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5 जूतों की सज़ा और ₹15000 जुर्माना… आगरा के मौलवी ने कुछ यूँ रफा-दफा करवाया बलात्कार का मामला, यूपी पुलिस ने शुरू की जाँच

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में रेप जैसे गंभीर मामले को भी 5 जूते मार कर रफा-दफा कर लेने का मामला सामने आया है। इस अजीबोगरीब समझौते का मास्टरमाइंड एक मौलवी बताया जा रहा है जिसके खिलाफ अब पुलिस FIR दर्ज कर रही है। गुरुवार (25 जुलाई, 2024) को की गई मौलवी की इस करतूत का वीडियो भी अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मौलवी के साथ पंचायत में मौजूद 4 अन्य पंच भी फरार हो गए हैं। पुलिस आरोपितों की तलाश के साथ मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई में जुटी हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना आगरा के थाना क्षेत्र शाहगंज की है। यहाँ 25 जुलाई को भोगीपुरा पुलिस चौकी पर एक व्यक्ति ने अपनी बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में लड़की के पिता ने बताया कि उनकी बेटी घर से कहीं चली गई जिसका कोई अता-पता नहीं है। पुलिस मामले में जाँच कर ही रही थी कि अगले दिन भोर में 3 बजे लड़की का पिता फिर से थाने पहुँच गया। उसने पुलिस को बताया कि उनकी बेटी वापस लौट आई है और उनको अब कोई पुलिसिया कार्रवाई नहीं चाहिए।

इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने लगा। इस वीडियो में एक पंचायत में 5 पंच बैठे दिख रहे हैं। पंचों का नेतृत्व एक मौलवी कर रहा है। वीडियो में वो मौलवी एक युवक को 5 जूते मारने की सजा सुना रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने इसकी जाँच शुरू की तो असल घटना निकल कर सामने आई। बताया जा रहा है कि 25 जुलाई को एक मुस्लिम युवक अपनी ही समुदाय की लड़की को उसके घर से भगा ले गया था। उसने किसी अज्ञात जगह ले कर कर लड़की को कोल्डड्रिंक में नशा दिया और बाद में बलात्कार किया।

इधर लड़की को घर पर न पा कर उसके अम्मी-अब्बू परेशान हो गए। उन्होंने फ़ौरन इस घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस की सक्रियता को देख कर आरोपित ने पीड़िता को उसके घर वापस लौटा दिया। घर आने के बाद दोनों पक्षों की तरफ से मोहल्ले के एक मौलवी ने मामले में हस्तक्षेप किया। उसने लड़की के घर वालों को बेइज्जती आदि का डर दिखाया और 5 पंचों के साथ पंचायत करने लगा। पंचायत ने आरोपित युवक को 5 जूते मारने का फरमान सुनाया। आरोपित की पिटाई पीड़िता से ही करवाई गई।

बताया यह भी गया है कि आरोपित द्वारा पीड़िता को हर्जाने के तौर पर 15 हजार रुपए भी पंचायत में दिलवाए गए। इसी फरमान के साथ पीड़ित और आरोपित पक्ष की मौजूदगी में रेप जैसे गंभीर मामले पर पर्दा डाल दिया गया। ACP मयंक तिवारी ने बताया कि वायरल वीडियो का संज्ञान ले कर केस दर्ज करवाया जा रहा है। इस बीच पीड़िता ने आरोपित द्वारा लिए गए रुपए भी वापस कर दिए हैं। घटना के बाद मौलवी सहित पंचायत में मौजूद पंच फरार हो गए हैं। पुलिस फरार सभी आरोपितों की तलाश के साथ मामले में जरूरी जाँच व कानूनी कार्रवाई कर रही है।

अब ट्रेनी IAS नहीं रहेंगी पूजा खेडकर, कभी परीक्षा भी नहीं दे पाएँगी: UPSC ने की कार्रवाई, अग्रिम जमानत माँगते हुए दिल्ली की कोर्ट से कहा- मैंने कुछ गलत नहीं किया

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने फर्जी कागजों के आधार पर IAS बनने के आरोपों में घिरी पूजा खेडकर की उम्मीदवारी रद्द कर दी है। UPSC ने कहा है कि है पूजा अब आगे किसी भी परीक्षा में नहीं बैठ पाएँगी। पूजा खेडकर ने UPSC द्वारा दर्ज करवाई FIR में गिरफ्तारी से बचने के लिए दिल्ली के कोर्ट का रास्ता अख्तियार किया है, जहाँ जमानत पर निर्णय सुरक्षित रख लिया गया है।

UPSC ने बुधवार (31 जुलाई, 2024) को स्पष्ट किया कि उसने पूजा खेडकर को अपना पक्ष रखने के लिए पूरा मौक़ा दिया लेकिन उन्होंने अपना पक्ष नहीं रखा। UPSC ने उनके द्वारा 2022 में दी गई UPSC परीक्षा की उम्मीदवारी भी रद्द कर दी है और साथ ही उन्हें भविष्य की सभी परीक्षाओं में भाग लेने से बहिष्कृत कर दिया है।

