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भेजता था अश्लील मैसेज, एडिटेड वीडियो करता था वायरल… महिलाओं ने वीडियो ब्लॉगर मोहम्मद अली जिन्ना को बाँध कर पीटा, चलाता है कपड़े की दुकान

केरल के पलक्क्ड़ में कुछ महिलाओं ने छेड़छाड़ के आरोप में एक ब्लॉगर की रस्सी से बाँध कर पिटाई की है। ब्लॉगर का नाम मोहम्मद अली जिन्ना है। पिटाई करने वाली महिलाएँ तमिलनाडु की हैं जो लम्बे समय से जिन्ना की तलाश में थीं। महिलाओ का आरोप है कि जिन्ना ने पहले उनके साथ छेड़खानी की और बाद में उन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। बताया यह भी जा रहा है कि जिन्ना अपने सोशल मीडिया हैंडलों से महिलाओं को अश्लील मैसेज भी भेजा करता था।

पुलिस ने दोनों पक्षों पर केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। घटना शुक्रवार (26 जुलाई 2024) की बताई जा रही है जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला पलक्कड़ के कोट्टाथारा चंटकदां इलाके की है। यहाँ का रहने वाला मोहम्मद अली जिन्ना एगली बाजार में कपड़े की दुकान चलाता है। इसके अलावा जिन्ना सोशल मीडिया के फेसबुक और इंस्टाग्राम पर भी काफी एक्टिव है। वह अक्सर इन दोनों प्लेटफॉर्म्स पर अपनी रील शेयर किया करता है। शुक्रवार (26 जुलाई) को उसकी दुकान पर कपड़े खरीदने के बहाने कुछ महिलाएँ पहुँची। ये महिलाएँ तमिलनाडु के अलग-अलग इलाकों से आईं थीं। कुछ ही देर में जिन्ना की उसकी दुकान पर इन महिलाओं से बहस शुरू हो गई।

बताया जा रहा है कि बहस ने बढ़ते-बढ़ते मारपीट का रूप ले लिया। इन महिलाओं ने एकजुट होकर मोहम्मद अली जिन्ना के हाथों और पैरों को बाँध दिया और उसकी बुरी तरह से पिटाई करने लगीं। इस घटना के चलते आसपास भीड़ जमा हो गई। महिलाओं का आरोप है कि जिन्ना उनके साथ सोशल मीडिया पर अश्लील बातें करता है। इसके अलावा आरोप यह भी है कि जिन्ना ने कुछ महिलाओं की एडिटेड वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल भी कर दिया था। पीड़ित महिलाओं की संख्या 13 बताई जा रही है।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस ने जिन्ना को महिलाओं के चंगुल से बचाया और अपने साथ ले गई। जिन्ना की तहरीर पर पुलिस ने पिटाई करने वाली महिलाओं के खिलाफ FIR दर्ज कर ली। महिलाओं ने भी मोहम्मद अली जिन्ना के खिलाफ तहरीर दी। पुलिस ने इस तहरीर पर भी क्रॉस केस दर्ज कर लिया है। दोनों ही मामलों की जाँच करवाई जा रही है। ऑपइंडिया ने मोहम्मद अली जिन्ना को कॉल किया तो उसका फोन बंद आया।

शाहिद नूर ने गोवंश को पेट्रोल डाल कर जलाया, रोकने पर दंगा करवाने की धमकी: राजस्थान में सड़क पर उतरे ग्रामीण, कहा – पहले भी कर चुके हैं ऐसी हरकत

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। यह तनाव गोवंश पर पेट्रोल डाल कर आग लगाने की वजह से हुआ है। मुख्य आरोपित का नाम शाहिद नूर है। घटना में 5-7 अन्य लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस ने अब तक 1 आरोपित को गिरफ्तार किया है। पुलिस पूरे मामले की जाँच कर रही है। घायल गोवंश का ग्रामीणों ने इलाज करवाया है। इस हरकत के विरोध में हिन्दू संगठनों ने बाजार को बंद करवा दिया और आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की जा रही है। घटना रविवार (28 जुलाई, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना भीलवाड़ा के थाना क्षेत्र परोली की है। बताया जा रहा है कि रविवार की शाम शब्बीर के बेटे शाहिद नूर ने अपने 5-7 साथियों के साथ बाजार में घूम रहे एक गोवंश पर पेट्रोल डाल कर आग लगा दी थी। पेट्रोल एक कनस्तर में भर कर लाया गया था। आग लगने से गोवंश बुरी तरह से झुलस गया। ग्रामीणों ने गोवंश का इलाज करवाया। इस घटना से आसपास तनाव की स्थिति हो गई। हिन्दू संगठन के सदस्य थाने पहुँच गए और शाहिद नूर व उसके साथियों पर कड़ी कार्रवाई की माँग करने लगे।

ग्रामीणों का आरोप है कि जब वो शाहिद नूर और उसके साथियों को ऐसा करने से मना कर रहे थे तब आरोपितों ने उन्हें न सिर्फ देख लेने बल्कि इलाके में दंगा करने की भी धमकी दी। दावा यह भी किया जा रहा है कि शाहिद नूर व उसके साथी पहले भी इस तरफ की घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं। ग्रामीणों ने अपनी शिकायत में आरोपितों को सामाजिक शांति के लिए खतरा बताया। आक्रोशित लोगों ने सोमवार (29 जुलाई) को बाजार को बंद करवा दिया और सड़क पर उतर कर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। अब तक पुलिस ने 1 आरोपित को गिरफ्तार किया है बाकी की तलाश की जा रही है। हालात को देखते हुए इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और चौकसी बढ़ा दी गई है। घायल गोवंश का इलाज चल रहा है। आक्रोशित लोग शाहिद नूर के साथ उसके साथियो की भी गिरफ्तारी पर अड़े हुए हैं। पुलिस के मुताबिक हालत सामान्य हैं।

‘काँवड़ियों ने तोड़ दी पुलिस की गाड़ी’: वीडियो दिखा कर ‘माकूल इलाज’ की बात कर रहा इस्लामी गिरोह, जानिए कैसे पीड़ित शिवभक्तों को ही बता रहा अपराधी

साल 2024 में काँवड़ यात्रा के शुरू होने से पहले ही इसके खिलाफ दुष्प्रचार का एक बड़ा अभियान छेड़ा गया है। यात्रा में होने वाले हर विवाद को एकतरफा सूचना के साथ एक ख़ास गिरोह द्वारा बढ़ा-चढ़ा कर पेश करने की होड़ मची हुई है। ताजा मामला गाजियाबाद जिले का है जहाँ पुलिस का स्टीकर चिपकाए और हूटर लगाए एक गाड़ी में कुछ काँवड़ियों द्वारा तोड़फोड़ की जा रही है। मोहम्मद ज़ुबैर जैसे अफवाहबाजों द्वारा उड़ाई गई इस खबर की ऑपइंडिया ने जमीनी तौर पर पड़ताल की।

आए दिन भ्रामक और हिन्दू विरोधी खबरें शेयर करने के लिए कुख्यात कथित पत्रकार ज़ाकिर अली त्यागी ने सोमवार (29 जुलाई, 2024) को 45 सेकेंड का एक वीडियो कुछ तस्वीरों के साथ शेयर किया है। उसने अपने ‘X’ हैंडल पर लिखा, “ग़ाज़ियाबाद के दुहाई में पुलिस की गाड़ी ग़लती से काँवड़िया लेन में घुस गई। कावड़ियों को गुस्सा आ गया और उन्होंने गाड़ी में ख़ूब तोड़फोड़ की और उसे पलट भी दिया। पुलिस की गाड़ी का हूटर बजता रहा कि काँवड़िए डर जाएँगे, लेकिन ऐसा नही हुआ क्योंकि एक कहावत है लातों के भूत बातों से नही मानते।”

