कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार में कानून व्यवस्था और आर्थिक हालत, दोनों ही बिगड़ती जा रहीं हैं। कर्नाटक की राजधानी में सरेआम एक महिला की पीजी में घुस कर हत्या कर दी गई। कर्नाटक के एक और जिले में भी एक महिला की हत्या हुई। वहीं यह जानकारी भी सामने आई है कि कॉन्ग्रेस सरकार में लगभग 1200 किसान आत्महत्या कर चुके हैं।
जानकारी के अनुसार, बेंगलुरु के कोरमंगला इलाके में रहने वाली एक महिला की पीजी के भीतर घुस कर एक व्यक्ति ने हत्या कर दी। मृतका कृति कुमारी बिहार की रहने वाली थी। उसकी हत्या करने वाले की पहचान नहीं हो पाई है। यह घटना मंगलवार (23 जुलाई, 2024) को देर रात में हुई।
पुलिस को शक है कि महिला की हत्या उसकी किसी जान पहचान वाले व्यक्ति ने ही की है। मृतका कृति कुमार बेंगलुरु में रह कर एक निजी कम्पनी में काम करती थी। पुलिस अब आसपास के इलाकों के CCTV की जाँच करके हत्यारे की तलाश करने का प्रयास कर रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच चालू कर दी है।
बेंगलुरु के अलावा कर्नाटक के बड़े शहर शिवमोगा में भी एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी और शव को दफना दिया। बताया गया कि महिला ने उससे प्रेम विवाह किया था। दोनों के परिवार इस विवाह के लिए राजी नहीं थे। दोनों के बीच कुछ समय से विवाद चल रहा था। पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।
कर्नाटक में कानून व्यवस्था के अलावा भ्रष्टाचार के मामले भी सामने आ रहे हैं। हाल ही में कर्नाटक के CM सिद्दारमैया की पत्नी को मैसुरु में एक महँगे इलाके में जमीन आवंटन का मामला सामने आया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि MUDA ने सिद्दारमैया की पत्नी की कम दाम वाली जमीन अधिग्रहित कर बदले में महँगे इलाके में जमीन दी।
आरोप लगाया गया था कि दोनों जमीनों की कीमत में काफी अंतर था और इससे सिद्दारमैया की पत्नी को इससे भारी फायदा हुआ। इसके अलावा हाल ही कर्नाटक में वाल्मीकि निगम में भी घोटाले का मामला सामने आया था। यह निगम कर्नाटक में जनजातियों के विकास के लिए काम करता है।
आरोप है कि जनजातियों के विकास के लिए दिए गए ₹88 करोड़ रूपए का हेरफेर किया गया। इस मामले में कर्नाटक सरकार में मंत्री बी नागेन्द्र को मंत्रिपद छोड़ना पड़ा था। वह वर्तमान में जेल में हैं और जाँच एजेंसियाँ इस मामले की तह तक पहुँचने का प्रयास कर रही हैं।
किसानों की आत्महत्या भी बड़ा मुद्दा
कर्नाटक में किसानों की हालत भी बिगडती जा रही है। हाल ही में कर्नाटक सरकार के राजस्व विभाग ने स्वयं माना है कि पिछले 15 माह में ही 1182 किसान राज्य में आत्महत्या कर चुके हैं। सबसे अधिक आत्महत्या के मामले बेलगावी, धारवाड़ और हावेरी में सामने आए हैं। इन जिलों में 100 से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है।
बताया गया है कि इनमें से अधिकांश किसानों ने सूखा, बढ़ते कर्ज और फसल खराब होने के कारण आत्महत्या की है। कर्नाटक के इन किसानो की आत्महत्या का मुद्दा सितम्बर 2023 में भी उठा था। तब राज्य के APMC मंत्री शिवानंद पाटिल ने कहा था कि जबसे सरकार ने मुआवजा बढ़ाया है तबसे किसानों की आत्महत्या के मामले अधिक सामने आ रहे हैं।
OpIndia को बैन करने की बातें सोशल मीडिया पर चल रही हैं। क्यों? क्योंकि कुछ लोगों को सच सुनने-पढ़ने से चिढ़ मचती है। वो खुद को अपने समुदाय या मजहब का ठेकेदार मान लेते हैं। कौन हैं वो लोग, किस बात पर बैन-बैन चिल्ला रहे? वो हैं कुछ कट्टर इस्लामी और उनके भाईचारे वाले कुछ वामपंथी। हज पर गई मुस्लिम औरतें और बच्चियों के साथ यौन शोषण की खबरों से इनके पाजामे वाले दिमाग में गुस्सा उतर आया है। अपने मजहब के कुछ मर्दों की हकीकत पर शर्म करने के बजाय अपनी ही बहन-बहू-बेटियों से हुई छेड़छाड़ को छिपाने में लग गए हैं।
OpIndia ने बस एक खबर लिखी। खबर 100% सच्ची। वो भी आपबीती। आपबीती जिसे पीड़ित औरतों और बच्चियों ने CNN को सुनाई। CNN की उस खबर का लिंक भी OpIndia ने पूरे सम्मान के साथ लगाया। पाजामे वाले दिमाग से दुनिया को देखने वाले शायद वो लिंक खोल कर पढ़ना भूल गए। ‘इस्लाम को बदनाम’, ‘खतरे में इस्लाम’ आदि-इत्यादि विशेषणों के साथ रिपोर्ट को ही झूठा साबित करने का खेल सोशल मीडिया पर खेल दिया। अब खेल शुरू ही हो गया है तो इसका दायरा बढ़ाते हैं। सिर्फ CNN ही क्यों, हज पर सिर्फ 5-6 यौन शोषण की खबरें ही क्यों… अन्य बड़े मीडिया संस्थानों में छपी खबरों के साथ समझते हैं इनकी मानसिकता।
पत्रकारिता की दुनिया में BBC को कट्टर इस्लामी-वामपंथी लगभग अपना बाप मानते हैं… मतलब BBC ने बोला तो बोला! इसी से शुरू करते हैं। बात 2010 की है। एंगी एंगुन्नी (Anggi Angguni) नाम की महिला के साथ हज के दौरान यौन शोषण हुआ था। उसकी बहन के साथ ‘पाक-मस्जिद’ के भीतर एक गार्ड ने यौन शोषण किया था। एंगी एंगुन्नी यह बताती हैं कि हज पर जाना महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है और BBC इसे दिखाता है।
