Home Blog Page 764

यशश्री की हत्या बदला या साजिश, जानिए क्या कहती है FIR… दाऊद शेख गिरफ्तार: गुप्तांग पर चाकू से किया था वार, पत्थर से कुचल डाला था शव

महाराष्ट्र पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मंलगवार (30 जुलाई, 2024) को मुंबई में हुए यशश्री हत्याकांड में आरोपित दाऊद शेख को गिरफ्तार कर लिया। दाऊद की गिरफ्तारी कर्नाटक के गुलबर्ग से हुई है। 26 जुलाई को यशश्री बेरहमी से की हत्या के बाद से दाऊद फरार चल रहा था। उसे पकड़ने के लिए पुलिस ने 8 टीमें बनाईं थीं। पुलिस ने आगे दाऊद ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। दाऊद शेख ने बताया कि उसे आशंका थी कि यशश्री उसे ठुकरा कर किसी और लड़के के साथ रिलेशन में आ गई है।

बताते चलने कि साल 2019 में जब पीड़िता नाबालिग थी तब उसके पिता ने दाऊद शेख के खिलाफ FIR दर्ज करवाई थी। FIR में दाऊद शेख पर पीड़िता को छेड़ने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया गया था। यह केस IPC की धारा 354 और 506 के साथ पॉक्सो एक्ट में दर्ज हुआ था। तब पुलिस ने दाऊद शेख को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया था। जेल से निकल कर दाऊद शेख कर्नाटक चला गया। यहाँ से वो साजिशन यशश्री के सम्पर्क में बना रहा। फिर वह बदला लेने के लिए मुंबई लौट आया।

इस घटना का CCTV फुटेज भी स्थानीय मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि 25 जुलाई को यशश्री नवी मुंबई के उरण इलाके की सड़क से गुजर रही है। इसी फुटेज में 10 मिनट बाद दाऊद शेख भी उसी रास्ते से जाता दिख रहा है। माना जा रहा है कि आरोपित पूरी साजिश के साथ तैयारी कर के यशश्री का पीछा कर रहा था। बाद में यशश्री का शव क्षत-विक्षत हालत में एक पेट्रोल पम्प के पास मिला था। पीड़िता के गुप्तांगों पर भी चाकुओं के वार किए गए थे। पहचान छिपाने के लिए पीड़िता का सिर भी पत्थर से कुचल दिया गया था।

ऑपइंडिया के पास 27 जुलाई को दर्ज इस घटना की FIR कॉपी मौजूद है। यह FIR अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दर्ज हुई है। FIR में की गई शिकायत के मुताबिक पीड़िता बेलापुर के एक बिजनेस सपोर्ट सॉलूशन में जॉब करती थी। 25 जुलाई को उसकी छुट्टी थी और वो अपनी सहेली के घर कुछ काम बता कर घर से बाहर निकली थी। इसी के बाद वो लापता हो गई थी। शाम 7:45 तक जब पीड़िता घर लौट कर नहीं आई तो इसी दिन उसके परिजनों ने पुलिस में गुमशुदगी दर्ज करवाई।

FIR Copy

अगले दिन पीड़िता के परिजनों को पुलिस की कॉल आई। पुलिस ने कोटनाका के पास एक अज्ञात लड़की का क्षत-विक्षत हालात में शव पड़ा होने की जानकारी दी और पहचान के लिए बुलाया। पीड़िता के कपड़ों और अन्य सामानों ने उसकी पहचान की गई। प्राइवेट पार्ट सहित शरीर के कई अंगों पर चाकू घोंपे गए थे। पेट और सीने पर भी चोट के निशान थे। कमर और पीठ में भी 3 जगह चाकू घोंपी गई थी। लड़की को इंदिरा नगर के एक अस्पताल ले जाया गया था जहाँ उसकी मौत की पुष्टि डॉक्टरों ने की थी।

TV9 के मुताबिक, पीड़िता की हड्डियाँ कई जगह से टूट गईं थीं। बेटी की हत्या की पुष्टि होने के बाद उसके पिता ने दाऊद शेख पर शक जताया था। हत्या की वजह साल 2019 में उसके ऊपर दर्ज FIR का बदला बताया गया। साल 2019 की इस FIR में पीड़िता के पिता ने बताया था कि दाऊद उनकी बेटी का स्कूल के रास्ते में पीछा करते हुए क्लास तक जाया करता था। वह लड़की पर जबरन मिलने का दबाव बनाता था। कई बार तो उसने पीड़िता से जबरन शारीरिक संबंध बनाने की भी कोशिश की।

साल 2019 में दर्ज FIR

जब पीड़िता इन हरकतों का विरोध करती थी तो उसके आरोपित जान से मारने की धमकियाँ देता था। ऑपइंडिया द्वारा जुटाई गई जानकारी के मुताबिक 2019 में दर्ज FIR के बाद दाऊद शेख 6 महीने तक जेल में रहा था। इसके बाद उसकी जमानत हो गई थी। कॉल डिटेल से भी यह साबित हुआ है कि जेल से निकलने के बाद दाऊद पीड़िता से लगातार सम्पर्क में बना था। ‘फ्री प्रेस जर्नल’ की रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से दावा किया गया है कि पीड़िता के शरीर पर दाऊद शेख के नाम का टैटू छपा था।

ओडिशा सरकार ने IPS को किया सस्पेंड, महिला इंस्पेक्टर से जबरन करना चाहता था शादी: एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर में घर में घुस मचाया उत्पात, पति को पीटा

ओडिशा की भाजपा सरकार ने 30 जुलाई 2024 को भारतीय पुलिस सेवा से एक आईपीएस अधिकारी को सस्पेंड कर दिया। अधिकारी का नाम पंडित राजेश उत्तम राव है। उनके खिलाफ ‘गंभीर कदाचार’ के आरोप में कार्रवाई की गई है। वह ओडिशा में अग्निशमन सेवा एवं होमगार्ड विभाग में पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) के पद पर कार्य कर चुके हैं।

आईपीएस के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई उस घटना के तीन दिन बाद सामने आई जब उन्होंने एक्ट्रा मैरिटल अफेयर के चलते एक महिला के घर में उसके साथ मारपीट की और उसके पति को भी मारा। घटना 27 जुलाई को हुई थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, आईपीएस अधिकारी नशे की हालत में महिला के घर में जबरन घुसे, फिर फर्नीचर में तोड़फोड़ की और उससे शादी करने के लिए उसे बाहर खींचने का प्रयास किया। इस दौरान महिला के पति के साथ भी मारपीट की गई थी।

