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भारतवंशी पत्नी, हिंदू पंडित ने करवाई शादी: कौन हैं JD वेंस जिन्हें डोनाल्ड ट्रम्प ने चुना अपना उपराष्ट्रपति उम्मीदवार, हमले के बाद पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति का ‘हीरो’ जैसा वेलकम

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को रिपब्लिकन पार्टी के नेशनल कंवेंशन में राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुना गया है। रिपब्लिकन पार्टी का यह निर्णय ट्रम्प की हत्या के प्रयास के बाद आया है। इसी के साथ ओहायो के सीनेटर JD वेंस को रिपब्लिकन पार्टी ने अपना उपराष्ट्रपति उम्मीदवार चुना है।

रिपब्लिकन पार्टी का यह कंवेंशन अमेरिका के पेंसिलवेनिया राज्य के मिलवॉकी शहर में हो रहा है। इसमें पूरे अमेरिका से रिपब्लिकन पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी आए हैं। यह कंवेंशन सोमवार (15 जुलाई, 2024) को चालू हुआ था और 18 जुलाई तक चलेगा। इसमें 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की आगे की रणनीति भी बनेगी।

इस कंवेंशन में डोनाल्ड ट्रम्प भी शामिल हुए हैं। वह सोमवार को यहाँ अपने कान पर एक बैंडेज लगा कर आए। वह अपने ऊपर पेंसिलवेनिया में हुए जानलेवा हमले के बाद पहली बार नजर आए हैं। उनका पूरे कंवेंशन हॉल ने तालियों से स्वागत किया। इस हमले के बाद ट्रम्प की छवि एक नायक जैसी हो गई है।

ट्रम्प के सम्मान में हॉल में उपस्थित सभी लोग खड़े हो गए और USA! USA! के नारे लगाए। ट्रम्प ने सभी का अभिवादन स्वीकार किया। ट्रम्प ने यहाँ संबोधन नहीं दिया बल्कि वह अपने साथ उपराष्ट्रपति का चुनाव लड़ने वाले JD वेंस के साथ बैठ गए और लोगों का अभिवादन स्वीकार करते रहे।

गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रम्प पर शनिवार (13 जुलाई, 2024) को पेंसिलवेनिया में एक रैली के दौरान एक सिरफिरे शूटर ने गोलियाँ बरसा दी थीं। इस हमले में ट्रम्प बाल-बाल बचे थे। एक गोली उनके कान को छूते हुए निकल गई थी। हमलावर को एक सुरक्षाकर्मी ने मार गिराया था। इस हमले में एक रैली में शामिल एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।

इन कंवेंशन में ट्रम्प को राष्ट्रपति उम्मीदवार चुने जाने के साथ ही अमेरिका के ओहायो राज्य से 39 वर्षीय सीनेटर JD वेंस को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुना गया। JD वेंस को चुनने का ऐलान ट्रम्प ने स्वयं किया। उन्होंने लिखा, “लंबे विचार-विमर्श और गहराई से सोचकर अन्य लोगों की जबरदस्त प्रतिभा पर विचार करने के बाद, मैंने निर्णय लिया है कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति का पद संभालने के लिए सबसे सही उम्मीदवार ओहायो राज्य के सीनेटर जेडी वेंस हैं।”

कौन हैं JD वेंस?

JD वेंस ओहायो राज्य से पहली बार के सीनेटर हैं। वेंस अमेरिका के मरीन कोर में काम कर चुके हैं। उन्होंने ईराक युद्ध में अपनी सेवाएँ दी हैं। यहाँ वह एक युद्ध पत्रकार और PRO थे। उन्होंने अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की है। वह एक किताब लिख कर प्रसिद्ध हुए थे। यह किताब डोनाल्ड ट्रम्प के बारे में ही थी। वह पूर्व ट्रम्प के आलोचक भी रहे हैं। इसके बाद वह ट्रम्प के समर्थक हो गए और 2022 में वह रिपब्लिकन पार्टी से चुनाव लड़ सीनेटर भी बन गए।

JD वेंस का भारत से भी बड़ा कनेक्शन है। उनकी पत्नी का नाम उषा वेंस उर्फ़ उषा चिल्लुकुरी है। उषा वेंस एक भारतवंशी हैं। उषा और JD वेंस की मुलाकत येल यूनिवर्सिटी में पढ़ने के दौरान ही थी। इसके बाद दोनों में प्रेम सबंध हो गए 2014 में दोनों ने शादी कर ली। दोनों ने एक हिन्दू पंडित के सामने भी अपनी शादी की रस्में पूरी की थी। उषा वेंस स्वयं एक सफल वकील हैं। उषा वेंस भारतीय संस्कृति की भी जानकारी रखती हैं।

वेंस की सफलता में उषा का बड़ा हाथ रहा है। JD वेंस भी अपने स्पष्ट विचारों के लिए जाने जाते हैं। वेंस अमेरिकी रणनीति में भारत के समर्थक माने जाते हैं। उन्होंने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन के भारत और जापान को विदेशी लोगों को पसंद करने वाला देश कहने पर आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि यह दोनों देश चीन के विरुद्ध अमेरिका साझेदार हैं। उन्होंने बायडेन की विदेश नीति की आलोचन भी की थी।

JD वेंस ने उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बनने पर प्रसन्नता व्यक्त की है।

जम्मू-कश्मीर के डोडा में 5 जवान बलिदान, जंगल में छिपे थे इस्लामी आतंकवादी: हिन्दू तीर्थयात्रियों पर हमला करने वाले आतंकी समूह ने ली जिम्मेदारी

