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अयोध्या के रामलला लाओस के पोस्टेज स्टाम्प पर: प्राचीन है ‘हजार हाथियों की भूमि’ से भारत का कनेक्शन, रामायण से लेकर पंचतंत्र तक वहाँ लोकप्रिय

आपने अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर को देखा होगा, उसमें रामलला की जो सुंदर प्रतिमा स्थापित की गई है उनका दर्शन भी अपने किया होगा और उनकी तस्वीरें अपने मोबाइल फोन में और सोशल मीडिया हैंडल में भी होंगी। लेकिन, ताज़ा खबर ये है कि अब रामलला का एक स्टाम्प भी जारी हुआ है। ये रामलला की तस्वीर वाला दुनिया का पहला पोस्टेज स्टाम्प है। इससे पहले कि आप समझें कि ये भारत में हुआ है, आपको बता दें कि ये दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश में हुआ है। इसे ‘हजार हाथियों की भूमि’ भी कहा जाता है।

भारत के विदेश मंत्री S जयशंकर के साथ लाओस के डिप्टी PM सलेउमक्से कोमासिथ

लाओस की संस्कृति भारत से काफी प्रभावित है। केंद्रीय विदेश मंत्री S जयशंकर हाल ही में लाओस दौरे पर गए थे, उसी दौरान ये पोस्टेज स्टाम्प जारी किया गया। भारत और ‘लाओ पीपल डेमोक्रेटिक कंट्री’ (LPDR) के बीच प्राचीन काल से ही चली आ रही सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत जुड़ाव को भी ये दर्शाता है। वहाँ के उप-प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री सलेउमक्से कोमासिथ और भारत के विदेश मंत्री ने इस स्मारक पोस्टेज स्टाम्प को साथ मिल कर जारी किया।

यही है रामलला की तस्वीर वाला पोस्टेज स्टाम्प, जिसे लाओस ने जारी किया

ये कार्यक्रम राजधानी व्यिंचन में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में लाओस में भारत के एम्बेस्डर प्रशांत अग्रवाल भी मौजूद थे। असल में S जयशंकर ASEAN (दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों का समूह) की बैठक के लिए वहाँ पहुँचे थे। इस विशेष स्टाम्प सेट में 2 स्टाम्प हैं – एक में लुआंग फाबांग के बुद्ध को दिखाया गया है, दूसरे में अयोध्या के रामलला को दर्शाया गया है। बता दें कि लुआंग फाबांग पुराने समय में लाओस की राजधानी हुआ करती थी।

महात्मा बुद्ध भी इस सेट के एक पोस्टेज स्टाम्प पर दिखे, भारत ही थी उनकी कर्मभूमि

भारत और लाओ PDR के बीच बौद्ध धर्म एक पुल की तरह रहा है। भारत ही महात्मा बुद्ध की कर्मभूमि रही, उन्होंने यहीं पर यात्राएँ की, ऐसे में दक्षिण एशिया में जहाँ-जहाँ बौद्ध धर्म मजबूत है वहाँ भारत के साथ जुड़ाव बना। बता दें कि अयोध्या में रामलला की जो प्रतिमा स्थापित की है, उसमें उन्हें 5 वर्ष का दर्शाया गया है। कृष्णशिला से बनी इस प्रतिमा को कर्नाटक के अरुण योगीराज ने तराशा है। मंदिर के शिलान्यास और फिर प्राण-प्रतिष्ठा में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहे थे।

बता दें कि लाओस में पहले जीववाद/सर्वात्मवाद की विचारधारा वाला धर्म चलता था। इसके बाद वहाँ हिन्दू धर्म पहुँचा, फिर बौद्ध धर्म। स्थानीय इतिहासकार मानते हैं कि यीशु मसीह के जन्म के पूर्व ही बौद्ध धर्म वहाँ पहुँच गया था। माना जाता है कि व्यिंचन में स्थित लुआंग को इसीलिए निर्मित किया गया था, ताकि वहाँ राजगीर से आए बौद्ध धर्म के अवशेषों को संरक्षित किया जा सके। बौद्ध भिक्षु फ्रा चाओ चंथाबुरी पसिथिसाक ने इसे बनवाया था।

लाओस में बौद्ध धर्म के साथ-साथ रामायण भी लोकप्रिय हो गया। दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में संस्कृत राजसभाओं की भाषाएँ बन गईं। इसके बाद दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में राजाओं ने सम्राट अशोक की नक़ल शुरू कर दी, जिन्हें ‘चक्रवर्ती’ माना जाता था। इसके बाद सर्वमान्य बनने के लिए वहाँ के राजा खुद को विष्णु, शिव और बुद्ध से जुड़ा हुआ दिखाने लगे। इससे वहाँ की राजनीति में स्थायित्व आया, संघर्ष कम हुआ। वहाँ अभिवादन की मुद्रा से लेकर शादी-विवाह की परंपराएँ, सब भारत से मिलती-जुलती हैं।

वहाँ की लाओ भाषा भी संस्कृत-प्राकृत से प्रभावित है। लाओस की विभिन्न लिपियाँ, वर्तमान में उपयोग में आने वाली ‘अक्सन लाओ’ और पुरानी ताई नोई लिपि, साथ ही धार्मिक पांडुलिपियों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली तुआ थाम लिपि, सभी पल्लव लिपि से निकली हैं, जिसकी वंशावली खुद ब्राह्मी लिपि से जुड़ी है। ‘अक्सन’ शब्द ही संस्कृत शब्द ‘अक्षर’ से आया है। दोनों भाषाओं में कई शब्द मिलते-जुलते हैं: कुमारा (कुमारा), पतिवत (प्रतिवाद), प्रोम (ब्रह्मा), मित्ताफाब (दोस्ती), शांतिफाब (शांति), पथेट (प्रदेश), प्रणाम (प्रणाम), रुसी (ऋषि), शांति (शांति), श्री (श्री), सुत (सूत्र), सेट्ठी (श्रेष्ठी), युवतनारी (युवनारी), सभा (सभा), चंपा (कैंपा), नंग मेखला (मणि मेखला)।