ज़ाकिर अली त्यागी ने काँवड़ियों को उपद्रवियों, पत्थरबाजों और लठैत कह कर सम्बोधित किया और पुलिस से उनका ‘माक़ूल इलाज़’ करने की माँग की है। इसी वीडियो को ज़ाकिर अली का आदतन साथी वसीम अकरम त्यागी ने भी शेयर किया है। उसने DGP उत्तर प्रदेश से काँवड़ियों पर बुलडोजर चलाने और उन्ही से वसूली करने की माँग की है।

चित्र – X/@WasimAkramTyagi

सचिन गुप्ता और ममता त्रिपाठी ने भी अपने-अपने ‘X’ हैंडलों से इस गाड़ी को पुलिस का वाहन बताया है। ममता त्रिपाठी ने तो योगी आदित्यनाथ द्वारा काँवड़ियों को पढ़ाए अनुशासन के पाठ का भी जिक्र किया है। सचिन गुप्ता ने तो अपने इस ट्वीट को पिन कर रखा है।

चित्र- X/@SachinguptaUP & @MamtaTripathi80

फैक्ट चेक के नाम पर मज़हबी एजेंडा चला रहा मोहम्मद ज़ुबैर भी इसमें पीछे नहीं रहा। उसने भी गाड़ी को पुलिस का बताया और अपने ‘X’ हैंडल से भ्रम फैला दिया।

X -मोहम्मद ज़ुबैर

गाड़ी पुलिस की नहीं, स्टीकर अवैध

ऑपइंडिया ने इस घटना की जमीनी पड़ताल की तो पता चला कि मामला गाजियाबाद के मधुबन बापूधाम थाना क्षेत्र का है। थाना प्रभारी शैलेन्द्र तोमर ने ऑपइंडिया से बताया कि जिस वाहन में तोड़फोड़ की गई है वह पुलिस विभाग की नहीं है। क्षतिग्रस्त किया गया महिंद्रा बोलेरो वाहन गाजियाबाद के ही लोनी निवासी एक प्राइवेट व्यक्ति का है। फिलहाल यह वाहन बिजली विभाग में संविदा पर लगाया गया है जिसे पुलिस का स्टीकर लगाने का अधिकार नहीं था।

अनाधिकृत रूप से घुस कर काँवड़ियों को मारी ठोकर

पुलिस सूत्रों से ऑपइंडिया को मिली जानकारी के मुताबिक, पुलिस का स्टीकर और हूटर लगाया वाहन अनाधिकृत रूप से मुरादनगर के पास बैरिकेड क्रॉस कर के अवैध तौर पर काँवड़ मार्ग पर घुसा था। वाहन में एक ड्राइवर मौजूद था जो बेढंगे अंदाज़ में गाड़ी चला रहा था। वाहन जिस इलाके में चलाया जा रहा था वो काँवड़ियों के लिए आरक्षित थी। लगभग 6-7 किलोमीटर चलने के बाद मधुबन बापूधाम थाना क्षेत्र में इस वाहन ने एक काँवड़ यात्री को ठोकर मार दी। ठोकर से काँवड़ यात्री को मामूली चोट आई। इस से साथ चल रहे अन्य काँवड़िए भड़क गए।

माफ़ी माँगने की बजाए झाड़ रहा था रौब

घटनास्थल पर मौजूद कुछ स्थानीय लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर ऑपइंडिया को बताया कि काँवड़ यात्री (भोले) को ठोकर मारने के बाद आरोपित ड्राइवर अवनीश त्यागी माफ़ी माँगने की बजाए काँवड़ियों पर रौब झाड़ने लगा। वह हूटर बजा कर वहाँ से भागने की भी कोशिश करने लगा। काँवड़ खंडित होने का आरोप लगा कर पहले से नाराज काँवड़ियों को इस बीच यह भी पता चल चुका था कि गाड़ी पुलिस की नहीं है बल्कि हूटर और स्टीकर का अवैध तौर पर दुरुपयोग हो रहा था। भड़के काँवड़ियों ने गाड़ी में तोड़फोड़ शुरू कर दी।

ड्राइवर हिरासत में, कानूनी कार्रवाई जारी

थाना प्रभारी शैलेन्द्र तोमर ने ऑपइंडिया से बताया कि आरोपित ड्राइवर को हिरासत में ले लिया गया है। उससे पूछताछ की जा रही है। ड्राइवर का मेडिकल परीक्षण आदि भी करवाया जा रहा है। मामले में वीडियो फुटेज आदि के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई और जाँच जारी है। फिलहाल हालात पूरी तरह से सामान्य हैं और काँवड़ यात्रा सामान्य रूप से जारी है। बताया यह भी जा रहा है कि घटना के समय आरोपित ड्राइवर गाड़ी को व्यक्तिगत कार्य में प्रयोग कर रहा था। उच्चाधिकारियों के साथ वाहन के संबंधित विभाग को भी जानकारी भेज दी गई है।

ऑपइंडिया ने गाड़ी मालिक का पक्ष जानने के लिए उन्हें कॉल किया तो फोन बंद आया। वाहन मालिक का पक्ष आने के बाद उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।

कहीं बार-बार ढाबे का नाम बदलता खुर्शीद, कहीं ‘लक्ष्मी’ के बगल जहाँगीर ने खोला ‘शीतल चाट’: नाम बदलने को मजबूरी नहीं साजिश मानते हैं पश्चिमी यूपी के हिन्दू

पवित्र सावन माह में चल रही काँवड़ यात्रा साल 2024 में कट्टरपंथी और वामपंथी साजिशकर्ताओं के निशाने पर शुरुआत से पहले ही आ गई थी। पश्चिम उत्तर प्रदेश के प्रशासन द्वारा दुकानदारों को असली नाम लिखने का निर्देश मिलने के बाद काँवड़ यात्री आए दिन किसी ने किसी बहाने से बदनाम किए जा रहे हैं। इस नकारात्मक माहौल को बनाने की शुरुआत मोहम्मद ज़ुबैर जैसे एजेंडा वाले लोगों ने की। बाद में इसमें अरफा खानम जैसी पत्रकारों ने भी अपनी दस्तक दी।

उन्होंने इसे मुस्लिम और दलित वर्ग के धंधे को खत्म करने की साजिश करार दिया। हालाँकि, ऑपइंडिया की पड़ताल में सच्चाई अरफ़ा खानम के दावों से उलट निकल कर सामने आई।

‘प्रति घंटे हो लाखों का लाभ, पर नहीं बदलेंगे नाम’

ऑपइंडिया की टीम ने गाजियाबाद से लेकर सहारनपुर तक काँवड़ मार्ग के दर्जनों हिन्दू दुकानदारों से बात की। इसमें देसी ठाठ, बाबे दी ढाबा, श्याम भोजनालय और पहलवान ढाबा जैसे चलते ढाबे के साथ वंश जूस और भोजनालय जैसे छोटे दुकानदार भी शामिल हैं। इन सभी ने एक स्वर में हमसे कहा कि नाम से नहीं बल्कि खाने की क्वालिटी से अपनी पहचान बनानी चाहिए। अश्वनी सैनी, राम कुमार आदि ढाबा मालिकों ने कहा कि उन्होंने तो कभी किसी मुस्लिम त्योहार में अपनी दुकानों के नाम नहीं बदले।

