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कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने बदला ‘रामनगर’ जिले का नाम, अब कहलाएगा ‘बेंगलुरु दक्षिण’: भाजपा और जेडीएस ने किया विरोध, कुमारस्वामी बोले- आमरण अनशन करूँगा

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार रामनगर जिले का नाम बदलकर बेंगलुरु दक्षिण जिला करने जा रही है। कर्नाटक सरकार की कैबिनेट ने शुक्रवार (26 जुलाई 2024) को जिले का नाम बदलने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसके पहले कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस संबंध में घोषणा की थी।

कैबिनेट की बैठक के तुरंत बाद कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल ने मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि रामनगर के लोगों और वहाँ के निर्वाचित प्रतिनिधियों की माँग पर विचार करते हुए इसे मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा, “ब्रांड बेंगलुरु को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट ने रामनगर के विधायकों द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।”

हालाँकि, मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह केवल नाम परिवर्तन है और बाकी तालुकाएँ वैसे ही रहेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया, “राजस्व विभाग इसे अधिसूचित करने की प्रक्रिया शुरू करेगा और केवल जिले का नाम बदलेगा।” वर्तमान में रामनगर जिले में पाँच ब्लॉक- रामनगर, मगदी, कनकपुरा, चन्नपटना और हरोहल्ली हैं। ये सभी अब बेंगलुरु दक्षिण जिले का हिस्सा होंगे।

इससे पहले कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 9 जुलाई 2024 को रामनगर जिले का नाम बदलने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को सौंपा था। शिवकुमार ने कहा था कि जिले के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने रामनगर का नाम बदलने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा था कि रामनगर, चन्नपटना, मगदी, कनकपुरा, हारोहल्ली तालुकों के भविष्य और विकास को ध्यान में नेताओं ने यह प्रस्ताव दिया है।

कैबिनेट के फैसलेे पर खुशी जाहिर करते हुए शिवकुमार ने कहा, “हम सभी मूल रूप से बेंगलुरु जिले के हैं। इसमें बेंगलुरु शहर, डोड्डाबल्लापुर, देवनहल्ली, होसकोटे, कनकपुरा, रामनगर, चन्नपटना, मगदी शामिल हैं। प्रशासनिक रूप से यह पहले बेंगलुरु शहर, बेंगलुरु ग्रामीण और रामनगर में विभाजित था। अब यह बेंगलुरु शहर, बेंगलुरु ग्रामीण और बेंगलुरु दक्षिण हो जाएगा।”

उन्होंने कहा, “बेंगलुरु दक्षिण जिला बनाने से मैसूर तक रामनगर, चन्नपटना और मगदी का विकास होगा। उद्योगों की स्थापना को आमंत्रित किया जाएगा और संपत्ति के मूल्य को बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। बेंगलुरु की सीमा एक तरफ आंध्र प्रदेश और दूसरी तरफ तमिलनाडु से लगती है। इस प्रकार यह हिस्सा बेंगलुरु के विकास और विस्तार के लिए छोड़ा गया है।”

सरकार के इस फैसले का भाजपा और जेडीएस ने विरोध किया है। इनका कहना है कि रामनगर में रियल एस्टेट को बढ़ाने की मंशा से नाम बदला गया है। इस तरह के कदम से विकास नहीं होगा। केंद्रीय मंत्री और जेडीएस कुमारस्वामी ने रामनगर का नाम बदलने को लेकर डीके शिवकुमार की आलोचना की और आमरण अनशन करने की चेतावनी दी है।

केंद्रीय मंत्री डीके कुमारस्वामी ने कहा, “रामनगर से मेरा कोई कारोबारी रिश्ता नहीं, बल्कि भावनात्मक रिश्ता है। अगर रामनगर जिले का नाम बदला जाता है तो मैं अपनी जान जोखिम में डालने और खराब स्वास्थ्य के बावजूद आमरण अनशन पर बैठने के लिए तैयार हूँ। आखिरी क्षण तक मैं उस जिले के गौरव की रक्षा के लिए लडूँगा।”

एल्गार परिषद के 5 आरोपितों को बॉम्बे हाई कोर्ट ने नहीं दी डिफॉल्ट बेल: भीमा कोरेगाँव मामले में UAPA के तहत 2018 में हुए थे गिरफ्तार, एडवोकेट से लेकर प्रोफेसर तक शामिल

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार (26 जुलाई 2024) को भीमा कोरेगाँव हिंसा मामले में सुरेंद्र गाडलिंग, महेश राउत, रोना विल्सन, सुधीर धावले और शोमा सेन को जमानत देने से इनकार कर दिया। खुद को दलित एक्टिविस्ट कहने वाले इन सभी पाँचों आरोपितों को एल्गार परिषद के मामले में जून 2018 में गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया था।

बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति एएस गडकरी और न्यायमूर्ति श्याम सी चांडक की खंडपीठ ने इन आरोपितों को याचिका पर सुनवाई की और उन्हें जमानत देने से इनकार दिया। आरोपितों ने विशेष अदालत के साल 2022 के उस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें डिफॉल्ट बेल देने से इनकार कर दिया गया था। इसके बाद वे 28 जून 2022 को हाई कोर्ट पहुँचे थे।

महेश राउत को पिछले साल बॉम्बे हाई कोर्ट ने नियमित जमानत दी थी। हालाँकि, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने के लिए समय माँगे जाने के बाद हाई कोर्ट ने अपने आदेश पर एक सप्ताह के लिए रोक लगा दी थी। इसके बाद एनआईए ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। सर्वोच्च न्यायालय ने नियमित जमानत पर रोक लगा दी।

वहीं, नागपुर यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर शोमा सेन को 5 अप्रैल 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने नियमित जमानत दी थी। वहीं, नागपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सुधीर धवले, रिसर्चर रोना विल्सन और एडवोकेट सुरेंद्र गाडलिंग तथा महेश राउत अभी भी हिरासत में हैं। इससे पहले दिसंबर 2021 में न्यायमूर्ति संभाजी शिंदे की अगुवाई वाली हाईकोर्ट की बेंच ने गडलिंग को डिफ़ॉल्ट ज़मानत देने से मना कर दिया था।

बेंच ने इस मामले में सह-आरोपित सुधा भारद्वाज को डिफ़ॉल्ट ज़मानत दे दी थी, जबकि गडलिंग सहित 8 को ज़मानत देने से इनकार कर दिया था। मौजूदा कार्यवाही में गडलिंग ने राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई के लिए नामित एक विशेष अदालत के 28 जून 2022 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसने उनकी डिफ़ॉल्ट ज़मानत याचिका को खारिज कर दिया था।

अपने आवेदन में गडलिंग ने कहा कि पुलिस ने पुणे की विशेष अदालत से चार्जशीट दाखिल करने के लिए और समय माँगा है। नागपुर में प्रैक्टिस करने वाले वकील ने अपनी याचिका में आगे बताया कि चार्जशीट दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय माँगने वाली अर्जी सितंबर 2018 में दायर की गई थी और एनआईए को इसके लिए 90 दिन और मिले थे।

याचिका में कहा गया है कि पहली चार्जशीट 90 दिनों की अवधि का उल्लंघन करते हुए नवंबर 2018 में दायर की गई थी। इसके अलावा, फरवरी 2019 में एक अतिरिक्त चार्जशीट दायर की गई थी। चार्जशीट दाखिल करने के लिए दिए गए समय का विस्तार गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के प्रावधानों का उल्लंघन था।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) देवांग व्यास के नेतृत्व में अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का विरोध किया। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि तत्काल याचिका में दिए गए अधिकांश आधारों पर विचार करने के बाद न्यायमूर्ति शिंदे की पीठ ने दिसंबर 2021 में इसे खारिज कर दिया था और गडलिंग को जमानत देने से इनकार कर दिया था।

भगवान की पवित्र भूमि से खिलवाड़ नहीं करेंगे बर्दाश्त: तेलंगाना में चिलकूर बालाजी मंदिर के पास बन रहा था अवैध मस्जिद, बजरंग दल के विरोध के बाद निर्माण रुका

तेलंगाना के चिलकुर बालाजी मंदिर के पास एक जमीन को वक्फ जमीन बताकर वहाँ मस्जिद बनाया जा रहा है। अब बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने इसी का विरोध करते हुए कॉन्ग्रेस प्रशासन को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि मंदिर की पवित्रता के साथ कोई भी खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने निर्माण हो रहे मस्जिद को गिराने की माँग की है।

चिलकुर बालाजी देवस्थानम के अर्चक सीएस रंगराजन ने कहा, “चिलकुर बालाजी मंदिर के आसपास की जमीन पवित्र है और बहुत लंबे समय से मौजूद है। जिस तरह तिरुपति बालाजी मंदिर के आसपास की जमीन पूजनीय है, उसी तरह चिलकुर बालाजी मंदिर के आसपास का इलाका भी उतना ही पवित्र है और भगवान इसके असली मालिक हैं क्योंकि भगवान वेंकटेश्वर ने खुद को उन्हें सिलकुर में प्रकट किया है। यह अन्य धर्मों के पूजा स्थलों के लिए जगह नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा कि मंदिर की पवित्रता को सुनिश्चित करना पुलिस, राजस्व और अन्य विभागों की जिम्मेदारी है। वह बोले, “मंदिर के दो किलोमीटर के भीतर एक नई मस्जिद बनाई जा रही है। वे भी हमारे भाई हैं और हम उनसे प्यार करते हैं और उनका सम्मान करते हैं, लेकिन सरकार और मस्जिद बनाने वालों से यह अनुरोध है कि भूमि की पवित्रता और स्वामित्व को बरकरार रखा जाए। यह प्रशासन और कलेक्टर कार्यालय से हमारी सम्मानजनक अपील है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यहाँ किसी अन्य धर्म के लिए कोई नया पूजा स्थल न बनाया जाए।”