वहाँ पर ‘विवाह’ को भी ‘विवाह’ ही कहा जाता है। लाओस में रामायण की कथा को कुछ ऐसे विकसित किया गया है, जैसे ये वहीं हुआ हो। वहाँ के बौद्ध विहारों की दीवारों पर आपको रामायण के दृश्य उकेरे हुए मिलेंगे। ओडिशा के विष्णु शर्मा द्वारा रचित ‘पंचतंत्र’ का भी वहाँ फ्रा संघराजा द्वारा सन् 1507 में अनुवादित किया गया था। फोउ लोखोन पहाड़ी पर राजा महेन्द्रवर्मन द्वारा स्थापित शिवलिंग और शिलालेख उपलब्ध है, एक अन्य शिलालेख में श्रीदेवानिका को युधिष्ठिर और धनंजय को इन्द्रद्युम्न की तुलना की गई है।

श्रीदेवानिका ने लाओस में एक ‘कुरुक्षेत्र’ की स्थापना करने का निर्णय लिया, क्योंकि जहाँ महाभारत का युद्ध हुआ था वो जगह उनके लिए ‘महातीर्थ’ जैसा था। भद्रेश्वर शिव वाले वट फु मंदिर में जयवर्मन प्रथम के शिलालेख में उल्लेख है कि पहाड़ी का नाम लिंग पर्वत था। 835 ई. के एक शिलालेख में श्रेष्ठपुरा को एक पवित्र स्थान बताया गया है क्योंकि यह शिव पूजा से जुड़ा था। जयवर्मन VI के ग्यारहवीं शताब्दी के शिलालेख में दर्ज है कि राजा के दरबारी पंडित तिलका की माँ की तुलना उनकी विद्या के कारण देवी सरस्वती से की गई है।

बिहार में नहीं मिलेगा 65% कोटा, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक से किया इनकार: जाति गिनने के बाद बढ़ाया था आरक्षण

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (29 जुलाई 2024) को बिहार में बढ़ाए गए आरक्षण को लेकर पटना हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। याचिका में बिहार सरकार ने पटना हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती है। दरअसल, पटना हाई कोर्ट ने SC, ST, OBC और EBC के लिए आरक्षण को 50% से बढ़ाकर 65% करने के बिहार सरकार के फैसले को रद्द कर दिया था।

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने अपील पर सुनवाई की अनुमति दी है। बिहार राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने सुप्रीम कोर्ट से पटना उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ से संबंधित इसी तरह के कानून में अंतरिम आदेश पारित किया है।

श्याम दीवान ने सुप्रीम कोर्ट की पीठ से इसी तरह अंतरिम राहत देने का आग्रह किया। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने राज्य सरकार को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया और मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर एक बड़ी बेंच द्वारा भी विचार करने की आवश्यकता हो सकती है। इस मामले पर सितंबर में सुनवाई होगी।

बता दें कि 20 जून 2024 को पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के. विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति हरीश कुमार की पीठ ने एक जनहित याचिका पर बिहार आरक्षण (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए) (संशोधन) अधिनियम 2023 और बिहार (शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश में) आरक्षण (संशोधन) अधिनियम 2023 को रद्द कर दिया था।

दरअसल, साल 2023 में नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की गठबंधन सरकार ने राज्य में जाति सर्वे कराया था। सर्वे के आँकड़ों के आधार पर राज्य सरकार ने कानून में संशोधन किया। नए कानून के तहत अत्यंत पिछड़े वर्गों (EBC) के लिए मौजूदा कोटा 18% से बढ़ाकर 25% कर दिया गया था। इसके साथ ही पिछड़े वर्गों (OBC) के आरक्षण कको 12% से बढ़ाकर 18% कर दिया गया।

इसके साथ सरकार ने अनुसूचित जातियों (SC) के आरक्षण को 16 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत और अनुसूचित जनजातियों (ST) के कोटा को दोगुना करके 1 प्रतिशत को बढ़ाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया था। ये सब कुछ राज्य में जनसंख्या के आधार पर आरक्षण को बढ़ाया गया था। लालू यादव की पार्टी राजद लगातार इसकी माँग कर रही थी।

इस कानून के खिलाफ जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई। इस पर सुनवाई करते हुए पटना हाई कोर्ट ने बिहार सरकार द्वारा किए गए आरक्षण संबंधी संशोधनों को भारतीय संविधान के खिलाफ बताया। हाई कोर्ट ने कहा कि ये संशोधन अनुच्छेद 15(4) और 16 (4) के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन करने वाला बताते हुए इसे खारिज कर दिया।

संविधान का अनुच्छेद 15(4) राज्य को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े नागरिकों के किसी भी वर्ग की उन्नति के लिए कोई विशेष प्रावधान करने का अधिकार देता है। इसी तरह अनुच्छेद 16 (4) में प्रावधान है कि राज्य किसी भी पिछड़े वर्ग के लिए पद आरक्षित कर सकता है, जिनका राज्य की सेवाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है।

कर्नाटक में सरकारी खजाने से कॉन्ग्रेस नेताओं को मिलेगी ‘सैलरी’, जिलाध्यक्ष को ₹40 हजार और तहसील मुखिया को ₹25 हजार: गारंटी देखने के बहाने होगी भर्ती

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार अपनी गारंटी योजनाओं के जरिए राज्य के खजाने पर एक बार फिर जोर डालने जा रही है। कॉन्ग्रेस सरकार ने यह योजनाएँ सही से लागू हों, इसके लिए राज्य के हर जिले में एक कमेटी गठित करने की बात की है। इस कमेटी में कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं को भरा जाएगा। इस कमेटी के काम करने का खर्चा सरकार उठाएगी।

कॉन्ग्रेस सरकार ने ऐलान किया है कि उसकी पाँच गारंटी योजनाएँ सही से लागू हों, इस बात को देखने के लिए राज्य, जिला और तालुक(तहसील) स्तर पर कमेटी बनेगी। राज्य स्तर की कमेटी का गठन भी कर दिया गया है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने जून, 2024 में ही ऐलान कर दिया था कि इन कमेटियों के सदस्य कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता होंगे।

कर्नाटक सरकार ने अब ऐलान किया है कि जिला स्तर पर बनने वाली कमेटी के मुखिया को ₹40,000 प्रति माह मानदेय मिलेगा। इसके अलावा उन्हें प्रति बैठक भी एक अच्छी खासी धनराशि दी जाएगी। सरकार ने ऐलान किया है कि तहसील स्तर पर बनने वाली समितियों के मुखिया को ₹25,000 प्रति माह मानदेय मिलेगा।

