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NITI आयोग की रिपोर्ट में टॉप पर उत्तराखंड, यूपी ने भी लगाई बड़ी छलाँग: 9 साल में 24 करोड़ भारतीय गरीबी से बाहर निकले

NITI आयोग ने सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDG) इंडेक्स 2023-24 जारी की है। देश में विकास का स्तर बताने वाली इस रिपोर्ट में उत्तराखंड टॉप पर है। उत्तर प्रदेश ने भी इस बार बड़ी छलाँग लगाई है और विकास के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। इस रिपोर्ट से अन्य कई तथ्य भी सामने आए हैं।

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में बीते सालों के मुकाबले गरीबी तेजी से घटी है जबकि इस दौरान आम लोगों को मिलने वाली शिक्षा, बिजली और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं में सुधार आया है। इस रिपोर्ट में देश के 16 लक्ष्यों पर राज्यों की प्रगति का मुआयना किया गया है। भारत का SDG स्कोर भी इस दौरान 66 से बढ़ कर 71 हो गया है।

उत्तराखंड टॉप, यूपी आगे बढ़ा

इस SDG रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड SDG लक्ष्यों को पाने में देश में सबसे आगे है। उसका SDG स्कोर 100 में से 79 है। ये स्कोर केरल का भी है। SDG के पहले लक्ष्य गरीबी खत्म करने के मामले में उत्तराखंड ने 100 में से 83 का स्कोर किया है। वहीं भुखमरी खत्म करने के मामले में उसका स्कोर 66 है। इसके अलावा लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएँ मुहैया करवाने के मामले में उत्तराखंड का स्कोर 100 में से 84 रहा है। शिक्षा के मामले में भी वह 74 के स्कोर के साथ सबसे अग्रणी राज्यों में है।

उत्तराखंड साफ़ पानी और बिजली पहुँचाने के मामले में भी आगे रहा है। ऐसे में उसे SDG के लक्ष्यों के तहत सबसे अधिक काम करने वाले राज्य का दर्जा दिया गया है। जहाँ एक ओर उत्तराखंड ने इस मामले में सबसे शीर्ष पर जगह बनाई है, वहीं देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश ने भी बड़ी छलाँग लगाई है।

SDG की रिपोर्ट में इस बार उत्तर प्रदेश को फ्रंट रनर की श्रेणी में रखा गया है। इससे पहले वह परफ़ॉर्मर की श्रेणी में था। उत्तर प्रदेश देश की रैंकिंग में 18वें स्थान पर पहुँच गया है। उसका SDG स्कोर 67 रहा है। उसने 2021-22 के मुकाबले 4 स्थानों की छलाँग लगाई है और अपने स्कोर में 7 बिन्दुओं का सुधार किया है। उत्तर प्रदेश ने स्वच्छ ऊर्जा के मामले में 100 में से 100 का स्कोर किया है। इसके अलावा स्वच्छ जल पहुँचाने के मामले में 100 में से 94 का स्कोर किया है।

गरीबी भी घटी

SDG इंडेक्स में सामने आया है कि देश में बीते कुछ वर्षों में गरीबी घटी है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में गरीबी के मामले में भी कमी आई है। पिछली रिपोर्ट के मुकाबले इस बार की रिपोर्ट में गरीबी हटाने के मामले में SDG स्कोर 72 रही है। इससे पहले यह 64 पर था। 2015-16 में देश में बहुआयामी गरीबी लगभग 24% था, जिसके 2022-23 में 11% आ जाने का अनुमान है। यानी अब देश की लगभग 11% जनता ही बहुआयामी गरीबी को झेल रही है। इस रिपोर्ट के अनुसार, 2013-14 से 2022-23 के बीच 24 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं।

आदिल ने आदित्य बनकर हिंदू छात्रा को फँसाया, फिर लिव इन में रहने का बनवाया एफिडेविट: युवती के माता-पिता को भी मुस्लिम बनने के लिए देने लगा धमकी

मध्य प्रदेश के सतना में आदिल खान नाम के मुस्लिम युवक ने आदित्य यादव बनकर एक हिंदू लड़की को अपने जाल में फँसा लिया। इसके बाद लिव इन रिलेशन में रहने का एफिडेविट बनवाकर उसे अपने चंगुल में फँसा लिया। आदिल ने युवती के माता-पिता पर धर्मांतरण करके मुस्लिम बनने के लिए भी धमकाने लगा। शिकायत के बाद पुलिस ने आदिल और उसके परिजनों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।

मामला सतना शहर के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है। शहर के इंदिरा कन्या महाविद्यालय में बीकॉम अंतिम वर्ष में पढ़ने वाली 22 साल की एक हिंदू छात्रा से मोहम्मद आदिल दोस्ती कर ली। इस दौरान लोटन अखाड़ा के पास के रहने वाले आदिल ने अपना नाम आदित्य यादव बताया। धीरे-धीरे दोनों में बातचीत होने लगी और आदिल ने लड़की को अपने प्रेम जाल में फँसा लिया।