BBC की रिपोर्ट के अनुसार एंगी एंगुन्नी ऐसी अकेली महिला नहीं हैं, जिनके साथ हज के दौरान यौन शोषण हुआ हो। #MosqueMeToo नाम के ट्रेंड के साथ BBC ने अन्य पीड़ित महिलाओं की आपबीती भी प्रकाशित किया – कई पीड़ितों की आपबीती नाम के साथ तो कई का नाम छिपा (कारण: कट्टर इस्लामी सर तन से जुदा कर देते हैं, कार्टून बनाने पर एकसाथ कई पत्रकारों को गोलियों से छलनी कर देते हैं) कर।
हज पर गई महिलाओं-बच्चियों के यौन शोषण पर BBC की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट
The Washington Post – भारी-भरकम नाम है। वामपंथी कसमें खाते हैं इसकी। कम-अक्ल कट्टर इस्लामी भी दिन में 5 बार लाउडस्पीकर पर इसका नाम चिल्लाते हैं। इसी वॉशिंगटन पोस्ट पर मोना अल्ताहवी (Mona Eltahawy) ने हज के दौरान उनके साथ हुए यौन शोषण की आपबीती लिख डाली है।
मोना अल्ताहवी के साथ हज पर 2 बार यौन शोषण तब हुआ, जब यह सिर्फ 15 साल की थीं। पहली बार भीड़ में किसी ने इनके पिछवाड़े में हाथ डाला, छुड़ाने की कोशिश करने पर भी नहीं छोड़ रहा था। दूसरी बार यौन शोषण हुआ काले पत्थर को चूमने के दौरान। वहाँ खड़े पुलिस वाले ने ही मोना के स्तन को दबोच लिया।
हज के दौरान यौन शोषण, वॉशिंगटन पोस्ट पर प्रकाशित
‘इस्लाम सबसे पाक’ मानने वाली कट्टर इस्लामी मानसिकता का नमूना भी मोना अल्ताहवी ने The Washington Post में बताया है। उन्होंने हज के दौरान हुए यौन शोषण का जिक्र जब आम जनता के सामने किया तो एक मुस्लिम औरत ही उनको चुप करवाने लगी। तर्क दिया कि विदेशियों के सामने हज पर मुस्लिम औरतों का यौन शोषण टाइप बातें करोगी तो इस्लाम की बदनामी होगी।
क्या हज पर यौन शोषण की खबरें इक्की-दुक्की हैं? इसका जवाब भी मोना अल्ताहवी ने दिया है। उनके अनुसार #MosqueMeToo नाम के ट्रेंड के साथ हजारों मुस्लिम महिलाओं ने अपने-अपने साथ हुए यौन शोषण की आपबीती को सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इंडोनेशिया, अरब, तुर्की, जर्मनी, स्पेन, फ्रांस, ईरान… मतलब अलग-अलग देशों की पीड़िताओं ने अपनी-अपनी भाषा में हज पर अपने बुरे अनुभवों से दुनिया को रूबरू करवाया है।
वामपंथी मीडिया संस्थानों से एक कदम आगे बढ़ते हैं। इस्लामी मुल्क कतर वाले न्यूज चैनल में छपी खबर पर चलते हैं। सउदी अरब में नरजीस अल-अवामी (Narjis al-Awami) नाम की एक TV एंकर हैं। यह जब हज पर गई थीं, तो इनका भी यौन शोषण हुआ था। newarab.com नाम की वेबसाइट पर आप इस खबर को पढ़ सकते हैं।
हज पर TV एंकर के साथ भी यौन शोषण
नरजीस बताती हैं कि काबा में काले पत्थर को चूमने के दौरान उनका यौन शोषण किया गया। उनके अनुसार वहाँ महिलाओं की लाइन में मुस्लिम मर्द गलत मंशा के साथ घुस जाते हैं, भीड़ का फायदा उठाते हैं। ऐसी ही भीड़ में नरजीस की जाँघों को दबोच कर उनका यौन शोषण किया गया था।
कट्टर इस्लामी समाज में औरतों की औकात
सोशल मीडिया पर ऐसी हजारों औरतें हैं, जिन्होंने हज के दौरान उनके साथ हुए यौन शोषण की घटनाओं का सिलसिलेवार वर्णन किया है। यहाँ उनका जिक्र जानबूझ कर नहीं किया जा रहा। इसलिए क्योंकि कट्टर इस्लामी मानसिकता वाले मर्द उनकी आपबीती को झूठा करार देंगे। कुछ तो महिलाओं-बच्चियों के हज पर जाने को ही गैर-इस्लामी बताने लग जाते हैं। आखिर अपनी ही बहन-बेटी-बहू को लेकर इतनी घटिया सोच आती कहाँ से है इनके दिमाग में? अपने भाईजान के पाजामे की गंदगी से इनको दिक्कत नहीं होती लेकिन OpIndia अगर उस गंदगी को लेकर खबर छाप दे तो लाउडस्पीकर पर 5 बार बैन-बैन चिल्लाने लगते हैं! झुंड वाली मानसिकता का आधार क्या है आखिर?
शरिया कानून टाइप का कुछ होता है। कट्टर इस्लामी लोग इसके ख्वाब में बहुत कुछ बुनते रहते हैं। शरिया कानून के ख्वाब में ही लोग फट जाते हैं, लड़कियाँ भाग कर या फँसा कर सीरिया ले जाई जाती हैं… सेक्स स्लेव बना दी जाती हैं। ऊपर जिस मानसिकता का जिक्र है, शरिया कानून के ख्वाब से ही वो पनपता है।
मर्दों का, मर्दों के लिए, मर्दों के द्वारा – शरिया कानून को मोटा-मोटी आप ऐसे समझ सकते हैं। यहाँ औरतों की औकात मर्दों की जूती के बराबर होती है। जिनको विश्वास नहीं होगा, उनके लिए BBC का लिंक लगा दे रहा हूँ। विकिपीडिया पर भी है सब कुछ लेकिन उसका लिंक जानबूझ कर नहीं लगा रहा क्योंकि वो खुद ही वामी-इस्लामी गठबंधन के गढ़ में है।
वापस लौटते हैं शरिया कानून में औरतों की औकात मर्दों की जूती के बराबर वाली बात पर। इसको उदाहरण से समझते हैं। सउदी अरब में अगर कोर्ट के अंदर एक औरत गवाही देगी और एक मर्द गवाही देगा तो शरिया कानून के तहत औरत की गवाही मर्द से आधी मानी जाएगी। न्यायालय ने ही औरतों की औकात आधी कर दी… कट्टर इस्लामी समाज से क्या उम्मीद!