इससे पहले बताया गया था कि इनको हर बैठक में जाने का पैसा भी मिलेगा। जिला स्तर की कमेटी में 21 सदस्य होंगे और इन्हें भी हर बैठक में जाने पर पैसा मिलेगा। इसके अलावा तहसील की कमेटी में 11 लोग होंगे। इनको भी बैठक में शामिल होने का पैसा मिलेगा। यह सारा पैसा सरकार के खजाने से दिया जाएगा। कर्नाटक के सभी 31 जिलों में यह कमेटियाँ बनाई जाएँगी।

इन सब जिला कमेटियों के ऊपर एक राज्यस्तरीय कमेटी भी बनाई गई है। इसमें एक अध्यक्ष और चार उपाध्यक्ष हैं। इसके मुखिया कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मंत्री HM रेवन्ना को बनाया गया है। इसके अलावा इसके चारों उपाध्यक्ष भी कॉन्ग्रेस नेता हैं। इन सबको बेंगलुरु में एक ऑफिस भी दिया गया है। इसमें 31 सदस्यों को भी रखा गया है।

राज्य स्तर की कमेटी के मुखिया HM रेवन्ना को कैबिनेट मंत्री और बाकी सदस्यों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया है। उनके लिए और भी सुविधाएँ सरकार देगी। राज्य के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने जून, 2024 में एक बैठक में यह ऐलान किया था कि कमेटी के सभी सदस्य पार्टी के कार्यकर्ता होंगे।

कमेटी में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के भरे जाने को लेकर भी CM सिद्दारमैया से सवाल पूछा गया था। उन्होंने इसका जवाब दिया था कि भले ही सरकारी कर्मचारी इन योजनाओं को पहुँचाने के लिए हैं लेकिन कार्यकर्ता ज्यादा अच्छे जानते हैं कि किसे लाभ मिल रहा है या नहीं।

कर्नाटक में 31 जिले और 240 तालुक हैं। इस हिसाब से पैनल में लगभग 3600 कार्यकर्ताओं की भर्ती होगी। इन्हें सरकारी खजाने से मानदेय और बैठक में आने के लिए पैसा मिलेगा, जो राज्य सरकार वहन करेगी। यह खर्चा इन गारंटी स्कीम पर 2023-24 में खर्च हो रहे लगभग ₹60,000 करोड़ से इतर होगा।

राजस्थान के स्कूलों में 28 मई को सावरकर जयंती और 5 अगस्त को धारा 370 हटाने का उत्सव: भाजपा सरकार ने दिया निर्देश, होगा ‘स्वर्ण मुकुट मस्तक दिवस’ का आयोजन

सीएम भजनलाल शर्मा की अगुवाई वाली राजस्थान की भाजपा सरकार ने प्रदेश के स्कूलों में 28 मई को सावरकर जयंती मनाने का निर्देश दिया है। वहीं, 29 मई को महाराणा प्रताप की जयंती पर छुट्टी रहेगी। हालाँकि, इस दौरान गर्मी की छुट्टियाँ होती हैं। वहीं, 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने को ‘स्वर्ण मुकुट मस्तक दिवस’ के रूप में मनाने और 13 अगस्त को वीर दुर्गादास राठौड़ जयंती मनाने के लिए कहा गया है।

शिक्षा विभाग के निदेशक आशीष मोदी ने रविवार (28 जुलाई 2024) को प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों के लिए 2024-25 का कैलेंडर जारी किया। कैलेंडर के अनुसार, इस बार साल के 365 दिनों में 213 दिन ही स्कूल संचालित होंगे। 152 दिन त्योहारों और अन्य कारणों से अवकाश रहेगा। इन अवकाशों में रविवार का अवकाश भी शामिल है।

राजस्थान सरकार का निर्देश

शिक्षा विभाग के कैलेंडर में कहा गया है कि 19 अगस्त को रक्षाबंधन (अवकाश)/संस्कृत दिवस (उत्सव) के रूप में मनाया जाएगा। इस बार दीपावली का अवकाश 27 अक्टूबर से 7 नवंबर तक यानी 12 दिन का रहेगा। सर्दियों की छुट्टियाँ हर बार की तरह 25 दिसंबर से शुरू और 5 जनवरी तक रहेंगी।

स्कूलों में फर्स्ट टेस्ट 21 अगस्त से 23 अगस्त तक होंगे, जबकि सेकेंड टेस्ट 14 अक्टूबर से 16 अक्टूबर तक होंगे। इस बार अर्ध वार्षिक परीक्षा 12 दिसंबर से 24 दिसंबर तक होंगे। वहीं, वार्षिक परीक्षा (बोर्ड क्लास को छोड़कर) 24 अप्रैल से 8 मई तक होंगे। परीक्षा का परिणाम 16 मई को घोषित होगा।

शिक्षा विभाग ने हर महीने के दूसरे व चौथे शनिवार को ‘नो बेग डे’ घोषित किया है। इस दिन स्कूलों में अलग-अलग गतिविधियाँ आयोजित होगी, जिसमें बच्चों को स्टेज पर आने का अवसर दिया जाएगा। स्कूलों में नया सेशन एक जुलाई से शुरू होगा। इससे पहले रिजल्ट घोषित होने के साथ ही स्कूलों में छुट्टियाँ घोषित हो जाएँगी। 

सरकारी स्कूलों में वीर सावरकर जयंती मनाने और जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने का उत्सव मनाने के आदेश पर पूर्व शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला ने कहा, “शिक्षा के क्षेत्र में या पंचांग में किसी भी तरह की राजनीति का समावेश नहीं होना चाहिए।”

‘दुर्गा वाहिनी छोड़ दे, वरना जान से मार देंगे’ : गुजरात में VHP की महिला कार्यकर्ता को सादिक खान ने दी धमकी, सड़क पर बाल नोचकर थप्पड़ मारे, FIR दर्ज

कच्छ के विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता पर हुए हमले को अभी कुछ ही दिन हुए है और इसी बीच पाटन जिले से भी एक और गंभीर घटना सामने आई है। घटना गंभीर इस वजह से है, क्योंकि इस बार एक हिंदू संगठन से जुडी महिला कार्यकर्ता पर हमला किया गया है। पाटन जिले के सांतलपुर तहसील में सिधाड़ा गाँव की दुर्गा वाहिनी की स्वयंसेविका पर सादिक खान नाम के मुस्लिम लड़के ने हमला करके अगवा करने का प्रयत्न किया।