इन सभी ने एक स्वर में यहाँ तक कहा कि अगर उनको इस्लामी नाम रख कर प्रति घंटे लाखों रुपए का फायदा हो तो भी वो अपने असली पहचान में लाइन तो दूर मात्रा और शब्द का भी बदलाव नहीं करेंगे।

‘नकली नामों से हमारे धंधे में घाटा’

सहारनपुर जिले में अम्बाला-देहरादून मार्ग पर स्थित एक हिन्दू ढाबा मालिक ने बताया कि उनके आसपास कम से कम आधे दर्जन ढाबों के मालिक मुस्लिम हैं जो हिन्दू नाम से कारोबार कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि प्रशासन की सख्ती के बाद कई दुकानदारों ने अपने असली नाम लिख लिए थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद वो फिर से अपने पुराने रूप में आ गए। उन्होंने बताया कि ऐसी हरकतों से कहीं न कहीं उन दुकानदारों को घाटा होता है जो अपने असली नामों से मेहनत से कारोबार कर रहे हैं।

खुर्शीद बार-बार बदल रहा अपने ढाबे का नाम

अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में हमें सहारनपुर के पास सरसावा इलाके में मानव पंजाबी ढाबा दिखा। पता चला कि इस ढाबे का मालिक खुर्शीद है। स्थानीय लोगों ने हमें बताया कि खुर्शीद ने अपने ढाबे का पहले नाम प्रयागराज होटल रखा था। बाद में इसे मानव पंजाबी ढाबा रखा गया। मानव पंजाबी नाम से एक अन्य ढाबा एक सिख समुदाय के व्यक्ति का है जो कि खुर्शीद के ढाबे से लगभग 15 किलोमीटर दूर सरसावा टोल टैक्स के पास लम्बे समय से चल रहा है। स्थानीय लोग खुर्शीद की हरकत को असली मानव पंजाबी ढाबे की डुप्लीकेसी बताते हैं।

लक्ष्मी चाट के बगल जहाँगीर की नई शीतल चाट

सहारनपुर जिले के ‘बजरंग दल’ पदाधिकारी अभिषेक पंडित ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने हमें बताया कि मुस्लिमों द्वारा डुप्लीकेट नाम से बात सिर्फ कारोबार करने तक सीमित नहीं है बल्कि उनके द्वारा कई स्थानों पर ऐसा हिन्दुओं की बिक्री कम करने के लिए किया जा रहा है। उदाहरण के लिए अभिषेक पंडित ने सहारनपुर के अतिव्यस्त काँवड़ मार्ग पर मौजूद कैलाशपुर में बनी शीतल चाट भंडार का नाम लिया। उन्होंने बताया कि कैलाशपुर में लक्ष्मी चाट भंडार एक पिछड़ा वर्ग में आने वाले हिन्दू की है जो लगभग 20 वर्षों से लोगों के बीच चर्चित है।

अभिषेक का दावा है कि इस चाट की दुकान की बिक्री को कम करने के लिए पूरी तैयारी से इसके बगल शीतल चाट नाम से नई दुकान हूबहू इसके इंटीरियर से मिला कर लगभग 3-4 साल पहले खोली गई। शीतल चाट का असल मालिक जहाँगीर बताया जा रहा है। आरोप है कि उसने लक्ष्मी चाट के ग्राहक तोड़ने के लिए सभी सम्भव प्रयास किए। हालाँकि लक्ष्मी चाट आज भी अपनी बेहतर क्वालिटी के चलते स्थानीय लोगों की पहली पसंद बनी हुई है।

फलों के कारोबार में भी नहीं टिकने देते किसी हिन्दू को

बजरंग दल पदाधिकारी अभिषेक पंडित द्वारा लगाए गए आरोपों की जमीनी पड़ताल के लिए ऑपइंडिया की टीम ने कैलाशपुर के स्थानीय समाजसेवी और भाजपा नेता राजेश जौहरी से सम्पर्क किया। राजेश जौहरी ने अपने इलाके को मुस्लिम बहुल बताते हुए खुद को चरमपंथ से पीड़ित बताया। राजेश ने कहा कि इमरान मसूद की जीत के बाद उनके घर के आगे हड्डियाँ टाँग दी गईं थीं। राजेश जौहरी ने ‘बजरंग दल’ पदाधिकारी अभिषेक पंडित के लक्ष्मी और शीतल चाट के बारे में किए गए दावों को एकदम सही बताया।

राजेश जौहरी ने कैलाशपुर इलाके में पड़ने वाले काँवड़ मार्ग का भी जिक्र किया। यहाँ देहरादून जाने वाले मार्ग पर एक लाइन से फलों के फुटकर विक्रेता सड़क के किनारे ठेलों और बैलगाड़ी पर देखे जा सकते हैं। राजेश जौहरी का दावा है कि वहाँ फलों के अधिकतर फुटकर विक्रेता मुस्लिम समुदाय के हैं। उन्होंने हमें बताया कि हिन्दू दुकानदारों को वहाँ फलों के रेट के मामले में टिकने भी नहीं दिया जाता है। राजेश का यह भी दावा है कि वर्तमान सरकार में कैलाशपुर के हालात हिन्दुओं के लिए रहने योग्य हुए हैं वर्ना पिछली सरकारों में तो हालत बदतर हुआ करते थे।

फल-सब्ज़ी मंडी के अधिकतर आढ़ती मुस्लिम समुदाय के

ऑपइंडिया ने मेरठ, मुज़फ्फरनगर और सहारनपुर की मंडियों में जा कर पड़ताल की। यहाँ पर सब्ज़ियों और फलों के अधिकतर आढ़ती मुस्लिम समुदाय के ही हैं। इनमें से कुछ लोगों के द्वारा दूसरे राज्यों के सब्ज़ी व्यापारियों का रेट भी बकाया है। मध्य प्रदेश के एक सब्ज़ी कारोबारी का आरोप है कि सहारनपुर की मंडी के एक मुस्लिम कारोबारी ने उनकी सब्ज़ियों का पैसा पिछले कई वर्षों से नहीं दिया। यहाँ तक कि लगभग 3 साल पहले जब वो अपना पैसा माँगने गया तो उसको धमकी दे कर भगा दिया गया। डर की वजह से मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के इस कारोबारी ने अपना नाम प्रकाशित न करने की गुजारिश की।

मस्जिद से होती है हिंदू दुकानदार के बॉयकॉट की अपील

गाजियाबाद में काँवड़ मार्ग पर स्थित हिंडन विहार में बालाजी धाम मंदिर के महंत मछेन्द्र पुरी ने बताया कि उनका क्षेत्र मुस्लिम बहुल है। इस मुस्लिम बहुल क्षेत्र में एक हिन्दू दुकानदार होने का दावा करते हुए उन्होंने बताया कि उसकी दुकान पर सामान न खरीदने का एलान मस्जिद की मीटिंगों में किया जाता है। बकौल महंत मछेन्द्र पुरी हिन्दू दुकानदार अपना निजी घर होने की वजह से उस जगह को छोड़ कर कहीं जा भी नहीं पा रहा है। दुकानदार की सुरक्षा के मद्देनजर ऑपइंडिया उनका नाम सार्वजनिक नहीं कर रहा है। महंत ने हिंडन विहार इलाके से हिन्दुओं के पूर्व में हुए पलायन की असल वजह की जाँच कराए जाने की माँग की है।