जम्मू कश्मीर के डोडा में इस्लामी आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में सेना के एक अफसर समेत 5 जवान वीरगति को प्राप्त हुए हैं। डोडा इलाके में यह मुठभेड़ लगातार जारी है। इस आतंकी हमले की जिम्मेदारी कश्मीर टाइगर्स नाम के आतंकी समूह ने ली है।

जानकारी के अनुसार, धारी गोते उराबंगी इलाके में सोमवार (15 जुलाई, 2024) को रात लगभग 8 बजे यह मुठभेड़ चालू हुई थी। इस दौरान आतंकियों ने सेना और जम्मू कश्मीर पुलिस पर फायरिंग की। इसके जवाब में सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन लॉन्च किया। इस दौरान आतंकियों ने भागने की कोशिश की लेकिन सैनिको ने उनका पीछा किया। इसके बाद दोनों के बीच भारी गोलाबारी चालू हो गई। इसी मुठभेड़ में सेना के एक अफसर समेत 5 जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। इनमें एक जवान जम्मू कश्मीर पुलिस का भी था।

इन जवानों को यहाँ से इलाज के लिए ले जाया गया लेकिन इन्हें को बचाया नहीं जा सका। इस इलाके में ऑपरेशन मंगलवार को भी जारी है। जम्मू कश्मीर पुलिस समेत सेना की तमाम टुकड़ियाँ मौके पर मौजूद हैं और आतंकियों को खोज रही हैं। बताया गया है कि इस इलाके में 2-3 आतंकी अब भी छुपे हुए हैं।

जिस इलाके में यह मुठभेड़ हुई वह घना जंगली क्षेत्र है, इसलिए यहाँ आतंकियों की तलाश करने में कठिनाइयाँ आ रही हैं। बताया गया है कि इस मुठभेड़ में मारे गए अफसर को हाल ही में मेजर की रैंक पर पदोन्नति दी गई थी और वही इस ऑपरेशन का शुरुआत में नेतृत्व कर रहे थे।

मुठभेड़ में कैप्टन बृजेश थापा, सिपाही अजय, सिपाही बृजेन्द्र और डी राजेश वीरगति को प्राप्त हुए हैं। सेना प्रमुख उपेन्द्र द्विवेदी ने उनके निधन पर शोक जताया है और उनके परिवार से संवेदना व्यक्त की है। उनके अलावा जम्मू कश्मीर पुलिस के एक पुलिसकर्मी की भी हमले में वीरगति हुई है।

इस हमले की जिम्मेदारी कश्मीर टाइगर्स नाम के एक इस्लामी आतंकी समूह ने ली है। यह जैश ए मुहम्मद का ही एक मुखौटा संगठन है। इसी आतंकी समूह ने हाल ही में रियासी में हिन्दू तीर्थयात्रियों की एक बस हमले की जिम्मेदारी ली थी। इस हमले में एक बच्चे समेत 9 हिन्दू तीर्थयात्रियों की मौत हो गई थी।

गौरतलब है कि बीते कुछ महीनों में जहाँ कश्मीर क्षेत्र शांत हो गया है, वहीं जम्मू क्षेत्र लगातार में लगातार कई हमले हुए हैं। इस क्षेत्र में सेना के काफिलों पर हमले की भी कई घटनाएँ सामने आई हैं। इनमें अब तक कई जवान मारे जा चुके हैं। इन आतंकियों को स्थानीय लोगों का समर्थन भी प्राप्त होने की बात कही जा रही है। जिस इलाके में यह हमला हुआ है, वहीं 26 जून, 2024 को तीन आतंकियों को मार गिराया गया था।

‘जम्मू-कश्मीर की पार्टियों ने वोट के लिए आतंक को दिया बढ़ावा’: DGP ने घाटी के सिविल सोसाइटी में PAK के घुसपैठ की खोली पोल, कहा – जमात को छूने भी नहीं देते थे

जम्मू कश्मीर के DGP रश्मि रंजन स्वेन (RR स्वेन) ने आतंक-राजनीति नेक्सस पर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा है कि जम्मू कश्मीर की एक राजनीतिक पार्टी ने यहाँ आतंक का नेटवर्क बढ़ाया और उनके आका तैयार किए ताकि उन्हें वोट मिल सकें। उन्होंने आरोप लगाया कि जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों पर कार्रवाई नहीं की गई जो लगातार आंतक के लिए पैसा और विचारधारा का समर्थन दे रहे थे।

RR स्वेन सोमवार (15 जुलाई, 2024) को IIM में अपना संबोधन दे रहे थे। उन्होंने इस दौरान कहा,”पूरा सच यह है कि पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर के समाज के हर तबके में घुसपैठ बना ली थी। कश्मीर की राजनीतिक पार्टियों ने इस दौरान दोहरा खेल खेला। इससे सुरक्षाबलों और आमजनता भी सकते में रही। आतंकियों के घरों पर जाना और उनसे सहानुभूति दिखाना सामान्य सी बात हो गई थी। नए आतंकियों को तो खत्म करने की छूट दी गई लेकिन जो इन आतंकियों की भर्ती में सहायता करते थे और इनके लिए पैसा लाते थे, उनकी कभी जाँच नहीं हुई।”

DGP स्वेन ने इसके बाद कश्मीर की पूर्व में हालत बताते हुए कह़ा, “जमात-ए-इस्लामी, जिसने इस आतंक को वैचारिक और मजहबी मान्यता दी, उसको छूने तक नहीं दिया गया। यह तब किया गया जब सबको यह बात पता थी कि जमात ना केवल सरकार के शान्ति प्रयासों को नुकसान पहुँचा रही है, बल्कि कश्मीर में होने वाले प्रदर्शनों को भी वित्तीय मदद दे रही है।”