जानकारी के मुताबिक, घटना पाटन जिले के सांतलपुर थाना क्षेत्र के सिंधरा गाँव में 27 जुलाई 2024 को घटी। पीड़िता की पहचान रामिलाबेन परमार के तौर पर हुई है। महिला अपने परिजनों के साथ ही गाँव में रहती है वहीं घटना का आरोपित सादिक खान भी उसी गाँव का है। पीड़िता की ओर से दर्ज शिकायत के मुताबिक, प्राथमिकी में उसने कहा है कि काम करने के बाद जब वह अपने मुँहबोले भाई गमन भरवाड़ के साथ बाइक से घर लौट रही थी, तो शाम करीब साढ़े सात बजे केमिकल फैक्ट्री के पास सादिक मिला जिसने उनकी बाइक के आगे कार रोकी। सादिक के साथ एक अन्य व्यक्ति भी था, जिसकी पहचान नहीं हो सकी है। जब ऐसी हरकत पर महिला ने सादिक से पूछा कि उसने ये ऐसा क्यों किया तो सादिक ने बिना कोई जवाब दिए उसके बाल पकड़ लिए और उसे थप्पड़ मारना शुरू कर दिया।

अचानक हुए हमले के बाद गमन भरवाड़ बीच में गिर गए और जब उन्होंने खुद को बचाने की कोशिश की तो उन पर भी हमला कर दिया गया। शिकायत के मुताबिक, इसी दौरान सादिक ने अपने साथ आए शख्स को कहा कि वो विहिप कार्यकर्ता को गाड़ी में डाले। उसने कहा, “इसे गाड़ी में डालो, आज ये जान से मरेगी।” बाद में वो लोग भाग गए। शिकायत के मुताबिक, वहाँ से जाने से पहले सादिक ने महिला को धमकी देते हुए कहा, “दुर्गा वाहिनी का काम छोड़ दे, आज तो तू बच गई लेकिन दोबारा आई तो जान से मार डालूँगा।”

घटना के बाद दुर्गा वाहिनी सेविका रमिला ने परिजनों को सूचना दी और सब संतालपुर पुलिस स्टेशन पहुँचे। बाद में इस मामले में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने सादिक के खिलाफ भारतीय न्यायिक संहिता की सुसंगत धाराओं और गुजरात पुलिस अधिनियम की धारा 135 के तहत मामला दर्ज करके कार्रवाई की जा रही है।

मामले की अधिक जानकारी पाने के लिए ऑपइंडिया ने संतालपुर पुलिस से भी संपर्क किया। पुलिस ने बताया कि मामले में कार्रवाई जारी है, आरोपित सादिक गिरफ्तार हो चुका है। पुलिस अब आरोपित के साथ गए एक अन्य व्यक्ति की तलाश कर रही है।

पीड़िता की बहन से बात

ऑपइंडिया ने इस मामले की पूछताछ के दौरान ऑपइंडिया की पीड़िता बहन भगवती परमार से भी बात की। भगवती विश्व हिंदू परिषद और दुर्गा वाहिनी की भी सक्रिय कार्यकर्ता हैं। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “कल मेरी बहन को काम से आने में देर हो गई तो मैंने अपने मुँहबोले भाई को, जो गाँव में ही रहता है, उसे अपनी बहन को लेने के लिए भेजा। इसी दौरान सादिक उसके पीछे था और वीडियो बना रहा था। उनका इरादा वीडियो बनाकर बाइक पर आ रहे मेरे भाई-बहनों को बदनाम करने का था, तो मेरी बहन ने उससे वीडियो न बनाने को कहा। यह सुनकर वह कार में घुसा, उन्हें खड़ा रखा और बहन को पीटना शुरू कर दिया।”

उन्होंने कहा, ”ये वीडियो तो एक बहाना था। मूलतः उन लोगों को हमारी दुर्गा वाहिनी और विश्व हिंदू परिषद में काम करने से आपत्ति है। पिछले 15 दिनों से हम लोगों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने साफ धमकी दी थी कि वह हिंदुत्व का मुद्दा नहीं छोड़ेंगे तो उन्हें मार डाला जाएगा। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है,हमारे संगठन हमारे साथ हैं और मामले को लेकर बैठकें चल रही हैं।”

भगवती परमार ने ऑपइंडिया को बताया कि गाँव में 50% से अधिक मुस्लिम आबादी है और सरपंच भी उन्हीं में से है। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर में आरती, हनुमान चालीसा, नवरात्रि या रामनवमी जैसे त्योहारों के दौरान उन लोगों को हमेशा परेशान किया जाता है। उन्होंने कहा, “हममें से कई हिंदू युवक-युवतियाँ संगठन में काम करते हैं, इसलिए गाँव के मुसलमान उन्हें संगठन छोड़ने की धमकी देते रहते हैं। उनका खौफ इतना है कि कोई भी उनके खिलाफ नहीं बोलता। हिंदुओं को कहा जाता है कि उन्हें घर पर ही रहना होगा। यहाँ तक ​​कि हमारे गाँव में हनुमान चालीसा करने पर भी पिटाई की जाती है।”

संगठनों ने की न्याय की माँग

दूसरी ओर, पाटन की दुर्गा वाहिनी के स्वयंसेवक पर हमले का मामला सामने आने के बाद विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और गुजरात की दुर्गा वाहिनी समेत हिंदू संगठनों में आक्रोश फैल गया। घटना को लेकर तुरंत अलग-अलग जगहों पर बैठकों का दौर शुरू हो गया है। संगठन इस मामले में न्याय की माँग को लेकर विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित करने जा रहा है। पता चला है कि जल्द ही साधु संत पीड़ित परिवार से मुलाकात करेंगे और उन्हें न्याय दिलाने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ समेत सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे।

Google कर रहा कमला हैरिस की मदद, दबाई जा रही ट्रंप पर हमले की खबर: अमेरिका में चुनाव से पहले भड़के पूर्व राष्ट्रपति के बेटे, सर्च इंजन पर लगाया इल्जाम

दुनिया की सबसे बड़ी सर्च इंजन गूगल पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या के असफल प्रयास को खोज परिणामों में छिपाने का आरोप लगा है। इससे विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल, ट्रंप की हत्या के बारे में लोग गूगल पर जानकारी खोज रहे हैं, लेकिन सर्च इंजन उन्हें वह नहीं दिखा रहा है। रिपब्लिकन ने गूगल पर राष्ट्रपति चुनावों में कमला हैरिस को मदद करने का आरोप लगाया है।