यूपी में माँ-बाप-बहन सब मर गए, पर ओडिशा की जेल में बंद दारा सिंह को नहीं मिली पेरोल: सरेंडर को दिखाया गिरफ्तारी, पूरे परिवार को किया टॉर्चर

साल 1999 में ओडिशा के मनोहरपुर में स्थानीय लोगों को ईसाई में धर्मान्तरण कराने के आरोप में ऑस्ट्रेलियाई पादरी ग्राहम स्टेंस की हत्या उनकी 2 बेटों के साथ कर दी गई थी। इस मामले में दारा सिंह का नाम चर्चा में आया था। साल 2000 में ओडिशा की तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार ने दारा सिंह को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद से दारा सिंह को एक दिन का भी परोल नहीं मिला है।

दारा सिंह की गिरफ्तारी के 24 साल गुजर गए हैं। इन 24 वर्षों में दारा सिंह के परिवार में कई बदलाव हुए है। परिवार कई बार ख़ुशी और गम के मौकों से गुजरा है। इन सभी अवसरों पर तमाम प्रयासों के बावजूद दारा सिंह को परोल नहीं मिला। ऑपइंडिया ने दारा सिंह के परिवार से मुलाकात करके इस मामले की शुरुआत से अब तक के हालातों की जानकारी जुटाई है।

ऐसे दारा सिंह बने रवींद्र पाल

दारा सिंह का मूल नाम रवींद्र कुमार पाल है। रवींद्र पाल के भाई अरविन्द पाल ने ऑपइंडिया को बताया कि उनका परिवार खानदानी तौर पर हिन्दू धर्म को समर्पित है। रवींद्र के पिता भी पूजा-पाठ करके ही अपनी दिनचर्या की शुरुआत करते थे। इंटरमीडियट की पढ़ाई के बाद रवींद्र पाल ने घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए नोएडा में नौकरी शुरू कर दी।

रवींद्र कुमार पाल भी जो काम करते थे, उसको सही समय से अपने अंजाम तक पहुँचाते थे। कर्मठता और लगन को देखते हुए कम्पनी के स्टाफ और अधिकारी रवींद्र कुमार पाल को दारा सिंह नाम से बुलाने लगे थे। उस समय देश में दारा सिंह नाम के एक पहलवान हुआ करते थे। उनकी चर्चा देश-विदेश में थी। इस तरह रवींद्र पाल का नाम दारा सिंह पड़ गया।

नोएडा से शिफ्ट हुए ओडिशा

अरविन्द कुमार पाल हमें आगे बताते हैं कि नोएडा में नौकरी करने के ही दौरान उन्हें ओडिशा का एक साथी मिला। उस साथी से दारा सिंह से इतनी अच्छी दोस्ती हो गई कि दोनों एक-दूसरे के घर आने-जाने लगे। दारा सिंह को ओडिशा पसंद आने लगा और वो कुछ दिनों बाद अपने साथी के साथ नोएडा की नौकरी छोड़ कर ओडिशा में बस गए।

ओडिशा में दारा सिंह ने क्योंझर जिले में प्राइवेट तौर पर बच्चों को पढ़ाने की नौकरी कर ली। वे बच्चों को हिंदी भाषा पढ़ाते थे और साथ ही उन्हें हिन्दू धर्म की अच्छाइयाँ बताते थे। यहाँ बताना जरूरी है कि रवींद्र कुमार पाल उर्फ दारा सिंह मूलत: उत्तर प्रदेश के औरैया के रहने वाले थे। हालाँकि, अब वे ओडिशा को अपनी कर्मभूमि बना लिया था।

ऐसे जुड़े बजरंग दल से

दारा सिंह के परिजनों ने बताया कि उनके द्वारा स्कूल में की जाने वाली धर्म-चर्चा आसपास के गाँवों में फ़ैल गई। इस चर्चा से प्रभावित होकर कई अभिभावक भी दारा सिंह से हिन्दू धर्म के बारे में बातचीत करने लगे। थोड़े ही दिनों में दारा सिंह की ख्याति पूरे क्योंझर और मयूरभंज आदि जिलों में फ़ैल गई।

वो स्कूल से समय मिलने के बाद जनजातीय समुदाय की बस्तियों में घूमने लगे और उन्हें हिन्दू धर्म के बारे में जागरूक करने लगे। बहुत कम समय में ही दारा सिंह को उड़िया भाषा का भी ज्ञान हो गया। उनकी इसी प्रसिद्धि से हिन्दू संगठन के सदस्यों ने उन्हें सम्पर्क किया और बाद में दारा सिंह बजरंग दल से जुड़ गए।

ओडिशा में ईसाई मिशनरियाँ थीं सक्रिय

अरविन्द कुमार पाल हमें आगे बताते हैं कि जब दारा सिंह ने बजरंग दल पदाधिकारी के तौर पर कार्यभार सँभाला तब ओडिशा ईसाई धर्मान्तरण से बुरी तरह से प्रभावित था। उनका कहना है कि गाँव के गाँव कन्वर्ट हो रहे थे। कन्वर्जन के इस रैकेट का मुखिया ग्राहम स्टेंस को माना जा रहा था। ग्राहम स्टेंस ऑस्ट्रेलिया का रहने वाला एक पादरी था।

बताते हैं कि ग्राहम स्टेंस 25 साल पहले लोगों को प्रभावित करने के लिए खूब पैसे उड़ाता है। वह उस समय वैसे ही जीप में चला करता था, जिस तरह की गाड़ी में उससमय सांसद-विधायक चला करते थे। बकौल अरविन्द, उनके भाई ने धर्मान्तरण के खिलाफ लोगों को जागरूक करना शुरू कर दिया। इसी वजह से वो कई साजिशकर्ताओं के निशाने पर भी आ चुके थे।

दारा नहीं मिले तो भाई को पकड़ कर ले गए

अरविन्द कुमार पाल कहना है कि साल 1999 में ग्राहम स्टेंस की हत्या के बाद जब दारा सिंह को ओडिशा पुलिस और सीबीआई की संयुक्त टीम नहीं पकड़ पाई तो उन्हें ही घर से उठा लिया गया था। तब स्थानीय पत्रकारों द्वारा खबर उड़ाई गई कि दारा सिंह का भाई गिरफ्तार कर लिया गया है।

अरविन्द कुमार का कहना है कि उस समय पुलिस और सीबीआई का व्यवहार उनके परिवार के प्रति बेहद क्रूर था। सीबीआई की टीम ने उनकी माँ, पिता और बहनों से भी दुर्व्यवहार किया था। अरविंद का कहना है कि वे बिना किसी जुर्म के लम्बे समय तक हिरासत में रखे गए थे और उन्हें ओडिशा के जंगलों में घुमाया गया था।

दारा सिंह का भाई अरविन्द कुमार और भतीजा गोलू

सरेंडर को दिखाया गया गिरफ्तारी

दारा सिंह के भाई का दावा है कि उनकी गिरफ्तारी की फैलाई गई झूठी खबर को सुनकर दारा सिंह ने ओडिशा के एक पुलिस थाने में सरेंडर कर दिया था। आरोप है कि तब सरकार ने दारा सिंह पर लाखों रुपए का इनाम रखा था, जिसे लेने के लालच में ओडिशा पुलिस के संबंधित थाने ने दारा सिंह के सरेंडर को गिरफ्तारी दिखा दिया था।