नवंबर 2023 में आदिल ने एक शपथ-पत्र (एफिडेविट) में युवती से लिव इन रिलेशन में रहने की सहमति पर दस्तखत करवा लिया। वह छात्रा के साथ लिव इन में रहने लगा। हालाँकि, एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यह एफिडेविट छात्रा के इस्लाम अपनाने को लेकर है। आदिल ने छात्रा इसे छात्रा के माता-पिता के नंबर पर भेजकर उन्हें भी धर्म परिवर्तन करके मुस्लिम बनने के लिए धमकी देने लगा।

इस घटना की जानकारी जब बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को हुई तो वे छात्रा के परिजन से मिले और उन्हें शुक्रवार (12 जुलाई 2024) को लेकर सिटी कोतवाली थाने पहुँचे। वहाँ युवती के पिता ने थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि लगभग 15 दिन पहले पता चला कि उसकी बेटी किसी लड़के से फोन पर लगातार बातचीत करती रहती है।

पिता ने बताया कि जब उसने इस बारे में अपनी बेटी से पूछा तो उसने बताया कि यह लड़का आदित्य यादव है। इसके बाद पिता ने उससे बातचीत करने के लिए मना किया। पिता ने आगे बताया कि 9 जुलाई 2024 को उसकी बेटी परीक्षा देने के लिए कॉलेज गई थी। जब उसका भतीजा बेटी को लेने के लिए कॉलेज पहुँचा तो वह कॉलेज से नहीं निकली।

जब भतीजे ने पूछताछ की तो पता चला कि युवती उस दिन परीक्षा नहीं दी। उसे पता चला कि युवती कॉलेज आते ही कहीं चली गई थी। उसने युवती के एक सहेली से इस बारे में पता किया तो पता चाल कि जिस युवक वह बात करती थी, उसका नाम आदित्य यादव नहीं बल्कि आदिल खान है। उसने झूठा नाम बताकर छात्रा को झाँसे में लिया था।

इसके साथ ही मोहम्मद आदिल खान ने लिव इन रिलेशन का शपथ पत्र बनवा लिया था और उसके परिजनों को भेजा था। वहीं, एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि यह एफिडेविट छात्रा द्वारा इस्लाम धर्म अपनाकर मुस्लिम बनने से संबंधित था। इसे आदिल खान के पिता ने पीड़ित पिता के भाई के नंबर पर भेजा था।

युवती के पिता की शिकायत के बाद कोतवाली थाना पुलिस ने इस मामले में आदिल खान और उसके माता-पिता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 3 (5) तथा धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 की धारा 3 एवं 4 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।

लैंड जिहाद की जिस ‘मासूमियत’ को देख आगे बढ़ जाते हैं हम, उससे रोज लड़ते हैं प्रीत सिंह सिरोही: दिल्ली को 2000+ मजार-मस्जिद जैसी अवैध इस्लामी निर्माणों से मुक्त करवाना है इनका संकल्प

रेलवे स्टेशन, सड़क, जंगल, पहाड़… लैंड जि​हाद का एक विकृत रूप है- मजार। देश की राजधानी हो या सीमावर्ती सुदूर गाँव अचानक उग जाती हैं- मस्जिदें। बतौर नागरिक हमारे लिए यह दृश्य अब असामान्य नहीं रहे। हममें ज्यादातर लोग जब ऐसे दृश्य देखते हैं तो एक मजहब की ‘नीयत’ को कोसते हैं, अपनी व्यवस्था को कोसते हैं और फिर आगे बढ़ जाते हैं।

कुछेक बेहद जागरूक लोग ऐसी मजार-मस्जिद की वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में डाल देते हैं और अपने ‘कर्तव्यों’ को पूरा समझ लेते हैं। देश के अवैध मजार-मस्जिद की हालत आप इस बात से समझ सकते हैं कि दिल्ली की एक फ्लाईओवर तक पर मजार उगा दी गई। सालों तक इसके वीडियो सोशल मीडिया में चलते रहे। आखिरकार जनवरी 2024 में यह मजार हटाई जा सकी। पर मजहब की ‘मासूमियत’ देखिए उसने यह नहीं बताया कि एक फ्लाईओवर पर मजार उगी कैसे, उसने रोना रोया कि बिना नोटिस के मजार तोड़ दी कैसे!