गूगल सर्च इंजन के ऑटोकम्प्लीट टूल ने डोनाल्ड ट्रंप पर 13 जुलाई 2024 को की गई गोलीबारी के किसी भी उल्लेख को अनदेखा कर दिया है। इससे पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के बेटे गूगल पर भड़क गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह दिग्गज टेक कंपनी अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनावों में हेराफेरी करने की कोशिश कर रही है।

यहाँ तक कि यूजर ने सर्च इंजन पर ‘हत्या का प्रयास’ टाइप किया तो भी उन्हें 13 जुलाई को बटलर, पेनसिल्वेनिया में हुई घटना के बारे में कोई सुझाव नहीं मिला। 13 जुलाई को बटलर में हुई ट्रंप की हत्या की कोशिश ने अमेरिका ही नहीं, पूरे विश्व को हिला कर रखा दिया था। इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद गूगल उसे सुझाव के तौर पर नहीं दिखा रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप जूनियर डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर ने गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई के नेतृत्व वाली टेक फर्म पर जानबूझकर खोज परिणामों में हेरफेर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने एक्स अकाउंट पर लिखा, “बड़ी टेक कंपनियाँ कमला हैरिस की मदद करने के लिए चुनाव में फिर हस्तक्षेप कर रही हैं। हम सभी जानते हैं कि गूगल जानबूझकर चुनाव में हस्तक्षेप कर रहा है। यह वाकई घृणित है।”

बता दें कि अमेरिका में नवंबर 2024 में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं। इसको लेकर देश में दोनों दलों की ओर से जोरदार अभियान चल रहा है। वर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इस चुनाव में कमला हैरिस को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया है, जो एक डेमोक्रेट हैं। वहीं, रिपब्लिकन की ओर से पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मैदान में हैं।

इस राष्ट्रपति चुनाव के प्रचार के दौरान ही डोनाल्ड ट्रंप पर हमला किया गया था। शूटर द्वारा चलाई गई गोली उनके कान को छूती हुई निकल गई थी और वे बाल-बाल बच गए थे। ऐसे में Google के अपडेट से राजनीतिक ड्रामा खड़ा हो गया है। FBI निदेशक क्रिस्टोफर रे की आलोचना के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा था कि उन्होंने ‘लोकतंत्र के लिए गोली खाई’।

गूगल की इस कारस्तानी का फॉक्स न्यूज ने विश्व भर के यूजर्स द्वारा शेयर किए गए स्क्रीनशॉट में अनेकों की समीक्षा की। गूगल के खोज सुझावों में विभिन्न ऐतिहासिक घटनाएँ शामिल थीं। जैसे कि रोनाल्ड रीगन की असफल हत्या, आर्चड्यूक फर्डिनेंड की हत्या, बॉब मार्ले की गोली मारकर हत्या तथा पूर्व राष्ट्रपति गेराल्ड फोर्ड के खिलाफ असफल षडयंत्र। लेकिन, डोनाल्ड ट्रम्प से जुड़ी हालिया घटना नहीं थी।

इन आरोपों के बाद गूगल ने सफाई दी है। गूगल के एक प्रवक्ता ने बताया कि इन खोज सुझावों में कोई मैन्युअल परिवर्तन नहीं किया गया था। गूगल के सिस्टम में राजनीतिक हिंसा के बारे में खुद ही पूर्ण सुझावों को रोकने के लिए अंदरुनी सिक्योरिटी फीचर हैं। हालाँकि, यूजर्स का कहना है कि कैनेडी, अब्राहम लिंकन, रोनाल्ड रीगन, रूजवेल्ट आदि नेताओं की हत्या के प्रयासों के बारे में खोजने पर ऐसा नहीं होता था।

गूगल के प्रवक्ता ने कहा, “हम अपने सिस्टम को और अधिक अपडेट के लिए काम कर रहे हैं। ऑटोकम्प्लीट सिर्फ़ लोगों को समय बचाने में मदद करने वाला एक उपकरण है और वे अभी भी अपनी इच्छानुसार कुछ भी खोज सकते हैं। इस भयानक कृत्य (ट्रंप की हत्या का प्रयास) के बाद लोगों ने जानकारी खोजने के लिए Google का रुख किया। हमने उन्हें सुझाव परिणामों से जोड़ा और ऐसा करना जारी रखेंगे।”

चर्च के कॉलेज में पढ़ेंगे नमाज… जगह दो: केरल में मुस्लिम छात्रों की डिमांड सुन विरोध में उतरे ईसाई संगठन, BJP ने पूछा- क्या खुद इस्लामी संस्थानों में देते हो प्रार्थना की जगह

केरल के एर्नाकुलम में स्थित चर्च संचालित निर्मला कॉलेज में मुस्लिम छात्रों के नमाज के लिए अलग कमरा माँगने पर विवाद हो गया है। इसके विरोध में कॉलेज प्रशासन और चर्च उतर आया है और इसे मजहबी दखल बताते हुए नमाज को अनुमति ना देने की बात कही है। ईसाई संगठन भी इसके खिलाफ हैं।   

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पूरा मामला शुक्रवार (26 जुलाई, 2024) से चालू हुआ। निर्मला कॉलेज के वेटिंग हॉल में कुछ मुस्लिम छात्राओं ने नमाज पढ़ी। इसकी जानकारी कॉलेज के कर्मचारियों ने कॉलेज प्रशासन को दी। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने लड़कियों को यहाँ नमाज पढ़ने से रोक दिया। 

इसके बाद कॉलेज में मुस्लिम छात्रों ने प्रदर्शन चालू कर दिया और कैम्पस के भीतर ही रोज नमाज पढ़ने के लिए अलग से एक कमरे की माँग करने लगे। मुस्लिम छात्रों ने कहा कि यह उनके मजहब का हिस्सा है और उन्हें अलग से कमरा चाहिए ही। इस पर कॉलेज के प्रिंसिपल जस्टिन कन्नड़न ने साफ इनकार कर दिया। 

कॉलेज प्रशासन ने कहा कि यह एक सेक्युलर संस्थान है और यहाँ किसी को नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कॉलेज प्रशासन ने मुस्लिम छात्रों से कहा कि यदि वह नमाज ही पढ़ना चाहते हैं तो उन्हें शुक्रवार को इसके लिए छुट्टी दे दी जाएगी, बस उन्हें लिखित आवेदन देना होगा।

