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7 दिन पहले से चेता रही थी मोदी सरकार, फिर भी तबाही मचने की प्रतीक्षा करती रही केरल की वामपंथी सरकार: वायनाड की लाशों का दोषी कौन? दावा- मजहबी संगठनों के दबाव में नहीं हटाए कब्जे

केरल के वायनाड जिले में हुए भूस्खलन के कारण मौतों का आँकड़ा 275 पार कर चुका है। सैकड़ों की संख्या में लोग अब भी गायब हैं। 1000 से ज्यादा लोगों को सेना-वायुसेना और NDRF ने बचाया है। केरल में इस घटना पर दो दिन का राजकीय शोक भी घोषित किया गया है। घटना के बाद अब केरल कीई पिनराई विजयन सरकार पर लापरवाही के आरोप लगाने चालू हो गए हैं।

एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वायनाड जिला प्रशासन को दो दिन पहले ही पता चल गया था कि इस इलाके में भारी बारिश और भूस्खलन की संभावना है। गृह मंत्री अमित शाह ने केरल को चेतावनी दिए जाने की ही राज्यसभा में बुधवार (31 जुलाई, 2024) को कही थी। वहीं दूसरी तरफ भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा है कि वायनाड के इस इलाके से लोगों को इसलिए नहीं पूर्व निकाला गया था क्योंकि वामपंथी सरकार पर मजहबी संगठनों का दबाव था।

केरल को लगातार मिली थी चेतावनी

ऑनमनोरमा में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, वायनाड जिले में घटना से एक दिन पहले सोमवार को जब वर्षा का स्तर 200 मिलीमीटर पार हो गया था तो जिला प्रशासन को चेतावनी भेज दी गई थी। इस चेतावनी में भूस्खलन का जिक्र था। रिपोर्ट के अनुसार, जिला प्रशासन ने इसे काफी हल्के में लिया और और केवल एक अलर्ट जारी किया। इस चेतावनी में भी लोगों को खतरे वाले इलाके से निकल जाने को लकर कोई सलाह नहीं दी गई। इसके कुछ ही घटों के बाद यह दर्दनाक हादसा हुआ।

वायनाड में 200 से अधिक मौसम निगरानी यूनिट चलाने वाले ह्यूम सेंटर फॉर इकोलॉजी एंड वाइल्डलाइफ बायोलॉजी ने भूस्खलन से दो दिन पहले ही चेतावनी दी थी। इसने उन इलाकों में विशेष रूप से खतरा बताया था जहाँ बाद में यह आपदा आई। इस सेंटर के मुखिया CK विष्णुदास ने बताया है कि जिला प्रशासन को सोमवार को ही भूस्खलन की चेतावनी दे दी गई थी। उन्होंने यह भी बताया है कि इन गाँवों से लोगों को निकालने की सलाह भी दी गई थी। हालाँकि, इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया आपदा आ गई।

गृह मंत्री अमित शाह ने बताया- 7 दिन पहले चेताया

गृह मंत्री अमित शाह ने अमित शाह ने बुधवार (30 जुलाई, 2024) को सदन में देश को बताया ,”वायनाड के हालातों पर कहा जा रहा है कि पहले चेतावनी दी जानी चाहिए थी, लेकिन हकीकत तो ये है कि केंद्र ने 23 जुलाई को ही केरल सरकार को चेतावनी जारी कर दी थी यानी 7 दिन पहले। इसके बाद 24 और 25 जुलाई को भी चेतावनी भेजी गई थी। हर बार बताया गया था कि राज्य में भारी वर्षा और भूस्खलन के अनुमान हैं जिसमें लोगों की जान जा सकती है।”

तेजस्वी सूर्या का दावा- मजहबी संगठन के दबाव में नहीं हटाए गए लोग

बेंगलुरु दक्षिण से भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी इस मुद्दे पर राहुल गाँधी और केरल सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, “2020 में केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने वायनाड में भूस्खलन के खतरे वाले इलाकों से 4,000 परिवारों को हटा कर दूसरी जगह बसाने की सलाह दी थी। आज तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई और वायनाड के सांसद राहुल गाँधी ने आज तक इस मुद्दे को उठाया भी नहीं। विधानसभा में केरल के वन मंत्री ने स्वीकार किया कि वे अवैध अतिक्रमण नहीं हटा पा रहे हैं क्योंकि उन पर विभिन्न मजहबी संगठनों का दबाव था।”

सांसद तेजस्वी सूर्या ने इसके बाद वायनाड आपदा को मानवनिर्मित आपदा बताया। उन्होंने कहा, “वायनाड में जो हुआ है, वह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं है। यह मानव निर्मित आपदा है। यह मैं नहीं कह रहा, यह केरल के विशेषज्ञ कह रहे हैं। पिछले 5-6 सालों में देश में जितनी भी भूस्खलन की घटनाएँ हुई हैं, उनमें से 60% केरल में हुई हैं।”

इस घटना के बाद गुरुवार (1 अगस्त, 2024) को लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वायनाड पहुँचे हैं। उन्होंने हादसे में प्रभावित इलाके का दौरा किया है। दोनों पहले ही यहाँ जाने वाले थे लेकिन उनका हवाई जहाज वहाँ नहीं पहुँच पाया था इसलिए उन्होंने जाने से मना कर दिया था।

58 साल में 1 किलोमीटर भी नहीं लगाई ATP, अब रोजाना यात्रा करने वाले 2 करोड़ रेलयात्रियों को डरा रहे: अश्विनी वैष्णव ने संसद में विपक्ष को लताड़ा

संसद में मानसून सत्र के नौवें दिन गुरुवार (1 अगस्त 2024) को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कॉन्ग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित विपक्षी दलों को जमकर लताड़ लगाई। हाल की रेल दुर्घटनाओं को लेकर विपक्ष ने रेल सेफ्टी को लेकर सदन में उनसे सवाल पूछा और जमकर हंगामा किया। इस दौरान अश्विनी वैष्णव ने अपनी बात रखी और दुर्घटनाओं में कमी के आँकड़े पेश किए।