बजरंग दल के राज्य संयोजक शिवरामुलु ने माँग की कि स्थानीय तहसीलदार जिन्होंने निजी भूमि को वक्फ भूमि बताने वाली रिपोर्ट बनाई, उन्हें तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में मुस्लिम एमएलसी की बात सुनी गई, साइट पर बोरवेल खोदने का काम हुआ। उनके मुताबिक इन सबसे दौरान पुलिस मौके पर थी और निर्माण कार्य करते समय स्थानीय लोगों को आतंकित कर रही थी। इसी के बाद बजरंग दल ने चेतावनी दी कि हिंदू समुदाय अपने खिलाफ साजिश का जवाब देगा।

इस मामले में ताजा अपडेट के अनुसार हिंदू कार्यकर्ताओं और सीएस रंगराजन द्वारा विरोध प्रदर्शन के बाद, जिला कलेक्टर ने तुरंत इस मामले का संज्ञान लिया और मस्जिद के निर्माण को रोक दिया गया है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी थी कि अगर निर्माण जारी रहा तो प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।

‘संविधान हत्या दिवस’ मनाना संविधान का अपमान नहीं: दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज की समीर मलिक की याचिका, केंद्र के फैसले पर मुहर लगाई

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार (26 जुलाई 2024) को ‘संविधान हत्या दिवस’ को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (PIL) खारिज कर दी। याचिका में हर साल 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाने की केंद्र सरकार की अधिसूचना को चुनौती दी गई थी। इसमें उन लोगों को श्रद्धांजलि देने की बात है जिन्होंने 1975 में आपातकाल के खिलाफ संघर्ष किया था।

इस याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने सुनवाई की। पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जारी 13 जुलाई की अधिसूचना संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल की घोषणा के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह सिर्फ सत्ता एवं संवैधानिक प्रावधानों के दुरुपयोग और इसके बाद हुई ज्यादतियों के खिलाफ है।

इसके बाद अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा, “यह अधिसूचना संविधान का उल्लंघन या अनादर नहीं करती है।” दरअसल, यह जनहित याचिका समीर मलिक नाम के व्यक्ति ने दायर की थी। इस याचिका में तर्क दिया गया था कि आपातकाल संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत घोषित किया गया था। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि यह संविधान की हत्या की गई थी।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि सरकार की अधिसूचना अत्यधिक अपमानजनक है। हालाँकि, न्यायालय ने याचिकाकर्ता के तर्क को खारिज कर दिया। पीठ ने टिप्पणी की कि राजनेता हर समय लोकतंत्र की हत्या वाक्यांश का उपयोग करते हैं। न्यायालय ने कहा, “राजनेता हर समय लोकतंत्र की जननी वाक्यांश का उपयोग करते हैं। हम इसके लिए इच्छुक नहीं हैं। यह (PIL) इसके लायक नहीं है।”

बताते चलें कि इसी तरह का एक मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी लंबित है। उत्तर प्रदेश के झाँसी के रहने वाले एक अधिवक्ता संतोष सिंह ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में PIL दाखिल करके केंद्र सरकार की अधिसूचना को चुनौती दी है। याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति विकास की पीठ ने केंद्र से जवाब माँगा है। इस पर अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी।

पिता सबसे क्रूर, सबसे निर्दयी… दुनिया के सबसे अमीर आदमी की ट्रांसजेंडर बेटी का पहला इंटरव्यू, बताया- एलन मस्क नहीं बनने दे रहे थे लड़की इसलिए उनसे नफरत है

दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति एलन मस्क ने पिछले दिनों ‘वोक माइंड वायरस’ पर अपनी बात रखी थी। इसमें उन्होंने अपनी ट्रांसजेंडर बेटी विवियन विलियम्स का जिक्र भी किया था। इस इंटरव्यू को मीडिया में हर जगह जगह मिली जिसके बाद 20 साल की विवियन विलियम्स मीडिया के सामने आईं और उन्होंने अपने पिता के इंटरव्यू पर प्रतिक्रिया दी।

अमेरिकी मीडिया NBC न्यूज से बात करते हुए 20 साल की विवियन जेन्ना विलियम्स ने अपने पिता को निर्दयी और क्रूर कहा। साथ ही बताया कि मस्क कभी मानते नहीं थे कि वो विवियन में लड़की वाले गुण हैं। उन्होंने बतायास “मस्क ने कहा था कि मैं एक लड़की नहीं हूँ। मैं उनके लिए मर चुकी हूँ। यह कहकर उन्होंने हद पार कर दी। अगर वे लाखों लोगों के सामने झूठ बोलेंगे तो मैं इसे बर्दाश्त नहीं करूँगी।”