34 साल के ​प्रीत सिंह सिरोही इस ‘मासूमियत’ से रोज लड़ते हैं। इस मासूमियत के खौफ से घर उनका ‘अस्थायी ठिकाना’ हो गया और अपनी सुरक्षा के लिए उन्होंने अपनी गाड़ी को ही ‘स्थायी ठिकाना’ बना लिया है। 2014 में सिरोही ने एक गाय को कटने से बचाया और उसके बाद इसे ही अपने जीवन का मिशन बना लिया।

आज वे दिल्ली को अवैध मस्जिद, दरगाह, कब्रिस्तानों से मुक्त कराने की लड़ाई लड़ रहे हैं। दिल्ली में अब तक ऐसे 2000 से अधिक अवैध निर्माणों की पहचान करने वाले सिरोही को कुछेक मोर्चों पर सफलता भी मिली है, लेकिन उससे अधिक रफ्तार से उनके खिलाफ साजिशों का सिलसिला भी चल रहा है। सिरोही का दावा है कि ऐसी ही एक साजिश के तहत उन पर, उनके पिता और उनके भाई तक पर केस दर्ज करवाए गए।

उनका कहना है कि इन साजिशों/धमकियों से उनका यह विश्वास और भी दृढ़ हो रहा है कि वे ‘धर्म’ के रास्ते पर हैं। इससे उन्हें दिल्ली को जल्द से जल्द अवैध निर्माण से मुक्त कराने की ऊर्जा मिलती है।

गोमाता के लिए केश नहीं कटवाने का संकल्प

मेरी मुलाकात दिल्ली एनसीआर की एक ऊँची इमारत में प्रीत सिंह सिरोही से हुई। लम्बे केश और दाढ़ी वाले इस युवक ने कुछ कुछ भी खाने से मना कर दिया, क्योंकि उसका कहना था कि वह अन्न नहीं लेते। केवल फलाहार और पानी ग्रहण करते हैं। उन्होंने बताया कि उनका संकल्प है कि जब तक देश में गौमाता प्लास्टिक खाएगी वे अपने केश नहीं कटाएँगे।

प्रीत सिंह सिरोही सोशल मीडिया पर लगातार दिल्ली की अवैध मस्जिदों और उनके अतिक्रमण की जानकारी और उनके संबंध में लिए गए एक्शन की अपडेट देते रहते हैं। उनका कहना है दिल्ली NCR में वर्तमान में 2000 से अधिक अवैध इस्लामी ढाँचे हैं, जिनसे जमीन मुक्त करवाने का उन्होंने संकल्प लिया है।

कौन हैं प्रीत सिरोही?

खुद को हिंदू बताने वाले प्रीत सिंह सिरोही एक जाट किसान ​परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने बताया कि उनके दादा 1965 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से दिल्ली आकर बस गए थे। दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज में पढ़ाई करने गए प्रीत अपनी डिग्री पूरी नहीं कर पाए। पढ़ाई बीच में छोड़ने का कारण बताते हुए वे कहते हैं- मैं स्वयं को ऐसी शिक्षा में नहीं झोंकना चाहता था, जिसका उद्देश्य केवल नौकरी पाना हो।

प्रीत सिरोही का कहना है कि वह स्कूल के समय से ही गौसेवा और हिंदुत्व के प्रति आकर्षित हो गए थे। उन्होंने बताया कि उनके दादा लगातार मुग़ल और इस्लामी आक्रान्ताओं की क्रूरता की कहानियाँ उन्हें बताया करते थे। वह महाराजा सूरजमल की कहानियाँ सुनते थे। ऐसे में इन कहानियों का असर उन पर पड़ा और वह हिंदुत्व के काम करने लिए अग्रसर हो गए।

प्रीत सिरोही ने बताया कि एक बार उन्होंने दिल्ली में एक बार गाय कटने से बचाई थी। यह वाकया 2014 का है। सिरोही का कहना है कि जबसे वह इस काम में जुड़े, उन्होंने घर छोड़ दिया। उन्होंने 2019 में एक सेव इंडिया फाउंडेशन भी बनाया था। इसमें कई बड़े लोग शामिल हुए। इसके जरिए उन्होंने धर्मांतरण, गौरक्षा और अवैध मस्जिद के खिलाफ काम करने का प्रयास किए। उन्होंने बताया कि वह इसी समय से दिल्ली में बन रही अवैध मजहबी इमारतों को लेकर जानकारी इकट्ठा करने लगे थे।

प्रीत सिरोही ने आरोप लगाया कि हिन्दुओं के लिए आवाज उठाने पर उन्हें निशाना बनाया गया। उनका आरोप है कि वामपंथी मीडिया ने उनका परिवार बर्बाद कर दिया। उनके परिवार को लेकर झूठी FIR दर्ज करवाई गईं। प्रीत सिरोही का कहना है कि जब उन्होंने हिन्दुओं के लिए आवाज उठाई तो उनके पूरे परिवार को फँसाया गया।