रेल मंत्री वैष्णव के जवाब के दौरान कॉन्ग्रेस और सपा सहित विपक्षी दलों ने हंगामा किया। इस दौरान वैष्णव ने कहा, “अध्यक्ष जी जो इस तरह से बोल रहे हैं उनसे पूछिये कि अपने 58 साल के राज में वे 1 किलोमीटर भी ATP (स्वचालित ट्रेन सुरक्षा) क्यों नहीं लगा पाए। आज ये मुझसे पूछने की हिम्मत करते हैं, अपने कार्यकाल को देखें… अपने गिरेबाँ में झाँकें।”

जबाब देते हुए वैष्णव ने बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस दौर का हवाला दिया, जब वो रेल मंत्री हुआ करती थी। उन्होंने कहा, “जब ममता बनर्जी रेल मंत्री थीं, तब वे रेल दुर्घटनाओं की संख्या बताती थीं। 0.24 से 0.19 तक कमी आने पर ये लोग सदन में तालियाँ बजाते थे और आज जब रेल दुर्घटना की दर 0.19 से 0.03 होने पर वे इस तरह का आरोप लगाते हैं। क्या यह देश ऐसे चलेगा?”

रेलवे में सुधार और उसे आगे बढ़ाने की बात करते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा, “रेलवे को सुधारने के लिए सबको सहयोग करना पड़ेगा। ये ऐसे नहीं चल सकता। विपक्ष के कॉन्ग्रेस ने एक सोची-समझी एवं रणनीतिक तरीके से छोटे-से-छोटे विषय को अपने सोशल मीडिया की ट्रोल आर्मी के जरिए इस तरह झूठे तरीके से उठाना शुरू किया।”

कॉन्ग्रेस और समाजवादी पार्टी की ट्रोल आर्मी पर निशाना साधते हुए रेल मंत्री ने कहा, “एक पुराने के स्टेशन की एक पुरानी दिवार थी, वो थोड़ी सी डैमेज हुआ तो समाजवादी पार्टी और कॉन्ग्रेस के हैंडसल्स ने उसको तुरंत उठाना चालू किया। इस तरह के झूठ से कैसे देश चलेगा? दो करोड़ पैसेंजर रोज यात्रा करते हैं। क्या ये (विपक्षी दल) उनके मन में भय पैदा करना चाह रहे हैं?”

दरअसल, अपने संबोधन के शुरुआत में अश्विनी वैष्णव ने कह, “यूपीए के कार्यकाल में सालाना औसत 171 एक्सीडेंट होते थे। हमारी सरकार में एक्सीडेंट की संख्या में 68% की कमी आई है।” इसके बाद विपक्ष हंगामा करने लगा। तब रेल मंत्री ने कहा, “विपक्ष अपने गिरेबान में झांकिए। आपने 58 सालों में ATP तक नहीं लगाया।”

रेलवे सेफ्टी की बात करते हुए उन्होंने कहा, “ATP से ड्राइवर को हाईस्पीड ट्रेन में सिग्नल देखने में आसानी होती है। ये टेक्नोलॉजी दुनिया में 80 के दशक में आ गई थी और दुनिया के हर बड़े नेटवर्क में ATP लागू है। भारत में साल 2014 तक यह तकनीक नहीं थी। 2006 में एंटी कोलीजन डिवाइस लाई गई, वो 2012 में फेल हो गई। पीएम मोदी ने 2014 में जिम्मेदारी ली। 2016 में कवच लाए। 2019 में इसको सेफ्टी सर्टिफिकेट मिला। साल 2024 में कवच का वर्जन 4.0 अप्रूव हो गया।”

रेल मंत्री ने कहा कि UPA के कार्यकाल में 2004 से 2014 तक रेलवे में सिर्फ 4.11 लाख कर्मचारियों की भर्ती हुई थी, जबकि 2014 से 2024 तक यानी NDA के 10 सालों में ये संख्या 5.02 लाख है। उन्होंने कहा कि वर्षों से माँग की जाने वाली रेलवे भर्ती के लिए एनडीए सरकार ने जनवरी 2024 में वार्षिक कैलेंडर घोषित किया।

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि जो युवा रेलवे में जाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, उनके लिए अब साल में 4 बार वैकेंसी निकलती हैं। ये वैकेंसी हर साल जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर में आती है। उन्होंने कहा कि अभी भी 40,565 वैकेंसी निकाली गई हैं, जिन्हें अभी भरा जाना है।

अली राजा ने 19 साल की बीवी को तड़पाकर जिंदा जलाया, किसी और से बात करने का था शक: 8 महीने पहले ही किया था निकाह, पाकिस्तान की घटना

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक युवक ने अपनी 19 साल की बीवी को सिर्फ इस शक में जला डाला क्योंकि उसे लगता था कि उसकी बीवी का किसी और के साथ संबंध है। आरोपित शौहर की पहचान अली रजा के तौर पर हुई है। वहीं उसकी बीवी का नाम सना इकबाल था।

पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, सबा और रजा का निकाह 8 माह पहले हुआ था लेकिन निकाह के बाद रजा को लगने लगा कि सबा किसी और के साथ रिश्ते में हैं। 28 जुलाई को रजा ने सबा के अब्बा को बताया कि वो लड़ाई के बाद घर से चली गई है और उसके बाद से मिल नहीं रही है।

रजा के अब्बा के अनुसार, वो इस खबर को सुनने के बाद फौरन दौड़े। उन्हें लगा कहीं उनकी बेटी के साथ कुछ गलत न हुआ। सबने मिलकर बहुत खोजा लेकिन उसके बारे में कुछ पता नहीं चला सका। बाद में सना का जला हुआ शव खेत में मिला।