UPSC ने कहा, “यूपीएससी ने सभी कागजों की सावधानीपूर्वक जाँच की है और पूजा खेडकर को CSE-2022 नियमों के प्रावधानों के उल्लंघन करने का दोषी पाया है। CSE-2022 के लिए उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई है और उन्हें भविष्य की UPSC की सभी परीक्षाओं/चयनों से भी स्थायी रूप से वंचित कर दिया गया है।”

UPSC ने बताया है कि उसने 2009 से लेकर अब तक के परीक्षा रिकॉर्ड की जाँच की है और पाया है कि पूजा खेडकर के अलावा और किसी ने भी अनुमति से अधिक बार परीक्षा नहीं दी है। इसके लिए UPSC ने 15,000 से अधिक अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड का मिलान किया है।

पूजा खेडकर को UPSC ने 30 जुलाई, 2024 तक का समय अपना जवाब दाखिल करने के लिए दिया था लेकिन वह अपना पक्ष नहीं रख पाईं। UPSC ने कहा कि पूजा खेडकर को अपना पक्ष रखने का यह आखरी मौका दिया गया था। UPSC ने बताया कि पूजा खेडकर को यह भी सूचना दे दी गई थी कि यदि वह अपना पक्ष नहीं रखती तो उन आगे कार्रवाई की जाएगी।

UPSC ने इससे पहले धोखाधड़ी के मामले में पूजा खेडकर के विरुद्ध FIR भी दर्ज करवाई थी। खेडकर इस मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए दिल्ली की एक अदालत पहुँच गई हैं। उन्होंने यहाँ अग्रिम जमानत लेने के लिए याचिका लगाई है। पूजा खेडकर के इस मामले में बुधवार को सुनवाई भी हुई।

पूजा खेडकर के वकील ने यहाँ कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है और UPSC समेत पुलिस जाँच के बिना अंत तक पहुँचे उनको गिरफ्तार करना सही नहीं है। खेडकर की तरफ से दावा किया गया कि उन्होंने नाम बदल कर कुछ भी गलत नहीं किया। वहीं दूसरी तरफ UPSC और दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया कि पूजा खेडकर ने धोखाधड़ी की है। इस मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। वह गुरुवार (1 अगस्त, 2024) को अपना फैसला सुनाएगा।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र की रहने वाली IAS पूजा खेडकर के विरुद्ध कलेक्टर से लाल बत्ती लगी गाड़ी और अपना ऑफिस माँगने के आरोप सबसे पहले सामने आए थे। इसके बाद उनके आरक्षण के प्रमाण पत्रों में भी गड़बड़ मिली। बताया गया कि उन्होंने विकलांगता और OBC आरक्षण के प्रमाण पत्र में भी फर्जीवाड़ा किया और उससे परीक्षा में फायदा लिया।

अलीगढ़ में 94 अवैध मदरसों पर लगेगा ताला, 2000 बच्चे अब सरकारी स्कूल में पढ़ेंगे: योगी सरकार के निर्देश के बाद एक्शन में अधिकारी

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिला प्रशासन ने अवैध तौर पर चल रहे मदरसों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। जिले में 94 गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को चिन्हित करके उन्हें अवैध घोषित किया गया है। इन सभी को बंद करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। इन मदरसों में पढ़ने वाले लगभग दो हजार छात्रों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट करवाया जाएगा। बुधवार (31 जुलाई 2024) को प्रशासन ने इस कार्रवाई की जानकारी दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तर प्रदेश शासन की तरफ से इसी साल 26 जून को जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के पास पत्र आया था। मुख्य सचिव द्वारा डीएम अलीगढ़ को भेजे गए इस पत्र में जिले में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को चिन्हित करके उन पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। पत्र आने के बाद जिलाधिकारी अलीगढ़ विशाख जी ने प्रशासनिक अधिकारियों की एक टीम का गठन किया था। इस टीम में SDM, BSA, DSP, DIOS और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी शामिल थे।

इस टीम ने लगातार पूरे जिले में चल रहे तमाम मदरसों का सत्यापन किया। सत्यापन में 94 मदरसों को चिन्हित किया गया है जो बिना मान्यता के चल रहे थे। जिला अल्पंसख्यक अधिकारी निधि गोस्वामी ने बुधवार (31 जुलाई 2024) को मीडिया से बताया कि इन मदरसों को बंद किया जाएगा। इसमें पढ़ रहे लगभग 2 हजार छात्रों को सरकारी स्कूलों में शिफ्ट किया जाएगा। जाँच का दायरा बढ़ाने के लिए मान्यता प्राप्त मदरसों के शिक्षकों को भी टीम में शामिल कर लिया गया है। ये मदरसा टीचर अवैध तौर पर चल रहे मदरसों की लिस्ट तैयार करने में प्रशासन की मदद करेंगे।

जिस पत्रकार से राजीव गाँधी ने कहा था- आरक्षण के नाम पर बुद्धुओं को बढ़ावा नहीं दूँगा, उन्होंने कहा- राहुल गाँधी की राजनीति जाति और वामपंथ का खतरनाक कॉकटेल

