रेप करने वाला मोईद खान, साथ खाता-बैठता है: अयोध्या की घटना पर CM योगी, पूछा- इनको माला पहनाएँगे क्या?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में समाजवादी पार्टी को जवाब देते हुए कहा कि अपराधियों को गोली नहीं मारा जाएगा तो माला पहनाया जाएगा क्या। सीएम योगी ने इस दौरान एक नाबालिग लड़की से रेप करने वाले अयोध्या के सपा सांसद अवधेश प्रसाद के करीबी मोईद खान और अधिवक्ता की हत्या करवाने वाले हरदोई के पूर्व सपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव का भी जिक्र किया।

सीएम योगी ने गुरुवार (1 अगस्त 2024) को सदन में समाजवादी पार्टी को जवाब देते हुए कहा, “ये अपराधी समाज के सबसे बड़े कलंक हैं, कोढ़ हैं और इस कोढ़ को जब तक हटाएँगे नहीं, तब तक उत्तर प्रदेश की स्थिति को ठीक करने में कठिनाई होगी।” विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के सदस्यों को जवाब देते हुए सीएम योगी ने कहा, “ऐसे अपराधियों को माला पहनाएँगे क्या?”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “अयोध्या का ये मामला है। इसका अपराधी मोईद खान समाजवादी पार्टी का नेता है। अयोध्या के सांसद की टीम का सदस्य है। 12 वर्षीय एक नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म के कृत्य में शामिल पाया गया है। अभी तक समाजवादी पार्टी ने उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। अब क्या कोई समाजवादी पार्टी का नाम भी ना बोले?”

मोईद खान को लेकर सीएम योगी ने कहा, “आप एक टीम मेंबर हैं। आपके सांसद के साथ बैठना है, खाना है, उनके साथ चलना है। यह एक अति पिछड़ी जाति की बालिका से जुड़ा हुआ मामला है। वो इतनी घटिया हरकत में संलिप्त हैं, इसके बावजूद भी समाजवादी पार्टी द्वारा इसे हल्केपन से लेने का काम होता है।”

हरदोई की घटना का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा, “कल ही हरदोई में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटित हुई। इसमें भी वीरे उर्फ वीरेंद्र यादव शामिल है, जो समाजवादी पार्टी का पूर्व जिलाध्यक्ष है। आप देखो कि किस प्रकार के व्यक्ति को आप जिलाध्यक्ष बना रहे हैं। IPC और CrPC की ऐसी कोई धारा ना हो, जो इस पर ना लगी हो। 28 ऐसे मामले हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “ऐसा नहीं है ये मामले 2017 से 2024 के बीच के हों। इस पर पहला अपराध दर्ज हुआ था 1989 में। दूसरा है 1991 में। तीसरा है 1991 में। चौथा 1991 में। पाँचवाँ 1992 में। 1996-2006-2007-2008-2009-2013-2015 में भी मामले दर्ज हुए हैं। 2013 और 2015 में तो आप (सपा) की ही सरकार थी। 2002 और 2017 में इस पर गुंडा अधिनियम के तहत इस पर कार्रवाई हुई।”

मुख्यमंत्री योगी ने कहा, “कल एक अधिवक्ता की सरेआम हत्या इस व्यक्ति के द्वारा करवाई गई है। इस प्रकार के अपराधियों को आप कहते हैं कि साहब आप गोली मार रहे हैं। क्या माला पहनाएँगे? ये तो ताजा उदाहरण है। ये समाज के लिए सबसे बड़े कलंक हैं। इस समाज का कोढ़ है। इस कोढ़ को जब तक हटाएँगे नहीं, तब तक उत्तर प्रदेश की स्थिति को ठीक करने में कठिनाई होगी।”

अयोध्या के सपा सांसद का करीबी मोईद खान

समाजवादी पार्टी के नेता मोईद खान और उसके नौकर राजू पर नाबालिक लड़की से बलात्कार आरोप लगा है। मजदूर परिवार की पीड़िता का अश्लील वीडियो बना कर उसे ब्लैकमेल भी किया गया। पुलिस ने केस दर्ज करके मोईद खान और उसके नौकर राजू को गिरफ्तार कर लिया है। जिस सपा नेता मोईद खान पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगा है उसी के घर में लगभग 12 साल से पुलिस चौकी चल रही थी।