पुलिस ने घटना के बाद फौरन रजा को गिरफ्तार किया और उससे जुर्म कबूल करवाया। पुलिस ने हताया कि रजा ने ही सबा को शक होने पर बुरी तरह प्रताड़ित किया था और फिर उसे जिंदा जलाकर खेत में फेंक दिया था।

जुर्म कबूलते हुए रजा ने कहा कि उसे कहीं से पता चला था कि उसकी बीवी सना का किसी और के साथ चक्कर चल रहा है। इसीलिए उसने उसकी हत्या की। इस मामले में पुलिस ने रजा के साथ 2 अज्ञातों के खिलाफ भी मुकदमा दायर किया है। वहीं मानवाधिकार कार्यकर्ता लगातार ऐसे कृत्यों को मुल्क में विरोध कर रहे हैं। उनका अनुमान है कि करीबन 1000 महिलाएँ पाकिस्तान में ऑनर किलिंग का शिकार होती हैं।

वहीं जिदा जलाने की घटनाएँ भी पाकिस्तान से बहुत आती हैं। इसी साल जून में एक पर्यटक की हत्या को अंजाम दिया गया था। पाकिस्तान के खैब पख्तूनख्वा में कुरान का अपमान करने का आरोप लगाकर भीड़ ने पर्यटक को जिंदा जला दिया गया था।

मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि केस: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज की मुस्लिम पक्ष की आपत्तियाँ, हिंदू पक्ष की याचिकाओं पर होगी सुनवाई

मथुरा के विवादित शाही ईदगाह-कृष्ण जन्मभूमि मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट से मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की हिन्दू पक्ष के मुकदमों को दी गई चुनौती को ख़ारिज कर दिया है। कोर्ट ने माना है कि हिन्दू पक्ष की तरफ से दायर सभी मुकदमे सुने जा सकते हैं।

गुरुवार (1 अगस्त, 2024) को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह निर्णय सुनाया है। हाई कोर्ट के जस्टिस मयंक कुमार जैन की बेंच ने कहा है कि हिन्दू पक्ष की तरफ से दाखिल 18 मुकदमों को उनकी मेरिट के आधार पर सुना जाएगा और यह सभी कोर्ट में सुने जाने योग्य है।

हाई कोर्ट ने शाही ईदगाह कमिटी की इस चुनौती को खारिज किया कि यह मुकदमे इसलिए नहीं सुने जा सकते क्योंकि यह पूजा स्थल अधिनियम के विरुद्ध हैं। कोर्ट ने कहा कि इन पर यह कानून लागू नहीं होता। कोर्ट ने यह निर्णय 6 जून, 2024 को सुरक्षित रख लिया था। इस फैसले से हिन्दू पक्ष को बल मिला है।

मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में यह भी दावा किया था कि जो भी याचिकाएं कृष्णजन्मभूमि के लिए डाली गई हैं, वो मामले से सीधे तौर पर ना जुड़े हुए लोगों ने डाली है। मुस्लिम पक्ष ने इसी के साथ दावा किया था कि उसका और हिन्दू पक्ष का 1968 में समझौता हो चुका है, ऐसे में अब इन याचिकाओं का कोई महत्व नहीं है।

कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की यह दलील भी नहीं मानी। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि यह मस्जिद वक्फ की सम्पत्ति है। इस पर हिन्दू पक्ष ने इस बात के सबूत दिखाने को कहा है कि इसे वक्फ को किसने दान किया था। हिन्दू पक्ष ने यह भी कहा कि वक्फ की यह आदत रही है कि वह जमीनों पर कब्जा करके उनके उपयोग में बदलाव करती है।

हिन्दू पक्ष की जिन याचिकाओं को कोर्ट ने आज सुनने लायक माना है उनमें कई तर्क दिए गए हैं। हिन्दू पक्ष का कहना है कि जिस 2.5 एकड़ के इलाके पर यह शाही ईदगाह बना हुआ है, वह श्रीकृष्ण जन्मभूमि का हिस्सा है। इसी के साथ हिन्दू पक्ष ने यह भी दावा किया है कि मुस्लिमों के पास इसका कोई भी रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।

हिन्दू पक्ष ने कहा है कि इस जमीन का स्वामित्व कटरा केशव देव के पास है और साथ ही यह संरक्षित स्मारक भी है ऐसे में इस पर पूजा स्थल अधिनियम लागू नहीं होगा। हिन्दू पक्ष का आरोप है कि बिना प्रक्रिया के ही इस जमीन को वक्फ बोर्ड ने हथिया लिया है। हिन्दू पक्ष यहाँ पूजा अर्चना की अनुमति भी चाहता है। वहीं मुस्लिम पक्ष चाहता है कि इस जमीन को लकर सुनवाई वक्फ ट्रिब्यूनल में ही हो।

गौरतलब है कि यह शाही ईदगाह वर्तमान में विवादित है और इसको लेकर न्यायालयों में कई याचिकाएँ पड़ी हुई हैं। हिन्दू पक्ष का कहना है कि मथुरा में स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के बराबर में बनी शाही ईदगाह वाला ढाँचा जबरन वही बना दिया गया जहाँ भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इस जगह पर कब्जा करके ढाँचा बनाया गया है। यहाँ अभी भी कई ऐसे सबूत हैं जो कि यह सिद्ध करते हैं कि यहाँ पहले एक मंदिर हुआ करता था।

हिन्दू पक्ष का दावा है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म राजा कंस के कारागार में हुआ था और यह जन्मस्थान शाही ईदगाह के वर्तमान ढाँचे के ठीक नीचे है। सन् 1670 में मुगल आक्रांता औरंगज़ेब ने मथुरा पर हमला कर दिया था और केशवदेव मंदिर को ध्वस्त करके उसके ऊपर शाही ईदगाह ढाँचा बनवा दिया था और इसे मस्जिद कहने लगे। 13.37 एकड़ जमीन पर दावा करते हुए हिन्दू यहाँ से शाही ईदगाह ढाँचे को हटाने की माँग करते रहे हैं।