जिस थाने में दारा सिंह ने आत्म समर्पण किया था, उसके बारे में परिजनों ने बताया कि उसके पुलिसकर्मी दारा सिंह को जंगल में लेकर गए और वहाँ से सरेंडर को गिरफ्तारी का रूप देने का प्रयास किया। हालाँकि, बाद में इस साजिश की पोल खुल गई थी। इसलिए दावा है कि इनाम की राशि अब तक किसी को भी नहीं दी गई।

कथित गिरफ्तारी (सरेंडर) के बाद दारा सिंह की पहली फोटो

टॉर्चर और माँ-पिता की मौत पर परोल नहीं

अरविन्द कुमार पाल का आरोप है कि तब सीबीआई और ओडिशा पुलिस ने उनके भाई दारा सिंह को काफी टॉर्चर किया था। दारा सिंह के परिजन इसके खिलाफ आवाज उठाते थे, लेकिन उनकी कोई कहीं सुनवाई नहीं हुई। बताया जा रहा है कि तब किसी भी नेता, मीडिया या अदालत ने दारा सिंह के समर्थन में डाली गई किसी भी अर्जी पर कोई सकारात्मक रुख नहीं अपनाया।

अरविन्द कुमार पाल हमें बताते हैं कि क्योंझर के साथ कटक व एक अन्य जेल में दारा सिंह की अदला-बदली की गई। कटक जेल में दारा सिंह पर विवाद की एक FIR अलग से भी दर्ज की गई थी। पिछले 24 वर्षों में उनके पिता, माँ और फिर एक बहन की अकाल मौत हो गई। ये सभी दारा सिंह के लिए हमेशा परेशान रहते थे।

इन सभी की इच्छा मौत से पहले एक बार दारा सिंह से मिलने की थी। हालाँकि, इन सभी की इच्छा अधूरी ही रह गई। दारा सिंह ने अपने पिता, माता और बहन आदि की मौत के बाद पेरोल की अर्जी डाली पर उनको जेल से बाहर नहीं निकलने दिया गया। किसी न किसी स्तर पर दारा सिंह की अर्जी पर अड़ंगा डाला गया।

गोलू अपने चाचा की मौजूदगी में ही करेगा ब्याह

माता, पिता और बहन की मौतों के अतिरिक्त पिछले साल दारा सिंह की भतीजी का ब्याह भी हुआ। इस शादी में भी तमाम कोशिशों के बावजूद दारा सिंह को शामिल होने की अनुमति नहीं मिली। अब आने वाले समय में दारा सिंह के लगभग 24 वर्षीय भतीजा और 22 वर्षीया भतीजी का ब्याह होना है। इन दोनों की इच्छा है कि उनकी शादी दारा सिंह की मौजूदगी में हो।

दारा सिंह की भतीजी बड़ी होकर पुलिस अधिकारी बनना चाहती है, जबकि घर की आर्थिक स्थिति खराब देखते हुए भतीजा गोलू पास की ही एक कम्पनी में प्राइवेट जॉब कर रहा है। गोलू का कहना है कि भले ही कितना भी इंतजार करना पड़े, लेकिन वो शादी अपने बड़े पिताजी दारा सिंह की मौजूदगी में ही करेगा।

मिट्टी में दबी अस्थियाँ 20 साल बाद प्रवाहित

दारा सिंह उर्फ़ रवींद्र कुमार पाल की अपने पिता और माता की मौत से पहले मुलाकात नहीं हो पाई। उनके माता-पिता की अस्थियाँ एक घड़े में डालकर खेतों में लंबे समय तक दबाकर रखी गईं। उनके माता-पिता की अंतिम इच्छा थी कि जेल से रिहा होने के बाद दारा सिंह ही उनकी अस्थियाँ गंगा में विसर्जित करें। उनकी यह इच्छा भी अधूरी रह गई।

लगभग 20 साल के इंतजार के बाद आखिरकार दारा सिंह के भाई ने अपने माता-पिता की अस्थियों को गंगा में विधि-विधान से प्रवाहित कर दिया। इसकी वजह बताते हुए अरविन्द कुमार पाल ने कहा कि उन्हें बड़ी बेटी की शादी करनी थी और घर-परिवार में दबी अस्थियाँ हिन्दू धर्म के नियमानुसार विवाह आदि कार्यों में शुभ नहीं मानी जाती हैं।

कुछ गिने-चुने लोगों से ही मिली मदद, बाकी सब रहे खामोश

अरविन्द कुमार पाल ने अपनी पीड़ा को दुनिया के लोगों को बताने के लिए ऑपइंडिया का धन्यवाद किया। बेहद भावुक मन से उन्होंने कहा कि पिछले 24 वर्षों में बहुत कम लोगों ने उनके परिवार की मदद की। पिछले 2 दशक में वो और उनका परिवार हर प्रकार की प्रताड़ना का शिकार हुआ है।

अरविंद कुमार का कहना है कि उनके परिवार को अभी भी उम्मीद है कि दारा सिंह अपने जीवन के अंतिम समय को अपने घर और परिवार के साथ ही बिताएँगे। फिलहाल अगस्त 2024 में दारा सिंह की रिहाई वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।

पहले अशरफ मंसूरी ने आशु बन इज्जत लूटी, फिर भरी कोर्ट में उतारी गई इज्जत: लव जिहाद पीड़िता ने माँगी इच्छामृत्यु, कहा- अश्लील सवाल किए, सब लगा रहे थे ठहाके

इंदौर में एक रेप पीड़िता न्याय माँगने कोर्ट के दरवाजे तक गई थी, लेकिन उसे नहीं पता था वहाँ उसका ऐसा हाल कर दिया जाएगा कि वो शर्म से इच्छामृत्यु माँगने को मजबूर हो जाएगी। लड़की ने इस बाबत राष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई), राष्ट्रीय महिला आयोग और हाईकोर्ट के प्रशासनिक जज को पत्र लिखा है। अपनी शिकायत में उसने कोर्ट में पूछे गए सवालों के बारे में सबको बताया है और लिखा कि अगर उसे न्याय नहीं दिया जा सकता है तो उसे इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी जाए।

पीड़िता को अशरफ मंसूरी ने फँसाया था झांसे में

पीड़िता ने बताया कि साल 2015 में उसकी शादी हुई थी बाद में वो 2017 में अलग हो गए। 2019 में ‘हेलो’ ऐप के माध्यम से आरोपित अशरफ मंसूरी उसके संपर्क में आया। अशरफ लगातार युवती को मैसेज भेजता था। के बाद एक दिन युवती ने कहा कि वो उससे दोस्ती नहीं कर सकती क्योंकि वो मुस्लिम है। घरवाले रिश्ते के लिए नहीं मानेंगे। अशरफ ने बहुत मनाने की कोशिश की, मगर युवती ने साफ मना कर दिया था। हालाँकि कुछ दिन बाद अशरफ ने आशु नाम से आईडी बनाकर युवती को संपर्क किया, उसकी दोस्ती की और खुद को हिंदू बताया।

धीरे-धीरे दोनों के बीच मुलाकात हुई, रिश्ता आगे बढ़ा। युवती बोल चुकी थी कि उसे शादी करनी है टाइम पास नहीं, मगर अशरफ ने कहा कि उसकी शादी भाई-बहन की शादी के बाद ही होगी। युवती मान गई। दोनों लगातार मिलने लगे। आशु बनकर अशरफ बड़ी-बड़ी गाड़ियाँ लाकर युवती को घुमाने लगा, दोस्तों के फ्लैट पर ले जाने लगा, संबंध बनाने लगा, मगर एक दिन अचानक उसका फोन बंद हो गया। युवती ने परेशान होकर उसके दोस्त को फोन किया और तब उसे पता चला कि वो आशु नहीं अशरफ मंसूरी है। पीड़िता यह सुन सदमे में आ गई। कुछ देर बार अशरफ का फोन आया तो उसने विरोध किया और अशरफ से बातचीत बंद कर दी। लेकिन तब अशरफ उसे घर और दफ्तर के बाहर आकर तंग करने लगा। फोटो लीक करने के लिए ब्लैकमेल करने लगा। अंत में पीड़िता ने थाने में शिकायत दी।