महिला खुद भुवनेश्वर आर्थिक अपराध शाखा (Bhubaneswar Economic Offences Wing a) में पुलिस इंस्पेक्टर है। मारपीट की घटना के बाद बताया गया कि उसके और पंडित राजेश उत्तमराव के बीच 5 साल से संबंध चल रहा था। ये सब तब हुआ जब महिला के साथ आईपीएस अधिकारी खुद भी शादीशुदा हैं और दो बच्चे भी हैं।

मामले की शिकायत मिलने पर पुलिस ने आईपीएस अधिकारी को हिरासत में ले लिया और ओडिशा सरकार ने पुलिस महानिदेशक से ममाले पर गोपनीय रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। जब सरकार को यह रिपोर्ट मिली तो उन्होंने पंडित राजेश उत्तमराव को आईपीएस के सदस्य के रूप में गंभीर कदाचार के मामले में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और उन्हें निर्देश दिया कि वो बिना अनुमति कटक नहीं छोड़ सकते।

जमात-ए-इस्लामी: गुलाम भारत में बना, पाकिस्तान में खिला, बांग्लादेश में फैला रहा तबाही – 71 में पाकिस्तानी सेना के साथ मिल बंगालियों पर ढाया था कहर

बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार में शामिल पार्टियों ने कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन जमात-ए-इस्लामी पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। हसीना सरकार में शामिल 14 पार्टियों ने इस कदम का समर्थन किया है। शेख हसीना सरकार ने आरोप लगाया है कि जमात ने बांग्लादेश में हिंसा भड़काई और देश को अस्थिर करने का प्रयास किया।

शेख हसीना सरकार में शामिल 14 पार्टियों ने मंगलवार (29 जुलाई, 2024) को एकमत से यह निर्णय लिया कि जमात को बांग्लादेश के भीतर प्रतिबंधित कर दिया जाए। गठबंधन ने कहा कि जमात के छात्र संगठन जमात शिबिर ने हाल ही में आतंक फैलाया है और पुलिस वालों को मार कर तक टांग दिया।

क्यों लग रहा जमात पर प्रतिबंध?

शेख हसीना सरकार ने कहा है कि वह 14 पार्टियों के गठबंधन पर 2 दिन के भीतर आदेश जारी कर देगी और फिर जमात के नेता ना ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पाएँगे और ना ही कोई और गतिविधियाँ चला पाएँगे। प्रधानमंत्री शेख हसीना ने यह निर्णय लेने के लिए बुलाई गई बैठक में कहा कि जमात के लोग आतंकी हैं और उन्होंने देश के विकास को रोकने के लिए पंजे चलाए हैं।

प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि बांग्लादेश में जो घटनाएँ हो रही हैं, वह कोई राजनीतिक मामला नहीं हैं, बल्कि पूरी तरह से आतंकियों का काम है, शेख हसीना ने कहा कि जमातियों का उद्देश्य बांग्लादेश को नष्ट करना है। शेख हसीना के यह सारे बयान बांग्लादेश में हाल में हुई हिंसा के संबंध में थे।

दरअसल, 1 जुलाई से 20 जुलाई के बीच बांग्लादेश में भारी हिंसा हुई। कुछ छात्र आरक्षण के विरोध में प्रदर्शन करने उतरे और इसके बाद इस प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। हसीना सरकार ने आरोप लगाया कि छात्रों के नाम के बहाने जमात के लोग देश में तोड़फोड़ और हिंसा करके उनकी सरकार अस्थिर कर रहे हैं।

इस प्रदर्शन के कारण देश में 140 से अधिक लोगों की मौत हुई। सुरक्षाबलों के भी कई जवान मारे गए। कई ऐसी वीडियो भी आए जिसमें दंगाई सुरक्षाबलों को घेर कर मार रहे हैं। हसीना सरकार ने इन सबमें जमात और विपक्षी पार्टी BNP की भूमिका बताई। जब दंगे थमे और हसीना सरकार ने जमात पर प्रतिबंध का यह कदम उठाया।

जमात-ए-इस्लामी है क्या, क्या करता है?

जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश का एक इस्लामी कट्टरपंथी संगठन है। इसकी जड़ें अविभाजित भारत में थीं। इसकी स्थापना 1941 में भारत में मौलाना मौदूदी ने की थी। भारत के विभाजन के बाद यह पाकिस्तान का जमात-ए -इस्लामी हो गया। यह संगठन बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में पाकिस्तान के साथ था और इसने पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर बंगालियों पर काफी अत्याचार किया था।

जमात के अधिकांश नेताओं ने इसके बाद बांग्लादेश छोड़ दिया था और सऊदी अरब या पाकिस्तान भाग गए थे। हालाँकि, जब 1975 में बांग्लादेश में मुजीबुर रहमान की हत्या कर सैन्य शासन लगा दिया गया तो जमात यहाँ फिर से ज़िंदा हो गई और इस बार बांग्लादेश में एक राजनीतिक शक्ति के रूप में लौटी।

जमात का लक्ष्य मुस्लिमों को ऐसे कट्टरपंथी इस्लाम की तरफ लाना है। यह सूफीवाद के विरोध में खड़ा हुआ संगठन है। बांग्लादेश, भारत और पाकिस्तान सभी जगह यह संगठन इस्लामी कट्टरपंथ का समर्थक है। यह बांग्लादेश को भी कट्टर इस्लाम की तरफ ले जाना चाहता है।

शेख हसीना उनकी इस राह में एक बाधा हैं क्योंकि वह लगातार कट्टरपंथ को कुचलने में आगे रही हैं और साथ ही अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर भी कदम बढ़ाती रही हैं। जमात बांग्लादेश की विपक्षी पार्टी BNP के साथ मिलकर शेख हसीना के खिलाफ चुनाव भी लड़ती रही है।

जमात का राजनीतिक पार्टी के तौर पर रजिस्ट्रेशन बांग्लादेश के हाई कोर्ट ने 2013 में रद्द कर दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि जमात राजनीतिक पार्टी के तौर पर नहीं मानी जा सकती, क्योंकि इसका विश्वास लोकतांत्रिक प्रक्रिया से अधिक अल्लाह में है। जमात इसके बाद राजनीतिक तौर पर सक्रिय नहीं रह गई थी लेकिन वह इस्लाम के लिए काम कर रही थी। अब हसीना सरकार ने इसे पूरी तरह से प्रतिबंधित करने का निर्णय ले लिया है।