दिल्ली की अवैध इस्लामी निर्माणों के खिलाफ मुहिम

प्रीत सिरोही इन दिनों दिल्ली में अवैध रूप से बनाई गई मस्जिदों, दरगाहों, कब्रिस्तानों के खिलाफ काम कर रहे है। प्रीत का कहना है कि उन्होंने दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में 2000+ अवैध इमारतों की पहचान की है। सिरोही का दावा है कि इन इमारतों को सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाया गया है और कई जगह इनके लिए कोई सरकारी अनुमति नहीं है। वह इनके खिलाफ कार्रवाई चाहते हैं।

प्रीत सिरोही बताते हैं कि दिल्ली में DDA लगातार किसानों से विकास के लिए जमीन लेती आई है। इन जमीनों में प्लाट बनाए जाते हैं और इन्हें बाद में बेंच दिया जाता है। अधिकांश जगह इन्हीं पर अतिक्रमण हुआ है। प्रीत सिरोही का कहना है किसानों ने अपनी जमीन दिल्ली के विकास के लिए दी थी। इसके बाद इस जमीन पर मकान बनाकर झुग्गी बस्तियों में रहने वाले मुस्लिमों को दिए गए, ऐसा उनके पुनर्वास के लिए किया गया। लेकिन उन्होंने यहाँ पर अवैध मस्जिदें और दरगाहें बनाना चालू कर दिया।

प्रीत सिरोही ने कहा है कि दिल्ली में 45 ऐसी कॉलोनियाँ हैं जिनमें झुग्गी बस्ती में रहने वालों को मकान दिया गया। प्रीत सिरोही इसका एक उदारहण तुर्कमान गेट का भी बताते हैं। उनका कहना है कि यहाँ से भी मुस्लिम हटाए गए थे और उन्हें DDA ने जमीन दी थी। सिरोही का दावा है कि जिन लोगों को यह मकान और जमीनें मिली, उनमें से 90% मुस्लिम हैं। प्रीत सिरोही का आरोप है कि यह मुस्लिम यहाँ आकर इन जमीनों पर अवैध इबादतखाने बनाने लगे और इन पर रोक लगाने में MCD फेल रही।

सिरोही बताते हैं कि ऐसी कालोनियों में धार्मिक स्थान के लिए जगह छोड़ी जाती है। यदि कॉलोनी के निवासी चाहें तो वह यह जमीन खरीद कर उस पर धार्मिक स्थान बना सकते हैं। उनका आरोप है कि DDA की कई ऐसी ही कालोनियों में मुस्लिमों ने बिना जमीन खरीदे ही मस्जिदें खड़ी कर दी हैं। इसके लिए कोई अनुमति भी नहीं ली गई है।

सिरोही का अभियान: खाली करवाएँगे जमीन

प्रीत सिरोही का कहना है कि वह इन अवैध इमारतों को खाली करवाएँगे। इन खाली हुई जमीनों पर वह स्कूल और अस्पताल बनाने का प्रयास करेंगे। सिरोही ने आरोप लगाया कि दिल्ली के भीतर 125 मदरसे ऐसे हैं जो कि पूर्णतया अवैध हैं और बिना किसी अनुमति के चल रहे हैं। सिरोही का कहना है कि वह इनकी सूची बना चुके हैं, जल्द ही वह इस मामले को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट जाएँगे। उनका कहना कि उनके पास इन अवैध मदरसों, मस्जिदों और कब्रिस्तानों के जमीन कब्जे से सम्बन्धित पक्के कागज हैं।

सिरोही का कहना है कि वह एक-एक कर इनको कोर्ट में ले जाएँगे। उनका कहना है कि विरोधी पक्ष अपना दावा कोर्ट में साबित नहीं कर पाएगा जबकि वह उस समय से उस जमीन की मिल्कियत की बात साबित कर सकते हैं जब वह किसान के पास थी। सिरोही ने कहा कि उन्हें अलग-अलग स्रोत से इन सभी के बारे में जानकारी जुटाते हैं। उनका कहना है कि आने वाले समय में कई अवैध ढाँचे गिराए जाएँगे। उन्होंने बताया कि MCD इन पर कार्रवाई के लिए तैयार है लेकिन पुलिस बल की कमी के कारण देर हो रही है।

सिरोही ने बताया है कि दिल्ली की मंगोलपुरी के Y ब्लाक, बवाना में स्थित एक मस्जिद और शाहबाद मस्जिद पर अब तक वह कार्रवाई चालू करवा चुके हैं। इसके अलावा वह निकट भविष्य में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर कार्रवाई चालू करवाएँगे। वह बताते हैं कि वर्तमान में लगभग 100 अवैध ढांचों के विरुद्ध लड़ाई लड़ रहे हैं।

धमकी मिलती है, लोग साथ नहीं देते

प्रीत सिरोही ने बताया कि उन्हें अवैध मस्जिदों और अतिक्रमण पर काम करने के कारण लगातार धमकियाँ मिलती हैं। वह बताते हैं कि उनकी जान को लगातार खतरा बना हुआ है। उन्हें पाकिस्तान समेत विदेशी नम्बरों से फोन भी आते हैं। कुछ लोग पीछा भी करते हैं।