DGP स्वेन ने बताया कि उन लोगों पर कार्रवाई करना एकदम अपराध जैसा बना दिया गया जो लगातार भारत के खिलाफ जहर उगलते थे, तथ्यों को गलत रूप से पेश करके लगातार अपना नैरेटिव चलाते थे और देश के खिलाफ दुष्प्रचार करते थे। उन्होंने कहा कि यह सब जानबूझ कर किया गया जाता था।

उन्होंने आरोप लगाया कि SP रैंक के अधिकारियों को आतंकियों के साथ जेल में उन अपराधों के लिए ठूंस दिया गया जो उन्होंने कभी किए ही नहीं। DGP स्वेन ने कहा कि 2013 में दो लड़कियों की पानी में डूबने से हुई मौत को आतंक के नैरेटिव को हाइजैक करने दिया गया जिससे घाटी बंधक बन गई।

इसके बाद उन्होंने बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा,”स्थितयाँ यहाँ तक खराब हो गईं थी कि कश्मीर की सबसे मुख्य पार्टी ने अपने वोट बढ़ाने के लिए आतंक के नेटवर्क और इसके आकाओं को बढ़ाने का तक काम किया था। सरकार और सुरक्षाबलों के प्रयासों और जनता के समर्थन से ही पिछले 6-7 सालों में यह स्थिति बदल पाई।”

DGP स्वेन का यह खुलासा ऐसे समय में आया है जब घाटी आतंक से शांति की तरफ बढ़ रही है और राज्य में जल्द ही दोबारा चुनाव करवाए जाने के कयास लगाए जा रहे हैं।

23 लड़के-लड़कियों का खुलेआम इस्लामी धर्मांतरण, सामूहिक निकाह भी: बरेली में मौलाना तौकीर रज़ा का ऐलान, कहा – पढ़ाई-नौकरी के दौरान हुआ इश्क़

मौलाना तौकीर रज़ा खान सामूहिक इस्लामी धर्मांतरण की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने स्थानीय जिला प्रशासन से अनुमति भी माँगी है। ‘इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल’ ने के अध्यक्ष एवं दरगाह हजरत खानदान के सदस्य मौलाना तौकीर रज़ा खान ने 20 से भी अधिक युवक-युवतियों के सामूहिक निकाह के लिए तारीख़ भी मुक़र्रर कर दी है। इस दौरान सामूहिक इस्लामी धर्मांतरण भी कराया जाएगा। IMC के संगठन प्रभारी नदीम कुरैशी ने नगर मजिस्ट्रेट को इस बाबत पत्र सौंपा है।

असल में, सौदागरान मोहल्ला स्थित अपने आवास पर मीडिया से बात करते हुए खुद तौकीर रज़ा ने ये जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि 15 लड़के और 8 लड़कियाँ हैं, जो दूसरे धर्म के हैं लेकिन इस्लाम कबूलना चाहते हैं। उनका कहना है कि ये सभी बालिग़ हैं और इन्होंने पहले से शादी कर रखी है। जिला प्रशासन से अनुमति माँगी गई है। रविवार (21 जुलाई, 2024) को खलील स्कूल में सबसे पहले 5 जोड़ों के इस्लामी धर्मांतरण की प्रक्रिया पूरी किए जाने का प्लान है। हिन्दू संगठन इसका विरोध कर रहे हैं।

हालाँकि, मौलाना तौकीर रज़ा खान का कहना है कि इन सबने धर्मांतरण पहले ही कर लिया है, कार्यक्रम में सिर्फ इसकी औपचारिक प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। इसके बाद सार्वजनिक रूप से सामूहिक निकाह कराया जाएगा। अभी तक जिला प्रशासन ने इसकी अनुमति के संबंध में कुछ भी लिखित में नहीं दिया है। मौलाना ने कहा कि सभी को अपने निजी मामलों में फैसला लेने का अधिकार है, जिन 5 जोड़ों का पहले निकाह कराया जाएगा उनमें 1 मध्य प्रदेश के हैं, बाकी बरेली के आसपास के जिलों के हैं। मौलाना ने कहा कि पढ़ाई और नौकरी के दौरान ये लड़के-लड़कियाँ प्रेम में पड़े।

इनकी पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, क्योंकि ‘इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल’ के मुखिया का मानना है कि इससे इन्हें दिक्कत आएगी। उन्होंने कहा कि पहले भी कई युवक-युवती ऐसा कर चुके हैं, लेकिन अब वो समाज के सामने खुल कर मुस्लिम बन कर रहना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि लिव-इन को हम बर्दाश्त नहीं कर सकते। प्रशासन को लिखे पत्र में कहा गया है कि बिना किसी प्रलोभन-दबाव के ये लोग मुस्लिम बनना चाहते हैं। इसमें दावा किया गया है कि ये लोग शपथ-पत्र भी देने को तैयार हैं कि ये अपना भला-बुरा सोचने में सक्षम हैं।

मदरसा जा रही 12 साल की लड़की का अपहरण, चाकू के बल पर बलात्कार: केरल पुलिस अब तक खाली हाथ