घटना अयोध्या के थाना क्षेत्र पूराकलंदर की है। यहाँ के चौकी क्षेत्र भदरसा में समाजवादी पार्टी के नेता मोईद खान की बेकरी की दुकान है। यहीं पर एक OBC समुदाय की एक मजदूर महिला और उनकी 12 वर्षीया नाबालिग बेटी रहती है। लगभग 75 दिन पहले पीड़िता अपनी माँ के साथ मजदूरी कर के लौट रही थी। तभी रास्ते में मोईद की दुकान में काम करने वाले नौकर राजू खाँ ने पीड़िता को टोस्ट लेने के लिए अपनी दुकान पर बुलाया। लड़की पहले भी मोईद की दुकान पर आती जाती रही थी इसीलिए वो विश्वास कर के वहाँ चली गई।

बताया जा रहा है कि दुकान में राजू और उसके मालिक मोईद ने पीड़िता से बारी-बारी सामूहिक दुष्कर्म किया। इसी दौरान आरोपितों द्वारा रेप का वीडियो भी बना लिया गया। किसी को बताने पर वीडियो वायरल करने की धमकी भी दी गई। बाद में इसी वीडियो से डरा-धमका कर पीड़िता से 2 महीने तक दोनों आरोपितों ने गैंगरेप किया। इस वजह से पीड़िता गर्भवती हो गई। लड़की के पेट में दर्द होने पर माँ को शक हुआ। जब यह बात लड़की की माँ को पता चली तो उसने पूरी वजह पूछी। पीड़िता ने सारी बात अपनी माँ को बता दी। आखिरकार मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई।

क्या होता है कोटा के भीतर कोटा, कैसे तय होता है क्रीमी लेयर… SC/ST आरक्षण में सुप्रीम कोर्ट ने खींची है जो नई लकीर उससे फायदा किनको, जानिए सब कुछ

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में गुरुवार (1 अगस्त 2024) को कहा कि दलित और जनजातीय समुदाय को मिलने वाले आरक्षण के भीतर अत्यंत पिछड़े SC-ST जातियों के लिए कोटा लागू किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान बेंच ने कहा है कि सरकार कोटा के भीतर कोटा दे सकती है और किसी एक जाति को 100% आरक्षण ना दिया जाए। 

दरअसल, CJI डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बेला एम त्रिवेदी, जस्टिस पंकज मिथल, जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस सतीशचंद्र शर्मा वाली 7 सदस्यीय संविधान पीठ ने 1 अगस्त 2024 को यह निर्णय दिया। इस निर्णय में 6 जज एकमत थे, जबकि जस्टिस बेला त्रिवेदी ने इस पर अपनी असहमति जताई।

कोर्ट ने कहा कि SC-ST को दिए जाने वाले आरक्षण के भीतर ऐसी जातियों को ज्यादा तरजीह दिया जा सकता है, जो आर्थिक एवं सामाजिक रूप से अत्यधिक पिछड़े हुए हैं। आरक्षण में आरक्षण देने के दौरान जातियों को सूची से अंदर-बाहर करने का निर्णय तुष्टिकरण के लिए ना लिया जाए। इसके लिए आँकड़े और ऐतिहासिक तथ्य जुटाए जाएँ। CJI चंद्रचूड़ ने कहा कि SC-ST कोई एक सजातीय समूह नहीं है।

वहीं, जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि SC-ST समुदाय में भी केवल कुछ ही लोग आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर की पहचान की जाए और जिन जातियों को लाभ मिल चुका है, उन्हें इससे बाहर कर दिया जाए। दरअसल, अत्यंत पिछड़ी जातियों को ज्यादा तरजीह देने और आरक्षण का लाभ उठा चुकी जातियों की हिस्सेदारी करने की माँग लंबे समय से उठ रही थी।

जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि क्रीमी लेयर का सिद्धांत अनुसूचित जातियों पर भी उसी तरह लागू होता है, जैसे यह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) पर लागू होता है। मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने देश में दलित वर्ग के लिए आरक्षण का पुरजोर बचाव किया और कहा कि सरकार SC-ST आरक्षण के भीतर सब कैटेगरी के पक्ष में है।

सुप्रीम कोर्ट ने साल 2000 के अपने फैसले को पलटा

साल 2004 में सुप्रीम कोर्ट की पाँच जजों की बेंच ने ईवी चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश सरकार मामले की सुनवाई की थी। इसमें बेंच ने फैसला दिया था कि राज्य सरकारें नौकरी में आरक्षण के लिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों की सब-कैटेगरी नहीं बना सकती हैं। इस पर पंजाब सरकार ने तर्क दिया था कि इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ के फैसले का हवाला दिया था।

पंजाब सरकार ने कहा था कि इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के 1992 के फैसले में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के भीतर सब कैटेगरी की अनुमति दी थी। इस तरह यह स्वीकार्य था। पंजाब सरकार ने उस दौरान कहा था कि OBC की तर्ज पर ही अनुसूचित जाति में भी सब कैटेगरी की अनुमति दी जाए। साल 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने विचार के लिए इसे बड़ी बेंच के पास भेजने की बात कही।

आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने बेंच ने इस तर्क को स्वीकार कर लिया। इससे अब आंध्र प्रदेश और पंजाब के अलावा देश भर के अत्यंत पिछड़े SC-ST को लाभ मिलेगा। इस तरह सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने पंजाब अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग अधिनियम 2006 और तमिलनाडु अरुंथथियार अधिनियम पर एक तरह से मुहर लगा दी है।

दरअसल, पंजाब सरकार ने साल 1975 में आरक्षित सीटों को दो श्रेणियों में बाँटकर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण नीति पेश की थी। एक बाल्मीकि और मजहबी सिखों के लिए और दूसरी बाकी अनुसूचित जाति वर्ग के लिए। 30 साल तक ये नियम लागू रहा। उसके बाद 2006 में ये मामला पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट पहुँचा और आखिरकार सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा और इसे रद्द कर दिया गया।

कोटा में कोटा या आरक्षण के भीतर आरक्षण का अर्थ

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को दी गई आरक्षण सीमा में आरक्षण तय करने से संबंधित है। वर्तमान अनुसूचित जाति को 15 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति को 7.5 प्रतिशत का आरक्षण मिला हुआ है। अब सरकारें अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के तय आरक्षण में उस वर्ग के अत्यंत पिछड़े या गरीब को आरक्षण दे सकती है।

इसका उद्देश्य आरक्षण का लाभ समाज के सबसे पिछड़े और जरूरतमंद लोगों तक पहुँचाना है। दोनों वर्गों में जिन जातियों ने आरक्षण का लाभ लिया, उनके ही वर्ग के लोग इसमें आगे बढ़ते गए और जो शुरुआत में पिछड़ गए, वो पिछड़े रह गए। कोटा में कोटा प्रणाली का अर्थ इस खामी को दूर करना है, ताकि अत्यंत पिछड़े एवं आरक्षण का लाभ लेने से वंचित रह गए लोगों या जातियों को इसका लाभ मिल सके।

यदि हम बिहार का उदाहरण लें तो इसे आसानी से समझा जा सकता है। बिहार में ओबीसी में अहीर, ग्वाला, गोप, कोईरी, बनिया हैं। ओबीसी आरक्षण का सबसे अधिक फायदा इन्हीं जातियों ने उठाया और ये सामाजिक एवं आर्थिक रूप से शक्तिशाली बनीं। हालाँकि, ओबीसी की अन्य जातियाँ कानू, कलवार, तुरहा, नोनिया आदि जहाँ दशकों पहले थे, वहीं आज भी हैं।

बाद में इन्हें अत्यंत पिछड़ा वर्ग में शामिल कर लिया गया। इसके लिए EBC यानी अत्यंत पिछड़ा का एक उप-वर्ग बनाया गया और उसमें शामिल कर लिया गया। हालाँकि, यह कोटा के अंतर्गत कोटा का सटीक उदाहरण नहीं है, लेकिन मसला बिल्कुल ऐसा ही है, जो इसी उद्देश्य की पूर्ति करेगा। अब इन जातियों को धीरे-धीरे ही सही इसका लाभ मिलने लगा है।

तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों ने SC, ST और OBC श्रेणियों के भीतर विभिन्न उप-श्रेणियों को आरक्षण देने की व्यवस्था की है। तमिलनाडु में पिछड़ा वर्ग (BC), अत्यंत पिछड़ा वर्ग (MBC) और अति पिछड़ा वर्ग (Vanniyar) जैसी सब-कैटेगरी में ओबीसी आरक्षण लागू किया गया है। कर्नाटक में अनुसूचित जाति के भीतर दो सब कैटेगरी कोडवा और माडिगा को अलग-अलग आरक्षण दिया गया है।

क्रीमी लेयर का सिद्धांत

जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि क्रीमी लेयर का सिद्धांत अनुसूचित जातियों पर भी उसी तरह लागू होता है, जैसे यह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) पर लागू होता है। यानी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति में जिन लोगों ने आरक्षण का लाभ ले लिया है, उन्हीं के बाल-बच्चे भी आगे इसका फायदा उठाते हैं। ऐसा ना हो और सबको मौका मिले, यही कोर्ट का फैसला है।