उन्होंने बताया कि इसी कारण से वह अपनी गाड़ी में ही रहते हैं और घर छोड़ रखा है। उन्होंने कहा कि इस मामले की शिकायत दिल्ली पुलिस से भी हुई है लेकिन कार्रवाई ना होने के कारण वह निराश हो गए हैं। प्रीत सिरोही का कहना है कि आने वाले 18 महीने में वह अपनी कार्रवाई और तेज करेंगे।

माथे पर तिलक और हाथ में कलावा का छलावा: आर्यन बनकर मोहम्मद इबनैन ने हिंदू युवती को फँसाया, मंदिर में शादी के एक साल बाद घर से निकाला

बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र के दरभंगा में मोहम्मद इबनैन ने आर्यन यादव बनकर एक हिंदू लड़की को अपने झाँसे में ले लिया। इसके बाद उसने आर्य समाज मंदिर भी उससे शादी भी कर ली। खुद को हिंदू दिखाने के लिए इबनैन हाथ में कलावा बाँधता था और माथे पर तिलक भी लगाता था। शादी के कुछ समय उसने मुस्लिम लड़की से निकाह कर हिंदू लड़की को घर से निकाल दिया।

दरभंगा के हायाघाट अंतर्गत रसूलपुर गाँव का रहने वाला मोहम्मद इबनैन दरभंगा में एक हिंदू लड़की के घर में किरायेदार के रूप में रहता था। यहाँ उसने अपना नाम आर्यन यादव बताया था। वह हाथ में कलावा बाँधता था और माथे पर तिलक भी लगाता था। इतना ही नहीं, वह खुद को हिंदू साबित करने के लिए मंदिर जाने का भी दिखावा भी करता था।

किरायेदार के रूप में रहते हुए मोहम्मद इबनैन ने हिंदू युवती से दोस्ती कर ली। उसने अपने झाँसे में लेते हुए उससे प्यार होने की बात कही। कुछ समय के बाद वह लड़की को शादी का झाँसा दिया और उसे लेकर सोनपुर स्थित हरिहरनाथ मंदिर ले गया। साल 2019 में दोनों ने भागकर एक स्थानीय मंदिर में शादी कर ली।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विवाह के एक साल बाद प्रीति को पता चला कि आर्यन का असली नाम मोहम्मद इबनैन है। उसकी अम्मी का नाम मरियम खातून और अब्बू का नाम अबू रब है। मरियम खातून रसूलपुर पंचायत की मुखिया भी रह चुकी है। लड़की का कहना है कि उस समय दोनों दिल्ली में रह रहे थे।

उस समय कोरोना के कारण लॉकडाउन देश भर में लॉकडाउन लग चुका था। लॉकडाउन के कारण उसे वहाँ से निकलने का कोई रास्ता नहीं था। इसके बाद उसने इबनैन पर स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत विवाह के लिए दबाव डाला। दोनों ने स्पेशल मैरेज एक्ट के तहत शादी कर ली। इस दौरान वह अपने परिवार का भरण-पोषण करती रही।

इतना ही नहीं, वह मेहनत-मजदूरी के साथ-साथ मोहम्मद इबनैन की पढ़ाई का खर्च भी उठाती रही। युवती का आरोप है कि जब उसके शौहर इबनैन की नौकरी लग गई तो उसका व्यवहार बदल गया। इबनैन और उसके घरवालों ने उस हिंदू युवती को अपने घर से निकाल दिया है। इबनैन ने 1 जुलाई को एक दूसरी मुस्लिम लड़की से निकाह भी कर लिया।

अब यह युवती ने इंसाफ की गुहार लगाई है। वहीं, उसके घरवाले भी उसे अपनाने को तैयार नहीं हैं। युवती ने महिला थाने में जाकर अपनी शिकायत दी है। युवती ने एसएसपी ऑफिस जाकर अधिकारी से मुलाकात भी की और न्याय की माँग की है।

‘आपातकाल तो उत्तर भारत का मुद्दा है, दक्षिण में तो इंदिरा गाँधी जीत गई थीं’: राजदीप सरदेसाई ने ‘संविधान की हत्या’ को ठहराया जायज

इंडिया टुडे के ‘पत्रकार’ और अखिल भारतीय तृणमूल कॉन्ग्रेस (एआईटीसी या टीएमसी) की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष के पति राजदीप सरदेसाई ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी द्वारा देश पर लगाए गए आपातकाल को जायज ठहराने की कोशिश की है। द लल्लनटॉप के ‘नेता नगरी’ शो में बोलते हुए सरदेसाई ने कहा कि वर्तमान में आपातकाल का मुद्दा उठाने से मौजूदा समस्याओं से ध्यान हट जाएगा।

