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‘एक भी धर्मांतरण हुआ तो तौकीर रजा की जीभ काट लूँगा’: सामूहिक निकाह के ऐलान के बाद माहौल गर्म, पुलिस बोली- शांति-व्यवस्था से खिलवाड़ नहीं होने देंगे

‘इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल’ के अध्यक्ष एवं दरगाह हजरत खानदान के सदस्य मौलाना तौकीर रज़ा खान ने प्रशासन से सामूहिक धर्मांतरण और निकाह के लिए अनुमति माँगी है। हालाँकि, पुलिस ने साफ कह दिया है कि बिना अनुमति के इस प्रकार के किसी कार्यक्रम का आयोजन नहीं करने दिया जाएगा। जोर-जबरदस्ती करने वालों के साथ सख्ती से निपटा जाएगा।

बरेली दंगे के मास्टमाइंड मौलाना तौकीर के ऐलान पर एसएसपी अनुराग आर्य ने कहा कि किसी को भी शहर या जनपद की शांति व्यवस्था के साथ शरारत करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अनुराग आर्य ने कहा कि 15 जुलाई को सिटी मजिस्ट्रेट को एक आयोजन के लिए आवेदन दिया गया था, जिसकी जाँच पुलिस कर रही है। जाँच के बाद रिपोर्ट दी जाएगी।

तौकीर रजा के ऐलान के बाद अब तक 512 मुस्लिम लड़कियों की घर वापसी करवाकर हिंदू युवकों से शादी करवाने वाले पंडित केके शंखधर ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि तौकीर रजा 2010 दंगे का आरोपित है और वह सावन के महीने में शहर का माहौल बिगाड़ना चाहता है। तौकीर रजा को लेकर उन्होंने कहा, “तुम्हारे पूर्वज भी तो हिंदू थे। तुम भी आ जाओ। हम तुम्हारा भी घर वापसी करवाते हैं।”

हिंदू संगठनों ने इसका विरोध भी शुरू कर दिया है और तौकीर रजा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की माँग भी की है। मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास समिति के अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने मौलाना तौकीर रजा की जीभ काटने की धमकी दी है। उन्होंने कहा, “एक भी हिंदू का धर्म परिवर्तन कराया तो बरेली आकर जीभ काट दूँगा। धर्म परिवर्तन करा के देख लें, हम बरेली में तुम्हें रहने लायक नहीं छोड़ेंगे।”

दिनेश ने मौलाना तौकीर रजा की संपत्ति की जाँच कराने और उनके ठिकानों पर बुलडोजर चलाने की भी माँग की है। उन्होंने कहा कि मौलाना तौकीर रजा जैसे लोग हिंदुस्तान का खाते हैं और गुण पाकिस्तान का गाते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में रहकर हिंदुस्तान में दंगा भड़काने का काम किया जा रहा है। यह हिंदुओं का देश है और हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराने की बात की जा रही है।

दरअसल, तौकरी रजा ने मीडिया को कहा था कि दूसरे धर्म के 15 लड़के और 8 लड़कियाँ इस्लाम कबूलना चाहते हैं। ये सभी बालिग़ हैं और इन्होंने पहले से ही शादी कर रखी है। मौलाना ने कहा कि उन्होंने जिला प्रशासन से सामूहिक निकाह की अनुमति माँगी गई है। रविवार (21 जुलाई, 2024) को खलील स्कूल में सबसे पहले 5 जोड़ों के इस्लामी धर्मांतरण की प्रक्रिया पूरी किए जाने का प्लान है।

मौलाना तौकीर ने कहा कि इन सबने धर्मांतरण पहले ही कर लिया है। कार्यक्रम में सिर्फ इसकी औपचारिक प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। इसके बाद सार्वजनिक रूप से सामूहिक निकाह कराया जाएगा। मौलाना ने कहा कि जिन 5 जोड़ों का पहले निकाह कराया जाएगा उनमें 1 मध्य प्रदेश से है, बाकी बरेली के आसपास के जिलों के हैं। उन्होंने कहा कि पढ़ाई और नौकरी के दौरान ये लड़के-लड़कियाँ प्रेम में पड़े।

पूजा खेडकर की ट्रेनिंग रोक LBS नेशनल एडमिनिस्ट्रेशन एकेडमी ने वापस बुलाया, 23 जुलाई तक करना होगा रिपोर्ट: कई गड़बड़ियों के बाद जाँच के घेरे में हैं ट्रेनी IAS

महाराष्ट्र की ट्रेनी IAS पूजा खेडकर की ट्रेनिंग होल्ड कर दी गई है। उन्हें वाशिम के असिस्टेंट कमिश्नर के पोस्ट से तुरंत प्रभाव से हटा दिया है। साथ ही उन्हें मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एडिमिनिस्ट्रेशन एकेडमी वापस बुला लिया गया है। उन्हें आधिकारिक तौर पर पत्र भेजकर मसूरी बुलाया गया है, जहाँ 23 जुलाई से पहले उन्हें रिपोर्ट करना होगा। लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एडिमिनिस्ट्रेशन अकेडमी ने महाराष्ट्र सरकार को भी सूचित कर दिया है कि पूजा खेडकर की ट्रेनिंग होल्ड कर उन्हें मसूरी तलब किया गया है।

लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एडमिनिस्ट्रेशन एकेडमी द्वारा पूजा खेडकर को जारी आदेश में कहा गया है, “आपके जिला प्रशिक्षण कार्यक्रम को स्थगित रखने तथा आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए आपको तुरंत वापस बुलाने का निर्णय लिया है। अतः आपको महाराष्ट्र राज्य सरकार के जिला प्रशिक्षण कार्यक्रम से मुक्त किया जाता है। एकेडमी का पत्र इसके साथ संलग्न है। आपको 23 जुलाई, 2024 से पहले एकेडमी में शामिल होने का निर्देश दिया जाता है।”

तमाम गड़बड़ियों के संकेत, कार्रवाई तय

बता दें कि अभी तक जहाँ उनकी अनुचित माँगों और शारीरिक दिव्यांगता से जुड़े फर्जी डॉक्यूमेंट के कारण वे सवालों के घेरे में थीं तो वहीं अब मामले में पता चला है कि पूजा खेडकर ने अपनी उम्र को लेकर भी झूठ बोला है। खबरों के मुताबिक पूजा खेडकर ने महज 3 साल के अंतर में दो डॉक्यूमेंट में अपनी उम्र अलग-अलग बताई। इसके मुताबिक उनकी उम्र 3 साल में सिर्फ 1 साल बढ़ी है।

