मध्य प्रदेश के भिंड, मुरैना, श्योपुर, रीवा आदि जिलों के मदरसों में सरकारी अनुदान हासिल करने के लिए बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा चल रहा है। मदरसों की रजिस्टर में मुस्लिमों से अधिक हिंदू बच्चों का नामांकन दिखाया गया है। भिंड-मुरैना तो वो इलाके हैं, जहाँ प्रदेश में मुस्लिम आबादी सबसे कम है, लेकिन मदरसे सबसे अधिक हैं। खुलासे के बाद श्योपुर के 80 में से 56 मदरसों की मान्यता रद्द कर दी गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जिन हिंदू बच्चों का दाखिला मदरसे में दिखाया गया है, वे सरकारी या प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं। ये कभी मदरसा नहीं गए। इन बच्चों के माता-पिता को भी पता नहीं है कि उनके बच्चों का नाम मदरसों में दर्ज है। दरअसल, मदरसा संचालकों ने इन बच्चों की ‘समग्र’ आईडी जुटाकर मदरसे में फर्जी तरीके से एडमिशन दिखाया है। इस तरह यहाँ पढ़ने वाले छात्रों में मुस्लिमों से अधिक हिंदू हैं।
ये सारा मसला राज्य सरकार से मिलने वाले फंड को लेकर है। मध्य प्रदेश में सरकार की ओर से मदरसों में पढ़ने वाले 100 बच्चों के लिए हर महीने 50,000 रुपए से 60,000 रुपए तक की मदद दी जाती है। इसके अलावा भी मध्य प्रदेश की सरकार की ओर से इन मदरसों को कई अन्य तरह की मदद दी जाती है। इनमें शिक्षकों को तनख्वाह से लेकर अनाज भी शामिल है।
अगर किसी मदरसे में 100 बच्चे हैं और हर महीने उनकी उपस्थिति 70 प्रतिशत रहती है तो फि 2.10 क्विटंल गेहूँ, खाना बनाने के लिए 11440 रुपए, रसोइए को देने के लिए 4,000 रुपए का महीना जैसी सुविधाएँ मिलती हैं। इसके अलावा, इन मदरसों में पढ़ाने वाले स्नातक शिक्षक को 3000 हजार रुपए और पोस्ट ग्रेजुएट को 6,000 रुपए मासिक का वेतन मिलता है।
भिंड के बीटीआई रोड इलाके में संचालित मदरसा हुसैनी फॉर ऑनली गर्ल्स में कुल 77 बच्चे हैं, जिनमें 44% हिंदू हैं। भिंड के 11 महावीर नगर में बीटीआई स्कूल के पीछे अलीमुद्दीन के मकान में संचालित मदरसा दीन-ए-अकबर और हुसैनी प्रोग्राम फॉर ऑनली गर्ल्स में 83 विद्यार्थी हैं, जिनमें 53 प्रतिशत हिंदू हैं। भिंड के सुभाष नगर में संचालित मदरसा मस्जिद नवी में 87 छात्र हैं, जिनमें 44% हिंदू हैं।
अगर भिंड और मुरैना में मदरसों की बात करें तो इन मुरैना में 70 और भिंड में 67 मदरसे चल रहे हैं। दोनों जिलों के कुल 137 मदरसों में 3,880 हिंदू बच्चों के नाम अंकित हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में सबसे अधिक मुस्लिम आबादी बुरहानपुर जिले की है, फिर भी वहाँ 23 मदरसे हैं। यह फर्जीवाड़ा अनुदान और मिड डे मील का अनाज एवं पैसा हड़पने के लिए किया जा रहा है।
वहीं, श्योपुर जिले के मदरसों में हिंदू बच्चों के नाम सरकारी मदद लेने के खुलासे के बाद मंगलवार (30 जुलाई 2024) को यहाँ से 80 में से 56 मदरसों पर यह कड़ी कार्रवाई की गई है। इनकी मान्यता रद्द कर दी गई है। इसके साथ ही स्कूली शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप ने सभी जिलों में संचालित मदरसों की भौतिक सत्यापन की जाँच में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
यहाँ कई ऐसे छात्र हैं, जिनका नाम साल 2004 में भी दर्ज था और फिर 2018 एवं 2023 में भी उनका शामिल किया गया है। यहाँ के मदरसे में छात्र के रूप में एक नाम मानव गोयल का भी है, जो सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। प्रिया मित्तल डॉक्टर हैं। ज्योत्सना गोयल भी डॉक्टर हैं। इनका भी नाम इन मदरसों में दर्ज है। ऐसे अनेकों नाम पर जिन पर सरकार से अनुदान और खाद्यान्न लिए जा रहे थे।
अधिकारियों का कहना है कि अकेले श्योपुर जिले के मदरसों से पिछले पाँच वर्ष की रिकवरी की जाए तो सरकार को इनसे लगभग 125 करोड़ रुपए की रिकवरी सरकार को करना पड़ेगी। अगर पूरे प्रदेश की बात की जाए तो यह रकम हजारों करोड़ रुपए तक पहुँच जाएगी। बता दें कि मुरैना के 68 मदरसों में 2068 हिंदू बच्चे, भिंड के 78 मदरसों में 1812 हिंदू बच्चे, रीवा के 111 मदरसों में 1426 हिंदू बच्चे हैं।
दरअसल, मध्य प्रदेश के 1505 मदरसों में हिंदू बच्चों के इस्लाम की शिक्षा लेने की जानकारी सामने आने के बाद राष्ट्रीय बाल आयोग (NCPCR) ने हस्तक्षेप किया था। संस्था के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने इसके जाँच के आदेश दिए थे। जाँच के बाद इसका खुलासा हुआ है। कानूनगो का कहना है कि राज्य के मदरसों में 9400 से ज्यादा हिंदू बच्चे दर्ज हैं। इसमें अफसरों की मिलीभगत है।
पेरिस ओलंपिक में शूटिंग में तीसरा मेडल भी भारत ने अपने खाते में कर लिया है। इस मेडल को दिलाने वाले शूटर का नाम स्वप्निल कुसाले है। उन्होंने 50 मीटर राइफल में इसे जीता। इसे मैराथन ऑफ शूटिंग भी कहा जाता है। उनकी इस जीत के साथ ही भारतीयों का उत्साह ओलंपिक में और बढ़ गया है।
स्वप्निल कुसाले ने 451.4 पॉइंट के साथ ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। चीन के लियु युकान ने 463.6 पॉइंट के साथ गोल्ड जीता। वहीं यूक्रेन के शूटर शेरी कुलिश (461.3) ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया।
??? ?????? ??. ? ??? ?????! Many congratulations to Swapnil Kusale on winning India's third medal at the Paris 2024 Olympics!