कॉलेज प्रशासन ने कहा कि कॉलेज से मस्जिद की दूरी मात्र 200 मीटर है और छात्र-छात्राएँ वहाँ जाने के लिए स्वतंत्र हैं। मुस्लिम छात्रों के समर्थन में कुछ छात्र संगठन भी उतर आए। कॉलेज में हुई इस घटना के बाद केरल के साइरो मालाबार चर्च और कैथोलिक कॉन्ग्रेस ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज करवाई।

ईसाई संगठन विरोध में उतरे

साइरो मालाबार चर्च ने इसे ईसाई संस्थानों में मजहबी दखल का नाम दिया है। साइरो मालाबार चर्च की पब्लिक अफेयर्स कमिटी ने कहा है कि ईसाई संस्थानों में मजहबी दखल के प्रयासों का विरोध किया जाएगा। इसके मुखिया बिशप थारयिल ने कहा, ”मुवत्तुपुझा निर्मला कॉलेज में हुई घटनाओं ने यहाँ के माहौल को बिगाड़ दिया है। यह एक स्वायत्त संस्थान है जो अपने शैक्षणिक मानकों को बनाए रखता है। छात्रों के एक समूह ने कॉलेज के प्रिंसिपल को घेर लिया और नारे लगाए कि कॉलेज परिसर में नमाज पढ़ने के लिए एक छात्रों को एक कमरा दिया जाए।”

उन्होंने मुस्लिम छात्रों की मांगों को मनवाने के लिए छात्र संगठनों के समर्थन पर भी हमला बोला है। उन्होंने कहा, ”यह चिंता का विषय है कि केरल के दो मुख्य छात्र संगठन भी ऐसी माँग उठाकर कॉलेज के माहौल को दूषित किया। इस माँग का कोई भी नैतिक या कानूनी आधार नहीं है। इन गतिविधियों के पीछे साजिश और इनके मकसद की जाँच होनी चाहिए।” 

केरल के एक और बड़े ईसाई संगठन कैथोलिक कॉन्ग्रेस ने भी नमाज के लिए कमरे दिए जाने की माँग का विरोध किया है। कैथोलिक कॉन्ग्रेस ने कहा, ”चर्च संचालित कॉलेज और स्कूलों में नमाज़ पढ़ने के लिए कोई कमरा या जगह नहीं दी जाएगी। हालाँकि, छात्रों को नमाज़ के लिए नज़दीकी मस्जिदों में जाने की अनुमति होगी।”

उसने आगे कहा, “कुछ जगहों से यह माँग उठ रही है कि मस्जिदों के पास में स्थित शिक्षण संस्थानों में महिलाओं के लिए नमाज़ पढ़ने के लिए जगह बनाई जानी चाहिए। हालाँकि, इस बात को समझने की जरूरत है कि केवल मस्जिद में लड़कियों को नमाज के लिए जगह नहीं मिल रही, इस आधार पर उन्हें चर्च में जगह नहीं दी जा सकती।”  

कैथोलिक कॉन्ग्रेस ने इस मामले में मौलवियों से अपील की कि वह रुढ़िवादी ना बनें और मस्जिदों में महिलाओं के लिए जगह बनाएँ। कैथोलिक कॉन्ग्रेस ने कहा कि चर्च संचालित संस्थानों के संविधान में है कि यहाँ ईसाई धार्मिक भावनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा और संरक्षित किया जाएगा। ऐसे में किसी को भी इसे डिस्टर्ब नहीं करने दिया जा सकता।

भाजपा ने पूछा- क्या मुस्लिम देते हैं जगह

नमाज के लिए कमरा माँगने को लेकर भाजपा ने विरोध जताया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के सुरेन्द्रन ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “केरल में हिंदू और ईसाई संस्थानों में जानबूझकर अराजकता फैलाने की कोशिशें हो रही हैं जिन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रिंसिपल के अनुशासन लागू करने पर धमकियाँ देना कॉन्ग्रेस और वामपंथी संगठनों का असली चेहरा दिखाता है।”

आगे उन्होंने इस माँग को लेकर प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा, ” क्या कोई मुस्लिम संस्थान गैर-मुस्लिम प्रार्थना की अनुमति देता है? सरकार को मुवत्तुपुझा मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।भाजपा इस तरह के उकसावे के खिलाफ़ है और संस्थानों को हर संभव सहायता भी देगी।”

गौरतलब है कि निर्मला कॉलेज 1953 में स्थापित किया गया था। यह एक ईसाई अल्संपख्यक संस्थान है। इसका संचालन केरल की सीरियन कैथोलिक चर्च करता है। इस संस्थान के भीतर 3000 छात्र पढ़ते हैं और यहाँ एक चर्च भी है। मुस्लिम छात्रों की नमाज पढ़ने की जगह के माँग के बाद यहाँ अब विवाद खड़ा हो गया है।

रोहिंग्या-बांग्लादेशी मुस्लिमों का सर्टिफिकेट बनाता जीशान, विजय यादव करता मदद: 20 हजार की आबादी वाले गाँव में 19184 फर्जी दस्तावेज, ATS की जाँच में चौंकाने वाले खुलासे

उत्तर प्रदेश के कई जिले रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिमों के पनाहगाह बन गए हैं। कानपुर के बाद उन्नाव एवं रायबरेली में रोहिंग्या मुस्लिमों को बसाने वाले तंत्र के खुलासे के बाद शासन-प्रशासन और खुफिया एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। करीब 20,000 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने के मामले में गिरफ्तार जीशान और ग्राम विकास अधिकारी विकास यादव ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

यूपी ATS की जाँच में अभी तक पता चला है कि पकड़ा गया सीएससी संचालक जीशान बस मोहरा है। इस पूरे खेल का असली सूत्रधार कोई और है। सूत्रधार के इशारे पर ही ये सारा खेल हुआ है। भाजपा के स्थानीय विधायक अशोक कुमार ने इसे आतंकी साजिश बताया है। वहीं, हिंदू संगठन भी इन मामलों में आतंकियों के शामिल होने का आरोप लगाकर अपना रोष बताया है।