विवियन का कहना है कि उन्होंने मस्क को कोई धोखा नहीं दिया। मस्क को मालूम था कि विवियन अपना जेंडर बदलवा रही हैं। विवियन के अनुसार इंटरव्यू में ये बात कहकर हद पार कर दी गई है ट्रीटमेंट के लिए मस्क को बरगलाया गया। अपने बचपन को याद करते हुए विवियन ने कहा, “मस्क कभी भी एक अच्छे पिता नहीं रहे। उन्होंने कभी हमारा साथ नहीं दिया। मुझे और मेरे भाई-बहनों को मां के पास छोड़ दिया था। वे जब भी मिलते थे तो हमसे बुरा व्यवहार करते थे। हमेशा चिल्लाते रहते थे। वे लापरवाह थे। उनका ध्यान सिर्फ खुद पर रहता था।”

विवियन ने इंटरव्यू में कहा कि वह बचपन से ही एक लड़की जैसा महसूस करती थीं। इस पर मस्क ने उन्हें कई बार प्रताड़ित भी किया था। मस्क उसे बार-बार लड़कों की तरह रहने का दबाव डालते थे। आगे विवियन ने कहा,  वे अपने पिता से कोई संपर्क नहीं रखना चाहती हैं। वे 20 साल की हैं और अपने फैसले खुद ले सकती हैं। 

उन्होंने कहा कि 2020 में जब वो 16 साल की थी जब वो अपना इलाज कराना चाहती थीं लेकिन माता-पिता दोनों की अनुमति इसके लिए जरूरी थी। माँ सपोर्टिव थीं, मगर मस्क कभी साथ देने को तैयार नहीं थे। महामारी के वक्त उन्हें मौका मिला कि वो मस्क की क्रूरता से पीछा छुड़ा लें। बाद में उन्होंने किया भी ऐसा ही।

मालूम हो कि 2022 में विवियन ने अपना जेंडर बदलवाया था। इसके बाद भी उन्होंने यही बयान दिया था कि वे अपने पिता एलन मस्क से कोई रिश्ता नहीं रखना चाहती हैं। विवियन ने अपने नाम से मस्क हटाकर माँ का सरनेम लगाया और कहा था कि वो अपनी माँ से प्यार करती हैं। पिता क्रूर और निर्दयी हैं।

बता दें कि पिछले दिनों मस्क ने एक इंटरव्यू में बेटे के लिंग परिवर्तन को लेकर कहा था कि उन्हें पूरी तरह सूचित नहीं किया गया था कि ट्रीटमेंट के क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं। ‘लिंग की पुष्टि’ किए जाने की अवधारणा को उन्होंने एक ‘भयानक प्रथा’ करार दिया। उनका मानना है कि वो अपने बेटा खो चुके हैं, उनके बेटे को मार डाला जा चुका है। उन्होंने इसे ‘Woke Mind Virus’ का दुष्प्रभाव बताते हुए कहा कि वो इसे खत्म कर देंगे। इसी के बाद उनकी बेटी का यह इंटरव्यू सामने आया है।

केरल हाई कोर्ट ने रद्द किया नाबालिग से रेप का मामला… क्योंकि पीड़ित-आरोपित ने कर ली है शादी: कहा- परिवार को राजी-खुशी रहने दें

केरल हाई कोर्ट ने एक व्यक्ति के खिलाफ POCSO और रेप की गम्भीर धाराओं में दर्ज किए गए एक मामले को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आरोपित और पीड़िता अब समझौता करके शादी कर चुके हैं और खुशी-खुशी जी रहे हैं इसलिए इस मामले को रद्द कर दिया जाए।

केरल हाई कोर्ट ने नाबालिग का अपहरण और रेप के मामले के विरुद्ध दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह कार्रवाई की। कोर्ट के समक्ष आरोपित ने अपने विरुद्ध दर्ज FIR को रद्द करने की माँग की थी क्योंकि अब उसकी और पीड़िता की शादी हो चुकी है।

केरल हाई कोर्ट ने FIR रद्द करते हुए कहा, “रेप और POCSO के मामलों ने समझौता कानून को स्वीकार्य नहीं है। हालाँकि, इस मामले में, आरोपति ने नाबालिग पीड़िता के साथ संबंध बनाए और उसका यौन उत्पीड़न किया जिसके बाद वह गर्भवती हो गई। इसके बाद आरोपित ने पीड़िता से शादी कर ली है और अब वे दो बच्चों के साथ खुशी-खुशी रह रहे हैं। ऐसे मामलों में, समझौते के रास्ते में आने वाली बाधाओं को मानवता के नजरिए से देखते हुए हटा दिया जाना चाहिए। ताकि शांतिपूर्ण पारिवारिक जीवन सुनिश्चित हो सके।”

हाई कोर्ट ने कहा, “इस मामले में आपराधिक कार्यवाही जारी रखने की कोई आवश्यकता नहीं है जिससे उन्हें मुकदमेबाजी झेलनी पड़े और बच्चों के हित को नुकसान पहुँचे। ऐसे में इस मामले में FIR को निरस्त किया जा सकता है।” कोर्ट ने इससे पहले ऐसे मामलों में समझौते पर कड़ी टिप्पणियाँ की।