बीबीसी का स्क्रीनशॉट, ताकि वामी-इस्लामी का मुँह रहे बंद
शरिया कानून का एक और उदाहरण। एक शब्द है – हुदूद। शब्द मात्र एक है, लेकिन इस्लामी औरतों के लिए यह नरक का द्वार है। पाकिस्तान में इस शब्द के साथ एक कानून बना दिया गया। इस्लाम के नाम पर बने इस मुल्क के हुदूद कानून से जुड़ा पूरा नरक पढ़ना चाहते हैं तो एशियन ह्यूमन राइट्स कमीशन की इस रिपोर्ट को पढ़ सकते हैं। मोटा-मोटी इसको ऐसे समझ सकते हैं – अगर पाकिस्तान में किसी महिला का बलात्कार हुआ है तो उस महिला को ही कोर्ट में यह साबित करना होगा कि उसने अपनी मर्जी से सेक्स नहीं किया था। इतना ही नहीं, उसे अपनी ही रेप की गवाही के लिए 4 लोगों को कोर्ट में लाना होगा।
कट्टर इस्लामी मानसिकता वाले लोग, समाज या मुल्क में यह है औरतों की औकात।
वामी हो या इस्लामी… सच स्वीकार नहीं
धर्म या मजहब से परे, औरतों-बच्चियों के साथ कहीं कुछ वीभत्स हुआ या होता है तो उसकी रिपोर्टिंग होनी चाहिए। उस रिपोर्ट का ज्यादा से ज्यादा प्रचार-प्रसार भी होना चाहिए। इसमें दिक्कत क्यों है? हज पर जाने वाली महिलाओं के साथ मुस्लिम मर्द छेड़छाड़ करते हैं – इस खबर को तो मुस्लिम समाज को ही ज्यादा से ज्यादा फैलाना चाहिए, ताकि ऐसी अपराधी प्रवृति के लोग डरें-सहमें। लेकिन नहीं। खबरें दबाई जा रही हैं, OpIndia को बैन करने की बात ट्रेंड की जा रही है।
हज पर जाने वाली महिलाओं के साथ मुस्लिम मर्द छेड़छाड़ करते हैं – इस खबर में इस्लाम या इस्लाम के ‘पाक’ जगहों पर सवाल कहाँ है? फिर बवाल क्यों? बवाल इसलिए क्योंकि औरतों को कट्टर इस्लामी इंसान ही नहीं मानते हैं।
OpIndia को बैन की बात ये इसलिए कर रहे क्योंकि इससे इनका असली चेहरा सामने आ गया। एक पल के लिए मान भी लें कि OpIndia को बैन कर देना चाहिए… तो तर्क क्या होगा आपका? क्योंकि OpIndia ने एक खबर छापी, जो 100% सच है? या कोई और झूठ रचेंगे? या तर्क ही नहीं देंगे… जैसे अपने कौम की औरतों को बोलने तक नहीं देते, गवाही तक नहीं मानी जाती उनकी?
OpIndia ने क्यों बदला शीर्षक
OpIndia अपने पाठकों के दम पर है। पाठकों ने हमें बताया कि अपराध की विविधता के कारण, शीर्षक में उन विविधताओं के जिक्र होने के कारण वो शेयर करने से हिचक रहे हैं। यह खबर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचे, शीर्षक में बदलाव इस कारण से किया गया। कोई इस मुगालते में न रहे कि OpIndia बैन को लेकर 4 सियार हुआँ-हुआँ करने लगे, इस कारण से शीर्षक बदला गया है। हकीकत तो यह है कि CNN की खबर के आधार पर पिछली खबर बनी थी। बैन वाले बवाल के बाद अब BBC, The Washington Post के साथ-साथ कतर के न्यूज चैनल के आधार पर अब ये खबर लोगों तक पहुँच रही है। हकीकत यह भी है पुराना शीर्षक सिर्फ बदला गया है, भूलाया नहीं गया है। हमारे जिन पाठकों को पुराना शीर्षक पसंद हो, वो उसके साथ उस खबर को शेयर कर सकते हैं।
हज पर महिलाओं-बच्चियों के यौन शोषण से संबंधित पिछली खबर का पुराना और नया दोनों ही शीर्षक दिया हुआ है:
पुराना शीर्षक: हज पर मुस्लिम मर्द दबाते हैं मुस्लिम बच्चियों-औरतों के स्तन, पीछे से सटाते हैं लिंग, घुसाते हैं ऊँगली: जिन-जिन ने झेला, पढ़िए उनकी कहानी
नया शीर्षक: हज पर मुस्लिम मर्द अपने ही मजहब की बच्चियों-औरतों के साथ करते हैं यौन शोषण: जिन-जिन ने झेला, पढ़िए उनकी कहानी
हिंदू-घृणा से सने वामी-इस्लामी के आगे नहीं झुकेगा OpIndia
शिवलिंग पर कंडोम पहनाने का काम किसने किया था? मीडिया में इस अश्लीलता को किसने फैलाया था? तब वामी-इस्लामी गठबंधन ने प्रेस क्लब जाकर मशाल जलाई थी क्या विरोध में?
भारत माता की योनि से खून बहने वाला ग्राफिक्स किसने बनाया था? मीडिया से लेकर सोशल मीडिया पर इसका प्रचार-प्रसार कौन लोग कर रहे थे?