राहुल गाँधी लगातार ‘जाति जनगणना’ की बातें कर रहे हैं, वो जाति के हिसाब से हिस्सेदारी की बातें करते हैं। कभी वो बजट बनाने वाले अधिकारियों की जाति पूछते हैं, तो कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को OBC समाज का मानने से इनकार कर देते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या सत्ता पाने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी देश को गृहयुद्ध की तरफ धकेलने की साजिश रच रही है? बड़ी बात ये है कि आरक्षण को लेकर राजीव गाँधी के जो विचार थे, वो कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए गले की फाँस बन सकते हैं।

प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का रुख भी आरक्षण के खिलाफ था। वहीं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में 1985 का मुद्दा उठाया, जब राजीव गाँधी ने प्रधानमंत्री रहते आरक्षण के खिलाफ बयान दिया था। असल में उन्होंने 1985 में ‘नवभारत टाइम्स’ (NBT) के साथ इंटरव्यू में कुछ ऐसा कहा था, जो भाजपा आज लोगों को याद दिला रही है। राजीव गाँधी का ये इंटरव्यू पत्रकार आलोक मेहता ने लिया था। अब आलोक मेहता ने CNN-News18 को दिए गए इंटरव्यू में इस पर और राहुल गाँधी की ताज़ा राजनीति पर विस्तार से बात की है।

आलोक मेहता ने कहा कि वो राजीव गाँधी के PM बनने से पहले से ही उनका संपर्क रहा है, ऐसे में वो राहुल गाँधी के ताज़ा भाषणों को सुन कर दुःखी हैं क्योंकि राहुल गाँधी को लगता है कि जाति की राजनीति कामयाब होगी। उन्होंने कहा कि राजीव गाँधी आधुनिक व्यक्ति थे, राहुल गाँधी जो राजनीति कर रहे वो उनकी पिता की राजनीति से एकदम अलग है। आलोक मेहता का मानना है कि राहुल गाँधी या तो कन्फ्यूज्ड हैं या फिर कम्युनिस्ट बनना चाहते हैं।

आलोक मेहता ने याद दिलाया कि छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस के सबसे बड़े नेता रहे विद्याचरण शुक्ला को माओवादियों ने ही मार डाला था। अलोक मेहता ने कहा कि वो लंबे समय से इस परिवार को जानते हैं, ऐसे में उन्हें आज ये सब देख कर दुःख होता है। अलोक मेहता का मानना है कि राहुल गाँधी के इस राजनीतिक रुख से उन्हें भले ही तात्कालिक फायदा हो जाए, लेकिन आगे जाकर भारत को इसका नुकसान होगा। वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि वो धार्मिक कट्टरता के साथ-साथ जातिवादी राजनीति के भी खिलाफ हैं।

आलोक मेहता ने कहा कि अगर जातीय राजनीति की ही बात करें तो राहुल गाँधी या तेजस्वी यादव से अधिक सक्षम नेता अखिलेश यादव हैं। अलोक मेहता के अनुसार, राहुल गाँधी कि ताज़ा राजनीति जातिवाद और कम्युनिज्म का मिश्रण है। उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि इस तरह की राजनीति अंततः मजदूरों के विद्रोह को जन्म देती है। आलोक मेहता ने कहा कि आज जयराम रमेश कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के सलाहकार बने हुए हैं, जो खुद एक चुनाव तक लड़ कर नहीं जीत सकते।

राजीव गाँधी के साथ आलोक मेहता (फोटो साभार: News18)

आलोक मेहता का कहना है कि राहुल गाँधी देश के सबसे बड़े भ्रष्टाचारी लालू यादव के साथ मिल कर राजनीति करते हैं। 1985 के जिस इंटरव्यू का जिक्र संसद में हुआ, उसमें राजीव गाँधी ने कहा था कि संविधान बनाए जाने के दौरान आरक्षण की जो व्यवस्था की गई थी, उसका अब काफी राजनीतिकरण हो गया है। उन्होंने कहा था कि आरक्षण के प्रावधानों पर नए सिरे से विचार का समय आ गया है। इस दौरान उन्होंने कहा था – विभिन्न क्षेत्र में बुद्धुओं के आगे बढ़ने से देश को नुकसान होगा।

विशेष विमान से राजस्थान के उदयपुर से नई दिल्ली लौटते समय यात्रा के दौरान ही उन्होंने NBT के आलोक मेहता को इंटरव्यू दिया था। बता दें कि हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने संसद में करारा पलटवार करते हुए राहुल गाँधी से पूछा कि उनकी जाति क्या है? उन्होंने कहा कि जिसकी खुद की जाति का पता नहीं, वो ‘जाति जनगणना’ की बात करता है। इसके बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी भड़क गए। उन्होंने कहा कि आप जाति कैसे पूछ सकते हैं? जबकि ‘जाति जनगणना’ के तहत यही लोग पूरे देश की जाति पूछने की माँग करते हैं।

किस बच्चे को बनाया जाएगा ईसाई, यह परीक्षा के नंबर से होता था तय: बरेली में 3 की गिरफ्तारी के बाद खुलासा, जानिए कैसे चल रहा था धर्मांतरण का रैकेट