केरल के कासरगोड में एक 12 वर्ष की बच्ची का अपहरण कर रेप किया गया। उसके साथ यह घटना मदरसा में पढ़ने जाते समय हुई। बच्ची के साथ हुई घटना का खुलासा एक महीने बाद हुआ है। पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर जाँच चालू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कासरगोड की बेकल की रहने वाली एक 12 वर्षीय बालिका एक माह पहले सुबह 7 बजे अपने घर से पास के मदरसे में पढ़ने जा रही थी। इसी दौरान एक व्यक्ति ने आकर उसे दबोच लिया। आरोपित ने उसे शॉल में पकड़ लिया और अपने साथ उठा कर ले गया।

इसके बाद बालिका से चाकू के बल पर रेप किया गया। बालिका ने इस बात का अंदेशा जताया कि उससे रेप करने वाला कोई प्रवासी मजदूर था। मेडिकल टेस्ट में बालिका से रेप की बात सामने आई है। हालाँकि, डॉक्टरों का कहना है कि उसके शरीर पर मिले घाव एक महीने पुराने ना होकर 1-2 सप्ताह ही पुराने लगते हैं।

वहीं पुलिस इस मामले में बालिका के दावों पर संदेह जता रही है। पुलिस को आशंका है कि रेप की इस घटना को बच्ची के जानने वाले किसी व्यक्ति ने अंजाम दिया है। बालिका ने अपने साथ जिस इमारत में बलात्कार की बात कही है, उसकी जाँच भी पुलिस ने की है और उसका शक और गहरा हो गया है।

बताया गया कि बच्ची अपनी माँ के पैतृक आवास पर रहती है और आठ भाई बहनों में सबसे छोटी है। उसकी सबसे बड़ी बहन का निकाह हो चुका है। उसने अपने साथ हुई इस वारदात की जानकारी सबसे पहली अपनी सबसे बड़ी बहन को ही दी थी, इसके बाद इस मामले में शिकायत दर्ज की गई।

पुलिस ने अब बालिका के बयान के आधार पर FIR दर्ज कर ली है और मामले की आगे जाँच कर रही है। अभी इस मामले में आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है, पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री DK शिवकुमार को सुप्रीम कोर्ट से झटका, चलती रहेगी आय से अधिक संपत्ति मामले CBI की जाँच: दौलत के 5 साल में ही ₹33 करोड़ से ₹162 करोड़ होने का आरोप

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति माले में CBI जाँच को रद्द करने की माँग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। उनके खिलाफ CBI का मामला अब बंद नहीं होगा।

जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और सतीश चन्द्र शर्मा ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कोई राहत नहीं दी। डीके शिवकुमार इस मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट का निर्णय रद्द करने की माँग कर रहे थे। उसने भी उनके खिलाफ केस जारी रखने की अनुमति दी थी।

हाई कोर्ट ने अपने इस निर्णय में CBI को आदेश दिया था कि वह अपनी जाँच तीन महीने में पूरी कर ले और इसकी रिपोर्ट जमा करे। यह निर्णय नवम्बर, 2023 में हाई कोर्ट ने दिया था। डीके शिवकुमार के खिलाफ CBI यह जाँच 2013 से 2018 के बीच आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में कर रही है।

वह इस दौरान कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री थे। यह मामला CBI ने 2020 में दर्ज किया था। इसके बाद डीके शिवकुमार ने इसको चुनौती दी थी। यह पूरा मामला 2017 में चालू हुआ था जब आयकर विभाग ने डीके शिवकुमार के ठिकानों पर छापेमारी की थी।

इस छापेमारी में उनके आय से अधिक सम्पत्ति का पता लगा था। इसके बाद उनके खिलाफ आयकर विभाग ने मामला दर्ज किया था। इसके बाद कर्नाटक सरकार ने इस मामले में CBI जाँच की अनुमति भी दी थी। CBI तब से ही इस मामले में जाँच कर रही है।

CBI से डीके शिवकुमार के खिलाफ जाँच करवाने की अनुमति राज्य की भाजपा सरकार ने दी थी। जब कर्नाटक में कॉन्ग्रेस सत्ता में आई तो उसने CBI से जाँच अनुमति वापस ले ली। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने इस जाँच को चुनौती दी गई लेकिन शिवकुमार को राहत नहीं मिली।

शिवकुमार के विरुद्ध दर्ज CBI की FIR में कहा गया है कि 2013 में उनके पास ₹33.9 करोड़ की संपत्ति थी लेकिन 2018 आते-आते यह बढ़ कर ₹162 करोड़ से अधिक हो गई। इसी को लेकर आरोप लगाए गए थे।

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय कॉन्ग्रेस के लिए बड़ा झटका है और अब INC का मतलब आई नीड करप्शन हो चुका है। उन्होंने कहा कि अब कॉन्ग्रेस द्वारा किया गया भ्रष्टाचार सब कहीं उजागर हो रहा है।

मुहर्रम के चंदा के नाम पर दुकानदारों से मारपीट, सामने आया राँची के मेन रोड की घटना का वीडियो: पूर्व CM बाबूलाल मरांडी बोले – दंगों की आग में झोंकने का प्रयास

झारखंड की राजधानी राँची में मुहर्रम के चंदे के नाम पर दुकानदारों के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। राज्य में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी इस घटना का वीडियो शेयर करते हुए कार्रवाई की माँग की है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राँची में मुहर्रम की चंदा वसूली के नाम पर गुंडों द्वारा दुकानदारों के साथ मारपीट और बदसलूकी की जा रही है। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी घटनाओं से पूरे शहर का शांति-सौहार्द बिगड़ सकता है।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राँची मेन रोड अति संवेदनशील क्षेत्र है, पूर्व में भी ऐसे असामाजिक तत्वों द्वारा शहर को दंगों की आग में झोंकने का प्रयास किया जा चुका है। उन्होंने माँग की कि उक्त घटना में संलिप्त आरोपितों को गिरफ्तार कर मुहर्रम के चंदा वसूली में हो रही इस गुंडागर्दी को तुरंत बंद कराया जाए, साथ ही मेन रोड के सभी दुकानदारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। बता दें कि राँची के इस इलाके में कई मॉल और दुकानें स्थित हैं, सबसे ज़्यादा चहल-पहल भी यहीं रहती है।