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने साल 2020 में सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेशन ट्रिब्यूनल को एक एप्लीकेशन दिया था, जिसमें उनकी उम्र 30 साल और साल 2023 में इस प्रकार के डॉक्यूमेंट में उनकी उम्र 31 साल दिखाई दे रही है। इन्हीं डॉक्यूमेंट को देखते हुए सवाल खड़ा हो रहा है कि जब ऐसा नहीं हो सकता कि दिसंबर 2020 से लेकर 2023 तक में पूजा खेडकर की उम्र केवल 1 साल बढ़ी हो तो इससे तो यही साफ है कि उन्होंने अपनी उम्र को लेकर दस्तावेजों में झूठ बोला है।

इसके अलावा पूजा खेडकर के नाम को लेकर भी बवाल है। उन्होंने साल 2020 में अपने दस्तावेज में अपना नाम डॉ खेडकर पूजा दिलीप राओ बताया था। वहीं 2023 में उन्होंने अपना मिस पूजा मनोरमा लिखा था। वहीं पिता के नाम की स्पेलिंग को भी बदल दिया था। 2023 में उन्होंने नाम उन्होंने ऐसा क्यों किया इसकी छानबीन की जा रही है। उनके नाम में डॉक्टर होने और फिर डॉक्टर हटाने की चर्चा मीडिया में तेज है कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया।

बता दें कि इससे पहले जानकारी सामने आई थी कि पूजा खेडकर ने 2007 में एमबीबीएस में एडमिशन लेते समय भी घालमेल किया था। दरअसल, पूजा खेडकर ने एमबीबीएस में ओबीसी नॉन क्रीमी लेयर के तहत एडमिशन लिया था जबकि उनके माता-पिता प्रशासनिक अधिकारी थे। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में काशीबाई नवले मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस, एमडी (माइक्रोबायोलॉजी) डॉ. अरविंद वी. भोरे ने दावा किया था कि IAS अधिकारी डॉ पूजा खेडकर ने 2007 में मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए ओबीसी सर्टिफिकेट जमा किया था। इस दौरान उन्होंने ओबीसी खानाबदोश जनजाति-3 कैटेगरी के तहत एडमिशन लिया था, जो वंजारी समुदाय के लिए रिजर्व है। एडमिशन के वक्त उन्होंने किसी प्रकार की फिजिकल डिसेबिलिटी को लेकर कोई प्रमाण पत्र नहीं दिया था।

मुहर्रम की जुलूस में फिलिस्तीन के झंडे और टी-शर्ट: कश्मीर से लेकर बिहार तक पुलिस अलर्ट, FIR के बाद कई को दबोचा, कैमूर में प्रिंटिंग प्रेस पर छापेमारी

मुहर्रम के जुलूस में बिहार, यूपी, कश्मीर और गुजरात सहित देश में कई जगहों पर हिंदू विरोधी घटनाएँ भी सामने आ रही हैं। कट्टरपंथ से त्रस्त गुजरात के वडोदरा स्थित सावली में मोहर्रम पर फिलिस्तीन का झंडा फहराया गया है। इस झंडे को देखकर पुलिस सचेत हो गई। पुलिस ने इसका संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की है। इस मामले में फिलहाल तीन नाबालिग लड़कों से पूछताछ की जा रही है।

मिली जानकारी के मुताबिक, घटना 14 जुलाई 2024 की शाम की है। वडोदरा के सावली में मुस्लिम इलाके लाहौरी वाघा में मोहर्रम की तैयारी की जा रही थी। इसी बीच किसी ने धार्मिक झंडों के बीच फिलिस्तीन का भी झंडा फहरा दिया। फिलिस्तीन का झंडा देखकर पुलिस हैरान रह गई और उसने बिना किसी देरी के इस झंडे को तुरंत उतार दिया।

इसके बाद पुलिस ने खुद इस मामले में कार्रवाई करते हुए जाँच शुरू कर दी। ऑपइंडिया ने इस संबंध में सावली पुलिस स्टेशन में ड्यूटी पर तैनात पीएसआई कमालिया से संपर्क किया। उन्होंने बताया, “सावली पुलिस ने स्वयं संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। हाँ, इस संबंध में 3 नाबालिगों से पूछताछ की जा रही है।”

उधर बिहार में भी कई जगहों पर मुहर्रम के जुलूस के साथ फिलिस्तीन के झंडे लहराए गए। बिहार के कैमूर में मुहर्रम के जुलूस के साथ फिलिस्तीन के झंडे लहराने के साथ-साथ फिलिस्तीनी झंडे वाले झंडे पहने लोगों ने बवाल काटा था। इसके बाद कैमूर प्रशासन सतर्क हो गया है। पुलिस ने सोमवार (15 जुलाई) को कैमूर की प्रिंटिंग प्रेस की दुकानों पर छापेमारी की।

कैमूर पुलिस को जानकारी मिली थी कि फिलिस्तीन के झंडे और टी-शर्ट बनाए जा रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने मोहनिया स्थित प्रिंटिंग प्रेस की दुकानों पर छापेमारी शुरू कर दी। पुलिस ने सभी प्रिंटिंग प्रेस वालों को चेतावनी दी है। प्रशासन ने कहा है कि अगर कोई भी शख्स जुलूस के दौरान आपत्तिजनक सामान के साथ पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

वहीं, बिहार के नवादा से भी ऐसा ही एक वीडियो सामने आया है। नवादा के धमौल बाजार का बताए जा रहे इस वीडियो में मुहर्रम के जुलूस में फिलिस्तीन का झंडा लहराया जा रहा है। इसके बाद नवादा एसपी ने टीम गठन करके जाँच करने के लिए कहा। टीम ने फिलिस्तीन का झंडा लहराने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। यह वीडियो 15 जुलाई का बताया जा रहा है।

इससे पहले, बिहार के ही दरभंगा में मुहर्रम के जुलूस के दौरान फिलिस्तीन का झंडा लहराया गया था। इस मामले में पुलिस ने दो लोगों पर एफआईआर की है। आरोपितों की पहचान मोहम्मद शाहिद और मोहम्मद इब्राहिम के रूप में हुई है। इसके अलावा कई अज्ञात लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ है। यह घटना 8 जुलाई 2024 की है।