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में रविवार (28 जुलाई, 2024) को ईसाई धर्मान्तरण के एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ था, तब पुलिस ने नाबालिग बच्चों को ईसाई बनाने के आरोप में 3 आरोपितों को गिरफ्तार किया था। इनकी पहचान प्रेम जायल, विनोद और नितिन के तौर पर हुई थी। बाद में पुलिस ने इस रैकेट की जाँच की तो कई नए और बड़े खुलासे हुए। बताया जा रहा है कि बच्चों को ईसाई धर्म का इतिहास पढ़ा कर उसी से संबंधित इम्तिहान लिया जाता था। इस एग्जाम में मिले नंबरों के ही आधार पर नाबालिगों का धर्म परिवर्तन करवाया जाता था

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बरेली के इज्जतनगर थानाक्षेत्र के इस मामले में आरोपित पादरी अपने साथियों सहित पहले गरीब बच्चों को चिन्हित किया करता था, फिर इन बच्चों को खाने-पीने की चीजें देकर मेलजोल बढ़ाया जाता था। बच्चों के घर जाने पर ये आरोपित खुद को धर्म उपदेशक और शिक्षक बताया करते थे, फिर इनके परिवार से मिलकर उन्हें बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं आदि का लालच दिया जाता था। शुरुआत में गरीब बच्चों को पढ़ाई के नाम पर अपने ठिकाने पर बुलाया जाता था। बच्चों को नए-नए खेल भी खिलाए जाते थे जिस से वो बार-बार वहाँ जाना चाहते थे।

यहाँ उन सभी को पहले ईसाई इतिहास बताया जाता था। बाद में इसी इतिहास से सवाल बना कर उन बच्चों का एग्जाम लिया जाता था। आरोप है कि ईसाई इतिहास की इस परीक्षा में हासिल किए जाने वाले नम्बरों के आधार पर भी आरोपित धर्मान्तरण के लिए बच्चों का चुनाव करते थे। जिस बच्चे को जितने ज्यादा नंबर मिलते थे उनको उतनी ही अधिक सुविधा और सहूलियत दी जाती थी। इस काम के लिए बाहर से फंडिंग हो रही थी जिसके स्रोत की तलाश में पुलिस जुटी हुई है। पुलिस न सिर्फ आरोपितों के खातों बल्कि उनकी कॉल रिकॉर्ड भी निकलवा रही है। इनके पास मिले ईसाई साहित्यों की भी जाँच करवाई जा रही है।

क्या है FIR में

गौरतलब है कि इन सभी आरोपितों को गुलशन कुमार नाम के शिकायतकर्ता की तहरीर पर गिरफ्तार किया गया है। गुलशन कुमार का आरोप है कि आरोपित पहले भी कई बच्चों को ईसाई बना चुके हैं। उनको इस साजिश की भनक लगी तो वो भी आरोपितों की सभा में बैठने गए, तब बच्चों के साथ पादरी प्रेम जोनल ने उन्हें भी ईसाई बनने का लालच दिया। आरोपितों ने गुलशन को नीले कवर वाली एक किताब दी जिस पर सुनहरे रंग से ‘पवित्र शस्त्र भजन संहिता और नीति वचन’ लिखा हुआ था।

पादरी जोनल ने गुलशन के हाथ में किताब पकड़ाते हुए उनसे कहलवाया, “हे ईशु भगवान। मैं आपकी शरण मे आ गया हूँ और ईसाई धर्म कबूल करता हूँ।” पीड़ित के मुताबिक उनके साथ आरोपितों ने धोखा और विश्वासघात किया है। बकौल पीड़ित इस हरकत से उनकी धार्मिक भावनाएँ आहात हुई हैं। पुलिस ने इस शिकायत पर तीनों आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 299 के साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के सेक्शन 3/5(1) के तहत कार्रवाई की है। मामले में जाँच व आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

आयुष्मान घोटाला: हिमाचल प्रदेश में फर्जी मरीजों को ठीक कर अस्पताल ले रहे थे सरकार से पैसा, कॉन्ग्रेस MLA पर कसा शिकंजा, 19 जगहों पर ED की रेड

फर्जी आयुष्मान कार्ड जारी करके सरकार को चूना लगाने वाले अस्पतालों और उनसे जुड़े लोगों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) छापेमारी कर रहा है। ED ने इस संबंध में 19 जगहों पर छापेमारी की है। हिमाचल प्रदेश में कॉन्ग्रेस के विधायक RS बाली के ठिकानों पर भी ED ने छापा मारा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ED की यह छापेमारी पंजाब, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और चंडीगढ़ में बुधवार (31 जुलाई, 2024) को सुबह से चालू हुई। यह छापेमारी फोर्टिस अस्पताल, बांकेबिहारी अस्पताल, श्रीबालाजी अस्पताल और कई अन्य पर हुई है।

जिन RS बाली के ठिकानों पर इस मामले में छापे पड़े हैं, वह हिमाचल कॉन्ग्रेस के बड़े नेता हैं। कांगड़ा में फोर्टिस अस्पताल चलाने वाली कम्पनी हिमाचल हेल्थकेयर लिमिटेड बाली की है। इस अस्पताल पर भी गड़बड़ी करने के आरोप हैं।