— India at Paris 2024 Olympics (@sportwalkmedia) August 1, 2024
इससे पहले पेरिस ओलंपिक में भारत के लिए पहला मेडल मनु भाकर ने जीता। उन्होंने बीते रविवार को 10 मीटर एयर पिस्टल में ब्रॉन्ज जीतकर मेडल टैली में भारत का खाता खोला था। इसके बाद मनु भाकर और सरबजोत सिंह की जोड़ी ने मिक्स्ड टीम इवेंट में भी ब्रॉन्ज मेडल जीता था। अब पेरिस ओलंपिक में भारत की शान ऊँची करने वालों में स्वप्निल कुसाले का नाम भी जुड़ गया है।
बता दें कि स्वप्निल कुसाले 2015 में कुवैत में हुई एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में 50 मीटर राइफल प्रोन 3 इवेंट में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। उन्होंने 59वें नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में गगन नारंग और चेन सिंह जैसे शूटर्स को हरा चुके हैं।
यूट्यूब पर वीडियो बना कर व्यूज बटोरने के लिए ट्रेन की पटरी पर सिलेंडर और साइकिल रखने वाले गुलजार शेख को पकड़ लिया गया है। गुलजार शेख के विरुद्ध शिकायत भी दर्ज कर ली गई है। उसके पकड़े जाने की जानकारी भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने दी है।
शहजाद पूनावाला ने एक्स (पहले ट्विटर) पर जानकारी दे कर बताया है कि यात्रियों की जान को खतरे में डालने वाले ‘रेल जिहादी’ गुलजार शेख को पुलिस ने पकड़ लिया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन उसे किसी कीमत पर नहीं छोड़ेगा। वहीं गुलजार शेख के खिलाफ कई धाराओं में शिकायत भी दर्ज हुई है।
“Rail Jihadi” Gulzar arrested
रेल जिहादी गुलज़ार गिरफ़्तार
I assured you that Rail Jihadi won’t be spared by authorities @legalhindudef
— Shehzad Jai Hind (Modi Ka Parivar) (@Shehzad_Ind) August 1, 2024
गुलजार शेख के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धरा 324, 326 और 109 के साथ ही रेलवे एक्ट की कई धाराओं में शिकायत दर्ज की गई है। इसके अलावा उसके ऊपर आईटी एक्ट की धाराएँ भी लगाई गई हैं। शिकायत में कहा गया है गुलजार शेख के कृत्य से कोई बड़ा ट्रेन हादसा हो सकता है और उसे इस बात की जानकारी भी है।
Legal Hindu Defence back in action ??
पुलिस कंप्लेंट हो चुकी है। सख़्त से सख़्त क़ानूनी कार्यवाही करवाएगा @legalhindudef ?
गौरतलब है कि गुलजार शेख के कुछ वीडियो वायरल हुए थे जिनमें वह ट्रेन की पटरी पर अलग-अलग सामान रखता था। गुलजार शेख ने यूट्यूब पर खुद को ‘हैकर’ और ‘एक्सपेरिमेंट’ करने वाला बता रखा है। उसका यूट्यूब पर गुलजार इंडियन हैकर नाम से चैनल है, इस पर 2.35 लाख सब्सक्राइबर हैं।
गुलजार शेख की ऐसी ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इसमें वह ट्रेन आने के पहले पटरी के बीचोंबीच एक बड़ी साइकिल डाल देता है। जब ट्रेन पूरी गुजर जाती है तो वह साइकिल दिखाता है। हालाँकि, इस मामले में कोई टक्कर नहीं हुई लेकिन यदि ऐसा होता तो ट्रेन सवार यात्रियों की जान को खतरा हो सकता था।
ऐसी ही एक और वीडियो में और ट्रेन की पटरी पर गैस सिलेंडर रखते हुए देखा जा सकता है। एक अन्य वीडियो में वह लोहे का मोटर पटरियों पर रखता है। एक और वीडियो में वह पटरी पर बाल्टी रखता है। इन सब वीडियो के बाद वह दिखाता है कि क्या नुकसान उस वस्तु को हुआ है। उसकी वीडियो वायरल होने के बाद अब उसे पकड़ कर लिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के पूर्व निजी सचिव बिभव कुमार को गुंडा बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने CM केजरीवाल पर भी प्रश्न उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि क्या केजरीवाल के ऑफिस को गुंडे रखने की जरूरत है। कोर्ट ने यह टिप्पणियाँ बिभव कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस उज्जवल भुइयां और जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दीपंकर दत्ता ने गुरुवार (1 अगस्त, 2024) को बिभव कुमार के मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने कहा, “क्या मुख्यमंत्री का बंगला कोई निजी आवास है? CM आवास को ऐसा गुंडा रखने की क्या जरूरत है? क्या ऐसा हुआ है, हम तो आश्चर्यचकित हैं। सवाल है कि ऐसा कैसे हुआ।”
कोर्ट ने कहा, “क्या यही तरीका है, क्या ये एक निजी आवास है? यह मुख्यमंत्री का घर है? आप ऐसा कहना चाहते हैं जैसे कि कोई एक गुंडा घुस आया और आप उसे बचाना चाहते है। बिभव कुमार एक महिला पर हमला किया है। क्या बिभव कुमार को ऐसा करते समय कोई शर्म आई।”