भारत में इसका क्या प्रभाव

शेख हसीना के इस फैसले का भारत पर सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा लेकिन यह नीति भारत के पक्ष वाली है। दरअसल, जमात और BNP लगातार भारत विरोधी रवैया बांग्लादेश के भीतर अपनाती आई हैं। उन्होंने बीते दिनों बांग्लादेश में भारत विरोधी अभियान चलाए हैं। वहीं दूसरी तरफ शेख हसीना भारत से अच्छे रिश्तों की पक्षधर हैं।

जमात और BNP वाली सरकार के दौरान बांग्लादेश में भारत विरोधी आतंकी संगठन भी खड़े हो गए थे। हरकत उल जिहाद इस्लामी बांग्लादेश से मदद लेकर भारत में आतंक फैलाना चाह रहा था। हसीना सरकार ने ऐसे तत्वों पर नियन्त्रण किया है। भारत भी लगातार बांग्लादेश के भीतर शेख हसीना का समर्थन करता आया है।

‘यहाँ किसी हाल में नहीं लगने देंगे शाखा’: RSS के कार्यकर्ताओं पर पत्थरबाजी, माँ-बहन की गाली, भगवा झंडे पर कूड़ा-करकट फेंक भाग खड़ी हुई मुस्लिम भीड़

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ‘राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ’ (RSS) की शाखा पर पत्थरबाजी की घटना सामने आई है। यहाँ एक मंदिर में लगने वाली शाखा पर शाकिब ने अपने 8-10 साथियों सहित पथराव किया है। पत्थरबाजी के बाद संघ के कार्यकर्ताओं को माँ-बहन की गालियों के साथ दोबारा न आने की धमकी भी दी गई है। शाकिब को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया गया है। घटना के पीछे मास्टरमाइंड UP पुलिस का रिटायर्ड सब-इंस्पेक्टर जमाल बताया जा रहा है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। घटना शनिवार (27 जुलाई, 2024) की है।

घटना लखनऊ के पूर्वी क्षेत्र में आने वाले चिनहट थाना क्षेत्र की है। यहाँ 28 जुलाई (रविवार) को RSS के कार्यकर्ताओं युवराज, सोमनाथ और धनराज ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में इन्होने बताया है कि चिनहट इलाके में पड़ने वाले छोहरिया माता मंदिर में हर दिन शाम 5:30 से 6:00 बजे तक संघ की शाखा लगती है। शनिवार को भी शाखा में संघ के सदस्य भगवा झंडा लगा कर आपस में बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान चिनहट का ही रहने वाला शाकिब अपने 8-10 मुस्लिम साथियों के साथ वहाँ पहुँच गया।

आरोप है कि शाकिब और उसके साथी संघ के कार्यकर्ताओं को माँ-बहन की गालियाँ देने लगे। इसके बाद इन सभी आरोपितों ने मिल कर शाखा में मौजूद लोगों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। पथराव के बाद आरोपितों ने धमकी दी कि वो छोहरिया माता मंदिर में किसी भी हाल में संघ की शाखा नहीं लगने देंगे। मामले की सूचना पुलिस को दी गई तो सभी हमलावर घटनास्थल से फरार हो गए। पीड़ितों ने हमलावरों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने यह FIR भारतीय न्याय संहिता की धारा 191 (2), 352 और 232 के तहत दर्ज की है।

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। मुख्य आरोपित शाकिब को गिरफ्तार कर लिया गया है। मौके से सबूत जुटाए जा रहे हैं। बाकी हमलावरों की पहचान के साथ उनकी धरपकड़ के लिए दबिश दी जा रही है। इस मामले में हिन्दू संगठनों ने नाराजगी जताई है। छोहरिया माता मंदिर के महंत लल्ला बाबा ने मीडिया से बात करते हुए हमले का मास्टरमाइंड जमाल को बताया है। जमाल उत्तर प्रदेश पुलिस का रिटयर्ड सब इंस्पेक्टर है। महंत के मुताबिक, जब से जमाल उस इलाके में आ कर बसा है तब से ऐसी घटनाएँ लगातार हो रहीं हैं।

वहीं शिकायतकर्ताओं ने बताया है कि जिस स्थान पर पत्थरबाजी की गई वहाँ पिछले 15 वर्षों से संघ की शाखा लग रही है। हर दिन 10 से 20 लोग शाखा में शामिल होते हैं। आरोप यह भी है कि हमलावरों ने पथराव के साथ भगवा झंडे पर कूड़ा-करकट भी फेंका था। हमलावर RSS की शाखा लगने से नाराज हैं। उन्होंने इसे किसी भी हाल में न लगने देने की धमकी दी है। ACP अनिद्य विक्रम सिंह ने मीडिया से बताया कि 1 नामजद सहित 8 से 10 अज्ञात हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। उन्होंने फरार आरोपितों को जल्द पकड़ लेने का भरोसा दिया।

आज मनु भाकर के पास 2 ओलंपिक मेडल, कभी एक गलती पर देने पड़ते थे ₹36 हजार फाइन: जानिए कैसे श्रीकृष्ण की सीख और कड़ी ट्रेनिंग से शूटिंग स्टार ने रचा इतिहास

पेरिस ओलंपिक में दो कास्य पदक जीतकर मनु भाकर ने अपना नाम इतिहास में लिख लिया है। वह भारत की पहली ऐसी महिला हैं जिन्होंने ओलंपिक में एक के बाद एक करके दो मेडलों को अपने नाम किया है। पहला 10 मीटर एयर पिस्टल सिंगल्स में और दूसरा 10 मीटर मिक्स्ड शूटिंग में। उनकी इस जीत से न केवल उनके परिजन बल्कि पूरा राष्ट्र उत्साहित है। आज हर कोई मनु भाकर के बारे में जानना और पढ़ना जानता है। ऐसे में आइए आज आपको मनु भाकर से कुछ विशेष जानकारी दें।

मनु भाकर को आज हम लोग एक मशहूर भारतीय खेल निशानेबाज खिलाड़ी के तौर पर जानते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि मनु का संघर्ष बहुत बड़ा है और उसी संघर्ष का नतीजा है कि आज उन्होंने ओलंपिक्स में इतिहास बनाया। हरियाणा के झज्जर में 18 फरवरी 2002 को उनका जन्म हुआ था। वहीं शिक्षा की बात करें यूनिवर्सल पब्लिक सेकेंड्री स्कूल से पढ़ी भाकर ने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से राजनीति विज्ञान में ऑनर्स किया, फिर पंजाब यूनिवर्सिटी से लोक प्रशासन में पढ़ाई शुरू कर दी।