बाली हिमाचल प्रदेश CM सुखविंदर सिंह सुक्खू के करीबी हैं। बाली हिमाचल प्रदेश में अति महत्वपूर्ण माने जाने वाले हिमाचल प्रदेश टूरिस्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के भी मुखिया हैं। RS बाली के पिता GS बाली भी कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओ में थे। बाली के अलावा कॉन्ग्रेस नेता डॉक्टर राजेश शर्मा पर भी छापेमारी हुई है।

जाँच एजेंसी के अधिकारियों ने मीडिया को बताया है कि इन अस्पतालों ने फर्जी आयुष्मान कार्ड के आधार पर फर्जी मरीजों का इलाज कर दिया। इन मरीजों का लंबा इलाज और सर्जरी दिखाया गया। जाँच में 373 मामले सामने आए हैं। इसे कारण 40.68 लाख का नुकसान सरकार को पहुँचा।

इस फर्जीवाड़े के कारण सरकार ने हिमाचल प्रदेश में 8,000 से अधिक आयुष्मान कार्ड रद्द कर दिए थे। इस पूरे फर्जीवाड़े का आकार ₹25 करोड़ होने की आशंका है। यह फर्जीवाड़ा करने वाले अस्पतालों को प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना से बाहर कर दिया गया था। इस मामले में सबसे पहले ऊना में शिकायत दर्ज की गई थी। इसके बाद इसकी जाँच ED ने अपने हाथों में ले ली थी।

गौरतलब है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत केंद्र सरकार प्रत्येक परिवार को ₹5 लाख का स्वास्थ्य बीमा देती है। इसमें योजना के अंतर्गत आने वाले अस्पतालों में इलाज करवाया जा सकता है, इसका भुगतान सरकार देती है। हालाँकि, कई जगह इस योजना में फर्जी बिल बनाकर सरकार को चूना लगाया जा रहा है।

वायनाड की तबाही पर मोदी सरकार ने पहले ही दे दी थी चेतावनी, अब सेवा में जुटा है RSS; लेकिन नामदारों (राहुल गाँधी+प्रियंका वाड्रा) के पास पीड़ितों के लिए समय नहीं

केरल के वायनाड में मची तबाही के बीच एक तरफ जहाँ राष्ट्रीय स्वयं सेवक के सदस्य ग्राउंड पर उतरकर पीड़ितों की मदद कर रहे हैं और राहुल गाँधी ने कहा है कि वो वायनाड तेज बारिश और मौसम खराब के कारण नहीं जा सकते उस बीच नई जानकारी सामने आई है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सदन में देश को बताया कि वायनाड के हालातों पर कहा जा रहा है कि पहले चेतावनी दी जानी चाहिए थी, लेकिन हकीकत तो ये है कि केंद्र ने 23 जुलाई को ही केरल सरकार को चेतावनी जारी कर दी थी यानी 7 दिन पहले। इसके बाद 24 और 25 जुलाई को भी चेतावनी भेजी गई थी। हर बार बताया गया था कि राज्य में भारी वर्षा और भूस्खलन के अनुमान हैं जिसमें लोगों की जान जा सकती है।

गौरतलब है कि वायनाड वही जगह है जहाँ से राहुल गाँधी पिछले लोकसभा चुनाव में सांसद निर्वाचित हुए थे और इस बार भी वायनाड की जनता ने उनपर विश्वास दिखाया था। आज इतनी बड़ा हादसा वहाँ के ग्रामीणों के साथ हो गया, लेकिन राहुल वहाँ अब तक नहीं गए। उलटा आज उन्होंने एक ट्वीट करके जानकारी दी कि वो अभी वायनाड नहीं जा सकते क्योंकि बारिश, मौसम खराब है। उन्होंने वायनाड की जनता को आश्वासन दिया है कि वो जल्द उनसे मिलने आएँगे

अपने एक्स पोस्ट में राहुल गाँधी ने कहा, “प्रियंका और मैं, भूस्खलन से प्रभावित लोगों से मिलने कल वायनाड आने वाले थे ताकि स्थिति का जायजा लें। हालाँकि लगातार बारिश और खराब मौसम के कारण हमें प्रशासन ने बताया कि हम लैंड नहीं कर पाएँगे। मैं वायनाड के लोगों को सुनिश्चित करना चाहता हूँ कि हम लोग जल्द से जल्द आएँगे और स्थिति को गंभीरता से मॉनिटर करके हर जरूरी चीजें मुहैया कराएँगे। हम इस कठिन समय में वायनाड के लोगों के साथ हैं।”

इसी तरह राहुल गाँधी का संदेश साझा करते हुए प्रियंका वाडरा ने वायनाड के लोगों को बताया कि वो लोग कल मिलने नहीं आ पाएँगे लेकिन उनकी संवेदनाएँ उनके साथ हैं और वो लोग इसके लिए प्रार्थना भी कर रहे हैं।

बता दें कि दोनों कॉन्ग्रेस नेता एक तरफ जहाँ सोशल मीडिया पर पीड़ितों के साथ एकजुटता दिखा रहे हैं और मौसम देख वहाँ पहुँचने से पीछे हटे हैं उस समय में वहाँ कुछ लोग हैं जो लगातार पीड़ितों की मदद कर रहे हैं।