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वाति मालीवाल ने हमले से पहले अपनी शारीरिक स्थिति भी बिभव कुमार को बता दी थी फिर भी उन्होंने हमला किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिभव कुमार पूर्व सचिव हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि स्वाति मालीवाल को केजरीवाल के घर में रुकने की कोई अनुमति नहीं थी तो बिभव कुमार को भी नहीं थी।
कोर्ट ने इस मामले में कहा कि सामान्यतः तो जमानत दे ही देते हैं, यहाँ तक कि हत्यारों को भी जमानत मिलती है लेकिन इस मामले में यह आगे चल कर बुरे उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि अगर बिभव कुमार नहीं जाँच प्रभावित कर सकते तो आखिर कौन कर सकता है।
इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने बिभव कुमार को जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसी के खिलाफ बिभव कुमार सुप्रीम कोर्ट पहुँचे थे। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर दिया है।
बिभव कुमार पर आरोप है कि उन्होंने 13 मई, 2024 को CM केजरीवाल से मिलने आई AAP की राज्यसभा सांसद से मारपीट की। स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया है कि उन पर बिभव कुमार ने हमला किया और उनको जमीन पर गिरा कर तक मारा। स्वाति मालीवाल ने कहा कि उनकी पिटाई के दौरान केजरीवाल के आवास में मौजूद लोगों ने उनकी मदद नहीं की।
30 जुलाई 2024 को ऑपइंडिया ने एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें ‘इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस’ के अध्यक्ष सैम पित्रौदा और उनकी एनजीओ ‘ग्लोबल नॉलेज इनिशिएटिव’ के बारे में जानकारी दी गई थी। हमने बताया था कि इस संस्था को रॉकफेलर फाउंडेशन सहित यूएस स्टेट डिपार्टमेंट, यूएसएआईडी से फंड मिलता है। इनमें से रॉकफेलर फाउंडेशन के वर्तमान उपाध्यक्ष सैम पित्रौदा ही हैं, जो पहले अमेरिकी सरकार में सलाहकार भी रह चुके हैं। हमने इन्हीं सारे बिंदु को एक दूसरे से जोड़कर सवाल उठाया था कि क्या कॉन्ग्रेस और अमेरिका के बीच खुफिया तौर पर मिलीभगत चल रही है।
रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद कॉन्ग्रेस नेता प्रवीण चक्रवर्ती ने ट्विटर पर ऑपइंडिया को धमकी दी। अपने ट्वीट में प्रवीण चक्रवर्ती ने कहा कि जिस बैठक की बात हो रही है उस ट्रिप पर वो राहुल गाँधी के साथ थे। उन्होंने राहुल गाँधी से जुड़ी खबर को झूठी बताया और कहा कि इससे द्विपक्षीय संबंध पर फर्क पड़ सकता है जो कि राष्ट्रीय हित के खिलाफ है और एक तरह का केस चलाने लायक अपराध भी है। हालाँकि चक्रवर्ती ने धमकी देते हुए हमें यह नहीं बताया कि उन्हें ऑपइंडिया पर किस धारा के तहत कार्रवाई करनी है न ही उन्होंने हमें बताया कि वो कि हमारी रिपोर्ट राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा कैसे है।
This is totally false & an utter lie. There were no “secret” White House meetings.
I was with Mr.Gandhi on every day of this trip
This fake news about the Leader of the Opposition can impact bilateral relationship, is against India’s national interests & a prosecutable offence. https://t.co/uEfDW33Oje
अब एक बात जो ध्यान देने वाली है वो ये कि प्रवीण सिर्फ बैठक पर बात की लेकिन अन्य किसी लिंक को नकार नहीं पाए। उन्होंने उस सवाल का जवाब भी नहीं दिया जो सैम पित्रौदा और राहुल गाँधी के अमेरिका डीप स्टेट को लेकर खड़े किए गए थे, न ही उन्होंने इस बात को नकारा की पित्रौदा की एनजीओ को यूएस स्टेट डिपार्टमेंट, यूएसएआईडी और रॉकफेलर फाउंडेशन से फंड मिलता है।
और बैठक पर भी उन्होंने जो बोला वो ये कहा कि कोई गुप्त बैठक नहीं हुई। क्या ये समझा जाए कि चूँकि उस ट्रिप पर वो राहुल गाँधी के साथ थे और मीडिया में उस पर रिपोर्ट हुई इसलिए वो बैठक सीक्रेट नहीं थी।
मालूम हो कि अब जब प्रवीण चक्रवर्ती ने इस मामले में सवाल उठाए हैं तो ये जानना और महत्वपूर्ण होता है कि किस तरह से वो प्रवीण चक्रवर्ती ही हैं जिन्होंने यूएस डीप स्टेट के साथ कॉन्ग्रेस की मिलीभगत पर सबूत दिए।
राहुल गाँधी की व्हाइट हाउस अधिकारियों के साथ सीक्रेट मीटिंग का स्त्रोत क्या?