CCTV वीडियो में कुछ लोगों को मारपीट करते हुए देखा जा सकता है। राँची पुलिस ने जानकारी दी है कि घटना का संज्ञान लेते हुए त्वरित प्राथमिकी दर्ज कर कांड में संलिप्त दोनों अभियुक्तों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। बता दें कि अभी मुस्लिमों का पाक कहा जाने वाला मुहर्रम का महीना चल रहा है। इसे इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना माना जाता है। 7 जुलाई, 2024 को भारत में मुहर्रम शुरू हुआ, जो इसके एक महीने बाद ख़त्म होता है।

इससे पहले बाबूलाल मरांडी ने झारखंड में घुसपैठ के कारण शिक्षा के इस्लामीकरण का मुद्दा उठाया था। उदाहरण के लिए उन्होंने 4 साल पुरानी एक खबर भी साझा की थी। तब घाटशिला के एक स्कूल में बच्चों को बांग्लादेश और पाकिस्तान का राष्ट्रगान याद करने का होमवर्क दिया गया था। बाबूलाल मरांडी ने कहा था कि अपने संरक्षण में बांग्लादेशी घुसपैठियों के फ़र्जी कागजात तैयार कर उन्हें झारखंड में बसाने वाली झामुमो-कॉन्ग्रेस गठबंधन सरकार से ऐसे संवेदनशील विषयों में कार्रवाई की उम्मीद नहीं की जा सकती, इसीलिए NIA को इस मामले को देखना चाहिए। 

पाकिस्तान में इमरान खान की पार्टी PTI को बैन करेगी शाहबाज़ शरीफ की सरकार: पहले से ही जेल में बंद हैं पूर्व प्रधानमंत्री, अब चलेगा राजद्रोह का मुकदमा

पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है। पाकिस्तान की शाहबाज शरीफ की अगुवाई वाली सरकार ने इसी के साथ इमरान कहाँ समेत PTI के बड़े नेताओं पर राजद्रोह का मुकदमा चलाने का भी निर्णय लिया है।

पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने सोमवार (15 जुलाई, 2024) को मीडिया को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, “विदेशी फंडिंग मामले, 9 मई के दंगों और साइफर मामले के साथ ही प्रकरण के साथ-साथ अमेरिका में पास हुए प्रस्ताव को मद्देनजर रखते हुए हमारे पास PTI पर प्रतिबन्ध लगाने के मजबूत सबूत मौजूद हैं।”

उन्होंने आगे बताया, “हम PTI पर प्रतिबंध लगाने जा रहे हैं और हमारा मानना ​​है कि संविधान का अनुच्छेद 17 सरकार को राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है और इस मामले को आगे सुप्रीम कोर्ट में भेजा जाएगा।” उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को आगे बढ़ने के लिए PTI पर प्रतिबंध लगाना ही होगा।

गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार (12 जुलाई, 2024) को ही PTI को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली थी। उसे पाकिस्तान की संसद में आरक्षित सीटों में हिस्सा लेने की अनुमति दी गई थी और उसके बाद वह संसद में सबसे बड़ी पार्टी बन जाती। पाकिस्तान की सरकार ने इस निर्णय को भी चुनौती देने की बात कही है।

इस के अलावा हाल ही में PTI के मुखिया और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीवी को भी कोर्ट से कई मामलों में राहत दी गई है। उन्हें तोशाखाना और इद्दत मामले में हाल ही में राहत मिली है, इसके बाद उनके सक्रिय राजनीति में आने के कयास लग रहे थे।

हालाँकि, इन राहत की खबरों के बीच पाकिस्तान की PPP और मुस्लिम लीग नवाज की गठबंधन सरकार ने मुख्य विपक्षी पार्टी PTI पर प्रतिबन्ध लगाने का निर्णय ले लिया। इसके पीछे 9 मई, 2023 को हुए दंगों को बड़ा कारण बताया गया। 9 मई, 2023 को पाकिस्तान में इमरान खान के गिरफ्तार होने के बाद दंगे भड़क गए थे।

इसके अलावा इस पार्टी पर प्रतिबन्ध के पीछे साइफर मामला भी बताया गया। दरअसल, यह एक पत्र था जिसके आधार पर इमरान खान दावा कर रहे थे कि अमेरिका उनकी सरकार गिराना चाहता है। इन सभी को आधार बना कर अब इमरान खान की पार्टी को प्रतिबंधित करने की बात कही गई है। हालाँकि, इस मामले पर अंतिम निर्णय पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट का होगा।

पार्टी को प्रतिबंधित करने के साथ ही इमरान खान, पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आरिफ अल्वी पर राजद्रोह के तहत मुकदमा चलाने की बात कही गई है। पाकिस्तान की सरकार ने आरोप लगाया कि इमरान खान और उनसे जुड़े हुए लोग पाकिस्तान के रिश्तों को बिगाड़ने और उसकी IMF के साथ डील बिगाड़ने पर तुले हुए हैं।

