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बॉलीवुड की जो हिरोइन रही है ‘Say No to Drugs’ की ब्रांड एम्बेसडर, उसका भाई ड्रग्स के धंधे में गिरफ्तार: ₹35 लाख की कोकीन मिली, सुशांत की मौत के बाद भी आया था नाम

बॉलीवुड अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह के भाई अमन प्रीत सिंह को ड्रग्स लेने के मामले में हैदराबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, अमन प्रीत नाइजीरियाई नागरिकों द्वारा चलाए जा रहे ड्रग्स रैकेट में शामिल थे जिसमें 13 लोग आरोपित बनाए गए हैं। पुलिस ने कहा है कि वो इस मामले की जाँच कर रहे हैं कि अमन प्रीत अन्य आरोपितों के संपर्क में कब आए थे, फिलहाल उन्हें कोकीन का सेवन करने के मामले में पकड़ा गया है।

पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि गिरोह का सरगना नाइजीरिया का डिवाइन इबुका सुजी है। वह एक बड़ा ड्रग सिंडिकेट चला रहा है। वह हैदराबाद और भारत के अन्य शहरों में ड्रग्स पहुँचाने के लिए अपने मुख्य सहयोगी ओनुओहा ब्लेसिंग को नाइजीरिया से दिल्ली भेजता है। वह फ्लाइट/ट्रेन दोनों से यात्रा करती है और डीलरों को आपूर्ति करती है।

जानकारी के मुताबिक सोमवार (15 जुलाई) को तेलंगाना एंटी नारकोटिक्स ब्यूरो यानी TGANB ने सूचना मिलने पर साइबराबाद पुलिस और नरसिंगी पुलिस के साथ मिलकर एक फ्लैट में छापा मारा। फ्लैट से 35 लाख की कीमत का 199 ग्राम कोकीन बरामद किया। साथ ही कई लोगों की गिरफ्तारी भी हुई। इसी दौरान अमन प्रीत सिंह का नाम भी उछला कि कोकीन का सेवन उन्होंने भी किया। पुलिस ने जानकारी के आधार पर 13 लोगों को गिरफ्तार किया।

बता दें कि पहली बार नहीं कि ड्रग केस में कहीं से अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह का नाम आया हो। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2017 में खुले हैदराबाद ड्रग रैकेट से सम्बंधित मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री (टॉलीवुड) से जुड़ी 10 हस्तियों को नोटिस भेजा था। उसमें भी सुपरस्टार रवि तेजा, राना डग्गबली के साथ रकुल प्रीत सिंह का भी नाम था।

इसके अलावा साल 2020 में जब एक्ट्रेस सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या का मामला आया था उसके बाद भी ड्रग्स से जुड़े केस बहुत सुर्खियों में थे। उस समय एनसीबी की जाँच के दौरान रकुल प्रीत सिंह रडार पर थीं। उनके साथ सारा अली खान व अन्य अभिनेत्रियों से भी पूछताछ हुई थी। दिलचस्प बात ये है कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की जाँच में शामिल रहीं रकुल प्रीत सिंह को एक समय में ‘say no to drugs’ (ड्रग्स को नहीं कहो) अभियान का हिस्सा बनाया था।

बॉडी की तौबा-तौबा हो गई… ‘लीजेंड चैंपियन्स’ को Video पड़ी भारी, हरभजन-युवराज-सुरेश रैना-गुरकीरत मान के खिलाफ पुलिस से शिकायत: जानिए क्या है मामला

भारत की साल 2011 की क्रिकेट विश्व कप चैंपियन टीम के 3 बड़े खिलाड़ियों के खिलाफ दिल्ली में एफआईआर दर्ज हुई है। ये एफआईआर युवराज सिंह, हरभजन सिंह, सुरेश रैना के साथ ही गुरकीरत मान के खिलाफ भी की गई है। इसके साथ ही मेटा-इंडिया के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इसी बीच, हरभजन सिंह की प्रतिक्रिया भी सामने आई है, जिसमें उन्होंने हाथ जोड़कर माफी माँगी है।

दरअसल, कुछ दिन पहले इंग्लैंड में खेले गए लीडेंट्स वर्ल्ड कप में भी भारतीय टीम ने ट्रॉफी जीती थी। इसी ट्रॉफी की जीत के बाद पूर्व खिलाड़ियों ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया। वीडियो में युवराज सिंह, हरभजन सिंह और रैना लँगड़ाते हुए और अपनी पीठ पकड़े हुए दिखाई दे रहे हैं, जिससे पता चलता है कि मैच के कारण उनके शरीर पर कितना शारीरिक असर पड़ा है। वीडियो के साथ टाइटल में लिखा गया, ‘बॉडी की तौबा-तौबा हो गई है 15 दिनों के लीजेंड क्रिकेट में…शरीर का हर हिस्सा टूट रहा है। हमारे भाइयों विकी कौशल और करण औजला को हमारे तौबा-तौबा गाने के संस्करण से सीधी चुनौती। क्या गाना है।’ हालाँकि विवाद बढ़ने की वजह से हरभजन सिंह ने ये वीडियो हटा लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नेशनल सेंटर फॉर प्रमोशन ऑफ एम्प्लॉइमन्ट फॉर डिसएबल्ड के अध्यक्ष अरमान अली ने दिल्ली के अमर कॉलोनी पुलिस थाना के प्रभारी से चारों क्रिकेटरों की शिकायत की है। इसके साथ ही उन्होंने मेटा इंडिया की उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संध्या देवनाथन के खिलाफ भी शिकायत की है।