बताया जाता है कि शुरुआत से ही मनु भाकर को टेनिस, स्केटिंग, बॉक्सिंग का शौक था। इसके अलावा वीरेंद्र सहवाग की झज्जर क्रिकेट अकादमी से उन्होंने क्रिकेट भी सीखा था। लेकिन स्कूल में जब खेल चुनने की बारी आई तो उन्होंने शूटिंग का चुनाव किया। 14 साल की उम्र में उन्होंने निशानेबाजी की शुरुआत की। मात्र 2 साल में वो इतनी निपुण हो गईं कि 16 साल की उम्र तक उन्होंने कॉमनवेल्थ में स्वर्ण पदक जीत लिया था। बाद में 2019 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ एथलीट पुरस्कार मिला और 2020 में उनके हिस्से अर्जुन पुरस्कार आया और इस तरह पुरस्करों की गिनती बढ़ती गई।

जाहिर है एक प्रतिस्पर्धा में जीत हासिल करने के बाद मनु को बहुत लोगों ने सपोर्ट किया होगा, लेकिन क्या ऐसे हाल उनकी पहचान बनने से पहले भी थे? नहीं। एक समय था जब मनु पर अपनी पिस्टल तक नहीं थी, वो अपने सर की पिस्टल से प्रैक्टिस करती थीं। उनके पिता रामकिशन भाकर उन्हें लाइसेंसी पिस्टल दिलाने के लिए खूब कोशिश करते थे। 45 किलोमीटर दूर झज्जर जाते थे, लेकिन अफसर उनकी एक नहीं सुनते थे। धीरे-धीरे एशियन य़ूथ गेम्स नजदीक आए तो मनु को पिस्टल की जरूरत और महसूस होने लगी। बार-बार अनुरोध पर पुलिस और मजिस्ट्रेट तो मान गए मगर एडीसी अमुनति देने को तैयार नहीं थे। अंत में अपनी बेटी के सपनों के लिए रामकिशन भाकर ने सीएमओ और खेल मंत्री को ट्वीट किया और मनु को गन का लाइसेंस मिला।

कामयाबी की ऊँचाई पर चढ़ते हुए मनु भाकर के जीवन में कुछ वक्त ऐसे आए जब मानसिक तनाव भी हुआ। साल 2020 के टोक्यो ओलंपिक में तकनीकी खराबी के कारण वो मेडल जीतने से चूक गई थीं, उस समय मनु इतनी निराश हुईं थीं कि उन्होंने खेल को अलविदा कह पढ़ाई में या अन्य सेवाओं में अपना करियर बनाने का मन बना लिया था। 2023 में कोच जसपाल राणा ने उनका मार्गदर्शन किया। उन्होंने मनु भाकर से कहा कि वो न सिर्फ देश, बल्कि दुनिया की सबसे बेहतरीन शूटरों में से एक हैं, ऐसे में उन्हें निर्णय लेना है कि वो अपने करियर को किस दिशा में ले जाना चाहती हैं। उनकी हौसला अफजाही के कारण ही मनु ने 10 मीटर एयर पिस्टल शूटिंग चुना और पदक जीत अपना अपने कोच का नाम रौशन किया।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने अपने कोच को लेकर कहा, “वो बहुत ज्यादा खास हैं। उनकी कड़ी ट्रेनिंग ने ही मेरे लिए निशानेबाजी को आसान किया। हमने तकनीकी एरिया पर बहुत काम किआ। उनकी कोचिंग देने का तरीका बहुत अलग था। वो मुझे अलग-अलग टारगेट देते थे। अगर मैं उन्हें पूरा करने में विफल होती थीं तो वो मुझसे पैसे दान करवाते थे। कभी 40 यूरो (3,628 रुपए) और अगले दिन 400 यूरो (करीबन 36 हजार रुपए)।”

इसी तरह इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मनु भाकर ने उन्हें चाय की केतली वाला क‍िस्‍सा सुनाया, जहाँ उन्होंने कहा, “केरल के चेरई में छुट्टियाX बिता रही थी, तभी चाय की केतली से प्रेरणा मिली। हुआ कुछ यूं क‍ि होटल में अकेली थी, तभी चाय की केतली उठाई, वह पानी से भरी हुई थी। उस वक्‍त मैं रेस्‍टलेस हो रही थी। मुझे वापसी की जरूरत थी। भरी हुई केतली उठाना निशानेबाजों के अभ्यास का हिस्सा है। यहीं से फ‍िर लगा क‍ि क्‍यों न एक बार फ‍िर ये कोश‍िश करते हैं। जंग जीतकर ही लौटेंगे। और फ‍िर अगली फ्लाइट दिल्ली की ली और रेंज पर वापसी की। आज जो कुछ भी मिला, उसमें उसका भी बहुत योगदान है।”

इसके अतिरिक्त मनु भाकर अपनी जीत के बाद भगवद गीता पढ़ने की बात भी बताई थी। उन्होंने कहा था कि खेल के आखिरी क्षणों में उन्होंने जीत-हार का नहीं सोचा था। उन्हें सिर्फ ये याद था कि श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा था कि सिर्फ कर्म करो। उन्होंने बस वही किया और जो जीत मिली उसकी खुशी वो बता भी नहीं सकतीं। उन्होंने कहा कि वो अपने कोच, अन्य भारतीय कोच, माता पिता, भारत के खेल प्रशासन सबकी शुक्रगुजार हैं। उनसे पहले निशानेबाजी में भारत को 4 बार ओलंपिक मेडल मिला था। 2004 में राज्यवर्धन राठौड़ ने रजत पदक दिलाया था, अभिनव बिंद्रा ने 2008 में स्वर्ण, गगन नारंग ने 2012 में ब्रॉन्ज, विजय कुमार ने रजत।

तालिब-ग़ालिब की प्रताड़ना से तंग नाबालिग लड़की ने की आत्महत्या, डॉ आसिफ ने हिन्दू महिला का 3 बार कराया गर्भपात: यशश्री को दाऊद ने मार डाला था, अब 2 नए मामले

नवी मुंबई में यशश्री शिंदे की निर्ममता से हुई हत्या का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि यहीं से 2 और नए मामले सामने आए हैं। रविवार (28 जुलाई, 2024) को महाराष्ट्र पुलिस ने मुंबई के पेनकरपाड़ा इलाके में मोहम्मद ग़ालिब शेख और तालिब के खिलाफ FIR दर्ज की है। इन दोनों पर एक 17 वर्षीया नाबालिग हिंदू लड़की के यौन शोषण और उसे धमकाने का आरोप है। दोनों आरोपितों की प्रताड़ना से पीड़िता ने आत्महत्या कर ली है।