PTI ने सरकार के इस कदम को आत्मघाती बताया है और इसके लिए पाकिस्तान की फ़ौज उसके मुखिया आसिम मुनीर को जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी ने कहा है कि इससे जो नुकसान होगा वो देश को सहना पड़ेगा। PTI ने फ़ौज के मुखिया को अपनी पुरानी गलतियों से सीखने को कहा है।

मंगलौर के बहाने समझिए मुस्लिमों का वोटिंग पैटर्न: उत्तराखंड की जिस विधानसभा से आज तक नहीं जीता कोई हिन्दू, वहाँ के चुनाव परिणामों से मिलते हैं ये सबक

शनिवार (13 जुलाई, 2024) को देश भर में हुए विधानसभा उपचुनावों के नतीजे आए। इसमें उत्तराखंड की दो सीटें भी शामिल थी। एक सीट हरिद्वार जिले की मुस्लिम बहुल मंगलौर सीट थी जबकि दूसरी चमोली सीट की बद्रीनाथ सीट थी। इन दोंनो सीट पर कॉन्ग्रेस ने जीत दर्ज की। इस जीत को राहुल गाँधी की रणनीति का चमत्कार बना कर प्रचारित किया जा रहा है। हालाँकि, इस बीच मंगलौर सीट पर भाजपा की हार मुस्लिमों के विशेष वोटिंग पैटर्न की ओर ध्यान दिलाती है।

2011 की जनगणना के आँकड़ों के अनुसार, मंगलौर लगभग 90% मुस्लिम आबादी वाला शहर है। मंगलौर विधानसभा क्षेत्र में लगबग 45% मुस्लिम मतदाता हैं, जबकि 20% अनुसूचित जाति के मतदाता हैं। इंडिया टुडे के अनुसार, मंगलौर विधानसभा में 52,000 मुस्लिम जबकि 18,000 दलित, 14,000 जाट और 8,000 गुज्जर मतदाता हैं।

यह सीट अक्टूबर, 2023 में इसके BSP विधायक सरवत करीम अंसारी के निधन के बाद खाली हो गई थी। मंगलौर 10वीं शताब्दी की शुरुआत से ही अस्तित्व में रहा है। इसका नाम चौहान वंश के मंगल सिंह के नाम पर पड़ा था, उन्होंने यहाँ एक मंगल किला बनवाया था। अब यह एक मुस्लिम बहुल शहर है।

हालिया उपचुनाव में, इस सीट पर जीतने वाले कॉन्ग्रेस के काजी मोहम्मद निजामुद्दीन को 37.91% वोट मिले। वहीं दूसरे नंबर पर भाजपा के करतार सिंह भड़ाना रहे, उन्हें 37.4% वोट मिले। इस चुनाव में तीसरे नंबर पर BSP के ओबेदुर रहमान थे, उन्हने 23.4% वोट हासिल हुए।

मंगलौर एक मुस्लिम बहुल सीट है। इसलिए काजी मोहम्मद निजामुद्दीन का जीतना कोई विशेष आश्चर्य की बात नहीं है। हालाँकि, अगर यहाँ से सामने आए आँकड़ों पर नजर डाली जाए तो मुस्लिम समुदाय के मतदान पैटर्न के बारे में काफी दिलचस्प जानकारी सामने आती है।

मंगलौर से कभी नहीं हुई गैर मुस्लिम की जीत

2002 से लगातार मंगलौर सीट से कॉन्ग्रेस और बसपा के मुस्लिम उम्मीदवार ही जीतते आ रहे हैं। 2024 में इस सीट से कॉन्ग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज करने वाले निजामुदीन 2002 में बसपा के उम्मीदवार थे। 2002 में भी काजी निजामुद्दीन ने 40% वोट पाकर जीत दर्ज की थी।

इस चुनाव में दूसरे नम्बर पर कॉन्ग्रेस के सरवत करीम अंसारी रहे थे। उन्हें 27.5% वोट मिले थे। 2007 में भी यही सिलसिला दोहराया गया था और निजामुद्दीन ने अंसारी को पटखनी दी थी। इस बार निजामुद्दीन को 37% वोट मिले थे। इस चुनाव में दूसरे नंबर पर रालोद के कुलवीर सिंह रहे थे।

2012 में काजी निजामुद्दीन ने बसपा छोड़ दी और कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए। इसी सरवत करीम अंसारी बसपा में आ गए और उन्होंने 2012 चुनाव में निजामुद्दीन को पटखनी दे दी। सरवत करीम अंसारी को इस चुनाव में 34.3% वोट मिले जबकि काजी निजामुद्दीन 33.07% वोट के साथ दूसरे नंबर पर रहे।

2017 में काजी निजामुद्दीन ने अपनी जीत का सिलसिला जारी रखा। इस बार उन्हें 38.5% वोट मिले जबकि उनके प्रतिद्वंदी सरवत करीम अंसारी 35.2% के साथ दूसरे नम्बर पर रहे। 2022 में सरवत करीम अंसारी ने जोरदार वापसी की और निजामुद्दीन को पटखनी दे दी। लेकिन 2023 में अंसारी का निधन हो गया और यह सीट खाली हो गई।

इसके बाद हुए 2024 उपचुनाव में भाजपा ने यहाँ से करतार सिंह भड़ाना को जबकि कॉन्ग्रेस ने निजामुद्दीन को उतारा। बसपा ने इस सीट से उबैदुर रहमान को टिकट दिया। इस चुनाव में निजामुद्दीन को 37.9% जबकि भडाना को 37.4% वोट मिले। यानी कुल मिलाकर कहा जाए तो यहाँ से आज तक गैर मुस्लिम उम्मीदवार नहीं जीत पाया।