साल 2023 में राहुल गाँधी की वॉशिंगटन ट्रिप के दौरान ईकोनॉमिक टाइम्स में रिपोर्ट छपी थी, जिसे सीमा सिरोही ने लिखा था। सीमा वैसे तो राहुल की प्रशंसक हैं और जमकर तारीफ भी करती हैं लेकिन उस रिपोर्ट में उन्होंने ये बता दिया कि व्हाइट हाउस में ऐसी बैठक हुई थी जिसे बाइडन प्रशासन और कॉन्ग्रेस ने गुप्त रखने का निर्णय लिया था।
उस समय वह खबर सोर्स पर आधारित थी, जिसे सिरोही ने नहीं बताया कि उन्हें जानकारी कैसे मिली। उन्होंने ये जानकारी शायद ये संदेश देने के लिए दी थी कि बाइडेन सरकार राहुल गाँधी सकारात्मक रूप से ले रहा है। लेकिन, यही खबर वो आधार बनी जिसने राहुल गाँधी के राजनीतिक विरोधियों और यहाँ तक भाजपा का ध्यान इस बैठक पर खींचा। सवाल उठे, मर कोई खंडन नहीं हुआ।
सिरोही ने बरखा दत्त के चैनल पर भी अपनी कहानी को बताया। हालाँकि बाद में चूँकि उनकी रिपोर्ट से कॉन्ग्रेस पर सवाल उठे तो पार्टी समर्थकों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। ट्रोलिंग और दुर्व्यवहार के बाद सिरोही ने अपने स्रोत का खुलासा करने का फैसला किया। सीमा ने ट्विटर पर पुष्टि की थी कि यह जानकारी प्रवीण चक्रवर्ती ने ही दी थी। ध्यान रहे कि ऑपइंडिया को धमकी देते हुए प्रवीण ने स्वीकार किया था कि वह पूरी यात्रा के दौरान राहुल गाँधी के साथ थे।
After a couple of days of abuse from Congress supporters, I thought I would reveal my "source." Here he is on the record to PTI. Data chief Praveen Chakrabarti told PTI… "we met some people in the White House…" Story published June 3,2023 https://t.co/TGNRu5lAS0https://t.co/ZbbXHikLpg
3 जून 2023 को प्रवीण चक्रवर्ती ने पीटीआई से बात की और पुष्टि की कि राहुल गाँधी ने वास्तव में व्हाइट हाउस और बाइडेन प्रशासन के अधिकारियों से मुलाकात की थी।
कॉन्ग्रेस पार्टी के डेटा एनालिटिक्स विभाग के अध्यक्ष प्रवीण चक्रवर्ती ने पीटीआई को बताया, “…प्रशासन के लोगों के साथ कुछ बैठकें हुईं। वे बहुत सौहार्दपूर्ण बैठकें थीं। इस बैठक का वास्तव में बड़ा उद्देश्य भारत-अमेरिका संबंधों के महत्व को उजागर करना, संबंधों को व्यापक आधार देने की आवश्यकता था। इसमें यूक्रेन की स्थिति पर भारत के रुख के बारे में सवाल उठे हैं, और राहुल गाँधी ने निजी और सार्वजनिक रूप से दोनों ही तरह से यह स्पष्ट कर दिया है कि वह यूक्रेन की युद्ध स्थिति पर भारत सरकार के रुख का पूरी तरह से समर्थन करते हैं।”
इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि चक्रवर्ती जो अमेरिकी यात्रा के दौरान राहुल गाँधी के साथ, उन्होंने राहुल गाँधी की बैठकों के बारे में कोई ब्यौरा नहीं दिया। उन्होंने बैठक के बारे में विस्तार से बताए बिना कहा, “हमने विश्वविद्यालयों के छात्रों से मुलाकात की, हमने इन विश्वविद्यालयों के शिक्षकों से मुलाकात की। हमने सिलिकॉन वैली में प्रौद्योगिकी अधिकारियों से मुलाकात की। हमने अमेरिका के मीडिया नेतृत्व से मुलाकात की। हमने थिंक टैंक, शिक्षाविदों और विद्वानों से मुलाकात की। हमने व्हाइट हाउस के कुछ लोगों से मुलाकात की। हमने (बाइडेन) प्रशासन के कुछ लोगों से मुलाकात की।”
वहीं उन्होंने पीटीआई के साथ बातचीत में यह भी संकेत दिया कि उनकी अमेरिकी यात्रा के दौरान भारतीय लोकतंत्र काफी चर्चा का विषय था। इसपर भी उन्होंने मीडिया को बताया था। अब प्रवीण चक्रवर्ती शायद इसका बचाव करने के लिए झूठ बोल सकते हैं और दावा कर सकते हैं कि उन्होंने भारतीय लोकतंत्र पर बात सिर्फ उन लोगों से की जिनकी उनसे मुलाकात हुई थी न की बाइडेन प्रशासन ने। हालाँकि उनका ये कहना भी विश्वास लायक नहीं होगा क्योंकि राहुल गाँधी ने हर बार अमेरिकी हस्तक्षेप की माँग की है।
Chakrabarty changed his mind a couple of days later and told The News Minute editor, oh no, there was no White House meeting. Listen from 14 minutes on where he forgets what he told PTI earlier. So what is the truth? Will the party data chief explain. https://t.co/Az6tkcV3fQ
2021 में, राहुल गाँधी ने हार्वर्ड केनेडी स्कूल के राजदूत निकोलस बर्न्स के साथ एक ऑनलाइन बातचीत के दौरान अमेरिकी हस्तक्षेप की माँग की थी…। उन्हें उस समय हार्वर्ड केनेडी स्कूल के इंस्टिट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स से बुलाया गया था। व
यह सब सिर्फ अटकलें नहीं हैं कि बाइडेन के अधिकारियों के साथ राहुल गाँधी की बातें क्या रही होंगी। वो भी तब जब प्रवीण चक्रवर्ती कहते हैं कि राहुल गाँधी ने तो बस भारतीय लोकतंत्र को सशक्त और मजबूत करने के बारे में बात की थी और ये कैसे बड़े पैमाने पर दुनिया की मदद की थी इस पर चर्चा की थी।
अगर वाकई राहुल गाँधी ने राहुल गाँधी ने वास्तव में व्हाइट हाउस के अधिकारियों से मुलाकात के दौरान भारत में विदेशी हस्तक्षेप के लिए नहीं कहा था, तो यह कॉन्ग्रेस और प्रवीण चक्रवर्ती की जिम्मेदारी है कि वे बताएँ कि राहुल गाँधी और बिडेन प्रशासन के अधिकारियों के बीच क्या बातचीत हुई थी।