सरकार से पैसे लेने के लिए फ्रॉडगिरी पर उतरे MP के मदरसे, हिंदू बच्चे ही नहीं इंजीनियर-डॉक्टरों का भी दिखाया एडमिशन: 100 बच्चों पर मिलते हैं ₹50 हजार

मध्य प्रदेश के भिंड, मुरैना, श्योपुर, रीवा आदि जिलों के मदरसों में सरकारी अनुदान हासिल करने के लिए बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा चल रहा है। मदरसों की रजिस्टर में मुस्लिमों से अधिक हिंदू बच्चों का नामांकन दिखाया गया है। भिंड-मुरैना तो वो इलाके हैं, जहाँ प्रदेश में मुस्लिम आबादी सबसे कम है, लेकिन मदरसे सबसे अधिक हैं। खुलासे के बाद श्योपुर के 80 में से 56 मदरसों की मान्यता रद्द कर दी गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जिन हिंदू बच्चों का दाखिला मदरसे में दिखाया गया है, वे सरकारी या प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं। ये कभी मदरसा नहीं गए। इन बच्चों के माता-पिता को भी पता नहीं है कि उनके बच्चों का नाम मदरसों में दर्ज है। दरअसल, मदरसा संचालकों ने इन बच्चों की ‘समग्र’ आईडी जुटाकर मदरसे में फर्जी तरीके से एडमिशन दिखाया है। इस तरह यहाँ पढ़ने वाले छात्रों में मुस्लिमों से अधिक हिंदू हैं।

ये सारा मसला राज्य सरकार से मिलने वाले फंड को लेकर है। मध्य प्रदेश में सरकार की ओर से मदरसों में पढ़ने वाले 100 बच्चों के लिए हर महीने 50,000 रुपए से 60,000 रुपए तक की मदद दी जाती है। इसके अलावा भी मध्य प्रदेश की सरकार की ओर से इन मदरसों को कई अन्य तरह की मदद दी जाती है। इनमें शिक्षकों को तनख्वाह से लेकर अनाज भी शामिल है।

अगर किसी मदरसे में 100 बच्चे हैं और हर महीने उनकी उपस्थिति 70 प्रतिशत रहती है तो फि 2.10 क्विटंल गेहूँ, खाना बनाने के लिए 11440 रुपए, रसोइए को देने के लिए 4,000 रुपए का महीना जैसी सुविधाएँ मिलती हैं। इसके अलावा, इन मदरसों में पढ़ाने वाले स्नातक शिक्षक को 3000 हजार रुपए और पोस्ट ग्रेजुएट को 6,000 रुपए मासिक का वेतन मिलता है।

भिंड के बीटीआई रोड इलाके में संचालित मदरसा हुसैनी फॉर ऑनली गर्ल्स में कुल 77 बच्चे हैं, जिनमें 44% हिंदू हैं। भिंड के 11 महावीर नगर में बीटीआई स्कूल के पीछे अलीमुद्दीन के मकान में संचालित मदरसा दीन-ए-अकबर और हुसैनी प्रोग्राम फॉर ऑनली गर्ल्स में 83 विद्यार्थी हैं, जिनमें 53 प्रतिशत हिंदू हैं। भिंड के सुभाष नगर में संचालित मदरसा मस्जिद नवी में 87 छात्र हैं, जिनमें 44% हिंदू हैं।

अगर भिंड और मुरैना में मदरसों की बात करें तो इन मुरैना में 70 और भिंड में 67 मदरसे चल रहे हैं। दोनों जिलों के कुल 137 मदरसों में 3,880 हिंदू बच्चों के नाम अंकित हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में सबसे अधिक मुस्लिम आबादी बुरहानपुर जिले की है, फिर भी वहाँ 23 मदरसे हैं। यह फर्जीवाड़ा अनुदान और मिड डे मील का अनाज एवं पैसा हड़पने के लिए किया जा रहा है।

वहीं, श्योपुर जिले के मदरसों में हिंदू बच्चों के नाम सरकारी मदद लेने के खुलासे के बाद मंगलवार (30 जुलाई 2024) को यहाँ से 80 में से 56 मदरसों पर यह कड़ी कार्रवाई की गई है। इनकी मान्यता रद्द कर दी गई है। इसके साथ ही स्कूली शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप ने सभी जिलों में संचालित मदरसों की भौतिक सत्यापन की जाँच में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

यहाँ कई ऐसे छात्र हैं, जिनका नाम साल 2004 में भी दर्ज था और फिर 2018 एवं 2023 में भी उनका शामिल किया गया है। यहाँ के मदरसे में छात्र के रूप में एक नाम मानव गोयल का भी है, जो सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। प्रिया मित्तल डॉक्टर हैं। ज्योत्सना गोयल भी डॉक्टर हैं। इनका भी नाम इन मदरसों में दर्ज है। ऐसे अनेकों नाम पर जिन पर सरकार से अनुदान और खाद्यान्न लिए जा रहे थे।

अधिकारियों का कहना है कि अकेले श्योपुर जिले के मदरसों से पिछले पाँच वर्ष की रिकवरी की जाए तो सरकार को इनसे लगभग 125 करोड़ रुपए की रिकवरी सरकार को करना पड़ेगी। अगर पूरे प्रदेश की बात की जाए तो यह रकम हजारों करोड़ रुपए तक पहुँच जाएगी। बता दें कि मुरैना के 68 मदरसों में 2068 हिंदू बच्चे, भिंड के 78 मदरसों में 1812 हिंदू बच्चे, रीवा के 111 मदरसों में 1426 हिंदू बच्चे हैं।

दरअसल, मध्य प्रदेश के 1505 मदरसों में हिंदू बच्चों के इस्लाम की शिक्षा लेने की जानकारी सामने आने के बाद  राष्ट्रीय बाल आयोग (NCPCR) ने हस्तक्षेप किया था। संस्था के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने इसके जाँच के आदेश दिए थे। जाँच के बाद इसका खुलासा हुआ है। कानूनगो का कहना है कि राज्य के मदरसों में 9400 से ज्यादा हिंदू बच्चे दर्ज हैं। इसमें अफसरों की मिलीभगत है।