अरमान अली बोले, “मुझे लगता है कि यह भारत के 10 करोड़ से अधिक दिव्यांग लोगों का अपमान है, हरभजन सिंह एक सांसद हैं और उन्हें दिव्यांगों के लिए आवाज उठानी चाहिए, लेकिन वह किस तरह का वीडियो बना रहे हैं? भारत में दिव्यांगता को लेकर जागरूकता की भारी कमी है, आप मिथक फैला रहे हैं और उनका मजाक उड़ा रहे हैं और इसीलिए मैंने शिकायत दर्ज कराई है।”

इस बीच, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और क्रिकेट के मैदान में टर्बनेटर के नाम से मशहूर हरभजन सिंह ने लोगों से माफी माँगी है। हरभजन सिंह ने ‘एक्स’ पर लिखा, “मैं इंग्लैंड में चैंपियनशिप जीतने के बाद सोशल मीडिया पर हमारे ‘तौबा तौबा’ वाले हाल के वीडियो के बारे में शिकायत कर रहे हैं उन लोगों को स्पष्ट करना चाहता हूँ कि हम किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचाना चाहते थे। हम हर व्यक्ति और समुदाय का सम्मान करते हैं और यह वीडियो सिर्फ 15 दिनों तक लगातार क्रिकेट खेलने के बाद हमारे शरीर पर पड़ने वाले असर को दिखाने के लिए था। हम किसी का अपमान नहीं कर रहे। अगर फिर भी आप लोगों को यही लगता है, तो मैं अपनी तरफ से बस इतना ही कह सकता हूं कि सभी से माफी चाहता हूँ… कृपया इसे यहीं रोकें और आगे बढ़ें। खुश और स्वस्थ रहें।”

बता दें कि वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स की ट्रॉफी भारत की टीम ने जीता। ये टूर्नामेंट इंग्लैंड में खेला गया, जिसमें लीग मैचों में चौथे नंबर की टीम रहे भारत ने फाइनल में पाकिस्तान को बुरी तरह से हराया। भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को हराया था, जिमसें युवराज सिंह मैन ऑफ द मैच रहे थे।

हाथ में कलावा बाँध दिल्ली में हिंदू युवती को फँसाया, बरेली ले जाकर बना दिया मुसलमान: हाई कोर्ट ने इम्तियाज अंसारी को जमानत से किया इनकार, नरगिस-तस्लीम की मदद से बनाए फर्जी दस्तावेज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल में एक इम्तियाज अंसारी नाम के मुस्लिम शख्स की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। इम्तियाज पर आरोप है कि उसने हिंदू लड़की को हिंदू बनने का नाटक करके फँसाया और उसके बाद उसे इस्लाम में परिवर्तित कराने की कोशिश करने लगा।

लॉ बीट की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने अंसारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसपर लगे आरोपों की गंभीरता पर गौर किया। अंसारी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468 और 471 में मामला दर्ज है। इसके अलावा अंसारी पर उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3/5(1) भी लगी है।

इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से बताया गया कि बरेली के लाडपुर उस्मानपुर के इम्तियाज अंसारी ने कुमकुम नाम की लड़की के नाम पर फर्जी आवास प्रमाण बनवाया था और इसमें उसकी मदद गाँव की प्रधान नरगिस खातून और उसके पति तस्लीम ने की थी। दस्तावेजों में बताया गया था कि कुमकुम एक मुस्लिम महिला है और लाडपुर उस्मानपुर में रहती है जबकि पिता का नाम इम्तियाज अहमद है।

अभियोजन पक्ष ने जानकारी दी कि कुमकुम के बारे में लगाए गए दस्तावेज गलत थे। वह गोपाल नागर और सुषमा देवी की बेटी है जो सरिता विहार के राजस्थानी कैंप में रहती है। उसने दिल्ली के सरकारी स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी की थी और फिर फैक्ट्री में काम करने लगी थी। इसी फैक्ट्री में इसकी मुलाकात अंसारी से हुई।

शुरू में अंसारी ने कुमकुम से अपनी पहचान छिपाई। वो अपने हाथ में कलावा बाँधकर उसे गुमराह करता था। जब कुमकुम पहली बार उस्मानपुर गई तब उसे अंसारी की हकीकत के बारे में पता चला और ये भी जानकारी हुई कि कैसे उसकी पहचान से खिलवाड़ किया जा रहा है। एडवोकेट जनरल ने इस दौरान कुमकुम को इस्लाम में परिवर्तन कराने की कोशिशों के बारे में भी बताया।

हाईकोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलीलों और लड़की द्वारा दर्ज कराए गए बयान पर गौर करते हुए अंसारी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया और माना कि अंसारी ने जिस तरह से लड़की का धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की वो धोखेबाजी में आता है।

‘मैं कुरान नहीं पढ़ूँगी, सर बहुत गंदे हैं’: बच्ची को दीनी तालीम देने घर आता था अफजाल, कई बार किया रेप; सहारनपुर पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में प्राइवेट ट्यूटर अफजाल ने एक नाबालिग लड़की के साथ कई बार रेप किया है। अफजाल 14 साल की लड़की को कुरान पढ़ाने के लिए उसके घर पर जाया करता था। इस घटना की जानकारी होने के बाद लड़की के अम्मी-अब्बू ने अफजाल के खिलाफ मामला करा दिया। पुलिस ने आरोपित कुरान टीचर को गिरफ्तार कर लिया है।

मामला सहारनपुर के थाना सदर बाजार का है। रक्खा कॉलोनी निवासी अफजाल नाबालिग छात्रा को कुरान पढ़ाने के लिए उसके घर पर जाया करता था। घर में जब बच्ची के माता-पिता नहीं होते तो वह उसके साथ छेड़छाड़ करता था। एक दिन उसने नाबालिग के का बलात्कार कर दिया। इसके बाद वह बच्ची को डराकर कई बार उसके साथ बलात्कार किया।

इससे तंग आकर एक दिन छात्रा ने अपनी अम्मी से कहा कि अब वह अफजाल से ट्यूशन नहीं पढ़ेगी। उसने कहा, “मैं सर से कुरान नहीं पढूँगी। सर बहुत गंदे हैं। वह बैड टच करते हैं।” बेटी के साथ इस घटना को सुनकर नाबालिग की माँ के होश उड़ गए। इसके बाद वह बच्ची को लेकर थाना सदर बाजार पहुँची। वहाँ उसने पुलिस को सारी करतूत बताई।

तहरीर के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया। इसके साथ ही आरोपित अफजाल को गिरफ्तार कर लिया है। नाबालिग के परिजनों ने बताया, “हम बेटी को टीचर के भरोसे छोड़ देते थे कि वह उसे कुरान पढ़ाएगा और अच्छी तालीम देगा। लेकिन, टीचर ने बच्ची के साथ गलत काम किया। गंदी हरकतें की है। मेरी बेटी 14 साल की है। उसका जीवन बर्बाद कर दिया।”

पीड़िता की अम्मी बोली, “मेरी बेटी को कुरान पढ़ाने के लिए एक टीचर घर आता था। एक दिन मेरी बेटी ने रोते हुए कुरान पढ़ने से मना कर दिया। उसने कहा कि मैं सर से कुरान नहीं पढ़ूँगी। इस पर मैंने कारण पूछा तो उसने बताया कि टीचर गंदे हैं। वो कुरान पढ़ाने के बहाने गंदी-गंदी हरकत करते हैं। उन्होंने कई बार मेरे साथ गलत काम किया है। मैं उनसे नहीं पढूँगी।”

एसपी सिटी अभिमन्यु मांगलिक ने बताया, दो दिन पहले सदर बाजार थाना क्षेत्र के एक वादी पक्ष आते हैं अपनी बेटी को लेकर। बेटी नाबालिग है और उसकी उम्र 14-15 साल है। उसके द्वारा इल्जाम लगाया जाता है कि एक मुस्लिम पुरुष ने पढ़ाई कराने के बहाने उसके साथ दुष्कर्म किया और पिछले कुछ समय से वह ऐसा करता आ रहा है। डर के मारे लड़की ने अब तक कुछ कहा नहीं था।”

एसपी सिटी मांगलिक ने आगे बताया, बाद में उसने अपने परिजनों को इसके बारे में बोला और परिजन उसको यहाँ लेकर आए। थाना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बच्ची का मेडिकल कराया और इसमें जो मुख्य आरोपित अफजाल है, उसको गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है।”

3 औरतें+2 मर्द… भोपाल में घूम-घूमकर बाँट रहे धर्मांतरण का ऑफर, ईसाई बनने पर ₹20 लाख नगद-मकान-बच्चों की फ्री पढ़ाई का लालच: पुलिस ने तीन को दबोचा

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में तीन ईसाई महिलाओं ने गरीब बस्ती में घूम-घूम कर लोगों को धर्मांतरण करने का ऑफर दिया। ईसाई बनने के एवज में लोगों को ₹20 लाख की पेशकश की गई। इसके साथ और कई वादे किए गए। महिलाओं का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मामले में FIR भी दर्ज करवाई गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार (14 जुलाई, 2024) को भोपाल के पिपलानी थाना क्षेत्र की एक बस्ती में तीन महिलाएँ और दो पुरुष घूम रहे थे। इन महिलाओं का नाम मैरी बस्तवाल, मैरी मसीह और सुमन मसीह हैं। यह महिलाएँ बस्ती में कई परिवारों को ईसाई बनने का प्रलोभन दे रहीं थी।