हकीकत तो ये है कि अमेरिकी यात्रा के बाद प्रवीण चक्रवर्ती ने खुद इस बात की बात पुष्टि की थी राहुल ने भारतीय लोकतंत्र पर चर्चा की थी जबकि यात्रा से पहले वो कह रहे थे भारतीय लोकतंत्र राहुल गाँधी के एजेंडे में है ही नहीं।
प्रवीण चक्रवर्ती के बयान बदलने की बात सीमा सिरोही भी अपने ट्वीट में उजागर कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि पहले चक्रवर्ती ने कहा मीटिंग हुई है। अब अपना मन बदल लिया और कह रहे हैं कि व्हाइट हाउस में कोई मीटिंग ही नहीं हुई।
हालाँकि यदि प्रवीण के बयान देखें तो पता चलेगा कि भले ही वो इस बात को अस्वीकार कर रहे हैं कि राहुल गाँधी की बैठक नहीं हुई, लेकिन वो स्वीकार कर रहे हैं कि राहुल गाँधी ने अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान सीनेटरों और सरकारी अधिकारियों से मुलाकात की थी।
अब उनका रवैया देख प्रतीत होता है कि वो एक जानकारी पर बहस कर रहे हैं कि राहुल गाँधी व्हाइट हाउस गए, लेकिन इस पर कुछ नहीं बोल रहे कि वो सरकारी अधिकारियों से और बाइडेन के प्रशासन से मिले और भारतीय लोकतंत्र पर बात की… जिसका अर्थ हम जानते हैं क्योंकि राहुल गाँधी पहले भी कई बार ऐसे बयान दे चुके हैं।
अब ये तो साबित होता है कि कॉन्ग्रेस नेता प्रवीण चक्रवर्ती या तो बहुत बड़े झूठे हैं या फिर कॉन्ग्रेस के पास बहुत कुछ छिपाने को हैं जो प्रवीण चक्रवर्ती नहीं छिपा पाए और हकीकत खोल दी।
इन्हीं जानकारियों से बहुत प्रश्न खड़े होते हैं। सबसे पहले, प्रवीण चक्रवर्ती ने सीमा सिरोही को क्यों बताया कि राहुल गाँधी गुप्त बैठक के लिए व्हाइट हाउस गए थे और फिर इन बयानों के एक पूरे सप्ताह बाद पलट गए? दूसरे, जब पीटीआई से बातचीत में भी प्रवीण ने इन गुप्त बैठकों की पुष्टि की तो फिर इन बैठकों के विषय को बताने से भी इनकार क्यों कर दिया – प्रवीण या कॉन्ग्रेस पार्टी, बिडेन प्रशासन के साथ चर्चा के विषय को क्यों छिपाएगी? इसके अलावा, भले ही अब कोई पलटे लेकिन जब साल 2023 में प्रवीण ये लगातार पुष्टि कर रहे थे कि राहुल गाँधी ने “लोकतंत्र को संरक्षित करने” के बारे में बात की… तो क्या कॉन्ग्रेस को इस बारे में स्पष्ट नहीं करना चाहिए कि वास्तव में चर्चा क्या हुई थी?
कॉन्ग्रेस इन सवालों के जवाब नहीं देगी क्योंकि ऐसा करते हुए उन्हें ऐसे प्रश्नों से जूझना होगा जो उनको असहज महसूस करा सकते हैं और उनके यूएस डीप स्टेट के साथ मिलीभगत होने वाले लिंक को खोल सकते हैं।
नोट: इस लेख को मूल रूप से अंग्रेजी में ऑपइंडिया की चीफ एडिटर नुपूर जे शर्मा ने लिखा है। आप इसे अंग्रेजी में यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं।
लखनऊ में एक मुस्लिम युवक ने मंदिर की दीवाल पर पेशाब की। ऐसा करने से उसे जब एक शख्स ने रोका तो वह अपने घरवालों के साथ हमला करने आ गया। मुस्लिम युवक ने उसे रोकने वाले शख्स के घर में घुस कर रॉड से हमला किया और मरणासन्न कर दिया। मामले में FIR दर्ज कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्सके अनुसार, लखनऊ के राजाजीपुरम के एफ ब्लॉक में स्थित मंदिर की दीवार पर मंगलवार (30 जुलाई, 2024) को नदीम पेशाब कर रहा था। इसको लेकर यहीं के निवासी दिलीप सिंह उसे रोकने गए और मंदिर की दीवाल पर पेशाब करने से मना कर दिया।
दिलीप सिंह के रोकने पर नदीम भड़क गया और उन्हें गालियाँ देने लगा। दोनों के बीच विवाद पहले शांत हो गया नदीम अपने घर चला गया। कुछ ही देर बाद नदीम अपने साथ मोहम्मद सलीम, मोहम्मद नफीस और कलीम के साथ लाठी-डंडे और लोहे की रॉड से लैस होकर पहुँच गया।
इन सबने मिलकर दिलीप सिंह पर हमला बोल दिया और उनको लाठी डंडे से काफी मारापीटा। यह वारदात दिलीप सिंह के घर के भीतर हुई। दिलीप सिंह के सर पर भी लोहे की रॉड से वार किया गया। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद सभी हमलावर मौके से फरार हो गए।
दिलीप सिंह को इसके बाद उनके परिजन अस्पताल लेकर गए और इलाज करवाया। पीड़ित दिलीप सिंह ने इस संबंध में पुलिस के पास FIR दर्ज करवाई है। उनकी दी गई तहरीर के आधार पर पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कहा है कि मामले की जाँच करके आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि इससे पहले भी मंदिरों में मूर्तियों को खंडित करने और उनका अपमान करने के कई मामले सामने आते रहे हैं। इससे पहले हाल ही में बरेली में मूर्तियों के अपमान का मामला सामने आया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दलित और आदिवासियों को मिलने वाले आरक्षण के भीतर अधिक पिछड़े SC-ST जातियों के लिए कोटा लागू किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दलितों और आदिवासियों में पिछड़ी जातियों को राज्य आरक्षण के भीतर अधिक आरक्षण दे सकते हैं। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान बेंच ने किया है।