इन लोगों में सिर्फ सेना और एडीआरएफ की टीम नहीं हैं। इनके साथ आरएसएस और सेवा भारती के लोग भी हैं। इन संगठनों के कार्यकर्ता खाने के लिए कैंप लगा रहे हैं ताकि पीड़ितों की मदद कर सकें। इसके अलावा वो मृतकों के अंतिम संस्कार के भी व्यवस्था कर रहे हैं, घायलों को अस्पताल पहुँचा रहे हैं, उनका ख्याल रख रहे हैं, सबको सही समय पर मेडिकल केयर मिले उसे सुनिश्चित कर रहे हैं, सड़कों पर टूटे पेड़ों को हटा रहे हैं ताकि आवागमन सही हो।

जानकारी के मुताबिक, वायनाड में अब तक 150 के करीब लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीच आरएसएस के स्वयंसेवक अपनी सेवा दे रहे हैं, लेकिन दुखद बात ये है कि वामपंथी हमेशा से इसी आरएसएस पर निशाना साधते हैं जबकि हकीकत यह है कि आरएसएस के लोग धर्म या जाति की पहचान की परवाह किए बिना मानव निर्मित आपदा में लोगों की मदद करते हैं और राहुल गाँधी जैसे लोग जाति-आधारित विभाजनकारी कहानी सुना रहे हैं।

नौकर के साथ मिलकर OBC समाज की बच्ची से रेप करता था सपा नेता, सांसद अवधेश प्रसाद का करीबी भी है मोईद खान: घर में चल रही थी पुलिस चौकी

उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में एक नाबालिग लड़की से गैंगरेप का मामला सामने आया है। रेप का आरोप समाजवादी पार्टी के नेता मोईद खान और उनके नौकर राजू पर लगा है। मजदूर परिवार की पीड़िता का अश्लील वीडियो बना कर उसे ब्लैकमेल भी किया गया। मंगलवार (30 जुलाई, 2024) को पुलिस ने केस दर्ज कर के मोईद खान और उसके नौकर राजू को गिरफ्तार कर लिया है। जिस सपा नेता मोईद खान पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगा है उसी के घर में लगभग 12 साल से पुलिस चौकी चल रही थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना अयोध्या के थाना क्षेत्र पूराकलंदर की है। यहाँ के चौकी क्षेत्र भदरसा में समाजवादी पार्टी के नेता मोईद खान की बेकरी की दुकान है। यहीं पर एक OBC समुदाय की एक मजदूर महिला और उनकी 12 वर्षीया नाबालिग बेटी रहती है। लगभग 75 दिन पहले पीड़िता अपनी माँ के साथ मजदूरी कर के लौट रही थी। तभी रास्ते में मोईद की दुकान में काम करने वाले नौकर राजू खाँ ने पीड़िता को टोस्ट लेने के लिए अपनी दुकान पर बुलाया। लड़की पहले भी मोईद की दुकान पर आती जाती रही थी इसीलिए वो विश्वास कर के वहाँ चली गई।

बताया जा रहा है कि दुकान में राजू और उसके मालिक मोईद ने पीड़िता से बारी-बारी सामूहिक दुष्कर्म किया। इसी दौरान आरोपितों द्वारा रेप का वीडियो भी बना लिया गया। किसी को बताने पर वीडियो वायरल करने की धमकी भी दी गई। बाद में इसी वीडियो से डरा-धमका कर पीड़िता से 2 महीने तक दोनों आरोपितों ने गैंगरेप किया। इस वजह से पीड़िता गर्भवती हो गई। लड़की के पेट में दर्द होने पर माँ को शक हुआ। जब यह बात लड़की की माँ को पता चली तो उसने पूरी वजह पूछी। पीड़िता ने सारी बात अपनी माँ को बता दी। आखिरकार मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई।

मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर हिन्दू संगठनों का जमावड़ा शुरू हो गया। भाजपा और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के साथ निषाद पार्टी के सदस्य भी थाने पर जमा हो गए और नारेबाजी करने लगे। मौके पर पुलिस फोर्स पहुँची और नाराज लोगों को समझा कर शाँत करवाया। जाँच के दौरान यह भी पता चला कि जिस भदरसा पुलिस चौकी क्षेत्र की यह घटना है वह आरोपित मोईद खान की ही प्रॉपर्टी में चल रही थी। रात भर में ही पुलिस चौकी को मोईद खान की प्रॉपर्टी से अलग जगह शिफ्ट किया गया। आरोपित समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद का भी नजदीकी बताया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि मोईद खान की ही प्रॉपर्टी में एक बैंक भी संचालित हो रहा है। नाराज लोगों का यह भी आरोप है कि घटना की FIR शिकायत देने के 30 घंटे बाद दर्ज हुई है। फिलहाल गैंगरेप के आरोप सपा नेता मोईद खान और उसके नौकर राजू को गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों आरोपितों पर गैंगरेप की धाराओं के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। मोईद खान के बेकरी की दूकान की वैधता जाँची जा रही है। पीड़िता की माँ का आरोप है कि शिकायत दर्ज करवाने के बाद उन्हें लगातार केस वापस लेने का दबाव दिया जा रहा है।