यह महिलाएँ इन परिवारों को बता रहीं थी कि यदि वह ईसाई बनते हैं तो उन्हें ₹20 लाख मिलेंगे। इसके अलावा उनके बच्चों को अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाया जाएगा। इन महिलाओं ने उन परिवारों को मकान का भी प्रलोभन दिया। महिलाओं ने बस्ती के लोगों को आर्थिक तंगी और दुखों से बचने के लिए ईसाई प्रार्थना करने को कहा।

इन लोगों ने यहाँ ईसाई धर्म साहित्य भी बाँटा। इस बीच यहीं के कारोबारी धनवीर सिंह की निगाह उनके ऊपर पड़ गई। उन्होंने जब महिलाओं से पूछताछ की तो महिलाओं ने उन्हें जवाब दिया कि वह अपने धर्म का प्रचार कर रही हैं। उन्होंने धनवीर सिंह को भी ईसाई बनने का ऑफर दे डाला।

महिलाओं ने धर्मवीर सिंह को ईसाई बनने के फायदे गिनाने चालू कर दिए। एक महिला ने बताया कि वह दो महीने पहले ही ईसाई बनी है और उसे मकान और नकद रूपए मिले हैं। महिलाओं ने कारोबारी के बच्चों को मिशनरी स्कूल में पढ़ाने के फायदे गिनाए।

इसके बाद धनवीर सिंह ने पुलिस बुला ली। इन महिलाओं को पुलिस पकड़ कर ले गई। उनके साथ आए दोनों युवक भाग गए। महिलाओं के पास मौजूद प्रचार सामग्री को पुलिस ने जब्त कर लिया। धनवीर सिंह ने इस मामले में पुलिस के पास FIR दर्ज करवा दी है। पुलिस आगे जाँच करके इस मामले में कार्रवाई कर रही है।

जिस भोजशाला को मुस्लिम कहते हैं कमाल मौलाना मस्जिद, वह मंदिर ही है: ASI ने हाई कोर्ट को बताया- मंदिरों के हिस्से पर बने हैं मस्जिद के स्तंभ, हिंदू प्रतीकों-छवियों को कर दिया विकृत

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में ASI ने कहा है कि भोजशाला का वर्तमान परिसर यहाँ पहले मौजूद मंदिर के अवशेषों से बनाया गया था। ASI ने रिपोर्ट में इस संबंध में कई जानकारियाँ भी दी गई हैं।

ASI ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में कहा है, “खंभों और की सजावट और उन पर बने भित्तिचित्रों की वास्तुकला से यह कहा जा सकता है कि वह पहले मंदिर का हिस्सा थे। बेसाल्ट के ऊँचे परिसर पर मस्जिद के स्तम्भ बनाते समय इनका दोबारा इस्तेमाल हुआ है। एक स्तम्भ, जिसमे चारों दिशाओं में खाने बने हुए हैं, उसमे देवताओं की नष्ट की हुईं छवियाँ भी हैं। एक स्तंभ के दूसरे आधार पर भी एक खाने में एक देवता की छवि को दर्शाया गया है। दो स्तंभों पर खड़ी छवियों को काट दिया गया है और वे पहचान में नहीं आती।”

ASI ने कोर्ट को बताया है कि यहाँ मानवों और जानवरों के भित्तिचित्रों को नष्ट कर दिया गया है क्योंकि मस्जिद के भीतर इनकी इजाजत नहीं होती है। ASI ने कहा है कि इनको तोड़ने के प्रयास और इनके टूटे हिस्से परिसर में देखे जा सकते हैं। ASI ने कहा है कि यहाँ मौजूद मस्जिद की दीवाल बाकी परिसर से नई है। उसका निर्माण उस सामान से किया गया है जो बाकी पूरे परिसर की निर्माण सामग्री से अलग है।

ASI ने कोर्ट को बताया, “वैज्ञानिक जांच, सर्वेक्षण और खुदाई था प्राप्त अवशेषों, मूर्तियों और शिलालेखों, कला और धर्मग्रंथों के अध्ययन के आधार पर यह कहा जा सकता है कि मौजूदा परिसर पहले के मंदिर के अवशेषों से बनाई गई है।”

ASI ने यह रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को 98 दिन सर्वे करने के बाद 15 जुलाई, 2024 को सौंपी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सर्वे में ASI को इस सर्वे के दौरान चाँदी, तांबे, एल्युमिनियम और स्टील के 31 सिक्के मिले हैं। यह सिक्के अलग-अलग ऐतिहासिक समय के हैं। इसमें दिल्ली के सल्तनत काल, मुग़ल काल और अलग-अलग समय के हैं। सिक्कों के अलावा 94 वास्तुशिल्प मिले हैं। इनमें मूर्तियाँ, मूर्तियों के खंडित हिस्से और पत्थरों पर उकेरी प्रतिमाएँ शामिल हैं।