पीड़िता की शिकायत पर युवक के खिलाफ आरोपित युवक के खिलाफ धारा 376, 354, एससी-एसटी एक्ट और मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया। आरोपित जेल भेजा गया और मामले की सुनवाई इंदौर जिला कोर्ट में शुरू हुई। 25 जुलाई को जब कोर्ट में पीड़िता पहुँची तो वहाँ उसके बयान का प्रति परीक्षण हुआ। इस बीच कुछ सवाल भी पीड़िता से ऐसे हुए कि पीड़िता कोर्ट में शर्मसार हो गई।

इंदौर जिला अदालत में पीड़िता हुई शर्मसार

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रेप पीड़िता ने जज के बर्ताव के खिलाफ जो शिकायत राष्ट्रपति, सीजेआई, राष्ट्रीय महिला आयोग, हाईकोर्ट के जज से की है। उसमें कहा गया कि सुनवाई के दौरान अशरफ मंसूरी के वकील को सवाल करने थे लेकिन जज ने उन्हें रोका और कहा, “इस तरह की लड़कियों का प्रति परीक्षण तो मैं स्वयं ही करता हूँ।’ उन्होंने प्रति परीक्षण से पहले कोर्ट रूम के बंद दरवाजे खुलवा दिए। प्रति परीक्षण शुरू होते ही जज ने पूछा- ‘एक गाड़ी में कैसे रेप हो सकता है? रेप के बाद तुम्हें रुपए मिल गए थे?’ मैंने अपने वकील के माध्यम से इस पर आपत्ति ली तो जज ने उन्हें डांटकर चुप करा दिया।”

पीड़िता ने शिकायत में कहा “जज ने कोर्ट रूम का दरवाजा खुलवाकर मेरे बयान लिए। मुझसे ऐसे सवाल पूछे कि सिर शर्म से झुक गया। कोर्ट रूम में मौजूद सभी लोग हँस रहे थे। जज ने मुझे बाजारू लड़की कहा। पूछा कि तुम्हें रेप के बाद पैसे मिल गए कि नहीं‌? इतना ही नहीं खुद के लिए कहा कि मैं भी जींस-टी शर्ट पहनकर निकलूँगा तो तुम्हारे जैसी लड़कियाँ मेरे साथ घूमने निकल जाएँगी। आजकल इस तरह की बाजारु लड़कियों का कोई चरित्र नहीं बचा है। और ये रुपए लेने की नीयत से झूठे केस दर्ज कराती हैं। इस तरह के शब्द सुनकर कोर्ट में मौजूद आरोपित के वकील सहित सभी लोग ठहाके मारकर हँस रहे थे।”

आगे शिकायत में पीड़िता ने कहा, “जिन शब्दों के साथ न्यायाधीश महोदय ने मेरे चरित्र और गरिमा का हनन किया है, वह वापस लौटना संभव नहीं है। जिस प्रकार से न्यायाधीश महोदय के द्वारा मेरे साथ अश्लील तरीके से चर्चा की गई है। आरोपित के वकील को जैसा विश्वास दिलाया गया उससे ऐसा लग रहा है कि मुझे उनके न्यायालय में न्याय नहीं मिलेगा। मुझे न्याय नहीं दिलवा सकते तो इच्छा मृत्यु की अनुमति प्रदान करें।'”

पीड़िता के वकील ने कहा कि 25 जुलाई को जज ने पीड़िता से प्रति परीक्षण किया था। इस दौरान पीड़िता के साथ अभद्र भाषा का उपयोग किया और अश्लील सवाल किए। स्त्री लज्जा का ध्यान नहीं रखा। अब उन्होंने पत्र लिख इच्छा मृत्यु माँगी है। पीड़िता ने कहा, “जज साहब के शब्दों से मेरे मन में कोर्ट की छवि धूमिल हुई। जब जज साहब सवाल पूछ रहे तो वहाँ बैठे लोग ठहाके लगा रहे थे। जब मुझसे सवाल पूछे जा रहे थे तो कोर्ट रूम का दरवाजा खुला था। जज साहब ने कई ऐसे सवाल किए जिससे मुझे काफी लज्जा महसूस हुआ।ठ

पेरिस ओलंपिक में जिसने लगाया ‘अल्लाहू अकबर’ का नारा, उसका कंधा टूटा… लाद कर ले जाना पड़ा: ओपनिंग सेरेमनी के लिए कमेटी ने ईसाइयों से माँगी माफी

ओलम्पिक खेल 2024 में भी इजरायल फिलिस्तीन के मुद्दे को उठाने से मुस्लिम खिलाड़ी बाज नहीं आ रहे। इसी क्रम में एक ताजिकिस्तानी जुडो खिलाड़ी ने इजरायली खिलाड़ी से हाथ मिलाने से मना कर दिया और अल्लाहू अकबर के नारे भी लगाए। इसके अगले ही राउंड में उन्हें बाहर होना पड़ा और वह चोटिल हो गया। वहीं दूसरी तरफ ओलम्पिक आयोजक कमिटी ने ईसाई भावनाओं को आहत करने को लेकर माफी माँगी है।

पेरिस ओलम्पिक के दूसरे दिन रविवार (28 जुलाई, 2024) को ताजिकिस्तान के जुडो खिलाड़ी नुराली एमोमाली का इजरायली खिलाड़ी तोहार बुत्बुल से मुकाबला था। इस मुकाबले में एमोमाली ने बुत्बुल को हरा दिया। मैच खत्म होने के बाद एमोमाली ने परम्पराओं का निर्वहन करने से इनकार कर दिया।

एमोमाली ने यहाँ बुत्बुल से हाथ मिलाने से मना कर दिया, जैसा हर मैच के बाद होता है। ऐसा संभवतः उन्होंने इसलिए किया क्योंकि वह मुस्लिम हैं और उनका समर्थन फिलिस्तीन को है जिसके साथ इजरायल का वर्तमान में युद्ध चल रहा है। एमोमाली ने यहाँ अल्लाहू अकबर का नारा भी लगाया। इस मुकाबले के बाद इजरायली खिलाड़ी बाहर हो गया।

इजरायली खिलाड़ी से हाथ ना मिलाने और अल्लाहू अकबर कहने के कुछ देर बाद एमोमाली जापानी खिलाड़ी से भिड़े। जापानी खिलाड़ी हिफुमी आबे से भिड़े। आबे ने उन्हें इस मैच में हरा दिया और जोरदार पटखनी दी। अंत में आबे ने एमोमाली को इतनी तेज जमीन पर पटका कि उनका कन्धा ही अपनी जगह से हट गया।

एमोमाली जमीन पर पड़े रहे और उन्हें अन्य लोग वहाँ से उठा कर ले गए। उनको मैट पर कराहते हुए देखा गया जबकि आबे अगले मैच में फिर विजयी हुए और उन्होंने स्वर्ण पदक जीता। एमोमाली की कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