अपना फैसला सुनाते हुए एक जज ने इसका उदाहरण भी दिया। जज ने कहा कि यह पूरी व्यवस्था एक ट्रेन की बोगी की तरह है। जो व्यक्ति बोगी में घुसने में सफल रहता है, वह बाकी लोगों को अंदर आने से रोकने की कोशिश करता है। जज के कहने का अर्थ है कि जिसे फायदा मिल रहा होता है, वह नहीं चाहता कि उसमें किसी तरह की कटौती या रुकावट हो।

इसी लिए क्रीमी लेयर के सिद्धांत की जरूरत SC-ST के लिए भी है। क्रीमी लेयर का सिद्धांत इसी उद्देश्य के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में लागू किया गया है। क्रीमी लेयर में वो लोग आते हैं, जिनके परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपए से अधिक है। इस आय में कृषि आय शामिल नहीं है। इस श्रेणी में आने वाले लोगों को OBC को मिलने वाले 27% आरक्षण का लाभ नहीं मिलता है।

इसके साथ उनका OBC का सर्टिफिकेट भी नहीं बनता है। OBC के जो लोग क्रीमी लेयर में नहीं आते, उन्हें सरकारी नौकरी से शिक्षण संस्थानों में नौकरी में छूट, आयु सीमा में छूट, फी में छूट आदि की सुविधा मिलती है। इसके अलावा, प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने के अटेंप्ट में भी छूट मिलती है। क्रीमी लेयर को यह छूट नहीं मिलती।

इसी तरह अनुसूचित जाति और जनजाति में भी क्रीमी लेयर को आरक्षण से निकाल देने के बाद कमजोर तबके को इसका लाभ मिल सकेगा। उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति के अंतर्गत आने वाला जाटव समाज इस श्रेणी का बड़ा लाभार्थी है। वहीं, राजस्थान का मीणा समुदाय अनुसूचित जनजाति वर्ग का सबसे बड़ा लाभार्थी है। क्रीमी लेयर लागू हो जाने या सब कैटेगरी बन जाने के बाद अत्यंत पिछड़े SC एवं ST समाज की जाति के लोगों को उनके संबंधित श्रेणी के आरक्षण का लाभ मिल सकेगा।

संविधान में प्रावधान

भारत के संविधान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का विशेष तौर पर प्रावधान है। SC-ST को विशेष दर्जा देते समय इस बात का जिक्र नहीं किया है कि इसमें कौन-कौन सी जातियाँ आएँगी। यह अधिकार केंद्र के पास है। अनुच्छेद 341 के अनुसार, राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित जातियों को एससी और एसटी कहा जाता है।

एक राज्य में SC के रूप में अधिसूचित जाति दूसरे राज्य में SC नहीं भी हो सकती है। बता दें कि भारत सरकार की सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2018-19 में देश में 1,263 जातियाँ अनुसूचित जाति (SC) वर्ग की थीं। वहीं अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, अंडमान और निकोबार तथा लक्षद्वीप में कोई समुदाय इस श्रेणी के अंतर्गत चिह्नित नहीं है।

इस्माइल हानिया ही नहीं, मोहम्मद दायफ का भी हो चुका है काम तमाम: इजरायल ने किया कन्फर्म- मार गिराया गया है हमास का मिलिट्री कमांडर भी, 7 अक्टूबर के हमले का था मास्टरमाइंड

हमास के सरगना इस्माइल हानिया की मौत के एक दिन बाद ही इजरायल डिफेंस फोर्स ने दावा किया है कि उन्होंने आतंकी संगठन के मोहम्मद दायफ को भी मौत के घाट उतार दिया। दायफ हमास के सैन्य विंग का प्रमुख था। उसे इजरायल ने 13 जुलाई को ही मौत के घाट उतारा था लेकिन पुष्टि आज हुई है।

इजरायली सेना की तरफ से ट्वीट करके कहा गया, “हम इस बात की पुष्टि करते हैं कि मोहम्मद दायफ मार दिया गया है।” एक अन्य बयान में कहा गया, “IDF ऐलान करता है कि 13 जुलाई, 2024 को IDF लड़ाकू विमानों ने खान यूनिस के इलाके में हमला किया और खुफिया आँकलन के बाद यह पुष्टि की जा सकती है कि हमले में मोहम्मद दायफ मारा गया।”