रेप-पीड़ित किसी बच्ची के सामने भगवान राम को असहाय दिखाने वाले पोस्टर-बैनर-ग्राफिक्स कहाँ-कहाँ पोस्ट किए गए थे? तब किन-किन के बैन की बात उठी थी?
अगर शीर्षक पर सिर्फ अश्लील होने का आरोप है तो ऊपर के 3 पॉइंट भी खबरों से ही संबंधित हैं। भारत की खबरों से संबंधित। लेकिन इसमें घुसाए गए हिंदू देवी-देवता। न सिर्फ घुसाए गए बल्कि उनका अश्लील चित्रण भी किया गया। हज पर महिलाओं-बच्चियों के यौन शोषण से संबंधित पिछली खबर या इस खबर में क्या इस्लाम के किसी भी प्रतीक पर उँगली उठाई गई? अगर नहीं तो यह अश्लील कैसे? मुस्लिम मर्दों के अपराध को शीर्षक में लाना अगर अश्लील है तो हाँ मैंने किया है अपराध… और आगे भी करता रहूँगा। और मेरे अपराध पर किसी एक्शन ही ख्वाहिश है तो जाओ पहले ऊपर के 3 पॉइंट वाले सभी अपराधियों को पकड़ के लाओ!
अब बात उनकी, जो हज पर महिलाओं-बच्चियों के यौन शोषण से संबंधित पिछली रिपोर्ट को झूठा बता रहे थे। कट्टर इस्लामी सामान्यतः जाहिल-गँवार होते हैं। लिंक खोल कर पढ़ने की समझ उनमें होगी, यह सोचना भी पागलपन है। इसलिए CNN की खबर को टुकड़ों में बाँट कर सबका स्क्रीनशॉट नीचे लगा दिया है। अब सपा का कोई पूर्व-विधायक हो या कथित पत्रकार… बोलते रहिए इसे फेक न्यूज… चिल्लाते रहिए OpIndia बैन-बैन, अलुआ बैन-बैन!
PS: हज पर गई मुस्लिम औरतों और बच्चियों के साथ यौन शोषण की हर खबर जो प्रकाशित हुई है, उन सबका लिंक लगाया गया है। साथ ही स्क्रीनशॉट भी। स्क्रीनशॉट इसलिए ताकि कठमुल्ले फिर से बिना पढ़े-देखे इन सब पीड़ितों के दुखों पर पर्दा डालते हुए खबर को ही न झुठलाने पर आमादा हो जाएँ… इस्लाम-पाक-मजहब आदि की दुहाई देते हुए फिर से रोना न शुरू कर दें। स्क्रीनशॉट इसलिए भी ताकि जिन-जिन मीडिया संस्थान की खबरों के आधार पर हमने अपनी खबर बनाई है, कल को वो अगर अपनी खबर डिलीट कर दें, तो हमारे पास साक्ष्य मौजूद रहे।
दिल्ली के भजनपुरा से एक जिम मालिक की हत्या का सीसीटीवी वीडियो सामने आया है। मृतक की पहचान सुमित गुर्जर के तौर पर हुई है। पुलिस मामले की जाँच में जुटी है। आरोपित का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
दिल्ली के भजनपूरा इलाक़े में सुमित गुर्जर की “विशेष समुदाय” के लड़के ने 20 से ज़्यादा बार चाकुओं से गोद गोद कर हत्या की गई थी,उसका CCTV आया है। pic.twitter.com/eVnBaJeF3m
— Sagar Kumar “Sudarshan News” (@KumaarSaagar) July 24, 2024
सामने आए 10 सेकेंड के सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि गली में सुमित गुर्जर एक लड़के के पास खड़ा होता है। थोड़ी देर बाद अचानक वहाँ एक टोपी पहना लड़का सुमित के पास आता है और चाकू से ताबड़तोड़ अटैक करना शुरू कर देता है। घटना के बाद सुमित घायल होकर नाली में गिर जाता है।
दिल्ली के भजनपूरा इलाक़े में सुमित गुर्जर की “विशेष समुदाय” के लड़के ने 20 से ज़्यादा बार चाकुओं से गोद गोद कर हत्या की गई थी,उसका CCTV आया है। pic.twitter.com/eVnBaJeF3m
— Sagar Kumar “Sudarshan News” (@KumaarSaagar) July 24, 2024
मीडिया रिपोर्ट्स में घटना को 11 जुलाई का बताया जा रहा है। वहीं सुमित के शव को लेकर खबर है कि वो पुलिस को भजनपुरा के गामरी एक्सटेंशन में मिला। इस दौरान सुमित के चेहरे पर, गर्दन पर, पेट पर 17 बार चाकू से हमले की बात सामने आई है। हमले के बाद आरोपित घटनास्थल से फरार हो गया था।
उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले दिल्ली के शाहबाद डेयरी से भी ऐसा मामला प्रकाश में आया था। उस समय 16 साल की लड़की की साहिल नाम के लड़के ने चाकू घोंप-घोंप हत्या की थी। ये घटना भी सीसीटीवी में कैद होने के कारण चर्चा में आई थी। सीसीटीवी में दिखा था कि कैसे साहिल ने लड़की को चाकू मारा था और फिर उसकी मौत सुनिश्चित करने के लिए उसका सिर पत्थर से कुचला था। इसके बाद वो सीसीटीवी में खुशी से भागते हुए भी दिखाई दिया था।
बरेली का 33 साल का दिलशाद अली बस्ती जिले में एक ईंट-भट्टे पर मजदूरी करता था। वहाँ उसने परसरामपुर थाना क्षेत्र की हिंदू लड़की को अपनी जाल में फंसा लिया। वो उसे 6 जुलाई को कॉलेज जाने के समय अगवा कर बरेली जिले के बिथरी ले आया। एक तरफ बस्ती में छात्रा के माता-पिता बच्ची को ढूँढ रहे हैं, और पुलिस से उसे वापस लाने की गुहार लगा रहे हैं, तो दूसरी तरफ बरेली के बिथरी में दिलशाद अली ने खुला ऐलान कर दिया है कि हिंदू लड़की उसके ‘कब्जे’ में है। जिसे जो बिगाड़ना है, वो बिगाड़ ले।
दिलशाद ने ऐलान किया है कि हिंदू लड़की को मुस्लिम बनाएगा और उससे निकाह करेगा। यही नहीं, दिलशाद अली ने बरेली एसडीएम कोर्ट में निकाह की अर्जी भी डाल दी है। इस बीच, हिंदू संगठनों को जब इस बात की भनक लगी, तो उन्होंने प्रशासन से कार्रवाई की माँग की है और अगवा छात्रा के परिजनों और बस्ती पुलिस से भी संपर्क किया है। वहीं, बस्ती पुलिस ने कहा है कि छात्रा की तलाश जारी थी, आगे की कार्रवाई की जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिलशाद अली पुत्र निसार अली, बरेली के गाँव बिथरी का निवासी है। वो बस्ती जिले के परसुराम थाना इलाके में स्थित एक ईंट-भट्टा पर मजदूरी करता था। छात्रा परसरामपुर क्षेत्र के तक्कीपुर खेकड़ी की रहने वाली है और माता-पिता किसान हैं।