इस सर्वे में यह भी पाया गया है कि यहाँ के स्तम्भों पर मूर्तियाँ उकेरी गई थी। इन पर बने हुए देवता सशस्त्र थे। बताया गया कि इन छवियों में ब्रम्हा, गणेश, नरसिंह और भैरव के साथ ही पशुओं की आकृतियाँ भी हैं। इनमें कुछ मानव आकृतियाँ भी हैं।

इसके अलावा इस परिसर के एक हिस्से में भित्तिचित्रों में मानव औए सिंह समेत कई पशुओं के मुख वाली आकृतियाँ भी हैं। एक हिस्से में यह विकृत की गई थीं जबकि कुछ जगह यह सुरक्षित थीं। यहाँ कई शिलालेख भी मिले हैं। इनमें कई रचनाएँ लिखी हुई हैं। इन रचनाओं से भोजशाला के रूप में जानकारी मिलती है।

बताया गया है कि सर्वे में मिले एक शिलालेख में यहाँ परमार वंश के राजा नरवर्मन का शासन था। इससे इंगित होता है कि यहाँ मुस्लिमों के शान करने से पहले हिन्दू शासक शासन कर रहे थे। रिपोर्ट में यहाँ से मिले अन्य कई शिलालेख और चिन्ह को रिपोर्ट में जगह दी गई है। यह रिपोर्ट लगभग 2000 पेज की है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 22 जुलाई, 2024 को है।

मालूम हो कि इस संबंध में हिंदू पक्ष ने याचिका डाली हुई है कि भोजशाला उनकी माँ वाग्देवी का मंदिर है। वहीं मुस्लिम पक्ष इसे अपना मजहबी स्थल बताकर सर्वे के खिलाफ बोल रहे हैं। इस मामले में 11 मार्च को इंदौर हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद सर्वे की अनमुति दी थी। 22 मार्च से सर्वे शुरू हुआ, 1 अप्रैल को मुस्लिम पक्ष इसे रोकने सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, 29 अप्रैल को एएसआई के आवेदन पर सर्वे की समयसीमा और बढ़ाई गई, अब इस मामले में ASI ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी है।

वाग्देवी मंदिर कैसे बना कमालुद्दीन मस्जिद

गौरतलब है कि भोजशाला विवाद बहुत पुराना विवाद है। हिंदू पक्ष का मत है कि ये माता सरस्वती का मंदिर है जिसकी स्थापना राजा भोज ने सन् 1000-1055 के मध्य कराई थी। सदियों पहले मुसलमान आक्रांताओं ने इसकी पवित्रता भंग करते हुए यहाँ मौलाना कमालुद्दीन (जिस पर तमाम हिंदुओं को छल-कपट से मुस्लिम बनाने के आरोप हैं) की मजार बना दी थी जिसके बाद यहाँ मुस्लिमों का आना जाना शुरू हो गया और अब इसे नमाज के लिए प्रयोग में लाया जाता है।

हालाँकि हिंदू पक्ष का कहना है कि ये उनका मंदिर ही है क्योंकि आज भी इसके खंभों पर देवी-देवताओं के चित्र और संस्कृत में श्लोक लिखे साफ दिखते हैं। इसके अलावा दीवारों पर ऐसी नक्काशी है जिसमें भगवान विष्णु के कूर्मावतार के बारे में दो श्लोक हैं।

भारतवंशी पत्नी, हिंदू पंडित ने करवाई शादी: कौन हैं JD वेंस जिन्हें डोनाल्ड ट्रम्प ने चुना अपना उपराष्ट्रपति उम्मीदवार, हमले के बाद पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति का ‘हीरो’ जैसा वेलकम

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को रिपब्लिकन पार्टी के नेशनल कंवेंशन में राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुना गया है। रिपब्लिकन पार्टी का यह निर्णय ट्रम्प की हत्या के प्रयास के बाद आया है। इसी के साथ ओहायो के सीनेटर JD वेंस को रिपब्लिकन पार्टी ने अपना उपराष्ट्रपति उम्मीदवार चुना है।

रिपब्लिकन पार्टी का यह कंवेंशन अमेरिका के पेंसिलवेनिया राज्य के मिलवॉकी शहर में हो रहा है। इसमें पूरे अमेरिका से रिपब्लिकन पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी आए हैं। यह कंवेंशन सोमवार (15 जुलाई, 2024) को चालू हुआ था और 18 जुलाई तक चलेगा। इसमें 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की आगे की रणनीति भी बनेगी।

इस कंवेंशन में डोनाल्ड ट्रम्प भी शामिल हुए हैं। वह सोमवार को यहाँ अपने कान पर एक बैंडेज लगा कर आए। वह अपने ऊपर पेंसिलवेनिया में हुए जानलेवा हमले के बाद पहली बार नजर आए हैं। उनका पूरे कंवेंशन हॉल ने तालियों से स्वागत किया। इस हमले के बाद ट्रम्प की छवि एक नायक जैसी हो गई है।