हमास की तरफ से अभी मोहम्मद दायफ की हत्या पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन बताया जा रहा है कि मोहम्मद दायफ 7 अक्तूबर को जो हमला इजरायल में हुआ था उसका वो मास्टरमाइंड था जिसमें 1200 लोगों की मौत हुई थी और 250 लोग बंधक बनाए गए थे। इसके बाद ही इजरायल ने हमास के सफाए की कसम खाई और उनपर ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए उन्हें 10 महीने हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि मोहम्मद दायफ दशकों से इजरायल की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में रहा है। उसपर आरोप था कि उसने ऐसे आत्मघाती बम विस्फोटकों को करवाया जिसमें कई इजरायलियों की मौत हुई। दायफ पर आरोप है कि वो सुरंगों का नेटवर्क और बम बनाने में एक्सपर्ट था और इजरायली सेना के निशाने पर लंबे समय से था। उसने 1987 में हमास को ज्वाइन किया था। बाद में गाजा की इस्लामी यूनिवर्सिटी से उसने साइंस में डिग्री ली और आरोपितों को 1989 में गिरफ्तार किया गया जिसके बाद उसे 16 महीने गाजा में भी गुजारने पड़े थे।

7 दिन पहले से चेता रही थी मोदी सरकार, फिर भी तबाही मचने की प्रतीक्षा करती रही केरल की वामपंथी सरकार: वायनाड की लाशों का दोषी कौन? दावा- मजहबी संगठनों के दबाव में नहीं हटाए कब्जे

केरल के वायनाड जिले में हुए भूस्खलन के कारण मौतों का आँकड़ा 275 पार कर चुका है। सैकड़ों की संख्या में लोग अब भी गायब हैं। 1000 से ज्यादा लोगों को सेना-वायुसेना और NDRF ने बचाया है। केरल में इस घटना पर दो दिन का राजकीय शोक भी घोषित किया गया है। घटना के बाद अब केरल कीई पिनराई विजयन सरकार पर लापरवाही के आरोप लगाने चालू हो गए हैं।

एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वायनाड जिला प्रशासन को दो दिन पहले ही पता चल गया था कि इस इलाके में भारी बारिश और भूस्खलन की संभावना है। गृह मंत्री अमित शाह ने केरल को चेतावनी दिए जाने की ही राज्यसभा में बुधवार (31 जुलाई, 2024) को कही थी। वहीं दूसरी तरफ भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा है कि वायनाड के इस इलाके से लोगों को इसलिए नहीं पूर्व निकाला गया था क्योंकि वामपंथी सरकार पर मजहबी संगठनों का दबाव था।

केरल को लगातार मिली थी चेतावनी

ऑनमनोरमा में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, वायनाड जिले में घटना से एक दिन पहले सोमवार को जब वर्षा का स्तर 200 मिलीमीटर पार हो गया था तो जिला प्रशासन को चेतावनी भेज दी गई थी। इस चेतावनी में भूस्खलन का जिक्र था। रिपोर्ट के अनुसार, जिला प्रशासन ने इसे काफी हल्के में लिया और और केवल एक अलर्ट जारी किया। इस चेतावनी में भी लोगों को खतरे वाले इलाके से निकल जाने को लकर कोई सलाह नहीं दी गई। इसके कुछ ही घटों के बाद यह दर्दनाक हादसा हुआ।

वायनाड में 200 से अधिक मौसम निगरानी यूनिट चलाने वाले ह्यूम सेंटर फॉर इकोलॉजी एंड वाइल्डलाइफ बायोलॉजी ने भूस्खलन से दो दिन पहले ही चेतावनी दी थी। इसने उन इलाकों में विशेष रूप से खतरा बताया था जहाँ बाद में यह आपदा आई। इस सेंटर के मुखिया CK विष्णुदास ने बताया है कि जिला प्रशासन को सोमवार को ही भूस्खलन की चेतावनी दे दी गई थी। उन्होंने यह भी बताया है कि इन गाँवों से लोगों को निकालने की सलाह भी दी गई थी। हालाँकि, इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया आपदा आ गई।

गृह मंत्री अमित शाह ने बताया- 7 दिन पहले चेताया

गृह मंत्री अमित शाह ने अमित शाह ने बुधवार (30 जुलाई, 2024) को सदन में देश को बताया ,”वायनाड के हालातों पर कहा जा रहा है कि पहले चेतावनी दी जानी चाहिए थी, लेकिन हकीकत तो ये है कि केंद्र ने 23 जुलाई को ही केरल सरकार को चेतावनी जारी कर दी थी यानी 7 दिन पहले। इसके बाद 24 और 25 जुलाई को भी चेतावनी भेजी गई थी। हर बार बताया गया था कि राज्य में भारी वर्षा और भूस्खलन के अनुमान हैं जिसमें लोगों की जान जा सकती है।”