हाई कोर्ट की फटकार के बाद घुसपैठियों पर जागी झारखंड सरकार, जिस जिले के बूथ पर 123% बढ़े वोटर वहाँ बनी जाँच कमिटी: 1467 बूथ पर सामने आया था ‘डेमोग्राफी चेंज’

झारखंड हाई कोर्ट के आदेश के बाद राज्य के संताल परगना में बांग्लादेशी घुसपैठ को जाँच के लिए प्रशासन जागा है। संताल परगना के जिले साहिबगंज के उपायुक्त ने एक समिति गठित करके बांग्लादेशी घुसपैठ की जाँच चालू की है। साहिबगंज के उपायुक्त ने जिले के शीर्ष अधिकारियों को भी इसमें शामिल किया है।

साहिबगंज के उपायुक्त हेमंत सती ने अतिरिक्त कलेक्टर, सीओ और राजमहल के SDPO के साथ अन्य अधिकारियों को मिलाकर एक समिति बनाई है। यह जिले भर में बांग्लादेशी घुसपैठ की जाँच करेगी। यह समिति संथाल परगना के और जिलों में बनाने के आदेश भी कोर्ट ने दिए थे।

गौरतलब है कि जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की पीठ ने बुधवार (3 जुलाई 2024) को ये निर्देश दिए थे। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया था कि वह दो सप्ताह के भीतर राज्य में मौजूद घुसपैठियों का पता लगाए, उनको चिन्हित करे और उन पर क्या कार्रवाई की गई, इसको लेकर रिपोर्ट दाखिल करे। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी रिपोर्ट माँगी थी।

इसके अलावा हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि संथाल परगना के सभी DC अपने आपस में सामंजस्य बनाएँ और बांग्लादेशी घुसपैठ की जाँच करें। हाई कोर्ट की यह सख्ती डानियल दानिश की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिखी थी।

इस याचिका में अदालत को बताया गया था कि राज्य के संथाल परगना के जो भी जिले बांग्लादेश से सटे हुए हैं, उनमें बांग्लादेश के प्रतिबंधित संगठन सुनियोजित तरीके से झारखंड की जनजातीय लड़कियों से शादी करके उनका धर्मांतऱण करवा रहे हैं। नए मदरसे भी खुल रहे हैं। संताल परगना में गोड्डा, देवघर, दुमका, जामताड़ा, साहिबगंज और पाकुड़ जिले शामिल हैं।

हाई कोर्ट की इस टिप्पणी ने झारखंड की उस समस्या को सामने रखा था जो धीरे-धीरे नासूर बन चुकी है। संथाल परगना के जिले पश्चिम बंगाल से सीमाएँ साझा करते हैं। पहले घुसपैठिए बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल में आते हैं और यहाँ से फैलते हुए वह झारखंड में आ जाते हैं।

सिर्फ जमीन ही नहीं चुनाव में भी घुसपैठ

बांग्लादेशी घुसपैठियों की यह समस्या शादी करने और जमीन हथियाने तक सीमित नहीं रही है। इसका कनेक्शन लोकसभा चुनाव तक से जुड़ा है। हाल ही में भाजपा की रिपोर्ट में सामने आया है कि मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में वोटरों की संख्या में यह अप्रत्याशित बढ़त 20% से 123% तक की है। यह बढ़त इन 10 विधानसभा के कुल 1467 बूथ पर हुई है।

भाजपा ने बताया है कि सामान्यतः पाँच वर्षों में 15% से 17% की वृद्धि होती है, इसीलिए यह वृद्धि असामान्य है। भाजपा ने यह भी बताया है कि हिन्दू आबादी वाले बूथ पर वोटरों की संख्या में बढ़त मात्र 8% से 10% हुई है। भाजपा ने यह भी बताया है कि कई बूथ पर हिन्दू मतदाता घट भी गए हैं।

भाजपा की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर इस इन भी बूथ की जाँच हो तो डेमोग्राफी बदलने की एक साजिश सामने आएगी। भाजपा ने आरोप लगाया है कि विदेशी घुसपैठियों द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अपना नाम वोटरों की सूची में दर्ज करवाया गया है, जिसके लिए अवैध रूप से कागज बनवाए गए हैं। 

नई नहीं है डेमोग्राफी बदलने की बात

झारखंड हाई कोर्ट की टिप्पणी को रेखांकित करने वाली काफी सारी घटनाएँ पहले भी सामने आ चुकी हैं। इससे पहले मार्च, 2024 में आजतक की एक रिपोर्ट में याचिका में बताई गई समस्या को लेकर ही बात की गई थी। आजतक की रिपोर्ट में बताया गया था कि यहाँ बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठिए, पश्चिम बंगाल के रास्ते आते हैं। इसके बाद वह बस जाते हैं। इनमें से कुछ आदिवासियों की लड़कियों को निशाना बनाते हैं। जब लडकियाँ उनके दिखावे में फंस जाती हैं तो उनसे शादी कर ली जाती है।