ओलम्पिक से जुड़े एक दूसरे विवाद में ओलम्पिक आयोजन समिति ने माफी माँगी है। ओलम्पिक आयोजन समिति ने इसकी ओपनिंग सेरेमनी में लियोनार्दो की एक पेंटिंग ‘द लास्ट सपर’ का चित्र गलत ढंग से करने पर माफ़ी माँगी है। यह पेंटिंग ईसाइयों के पैगम्बर जीसस के अंतिम भोज के संबंध में बनाई गई थी। कहा जाता है कि उन्होंने अपने अनुयायियों के साथ भोज किया था।

ओलम्पिक सेरेमनी में इस पेंटिंग के किरदारों की जगह ट्रांसजेंडर लोगों को दिखाया गया था और इसका भौंडा चित्रण किया था। इसमें ग्रीक देवता और बाक़ी ईसाइयों को दिखाया गया था। इससे दुनिया भर में ईसाइयों की भावनाएँ आहत हुई थीं। इसको लेकर विश्व भर आलोचना की गई थी। अब पेरिस की ओलम्पिक कमेटी ने इसको लेकर माफी माँगी है।

उनका कहना है कि वह इसके जरिए एक सन्देश भेजना चाह रहे थे और वह सफल हुए हैं। उन्होंने कहा कि अगर इसाइयों की भावनाएँ इससे आहत हुई हैं तो वह माफ़ी माँगते हैं। आयोजकों ने कहा कि किसी की भावनाएँ आहत करने का उनका लक्ष्य नहीं था।

सीने में तलवार घोंप कर RSS स्वयंसेवक की हत्या, रिपोर्ट में आवा – मुंबई पुलिस के सामने ही मार डाला: आरिफ-सद्दाम ने साथियों संग मिल कर दिया घटना को अंजाम

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में अरविन्द वैश्य नाम के एक युवक की हत्या कर दी गई है। हत्या का आरोप अल्लू, आरिफ और शेर अली व उसके कुछ अन्य साथियों पर लगा है। आरोप है कि इन तीनों ने अरविन्द को पुलिस के आगे ही मार डाला है। मृतक RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) से जुड़ा बताया जा रहा है। हिन्दू संगठनों ने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। अब तक 1 आरोपित को गिरफ्तार किया गया है। बाकी हमलावरों की तलाश में दबिश दी जा रही है। घटना रविवार (28 जुलाई, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना मुंबई के धारावी इलाके की है। रविवार को यहाँ अरविन्द के भाई शैलेन्द्र वैश्य ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत के मुताबिक, घटना रविवार शाम सवा 7 बजे के आसपास की है। तब अल्लू, आरिफ, शुभम और शेर अली का सिद्धेश नाम के व्यक्ति से किसी बात को ले कर झगड़ा हो रहा था। इन अल्लू और उसके साथी सिद्धेश और उसके पिता को पीटने लगे। इसी झगड़े में बीच-बचाव करने अरविन्द भी पहुँच गया। आरोप है कि अल्लू और उसके साथियों ने अरविन्द की भी पिटाई कर दी।

बताया जा रहा है कि अपने साथ हुई मारपीट की शिकायत करने अरविन्द धारावी पुलिस स्टेशन गया। यहाँ ड्यूटी पर तैनात पुलिस इंस्पेक्टर ने अरविन्द के साथ 2 पुलिस कॉन्स्टेबलों को घटनास्थल पर भेजा। आरोप है कि तब सद्दाम और जुम्मन ने अरविन्द को पुलिस के आगे ही केस वापस लेने की धमकी दी। धमकी को अनदेखा कर के अरविन्द पुलिसकर्मियों के साथ राजीव नगर स्थित वसीम के गैराज के आगे पहुँचा ही था कि अचानक उस पर हमला हो गया। हमले में अल्लू, आरिफ, सद्दाम, जुम्मन, शेर अली और शुभम शामिल बताए जा रहे हैं।

आरोप है कि हमलावरों ने दोनों पुलिस कॉन्स्टेबलों के आगे ही अरविन्द के सीने में तलवार घोंप दी। पुलिस ने अल्लू को दौड़ा कर पकड़ लिया, बाकी हमलावर फरार हो गए। घायल अरविन्द वहीं गिर कर तड़पने लगा जिसे अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने अरविन्द को मृत घोषित कर दिया। विश्व हिन्दू परिषद का आरोप है कि अरविन्द की हत्या में कुल 7 हमलावर शामिल थे लेकिन पुलिस ने महज 2 आरोपितों के ही खिलाफ FIR दर्ज की है। नाराज हिन्दू संगठनों ने थाने के आगे प्रदर्शन किया और बाकी हमलावरों पर भी कार्रवाई की माँग की है।

‘हम परमेश्वर यीशु की पूजा कर रहे थे’: उदयराज के घर में लगा था जमावड़ा, VHP का दावा- हिंदुओं को लालच देकर बना रहे थे ईसाई

उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में रविवार (28 जुलाई 2024) को ईसाई में धर्मान्तरण की कोशिश का मामला सामने आया है। यहाँ बिना अनुमति के एक प्रार्थना सभा चल रही थी। आरोप है कि यहाँ हिंदुओं का सामूहिक धर्मांतरण की कोशिश की जा रही है। हिन्दू संगठनों के विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने मौके पर पहुँचकर 7 लोगों को हिरासत में लिया है। इन लोगों के पास से ईसाई साहित्य बरामद हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला अयोध्या के कोतवाली क्षेत्र का है। यहाँ के दर्शननगर बाजार में साईं का पुरवा नाम से एक गाँव है। रविवार को इस गाँव में उदय राज नाम के व्यक्ति के घर कुछ लोगों का जमावड़ा लगा हुआ था। बताया जा रहा है कि इन्हें प्रार्थना के नाम पर जमा किया गया था। इसी दौरान वहाँ विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता पहुँच गए।

वीएचपी के कार्यकर्ताओं ने प्रार्थना सभा की आड़ में ईसाई धर्मान्तरण का आरोप लगाकर हंगामा करना शुरू कर दिया। इसके बाद उदयराज के घर प्रार्थना सभा में पहुँचे दूसरे पक्ष के लोगों ने हिन्दू संगठन के सदस्यों का विरोध शुरू कर किया। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस फ़ौरन मौके पर पहुँची। वहाँ पुलिस दोनों पक्षों को लेकर थाने आ गई और उनसे पूछताछ शुरू कर दी।

पड़ताल में पुलिस को बाइबिल सहित अन्य ईसाई साहित्य मिले, जिन्हें जब्त कर लिया गया है। अब तक कुल 7 लोगों को हिरासत में लिया गया है। विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ताओं ने प्रार्थना सभा में मौजूद लोगों के बाइबिल पढ़ते हुए वीडियो भी बनाए हैं। इनमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं। VHP सदस्यों ने हिरासत में लिए गए आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

विश्व हिंदू परिषद के जिला मंत्री लालजी शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि उदय राज पिछले 5 साल से इस तरह के काम में शामिल है। वह सेवा बस्तियों में जाकर दलितों को ईसाई बना रहा था। शर्मा ने कहा है कि उनका संगठन लम्बे समय से उदय राज पर नजर रखे हुए था। घटना के समय उदय राज के घर में 200 लोगों की मौजूदगी बताई जा रही है।