तेजस्वी सूर्या का दावा- मजहबी संगठन के दबाव में नहीं हटाए गए लोग

बेंगलुरु दक्षिण से भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी इस मुद्दे पर राहुल गाँधी और केरल सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, “2020 में केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने वायनाड में भूस्खलन के खतरे वाले इलाकों से 4,000 परिवारों को हटा कर दूसरी जगह बसाने की सलाह दी थी। आज तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई और वायनाड के सांसद राहुल गाँधी ने आज तक इस मुद्दे को उठाया भी नहीं। विधानसभा में केरल के वन मंत्री ने स्वीकार किया कि वे अवैध अतिक्रमण नहीं हटा पा रहे हैं क्योंकि उन पर विभिन्न मजहबी संगठनों का दबाव था।”

सांसद तेजस्वी सूर्या ने इसके बाद वायनाड आपदा को मानवनिर्मित आपदा बताया। उन्होंने कहा, “वायनाड में जो हुआ है, वह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं है। यह मानव निर्मित आपदा है। यह मैं नहीं कह रहा, यह केरल के विशेषज्ञ कह रहे हैं। पिछले 5-6 सालों में देश में जितनी भी भूस्खलन की घटनाएँ हुई हैं, उनमें से 60% केरल में हुई हैं।”

इस घटना के बाद गुरुवार (1 अगस्त, 2024) को लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वायनाड पहुँचे हैं। उन्होंने हादसे में प्रभावित इलाके का दौरा किया है। दोनों पहले ही यहाँ जाने वाले थे लेकिन उनका हवाई जहाज वहाँ नहीं पहुँच पाया था इसलिए उन्होंने जाने से मना कर दिया था।

58 साल में 1 किलोमीटर भी नहीं लगाई ATP, अब रोजाना यात्रा करने वाले 2 करोड़ रेलयात्रियों को डरा रहे: अश्विनी वैष्णव ने संसद में विपक्ष को लताड़ा

संसद में मानसून सत्र के नौवें दिन गुरुवार (1 अगस्त 2024) को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कॉन्ग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित विपक्षी दलों को जमकर लताड़ लगाई। हाल की रेल दुर्घटनाओं को लेकर विपक्ष ने रेल सेफ्टी को लेकर सदन में उनसे सवाल पूछा और जमकर हंगामा किया। इस दौरान अश्विनी वैष्णव ने अपनी बात रखी और दुर्घटनाओं में कमी के आँकड़े पेश किए।

रेल मंत्री वैष्णव के जवाब के दौरान कॉन्ग्रेस और सपा सहित विपक्षी दलों ने हंगामा किया। इस दौरान वैष्णव ने कहा, “अध्यक्ष जी जो इस तरह से बोल रहे हैं उनसे पूछिये कि अपने 58 साल के राज में वे 1 किलोमीटर भी ATP (स्वचालित ट्रेन सुरक्षा) क्यों नहीं लगा पाए। आज ये मुझसे पूछने की हिम्मत करते हैं, अपने कार्यकाल को देखें… अपने गिरेबाँ में झाँकें।”

जबाब देते हुए वैष्णव ने बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस दौर का हवाला दिया, जब वो रेल मंत्री हुआ करती थी। उन्होंने कहा, “जब ममता बनर्जी रेल मंत्री थीं, तब वे रेल दुर्घटनाओं की संख्या बताती थीं। 0.24 से 0.19 तक कमी आने पर ये लोग सदन में तालियाँ बजाते थे और आज जब रेल दुर्घटना की दर 0.19 से 0.03 होने पर वे इस तरह का आरोप लगाते हैं। क्या यह देश ऐसे चलेगा?”

रेलवे में सुधार और उसे आगे बढ़ाने की बात करते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा, “रेलवे को सुधारने के लिए सबको सहयोग करना पड़ेगा। ये ऐसे नहीं चल सकता। विपक्ष के कॉन्ग्रेस ने एक सोची-समझी एवं रणनीतिक तरीके से छोटे-से-छोटे विषय को अपने सोशल मीडिया की ट्रोल आर्मी के जरिए इस तरह झूठे तरीके से उठाना शुरू किया।”

कॉन्ग्रेस और समाजवादी पार्टी की ट्रोल आर्मी पर निशाना साधते हुए रेल मंत्री ने कहा, “एक पुराने के स्टेशन की एक पुरानी दिवार थी, वो थोड़ी सी डैमेज हुआ तो समाजवादी पार्टी और कॉन्ग्रेस के हैंडसल्स ने उसको तुरंत उठाना चालू किया। इस तरह के झूठ से कैसे देश चलेगा? दो करोड़ पैसेंजर रोज यात्रा करते हैं। क्या ये (विपक्षी दल) उनके मन में भय पैदा करना चाह रहे हैं?”