वहीं दूसरे मामले में मीरा रोड के डॉक्टर आसिफ खान पर एक हिन्दू महिला से बहला-फुसला कर रेप करने और गर्भपात करवा कर फरार होने का केस दर्ज हुआ है।

तालिब और ग़ालिब की वजह से हिन्दू लड़की ने की आत्महत्या

पहला मामला मुंबई के पेनकरपाड़ा इलाके का है। यहाँ के कश्मीरा पुलिस स्टेशन में 28 जुलाई, 2024 को पुलिस ने 17 वर्षीया मृतका की माँ की शिकायत पर FIR दर्ज की है। शिकायत में लड़की की माँ ने बताया कि वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले के एक गाँव की रहने वाली है। उसके गाँव का ही रहने वाला ग़ालिब शेख अक्सर पीड़िता का पीछा किया करता था। पीड़िता का स्कूल आने-जाने के दौरान पीछा किया जाता था। इस दौरान ग़ालिब शेख लड़की पर खुद से निकाह करने का दबाव भी बनाता था।

लड़की की माँ के मुताबिक, आरोपित उनकी बेटी को यह कह कर भी धमकाता था कि अगर उसने कहीं और शादी की तो अंजाम बुरा होगा। बीच में एक बार आरोपित पीड़िता का अपहरण कर के मुंबई ले कर चला गया था। तब मामले की शिकायत आज़मगढ़ के निजामाबाद थाने में दर्ज हुई थी। काफी मशक्क्त के बाद पुलिस पीड़िता को बरामद कर पाई थी। आखिरकार मजबूरी में लड़की का स्कूल जाना छुड़वा दिया गया। इस बात से नाराज हो कर ग़ालिब शेख ने लड़की और उसके घर वालों को धमकी देना जारी रखा।

शिकायत में आगे बताया गया है कि 22 जुलाई, 2024 को एक बार फिर से लड़की अपने घर से लापता हो गई। लड़की के परिजन खोजबीन में जुटे ही थे कि उन्हें पता चला कि पीड़िता ने 25 जुलाई को आत्महत्या कर ली है। पीड़िता की माँ को बताया गया कि अंतिम बार उसकी बेटी को ग़ालिब शेख के साथ मुंबई में देखा गया था। मृतका की माँ का आरोप है कि ग़ालिब शेख ने तालिब शेख के साथ मुंबई के पेनकरपाड़ा में उनकी बेटी का यौन शोषण किया जिससे आहत हो कर उसने आत्महत्या कर ली।

पीड़िता ने फाँसी लगा कर जान दी है। बताया जा रहा है कि उसके शरीर पर चोट के भी निशान दिख रहे थे।

ग़ालिब और तालिब से प्रताड़ित हिन्दू लड़की द्वारा आत्महत्या

मृतका की माँ का यह भी आरोप है कि उनकी बेटी के साथ ग़ालिब शेख ने पहले भी कई बार यौन उत्पीड़न किया था। दुष्कर्म के बाद पीड़िता को मुँह बंद करने की धमकी दी जाती थी। लड़की की माँ की इस शिकायत पर पुलिस ने गालिब शेख और तालिब शेख पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 137(2), 87, 96, 64(1), 108 और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012 की धारा 4 के तहत FIR दर्ज की है। मामले में जाँच और जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

FIR Copy

डॉक्टर आसिफ खान द्वारा हिन्दू महिला का यौन शोषण

महिला उत्पीड़न का दूसरा मामला भी मुंबई से ही है। यहाँ 22 जुलाई को एक 34 वर्षीया हिन्दू महिला ने मीरा रोड पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि डॉक्टर मोहम्मद आसिफ ने पहले पीड़िता को प्यार के जाल में फँसाया और बाद में लम्बे समय तक उसका यौन शोषण किया। यौन शोषण के दौरान आसिफ पीड़िता से निकाह करने का वादा किया करता था। उसने विश्वास में लेने के लिए लड़की की अपनी अम्मी रज़िया खान से भी बात करवाई थी।

यौन उत्पीड़न का यह दौरा फरवरी 2023 से जून 2024 तक चला। शिकायत में बताया गया है कि लगातार यौन शोषण की वजह से पीड़िता 3 बार गर्भवती हुई लेकिन डॉक्टर आसिफ ने हर बार उसका गर्भपात करवा दिया। इस बीच पीड़िता ने डॉक्टर पर खुद से निकाह करने का दबाव बनाया। आरोप है कि आसिफ ने पहले तो आनाकानी और बाद में पीड़िता की बेरहमी से पिटाई की। कुछ दिन बाद डॉक्टर आसिफ पीडिता को मुंबई में छोड़ कर अपने घर गुजरात के वापी भाग गया। उसने शादी से साफ़ इनकार कर के पीड़िता का फोन भी उठाना बंद कर दिया।

आखिरकार पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने महिला की शिकायत पर डॉक्टर आसिफ खान के खिलाफ केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। आरोपित पर भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 376(2)(एन), 313 और 420 के साथ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 173 के तहत मामला दर्ज किया गया है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

यशश्री शिंदे की हुई थी निर्ममता से हत्या

गौरतलब है कि इसी साल 26 जुलाई को नवी मुंबई के उरण तालुका में आने वाले कोटनाका में एक पेट्रोल पंप के पास एक सुनसान सड़क पर एक महिला का शव पड़ा मिला था। शव बुरी तरह से क्षत-विक्षत कर दिया गया था। मृतका के गुप्तांगों पर चाकुओं के कई वार किए गए थे। पहचान मिटाने के लिए चेहरे को पत्थर से कुचल दिया गया था। जाँच के दौरान मृतका की पहचान 20 वर्षीया यशश्री शिंदे के तौर पर हुई थी। पीड़िता के परिजनों ने हत्या का आरोप दाऊद शेख के पर लगाया था।

पीड़िता के पिता ने बताया कि साल उन्होंने दाऊद शेख के खिलाफ अपनी बेटी से छेड़खानी करने की FIR दर्ज करवाई थी। तब पीड़िता नाबालिग थी इसलिए यह केस IPC की धारा 354 और 506 के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज हुई थी। इस केस में दाऊद शेख को को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। जेल से छूट कर दाऊद पहले कर्नाटक गया और कुछ दिनों पहले बदला लेने की नीयत से वापस मुंबई आया। आरोप है कि दाऊद ने पहले पीड़िता को प्यार के जाल में फँसाया और बाद में उसकी सुनसान में ले जा कर हत्या कर दी।