उत्तर प्रदेश के कानपुर से भी ऐसा ही वीडियो सामने आया है। वीडियो में मुहर्रम के जुलूस के में मुस्लिम मुल्क फिलिस्तीन का झंडा लहराया जा रहा है। दरअसल, एक छोटी गाड़ी पर ताजिया निकाला गया था, जिस पर कई लाउस्पीकर लगे हुए थे। इन लाउस्पीडकर में नारे लगाए जा रहे थे। इस दौरान फिलिस्तीन का झंडा लहराते हुए देखा गया।

कश्मीर में भी 15 जुलाई को मुहर्रम के जुलूस के दौरान कई जगहों पर फिलिस्तीन के झंडा लहराने की बात कही जा रही है। इस मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कई लड़कों को गिरफ्तार कर किया है। कहा जा रहा है कि जूलूस के दौरान कुछ युवा अमेरिका और इजरायल विरोधी नारे भी लगा रहे थे। बता दें कि एलजी प्रशासन द्वारा लगातार दूसरे वर्ष मुहर्रम जुलूस की इजाजत दी गई है।

‘मुस्लिम पुलिसकर्मी रख सकते हैं छोटी दाढ़ी’: मद्रास हाई कोर्ट का फैसला, हज से लौटकर बढ़ी दाढ़ी में अधिकारियों से मिला था याचिकाकर्ता

मद्रास हाई कोर्ट ने एक अहम मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि मुस्लिम पुलिसकर्मियों को भी दाढ़ी रखने की अनुमति है। मद्रास हाई कोर्ट ने कहा कि पुलिस वाले सलीके से कटी हुई, साफ-सुथरी छोटी दाढ़ी रख सकते हैं, इसके लिए उन पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। मद्रास हाई कोर्ट ने 1957 के मद्रास पुलिस राजपत्र का भी हवाला दिया।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, मद्रास हाई कोर्ट की जस्टिस एल विक्टोरिया गौरी ने 5 जून 2024 के अपने आदेश में कहा है कि भारत विविध धर्मों और रीति-रिवाजों का देश है और पुलिस विभाग अपने मुस्लिम कर्मचारियों को उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दाढ़ी रखने के लिए दंडित नहीं कर सकता।

मद्रास हाई कोर्ट ने अपने आधेश में कहा, “मद्रास पुलिस राजपत्र के मानदंड इस तथ्य पर प्रकाश डालते हैं कि मुस्लिमों को ड्यूटी के दौरान भी साफ-सुथरी दाढ़ी रखने की अनुमति है। भारत विविध धर्मों और रीति-रिवाजों का देश है, इस भूमि की सुंदरता और विशिष्टता नागरिकों की मान्यताओं और संस्कृति की विविधता में निहित है। तमिलनाडु सरकार के पुलिस विभाग के लिए सख्त अनुशासन की आवश्यकता है, लेकिन विभाग में अनुशासन बनाए रखने का कर्तव्य प्रतिवादियों को अल्पसंख्यक समुदायों, विशेष रूप से मुस्लिम कर्मचारियों को दाढ़ी रखने के लिए दंडित करने की अनुमति नहीं देता है, जो वे पैगंबर मोहम्मद की आज्ञाओं का पालन करते हुए अपने पूरे जीवन में करते(धार्मिक कार्य) हैं।”

यह आदेश एक पुलिस कॉन्स्टेबल की याचिका पर पारित किया गया था, जो मक्का से लौटने के बाद बढ़ी हुई दाढ़ी में अपने वरिष्ठ अधिकारी से मिला था। साल 2018 में कॉन्स्टेबल 31 दिनों की छुट्टी लेकर मक्का की यात्रा यानी हज यात्रा पर गया था, वहाँ से लौटने के बाद उसके पैरों में संक्रमण हो गया था और उसने छुट्टी बढ़ाने की माँग को लेकर वरिष्ठ अधिकारी से मुलाकात की थी। लेकिन असिस्टेंट कमिश्नर रैंक के अधिकारी ने छुट्टी से बढ़ाने से इन्कार कर दिया, साथ ही बढ़ी हुई दाढ़ी को लेकर सफाई माँगी थी।

साल 2019 में डीसीपी ने कॉन्स्टेबल से औपचारिक तौर पर स्पष्टीकरण माँगा, जिसमें मद्रास पुलिस नियमावली के उल्लंघन की बात कही गई थी। इसके बाद कॉन्स्टेबल के खिलाफ 2 आरोप तय किए गए। पहला-दाढ़ी बढ़ाने और दूसरा-31 दिन की छुट्टी के बाद ड्यूटी पर आने की जगह 20 दिन की अतिरिक्त छुट्टी माँगना।

साल 2021 में डीसीपी ने आदेश दिया कि कॉन्स्टेबल का 3 साल का इन्क्रीमेंट सजा के तौर पर रोका जाए, जिसके बाद कॉन्स्टेबल ने कमिश्नर के सामने अपील की। कमिश्नर ने सजा को 3 साल से घटाकर 2 साल कर दी। लेकिन कॉन्स्टेबल ने हाई कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी, जिस पर हाई कोर्ट ने 5 जून को उसे राहत दी। हाई कोर्ट ने सजा को गलत बताया और कमिश्नर के आदेश को रद्द करते हुए 8 सप्ताह के भीतर कानून के तहत नया आदेश देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि कॉन्स्टेबल को मेडिकल आधार पर आपसी सहमति के आधार पर छुट्टी दी जानी चाहिए थी।

आज भी फैसले की प्रतीक्षा में कन्हैयालाल का परिवार, नूपुर शर्मा पर भी खतरा; पर ‘सर तन से जुदा’ की नारेबाजी वाले हो गए बरी भी: व्यवस्था का यह ‘न्याय’ आपको कचोटता नहीं?

इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद पर भाजपा की नेता नूपुर शर्मा द्वारा दिए गए बयान को मुद्दा बनाकर देश को झुलसाने की कोशिश की जा रही थी। 17 जून 2022 का दिन था। नूपुर शर्मा के बयान के विरोध में राजस्थान के अजमेर में मुस्लिमों द्वारा मौन जुलूस निकाला जा रहा था। लगभग 3000 लोगों वाली जुलूस जब अजमेर शरीफ दरगाह के पास पहुँचा तो वहाँ मजमा लगा दिया गया।

रिक्शे पर लाउडस्पीकर लगाकर भड़काऊ भाषण दिया जाने लगा। इस्लाम और रसूल की निंदा को करने को मौत की सजा की बात कही जाने लगी। इस दौरान लाउडस्पीकर से ‘सिर तन से जुदा’ के नारे लगाए गए। भीड़ भी उन्माद में आकर ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाने लगी। इस पूरे जुलूस का नेतृत्व कर रहा था अजमेर दरगाह के खादिम गौहर चिश्ती।

चिश्ती ने मौन जुलूस के नाम पर परमिशन लिया था। प्रशासन ने उसे समझाया भी था कि जुलूस में किसी तरह की भड़काऊ बयानबाजी या नारे नहीं लगने चाहिए। हालाँकि, गौहर चिश्ती ने इस चेतावनी को अपने पैरों की जूती पर लिया। जुलूस में जमकर भड़काऊ नारे लगाए गए। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था। राजस्थान पुलिस के कॉन्स्टेबल जयनारायण जाट ने भी अपनी रिपोर्ट में इसका जिक्र किया था।

इसको लेकर वायरल वीडियो में दरगाह के बाहर गौहर ने कहा था, “हम अपने हुजूर की शान में गुस्ताखी कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। गुस्ताख-ए-रसूल की एक सज़ा… सर तन से जुदा, सर तन से जुदा। अपने आका की इज्जत के लिए हम सर कटाने को तैयार हैं। नूपुर ने हमारे आका की शान में गुस्ताखी की है, इसलिए उसे जीने का हक नहीं है। नूपुर शर्मा मुर्दाबाद।”

इस मामले में पुलिस ने मामला दर्ज करके गौहर चिश्ती सहित 7 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया था। हालाँकि, स्थानीय कोर्ट ने मंगलवार (16 जुलाई 2024) को कोर्ट ने इन सभी आरोपितों को बरी कर दिया। वहीं, एक अन्य आरोपित फरार है। उसे जमानत पर रिहा किया या था, लेकिन वह फरार हो गया। उसको लेकर कोर्ट ने अभी कोई निर्णय नहीं दिया है।  

इस तरह के छोटी-छोटी रैलियाँ और जुलूस देश के अलग-अलग हिस्से में हो रहे थे और देश में माहौल को गर्म रखने की कोशिश जारी थी। समय गुजरता जा रहा था, लेकिन इसका असर दिखता रहा। दिन था 28 जून 2022 का। उदयपुर में कन्हैयालाल नाम का एक दर्जी की गला काटकर सार्वजनिक रूप से हत्या कर दी गई थी।

इस दौरान आरोपित मोहम्मद रियाज़ अंसारी और मोहम्मद गौस ने गला काटने का वीडियो भी बनाया था। कन्हैयालाल की गलती सिर्फ इतनी थी कि उन्होंने नूपुर शर्मा का समर्थन करते हुए अपने ह्वाट्सऐप स्टेटस पर एक पोस्ट लगा दिया। हालाँकि, यह पोस्ट कन्हैया लाल के लड़के ने लगाया था। इसके बावजूद रियाज और गौस ने कन्हैयालाल की गला काटकर हत्या कर दी।

कन्हैयालाल की हत्या के तार गौहर चिश्ती से जुड़े भी सामने आए थे। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि कन्हैयालाल की हत्या के बाद रियाज और गौस भागकर ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के खादिम गौहर चिश्ती के पास अजमेर ही आ रहे थे। हालाँकि, शक्ति सिंह और प्रह्लाद सिंह नाम के दो युवकों ने इन दोनों आरोपितों को दौड़कर पकड़ लिया था और पुलिस के हवाले कर दिया था।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि गौहर चिश्ती 17 जून 2022 को उदयपुर भी गया था। वहाँ उसने ‘सर कलम करने’ के नारे लगवाए थे। वहाँ उसकी मोहम्मद रियाज से मुलाकात की बात भी कही गई थी। बताया जा रहा है कि गौहर चिश्ती ने ही रियाज और गौस को कन्हैयालाल के कत्ल का वीडियो बनाने को भी कहा था। हालाँकि, रास्ते में ये दोनों पकड़े गए थे।

गौहर चिश्ती के इन कारनामों के दो साल बाद आखिरकार कोर्ट ने उसे सारे आरोपों से मुक्त कर दिया। इतना ही नहीं, गौहर चिश्ती के साथ ही उसके पाँच अन्य आरोपितों को भी रिहा कर दिया गया। इस मामले में अदालत के निर्णय का अभी पूरा निर्णय सामने नहीं आया है, लेकिन दोनों के पक्ष के वकीलों की बातों से साफ लगता है कि मामला साक्ष्य की कमजोरी का है।

आरोपितों की ओर से पेश कोर्ट में पेश वकील अजय वर्मा का कहना है कि भड़काऊ नारे वाले जो भी वीडियो सामने आए थे, उनका सत्यापन नहीं हो पाया है। पुलिस ने मौके का नक्शा नहीं बनाया और जो पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे, वे भी अपनी मौजूदगी के दस्तावेज पेश नहीं कर पाए। वकील ने कहा कि कोर्ट ने इस संबंध में पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाया और सभी आरोपितों को बरी कर दिया।

इससे साफ लगता है कि पुलिस ने इस मामले की पैरवी ढंग नहीं कर पाई। जो वीडियो वायरल हुआ, उसका सत्यापन नहीं करा पाना भी एक बड़ी नाकामी है। जिस पुलिसकर्मी जयनारायण जाट ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वे घटना के दिन ड्यूटी निजाम गेट पर थी। इस बात को भी जाट एवं अन्य पुलिसकर्मी पेश नहीं कर पाए।

इस मामले में दो साल पूरा होते ही इन आरोपितों के मामले में फैसला हो गया और वे दोषमुक्त होकर बाहर आ गए। हालाँकि, सरकार इस फैसले को आगे हाई कोर्ट में चुनौती देती है तो वो अलग बात है। हालाँकि, कन्हैयालाल के परिजन आज भी न्याय की आस में बैठे हैं। कन्हैयालाल के बेटे ने ऐलान किया है कि जब तक उसके पिता को न्याय नहीं मिलता, तब तक वह नंगे पैर रहेगा।

इतना ही नहीं, मृत कन्हैयालाल की हत्या के दो साल बाद भी उनकी अस्थि कलश विसर्जन की बाट जोह रही है। उनके हत्यारों को सजा हो तो परिवार उनकी अस्थि को पवित्र नदियों के जल में प्रवाहित करे। हालाँकि, नजदीकी भविष्य में इसकी गुंजाइश कम दिखती है। उधर, मामला सामने आने के बाद अजमेर दरगाह पर लोगों की आवाजाही कम हो गई थी, लेकिन फिर से वहाँ चहल-पहल बढ़ गई है।