सरदेसाई ने कहा कि आपातकाल के काले दौर में पूरे देश पर अत्याचार करने के बाद भी कॉन्ग्रेस चुनावों में विजयी हुई, जिसका मतलब है कि लोग आगे बढ़ चुके हैं और एक बार फिर कॉन्ग्रेस को स्वीकार कर चुके हैं।

राजदीप सरदेसाई ने कहा, “उत्तर भारत ने आपातकाल का सबसे ज़्यादा खामियाजा भुगता है। इंदिरा गाँधी और कॉन्ग्रेस 1977 में दक्षिण भारत में जीतने और हावी होने में कामयाब रहीं। हालाँकि, वे महाराष्ट्र में उस तरह से जीत हासिल नहीं कर पाईं, जैसा उन्होंने उत्तर में किया था। अब आप 2024 में युवाओं को बता रहे हैं, जो आज की पीढ़ी के हैं या आपातकाल के बाद पैदा हुए हैं और जिनकी उम्र 18 से 38 साल के बीच है, उन्हें यह सीखना चाहिए कि 25 जून को क्या हुआ था। आप पिछली घटनाओं से राजनीति नहीं कर सकते।”

सरदेसाई ने कहा, “यदि आप अतीत को दोहराते रहेंगे तो आप बेरोजगारी, मुद्रास्फीति, अग्निवीर, नीट-यूजी पेपर लीक, जम्मू में आतंकवादी हमले, मणिपुर में हिंसा और बिहार में बाढ़ सहित आज की चुनौतियों से कैसे निपटेंगे?”

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने आपातकाल के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए 26 जून को “संविधान हत्या दिवस” घोषित किया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 11 जुलाई को एक गजट अधिसूचना जारी कर कहा कि भारत सरकार ने 25 जून को “संविधान हत्या दिवस” घोषित किया है।

अधिसूचना में कहा गया है कि 25 जून 1975 को आपातकाल की घोषणा की गई थी, जिसके बाद तत्कालीन सरकार द्वारा सत्ता का घोर दुरुपयोग किया गया और भारत के लोगों पर ज्यादतियाँ और अत्याचार किए गए। इसमें कहा गया है कि भारत के लोगों को भारत के संविधान और भारत के लचीले लोकतंत्र की शक्ति पर अटूट विश्वास है।

अधिसूचना में आगे कहा गया है, “इसलिए, भारत सरकार 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में घोषित करती है, ताकि आपातकाल के दौरान सत्ता के घोर दुरुपयोग के खिलाफ लड़ने वाले सभी लोगों को श्रद्धांजलि दी जा सके और भारत के लोगों को भविष्य में किसी भी तरह से सत्ता के ऐसे घोर दुरुपयोग का समर्थन न करने के लिए प्रतिबद्ध किया जा सके।”

छात्र समझेंगे ‘बहन’ और ‘गुरु’ शब्द का महत्व, ‘नमस्ते’ और ‘जय हिन्द’ से करेंगे अभिवादन: यूपी के स्कूलों में अब आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कार भी

उत्तर प्रदेश के संबल जिले में बेसिक शिक्षा अधिकारी ने नए निर्देश जारी किए हैं, जिसमें महिला शिक्षकों को ‘मैडम’ की जगह ‘दीदी या बहन जी’ कहना होगा, तो पुरुष शिक्षकों को ‘गुरुजी’। बच्चे स्कूलों में शिक्षकों से ‘नमस्ते’ या ‘जय हिंद’ कहकर अभिवादन करेंगे। ये आदेश इसलिए जारी किया गया है, ताकि बच्चे भारतीय संस्कृति को अपनाएँ।

संभल जिले के डीएम के आदेश के निर्देश पर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने ये आदेश जारी किया गया है। संभल जिले की बीएसए अलका शर्मा ने बताया कि, भारतीय संस्कृति की झलक सरकारी स्कूलों में दिखे, इसके लिए सभी सरकारी स्कूलों के लिए ये आदेश जारी किया गया है। इस आदेश के तहत सरकारी स्कूलों की महिला शिक्षिकाओं को अब दीदी अथवा बहन जी कहकर संबोधित किया जाएगा, जबकि पुरुष शिक्षकों के लिए गुरुजी शब्द का इस्तेमाल होगा। इस कदम से बच्चों के भीतर शिक्षकों के प्रति सम्मान बढ़ेगा।