पेरिस ओलंपिक में भारत ने लगाई पदकों की हैट्रिक, ‘मैराथन ऑफ शूटिंग’ में स्वप्निल कुसाले ने जीता ब्रान्ज मेडल

पेरिस ओलंपिक में शूटिंग में तीसरा मेडल भी भारत ने अपने खाते में कर लिया है। इस मेडल को दिलाने वाले शूटर का नाम स्वप्निल कुसाले है। उन्होंने 50 मीटर राइफल में इसे जीता। इसे मैराथन ऑफ शूटिंग भी कहा जाता है। उनकी इस जीत के साथ ही भारतीयों का उत्साह ओलंपिक में और बढ़ गया है।

स्वप्निल कुसाले ने 451.4 पॉइंट के साथ ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। चीन के लियु युकान ने 463.6 पॉइंट के साथ गोल्ड जीता। वहीं यूक्रेन के शूटर शेरी कुलिश (461.3) ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया।

इससे पहले पेरिस ओलंपिक में भारत के लिए पहला मेडल मनु भाकर ने जीता। उन्होंने बीते रविवार को 10 मीटर एयर पिस्टल में ब्रॉन्ज जीतकर मेडल टैली में भारत का खाता खोला था। इसके बाद मनु भाकर और सरबजोत सिंह की जोड़ी ने मिक्स्ड टीम इवेंट में भी ब्रॉन्ज मेडल जीता था। अब पेरिस ओलंपिक में भारत की शान ऊँची करने वालों में स्वप्निल कुसाले का नाम भी जुड़ गया है।

बता दें कि स्वप्निल कुसाले 2015 में कुवैत में हुई एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में 50 मीटर राइफल प्रोन 3 इवेंट में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। उन्होंने 59वें नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में गगन नारंग और चेन सिंह जैसे शूटर्स को हरा चुके हैं।

पकड़ा गया ‘रेल जिहादी’ गुलजार शेख, पटरियों पर साइकिल-सिलेंडर डाल बनाता था यूट्यूब वीडियो: कमाई के लिए खतरे में डाल रहा था यात्रियों की जान

यूट्यूब पर वीडियो बना कर व्यूज बटोरने के लिए ट्रेन की पटरी पर सिलेंडर और साइकिल रखने वाले गुलजार शेख को पकड़ लिया गया है। गुलजार शेख के विरुद्ध शिकायत भी दर्ज कर ली गई है। उसके पकड़े जाने की जानकारी भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने दी है।

शहजाद पूनावाला ने एक्स (पहले ट्विटर) पर जानकारी दे कर बताया है कि यात्रियों की जान को खतरे में डालने वाले ‘रेल जिहादी’ गुलजार शेख को पुलिस ने पकड़ लिया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन उसे किसी कीमत पर नहीं छोड़ेगा। वहीं गुलजार शेख के खिलाफ कई धाराओं में शिकायत भी दर्ज हुई है।

गुलजार शेख के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धरा 324, 326 और 109 के साथ ही रेलवे एक्ट की कई धाराओं में शिकायत दर्ज की गई है। इसके अलावा उसके ऊपर आईटी एक्ट की धाराएँ भी लगाई गई हैं। शिकायत में कहा गया है गुलजार शेख के कृत्य से कोई बड़ा ट्रेन हादसा हो सकता है और उसे इस बात की जानकारी भी है।

गौरतलब है कि गुलजार शेख के कुछ वीडियो वायरल हुए थे जिनमें वह ट्रेन की पटरी पर अलग-अलग सामान रखता था। गुलजार शेख ने यूट्यूब पर खुद को ‘हैकर’ और ‘एक्सपेरिमेंट’ करने वाला बता रखा है। उसका यूट्यूब पर गुलजार इंडियन हैकर नाम से चैनल है, इस पर 2.35 लाख सब्सक्राइबर हैं।

गुलजार शेख की ऐसी ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इसमें वह ट्रेन आने के पहले पटरी के बीचोंबीच एक बड़ी साइकिल डाल देता है। जब ट्रेन पूरी गुजर जाती है तो वह साइकिल दिखाता है। हालाँकि, इस मामले में कोई टक्कर नहीं हुई लेकिन यदि ऐसा होता तो ट्रेन सवार यात्रियों की जान को खतरा हो सकता था।

ऐसी ही एक और वीडियो में और ट्रेन की पटरी पर गैस सिलेंडर रखते हुए देखा जा सकता है। एक अन्य वीडियो में वह लोहे का मोटर पटरियों पर रखता है। एक और वीडियो में वह पटरी पर बाल्टी रखता है। इन सब वीडियो के बाद वह दिखाता है कि क्या नुकसान उस वस्तु को हुआ है। उसकी वीडियो वायरल होने के बाद अब उसे पकड़ कर लिया गया है।

‘क्या गुंडों को रखने के लिए है CM आवास’: स्वाति मालीवाल से मारपीट में जमानत माँगने गया था अरविंद केजरीवाल का PA विभव कुमार, सुप्रीम कोर्ट ने रगड़ दिया

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के पूर्व निजी सचिव बिभव कुमार को गुंडा बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने CM केजरीवाल पर भी प्रश्न उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि क्या केजरीवाल के ऑफिस को गुंडे रखने की जरूरत है। कोर्ट ने यह टिप्पणियाँ बिभव कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस उज्जवल भुइयां और जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दीपंकर दत्ता ने गुरुवार (1 अगस्त, 2024) को बिभव कुमार के मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने कहा, “क्या मुख्यमंत्री का बंगला कोई निजी आवास है? CM आवास को ऐसा गुंडा रखने की क्या जरूरत है? क्या ऐसा हुआ है, हम तो आश्चर्यचकित हैं। सवाल है कि ऐसा कैसे हुआ।”