कॉन्ग्रेस को मिली जीत, भाजपा को बढ़त

मुस्लिम वोटर की बहुलता वाली इस सीट पर ऐतिहासिल रूप से हमेशा मुस्लिम उम्मीदवार ही जीते हैं। लेकिन इस बार एक बड़ा बदलाव यहाँ देखने को मिल रहा है। भाजपा ने इस बार के उपचुनाव में यहाँ हिंदू उम्मीदवार करतार सिंह भड़ाना को मैदान में उतारा था, जो काजी मोहम्मद निजामुद्दीन से केवल 422 वोटों से हारे।

वहीं BSP के से मैदान में उतारे गए ओबेदुर रहमान को 23.37% वोट मिले। इस प्रकार 2022 के मुकाबले 2024 में BSP वोट प्रतिशत में 13.8% की गिरावट हुई। वहीं दूसरी ओर, भाजपा का वोट प्रतिशत 16.04% बढ़ा। वोटों के इस हस्तांतरण से यह प्रतीत हो सकता है कि BSP का वोट भाजपा को ट्रांसफर हुआ।

इससे पहले मंगलौर में BSP के मतदाता पार्टी के मुस्लिम उम्मीदवारों को वोट दे रहे थे, इस बार BSP का हिन्दू वोटबैंक भाजपा में ट्रांसफर हुआ। इस वोटबैंक में जाट, गुज्जर और SC जातियाँ शामिल थी। 2024 में ऐसा दूसरी बार हुआ है जब कोई हिन्दू उम्मीदवार दूसरे स्थान पर आया है और उसे अच्छे प्रतिशत में वोट मिले हैं।

इससे पहले किसी हिंदू उम्मीदवार को विधानसभा क्षेत्र में काफी वोट 2007 में मिले थे। 2007 में RLD के चौधरी कुलवीर सिंह को 32.01% वोट मिले थे और वह दूसरे नम्बर पर रहे थे। फिर भी सिंह का वोट प्रतिशत 2024 में भाजपा प्रत्याशी को मिले वोट की तुलना में कम था। भाजपा प्रत्याशी को इस बार जिन्हें 37.4% वोट मिले हैं।

2007 चुनाव में, RLD के कुलवीर सिंह 3393 वोटों से हार गए थे, जबकि 2024 में, भाजपा के हिंदू उम्मीदवार केवल 422 वोटों के अंतर से हारे। वोट प्रतिशत में यह बदलावमंगलौर विधानसभा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बदलाव का संकेत देता है। स्पष्ट है कि यहाँ हिंदू वोट 2007 के बाद पहली बार एकत्रित हो पाया है।

भाजपा ने भी उतारा था मुस्लिम उम्मीदवार, हुई थी करारी हार

मंगलौर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने सिर्फ एक बार ही मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कलीम को अपना उम्मीदवार बनाया था। 2012 के इस विधानसभा चुनाव में, भाजपा उम्मीदवार कलीम को केवल 2,061 वोट मिले थे।

इसी चुनाव में BSP के सरवत करीम अंसारी को 24,706 वोट मिले और वह जीत गए, कॉन्ग्रेस के काजी मोहम्मद निजामुद्दीन 24,008 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। RLD द्वारा मैदान में उतारे गए हिंदू उम्मीदवार गौरीश चौधरी 19,354 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इस चुनाव में अकेला हिन्दू उम्मीदवार RLD की तरफ से था लेकिन इस दौरान हिन्दू एकजुटता देखने को नहीं मिली थी जो 2024 में देखने को मिली।

मंगलौर के नतीजे से मुस्लिमों के वोटिंग के तरीके भी स्पष्ट हुए

मंगलौर के इस चुनाव से उन लिबरल आलोचकों के मुंह पर ताला लग जाना चाहिए जो लगातार मुस्लिम प्रतिनिधित्व की बातें करते हैं। मंगलौर के नतीजों ने यह साफ़ कर दिया है कि जब सीट पर मुस्लिम आबादी 40% के निशान को पार कर जाती है, तो यहाँ से हमेशा लगभग मुस्लिम को ही जीत मिलती है। यह मुस्लिमों के उस वोटिंग पैटर्न को स्पष्ट करता है जिसमें वह अपने समुदाय के उम्मीदवार को जिताने के लिए एकजुट हो जाते हैं।

ऐसे में जब मुस्लिम हमेशा मुस्लिम उम्मीदवार को ही वोट करते हैं तो फिर लिबरल और वामपंथी इस बात पर नहीं रो सकते कि हिन्दू समुदाय मुस्लिमों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं देता। यदि मुस्लिम अपने समुदाय के उम्मीदवार के पीछे इकट्ठा हो सकते हैं, तो हिन्दू भी बिलकुल ऐसा ही कर सकते हैं। इसी मामले में उन पार्टियों पर भी मुस्लिम उम्मीदवार ना उतारने का आरोप नहीं लगाया जा सकता जो वोटबैंक के सामने नतमस्तक ना होती हों।

इसके अलावा लगातार इस बात पर प्रश्न उठते हैं कि भाजपा मुस्लिम उम्मीदवार क्यों नहीं देती। भाजपा ने 2012 में इस सीट से मुस्लिम उम्मीदवार को मौक़ा दिया था लेकिन तब उसकी बुरी गत हुई और मुस्लिमों ने ही अपने समाज के उम्मीदवार को वोट नहीं दिया। ऐसे में इससे साफ़ होता है कि मुस्लिम वोटर केवल अपने समुदाय से उम्मीदवार ही नहीं बल्कि वो उम्मीदवार चाहते हैं जो हमेशा उनके ही पक्ष में बोले। ऐसे में यदि कोई पार्टी बिना तुष्टिकरण की राजनीति के मुस्लिम उम्मीदवार उतारती भी है, तो वह भी हार जाएगा।