दिलशाद अली ने छात्रा को अपनी जाल में फंसा लिया और 6 जुलाई को उसे अगवा कर बरेली ले आया। अब उसने एसडीएम कोर्ट में निकाह की मंजूरी के लिए प्रार्थनापत्र भी जमा किया है। छात्रा के बारे में जानकारी तब हुई, जब दिलशाद बरेली में अपने गाँव आकर ऐलानिया कहने लगा कि बस्ती की लड़की उसके कब्जे में है और वह उसका जबरन धर्म परिवर्तन करवा रहा है। इस बारे में बस्ती पुलिस ने कहा है कि छात्रा की गुमशुदगी का केस दर्ज है और जल्द से जल्द छात्रा की बरामदगी का प्रयास किया जा रहा है।
थाना परसरामपुर (9454403120) पर गुमशुदगी दर्ज कर बरामदगी का हर संभव प्रयास किया जा रहा था, जिसके क्रम में जांच व आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया।
विश्व हिंदू परिषद के नेता हिमांशु पटेल को इस बारे में पता लगा तो संगठन के पदाधिकारियों के साथ वह हरकत में आ गए। उन्होंने बस्ती पुलिस से संपर्क से साधा। हिमांशु पटेल ने बताया कि बस्ती पुलिस की टीम बरेली आ रही है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर अगवा छात्रा की अविलंब बरामदगी की माँग उठाई है।
लगातार आंदोलन करने वाले और मोदी सरकार को धमकियाँ देने वाले राकेश टिकैत अब मथुरा के वृन्दावन स्थित प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुँचे। प्रेमानंद महाराज ने भी उन्हें कुछ ‘कड़वे सलाह’ दे डाले। बता दें कि राकेश टिकैत BKU (भारतीय किसान यूनियन) के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं, उनके भाई नरेश टिकैत संगठन के अध्यक्ष हैं। राकेश टिकैत उन किसान नेताओं में शामिल हैं, जिनके नेतृत्व में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सीमाओं को 1 साल तक घेरे रखा गया था।
‘श्री हित राधा केली कुञ्ज’ आश्रम के संत प्रेमानंद महाराज ने राकेश टिकैत से कहा, “हमारे जो भारतीय किसान हैं वो बड़े भोले-भाले हैं। हमलोग किसान के घर में पैदा हुआ तो जानते हैं, फसल नष्ट हो गई तो समझो किसान नष्ट हो गया। कितनी मेहनत कर के वो अपनी फसल तैयार करता है और प्राकृतिक व नाना प्रकार की आपदाओं के कारण वो नष्ट हो जाती है। किसानों के पक्ष में खड़े होकर किसानों को अनुकूलता दिलाना और सुविधा दिलाना बहुत उत्तम कार्य है।”
इस दौरान पीत वस्त्र धारण करने वाले प्रेमानंद महाराज ने ये भी कहा कि किसानों के लिए आवाज़ उठाने की प्रक्रिया में स्वार्थ की गंध नहीं आनी चाहिए। उन्होंने समझाया कि स्वार्थ में कपट होती है, हम बात अपनी प्रियता की कर रहे हैं लेकिन उसमें मेरी स्वार्थ की पूर्ति है। प्रेमानंद महाराज ने कहा कि ऐसी स्थिति में ये परमार्थ नहीं रहेगा, दूसरों के हित के लिए हम अपने प्राणों की बाजी भी लगा देते हैं तो इस लोक में और परलोक में भी मंगल होगा।
इस दौरान उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस की चौपाई ‘परहित सरिस धर्म नहीं भाई, परपीड़ा सम नहीं अधमाई’ का जिक्र करते हुए कहा कि वो चाहेंगे कि परमार्थ की भावना से युक्त होकर किसानों की उन्नति हो, उनकी समस्याओं में सब साथ खड़े होकर उनकी सहायता करें। उन्होंने कहा कि कई किसान असमर्थता के कारण आत्महत्या कर देते हैं, क्योंकि उनकी पहुँच नहीं होती और वो अपनी बात सरकार तक नहीं पहुँचा सकते। उन्होंने कहा कि कोई धनवान है फिर भी वो रुपया या सोना-चाँदी नहीं, वो खाएगा तो अन्न ही, इसीलिए किसानों की उन्नति आवश्यक है।
कनाडा में खालिस्तानियों का हौसला दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। खालिस्तानी अतिवादियों के समर्थन से चल रही जस्टिन ट्रूडो की सरकार खालिस्तानियों का ही साथ दे रही है। इस बीच, कनाडा के एडमॉन्टन के बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर में तोड़-फोड़ की गई। यहाँ के बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर पर सुबह-सुबह भारत विरोधी नारे लिखे गए। यही नहीं, पीएम मोदी के साथ ही भारतीय मूल के कनाडाई सांसद चंद्र आर्य को हिंदू आतंकवादी बताया गया।
कनाडा में हिंदू व्यापारिक समुदाय के हितों को बढ़ावा देने के लिए समर्पित ‘कैनेडियन हिंदू चैंबर ऑफ कॉमर्स’ (सीएचसीसी) के एक बयान में कहा, “यह घटना न केवल एक बिल्डिंग (मंदिर)पर हमला है, बल्कि हिंदू समुदाय की भावनाओं और हमारे समाज के सम्मान एवं सहिष्णुता के सिद्धांतों का भी अपमान है।” कैनेडियन हिंदू चैंबर ऑफ कॉमर्स ने कनाडा में “हिंदूफोबिया (हिंदुओं के खिलाफ पूर्वाग्रह) की बढ़ती लहर” का विरोध करते हुए कहा, “ये घटनाएँ बेहद परेशान करने वाली हैं और हमारे बहुसांस्कृतिक एवं समावेशी समाज में इनका कोई स्थान नहीं है।”
भारत की तरफ से भी इसपर कड़ी प्रतिक्रिया दी गई। वैंकूवर में भारत के महावाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “हम एडमॉन्टन में बीएपीएस श्री स्वामीनारायण मंदिर को भारत विरोधी नारे लिखकर विरुपित किए जाने की निंदा करते हैं। हमने कनाडाई अधिकारियों से घटना की जांच करने और अपराधियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।”