दरअसल, अपने संबोधन के शुरुआत में अश्विनी वैष्णव ने कह, “यूपीए के कार्यकाल में सालाना औसत 171 एक्सीडेंट होते थे। हमारी सरकार में एक्सीडेंट की संख्या में 68% की कमी आई है।” इसके बाद विपक्ष हंगामा करने लगा। तब रेल मंत्री ने कहा, “विपक्ष अपने गिरेबान में झांकिए। आपने 58 सालों में ATP तक नहीं लगाया।”

रेलवे सेफ्टी की बात करते हुए उन्होंने कहा, “ATP से ड्राइवर को हाईस्पीड ट्रेन में सिग्नल देखने में आसानी होती है। ये टेक्नोलॉजी दुनिया में 80 के दशक में आ गई थी और दुनिया के हर बड़े नेटवर्क में ATP लागू है। भारत में साल 2014 तक यह तकनीक नहीं थी। 2006 में एंटी कोलीजन डिवाइस लाई गई, वो 2012 में फेल हो गई। पीएम मोदी ने 2014 में जिम्मेदारी ली। 2016 में कवच लाए। 2019 में इसको सेफ्टी सर्टिफिकेट मिला। साल 2024 में कवच का वर्जन 4.0 अप्रूव हो गया।”

रेल मंत्री ने कहा कि UPA के कार्यकाल में 2004 से 2014 तक रेलवे में सिर्फ 4.11 लाख कर्मचारियों की भर्ती हुई थी, जबकि 2014 से 2024 तक यानी NDA के 10 सालों में ये संख्या 5.02 लाख है। उन्होंने कहा कि वर्षों से माँग की जाने वाली रेलवे भर्ती के लिए एनडीए सरकार ने जनवरी 2024 में वार्षिक कैलेंडर घोषित किया।

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि जो युवा रेलवे में जाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, उनके लिए अब साल में 4 बार वैकेंसी निकलती हैं। ये वैकेंसी हर साल जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर में आती है। उन्होंने कहा कि अभी भी 40,565 वैकेंसी निकाली गई हैं, जिन्हें अभी भरा जाना है।

अली राजा ने 19 साल की बीवी को तड़पाकर जिंदा जलाया, किसी और से बात करने का था शक: 8 महीने पहले ही किया था निकाह, पाकिस्तान की घटना

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक युवक ने अपनी 19 साल की बीवी को सिर्फ इस शक में जला डाला क्योंकि उसे लगता था कि उसकी बीवी का किसी और के साथ संबंध है। आरोपित शौहर की पहचान अली रजा के तौर पर हुई है। वहीं उसकी बीवी का नाम सना इकबाल था।

पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, सबा और रजा का निकाह 8 माह पहले हुआ था लेकिन निकाह के बाद रजा को लगने लगा कि सबा किसी और के साथ रिश्ते में हैं। 28 जुलाई को रजा ने सबा के अब्बा को बताया कि वो लड़ाई के बाद घर से चली गई है और उसके बाद से मिल नहीं रही है।

रजा के अब्बा के अनुसार, वो इस खबर को सुनने के बाद फौरन दौड़े। उन्हें लगा कहीं उनकी बेटी के साथ कुछ गलत न हुआ। सबने मिलकर बहुत खोजा लेकिन उसके बारे में कुछ पता नहीं चला सका। बाद में सना का जला हुआ शव खेत में मिला।

पुलिस ने घटना के बाद फौरन रजा को गिरफ्तार किया और उससे जुर्म कबूल करवाया। पुलिस ने हताया कि रजा ने ही सबा को शक होने पर बुरी तरह प्रताड़ित किया था और फिर उसे जिंदा जलाकर खेत में फेंक दिया था।

जुर्म कबूलते हुए रजा ने कहा कि उसे कहीं से पता चला था कि उसकी बीवी सना का किसी और के साथ चक्कर चल रहा है। इसीलिए उसने उसकी हत्या की। इस मामले में पुलिस ने रजा के साथ 2 अज्ञातों के खिलाफ भी मुकदमा दायर किया है। वहीं मानवाधिकार कार्यकर्ता लगातार ऐसे कृत्यों को मुल्क में विरोध कर रहे हैं। उनका अनुमान है कि करीबन 1000 महिलाएँ पाकिस्तान में ऑनर किलिंग का शिकार होती हैं।

वहीं जिदा जलाने की घटनाएँ भी पाकिस्तान से बहुत आती हैं। इसी साल जून में एक पर्यटक की हत्या को अंजाम दिया गया था। पाकिस्तान के खैब पख्तूनख्वा में कुरान का अपमान करने का आरोप लगाकर भीड़ ने पर्यटक को जिंदा जला दिया गया था।

मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि केस: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज की मुस्लिम पक्ष की आपत्तियाँ, हिंदू पक्ष की याचिकाओं पर होगी सुनवाई