ट्रम्प के सम्मान में हॉल में उपस्थित सभी लोग खड़े हो गए और USA! USA! के नारे लगाए। ट्रम्प ने सभी का अभिवादन स्वीकार किया। ट्रम्प ने यहाँ संबोधन नहीं दिया बल्कि वह अपने साथ उपराष्ट्रपति का चुनाव लड़ने वाले JD वेंस के साथ बैठ गए और लोगों का अभिवादन स्वीकार करते रहे।

गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रम्प पर शनिवार (13 जुलाई, 2024) को पेंसिलवेनिया में एक रैली के दौरान एक सिरफिरे शूटर ने गोलियाँ बरसा दी थीं। इस हमले में ट्रम्प बाल-बाल बचे थे। एक गोली उनके कान को छूते हुए निकल गई थी। हमलावर को एक सुरक्षाकर्मी ने मार गिराया था। इस हमले में एक रैली में शामिल एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।

इन कंवेंशन में ट्रम्प को राष्ट्रपति उम्मीदवार चुने जाने के साथ ही अमेरिका के ओहायो राज्य से 39 वर्षीय सीनेटर JD वेंस को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुना गया। JD वेंस को चुनने का ऐलान ट्रम्प ने स्वयं किया। उन्होंने लिखा, “लंबे विचार-विमर्श और गहराई से सोचकर अन्य लोगों की जबरदस्त प्रतिभा पर विचार करने के बाद, मैंने निर्णय लिया है कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति का पद संभालने के लिए सबसे सही उम्मीदवार ओहायो राज्य के सीनेटर जेडी वेंस हैं।”

कौन हैं JD वेंस?

JD वेंस ओहायो राज्य से पहली बार के सीनेटर हैं। वेंस अमेरिका के मरीन कोर में काम कर चुके हैं। उन्होंने ईराक युद्ध में अपनी सेवाएँ दी हैं। यहाँ वह एक युद्ध पत्रकार और PRO थे। उन्होंने अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की है। वह एक किताब लिख कर प्रसिद्ध हुए थे। यह किताब डोनाल्ड ट्रम्प के बारे में ही थी। वह पूर्व ट्रम्प के आलोचक भी रहे हैं। इसके बाद वह ट्रम्प के समर्थक हो गए और 2022 में वह रिपब्लिकन पार्टी से चुनाव लड़ सीनेटर भी बन गए।

JD वेंस का भारत से भी बड़ा कनेक्शन है। उनकी पत्नी का नाम उषा वेंस उर्फ़ उषा चिल्लुकुरी है। उषा वेंस एक भारतवंशी हैं। उषा और JD वेंस की मुलाकत येल यूनिवर्सिटी में पढ़ने के दौरान ही थी। इसके बाद दोनों में प्रेम सबंध हो गए 2014 में दोनों ने शादी कर ली। दोनों ने एक हिन्दू पंडित के सामने भी अपनी शादी की रस्में पूरी की थी। उषा वेंस स्वयं एक सफल वकील हैं। उषा वेंस भारतीय संस्कृति की भी जानकारी रखती हैं।

वेंस की सफलता में उषा का बड़ा हाथ रहा है। JD वेंस भी अपने स्पष्ट विचारों के लिए जाने जाते हैं। वेंस अमेरिकी रणनीति में भारत के समर्थक माने जाते हैं। उन्होंने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन के भारत और जापान को विदेशी लोगों को पसंद करने वाला देश कहने पर आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि यह दोनों देश चीन के विरुद्ध अमेरिका साझेदार हैं। उन्होंने बायडेन की विदेश नीति की आलोचन भी की थी।

JD वेंस ने उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बनने पर प्रसन्नता व्यक्त की है।

जम्मू-कश्मीर के डोडा में 5 जवान बलिदान, जंगल में छिपे थे इस्लामी आतंकवादी: हिन्दू तीर्थयात्रियों पर हमला करने वाले आतंकी समूह ने ली जिम्मेदारी

जम्मू कश्मीर के डोडा में इस्लामी आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में सेना के एक अफसर समेत 5 जवान वीरगति को प्राप्त हुए हैं। डोडा इलाके में यह मुठभेड़ लगातार जारी है। इस आतंकी हमले की जिम्मेदारी कश्मीर टाइगर्स नाम के आतंकी समूह ने ली है।

जानकारी के अनुसार, धारी गोते उराबंगी इलाके में सोमवार (15 जुलाई, 2024) को रात लगभग 8 बजे यह मुठभेड़ चालू हुई थी। इस दौरान आतंकियों ने सेना और जम्मू कश्मीर पुलिस पर फायरिंग की। इसके जवाब में सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन लॉन्च किया। इस दौरान आतंकियों ने भागने की कोशिश की लेकिन सैनिको ने उनका पीछा किया। इसके बाद दोनों के बीच भारी गोलाबारी चालू हो गई। इसी मुठभेड़ में सेना के एक अफसर समेत 5 जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। इनमें एक जवान जम्मू कश्मीर पुलिस का भी था।