We condemn the defacing of BAPS Shri Swaminarayan Mandir in #Edmonton with anti-India graffiti. We have requested the Canadian authorities to investigate the incident and take prompt action against the perpetrators.@HCI_Ottawa@GAC_Corporate@BAPS@MEAIndia@IndiainToronto
कनाडा में जिस मंदिर पर हमला किया गया, वहाँ के स्थानीय हिंदू सांसद को भी हिंदू आतंकवादी लिखा गया। कनाडा के नेपियन से संसद सदस्य चंद्र आर्य ने इस हमले पर प्रतिक्रिया दी और खालिस्तानी अतिवादियों को इसका जिम्मेदार बताया। चंद्र आर्य ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “एडमॉन्टन में हिंदू मंदिर बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर को फिर से तोड़ दिया गया है। पिछले कुछ सालों से ‘ग्रेटर टोरंटो एरिया, ब्रिटिश कोलंबिया और कनाडा के अन्य स्थानों में भारत विरोधी नारे के साथ तोड़फोड़ की जा रही है।”
सांसद आर्य ने आगे अपने पोस्ट में खालिस्तानी अतिवादियों को ट्रूडो सरकार से मिलने वाली छूट की तरफ इशारा किया। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, “कुछ वर्षों के दौरान ग्रेटर टोरंटो एरिया, ब्रिटिश कोलंबिया सहित कनाडा में हिंदू मंदिरों पर घृणित नारे लिखे जा रहे हैं। ‘सिख फॉर जस्टिस’ के गुरपतवंत सिंह पन्नू ने पिछले साल हिंदुओं को भारत लौट जाने के लिए कहा था। खालिस्तान समर्थकों ने ब्रैम्पटन और वैंकूवर में पीएम इंदिरा गाँधी की हत्या का खुलेआम जश्न मनाया और घातक हथियारों की तस्वीरें लहराई थीं। जैसा कि मैं हमेशा से कहता रहा हूँ, खालिस्तानी चरमपंथी नफरत और हिंसा की अपनी सार्वजनिक बयानबाजी से आसानी से बच निकलते हैं। मैं एक बार फिर से बता रहा हूँ कि हिंदू कनाडाई सच में परेशान हैं। मैं फिर से कनाडा की कानून प्रवर्तन एजेंसियों से इस मुद्दे को गंभीरता से लेने का आह्वान करता हूँ। इससे पहले कि ये बयानबाजी हिंदू कनाडाई लोगों के खिलाफ हमलों में तब्दील हो जाए।”
The Hindu temple BAPS Swaminarayan Mandir in Edmonton is vandalized again. During the last few years, Hindu temples in Greater Toronto Area, British Columbia and other places in Canada are being vandalized with hateful graffiti. Gurpatwant Singh Pannun of Sikhs for Justice last… pic.twitter.com/G0a8ozrrHX
बता दें कि कनाडा में हिंदू मंदिरों को खालिस्तान लगातार निशाना बना रहे हैं। कनाडा में हिंदुओं के प्रति लगातार हिंसा बढ़ी है। खालिस्तान समर्थक अक्सर हिंदू मंदिरों को निशाना बनाते हैं। आतंकी हरदीप सिंह निज्जर के मारे जाने के बाद से खालिस्तान समर्थक उग्र हैं और वे अक्सर भारत विरोधी गतिविधियों को कनाडा में अंजाम देते हैं। अगस्त 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया में हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया था और खालिस्तानी जनमत संग्रह का पोस्टर लगा दिया गया था।
दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति एलन मस्क ने ‘Woke Mind Virus’ पर करारा निशाना साधा है। एलन मस्क इस दौरान अपने परिवार पर इसका दुष्प्रभाव पड़ने के कारण दुःख में भी दिखे। बता दें कि X (पूर्व में ट्विटर), Tesla और SpaceX जैसी विशाल कंपनियाँ चलाने वाले एलन मस्क की संपत्ति 248.70 बिलियन डॉलर (20.82 लाख करोड़ रुपए) की है। सोचिए, जब वामपंथी विचारधारा में पश्चिमी अत्याधुनिकता के मिलावट ने ऐसा गलत असर डाला है कि धरती का सबसे अमीर शख्स भी उसके सामने मजबूर है।
बता दें कि एक्शन मस्क का बेटा विलियम जेन्ना विल्सन ने अपना लिंग-परिवर्तन करा लिया और लड़की बन गया। पहले उसका नाम जेवियर हुआ करता था।डॉ जॉर्डन पीटरसन के साथ एक इंटरव्यू में एलन मस्क ने कहा कि अपने बेटे के यौवन को अवरुद्ध करने (Puberty Blocking) के लिए उन्हें धोखे में रखा गया। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान उन्हें गुमराह करने के लिए परिस्थिति पैदा की गई। वो ‘Puberty Blocker’ की तुलना नसबंदी वाले दवाओं से करते हैं।
एलन मस्क ने बताया कि उन्हें पूरी तरह सूचित नहीं किया गया था कि ट्रीटमेंट के क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं। ‘लिंग की पुष्टि’ किए जाने की अवधारणा को उन्होंने एक ‘भयानक प्रथा’ करार दिया। उनका मानना है कि वो अपने बेटा खो चुके हैं, उनके बेटे को मार डाला जा चुका है। उन्होंने इसे ‘Woke Mind Virus’ का दुष्प्रभाव बताते हुए कहा कि वो इसे खत्म कर देंगे। बता दें कि जो शख्स कुछ ज़्यादा ही जागरुक होकर उलटी-सीधी और अजीबोगरीब विचारों पर चलने लगे उसे Woke कहते हैं।
डॉ जॉर्डन पीटरसन को भी कहना पड़ा कि लिंग-परिवर्तन के लिए इस तरह का ट्रीटमेंट एकदम दुष्टतापूर्ण है। दोनों ने इस पर सहमति जताई कि ये प्रक्रिया कराने वालों को जेल होना चाहिए। एलन मस्क ने कहा कि ऐसे बच्चों को इसका शिकार बनाया जा रहा है, जो अभी सहमति देने की उम्र तक ही नहीं पहुँचे हैं। बता दें कि लिंग-परिवर्तन कराने वाले को उसके पुराने नाम से पुकारना ‘Deadnaming’ कहलाता है। उन्होंने कहा कि इसका अर्थ है कि उनका बेटा मर चुका है।
JUST IN: Elon Musk says his son is "dead" thanks to the woke mind virus after he was put on puberty blockers, says he vowed to "destroy the woke mind virus after that."