टूटे बर्तन-फूटे शीशे, घर में भरा बरसात का पानी, फिर भी कहते हैं दारा सिंह के परिजन – धर्म ही धरोहर: 24 साल से जेल में ‘बजरंग दल’ का कार्यकर्ता, केस में जमीन-गहने सब बिके

साल 1999 में ओडिशा के मनोहरपुर में ऑस्ट्रेलिया के मिशनरी ग्राहम स्टेंस की उनके परिवार सहित एक भीड़ ने हत्या कर दी थी। भीड़ का आरोप था कि ग्राहम स्टेंस भोले-भाले जनजातीय लोगों को ईसाई मत में धर्मांतरित कर रहा है। पुलिस की जाँच में इस घटना के पीछे उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के रवींद्र कुमार पाल उर्फ़ दारा सिंह की मुख्य भूमिका सामने आई थी। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट तक चली कानूनी कार्रवाई में कुल 4 मुकदमों में दारा सिंह को जुर्माने सहित अधिकतम उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

24 साल से अधिक समय तक जेल काट चुके दारा सिंह के गाँव ऑपइंडिया की टीम पहुँची और वर्तमान हालातों का जायजा लिया। हमने पाया कि दारा सिंह का परिवार बद से बदतर हालतों में जीवन यापन कर रहा है।

औरैया के ककोड़ बाजार में लगभग 200 मीटर मुख्य सड़क से अंदर जाने के बाद दारा सिंह का घर एक गली में बना हुआ है। गली के अंदर पानी भरा हुआ था और नाली बजबजा रही थी। नाली के ऊपर दारा सिंह का बिना प्लास्टर किया घर बना है। लोहे का गेट पार कर के हम अंदर गए तो वहाँ गाय, भैंस और बकरियाँ बँधी थी। बकरियाँ पालना दारा सिंह का परिवार अपना पुश्तैनी काम बताता है। मूल रूप से दारा सिंह हिन्दुओं की पाल बिरादरी से हैं जिसे उत्तर प्रदेश में गड़रिया भी कहा जाता है। यह बिरादरी पेशेवर तौर पर पशु पालन के लिए जानी जाती रही है।

न बैठने का ठिकाना और न ही सोने का

दारा सिंह के घर में घुसने के बाद बाहरी हिस्से दालान में एक टूटा तख़्त पड़ा हुआ था। टूटे तख़्त पर बरसात की बूँदे पड़ी हुई थी जो छत से टपक कर आईं थीं। बगल में जर्जर हालात में एक साइकिल खड़ी थी जिस से दारा सिंह का भाई अरविन्द कुमार पाल रोज़ी-रोज़गार की तलाश करने जाते हैं। घर के अंदर आँगन में एक जगह पर 2 तख़्त जोड़ कर रखे गए हैं जो दारा सिंह के परिजनों के सोने का स्थान है। पूरे घर में कहीं भी पक्की फर्श नहीं है। पशुओं के बाँधने वाली जगह पर ईंट बिछाई गई है।

रसोई और शौचालय दोनों जर्जर

गरीबी के चलते दारा सिंह के घर में रसोई घर और शौचालय दोनों ही जर्जर हालात में हैं। दारा सिंह के भाई अरविन्द सिंह ने हमें बताया कि जल्द ही वो इसे ठीक कराएँगे क्योंकि इस से परिवार को काफी असुविधा हो रही है। किचन में सिलेंडर गैस सहित कुछ बर्तन मौजूद हैं लेकिन उसके बाहर खुले में मिट्टी का चूल्हा भी मौजूद मिला। हमें बताया गया कि पैसे बचाने के लिए खास मौकों पर ही सिलेंडर गैस से खाना बनाया जाता है।

ज्यादातर दिनों में दारा सिंह का परिवार मिट्टी के चूल्हे पर लड़की जला कर खाना बनाता है। रसोई में अधिकतर बर्तन टूटे-फूटे अवस्था में थे।

टूटा शीशा और 25 साल पुराना टेलीविजन

जिस शीशे में दारा सिंह का परिवार कहीं आने-जाने के दौरान मुँह देख कर खुद को तैयार करता है वो कम से कम 15 साल पुराना है। शीशा एक तरफ से टूट गया है जिसे अरविन्द पाल ने घर की दीवाल में मिट्टी के लेप से चिपका दिया है। इसी के साथ घर के अंदर लगभग 25 साल पुराना ब्लैक एंड व्हाइट छोटा सा टेलीविजन पड़ा है जो अभी भी जुगाड़ से चलाया जाता है। हमें बताया गया कि 24 साल पहले जब दूरदर्शन पर दारा सिंह का समाचार दिखाया जाता था तब कर्ज ले कर उनके पिता ने यह टीवी खरीदी थी। तब से आज नया टेलीविजन खरीदने के पैसे दारा सिंह का परिवार नहीं जुटा पाया।

बरसात में घर में भर गया पानी

जब ऑपइंडिया की टीम दारा सिंह के घर पहुँची तब जोर की बरसात हो रही थी। कुछ ही देर की बरसात में न सिर्फ दारा सिंह की गली बल्कि उनके घर के ज्यादातर हिस्सों में पानी भर गया था। घर का वो बाहरी हिस्सा जहाँ पशुओं को बाँधा गया था वो जलमग्न हो गया था। अंदर के हिस्से में भी जहाँ खाना आदि बनाया जाता है वहाँ भी बरसात का पानी भर गया। दारा सिंह के परिजनों ने इसे आए दिन की परेशानी बताया। उन्होंने यह भी बताया कि इस वजह से अक्सर कीड़े-मकोड़े और मच्छर के साथ कभी-कभार साँप आदि भी निकल आते हैं।

परिवार के लिए आज भी धर्म सर्वोपरि

भले ही कोर्ट-कचेहरी के चक्कर में दारा सिंह का परिवार पिछले 24 वर्षों में आर्थिक तौर पर टूट गया हो लेकिन यहाँ आज भी धर्म सर्वोपरि रखा गया है। परिवार घर में पाले गए गोवंश का सबसे खास ध्यान रखता है। इसके अलावा देवी-देवताओं के चित्र और मूर्तियाँ आदि बेहद सलीके से ऐसी जगह लगाए गए हैं जहाँ पानी और धूल आदि उन्हें नुकसान न पहुँचा सके। दारा सिंह के घर के इंट्री गेट पर भी सबसे आगे ‘ॐ’ का चिह्न नजर आता है।