यूपी के अलग-अलग जिलों में फैला है नेटवर्क

दरअसल, 18 जुलाई को यूपी एटीएस ने जनसेवा केंद्र संचालक जीशान खान, सुहैल, रियाज खान और VDO विजय यादव से अलग-अलग पूछताछ की थी। इस दौरान ATS को एक बड़े नेटवर्क की जानकारी मिली। यह नेटवर्क बांग्लादेशियों और रोहिंग्या मुस्लिमों को जगह-जगह बसाने में लगा हुआ है। कानपुर, उन्नाव, प्रयागराज, लखनऊ में भी इस तरह का खेल चल रहा है।

एटीएस इस मामले में बिहार, असम, कर्नाटक, केरल, मुंबई तक के तार जोड़ने में लगी हुई है। पुलिस को पता चला है कि इन लोगों को 20 हजार से अधिक बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाकर अलग-अलग जगहों पर बसाया है। रायबरेली का सलोन इलाका शुरू से ही संवेदनशील रहा है और यहाँ एक से बढ़कर एक आतंकी हुए हैं।

उधर, सलोन के प्रखंड विकास अधिकारी ने कहा है कि फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाले ग्राम विकास अधिकारी विजय यादव के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है। इसके अलावा, यादव को निलंबित करके उनके खिलाफ विभागीय जाँच शुरू की गई है। कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है। विजय यादव की आईडी से दो साल में 20 हजार से अधिक जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं।

कस्बे की जनसंख्या 20 हजार, 19 हजार से अधिक फर्जी प्रमाण पत्र बनाए

रायबरेली के पलाही गाँव की कुल जनसंख्या 4500 है और यहाँ सिर्फ एक मुस्लिम परिवार है, लेकिन इस गाँव के पते पर 819 मुस्लिमों के जन्म प्रमाण पत्र बना दिए गए। इसी तरह एक अन्य गाँव नूरुद्दीनपुर की जनसंख्या 8,000 है लेकिन यहाँ के पते पर 12,000 से अधिक मुस्लिमों के जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए हैं। ये लोग कुछ लोगों के हिंदू नाम से प्रमाण पत्र देते थे, ताकि शंका ना हो।

वहीं, 20 हजार की आबादी वाले सलोन कस्बे में 19,184 जन्म प्रमाण पत्र बना दिए गए।स्थानीय जन्म प्रमाण पत्र के लिए 3 से 5 हजार और बिहार, बंगाल एवं झारखंड आदि जगहों के लिए 5 से 10 हजार रुपए तक लिए जाते थे। बांग्लादेशी-रोहिंग्या मुस्लिमों से मिले इन पैसों का बँटवारा रोज शाम को विजय यादव, जीशान, रियाज और सुहैल के बीच होता था।

स्थानीय लोगों रायबरेली ये बानगी हैं। इनका नेटवर्क प्रयागराज, कानपुर, उन्नाव, बाराबंकी, अमेठी, लखनऊ सहित तमाम जिलों में फैला हुआ है। माना जा रहा है कि दूसरे राज्यों में भी इनका नेटवर्क होगा। दरअसल, रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों को बसाने के लिए एक गैंग रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिमों के नामों की सूची देता था और जीशान उनका जन्म प्रमाण पत्र बनाकर देता था।

अभी दो दिन पहले लखनऊ से नजमा नाम की बांग्लादेशी महिला को दो अन्य महिलाओं के साथ गिरफ्तार किया था। उसके घर से आधार कार्ड मिला है, जिसमें उसे मध्य प्रदेश की इंदौर का पता है। वहीं, उसके साथ की एक महिला आखी ने अपना नाम मधु सिंह रखा था। उसका भी पता इंदौर का है। रिपोर्ट के मुताबिक, असम में भी बांग्लादेशियों का प्रमाण पत्र बनाया जाता है।

PFI आतंकी का भी जीशान ने बनाया था प्रमाण पत्र

जीशान ने प्रतिबंधित इस्लामी आतंकी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के एक सदस्य का भी प्रमाण पत्र बनाया था। PFI के एक आतंकी को सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार किया था। उसके पास से दस्तावेज बरामद किए गए थे। उसके सभी दस्तावेज रायबरेली के पलाही गाँव के पते पर ही बने थे। इन प्रमाण पत्रों को जीशान ने अपने जन सुविधा केंद्र से जारी किए गए थे।

गिरफ्तार PFI के आतंकी ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने यह बात कबूल की थी कि सिर्फ केरल ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और गुजरात के उसके कई साथियों के जन्म प्रमाण पत्र भी यहीं से बनवाए गए थे। अगर यहाँ की विस्तृत जाँच की जाए तो और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। वैसे भी सलोन आतंकियों से संबंधित रहा है।

आतंकियों और दाऊद के गैंग से कनेक्शन

रायबरेली 90 के दशक में लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन और दाऊद इब्राहिम के गैंग के लिए सुरक्षित पनाहगाह रहा है। साल 1992 में आतंकी अब्दुल करीम टुंडा रायबरेली आया था। इसी तरह हिजबुल मुजाहिद्दीन का एरिया कमांडर बिलाल अहमद भी रायबरेली के खिन्नी तल्ला में शरण लिया था।

इसी तरह सलोन में लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर इमरान अंसारी सक्रिय रहा। साल 2006 में ATS ने उसे पकड़ा था। बछरावाँ दाऊद गैंग का सेंटर रहा है। इसके अलावा भी समय-समय पर अन्य देश विरोधी एवं समाज विरोधी तत्व यहाँ से सक्रिय रहा। यहाँ आतंकियों से लेकर इन माफियाओं तक को किसने पनाह दिया, इसका खुलासा आज तक नहीं हो पाया है।

भाजपा विधायक ने बताया ISI का हाथ

सलोन के भाजपा विधायक अशोक कुमार ने कहा कि फर्जी जन्म प्रमाण पत्र पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों को बसाने के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को भारत में बसाने और उन्हें नागरिकता दिलाने के लि फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए जा रहे थे।

उन्होंने कहा कि इन सबके पीछे विदेशी ताकतों का हाथ और उनकी फंडिंग है। उन्होंने कहा कि फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट के जरिए वोटर आईडी समेत अन्य दस्तावेज तैयार कराए गए और इसके जरिए फर्जी लोगों ने रायबरेली-अमेठी जिले के लोकसभा चुनाव में वोटिंग भी की है। उन्होंने इस पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

जानवरों को खाना देने पर मुस्लिम भीड़ करती है प्रताड़ित, दरवाजे पर फेंकती है मीट: हिंदू महिला पत्रकार की सोशल मीडिया पर Video, बोलीं- कभी न लें मुस्लिम इलाके में घर