कोर्ट ने कहा, “रेप या रेप के प्रयास के मामले में, किसी भी परिस्थिति में समझौते के बारे में नहीं सोचा जा सकता है। ये एक महिला के शरीर के खिलाफ अपराध हैं जो उसका अपना मंदिर है। ये ऐसे अपराध हैं जो प्रतिष्ठा को कलंकित करते हैं। जब एक मानव शरीर अपवित्र होता है, तो ‘सबसे शुद्ध खजाना’ खो जाता है। ऐसे मामलों में समझौता नहीं हो सकता क्योंकि यह उसक सम्मान के खिलाफ होगा जो सबसे ज्यादा मायने रखता है। यह पवित्र है।”

यह मामला 2021 में हुए अपराध से जुड़ा है। इस मामले में आरोप था केरल के एर्नाकुलम में एक व्यक्ति एक 17 वर्षीय नाबालिग को अपने साथ भगा ले गया और बाद में उसके साथ यौन शोषण किया। इसके कारण नाबालिग गर्भवती हो गई। मामले में लड़की की माँ को भी आरोपित बनाया गया क्योंकि उसने इस घटना को पुलिस को नहीं बताया था।

इसके बाद आरोपित लड़के के विरुद्ध POCSO, रेप, अपहरण समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। हालाँकि, कुछ समय बाद लड़की और आरोपित ने शादी कर ली और उनके दो बच्चे भी हैं। दोनों पक्षों ने समझौता कर लिया और इस आरोपित के विरुद्ध FIR को रद्द करने की माँग की गई। इसके बाद कोर्ट ने यह निर्णय सुनाया।

भारत को जापान-इजरायल एवं NATO सहयोगियों जैसा दर्जा दे अमेरिका: रिपब्लिकन सीनेटर मार्को रुबियो ने पेश किया ‘यूएस-इंडिया डिफेंस कोऑपरेशन एक्ट’ बिल

अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो ने 25 जुलाई को कॉन्ग्रेस में एक विधेयक पेश कर भारत को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में जापान, इज़राइल, कोरिया और नाटो सहयोगियों के बराबर दर्जा देने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, विधेयक में यह भी कहा गया है कि अगर यह साबित हो जाता है कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ आतंकवाद को प्रायोजित किया है तो उसकी सुरक्षा सहायता रोकी जाए।

सीनेटर रुबियो ने भारत की चिंताओं को रेखांकित करते हुए अपने विधेयक में भारत की क्षेत्रीय अखंडता का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता को लेकर बढ़ते खतरों को देखते हुए भारत का हर स्तर पर समर्थन किया जाना चाहिए। सीनेटर मार्को रुबियो ने सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी बातें रखीं।

फ्लोरिडा के सीनेटर मार्को रुबियो ने कहा, “मैंने यूएस-इंडिया डिफेंस कोऑपरेशन एक्ट बिल पेश किया है। भारत के साथ अपनी साझेदारी को मजबूत करने के लिए, यह जरूरी है कि हम नई दिल्ली के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को बढ़ाएँ। कम्युनिस्ट चीन की आक्रामकता का सामना कर रहे भारत को सर्वश्रेष्ठ समर्थन देने के लिए एक बिल पेश किया गया है।”

रिपब्लिकन नेता रुबियो ने कहा, “कम्युनिस्ट चीन इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने क्षेत्र का आक्रामक रूप से विस्तार जारी रख रहा है और वह हमारे क्षेत्रीय भागीदारों की संप्रभुता और स्वायत्तता को बाधित करना चाहता है। इन दुर्भावनापूर्ण चालों का मुकाबला करने में अमेरिका के लिए अपना समर्थन जारी रखना महत्वपूर्ण है। क्षेत्र के अन्य देशों के साथ, भारत इसमें अकेला नहीं है।”

विधेयक में वामपंथी चीन के प्रभाव से निपटने में अमेरिका-भारत सहयोग के महत्व पर जोर दिया गया है। इसमें कहा गया है कि इस सहयोग को मजबूत करने के लिए नई दिल्ली के साथ अमेरिका द्वारा रणनीतिक, राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य संबंधों में सुधार करना आवश्यक और बेहद महत्वपूर्ण है।

इस विधेयक में एक ‘नीति निर्धारित किया जाएगा जिसमें कहा जाएगा कि संयुक्त राज्य अमेरिका भारत की क्षेत्रीय अखंडता के लिए बढ़ते खतरों के जवाब में भारत का समर्थन करेगा। इसके साथ ही विरोधियों को रोकने के लिए भारत को आवश्यक सुरक्षा सहायता प्रदान करेगा और रक्षा, नागरिक अंतरिक्ष, प्रौद्योगिकी, चिकित्सा और आर्थिक निवेश पर भारत के साथ सहयोग करेगा।’