यह पैटर्न निश्चित रूप से भाजपा के लिए भी सबक है। उनके 2012 के प्रदर्शन और 2024 के प्रदर्शन में अंतर स्पष्ट रूप से इस बात का संकेत है कि हिंदू समुदाय से बनाया गया उम्मीदवार उन्हें अच्छे नतीजे दे देगा लेकिन मुस्लिमों को आगे करने से उन्हें कोई फायदा नहीं होने वाला।

भाजपा ने 2012 में मुस्लिम बहुल सीट पर जीत के लिए मुस्लिम वोट बटोरने की सोची। लेकिन इसका नतीजा सामने आ गया। ना उसे मुस्लिम वोट ही मिले और हिन्दू वोट भी उससे छिटक गया। वहीं जब उन्होंने एक हिंदू उम्मीदवार को मैदान में उतारा, तभी सीट पर में भाजपा के पक्ष में हिंदू वोटों का अभूतपूर्व एकीकरण हुआ।

स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि जनसांख्यिकी परिवर्तन का खतरा मंगलौर के हिंदुओं पर भारी पड़ रहा है और इसीलिए वह इन उपचुनावों में भाजपा के पक्ष में एकजुट हो गए। इसके अलावा, भाजपा ने इस बार करतार सिंह भड़ाना को मैदान में उतारकर अपने जातिगत समीकरणों को भी साध लिया।

मंगलौर उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित है इसलिए, हरियाणा के एक उम्मीदवार ने मंगलौर के हिंदुओं को आकर्षित किया। इसी कारण से उसका हार का अंतर घट कर मात्र 422 वोट रह गया। मंगलौर के परिणामों से यह साफ़ है कि हिंदू एकीकरण के साथ-साथ अगर जाति का मामला सही ढंग से समझा गया तो भाजपा मुस्लिम वोटबैंक की राजनीति को पटखनी दे सकती है।

यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है। इसे अंग्रेजी में आप यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

बड़ी बहन ने कर ली आत्महत्या, अब छोटी वाली को धमकी… तौहीद ने ‘जानू मिश्रा’ बन फाँसा, पिता को गाली-गलौज कर भगाया तो SP के पास लगाई गुहार

उत्तर प्रदेश के रायबरेली से ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। मामला खीरों था अंतर्गत आने वाले क्षेत्र का है। इस मामले में जहाँ एक नाबालिग हिन्दू लड़की की मौत हो गई है, वही दूसरी लड़की को धमकी मिल रही है। यूपी पुलिस पर भी टालमटोल का आरोप है। रामशरण तिवारी के बेटे रामप्रकाश तिवारी ने इस संबंध में FIR दर्ज करवाई है। उनकी 16 वर्षीया बेटी कुमारी शालू सरस्वती इंटर कॉलेज में 11वीं की छात्रा थी। कॉलेज आने-जाने के दौरान तौहीद उसके साथ छेड़छाड़ करता था।

तौहीद उर्फ़ जानू रनापुर पहरौली का रहने वाला है। उसके अब्बा का नाम ललन है। कॉलेज आने-जाने के दौरान वो शालू को परेशान करता था, उससे एकतरफा प्यार करने लगा था। रामप्रकाश तिवारी को उनकी दूसरी बेटी प्रतिभा ने इसकी जानकारी दी। शालू ने अपना झूठा नाम ‘जानू मिश्रा’ बता रखा था, उसने शालू को अपने जाल में फँसा लिया था। फरवरी 2024 में शालू ने फाँसी लगा कर आत्महत्या कर ली। जब रामप्रकाश तिवारी तौहीद की शिकायत करने उसके घर गए तो उनके साथ गाली-गलौज कर उन्हें भगा दिया गया।

पीड़ित पिता ने SP को दिया ज्ञापन

उनके साथ बदसलूकी करने वालों में बसीर का बेटा लल्लन और लल्लन का बेटा तस्लीम उर्फ़ छोटू शामिल था। उन्होंने धमकाया कि मुकदमा लिखवाने पर उन्हें जान से मार डाला जाएगा। तब वो डर कर वापस आ गए, अब उन्होंने कहा है कि हिम्मत कर के वो मुकदमा लिखवा रहे हैं। पीड़िता प्रतिभा ने भी इस संबंध में बयान दिया है। उन्होंने बताया कि उनकी बहन ने एक दिन बाजार जाने के बहाने उन्हें साथ लेकर तौहीद को भी साथ ले लिया, उस दौरान तौहीद ने शादी की भी बात कही थी।

पीड़िता पिता ने एसपी को दिया ज्ञापन

प्रतिभा ने बताया कि उनकी दीदी ने आत्महत्या कर ली, उसके बाद तौहीद और उसका छोटा भाई रोज जान से मार डालने की धमकी देने लगा। एसपी ऑफिस में इन्होंने अपनी बात रखी है। प्रतिभा 8वीं कक्षा में पढ़ती हैं। परिवार ने कहा है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं होती है तो उन्हें खतरा है, फिर वो मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्महत्या के लिए मजबूर हो जाएँगे। एसपी ने थानाध्यक्ष से बात करने का आश्वासन दिया है। देश में ‘लव जिहाद’ की घटनाएँ लगातार बढ़ती जा रही हैं।