मथुरा के विवादित शाही ईदगाह-कृष्ण जन्मभूमि मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट से मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की हिन्दू पक्ष के मुकदमों को दी गई चुनौती को ख़ारिज कर दिया है। कोर्ट ने माना है कि हिन्दू पक्ष की तरफ से दायर सभी मुकदमे सुने जा सकते हैं।

गुरुवार (1 अगस्त, 2024) को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह निर्णय सुनाया है। हाई कोर्ट के जस्टिस मयंक कुमार जैन की बेंच ने कहा है कि हिन्दू पक्ष की तरफ से दाखिल 18 मुकदमों को उनकी मेरिट के आधार पर सुना जाएगा और यह सभी कोर्ट में सुने जाने योग्य है।

हाई कोर्ट ने शाही ईदगाह कमिटी की इस चुनौती को खारिज किया कि यह मुकदमे इसलिए नहीं सुने जा सकते क्योंकि यह पूजा स्थल अधिनियम के विरुद्ध हैं। कोर्ट ने कहा कि इन पर यह कानून लागू नहीं होता। कोर्ट ने यह निर्णय 6 जून, 2024 को सुरक्षित रख लिया था। इस फैसले से हिन्दू पक्ष को बल मिला है।

मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में यह भी दावा किया था कि जो भी याचिकाएं कृष्णजन्मभूमि के लिए डाली गई हैं, वो मामले से सीधे तौर पर ना जुड़े हुए लोगों ने डाली है। मुस्लिम पक्ष ने इसी के साथ दावा किया था कि उसका और हिन्दू पक्ष का 1968 में समझौता हो चुका है, ऐसे में अब इन याचिकाओं का कोई महत्व नहीं है।

कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की यह दलील भी नहीं मानी। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि यह मस्जिद वक्फ की सम्पत्ति है। इस पर हिन्दू पक्ष ने इस बात के सबूत दिखाने को कहा है कि इसे वक्फ को किसने दान किया था। हिन्दू पक्ष ने यह भी कहा कि वक्फ की यह आदत रही है कि वह जमीनों पर कब्जा करके उनके उपयोग में बदलाव करती है।

हिन्दू पक्ष की जिन याचिकाओं को कोर्ट ने आज सुनने लायक माना है उनमें कई तर्क दिए गए हैं। हिन्दू पक्ष का कहना है कि जिस 2.5 एकड़ के इलाके पर यह शाही ईदगाह बना हुआ है, वह श्रीकृष्ण जन्मभूमि का हिस्सा है। इसी के साथ हिन्दू पक्ष ने यह भी दावा किया है कि मुस्लिमों के पास इसका कोई भी रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।

हिन्दू पक्ष ने कहा है कि इस जमीन का स्वामित्व कटरा केशव देव के पास है और साथ ही यह संरक्षित स्मारक भी है ऐसे में इस पर पूजा स्थल अधिनियम लागू नहीं होगा। हिन्दू पक्ष का आरोप है कि बिना प्रक्रिया के ही इस जमीन को वक्फ बोर्ड ने हथिया लिया है। हिन्दू पक्ष यहाँ पूजा अर्चना की अनुमति भी चाहता है। वहीं मुस्लिम पक्ष चाहता है कि इस जमीन को लकर सुनवाई वक्फ ट्रिब्यूनल में ही हो।

गौरतलब है कि यह शाही ईदगाह वर्तमान में विवादित है और इसको लेकर न्यायालयों में कई याचिकाएँ पड़ी हुई हैं। हिन्दू पक्ष का कहना है कि मथुरा में स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के बराबर में बनी शाही ईदगाह वाला ढाँचा जबरन वही बना दिया गया जहाँ भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इस जगह पर कब्जा करके ढाँचा बनाया गया है। यहाँ अभी भी कई ऐसे सबूत हैं जो कि यह सिद्ध करते हैं कि यहाँ पहले एक मंदिर हुआ करता था।

हिन्दू पक्ष का दावा है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म राजा कंस के कारागार में हुआ था और यह जन्मस्थान शाही ईदगाह के वर्तमान ढाँचे के ठीक नीचे है। सन् 1670 में मुगल आक्रांता औरंगज़ेब ने मथुरा पर हमला कर दिया था और केशवदेव मंदिर को ध्वस्त करके उसके ऊपर शाही ईदगाह ढाँचा बनवा दिया था और इसे मस्जिद कहने लगे। 13.37 एकड़ जमीन पर दावा करते हुए हिन्दू यहाँ से शाही ईदगाह ढाँचे को हटाने की माँग करते रहे हैं।