अगर यह बिल पास हो जाता है तो यह भारतीय सेना द्वारा वर्तमान में उपयोग किए जा रहे रूसी उपकरणों की खरीद के लिए CAATSA प्रतिबंधों से उसे सीमित छूट मिल जाएगी। विधेयक में यह प्रस्ताव है कि भारत को रक्षा सामग्री, रक्षा सेवाएँ, डिजाइन और निर्माण सेवाएँ तथा प्रमुख रक्षा उपकरण बेचने के लिए प्रस्ताव पत्रों के प्रमाणन पर शीघ्र विचार करना अमेरिकी हितों के अनुरूप है।

इसके साथ ही इसमें यह भी कहा गया है कि आगामी खतरों को रोकने की भारत की क्षमता शांति और स्थिरता के हित में है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विधेयक में भारत के साथ वैसा ही व्यवहार करने का प्रस्ताव रखा गया है जैसे कि वह प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के मामले में जापान, इजरायल, कोरिया और नाटो सहयोगियों जैसे अमेरिकी सहयोगियों के समान दर्जा रखता हो।

इस विधेयक में विदेश मंत्री को भारत के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत करने का भी प्रस्ताव है, ताकि सैन्य सहयोग बढ़ाया जा सके, दो वर्षों के लिए भारत को अतिरिक्त रक्षा सामग्री शीघ्र भेजी जा सके और भारत को अन्य सहयोगियों के समान दर्जा दिया जा सकेृ तथा नई दिल्ली के साथ अंतर्राष्ट्रीय सैन्य शिक्षा एवं प्रशिक्षण सहयोग का विस्तार किया जा सके।

अगर यह विधेयक पारित हो जाता है तो पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ा झटका हो सकता है। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान द्वारा भारत के खिलाफ आतंकवाद और छद्म आतंकी समूहों के इस्तेमाल पर कॉन्ग्रेस के समक्ष एक रिपोर्ट पेश की जानी चाहिए। इसके अलावा, आतंकवाद प्रायोजित करते हुए पाए जाने पर पाकिस्तान को सुरक्षा सहायता से वंचित करने का प्रस्ताव है।

निजाम और इरफान ने हिंदू युवक का चाकू से गला काटा, VHP कार्यकर्ता के साथ ‘सर तन से जुदा’ की कोशिश: पुलिस ने दबोचा

गुजरात के भुज में विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यकर्ता पर दो मुस्लिम युवकों ने हमला कर दिया, जिसमें वो बुरी तरह से घायल हो गए। घायल हुआ युवक अपने दोस्त का विवाद सुलझाने पहुँचा था, कि निजाम और इरफान ने उसपर हमला कर दिया। इस हमले में घायल का अस्पताल में इलाज चल रहा है, पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक, गुजरात के भुज में सोमवार (22 जुलाई) 2024 को भावेश परमार नाम के विहिप कार्यकर्ता के साथ ‘सर तन से जुदा’ की कोशिश हुई। भावेश परमार भुज में मुंद्रा रोड पर रहते हैं और बजरंग टी हाउस नाम की चाय की दुकान चलाते हैं। इस घटना की शुरुआत 19 जुलाई को हुई, जहाँ माधापर पुलिस ने कुछ रिक्शा को हिरासत में ले लिया। ये रिक्शा गलत तरीके से चलाए जा रहे थे। इस बीच, स्थानीय पत्रकार राजू प्रजापति ने पुलिस कार्रवाई की तस्वीरें खींच ली। जिसके बाद निजाम और इरफान ने राजू को मिलने के लिए बुलाया। राजू ने अपने दोस्त और विहिप कार्यकर्ता भावेश को ये बात बताई, जिसके बाद वो भी निजाम-इरफान से मिलने पहुँच गए।

इस मामले की एफआईआर की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। भावेश ने अपनी शिकायत में कहा कि वो, राजू प्रजापति और एक अन्य साथी जुबली सर्कल पहुँचे, जहाँ निजाम और इरफान भी पहुँच गए। निजाम ने यहाँ राजू के सीने पर हमला बोल दिया। भावेश ने मामले को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन निजाम ने चाकू निकाला और भावेश के गले पर चला दिया। इस हमले में भावेश ने बचने की कोशिश की, लेकिन चाकू बाएँ कंधे को चीरकर निकल गया। तेजी से खून बहने पर उन्होंने लोगों को आवाज लगाई, तो निजाम और इरफान फरार हो गए। दोनों ने फरार होने से पहले धमकी भी दी कि कहीं भी दिखने पर भावेश को जान से मार देंगे। बाद में भावेश के दोनों साथी उन्हें भुज अस्पताल लेकर गए, जहाँ उनका इलाज किया जा रहा है।