जिस गली में कन्हैयालाल की दुकान थी और जहाँ उनका घर है, वहाँ आज भी दहशत का माहौल है। हर तरफ एक भयानक खामोशी फैली हुई थी। उस गली से गुजरने की आज भी कोई हिम्मत नहीं जुटा पाता है। वहाँ के हालात आज भी सामान्य नहीं हो पाए हैं। अगर कन्हैयालाल के हत्यारों को सजा मिल भी जाए और उनकी अस्थियों को प्रवाहित कर भी दी जाए तो गलियों का डर दशकों तक कंपकंपी पैदा करती रहेगी।

किसानों के प्रदर्शन से NHAI का ₹1000 करोड़ का नुकसान, टोल प्लाजा करने पड़े थे फ्री: हरियाणा-पंजाब में रोड हो गईं थी जाम

किसान प्रदर्शन के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को तगड़ा नुकसान हुआ है। दो किसानों के धरना प्रदर्शन के चक्कर में NHAI को ₹1000 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है। यह नुकसान हरियाणा और पंजाब में स्थित टोल प्लाजा पर हुआ है।

द ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के अनुसार दिसम्बर, 2020 से दिसम्बर, 2021 और फरवरी, 2024 से मार्च 2024 के बीच चले किसानों के धरना प्रदर्शन के कारण NHAI को टोल प्लाजा पर फीस का संग्रह रोकना पड़ा था। इसके कारण उसे इस अवधि में ₹1000 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा।

यह जानकारी ट्रिब्यून को RTI के माध्यम से मिली है। RTI में बताया गया है कि दिसम्बर 2020 से दिसम्बर 2021 के बीच चले किसान प्रदर्शन के दौरान घरौंदा टोल प्लाजा पर ₹304 करोड़ जबकि घग्गर टोल प्लाजा पर ₹151 करोड़ का नुकसान हुआ है। इसके अलावा पानीपत के टोल प्लाजा पर ₹77 करोड़, थाना टोल प्लाजा पर ₹23 करोड़ और सैनी माजरा में ₹20.70 करोड़ का नुकसान हुआ था। यह सभी टोल प्लाजा NHAI के अम्बाला डिविजन के अंतर्गत आते हैं।

इसी दौरान NHAI के सोनीपत डिवीजन में भागन टोल प्लाजा पर ₹154 करोड़, रोहड़ टोल प्लाजा पर ₹85 करोड़, मकरौली दाहर टोल प्लाजा पर ₹70 करोड़, छारा टोल प्लाजा पर ₹17 करोड़ और किताला टोल प्लाजा पर ₹13 करोड़ का नुकसान हुआ। दिसम्बर 2020 से दिसम्बर 2021 तक किसान प्रदर्शन के दौरान कुल मिलाकर ₹914 करोड़ का नुकसान हुआ।

वहीं 12 फरवरी, 2024 से मार्च, 2024 के दौरान चले किसान प्रदर्शन में घरौंदा टोल प्लाजा पर ₹4.91 करोड़ और घग्गर टोल प्लाजा पर ₹98.55 करोड़ का नुकसान हुआ। इसके अलावा भगन टोल प्लाजा पर ₹4.27 करोड़ और रोहड़ टोल प्लाजा पर ₹53 लाख का नुकसान हुआ। किसान प्रदर्शन के दूसरे चरण में लगभग ₹108 करोड़ नुकसान हुआ। इस तरह दोनों चरण में मिलाकर NHAI को ₹1000 करोड़ से अधिक का नुकसान झेलना पड़ा। यह नुकसान राष्ट्रीय राजमार्ग 44 और 152 पर हुआ है।

इसी दौरान गाजियाबाद के NHAI यूनिट को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर भी ₹15.4 करोड़ का नुकसान झेला। किसानों के धरना प्रदर्शन के कारण यह एक्सप्रेसवे लगभग 2 महीने तक बंद रहा। NHAI के लिए यह टोल वह कम्पनियाँ इकट्ठा करती हैं जो यह रोड बनाती हैं। अब NHAI ने इन कम्पनियों को उतनी ही अवधि के लिए टोल वसूलने की इजाजत दी गई है।

इस किसान प्रदर्शन को लेकर कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने उस समय बताया था कि 12 महीनों में देश को इस आंदोलन के कारण करीब ₹60,000 करोड़ का नुकसान हुआ था। व्यापारियों के संगठन ने कहा था कि ये घाटा मुख्यतः इस आंदोलन के शुरुआती स्टेज यानी, नवंबर-दिसंबर 2020 और जनवरी 2021 में हुआ था। इस दौरान भी पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही में काफी दिक्कतें आई थी।

नाम, उम्र, सर्टिफिकेट… IAS बनने के लिए पूजा खेडकर ने सबमें किया झोल, UPSC एप्लीकेशन से खुले राज, OBC कोटे का भी झूठ बोला

महिला ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर को लेकर मीडिया में नई जानकारी सामने आई है। अभी तक जहाँ उनकी अनुचित माँगों और शारीरिक दिव्यांगता से जुड़े फर्जी डॉक्यूमेंट के कारण वे सवालों के घेरे में थीं तो वहीं अब मामले में पता चला है कि पूजा खेडकर ने अपनी उम्र को लेकर भी झूठ बोला है। खबरों के मुताबिक पूजा खेडकर ने महज 3 साल के अंतर में दो डॉक्यूमेंट में अपनी उम्र अलग-अलग बताई। इसके मुताबिक उनकी उम्र 3 साल में सिर्फ 1 साल बढ़ी है।

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने साल 2020 में सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेशन ट्रिब्यूनल को एक एप्लीकेशन दिया था, जिसमें उनकी उम्र 30 साल और साल 2023 में इस प्रकार के डॉक्यूमेंट में उनकी उम्र 31 साल दिखाई दे रही है। इन्हीं डॉक्यूमेंट को देखते हुए सवाल खड़ा हो रहा है कि जब ऐसा नहीं हो सकता कि दिसंबर 2020 से लेकर 2023 तक में पूजा खेडकर की उम्र केवल 1 साल बढ़ी हो तो इससे तो यही साफ है कि उन्होंने अपनी उम्र को लेकर दस्तावेजों में झूठ बोला है।