बीएसए अलका शर्मा ने कहा है कि स्कूल के समय में कोई भी शिक्षक पान ,सिगरेट, तंबाकू आदि का इस्तेमाल नहीं करेगा, यदि कोई भी शिक्षक इनका इस्तेमाल करते पाया गया तो संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यही नहीं विद्यालय में प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल पूरी तरह से वर्जित रहेगा अगर कोई भी इनका इस्तेमाल करता है तो उस पर अर्थदंड की कार्रवाई की जाएगी।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अलका शर्मा ने बताया कि, विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे अपने शिक्षकों को नमस्ते या फिर जय हिंद कहेंगे। उन्होंने बताया कि जय हिंद कहने से बच्चों के मन में राष्ट्र प्रेम की भावना जागृत होगी। इससे बच्चे देश के लिए कुछ सोच पाएँगे, इसके अलावा विद्यालय में आने वाले पुरुष और महिला शिक्षक जींस शर्ट आदि पहन कर नहीं आएँगे बल्कि भारतीय परिधान पहनकर ही स्कूल में आएँगे।

अलका शर्मा ने कहा कि विद्यालय एक मंदिर की तरह होता है इसलिए जैसा आचरण हम मंदिर में करते हैं ऐसा ही आचरण विद्यालय में भी अपनाएँ। बीएसए के आदेश के मुताबिक, विद्यालय के कक्ष में शिक्षक और बच्चे जूते पहन कर नहीं जाएँ, बल्कि जूते या चप्पल कक्ष से बाहर निकाल कर ही भीतर जाएँ। बीएसए के आदेश के मुताबिक, कोई भी अधिकारी किसी भी विद्यालय का निरीक्षण करने जाता है तो वह प्रधानाचार्य की कुर्सी पर नहीं बैठेगा बल्कि शिक्षकों से शिष्टाचार के साथ चर्चा करेगा।

अजय बनकर इश्तियाक कुरैशी ने छत्तीसगढ़ की युवती को शादी का दिया झाँसा, रेप के बाद हुआ फरार: पुलिस ने कानपुर से दबोचा

छत्तीसगढ़ में नाम बदलकर एक हिंदू लड़की से रेप करने का मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश का रहने वाला इश्तियाक कुरैशी सोशल मीडिया पर अजय समरथ बनकर छत्तीसगढ़ की युवती से दोस्ती की। इसके बाद उसे अपने प्रेमजाल में फँसा लिया और शादी का झाँसा देकर उसके साथ रेप किया। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

 मामला छत्तीसगढ़ के कोंडागाँव जिले के फरसगाँव थाना क्षेत्र का है। यहाँ की रहने वाली एक हिंदू पीड़िता ने बताया कि आरोपित इश्तियाक कुरैशी ने सोशल मीडिया साइट इंस्टाग्राम पर अजय समरथ के नाम से अपना अकाउंट बना रखा था। एक साल पहले एक दिन इश्तियाक ने उसे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजा। युवती ने उसके रिक्वेस्ट को स्वीकार कर लिया।

इसके बाद इश्तियाक उसे अक्सर मैसेज करने लगा। उसने उसे अपने झाँसे में ले लिया। इश्तियाक ने लड़की फोन नंबर भी ले लिया और उससे बातें करने लगा। धीरे-धीरे उसने युवती पर डोरे डालते हुए कहा कि वह उससे प्रेम करता है। युवती उसे अजय समझते हुए उसकी बातों में आ गई। उसने मान लिया कि अजय बना इश्तियाक उससे शादी करेगा।

युवती ने बताया कि इश्तियाक कुरैशी अक्टूबर 2023 में उत्तर प्रदेश से छत्तीसगढ़ आया और उसे मिलने के लिए बुलाया। वहाँ इश्तियाक कुरैशी ने उससे शादी का वादा करके उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया। इतना ही नहीं, युवती से संबंध बनाने के बाद इश्तियाक कुरैशी फरार हो गया और उसने अपना संबंध खत्म कर लिया।

बाद में खोजबीन करने पर युवती को पता चला कि अजय का असली नाम इश्तियाक कुरैशी है। इसके बाद उसने फरसगाँव पुलिस थाने में जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने इश्तियाक कुरैशी के खिलाफ मामला दर्ज करके जाँच शुरू कर दी। आरोपित को पकड़ने के लिए पुलिस ने एक टीम गठित की।

इसी दौरान पुलिस को आरोपित इश्तियाक कुरैशी का लोकेशन कानपुर मिला। इसके बाद फरसगाँव पुलिस कानपुर पहुँची और वहाँ के नौंगवा गौतम गाँव से उसे गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसे पकड़ कर छत्तीसगढ़ अपने साथ ले गई और कोर्ट में पेश किया। वहाँ से उसे जेल भेज दिया गया।

तिब्बत को संरक्षण देने के लिए अमेरिका ने बनाया कानून, चीन से दो टूक – दलाई लामा से बात करो: जानिए क्या है उस बिल में जिस पर राष्ट्रपति जो बायडेन ने किया दस्तखत