विहिप कार्यकर्ता को जानते थे हमलावर, फिर भी गले पर किया हमला

भावेश परमार वीएचपी कार्यकर्ता हैं और गौरक्षा में सक्रिय हैं। इस मामले को लेकर भावेश परमार ने ऑपइंडिया से बातचीत की। भावेश ने कहा कि उन्हें इस बात का कोई अंदेशा नहीं था कि उन पर हमला किया जाएगा। आरोपित जानते थे कि वो विहिप के कार्यकर्ता हैं, और गौरक्षा में सक्रिय है। इस लिए उन्होंने जानबूझकर सोच-समझ कर हमला किया होगा। उन्होंने कहा कि पुलिस कार्रवाई तो कर रही है, लेकिन सरकार को इस बारे में खास ध्यान देने की जरूरत है कि हिंदू कार्यकर्ताओं और गौ-रक्षकों पर हमला करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि ऐसे मामले फिर न आएँ। उन्होंने आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाने की माँग की है।

भुज पुलिस ने मामला दर्ज कर शुरू की जाँच

इस मामले में भुज-बी डिवीजन पुलिस ने मामला दर्ज कर निजाम मुगल और इरफान बलूच को गिरफ्तार कर लिया है। उनके खिलाफ भारतीय न्यायिक संहिता की धारा 109, 115(2), 296(बी), 351(2), 61(2)(बी) और धारा 135(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है। दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिए हैं।

हालाँकि इस मामले में पुलिस की कार्रवाई पर भी संदेश जताया जा रहा है, क्योंकि दोनों आरोपितों की पुलिस ने कोर्ट से रिमांड ही नहीं माँगी, जिसके बाद दोनों को कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया। ये मामला गंभीर है, इसके बावजूद रिमांड नहीं माँगा गया। वहीं, बताया जा रहा है कि आरोपित पहले भी कुछ मामलों में गिरफ्तार किए जा चुके हैं, इसलिए उनके खिलाफ PASA एक्ट लगाने की माँग की जा रही है। इस मामले में ऑपइंडिया ने अधिक जानकारी के लिए भुज पुलिस से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। जवाब मिलने के बाद रिपोर्ट अपडेट की जाएगी।

ये खबर मूल रूप से ऑपइंडिया गुजराती पर प्रकाशित की गई है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

ब्राह्मण ‘लुटेरा’, ब्राह्मण ‘धोखेबाज’… दानपेटी पर रखते हो नजर, लोगों को ठगते हो: इन्फ्लुएंसर ने मजे के लिए बनाई रील तो बिदक गए ब्राह्मण विरोधी

सोशल मीडिया पर ब्राह्मण विरोधी माहौल का दिखना कोई नया नहीं है। लोग समय-समय पर ब्राह्मणों को टारगेट करते हैं और साबित करना चाहते हैं कि क्यों उनका विरोध सही है। इस बार इस नफरत का शिकार एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मानसी कुलकर्णी हुई हैं।

मानसी ने अपने इंस्टा अकॉउंट पर ट्रेंडिंग स्टाइल में ब्राह्मण जाति और उनकी सामाजिक आदतों को लेकर एक वीडियो बनाई थी। इसी वीडियो के नीचे ब्राह्मणों को लेकर कई लोगों ने अपनी तुच्छ मानसिकता जाहिर की।

ब्राह्मणों से नफरत करने वाले यूजर ने लिखा, “हम ब्राह्मण हैं हम लोगो को धर्म के नाम पर ठगते हैं।” एक यूजर ने कहा- “ब्राह्मण हैं, हमारे भीतर इंसानियत नहीं होती।” एक ने कहा, “हम ब्राह्मण हैं हम लोग सिर्फ दानपेटी पर ध्यान देते हैं।”

इन कमेंटों को देखने के बाद लोग हैरान है कि आखिर ब्राह्मणों की इतनी कम तादाद होने के बावजूद लोग ब्राह्मणों से इतनी घृणा कैसे कर सकते हैं। एक यूजर ने सारे कमेंट देख कहा, “मैं हैरान हूँ कि 2% ब्राह्मण हैं फिर भी लोग उनके खिलाफ नफरत को फैलाते हैं। ये नफरत हिंदुत्व के खिलाप है क्योंकि ब्राह्मण ही वो हैं जो हिंदू धर्म और संस्कृति से लोगों को अवगत कराते हैं।”

एक यूजर ने कहा, “70+ साल से ब्राह्मण विरोधी एजेंडा, हिंदू धर्म को नष्ट करने के उद्देश्य से ब्राह्मणों को निशाना बनाया जा रहा है। विडंबना यह है कि ब्राह्मण राजा नहीं थे, वे अमीर नहीं थे, वे योद्धा नहीं थे और उनकी संख्या भी अधिक नहीं थी, फिर भी, उन पर उत्पीड़न का आरोप लगाया जाता है, इस तरह का बकवास तर्क शायद दुनिया में कहीं और मौजूद नहीं है। हिंदू समुदाय के ज़्यादातर बेवकूफ़ वे हैं जो मुसलमान या ईसाई बनने के बारे में दो बार नहीं सोचेंगे।”