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"I was essentially tricked into signing documents for one of my older boys… This was before I had… pic.twitter.com/wfWztIziTs
जून 2022 में जेवियर (अब विलियम जेन्ना विल्सन) के खुलासे के बाद एलन मस्क ने SpaceX का मुख्यालय कैलिफोर्निया से टेक्सास स्थानांतरित करने की घोषणा की थी। वो कैलिफोर्निया के कानूनों से चिढ़ चुके थे, खासकर उस बिल से जिसके तहत प्रावधान किया गया था कि अगर कोई बच्चा अपना जेंडर अलग आइडेंटिफाई करता है तो उसके अभिभावकों को सूचित नहीं किया जाएगा। एलन मस्क का कहना था कि ये नीतियाँ परिवारों और कंपनियों के लिए हानिकारक हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू बॉर्डर को अभी बंद ही रखने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसान JCB लेकर प्रदर्शन करने नहीं आ सकते। कोर्ट ने कहा है कि वह अब एक कमेटी बनाएगा जो किसानों और सरकार, दोनों का पक्ष सुनेगी।
बुधवार (24 जुलाई, 2024) को शंभू बॉर्डर से बैरिकेड को लेकर हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह कुछ प्रबुद्ध जनों की एक कमेटी बनाएगा जो इस मसले का हल निकालेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पंजाब और हरियाणा इस कमेटी के लिए नाम सुझा सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने तब तक शंभू बॉर्डर को बंद रखने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इसके बाद ही पंजाब और हरियाणा आपस में बातचीत करके बैरिकेड हटाने पर काम करेंगे और चरणबद्ध तरीके से उन्हें हटाएँगे। तब तक दोनों राज्य यथास्थिति बनाएँ रखें।
Supreme Court orders that status quo be maintained at the Shambhu border near Ambala, where farmers have been camping since February 13.
Supreme Court says it proposes to constitute an independent committee comprising eminent persons who can reach out to farmers and other…
सुप्रीम कोर्ट में किसान और बैरिकेड के मामले की सुनवाई के दौरान प्रदर्शन के तरीके पर पर भी टिप्पणी की गई। सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि किसान प्रदर्शन के नाम पर टैंक और बख्तरबंद गाड़ियाँ लेकर आना चाहते हैं।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसान ऐसे प्रदर्शन नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और किसानों के बीच विश्वास की कमी की बात कही। सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान पंजाब का भी पक्ष सुना जिसने कहा कि शंभू बॉर्डर बंद होने के कारण उसे आर्थिक नुकसान हो रहा है।
गौरलतब है कि पंजाब और हरियाणा के बीच पड़ने वाला शंभू बॉर्डर बीते फरवरी माह से ही बंद है। यहाँ किसानों ने डेरा जमाया हुआ है और वह दिल्ली आकर प्रदर्शन करना चाहते हैं। उन्होंने हाल ही में 15 अगस्त को दिल्ली आकर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हाल ही में इस मामले पर सुनवाई करते हुए हरियाणा को आदेश दिया था कि वह बैरिकेड हटा दे। इस निर्णय के विरुद्ध हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था जिसने हाई कोर्ट के फैसले से इतर बॉर्डर खोलने पर अभी के लिए रोक लगाई है।
IAS पूजा खेडकर का मामला सामने आने के बाद आए दिन नए खुलासे हो रहे हैं। ताजा रिपोर्ट में पता चला है कि पूजा खेडकर शुरुआती समय से ही ओबीसी कोटे का फायदा उठाती आई हैं जबकि वो माता-पिता दोनों के प्रशासनिक सेवाओं में होने के कारण क्रीमी लेयर वाली श्रेणी में आती हैं। उन्होंने 2007 में एमबीबीएस में एडमिशन में लेने के लिए भी इस कोटे का इस्तेमाल किया था।
एक ओर जहाँ उनके एमबीबीएस एडमिशन से लेकर यूपीएससी में एंट्री पाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं वहीं ये भी सामने आया है कि वो 5 दिन से लापता हैं। उनकी किसी को कोई जानकारी नहीं हैं। 23 जुलाई को उन्हें मसूरी स्थित LBSNA यूपीएससी ट्रेनिंग सेंटर में बुलाया गया था लेकिन वो वहाँ उपस्थित नहीं हुईं। अब यूपीएससी द्वारा दी गई समय सीमा समाप्त हो गई है।
Pooja Khedkar , the suspended IAS trainee was ordered to report to Training Academy.