इसके अलावा पूजा खेडकर के नाम को लेकर भी बवाल है। उन्होंने साल 2020 में अपने दस्तावेज में अपना नाम डॉ खेडकर पूजा दिलीप राओ बताया था। वहीं 2023 में उन्होंने अपना मिस पूजा मनोरमा लिखा था। वहीं पिता के नाम की स्पेलिंग को भी बदल दिया था। 2023 में उन्होंने नाम उन्होंने ऐसा क्यों किया इसकी छानबीन की जा रही है। उनके नाम में डॉक्टर होने और फिर डॉक्टर हटाने की चर्चा मीडिया में तेज है कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया।

फोटो साभार: इंडिया टीवी

बता दें कि इससे पहले जानकारी सामने आई थी कि पूजा खेडकर ने 2007 में एमबीबीएस में एडमिशन लेते समय भी घालमेल किया था। दरअसल, पूजा खेडकर ने एमबीबीएस में ओबीसी नॉन क्रीमी लेयर के तहत एडमिशन लिया था जबकि उनके माता-पिता प्रशासनिक अधिकारी थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में काशीबाई नवले मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस, एमडी (माइक्रोबायोलॉजी) डॉ. अरविंद वी. भोरे ने दावा किया था कि IAS अधिकारी डॉ पूजा खेडकर ने 2007 में मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए ओबीसी सर्टिफिकेट जमा किया था। इस दौरान उन्होंने ओबीसी खानाबदोश जनजाति-3 कैटेगरी के तहत एडमिशन लिया था, जो वंजारी समुदाय के लिए रिजर्व है। एडमिशन के वक्त उन्होंने किसी प्रकार की फिजिकल डिसेबिलिटी को लेकर कोई प्रमाण पत्र नहीं दिया था।

12 साल की दलित बच्ची से 50 साल के इसरार ने किया रेप, पुलिस ने पकड़ा तो बोला- मेरे ऊपर शैतान सवार था: पीड़ित पिता को भी दी थी जान से मारने की धमकी

उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में रविवार (14 जुलाई 2024) को 50 साल के अधेड़ इसरार उर्फ गुड्डू ने 12 साल की बच्ची के साथ रेप किया। बच्ची एससी समुदाय की है और पड़ोस में ही रहती है। इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आरोपित इसरार उर्फ गुड्डू को गिरफ्तार कर लिया है। हालाँकि जब उससे पुलिस ने पूछताछ की, तो उसने कहा कि “मेरे ऊपर शैतान सवार हो गया था।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला सदर बाजार इलाके का है। जहाँ रविवार को 50 साल का इसरार उर्फ गुड्डू 12 साल की बच्ची को पड़ोस की दुकान में ले गया और उसके साथ रेप किया। उसने रेप के बाद बच्ची को छोड़ दिया। इस दौरान सामान लेकर घर की तरफ आ रहे बच्ची के पिता ने उसे रोते देखा, तो उसने पूरी बात बताई। लेकिन जब बच्ची के पिता ने इसरार से पूछा, तो वो बच्ची के पिता को भी धमकाने लगा। इस मामले में सूचना मिलने ही हिंदूवादी संगठनों से जुड़े लोग भी पहुँच गए और उनकी मदद से पीड़ित बच्ची के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

जानकारी के मुताबिक, इसरार उर्फ गुड्डू ने पुलिस ने पूछताछ में खुद पर शैतान के सवार होने की बात कही। उसने कहा, “मेरे ऊपर शैतान सवार हो गया था।” इस मामले में पुलिस ने आरोपित इसरार को वारदात के कुछ ही घंटों के अंदर ही गिरफ्तार कर लिया। वो फरार हो गया था, लेकिन मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ पॉक्सो, एससी-एसटी एक्ट व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

शाहजहाँपुर के एएसपी (सिटी) संजय कुमार ने बताया कि आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसे जल्द ही कोर्ट में पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बच्ची की हालत स्थिर है, और वो खतरे से बाहर है। फिलहाल पुलिस अग्रिम कार्रवाई कर रही है।

अजमेर दरगाह के बाहर ‘सर तन से जुदा’ की गूँज के 11 दिन बाद उदयपुर में काट दिया गया था कन्हैयालाल का गला, 2 साल बाद भड़काऊ नारेबाजी में खादिम गौहर चिश्ती सहित 6 बरी

राजस्थान के अजमेर शरीफ दरगाह के सामने ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाने वाले दरगाह के खादिम मौलवी गौहर चिश्ती सहित छह आरोपितों को कोर्ट ने बरी कर दिया है। भाजपा नेता नूपुर शर्मा के बयान के बाद इस्लामी कट्टरपंथी देश में महौल बिगाड़ रहे थे। इनमें ये लोग भी शामिल थे। इसके बाद उदयपुर में कन्हैया लाल दर्जी का गला रेत दिया गया। देश के कई इलाकों से भी ऐसी घटनाएँ सामने आई थीं।

खादिम सहित सभी छह आरोपितों को एडीजे-4 कोर्ट ने बरी किया है। यह मामला पिछले दो साल से ट्रायल कोर्ट में चल रहा था। मामले की सुनवाई के दौरान कुल 22 गवाह और 32 दस्तावेज पेश किए गए थे। दोनों पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद जज रितु मीणा सभी आरोपितों को बरी कर दिया। इस मामले में एक आरोपित अहसानुल्लाह फरार है। उस पर कोर्ट ने कोई फैसला नहीं दिया।

‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाने वाले इस मामले में जिन आरोपितों को बरी किया गया है, उनके नाम हैं- दरगाह के खादिम गौहर चिश्ती, अजमेर के रहने वाले 31 साल के ताजिम सिद्दीकी पुत्र नईम खान, 42 साल के फखर जमाली पुत्र सैयद मोहम्मद जुबैर जमाली, 47 साल के रियाज हसन दल पुत्र हसन, 48 साल के मोईन खान पुत्र स्व. शमसुद्दीन खान और 45 साल के नासिर खान।

दरगाह के सामने अपने साथियों सहित ‘सर तन से जुदा’ के भड़काऊ नारे लगाने वाले दरगाह के मौलवी गौहर चिश्ती को साल 2022 में तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया था। दरअसल, नूपुर शर्मा प्रकरण के दौरान मौलाना का एक वीडियो वायरल हुआ था।। इस वीडियो में ये सभी आपत्तिजनक नारे लगाते हुए दिखे थे। इसके बाद इनके खिलाफ जून 2022 में मुकदमा दर्ज किया गया था।