उन्होंने बताया, “घर बनवाने में ईंट भी ‘राम’ मार्का प्रयोग हुई है। दारा सिंह के परिजन आज भी सुबह स्नान आदि कर के सबसे पहले पूजा-पाठ करने के बाद ही अपने काम की शुरुआत करते हैं। दारा सिंह के भाई अरविन्द कुमार पाल ने हमसे कहा, “यही धर्म ही हमारी धरोहर है।”

मुकदमेबाजी और कानूनी लड़ाई में हुए बर्बाद

अरविन्द पाल ने हमें बताया कि कागजी कार्रवाई और कानूनी लड़ाई में उनके घर की ये दशा हुई है। 24 साल तक चली मुकदमेबाजी में दारा सिंह के परिजनों की न सिर्फ थोड़ी-बहुत अचल सम्पत्ति बल्कि गहने तक बिक गए हैं। घर को पक्का बनवाने में कई जगहों पर कर्ज लिया गया है जिसके तगादे के लिए आज भी लोग आते हैं। अरविन्द पाल का ये भी कहना है कि जब तक दारा सिंह जेल से छूट कर घर नहीं आ जाते तब तक कानूनी लड़ाई जारी रखी जाएगी और तब तक घर में किसी नए निर्माण की संभावना न के बराबर है।

क्या जगन्नाथ पुरी के खजाने में हुई चोरी? नकली चाबियों से उठे सवाल, मंदिर के ‘रत्न भंडार’ की होगी नवीनतम तकनीक से मरम्मत

जगन्नाथपुरी मंदिर के ‘रत्न भंडार’ में पूर्व में चोरी को लेकर आशंका की बात सामने आने के बाद जाँच समिति के अध्यक्ष विश्वनाथ रथ ने कहा है कि अब नवीनतम तकनीक से रत्न भंडार की मरम्मत होगी ताकि ढाँचे की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और किसी भी आशंका को दूर किया जा सके।

उन्होंने कहा कि 12 वीं सदी के मंदिर की संरचना को कोई खतरा न हो यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जाएँगे। मरम्मत कार्य के वक्त मंदिर की संरचना और संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि रत्न भंडार के अंदर मरम्मत कार्य शुरू करने से पहले सभी अलमारियों और संदूकों को स्थानंतरित किया जाएगा, लेकिन ये स्थानंतरण किस कमरे में होगा इसका फैसला जगन्नाथ मंदिर प्रशासन लेगा।

बता दें कि रत्न भंडार में चोरी की आशंका जाँच समिति के एक सदस्य ने ही जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि ऐसा लगता है कि मंदिर के ‘रत्न भंडार’ में चोरी के लिए पूर्व में नकली चाबियों का प्रयोग किया गया होगा। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, सरकार जाँच समिति के सदस्य जगदीश मोहंती ने सोमवार को हुई बैठक के बाद कहा था कि कीमती चीजें चोरी करने के लिए पहले नकली चाबियों का इस्तेमाल किया गया होगा। उन्होंने कहा मोहंती ने कहा कि नकली चाबियों के खराब होने के बाद ताले टूटने से यह साबित होता है कि आपराधिक मकसद और कीमती सामानों को चुराने का इरादा था।

29 जुलाई को विश्वनाथ रथ की अध्यक्षता में हुई बैठक में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी मोहंती ने इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने कहा था कि समिति सरकार को इस मामले में आपराधिक जाँच शुरू करने की सिफारिश करने के लिए अधिकृत नहीं है। केवल मंदिर प्रशासन हमारी शंका के बारे में सरकार को सूचित कर सकता था। रत्न भंडार में नकली चाबियों से हुई चोरी का इनकार नहीं हो सकता। उन्होंने ये भी बताया था कि 14 जुलाई को जब नकली चाबियाँ काम न करने पर भीतरी कक्ष के ताले तोड़े गए तो वहाँ कुछ बक्से खुले मिले थे। इसके अलावा कक्ष में तीन लकड़ी की अलमारियाँ थीं, एक स्टील की अलमारी थी, दो लकड़ी के बक्से थे और एक लोहे का बक्सा था। रत्न भंडार में मिले इस सामान को लेकर कुछ रिपोर्ट्स में सूत्रों से बताया जा रहा है कि जब गेट खोला गया तो सिर्फ एक लकड़ी की ही अलमारी बंद थी बाकी सब खुले थे।

यूँ तो कहा जाता है कि 1984 के बाद भीतरी रत्न भंडार खोला नहीं गया था, लेकिन 2018 में उड़ीसा हाई कोर्ट ने भंडार को खुलवाने का आदेश दिया, ताकि कमरे की मरम्मत आदि की जा सके और ASI भी सर्वे कर सके, साथ ही पता लग पाए कि कहीं भीतरी भंडार के आभूषणों को रखरखाव या मरम्मत की जरुरत तो नहीं। ASI कमरे को खोलने जा रही थी, तभी पता चला चाभी गायब है और प्रशासन ने दो नकली चाबियाँ बनवाई है। हालाँकि बाद में तब पीएम मोदी द्वारा यह मुद्दा उठाया गया। साथ ही बीजद सरकार पर निशाना भी साधा गया। पीएम मोदी ने उस समय कहा था कि नकली चाबियों की मौजूदगी और भी चिंताजनक है। क्या इसका इस्तेमाल देवताओं के आभूषण हड़पने के लिए हुआ।

‘ओझा तो भई बोझा है’: कहाँ हैं IAS सपनों के सबसे बड़े सौदागर विकास दिव्यकीर्ति और अवध ओझा, तीन साथियों के डूब मरने के बाद छात्र खोज रहे

दिल्ली के राजेन्द्र नगर में 24 जुलाई, 2024 को RAU UPSC कोचिंग संस्थान के बेसमेंट में डूबने के कारण तीन छात्रों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद इस इलाके में रहने वाले UPSC की तैयारी करने वाले छात्र आक्रोशित हैं। वह पुलिस प्रशासन के साथ ही उन शिक्षकों और कोचिंग संस्थान मालिकों के मौन पर भी प्रश्न उठा रहे हैं जो लगातार हर मुद्दे पर अपना ज्ञान बघारते हुए मिलते हैं।

दृष्टि IAS कोचिंग संस्थान के मुखिया विकास दिव्यकीर्ति और इतिहास पढ़ाने वाले शिक्षक अवध ओझा पर सबसे अधिक प्रश्न उठाए जा रहे हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि इनकी ही रील्स और वीडियो UPSC के संबंध में सबसे अधिक वायरल होती हैं। इनके खिलाफ राजेन्द्र नगर के साथ ही सोशल मीडिया पर भी छात्र अभियान चला रहे हैं।