बता दें कि मानसी कुलकर्णी की जिस वीडियो पर ये सारा प्रोपगेंडा फैलाया गया है वो वीडियो 10 अप्रैल को पोस्ट की गई थी। कमेंट में उन्होंने कहा भी था कि ये सब उन्होंने किसी की भावनाएँ आहत करने की नहीं किया है। इस वीडियो को 5 मिलियम से ज्यादा बाद देखा जा चुका है जिसमें ब्राह्मणों को लुटेरा, धोखेबाज जैसे शब्द कहे गए हैं।

नोट: ये रिपोर्ट सिद्धि सोमानी की रिपोर्ट पर आधारित है। आप मूल रिपोर्ट इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

पेरिस ओलम्पिक से ठीक पहले फ्रांस में ट्रेन सेवा ठप, जगह-जगह रेल लाइन पर हमले, सरकार ने बताया साजिश: प्रवासियों ने यहीं किया था गैंगरेप

फ्रांस की राजधानी पेरिस में ओलम्पिक खेलों की शुरुआत से कुछ ही घंटे पहले देश की रेल सेवा बाधित हो गई है। फ्रांस के हाई स्पीड रेल नेटवर्क को देश भर में जगह-जगह क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। फ्रांस की सरकार ने इसे साजिश और आपराधिक कृत्य बताया है। तुरंत ट्रेनों के चालू होने के कोई आसार नहीं हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फ्रांस में चलने वाली TGV तेज गति रेल सेवाएँ गुरुवार (25 जुलाई, 2024) से ही बाधित हो गईं। इनके बाधित होने का कारण देश भर में ट्रेन की पटरियों के पास तोड़फोड़ रहा। ट्रेन पटरियों को क्षतिग्रस्त करने के साथ ही रेल सेवा से जुड़े ढाँचे को देश भर में नुकसान पहुँचाया गया है।

इस कारण से फ्रांस की सरकारी रेल सेवा एजेंसी SNCF ने अधिकांश ट्रेनों को रद्द कर दिया। SNCF ने एक बयान जारी करके कहा, “फ्रांस में साजिश के कारण, कई हाई स्पीड लाइनों पर असर पड़ा है, कई हाई स्पीड ट्रेनों का मार्ग बदला जा रहा है या उन्हें रद्द किया जा रहा है। हमारी टीमें स्टेशनों, कॉल सेंटरों पर पूरी तरह से सक्रिय हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी यात्री अपने गंतव्य तक पहुँच सकें।”

SNCF के अलावा ब्रिटिश चैनल के रास्ते फ्रांस से यूनाइटेड किंगडम को जाने वाली यूरोस्टार ट्रेन भी इस तोड़फोड़ के कारण प्रभावित है। फ्रांस से बेल्जियम की रेल सेवाएँ भी बंद हो गई हैं। बताया गया है कि इन रेल सेवाओं को सुचारू रूप से चालू होने में कम से कम 2 दिन लगने वाले हैं।

फ्रांस के यातायात मंत्री ने इन तोड़फोड़ की घटना को पहले से रची गई साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा, “कल रात कई TGV लाइनों को निशाना बनाकर की गई साजिश के कारण इस वीकेंडतक यातायात गंभीर रूप से बाधित रहेगा। मैं इन आपराधिक कार्रवाइयों की कड़ी निंदा करता हूँ। इसे कई फ्रांसीसी लोगों की छुट्टियों पर आवाजाही प्रभावित होगी। यातायात की स्थिति को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए मौजूद SNCF टीमों को बहुत-बहुत धन्यवाद।”

फ्रांस में रेल लाइनों की बाधित करने की इस घटना के कारण लगभग 8 लाख यात्री प्रभावित हुए हैं। अभी यह जानकारी सामने नहीं आई है कि यह साजिश किसने रची और किन लोगों ने इन पटरियों को क्षतिग्रस्त किया। फ्रांस में रेल लाइनों को बाधित करने की यह घटना पेरिस ओलम्पिक के ठीक पहले हुई है।

इन ओलम्पिक की शुरुआत शुक्रवार (26 जुलाई, 2024) को होगी। पेरिस ओलम्पिक में 7500 खिलाड़ी और 3 लाख से अधिक दर्शक जुट रहे हैं। इससे पहले इस बाधा के कारण बड़ा खलल पड़ा है। फ्रांस में ओलम्पिक की सुरक्षा को लेकर बड़े इंतजाम किए गए हैं लेकिन लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं से इस पर प्रश्न उठ रहे हैं।

पेरिस में हाल ही में ऑस्ट्रेलिया से आई एक महिला से पाँच अफ्रीकी प्रवासियों ने गैंगरेप किया था। महिला को अकेला पाकर वह उसे गंभीर अवस्था में छोड़ गए थे। इसके बाद वह किसी तरह पुलिस के पास पहुँच पाई थी।