इस मामले में सरकारी वकील गुलाम नजमी फारूकी ने बताया कि कोर्ट ने पूरा निर्णय अभी आउट नहीं किया है। वर्तमान में सिर्फ इसकी घोषणा की गई है। इसमें सभी छह आरोपितों को सभी धाराओं में बरी करने की बात कही गई है। सरकारी वकील ने बताया कि पूरा जजमेंट देखने के बाद वे इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे। वहीं, फरार आरोपित अहसानुल्लाह पर कोई फैसला नहीं आया है।

वहीं, आरोपितों की ओर से पेश वकील अजय वर्मा का कहना है कि भड़काऊ नारे वाले जो भी वीडियो सामने आए थे, उनका सत्यापन नहीं हो पाया। पुलिस ने मौके का नक्शा नहीं बनाया और जो पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे, वे भी अपनी मौजूदगी के दस्तावेज पेश नहीं कर पाए। वकील अजय वर्मा ने कहा कि कोर्ट ने इस संबंध में पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाया और सभी आरोपितों को बरी कर दिया।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी वकील फारूकी ने बताया कि इस पूरे प्रकरण का एक वीडियो सामने आया था। वीडियो के आधार पर अजमेर के रहने वाले चार आरोपितों- ताजिम सिद्दीकी, फखर जमाली, रियाज हसन दल, मोईन खान, नासिर खान को गिरफ्तार किया गया था। इस दौरान मौलाना गौहर चिश्ती फरार हो गया था। उसे हैदराबाद में अहसानुल्लाह ने शरण दी थी।

इस मामले में पुलिस ने 15 जुलाई 2022 को दरगाह के मौलाना गौहर चिश्ती और अहसानुल्लाह को पकड़ लिया था। बाद में आरोपित अहसानुल्लाह को जमानत पर रिहा किया गया था। इसके बाद वह फरार हो गया। उसकी खोज-खबर नहीं मिली। जाँच अधिकारी दलबीर सिंह की रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने अहसानुल्लाह को 12 मार्च 2024 को फरार घोषित कर दिया था।

उदयपुर के कन्हैयालाल हत्याकांड में NIA के निशाने पर भी गौहर चिश्ती था। भड़काऊ भाषण और नारेबाजी के बाद खादिम गौहर चिश्ती ने उदयपुर यात्रा की थी। इसके साथ ही गौहर की कुछ पुरानी संदिग्ध फोटो भी सामने आई थी, जिसमें गौहर चिश्ती CRPF परिसर का VIDEO बनाते हुए दिख रहा था। हालाँकि, गौहर चिश्ती से पूछताछ में कुछ भी काम की जानकारी सामने नहीं आई थी।

बता दें कि नूपुर शर्मा द्वारा इस्लाम के पैगंबर पर दिए गए बयान के बाद कट्टरपंथियों ने इसे ईशनिंदा बताकर देश में माहौल खराब करने की घोषणा की थी। इसके बाद 17 जून 2022 को कॉन्स्टेबल जयनारायण जाट ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। इसमें उन्होंने कहा कि था कि घटना के दिन वह दोपहर करीब 3 बजे निजाम गेट पर ड्यूटी दे रहे थे। उस दौरान मौन जुलूस निकाला जा रहा था।

जाट ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इस दौरान सुनियोजित तरीके से खादिम गौहर चिश्ती हित कुछ लोगों ने नारे लगाने शुरू कर दिए थे। उसमें रिक्शे पर लाउडस्पीकर लगाकर ‘सिर तन से जुदा’ के नारे लगाए थे। जुलूस में 2500-3000 लोगों की भीड़ दरगाह के सामने जुटी थी। जाट की रिपोर्ट के आधार पर चिश्ती पर हिंसा के लिए भीड़ को उकसाने और हत्या की अपील करने का मामला दर्ज किया गया था।

इस घटना के बाद 28 जून 2022 को उदयपुर में कन्हैयालाल नाम के एक दर्जी की गला काटकर सार्वजनिक रूप से हत्या कर दी गई थी। इस दौरान आरोपित मोहम्मद रियाज़ अंसारी और मोहम्मद गौस ने गला काटने का वीडियो भी बनाया था। बाद में पुलिस ने इन दोनों आरोपितों को पकड़ लिया। ये दोनों अभी जेल में हैं। वहीं, कन्हैया लाल के परिजनों को अभी भी न्याय का इंतजार है।

कन्हैया लाल के बेटे घोषणा की है कि जब तक उनके पिता को न्याय नहीं मिल जाता, तब वे जूता-चप्पल नहीं पहनेंगे और नंगे पैर रहेंगे। इतना ही नहीं, मृतक कन्हैया लाल की अस्थियाँ भी विसर्जन की बाट खोज रही हैं। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। दूसरी तरफ, आपत्तिजनक नारे लगाकर लोगों को उकसाने वाले खादिम सहित अन्य आरोपितों के मामले में तेजी से सुनवाई होते हुए उन्हें बरी भी कर दिया गया।

जिस किले में प्रवेश करने से शिवाजी को रोक नहीं पाई मसूद की फौज, उस विशालगढ़ में बढ़ रहा दरगाह: काटे जा रहे जानवर-156 अतिक्रमण, मंदिरों की दुर्गति

महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में एक किला है, विशालगढ़। लगभग 1000 साल पुराना यह विशालगढ़ किला छत्रपति शिवाजी महाराज के वीरतापूर्ण जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है। यह किला आजकल अवैध कब्जे की खबरों को लेकर चर्चा में है। इस किले की वर्तमान स्थिति काफी चिंतनीय है।

कोल्हापुर में स्थित इस विशालगढ़ किले में शिवाजी महाराज बीजापुर के सुलतान आदिलशाह के एक सेनापति सिद्दी मसूद के चंगुल से बच कर पहुँचे थे। सिद्दी मसूद उन्हें दो महीने तक घेरने के बाद भी नहीं पकड़ पाया था। उनको इस किले तक पहुँचाने में बाजी प्रभु और फूलजी प्रभु ने उनके यहाँ तक पहुँचाने के लिए एक युद्ध भी लड़ा था। वर्तमान में यह किला अवैध अतिक्रमण के चंगुल में है।