शादी के बाद लड़की की कागजों में पहचान आदिवासी के तौर पर ही रहने दी जाती है। इसके बाद उस लड़की के नाम पर जमीन ली जाती है या फिर उसकी ही जमीन कब्जा ली जाती है। रिपोर्ट में बताया गया था कि यह सब करने के लिए बांग्लादेश से आने वाले घुसपैठियों को फंडिंग मिलती है। लड़की की पहचान आदिवासी रखने के पीछे सरकारी फायदे लेने के मकसद रहता है। इसके अलावा कई जगह उन लड़कियों को चुनाव भी लड़वाया गया, जिन्होंने मुस्लिमों से शादी की।

आजतक की रिपोर्ट में यह तक बताया गया था कि यहाँ घुसपैठ करने वाले बांग्लादेशी इस जमीन में खनन के लिए भी ऐसा कर रहे हैं। कुल मिलाकर धीमे-धीमे इस इलाके की पहचान बदली जा रही है। बांग्लादेशी घुसपैठिए झारखंड में घुसते ही फर्जी पहचान पत्र भी बनवा लेते हैं। इसमें इनकी मदद पहले से आकर बस चुके लोग भी करते हैं।

‘मुफ्त की राजनीति के कारण इंफ्रास्ट्रक्टर के लिए पैसे नहीं’: 3 छात्रों की मौत पर दिल्ली HC ने AAP सरकार को घेरा, कहा – कंगाल हैं संस्थाएँ, वेतन तक के लिए पैसे नहीं

हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी के राजेंद्र नगर में एक कोचिंग संस्थान के बेसमेंट में पानी भर जाने के कारण 3 छात्रों की मौत हो गई, जिनमें 2 लड़कियाँ थीं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने अब इस मामले पर सुनवाई करते हुए प्रदेश की AAP सरकार की ‘मुफ्त की राजनीति’ पर सवाल खड़े किए हैं। बता दें कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल फ्री में बिजली-पानी देने का वादा कर चुनाव जीतते रहे हैं। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और जस्टिस तुषार राव गेडेला ‘Freebies’ संस्कृति के कारण सरकार के पास इंफ्रास्ट्रक्चर को उन्नत बनाने के लिए पैसे ही नहीं हैं।

उन्होंने चिंता ज़ाहिर की कि एक तरफ जहाँ दिल्ली में जनसंख्या तेज़ी से बढ़ती जा रही है, वहीं दूसरी तरफ यहाँ का ड्रेनेज सिस्टम बर्बाद हुआ पड़ा है। जजों ने कहा कि आप कई मंजिला इमारतों के निर्माण की अनुमति दे रहे हैं, लेकिन अपने पास ठीकठाक ड्रेनेज सिस्टम भी नहीं है। साथ ही ध्यान दिलाया कि दिल्ली की नागरिक संस्थाएँ कंगाल हो चुकी हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने AAP सरकार से पूछा कि अगर आपके पास कर्मचारियों को वेतन तक देने के लिए पैसे नहीं हैं तो आप इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास कैसे कीजिएगा?

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि आप Freebie कल्चर चाहते हैं, आप कोई धन संग्रह नहीं कर रहे, इसीलिए आप पैसे खर्च भी नहीं कर रहे। दिल्ली हाईकोर्ट ने MCD से परियोजनाओं पर काम करने के लिए कहा था, लेकिन उधर से कहा गया कि 5 करोड़ रुपए से अधिक बजट वाली हर परियोजना के लिए स्टैंडिंग कमिटी की अनुमति चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा कि फ़िलहाल कोई कमिटी ही नहीं है। इसी तरह MCD ने एक योजना को लेकर कहा कि ये कैबिनेट में अनुमति के लिए जाना है, लेकिन अगली कैबिनेट बैठक कब होगी किसी को नहीं होता।

‘Rau’s IAS’ कोचिंग संस्थान में हुई 3 मौतों को लेकर छात्र सड़क पर हैं, इसी क्रम में दिल्ली हाईकोर्ट में भी PIL दाखिल की गई थी। इसमें माँग की गई कि दिल्ली के हर जिले में समिति बना कर जाँच की जाए कि कौन-कौन से निर्माण अवैध हैं। साथ ही जून 2023 में मुखर्जी नगर के एक कोचिंग संस्थान में आग लगने के बाद प्रशासन ने क्या कदम उठाए, इसकी एक्शन रिपोर्ट तलब करने की भी माँग की गई थी। इस मामले में एक कारोबारी मनोज कथुरिया को गिरफ्तार किया गया है, जो कोचिंग के पास से पानी भरी सड़क से अपनी SUV चलाते हुए निकले थे।

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, “लगता है किसी ने अपना दिमाग खो दिया है। इस मामले की जाँच कर रहे पुलिस अधिकारी आखिर क्या कर रहे हैं? केवल एक MCD अधिकारी को जेल हुई है। आखिर अंत में किसी को तो जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी। MCD को इसे ठीक करना होगा। वरिष्ठ अधिकारी जिम्मेदारी लें, लेकिन वो अपने AC चैंबरों से बाहर निकलने के लिए तैयार ही नहीं हैं। हम पूरे परिदृश्य को देखना चाहते हैं, इसीलिए इस मामले की जाँच CBI या लोकपाल से कराने पर विचार किया जाएगा।”