सोशल मीडिया पर एक महिला पत्रकार की वीडियो सामने आई है। पत्रकार का नाम आम्रपाली शर्मा है। वीडियो में आम्रपाली आरोप लगाती दिख रही हैं कि उनकी हिंदू पहचान की वजह से और पशु प्रेमी होने के कारण उन्हें महाराष्ट्र के मलाड में लोकल मुस्लिम परेशान करते हैं और उनके दरवाजे पर मीट फेंकते हैं।

वीडियो में उनके कहे अनुसार, वो इसकी शिकायत करने पुलिस के पास भी जाती हैं लेकिन कोई उनकी सुनवाई नहीं करता। स्थानीय मुस्लिम लगातार बस उन्हें परेशान करते रहते हैं।आम्रपाली कहती हैं कि वो सेकुलर हिंदू हैं लेकिन आज उनके साथ जो कुछ भी हो रहा है वो सिर्फ इसलिए हो रहा है क्योंकि वो हिंदू ब्राह्मण महिला हैं और जानवरों से प्यार करती हैं।

उनकी शिकायत है गार्ड और अन्य लोगों की मदद से उनके दरवाजे पर माँस फेंका गया। साथ ही साथ वो पुलिस के पास भी जब शिकायत कराने गईं तो किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। किसी ने ये तक चेक नहीं किया कि उनके घर के बाहर जो चीज फेंकी गई वो बीफ था या क्या था।

आम्रपाली वीडियो में कहती हैं कि पता नहीं उन लोगों से (जो मुस्लिम उन्हें परेशान कर रहे हैं) उनका क्या कनेक्शन है जो सिर्फ उन्हें टारगेट ही किया जा रहा है और मजबूर किया जा रहा है कि वो सुसाइड कर लें या मलाड से भाग जाएँ ताकि मुस्लिम लोग उनके फ्लैट पर कब्जा कर पाएँ।

उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर ये भी लिखा है कि कभी भी हिंदू महिला होकर मुंबई, मलाड और मुंब्रा जैसे मुस्लिम बहुल इलाके में घर नहीं लेना चाहिए वरना हाल ऐसा ही होता है। अपने ट्वीट में उन्होंने कुछ वीडियो साझा की है। इन वीडियो में दिख रहा है कि कुछ लोकल लोग उन्हें सड़क पर जानवरों को खाना देने से मना कर रहे हैं। आम्रपाली उन्हें कहती हैं कि ये नियम बिलडिंग में लागू होते हैं पब्लिक प्लेस पर नहीं।

बता दें कि आम्रपाली शर्मा के एक्स अकॉउंट से जानकारी मिलती है कि उन्होंने आजतक, आईबीएन7 जैसे चैनलों में अपनी सेवा दी है। आज वो लाचार होकर अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालती है कि पता नहीं कि क्यों सिर्फ जानवरों को खाना देने के नाम पर उनके साथ ये सब हो रहा है।

यूपी के बरेली में ईसाई धर्मांतरण करवाने वाले तीन गिरफ्तार, ‘नीति शास्त्र’ की पुस्तक बाँट ईसाइयत कबूल करवाने का आरोप: बच्चे-महिलाएँ बनते थे निशाना

उत्तर प्रदेश के बरेली में पुलिस ने तीन लोगों को हिन्दू बच्चों का प्रलोभन से ईसाई धर्मांतरण करवाने के मामले में गिरफ्तार किया है। तीनों एक किराए के घर में बच्चों को बहका कर उनका धर्मांतरण करवाते थे। पुलिस को इस मामले में बाहरी फंडिंग का भी शक है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बरेली के इज्जतनगर इलाके में यह काम चल रहा था। इज्जतनगर के ही निवासी गुलशन बहादुर ने जब यहाँ जाकर सच्चाई जाननी चाहिए तो मिशनरी वालों ने उनका भी धर्मांतरण करवाने का प्रयास किया। गुलशन बहादुर ने बताया कि वह रविवार (28 जुलाई, 2024) को इस इलाके में अपने किसी काम से पहुँचे थे।

यहाँ पर रहने वालों ने उन्हें सूचना दी कि कुछ लोग एक घर में कुछ बच्चों को लेकर गए हैं और उनको ईसाई धर्मांतरण के लिए प्रलोभन दे रहे हैं। वह स्वयं जब अंदर गए तो उन्होंने देखा कि यहाँ तीन लोग मौजूद थे और उन्होंने काफी बच्चों को यहाँ इकट्ठा कर रखा था। तीनों ने बताया कि वह बच्चों को ईसाई धर्म में दीक्षित कर रहे हैं।

उन्होंने गुलशन बहादुर को एक किताब पकड़ाई जिसका नाम नीति शास्त्र था लेकिन उसके अंदर ईसाई धर्म से जुड़ी बातें लिखी हुई थीं। उन्होंने गुलशन बहादुर को भी इसमें से कुछ पढ़वाया और उनका भी धर्मांतरण करवाने का प्रयास किया। गुलशन ने इसके बाद पुलिस बुलवा ली।

जब पुलिस यहाँ पहुँची तो उसे काफी संख्या में बच्चे मिले। पुलिस ने यहाँ से तीन लोगों को गिरफ्तार किया जिनके नाम प्रेम जायल, विनोद उपाध्याय और नितिन हैं। पुलिस ने यहाँ से बरामद बच्चों को उनके घर पहुँचा दिया और तीनों को थाने ले आई।

इन तीनों अपर आरोप है कि कि यह तीनों पहले भी ईसाई धर्मांतरण में लिप्त रहे हैं। यह अपनी सभाओं में बच्चों को ही मुख्यतः बुलाते थे और उन्हें खाने पीने का सामान देकर धर्मांतरण करवाते थे। इनमें से प्रेम जायल कुछ साल पहले ही धर्मांतरित हुआ था। इसके बाद वह बाक़ी लोगों को निशाना बनाने लगा।

बताया गया है कि वह ऐसी सभाओं में मुख्यतः बच्चों और महिलाओं को बुलाता और उन्हें ईसाई धर्म क़ुबूल करवाता। इसके बाद उन्हें हर रविवार को प्रार्थना सभा में आने को कहता। पुलिस ने अब उसके विरुद्ध धर्मान्तरण समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जाँच चालू कर दी है। हिन्दू संगठनों ने भी इस मामले में कार्रवाई की माँग की है।