कोर्ट ने कहा, “क्या यही तरीका है, क्या ये एक निजी आवास है? यह मुख्यमंत्री का घर है? आप ऐसा कहना चाहते हैं जैसे कि कोई एक गुंडा घुस आया और आप उसे बचाना चाहते है। बिभव कुमार एक महिला पर हमला किया है। क्या बिभव कुमार को ऐसा करते समय कोई शर्म आई।”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वाति मालीवाल ने हमले से पहले अपनी शारीरिक स्थिति भी बिभव कुमार को बता दी थी फिर भी उन्होंने हमला किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिभव कुमार पूर्व सचिव हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि स्वाति मालीवाल को केजरीवाल के घर में रुकने की कोई अनुमति नहीं थी तो बिभव कुमार को भी नहीं थी।

कोर्ट ने इस मामले में कहा कि सामान्यतः तो जमानत दे ही देते हैं, यहाँ तक कि हत्यारों को भी जमानत मिलती है लेकिन इस मामले में यह आगे चल कर बुरे उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि अगर बिभव कुमार नहीं जाँच प्रभावित कर सकते तो आखिर कौन कर सकता है।

इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने बिभव कुमार को जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसी के खिलाफ बिभव कुमार सुप्रीम कोर्ट पहुँचे थे। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर दिया है।

बिभव कुमार पर आरोप है कि उन्होंने 13 मई, 2024 को CM केजरीवाल से मिलने आई AAP की राज्यसभा सांसद से मारपीट की। स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया है कि उन पर बिभव कुमार ने हमला किया और उनको जमीन पर गिरा कर तक मारा। स्वाति मालीवाल ने कहा कि उनकी पिटाई के दौरान केजरीवाल के आवास में मौजूद लोगों ने उनकी मदद नहीं की।

कॉन्ग्रेस का जो नेता ऑपइंडिया को दे रहा धमकी, उसने ही दिए थे राहुल गाँधी और अमेरिका के बीच हुए गुप्त बैठक के सबूत: क्या कॉन्ग्रेस के पास है कोई जवाब?

30 जुलाई 2024 को ऑपइंडिया ने एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें ‘इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस’ के अध्यक्ष सैम पित्रौदा और उनकी एनजीओ ‘ग्लोबल नॉलेज इनिशिएटिव’ के बारे में जानकारी दी गई थी। हमने बताया था कि इस संस्था को रॉकफेलर फाउंडेशन सहित यूएस स्टेट डिपार्टमेंट, यूएसएआईडी से फंड मिलता है। इनमें से रॉकफेलर फाउंडेशन के वर्तमान उपाध्यक्ष सैम पित्रौदा ही हैं, जो पहले अमेरिकी सरकार में सलाहकार भी रह चुके हैं। हमने इन्हीं सारे बिंदु को एक दूसरे से जोड़कर सवाल उठाया था कि क्या कॉन्ग्रेस और अमेरिका के बीच खुफिया तौर पर मिलीभगत चल रही है।

रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद कॉन्ग्रेस नेता प्रवीण चक्रवर्ती ने ट्विटर पर ऑपइंडिया को धमकी दी। अपने ट्वीट में प्रवीण चक्रवर्ती ने कहा कि जिस बैठक की बात हो रही है उस ट्रिप पर वो राहुल गाँधी के साथ थे। उन्होंने राहुल गाँधी से जुड़ी खबर को झूठी बताया और कहा कि इससे द्विपक्षीय संबंध पर फर्क पड़ सकता है जो कि राष्ट्रीय हित के खिलाफ है और एक तरह का केस चलाने लायक अपराध भी है। हालाँकि चक्रवर्ती ने धमकी देते हुए हमें यह नहीं बताया कि उन्हें ऑपइंडिया पर किस धारा के तहत कार्रवाई करनी है न ही उन्होंने हमें बताया कि वो कि हमारी रिपोर्ट राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा कैसे है।

अब एक बात जो ध्यान देने वाली है वो ये कि प्रवीण सिर्फ बैठक पर बात की लेकिन अन्य किसी लिंक को नकार नहीं पाए। उन्होंने उस सवाल का जवाब भी नहीं दिया जो सैम पित्रौदा और राहुल गाँधी के अमेरिका डीप स्टेट को लेकर खड़े किए गए थे, न ही उन्होंने इस बात को नकारा की पित्रौदा की एनजीओ को यूएस स्टेट डिपार्टमेंट, यूएसएआईडी और रॉकफेलर फाउंडेशन से फंड मिलता है।

और बैठक पर भी उन्होंने जो बोला वो ये कहा कि कोई गुप्त बैठक नहीं हुई। क्या ये समझा जाए कि चूँकि उस ट्रिप पर वो राहुल गाँधी के साथ थे और मीडिया में उस पर रिपोर्ट हुई इसलिए वो बैठक सीक्रेट नहीं थी।

मालूम हो कि अब जब प्रवीण चक्रवर्ती ने इस मामले में सवाल उठाए हैं तो ये जानना और महत्वपूर्ण होता है कि किस तरह से वो प्रवीण चक्रवर्ती ही हैं जिन्होंने यूएस डीप स्टेट के साथ कॉन्ग्रेस की मिलीभगत पर सबूत दिए।

राहुल गाँधी की व्हाइट हाउस अधिकारियों के साथ सीक्रेट मीटिंग का स्त्रोत क्या?