गुरुवार (1 अगस्त, 2024) को CJI डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली 7 सदस्यीय संविधान बेंच ने यह निर्णय दिया। इस निर्णय में 6 जज एकमत थे जबकि जस्टिस बेला त्रिवेदी ने इस पर अपनी असहमति जताई। कोर्ट ने कहा कि राज्य SC-ST को दिए जाने वाले आरक्षण के भीतर ऐसी जातियों को ज्यादा तरजीह दे सकते हैं, जो आर्थिक-सामाजिक रूप से अधिक पिछड़ गई हैं।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि SC-ST कोई एक एक सजातीय समूह नहीं है और इस बात के सबूत भी हैं। उन्होंने कहा कि आरक्षण के भीतर आरक्षण देने से संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं होता। उन्होंने कहा कि इस मामले में 6 निर्णय पहले भी आ चुके हैं और सभी में इस बात को माना गया है कि आरक्षण के भीतर आरक्षण देना सही है।
कोर्ट ने यह निर्णय सुनाने के साथ ही साफ़ कर दिया कि किसी एक जाति को 100% आरक्षण ना दिया जाए। साथ ही कोर्ट ने यह साफ किया आरक्षण के भीतर आरक्षण देने के दौरान जातियों को सूची से अंदर-बाहर करने का निर्णय तुष्टिकरण के लिए ना लिया जाए। कोर्ट ने कहा कि किसी भी जाति को तरजीह देने से पहले आँकड़े और ऐतिहासिक तथ्य जुटाए जाएँ।
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस BR गवई ने कहा कि यह राज्य सरकार का कर्तव्य है कि वह अधिक पिछड़ी जातियों को तरजीह दे। उन्होंने कहा कि SC-ST समुदाय में भी केवल कुछ ही लोग आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि SC-ST आरक्षण में भी क्रीमी लेयर पहचानी जाए और जिन जातियों को लाभ मिल चुका है, उन्हें इससे बाहर कर दिया जाए।
कोर्ट का यह निर्णय पंजाब राज्य के बनाए गए एक कानून के मामले में आया है। पंजाब ने 2006 में यह कानून बनाया था कि वह राज्य में SC-ST को दिए जाने वाले आरक्षण में भी वर्गीकरण करेगा। इस कानून को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था। इसके बाद पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट के पास पहुँची थी।
पंजाब सरकार के कानून को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के एक निर्णय के आधार पर चुनौती दी गई थी। इस निर्णय में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा था कि सारे SC-ST एक सजातीय समूह हैं और उनके आरक्षण का वर्गीकरण नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हुई सुनवाई में इस निर्णय को सही नहीं माना।
यह मामला 2020 में संविधान बेंच के पास पहुँचा था। इस मामले में केंद्र सरकार भी पंजाब के पक्ष में थी। इस निर्णय से पंजाब और तमिलनाडु जैसे राज्यों को फायदा होगा। इन राज्यों में आरक्षण के भीतर कोटा दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
गौरतलब है कि यह माँग लम्बे समय उठ रही है कि अब उन जातियों को आरक्षण में अधिक तरजीह दी जाए जो पिछड़ी हुई हैं। वहीं उन जातियों को अब आरक्षण में कम हिस्सा दिया जाए जो इस सुविधा का लाभ उठा चुके हैं। ऐसे में कोर्ट का यह निर्णय इसका रास्ता प्रशस्त करेगा।
बारिश और भूस्खलन के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में भारी नुकसान हुआ है। केरल के वायनाड में मंगलवार (30 जुलाई, 2024) को हुए भूस्खलन में मौतों का आँकड़ा 250 के पार पहुँच गया है। वहीं बुधवार को भी दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में बारिश से कई लोगों की मौत हुई है। देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर पानी में डूब गई है। वहीं हिमाचल प्रदेश में भी बादल फटने के कारण नुकसान की सूचना है।
वायनाड में 250 पार मौतें, 1000 बचाए
केरल के वायनाड में भूस्खलन के कारण हुई मौतों का आँकड़ा 250 पार कर गया जबकि लगभग 240 लोग अब भी लापता हैं। सेना, वायुसेना और NDRF समेत बाकी राहत बचाव दल 1000 से अधिक लोगों को इस भूस्खलन से निकाल लाए हैं। राहत बचाव का काम लगातार चल रहा है। 200 लोग घायल हैं जिन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। 8000 से अधिक लोगों को सुरक्षित इलाके में ले जाया गया है और वह राहत शिविरों में रह रहे हैं।
वायनाड हादसे में सबसे अधिक नुकसान चूरलमला और मुनदाक्कई गाँवों को हुआ है। यहाँ बनी सारी इमारतें ध्वस्त हो गई हैं। इन्हीं गाँवों से सबसे अधिक मौते भी दर्ज हुई हैं। केरल सरकार ने वायनाड में आपातकालीन यात्रा के अलावा बाहर निकलने पर रोक लगा दी है। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन भी गुरुवार (1 अगस्त, 2024) को वायनाड के दौरे पर जा रहे हैं। इस बीच गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा में बताया कि वायनाड के लिए पहले ही चेतावनी भेजी गई थी लेकिन उसे नजरअंदाज किया गया।
हिमाचल में भी बारिश का प्रलय
तेज बारिश और बादल फटने के कारण हिमाचल प्रदेश में भी भारी नुकसान हुआ है। बुधवार को हिमाचल प्रदेश के कुल्लू और मंडी जिलों में बादल फट गए। इस कारण कई इमारतें जमींदोज हो गई जबकि कई जगह सड़क भी टूट गई। 19 लोगों के लापता होने की भी सूचना है। यह सभी कुल्लू में एक बिजली संयंत्र के लिए काम कर रहे थे। कुल्लू में लगभग 20 मकानों के जमींदोज होने की खबर है। कई जगहों पर नदियों में अत्यधिक पानी आ गया है।