इससे पहले 16 जुलाई को महाराष्ट्र के अतिरिक्त मुख्य सचिव नितिन गद्रे ने पूजा खेडकर को पत्र लिखकर बताया कि सरकार के साथ उनकी ट्रेनिंग अवधि समाप्त कर दी गई है। वहीं सूत्रों ने बताया कि पूजा खेडकर ने न तो अकादमी में रिपोर्ट की है और न ही पत्र का जवाब दिया है।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा महाराष्ट्र सरकार को लिखे पत्र में कहा गया है, “यह निर्णय लिया गया है कि 2023 बैच की आईएएस पूजा खेडकर का जिला प्रशिक्षण स्थगित रखा जाए और उन्हें आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए तुरंत अकादमी में वापस बुलाया जाए। राज्य सरकार से अनुरोध है कि वह परिवीक्षाधीन को तुरंत कार्यमुक्त करे और उन्हें जल्द से जल्द अकादमी में आने को कहें।”
बता दें कि पिछले हफ्ते दिल्ली पुलिस में पूजा खेडकर के खिलाफ गलत बयानबाजी और तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने के मामले में आपराधिक केस दर्ज किया गया था। वहीं यूपीएससी ने उनकी उम्मीदवारी को रद्द करने के लिए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था। साथ ही इस बात पर विचार शुरू हुआ था कि पूजा खेडकर को भविष्य में ऐसी परीक्षा देने से भी प्रतिबंधित कर दिया जाएय़
इसके अतिरिक्त केंद्र ने पुणे पुलिस को आईएएस प्रोबेशनर पूजा खेडकर के माता-पिता की वैवाहिक स्थिति से अवगत कराने का निर्देश दिया है। ऐसा इसलिए क्योंकि एक अधिकारियों द्वारा आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में खुद को नॉन क्रीमी लेयर का फायदा उठाने के लिए दावा किया था कि उनके माता-पिता एक दूसरे से अलग हो गए हैं। अब केंद्र ने ऐसे ही पूजा खेडकर द्वारा प्रस्तुत सभी दस्तावेजों की जाँच के लिए एकल सदस्यीय समिति भी गठित की है ताकि सच्चाई सामने आ सके। वह 2023 के बैच की आईएएस हैं।
पूजा खेडकर का पूरा मामला
उल्लेखनीय है कि पूजा खेडकर का मामला पिछले दिनों चर्चा में आया था जब पुणे जिलाधिकारी ने मुख्य सचिव से उनकी शिकायत ये कहते हुए की थी कि वो वीआईपी ट्रीटमेंट की माँग कर रही हैं औऱ अधिकारियों को परेशान कर रही हैं। इसके बाद उनका ट्रांसफर वाशिम कराया गया और फिर उनके खिलाफ और खुलासे होने शुरू हुए। मामला धीरे-धीरे उनके दिव्यांग होने वाले प्रमाण पत्र पर उठा, फिर उनके ओबीसी कोटे पर और फिर उनके माता-पिता पर। इससे पहले पुलिस ने पूजा खेडकर की माँ को भी गिरफ्तार किया ता।
सोशल मीडिया और टीवी न्यूज़, 2023 चैनलों पर I.N.D.I. गठबंधन के अघोषित प्रवक्ता संजय झा ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा मंगलवार (23 जुलाई, 2024) को पेश किए गए वार्षिक बजट को ‘मोदी सरकार का अंतिम बजट’ बताया है। खबर ये नहीं है, असली खबर तो ये है कि 2018, 2019 और 2023 में भी वो यही बात कह चुके हैं। हर साल वार्षिक बजट के बाद वो खुद को संतुष्ट करने के लिए ये बात बोलते हैं, फिर भी अगला बजट मोदी सरकार ही लेकर आती है।
संजय झा ने लिखा, “इस बजट के बारे में सबसे अच्छी बात ये है कि आशा है कि ये मोदी सरकार का आखिरी बजट है।” बता दें कि ये धारणा इस उम्मीद पर आधारित है कि सत्ता में साझीदार आंध्र प्रदेश की TDP या बिहार की JDU मोदी सरकार से समर्थन वापस ले लेगी और सरकार गिर जाएगी। हालाँकि, ये दोनों बार-बार दोहरा चुके हैं कि वो NDA में ही रहेंगे। इसी तरह संजय झा ने 2023 के वार्षिक बजट को उबाऊ बताया था और कहा था कि ये ‘विनाशकारी’ भाजपा को बाय-बाय कहने का समय है, इसे इनका अंतिम बजट रहने दीजिए।
तब उन्होंने उम्मीद थी कि 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा की हार होगी, लेकिन पार्टी को 240 सीटें मिलीं। भाजपा के अलावा किसी अन्य दल को पिछली बार इससे अधिक सीटें 1991 में ही मिली थीं। इसी तरह 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले पेश हुए बजट के दौरान भी उन्होंने उस चुनाव में भाजपा की हार की आशा के साथ इसे पार्टी का अंतिम बजट बनाया। हालाँकि, अकेले दम पर 303 सीटें लेकर भाजपा ने 2014 के प्रदर्शन को भी पीछे छोड़ दिया।
इसी तरह 2018 में तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा पेश किए गए बजट को उन्होंने भाजपा का अंतिम बजट बताया था। 2024 में वो इसे नकली बजट बताते हुए कह रहे हैं कि ‘असली’ वालों को वोट दीजिए। उनका इशारा आगामी विधानसभा चुनावों पर है। हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड और बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं। संजय झा उसी कॉन्ग्रेस के लिए बल्लेबाजी कर रहे हैं, जिसने उन्हें जुलाई 2020 में पार्टी से निकाल बाहर किया था।
राजस्थान के सचिन पायलट का समर्थन करने पर उन्हें अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने का आरोप लगा कर उन्हें निलंबित किया गया था। सचिन पायलट तब उप-मुख्यमंत्री व कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे, उन्होंने तत्कालीन CM अशोक गहलोत के कारण बगावत की थी। हालाँकि, अंत में उन्हें तो मना लिया गया लेकिन संजय झा नहीं रहे, पार्टी में। संजय झा उसके बाद किसी पार्टी में नहीं गए, लेकिन मजबूरन टीवी न्यूज़ चैनलों पर विपक्ष का ही पक्ष रखते नज़र आते हैं।