इन जवानों को यहाँ से इलाज के लिए ले जाया गया लेकिन इन्हें को बचाया नहीं जा सका। इस इलाके में ऑपरेशन मंगलवार को भी जारी है। जम्मू कश्मीर पुलिस समेत सेना की तमाम टुकड़ियाँ मौके पर मौजूद हैं और आतंकियों को खोज रही हैं। बताया गया है कि इस इलाके में 2-3 आतंकी अब भी छुपे हुए हैं।

जिस इलाके में यह मुठभेड़ हुई वह घना जंगली क्षेत्र है, इसलिए यहाँ आतंकियों की तलाश करने में कठिनाइयाँ आ रही हैं। बताया गया है कि इस मुठभेड़ में मारे गए अफसर को हाल ही में मेजर की रैंक पर पदोन्नति दी गई थी और वही इस ऑपरेशन का शुरुआत में नेतृत्व कर रहे थे।

मुठभेड़ में कैप्टन बृजेश थापा, सिपाही अजय, सिपाही बृजेन्द्र और डी राजेश वीरगति को प्राप्त हुए हैं। सेना प्रमुख उपेन्द्र द्विवेदी ने उनके निधन पर शोक जताया है और उनके परिवार से संवेदना व्यक्त की है। उनके अलावा जम्मू कश्मीर पुलिस के एक पुलिसकर्मी की भी हमले में वीरगति हुई है।

इस हमले की जिम्मेदारी कश्मीर टाइगर्स नाम के एक इस्लामी आतंकी समूह ने ली है। यह जैश ए मुहम्मद का ही एक मुखौटा संगठन है। इसी आतंकी समूह ने हाल ही में रियासी में हिन्दू तीर्थयात्रियों की एक बस हमले की जिम्मेदारी ली थी। इस हमले में एक बच्चे समेत 9 हिन्दू तीर्थयात्रियों की मौत हो गई थी।

गौरतलब है कि बीते कुछ महीनों में जहाँ कश्मीर क्षेत्र शांत हो गया है, वहीं जम्मू क्षेत्र लगातार में लगातार कई हमले हुए हैं। इस क्षेत्र में सेना के काफिलों पर हमले की भी कई घटनाएँ सामने आई हैं। इनमें अब तक कई जवान मारे जा चुके हैं। इन आतंकियों को स्थानीय लोगों का समर्थन भी प्राप्त होने की बात कही जा रही है। जिस इलाके में यह हमला हुआ है, वहीं 26 जून, 2024 को तीन आतंकियों को मार गिराया गया था।

‘जम्मू-कश्मीर की पार्टियों ने वोट के लिए आतंक को दिया बढ़ावा’: DGP ने घाटी के सिविल सोसाइटी में PAK के घुसपैठ की खोली पोल, कहा – जमात को छूने भी नहीं देते थे

जम्मू कश्मीर के DGP रश्मि रंजन स्वेन (RR स्वेन) ने आतंक-राजनीति नेक्सस पर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा है कि जम्मू कश्मीर की एक राजनीतिक पार्टी ने यहाँ आतंक का नेटवर्क बढ़ाया और उनके आका तैयार किए ताकि उन्हें वोट मिल सकें। उन्होंने आरोप लगाया कि जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों पर कार्रवाई नहीं की गई जो लगातार आंतक के लिए पैसा और विचारधारा का समर्थन दे रहे थे।

RR स्वेन सोमवार (15 जुलाई, 2024) को IIM में अपना संबोधन दे रहे थे। उन्होंने इस दौरान कहा,”पूरा सच यह है कि पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर के समाज के हर तबके में घुसपैठ बना ली थी। कश्मीर की राजनीतिक पार्टियों ने इस दौरान दोहरा खेल खेला। इससे सुरक्षाबलों और आमजनता भी सकते में रही। आतंकियों के घरों पर जाना और उनसे सहानुभूति दिखाना सामान्य सी बात हो गई थी। नए आतंकियों को तो खत्म करने की छूट दी गई लेकिन जो इन आतंकियों की भर्ती में सहायता करते थे और इनके लिए पैसा लाते थे, उनकी कभी जाँच नहीं हुई।”

DGP स्वेन ने इसके बाद कश्मीर की पूर्व में हालत बताते हुए कह़ा, “जमात-ए-इस्लामी, जिसने इस आतंक को वैचारिक और मजहबी मान्यता दी, उसको छूने तक नहीं दिया गया। यह तब किया गया जब सबको यह बात पता थी कि जमात ना केवल सरकार के शान्ति प्रयासों को नुकसान पहुँचा रही है, बल्कि कश्मीर में होने वाले प्रदर्शनों को भी वित्तीय मदद दे रही है।”