साल 2023 में राहुल गाँधी की वॉशिंगटन ट्रिप के दौरान ईकोनॉमिक टाइम्स में रिपोर्ट छपी थी, जिसे सीमा सिरोही ने लिखा था। सीमा वैसे तो राहुल की प्रशंसक हैं और जमकर तारीफ भी करती हैं लेकिन उस रिपोर्ट में उन्होंने ये बता दिया कि व्हाइट हाउस में ऐसी बैठक हुई थी जिसे बाइडन प्रशासन और कॉन्ग्रेस ने गुप्त रखने का निर्णय लिया था।

उस समय वह खबर सोर्स पर आधारित थी, जिसे सिरोही ने नहीं बताया कि उन्हें जानकारी कैसे मिली। उन्होंने ये जानकारी शायद ये संदेश देने के लिए दी थी कि बाइडेन सरकार राहुल गाँधी सकारात्मक रूप से ले रहा है। लेकिन, यही खबर वो आधार बनी जिसने राहुल गाँधी के राजनीतिक विरोधियों और यहाँ तक भाजपा का ध्यान इस बैठक पर खींचा। सवाल उठे, मर कोई खंडन नहीं हुआ।

सिरोही ने बरखा दत्त के चैनल पर भी अपनी कहानी को बताया। हालाँकि बाद में चूँकि उनकी रिपोर्ट से कॉन्ग्रेस पर सवाल उठे तो पार्टी समर्थकों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। ट्रोलिंग और दुर्व्यवहार के बाद सिरोही ने अपने स्रोत का खुलासा करने का फैसला किया। सीमा ने ट्विटर पर पुष्टि की थी कि यह जानकारी प्रवीण चक्रवर्ती ने ही दी थी। ध्यान रहे कि ऑपइंडिया को धमकी देते हुए प्रवीण ने स्वीकार किया था कि वह पूरी यात्रा के दौरान राहुल गाँधी के साथ थे।

3 जून 2023 को प्रवीण चक्रवर्ती ने पीटीआई से बात की और पुष्टि की कि राहुल गाँधी ने वास्तव में व्हाइट हाउस और बाइडेन प्रशासन के अधिकारियों से मुलाकात की थी।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में भी इस पर खबर (अर्काइव लिंक) छपी थी। उसमें कहा गया था:

कॉन्ग्रेस पार्टी के डेटा एनालिटिक्स विभाग के अध्यक्ष प्रवीण चक्रवर्ती ने पीटीआई को बताया, “…प्रशासन के लोगों के साथ कुछ बैठकें हुईं। वे बहुत सौहार्दपूर्ण बैठकें थीं। इस बैठक का वास्तव में बड़ा उद्देश्य भारत-अमेरिका संबंधों के महत्व को उजागर करना, संबंधों को व्यापक आधार देने की आवश्यकता था। इसमें यूक्रेन की स्थिति पर भारत के रुख के बारे में सवाल उठे हैं, और राहुल गाँधी ने निजी और सार्वजनिक रूप से दोनों ही तरह से यह स्पष्ट कर दिया है कि वह यूक्रेन की युद्ध स्थिति पर भारत सरकार के रुख का पूरी तरह से समर्थन करते हैं।”

इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि चक्रवर्ती जो अमेरिकी यात्रा के दौरान राहुल गाँधी के साथ, उन्होंने राहुल गाँधी की बैठकों के बारे में कोई ब्यौरा नहीं दिया। उन्होंने बैठक के बारे में विस्तार से बताए बिना कहा, “हमने विश्वविद्यालयों के छात्रों से मुलाकात की, हमने इन विश्वविद्यालयों के शिक्षकों से मुलाकात की। हमने सिलिकॉन वैली में प्रौद्योगिकी अधिकारियों से मुलाकात की। हमने अमेरिका के मीडिया नेतृत्व से मुलाकात की। हमने थिंक टैंक, शिक्षाविदों और विद्वानों से मुलाकात की। हमने व्हाइट हाउस के कुछ लोगों से मुलाकात की। हमने (बाइडेन) प्रशासन के कुछ लोगों से मुलाकात की।”

वहीं उन्होंने पीटीआई के साथ बातचीत में यह भी संकेत दिया कि उनकी अमेरिकी यात्रा के दौरान भारतीय लोकतंत्र काफी चर्चा का विषय था। इसपर भी उन्होंने मीडिया को बताया था। अब प्रवीण चक्रवर्ती शायद इसका बचाव करने के लिए झूठ बोल सकते हैं और दावा कर सकते हैं कि उन्होंने भारतीय लोकतंत्र पर बात सिर्फ उन लोगों से की जिनकी उनसे मुलाकात हुई थी न की बाइडेन प्रशासन ने। हालाँकि उनका ये कहना भी विश्वास लायक नहीं होगा क्योंकि राहुल गाँधी ने हर बार अमेरिकी हस्तक्षेप की माँग की है।

2021 में, राहुल गाँधी ने हार्वर्ड केनेडी स्कूल के राजदूत निकोलस बर्न्स के साथ एक ऑनलाइन बातचीत के दौरान अमेरिकी हस्तक्षेप की माँग की थी…। उन्हें उस समय हार्वर्ड केनेडी स्कूल के इंस्टिट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स से बुलाया गया था। व

यह सब सिर्फ अटकलें नहीं हैं कि बाइडेन के अधिकारियों के साथ राहुल गाँधी की बातें क्या रही होंगी। वो भी तब जब प्रवीण चक्रवर्ती कहते हैं कि राहुल गाँधी ने तो बस भारतीय लोकतंत्र को सशक्त और मजबूत करने के बारे में बात की थी और ये कैसे बड़े पैमाने पर दुनिया की मदद की थी इस पर चर्चा की थी।

अगर वाकई राहुल गाँधी ने राहुल गाँधी ने वास्तव में व्हाइट हाउस के अधिकारियों से मुलाकात के दौरान भारत में विदेशी हस्तक्षेप के लिए नहीं कहा था, तो यह कॉन्ग्रेस और प्रवीण चक्रवर्ती की जिम्मेदारी है कि वे बताएँ कि राहुल गाँधी और बिडेन प्रशासन के अधिकारियों के बीच क्या बातचीत हुई थी।