ऐसी ही एक एक्स (पहले ट्विटर) पोस्ट में अवध ओझा और दिव्यकीर्ति के विरुद्ध बनाई गई एक कविता पोस्ट की गई है। कविता में अवध ओझा को निशाने पर लेते हुए लिखा गया, “ओझा तो भई बोझा है। ज्ञान झाड़ के सोता है।” विकास दिव्यकीर्ति को लेकर लिखा गया, “विकास ने बस खुद विकास किया, माफिया ने कोचिंग का व्यापार किया।”

विकास दिव्यकीर्ति पर प्रश्न उठाने वाले छात्र उनकी ही कही गई लाइनों को उन पर निशाना साधने के लिए उपयोग में ला रहे हैं। विकास दिव्यकीर्ति ने UPSC परीक्षा में सफलता ना पाने के डर को लेकर छात्रों को तजुर्बा लेने की सलाह कुछ वर्षों पहले दी थी। अब छात्र उसी लाइन को लेकर उनके खिलाफ हैं।

विकास दिव्यकीर्ति के “क्यों डरे कि जिन्दगी में क्या होगा, कुछ नहीं होगा तो तजुर्बा होगा” वाली लाइन की तख्ती लेकर उनके दृष्टि कोचिंग संस्थान और घर के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं और उनसे इस विषय पर बोलने की माँग कर रहे हैं। छात्र कई दिनों से यहाँ बैठे हुए हैं।

गौरतलब है कि राजेन्द्र नगर में हुई घटना के बाद सभी कोचिंग संस्थान पर जाँच चल रही है। इस जाँच में विकास दिव्यकीर्ति का संस्थान दृष्टि को भी नियमों का उल्लंघन करके बेसमेंट में चलते पाया गया गई था। इसके बाद इसे सील कर दिया गया था। तबसे ही छात्र हर मुद्दे पर बोलने वाले विकास दिव्यकीर्ति से प्रश्न पूछ रहे हैं।

UPSC अभ्यर्थियों को अपने छात्र जीवन में गुंडई की कहानियाँ सुनाने वाले इतिहास के शिक्षक अवध ओझा को भी छात्र ढूंढ रहे हैं। अवध ओझा लगातार सोशल मीडिया पर छात्रों से शक्ति पैदा करने और राजा वाली क्वालिटी लाने की अपील करते देखे जाते हैं। अब उनको छात्र ढूंढ रहे हैं।

छात्रों का आरोप है कि UPSC के नाम पर कमाई करने वाले शिक्षक संकट की घड़ी में ना उनके साथ खड़े हो रहे हैं और ना ही उनकी आवाज उठा रहे हैं।

हालाँकि छात्रों के बीच शिक्षिका तनु जैन पहुँची हैं।

इस बीच विकास दिव्यकीर्ति और अवध ओझा का कोई नया बयान सामने नहीं आया है। यहाँ तक कि उन्होंने कोचिंग संस्थान की लापरवाही के कारण काल के गाल में समाने वाले छात्रों के प्रति संवेदना भी नहीं जाहिर की है। इस कारण दूसरे छात्रों का गुस्सा और भड़क रहा है।

मनु भाकर… एकमात्र भारतीय खिलाड़ी, जिन्होंने 1 ही ओलंपिक में जीत लिए 2-2 मेडल: सरबजोत सिंह के साथ मिल पेरिस में देश को दिलाया दूसरा कांस्य

पेरिस में चल रहे ओलंपिक 2024 में भारत की खिलाड़ी मनु भाकर ने शूटिंग में दूसरा कांस्य पदक जीत लिया है। ये कांस्य पदक मनु भाकर ने अपने साथी खिलाड़ी सरबजोत सिंह के साथ मिल कर जीता। 2024 के ओलंपिक खेलों में मनु भाकर पहले भी एक ब्रॉन्ज़ मैडल जीत चुकी हैं। ये टूर्नामेंट के इस संस्करण में देश के लिए पहले मेडल भी था। उन्होंने पिस्टल शूटिंग में इसे अपने नाम किया। याद हो कि 2020 के टोक्यो ओलंपिक में तकनीकी खराबी के कारण वो मेडल जीतने से चूक गई थीं, ऐसे में उन्होंने शानदार वापसी की है।

मनु भाकर तब इतनी निराश हो गई थीं कि उन्होंने खेल को अलविदा कह पढ़ाई में या अन्य सेवाओं में अपना करियर बनाने का मन बना लिया था। 2023 में कोच जसपाल राणा ने उनका मार्गदर्शन किया। उन्होंने मनु भाकर से कहा कि वो न सिर्फ देश, बल्कि दुनिया की सबसे बेहतरीन शूटरों में से एक हैं, ऐसे में उन्हें निर्णय लेना है कि वो अपने करियर को किस दिशा में ले जाना चाहती हैं। इस ओलंपिक में मनु भाकर ने देश के लिए पहला मेडल वोमेंस 10 मीटर एयर पिस्टल शूटिंग में जीता।

ऐसा करने वाली वो पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं। शूटिंग में मेडल के लिए भारत ने 12 वर्षों का इंतज़ार किया है। इससे पहले राज्यवर्धन सिंह राठौड़, अभिनव बिंद्रा, विजय कुमार और गगन नारंग ने ये कारनामा किया था। मनु भाकर ने बताया कि खेल के दौरान वो अपने स्कोर से ज्यादा प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित कर रही थीं। मनु भाकर ने DU के लेडी श्रीराम कॉलेज से 2021 में ऑनर्स की डिग्री हासिल की है। अब वो एक ओलंपिक में 2 कांस्य पदक अपने नाम करने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं।

अब मनु भाकर और सरबजोत सिंह ने ‘शूटिंग – मिक्स्ड 10 मीटर एयर पिस्टल टीम’ में ब्रॉन्ज़ मेडल अपने नाम किया है। दक्षिण कोरिया से इनका मुकाबला था। शुरू में तो ये संघर्ष करते नज़र आए, लेकिन फिर 2-2 से बराबरी की, इसके बाद आँकड़ा 4-2 हो गया, फिर इसके बाद मुकाबला 21-20.8 रहा, लेकिन अंत में भारतीय टीम विजेता रही। भारत ने 16-10 से ये मुकाबला जीता। सरबजोत सिंह जहाँ हरियाणा के अम्बाला के हैं, वहीं मनु भाकर हरियाणा के झज्जर की हैं।