प्रार्थना सभा में मौजूद एक महिला ने बताया कि उनको काफी दुःख सहना पड़ा था, जिसकी वजह से वो परमेश्वर यीशु मसीह की प्रार्थना कर रही थी। इसी दौरान वहाँ हिन्दू संगठन के सदस्यों ने आकर हंगामा शुरू कर दिया। उनका आरोप है कि ये लोगों को पैसे आदि का लालच देकर लोगों को ईसाई धर्म में धर्मांतरण कराते थे।

रेप, गर्भपात और प्राइवेट पार्ट में पैर की उंगली: हिंदू लड़की को सैफुद्दीन ने विदेश में फँसाया, देश में न्याय माँगने पर ‘कॉन्ग्रेस नेता’ ने लताड़ा

सोशल मीडिया पर लव जिहाद की एक पीड़िता का वीडियो सामने आया है। वीडियो में पीड़िता बताती दिख रही है कि उसके साथ कर्नाटक के सैफुद्दीन ने बहरीन में नशीला पदार्थ देकर धोखे से पहले रेप किया और बाद में उसे ब्लैकमेल करके उसका धर्मांतरण करवा दिया, उससे निकाह कर लिया। पीड़ित युवती का कहना है कि उस पर होने वाले अत्याचार बहरीन से शुरू हुए और कर्नाटक तक चलते रहे। कर्नाटक के बीदर में सैफुद्दीन के घर पर न केवल पीड़िता के साथ बदसलूकी हुई, मारपीट हुई बल्कि उसके प्राइवेट पार्ट तक में उंगली डाली गई और कहा गया कि अब बताते हैं कि रेप कैसे होता है।

यौन शोषण का शिकार हुई पीड़िता की पहचान हम इस रिपोर्ट में उजागर नहीं कर रहे। उसका बदला हुआ नाम ‘अंकिता शर्मा’ इस रिपोर्ट में प्रयोग करेंगे, मगर साथ ही सारी वो बात भी जस की तस बताएँगे जो पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताई है।

अंकिता शर्मा, बहरीन में एक वीजा फर्म में काम करती थीं। वहीं उनकी मुलाकात बिजनेस क्लाइंट के तौर पर सैफुद्दीन से हुई। अंकिता को लगा बाहरी देश में कोई भारतीय मिला है तो उससे बात करनी चाहिए। उनकी यही सोच बाद में उसके लिए गले की फांस बन गई क्योंकि सैफुद्दीन के मंसूबे अलग थे। सैफुद्दीन एक दिन अंकिता से मिला और उसकी ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिला दिया। अंकिता को अंदाजा भी नहीं था कि उस ड्रिंक को पीने के बाद उसके साथ क्या होने वाला है।

सैफुद्दीन ने उसके बेहोश होने के बाद उसका रेप किया उसकी नग्न तस्वीरें निकाली और फिर ब्लैकमेल करने लगा। बाद में पता चला अंकिता प्रेगनेंट है। अंकिता ने इसकी शिकायत बहरीन पुलिस को दी। पुलिस ने 3 घंटे में सैफुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया और 14 दिन बाद जाकर छोड़ा जब उसने कहा कि वो लड़की से निकाह करेगा, बच्चे का ख्याल रखेगा।

जेल से निकलने के बाद सैफुद्दीन ने अंकिता का धर्मांतरण करवा दिया और फिर उससे निकाह भी कर लिया। अंकिता अब भी कुछ समझ पाती तो शायद संभल जाती, लेकिन बात पहुँच गई उसके प्रेगनेंट होने तक। सैफुद्दीन ने उसे बरगलाया और कहा कि वो बहरीन से मुंबई चले क्योंकि बहरीन में उसका ध्यान रखने को कोई नहीं होगा। अंकिता ने फिर सैफुद्दीन पर यकीन कर लिया। मुंबई पहुँचकर अंकिता का सालवा अस्पताल में अबॉर्शन करवा दिया गया बिन उसकी मंजूरी के और एक दिन में ही उसे अस्पताल से भी चलता कर दिया गया।

अंकिता के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सैफुद्दीन अस्पताल के संपर्क में था। वो लगातार प्रक्रिया के बारे में पूछ रहा था, लेकिन जब उसके साथ मेडिकल लापरवाही की गई और अंकिता की हालत बिगड़ गई तो कोई उसका ध्यान रखने नहीं आया। अंकिता की तबीयत बिगड़ती रही और सैफुद्दीन गायब रहा।

अंकिता बताती है कि सैफुद्दीन और उसके परिवार वाले अपने कनेक्शन अंडरवर्ल्ड तक से बताते थे। कहते थे कि वो पहले पाकिस्तानी थे। इन्हीं सब बातों से वो अंकिता को डराने का प्रयास करते थे, लेकिन अंकिता को डराना उनका ज्यादा दिन नहीं चला। गर्भपात के बाद अंकिता ने डरना बंद कर दिया। किसी तरह वो दोस्त की मदद लेकर सैफुद्दीन के परिवार के पास पहुँची, यहाँ उसे उसके अधिकार मिलने की जगह और भी ज्यादा बदसलूकी की गई। कहा गया- पहले ये चेक करवाओ की इस लड़की ने आखिरी बार सेक्स कब किया है।

इसके अलावा, अंकिता के शिकायत पत्र के अनुसार, जब वो कर्नाक के बीदर में सैफुद्दीन के घर गई तो वहाँ उन्हें मारने की कोशिश हुई, प्राइवेट पार्ट छूने का प्रयास हुआ, उसमें पैर की उंगली भी डाली गई, कपड़े फाड़ने की कोशिश की गई। इस दौरान उसके घर पर एक कॉन्ग्रेस नेता भी था।

अंकिता के अनुसार, इन सब घटनाओं के बीच सैफुद्दीन का भाई वीडियो बना रहा था। बीच में उसका भाई अंकिता पर हाथ उठाने आया। बाद में बाकी भाइ भी आ गए और घर में मौजूद मोहम्मद अलीमुद्दीन (शिकायत के अनुसार कॉन्ग्रेस नेता) घर की महिला को बोला- ‘इसे पकड़ो हम बताते हैं कि रेप कैसे होता है।’ जब अंकिता चीखने चिल्लाने लगी तो उसे थप्पड़ मारकर कमरे में बंद कर दिया गया। बाद में उसने कमरे से जाने की कोशिश की तो एक भाई ने आकर उसे छाती से पकड़ लिया और फिर बिन टीशर्ट बाहर जाने को कहा।

अंकिता बताती है कि उसके साथ कमरे में बंद कर जो हुआ उसकी वीडियो सैफुद्दीन के भाई ने बनाई थी। वो लोग धमकी दे रहे थे कि रही-सही जिंदगी खराब कर देंगे। अंकिता किसी तरह बचकर जब बीदर से निकली तो उसके परिजनों ने उन्हें घर बुला लिया। वह काफी समय सदमे में थीं। बाद में उसने गुंडवा थाना निरीक्षक के आगे अपनी शिकायत दर्ज कराई और अपनी सारी व्यथा सोशल मीडिया पर साझा की है। उसने गर्भपात की तस्वीर, सैफुद्दीन के घर में हुई बातचीत, थाने की वीडियो आदि अपने अकॉउंट पर डाली है। अंकिता का कहना है कि उसे टारगेट इसलिए किया गया क्योंकि वो हिंदू ब्राह्मण लड़की है और यूपी से है। अंकिता बताती हैं कि उसके साथ जो कुछ भी हुआ उसकी वीडियो जब उन्होंने सोशल मीडिया पर डाली तब तमाम महिलाएँ ऐसी सामने आईं जिन्होंने बताया कि वो भी ऐसी साजिशों का शिकार हुई है।