हकीकत तो ये है कि अमेरिकी यात्रा के बाद प्रवीण चक्रवर्ती ने खुद इस बात की बात पुष्टि की थी राहुल ने भारतीय लोकतंत्र पर चर्चा की थी जबकि यात्रा से पहले वो कह रहे थे भारतीय लोकतंत्र राहुल गाँधी के एजेंडे में है ही नहीं।

प्रवीण चक्रवर्ती के बयान बदलने की बात सीमा सिरोही भी अपने ट्वीट में उजागर कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि पहले चक्रवर्ती ने कहा मीटिंग हुई है। अब अपना मन बदल लिया और कह रहे हैं कि व्हाइट हाउस में कोई मीटिंग ही नहीं हुई।

हालाँकि यदि प्रवीण के बयान देखें तो पता चलेगा कि भले ही वो इस बात को अस्वीकार कर रहे हैं कि राहुल गाँधी की बैठक नहीं हुई, लेकिन वो स्वीकार कर रहे हैं कि राहुल गाँधी ने अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान सीनेटरों और सरकारी अधिकारियों से मुलाकात की थी।

अब उनका रवैया देख प्रतीत होता है कि वो एक जानकारी पर बहस कर रहे हैं कि राहुल गाँधी व्हाइट हाउस गए, लेकिन इस पर कुछ नहीं बोल रहे कि वो सरकारी अधिकारियों से और बाइडेन के प्रशासन से मिले और भारतीय लोकतंत्र पर बात की… जिसका अर्थ हम जानते हैं क्योंकि राहुल गाँधी पहले भी कई बार ऐसे बयान दे चुके हैं।

अब ये तो साबित होता है कि कॉन्ग्रेस नेता प्रवीण चक्रवर्ती या तो बहुत बड़े झूठे हैं या फिर कॉन्ग्रेस के पास बहुत कुछ छिपाने को हैं जो प्रवीण चक्रवर्ती नहीं छिपा पाए और हकीकत खोल दी।

इन्हीं जानकारियों से बहुत प्रश्न खड़े होते हैं। सबसे पहले, प्रवीण चक्रवर्ती ने सीमा सिरोही को क्यों बताया कि राहुल गाँधी गुप्त बैठक के लिए व्हाइट हाउस गए थे और फिर इन बयानों के एक पूरे सप्ताह बाद पलट गए? दूसरे, जब पीटीआई से बातचीत में भी प्रवीण ने इन गुप्त बैठकों की पुष्टि की तो फिर इन बैठकों के विषय को बताने से भी इनकार क्यों कर दिया – प्रवीण या कॉन्ग्रेस पार्टी, बिडेन प्रशासन के साथ चर्चा के विषय को क्यों छिपाएगी? इसके अलावा, भले ही अब कोई पलटे लेकिन जब साल 2023 में प्रवीण ये लगातार पुष्टि कर रहे थे कि राहुल गाँधी ने “लोकतंत्र को संरक्षित करने” के बारे में बात की… तो क्या कॉन्ग्रेस को इस बारे में स्पष्ट नहीं करना चाहिए कि वास्तव में चर्चा क्या हुई थी?

कॉन्ग्रेस इन सवालों के जवाब नहीं देगी क्योंकि ऐसा करते हुए उन्हें ऐसे प्रश्नों से जूझना होगा जो उनको असहज महसूस करा सकते हैं और उनके यूएस डीप स्टेट के साथ मिलीभगत होने वाले लिंक को खोल सकते हैं।

नोट: इस लेख को मूल रूप से अंग्रेजी में ऑपइंडिया की चीफ एडिटर नुपूर जे शर्मा ने लिखा है। आप इसे अंग्रेजी में यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

मंदिर की दीवार पर पेशाब कर रहा था मोहम्मद नदीम, दिलीप सिंह ने रोका तो पहली गाली-गलौज की फिर साथियों संग घुस कर किया हमला: लोहे की रॉड से पीट-पीटकर किया लहूलुहान

लखनऊ में एक मुस्लिम युवक ने मंदिर की दीवाल पर पेशाब की। ऐसा करने से उसे जब एक शख्स ने रोका तो वह अपने घरवालों के साथ हमला करने आ गया। मुस्लिम युवक ने उसे रोकने वाले शख्स के घर में घुस कर रॉड से हमला किया और मरणासन्न कर दिया। मामले में FIR दर्ज कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लखनऊ के राजाजीपुरम के एफ ब्लॉक में स्थित मंदिर की दीवार पर मंगलवार (30 जुलाई, 2024) को नदीम पेशाब कर रहा था। इसको लेकर यहीं के निवासी दिलीप सिंह उसे रोकने गए और मंदिर की दीवाल पर पेशाब करने से मना कर दिया।

दिलीप सिंह के रोकने पर नदीम भड़क गया और उन्हें गालियाँ देने लगा। दोनों के बीच विवाद पहले शांत हो गया नदीम अपने घर चला गया। कुछ ही देर बाद नदीम अपने साथ मोहम्मद सलीम, मोहम्मद नफीस और कलीम के साथ लाठी-डंडे और लोहे की रॉड से लैस होकर पहुँच गया।

इन सबने मिलकर दिलीप सिंह पर हमला बोल दिया और उनको लाठी डंडे से काफी मारापीटा। यह वारदात दिलीप सिंह के घर के भीतर हुई। दिलीप सिंह के सर पर भी लोहे की रॉड से वार किया गया। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद सभी हमलावर मौके से फरार हो गए।

दिलीप सिंह को इसके बाद उनके परिजन अस्पताल लेकर गए और इलाज करवाया। पीड़ित दिलीप सिंह ने इस संबंध में पुलिस के पास FIR दर्ज करवाई है। उनकी दी गई तहरीर के आधार पर पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कहा है कि मामले की जाँच करके आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि इससे पहले भी मंदिरों में मूर्तियों को खंडित करने और उनका अपमान करने के कई मामले सामने आते रहे हैं। इससे पहले हाल ही में बरेली में मूर्तियों के अपमान का मामला सामने आया था।