वहीं हिमाचल के ही मंडी जिले में भी बादल फटने से नुकसान हुआ है। यहाँ भी 2 लोगों की मौत की सूचना है। मंडी में बादल फटने के कारण 1 मौत भी हुई है। यहाँ पर बादल फटने से तीन घर भी बह गए हैं। कई जगहों पर राहत बचाव के लिए पहुँचने वाले रास्ते भी कट गए हैं। अब राहत बचाव के लिए वायु सेना से भी सम्पर्क किया जा रहा है।
दिल्ली में फिर बुरा हाल
बुधवार को हुई बारिश ने एक बार फिर दिल्ली लचर पानी निकासी व्यवस्था को उजागर कर दिया। दिल्ली के करोल बाग़, राजेन्द्र नगर और गाजीपुर समेत कई इलाकों में काफी पानी भर गया। इस कारण यातायात ठप हो गया। दिल्ली में तीन मकानों के गिरने की भी सूचना है। इसके अलावा गाजीपुर इलाके में एक माँ और बेटा एक नाले में गिर गए, इस कारण उनकी मौत हो गई। दिल्ली लक्ष्मी नगर, गणेश नगर और अन्य कई इलाकों में गलियों में भी पानी भरने की सूचना है।
24 जुलाई, 2024 को दिल्ली की एक कोचिंग में पानी भरने के कारण 3 छात्रों की मौत हुई थी। इसके बाद भी उस इलाके का हाल नहीं बदला। AAP सरकार के दिल्ली की जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने के सभी दावे फेल हो गए। भारी बारिश के कारण गुरुवार को दिल्ली के सभी स्कूलों को बंद कर दिया गया है।
उत्तर प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र में इस बार काँवड़ यात्रा के मार्ग में प्रशासन ने दुकानदारों को उनके असली नाम और पहचान के साथ दुकानदारी करने के निर्देश दिए थे। इस फैसले पर काफी हो हल्ला मचा और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया। सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन के फैसले पर अंतरिम रोक लगाते हुए शासन से अपना पक्ष रखने को कहा है। ऑपइंडिया ने इस मामले की जमीनी पड़ताल की तो सारांश में सामने आया कि पश्चिम उत्तर प्रदेश के सिर्फ अधिकतर मुस्लिम दुकानदारों को ही प्रशासन के इस फैसले से आपत्ति थी। ज्यादातर हिन्दू दुकानदार इस फैसले से खुश हैं और इसे परमानेंट लागू करने की चाहत रखते हैं।
फेब्रिकेशन के काम में भी नकली नाम
काँवड़ यात्रा में खींचे जाने वाले रथों को तैयार करने वाले दिनेश कुमार ने ऑपइंडिया से बात की। दिनेश कुमार द्वारा तैयार किए गए रथ मुज़फ्फरनगर, मेरठ और हरिद्वार में दर्जनों की संख्या में देखे जा सकते हैं। उनकी दुकान का नाम माँ हरसिद्धि देवी फेब्रिकेशन है। यह दुकान गाजियाबाद में मौजूद है। दिनेश कुमार ने बताया कि उनके काम में लोहे की कटाई और वेल्डिंग आदि प्रमुख है। उनका दावा है कि अब उनके व्यापर में भी मुस्लिम पक्ष के लोग नाम बदल कर बड़ी तादाद में शामिल हो चुके हैं।
मुस्लिमों के घरों में आबादी ज्यादा इसलिए कारोबार पर उनकी पकड़ मजबूत
दिनेश कुमार ने हमें बताया कि फेब्रिकेशन के काम में उनको लगातार घाटा हो रहा था क्योंकि मुस्लिम दुकानदार अपनी दुकानों का नाम हिन्दू देवी-देवताओं पर रख कर कारोबार कर रहे हैं। इस वजह से भी दिनेश के ग्राहक टूट कर उनके पास जा रहे हैं। वहीं दिनेश कुमार का यह भी कहना है कि उनके घर में मात्र 2 भाई है जिस वजह से लेबर आदि बाहर से मैनेज करना पड़ता है। वहीं बकौल दिनेश मुस्लिम कारोबारियों के घरों में दर्जनों लोग होते हैं और उन्हें मजदूर घर में ही मिल जाते हैं।
पूरे प्रदेश में हमेशा के लिए लागू हो ये नियम
प्रशासन द्वारा लागू किए गए फैसले से खुश हो कर दिनेश कुमार ने दावा किया कि इस निर्णय से उनका कारोबार वापस लौट रहा है। उनका दावा है कि जब से प्रशासन ने सख्ती दिखाई है तब से जनता भी जागरूक हुई है और अब कारीगरों के आधार कार्ड चेक किए जा रहे हैं। दिनेश कुमार ने यह भी उम्मीद जताई है कि जल्द ही पूरे प्रदेश में और हमेशा के लिए यह नियम लागू हो जाएगा कि सभी लोग अपने असल नामों से अपना कारोबार करें। नकली नाम से हो रहे धंधे की वजह से दिनेश कुमार ने अपने साथ कई अन्य हिन्दू दुकानदारों को पीड़ित और प्रताड़ित बताया।
जो हम हैं उसको बताने में क्या दिक्कत ?
गाजियाबाद-मेरठ रोड पर पहलवान ढाबा चला रहे अश्वनी सैनी ने ऑपइंडिया से बात की। अश्वनी सैनी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अपनी दुकान के आगे अपना नाम और रेटलिस्ट लगा रखी है। वो अपने ढाबे के शुद्ध शाकाहारी होने का दावा करते हैं। अश्वनी ने हमें बताया कि एक दुकान मालिक होने के तौर पर उनको नाम लिखने के मुद्दे पर उठाए जा रहे विवाद की वजह नहीं समझ में आ रही है। अश्वनी का कहना है कि जो ढाबा मालिक असल में है उसको लिखने में दिक्क्त क्या है।
पैसा ही नहीं बल्कि पुण्य भी कमाते हैं हम काँवड़ यात्रा में
मेरठ रोड पर देशी ठाठ शुद्ध वैष्णो भोजनालय चलाने वाले रामकुमार चौहान ने ऑपइंडिया से बात की। रामकुमार चौहान ने हमें बताया कि काँवड़ यात्रा में कारोबार के दौरान वो और अधिक जिम्मेदारी का एहसास करते हैं। उन्होंने कहा कि एक हिन्दू होने के नाते काँवड़ यात्रा उनके लिए महज पैसे कमाने का समय नहीं है बल्कि वो इस त्यौहार में पुण्य भी कमाते हैं। अपना ढाबा दिखाते हुए रामकुमार ने हमें बताया कि काँवड़ के दौरान वो न सिर्फ काँवडियों के नहाने-धोने की फ्री में व्यवस्था करते हैं बल्कि इसी दौरान उनके निशुल्क इलाज आदि का भी ख्याल रखते हैं।