इस किले में काफी संख्या में लोग रहते हैं। इनमें बड़ी संख्या मुस्लिमों की है। यह सामने आया है कि किले में मुस्लिम समुदाय अवैध अतिक्रमण को बढ़ावा दे रहा है। यहाँ स्थित एक दरगाह को अवैध रूप से बढ़ाया गया है जबकि इसी किले के भीतर स्थित मंदिरों को जीर्ण शीर्ण अवस्था में छोड़ दिया गया है। किले के भीतर पशु काटने की बात भी कही गई है।

‘अवैध मस्जिद ‘के साथ ही हो रहा अतिक्रमण

आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, विशालगढ़ किले के भीतर 156 ऐसे ढाँचे हैं, जिनको अवैध रूप से बनाया गया है। इनमें से 100 से अधिक मुस्लिम समुदाय के हैं। यहाँ लोहे की शीट लगाकर अतिक्रमण किया गया है। इस किले को 1999 में ASI संरक्षित संरचना घोषित किया गया था। इस सर्वे में किले के भीतर 12 धार्मिक स्थल पाए गए थे, इनमें से 11 हिन्दू स्थल थे जबकि 1 दरगाह थी। इस दरगाह को मलिक रेहान बाबा दरगाह नाम से जाना जाता है।

बताया गया है कि दरगाह के पास का इलाका पहले बहुत छोटा था और अब यह बढ़ कर 1000 स्क्वायर फीट से अधिक हो चुका है। इसके अलावा दरगाह के पीछे एक मस्जिद को भी बढ़ाया गया है। इस मस्जिद का क्षेत्रफल बढ़ाने की कोई अनुमति नहीं ली गई है, इसलिए यह अवैध है। किले के भीतर अधिकांश अतिक्रमण इसी इलाके में हुआ है। दरगाह के आसपास कई अवैध दुकानें भी खुली हैं, यह दुकानें दरगाह में चढ़ने वाली चादर, अगरबत्ती और फूल आदि बेचती हैं।

स्थानीय हिन्दू बताते हैं कि जिन मलिक रेहान बाबा के लिए यह दरगाह बनाई गई है वह आदिलशाह का एक आक्रान्ता था जिसे यहाँ युद्ध में मार दिया गया था। वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम कहते हैं कि बाबा 2000 साल पहले यहाँ रहे थे। वहीं इस किले का इतिहास ही 1000 साल पुराना बताया जाता है, ऐसे में बाबा मलिक दरगाह के 2000 साल रहने की बात नहीं समझ आती। इस दरगाह पर 2015 में ₹10 लाख खर्च कर इसे संवारा भी गया था।

हिन्दू मंदिरों का बुरा हाल

जहाँ एक ओर किले के भीतर बनी दरगाह में काफी लोग आते जाते हैं और यहाँ दुकाने खुली हुई हैं, वहीं किले के भीतर बने मंदिरों का बुरा हाल है। वर्तमान में यहाँ 20-24 हिन्दू मंदिर है लेकिन यह काफी खराब हालत में हैं। इनकी देखरेख निलेश हर्दिकर करते हैं, वह 61 वर्ष के हैं। वह इन मंदिरों की देखरेख करते हैं। वह रोज इन मन्दिरों में जाते हैं, सफाई करते है हैं पूजा भी करते हैं। वह रोज यहाँ पूजा करने के लिए लगभग 16 किलोमीटर चलते हैं।

उन्होंने बताया कि किले के भीतर 156 जगह पर अतिक्रमण हुआ है। उन्होंने बताया कि इन मंदिरों के विषय में जल्द कोई कदम नहीं उठाए गए तो जल्द ही यह एकदम जीर्ण शीर्ण हालत में आ जाएँगे। इस किले के भीतर उन दो योद्धाओं के समाधि स्थल भी हैं, जिन्होंने शिवाजी महाराज के लिए युद्ध लड़ा था। उन तक पहुँचने का भी सही रास्ता नहीं है। यहाँ रस्ते में कूड़ा पडा रहता है। किले के भीतर कुछ सरकार विभागों के बीच विवाद भी है, इस कारण काम में भी देरी होती है।

विशालगढ़ में पशु वध पर बैन की माँग

किले में स्थित इस दरगाह पर पशुओं की क़ुरबानी भी होती है। यहाँ दरगाह में बकरे और मुर्गे की बलिकुर्बानी दी जाती है। इस किले में पशु वध पर रोक लगाने की माँग भी लगातार हिन्दू करते आए हैं। इसको लेकर 2023 में राज्य के पुरातत्व विभाग ने इस पर रोक लगा दी थी। लेकिन 2024 में दरगाह में होने वाले उर्स के दौरान कुर्बानी की अनुमति बॉम्बे हाई कोर्ट ने दे दी थी। गौरतलब है कि महाराष्ट्र के अन्य किसी किले के भीतर पशुओं को काटने की इजाजत नहीं है।

किले में जनसंख्या भी बढ़ी

विशालगढ़ किले के भीतर 1953 में 33 वोटर रहते थे, इनमें 12 मुस्लिम समुदाय से थे। इसके बाद यह संख्या लगातार बढ़ती गई। 2022 के सरकारी दस्तावेजों के हिसाब से, यहाँ कुल 459 लोग रह रहे थे। इनमें से 290 मुस्लिम और 169 हिन्दू थे। बताया गया कि पिछले 4-5 दशक में यहाँ मुस्लिम आबादी बढ़ी है। यहाँ अस्थायी रूप से रहने वालों को इंदिरा आवास योजना के तहत घर दिए जाने के प्रमाण भी हैं। कई हिन्दू संगठन किले के भीतर से अतिक्रमण हटाने की माँग लम्बे समय से कर रहे हैं।

गौरतलब है कि विशालगढ़ जैसा अतिक्रमण का मामला महाराष्ट्र के ही सतारा जिले में बने हुए प्रतापगढ़ किले में हुआ था। यहाँ मुस्लिम सेनापति अफजल खान की कब्र के आसपास अवैध निर्माण किया गया था। यहाँ कुछ मौलाना आकर रहने लगे थे। इसके बाद वह इस किले में जाने वालों को अफजल खान की वीरता की गाथाएँ भी सुनाने लगे थे। यह मामला बॉम्बे हाई कोर्ट भी पहुँचा था। हाई कोर्ट ने यहाँ से यह अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। 2022 में जाकर यह अतिक्रमण मुक्त करवाया सका था।

(यह रिपोर्ट मूल रूप से सिद्धि सोमानी ने अंग्रेजी में लिखी है, इसे आप यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं।)