DGP स्वेन ने बताया कि उन लोगों पर कार्रवाई करना एकदम अपराध जैसा बना दिया गया जो लगातार भारत के खिलाफ जहर उगलते थे, तथ्यों को गलत रूप से पेश करके लगातार अपना नैरेटिव चलाते थे और देश के खिलाफ दुष्प्रचार करते थे। उन्होंने कहा कि यह सब जानबूझ कर किया गया जाता था।

उन्होंने आरोप लगाया कि SP रैंक के अधिकारियों को आतंकियों के साथ जेल में उन अपराधों के लिए ठूंस दिया गया जो उन्होंने कभी किए ही नहीं। DGP स्वेन ने कहा कि 2013 में दो लड़कियों की पानी में डूबने से हुई मौत को आतंक के नैरेटिव को हाइजैक करने दिया गया जिससे घाटी बंधक बन गई।

इसके बाद उन्होंने बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा,”स्थितयाँ यहाँ तक खराब हो गईं थी कि कश्मीर की सबसे मुख्य पार्टी ने अपने वोट बढ़ाने के लिए आतंक के नेटवर्क और इसके आकाओं को बढ़ाने का तक काम किया था। सरकार और सुरक्षाबलों के प्रयासों और जनता के समर्थन से ही पिछले 6-7 सालों में यह स्थिति बदल पाई।”

DGP स्वेन का यह खुलासा ऐसे समय में आया है जब घाटी आतंक से शांति की तरफ बढ़ रही है और राज्य में जल्द ही दोबारा चुनाव करवाए जाने के कयास लगाए जा रहे हैं।

23 लड़के-लड़कियों का खुलेआम इस्लामी धर्मांतरण, सामूहिक निकाह भी: बरेली में मौलाना तौकीर रज़ा का ऐलान, कहा – पढ़ाई-नौकरी के दौरान हुआ इश्क़

मौलाना तौकीर रज़ा खान सामूहिक इस्लामी धर्मांतरण की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने स्थानीय जिला प्रशासन से अनुमति भी माँगी है। ‘इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल’ ने के अध्यक्ष एवं दरगाह हजरत खानदान के सदस्य मौलाना तौकीर रज़ा खान ने 20 से भी अधिक युवक-युवतियों के सामूहिक निकाह के लिए तारीख़ भी मुक़र्रर कर दी है। इस दौरान सामूहिक इस्लामी धर्मांतरण भी कराया जाएगा। IMC के संगठन प्रभारी नदीम कुरैशी ने नगर मजिस्ट्रेट को इस बाबत पत्र सौंपा है।

असल में, सौदागरान मोहल्ला स्थित अपने आवास पर मीडिया से बात करते हुए खुद तौकीर रज़ा ने ये जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि 15 लड़के और 8 लड़कियाँ हैं, जो दूसरे धर्म के हैं लेकिन इस्लाम कबूलना चाहते हैं। उनका कहना है कि ये सभी बालिग़ हैं और इन्होंने पहले से शादी कर रखी है। जिला प्रशासन से अनुमति माँगी गई है। रविवार (21 जुलाई, 2024) को खलील स्कूल में सबसे पहले 5 जोड़ों के इस्लामी धर्मांतरण की प्रक्रिया पूरी किए जाने का प्लान है। हिन्दू संगठन इसका विरोध कर रहे हैं।

हालाँकि, मौलाना तौकीर रज़ा खान का कहना है कि इन सबने धर्मांतरण पहले ही कर लिया है, कार्यक्रम में सिर्फ इसकी औपचारिक प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। इसके बाद सार्वजनिक रूप से सामूहिक निकाह कराया जाएगा। अभी तक जिला प्रशासन ने इसकी अनुमति के संबंध में कुछ भी लिखित में नहीं दिया है। मौलाना ने कहा कि सभी को अपने निजी मामलों में फैसला लेने का अधिकार है, जिन 5 जोड़ों का पहले निकाह कराया जाएगा उनमें 1 मध्य प्रदेश के हैं, बाकी बरेली के आसपास के जिलों के हैं। मौलाना ने कहा कि पढ़ाई और नौकरी के दौरान ये लड़के-लड़कियाँ प्रेम में पड़े।

इनकी पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, क्योंकि ‘इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल’ के मुखिया का मानना है कि इससे इन्हें दिक्कत आएगी। उन्होंने कहा कि पहले भी कई युवक-युवती ऐसा कर चुके हैं, लेकिन अब वो समाज के सामने खुल कर मुस्लिम बन कर रहना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि लिव-इन को हम बर्दाश्त नहीं कर सकते। प्रशासन को लिखे पत्र में कहा गया है कि बिना किसी प्रलोभन-दबाव के ये लोग मुस्लिम बनना चाहते हैं। इसमें दावा किया गया है कि ये लोग शपथ-पत्र भी देने को तैयार हैं कि ये अपना भला-बुरा सोचने में सक्षम हैं।