प्रशासन द्वारा नाम लिखने के मुद्दे पर खड़ा किए गए विवाद को गैरजरूरी बताते हुए रामकुमार ने कहा कि वो प्रशासनिक फैसले का पूरी तरफ से स्वागत करते हैं। हमें यह भी बताया गया कि काँवड़ यात्रा के दौरान तमाम कारीगरों को भी सभ्यता और सलीके से खाना बनाने के लिए व्यवहार में भी और अधिक मृदुता लगाने के लिए समझाया जाता है। रामकुमार ने माना कि दिल्ली से हरिद्वार की तरफ जाने वाला हाइवे नाम बदल कर चलाए जा रहे ढाबों से बुरी तरफ से प्रभावित हैं। उन्होंने इस पर लगाम लगाने की माँग भी उठाई।
बंद हो चुका मुज़फ्फरनगर का सावरकर ढाबा
ऑपइंडिया ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में मुज़फ्फरनगर जिले में सावरकर ढाबा का बोर्ड देखा। यह बोर्ड मुज़फ्फरनगर-मेरठ हाइवे पर चीनी मिल के पास है। ढाबा बंद हो चुका है और बोर्ड पर धूल की परत चढ़ी हुई थी। इसके मालिक सत्य प्रकाश को हमने जैसे-तैसे खोजा और बात की। सत्य प्रकाश ने बताया कि वीर सावरकर के नाम से ढाबा खोलने के पीछे उनका मकसद न सिर्फ ग्राहकों को बेहतर खाना-पीना उपलब्ध करवाना था बल्कि उन्हें देश के एक महान क्रांतिकारी के नाम से परिचित भी करवाना था।
हालाँकि सत्य प्रकाश अब अपना ढाबा बंद होने से काफी निराश हैं। नाम न ले कर परोक्ष इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ खास सोच रखने वालों को उनके ढाबे का नाम पसंद नहीं आया। ढाबे पर न सिर्फ ग्राहक आने बंद हो गए थे बल्कि चोरी जैसी वारदातें भी हुईं। बंद हो चुके सावरकर ढाबे के मालिक ने यह भी माना कि मुज़फ्फरनगर और आसपास के इलाकों में फर्जी नाम और पहचान से कई ढाबे चल रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन इस दिशा में कड़े कदम उठाएगा।
गाजियाबाद में मोहम्मद आलम ने कुछ दिन पहले अपनी लिव-इन पार्टनर पूजा का गला घोंटकर उसे मौत के उतार दिया था। अब इसी मामले में आगे पता चला है कि पूजा, भीम आर्मी के सदस्य सुमित कुमार की साली थी। सुमित ने दावा किया है कि वो दलित संगठन भीम आर्मी के वरिष्ठ सदस्य थे। उनकी साली के साथ जब इतनी बड़ी घटना घटी तो वो संगठन के पास मदद के लिए गए लेकिन वहाँ उन्हें जीरो समर्थन मिला।
ये जानकारी स्वराज्य की वरिष्ठ पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा के ट्वीट से सामने आई है। अपने ट्वीट में स्वाति ने इस केस के संबंध में बताया, “8 साल से सुमित कुमार भीम आर्मी के वरिष्ठ सदस्य रहे। एक दलित संगठन जिसके मुखिया सांसद चंद्र शेखर रावण है और इसका नाम भीम राव अंबेडकर के नाम पर रखा गया है। पिछले हफ्ते जब पूजा की हत्या आलम ने की तब सुमित संगठन के पास मदद के लिए गए, लेकिन वहाँ उन्हें जीरो सपोर्ट मिला।”
वह बताते हैं कि घटना के बाद वह आजाद समाज पार्टी के कार्यालय गए, वहाँ उन्होंने अलग-अलग लोगों से बात की लेकिन किसी ने उनकी कोई मदद नहीं की। वो कहते हैं कि उन्हें लगता है कि उनकी मदद इसलिए नहीं की गई क्योंकि चुनाव आ रहे हैं और हो सकता है इलेक्शन की वजह से किसी ने उनका साथ नहीं दिया क्योंकि कोई मुस्लिम वोट नहीं हारना चाहता।
For 8 years, Sumit Kumar has been a senior member of Bhim Army – a ‘Dalit organisation’ headed by Chandrashekhar Ravan and named after Bhimrao Ambedkar
But last week when his sister-in-law Pooja was murdered by her partner Mohammed Alam, six months after her conversion-nikah,… pic.twitter.com/y9ZtfzvMjI
स्वाति गोयल शर्मा ने आगे लिखा- “मैं पूजा के परिजनों से मिली। वो अपने पीछे अपने पहले पति से तीन बच्चे छोड़ गई है। परिवार को उनकी परवरिश के लिए वित्तीय सहायता की जरूरत है।”
बता दें कि गाजियाबाद में पिछले हफ्ते पूजा की हत्या का मामला सामने आया था। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया था कि लंबे समय से पूजा और मोहम्मद आलम साथ थे लेकिन कुछ समय से पूजा अपने पति के साथ रहने की बात कहने लगी थी इसलिए आलम ने उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी।
थाना विजयनगर पुलिस टीम द्वारा महिला की गुमशुदगी/अपहरण की घटना का अनावरण, एक अभियुक्त गिरफ्तार व घटना में प्रयुक्त कार बरामद।@Uppolicepic.twitter.com/Tm9d3ErM25
— POLICE COMMISSIONERATE GHAZIABAD (@ghaziabadpolice) July 24, 2024
हालाँकि पुलिस ने जब आरोपित को पकड़कर पूछताछ की तो उसने बताया कि पूजा और उसका निकाह 6 माह पहले हो चुका था ऐसे में वो आलम पर दबाव बनाती थी कि वो उसी के साथ रहे। एक दिन आलम का बेटा अस्पताल में भर्ती हुआ तो पूजा कहने लगी कि आलम ने उसका हाल नहीं पूछा लेकिन बेटे के पास चला गया। इसी के बाद उनका विवाद हुआ और आलम ने पूजा को बुलाकर सैंट्रो कार में बिठाया, फिर उसा गला चुन्नी से घोंट दिया। बाद में शव नहर में डालकर भाग आया और डरकर थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने जाँच की तो पूरा मामला सामने आया, फिर मोहम्मद आलम को गिरफ्तार किया गया।