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन ने तिब्बत समाधान अधिनियम (Resolve Tiber Act) पर हस्ताक्षर कर दिया है, जिसके बाद ये कानून बन गया है। इस अधिनियम द्वारा अमेरिका ने चीन से साफ शब्दों में कहा है, “तिब्बत पर चीन के जारी कब्जे का समाधान दमन से नहीं, बल्कि बातचीत के माध्यम से शांतिपूर्ण ढँग से किया जाना चाहिए।” चीन ने रिज़ॉल्व तिब्बत एक्ट का विरोध किया था और इसे अस्थिरता पैदा करने वाला एक्ट बताया था। यह एक्ट पिछले साल फरवरी में प्रतिनिधि सभा द्वारा पारित किया गया था और मई में सीनेट ने इसे मंजूरी दे दी थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति जो बाइडेन ने तिब्बत-चीन विवाद के समाधान को बढ़ावा देने वाले अधिनियम पर हस्ताक्षर किए, जिसे लोकप्रिय रूप से रिज़ॉल्व तिब्बत अधिनियम के रूप में जाना जाता है। कानून में कहा गया है कि यह अमेरिकी नीति है कि तिब्बत मुद्दे को बिना किसी पूर्व शर्त के बातचीत के माध्यम से शांतिपूर्ण तरीकों से अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार हल किया जाना चाहिए। इसमें तिब्बत के बारे में चीन के झूठ पर भी निशाना साधा गया है, तथा चीन से तिब्बत के इतिहास के बारे में गलत सूचना का प्रचार बंद करने को कहा गया है, तथा विदेश विभाग को इन झूठे दावों का सीधे तौर पर मुकाबला करने के लिए नया अधिकार दिया गया है।

बायडेन ने शुक्रवार (12 जुलाई 2024) को जारी एक बयान में कहा, “आज, मैंने एस. 138, “तिब्बत-चीन विवाद समाधान को बढ़ावा देने वाला अधिनियम” (“अधिनियम”) पर हस्ताक्षर किए हैं। मैं तिब्बतियों के मानवाधिकारों को आगे बढ़ाने और उनकी विशिष्ट भाषाई, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को संरक्षित करने के प्रयासों का समर्थन करने के लिए कांग्रेस की द्विदलीय प्रतिबद्धता को साझा करता हूं।” बायडेन ने कहा, “मेरा प्रशासन पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना से दलाई लामा या उनके प्रतिनिधियों के साथ बिना किसी पूर्व शर्त के सीधी बातचीत फिर से शुरू करने का आह्वान करता रहेगा, ताकि मतभेदों को दूर किया जा सके और तिब्बत पर बातचीत के जरिए समझौता किया जा सके।”

इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत के अध्यक्ष तेनचो ग्यात्सो ने इस पर खुशी जताई और कहा, “रिज़ोल्व तिब्बत एक्ट तिब्बती लोगों के साथ चीन के क्रूर व्यवहार को दर्शाता है। तिब्बतियों के लिए यह उम्मीद का संदेश है। अन्य देशों के लिए यह मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता के लिए तिब्बत के शांतिपूर्ण संघर्ष का समर्थन करने का आह्वान है और बीजिंग के लिए यह एक घोषणा है कि तिब्बत के लिए अमेरिकी समर्थन खत्म नहीं हो रहा, बल्कि चीन को तिब्बत के साथ बातचीत फिर से शुरू करनी चाहिए और ऐसा समाधान खोजना चाहिए जो तिब्बती लोगों के मौलिक अधिकारों का समर्थन करता हो।” बता दें कि दलाई लामा ने बार-बार चीन से तिब्बती लोगों को वास्तविक स्वायत्तता देने का आह्वान किया है, और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत यह स्पष्ट है कि लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार है।

यह अधिनियम तिब्बत के लिए अमेरिकी समर्थन को बढ़ाता है – जिससे विदेश विभाग के अधिकारियों को चीनी सरकार द्वारा तिब्बत के बारे में फैलाई जा रही गलत सूचनाओं का सक्रियतापूर्वक और सीधे तौर पर मुकाबला करने का अधिकार मिलता है। साथ ही यह इस झूठे दावे को खारिज करता है कि तिब्बत “प्राचीन काल” से चीन का हिस्सा रहा है, तथा चीनी सरकार और दलाई लामा या उनके प्रतिनिधियों या तिब्बती समुदाय के लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नेताओं के बीच बिना किसी पूर्व शर्त के वार्ता के लिए दबाव डालता है, तथा तिब्बत पर वार्ता के माध्यम से समझौते के लक्ष्य की दिशा में बहुपक्षीय प्रयासों में अन्य सरकारों के साथ समन्वय करने के लिए विदेश विभाग की जिम्मेदारी की पुष्टि करता है।

अमेरिकी कॉन्ग्रेस के कुछ चुनिंदा सदस्यों द्वारा तीन वर्षों के प्रयास के बाद, जिसे तिब्बत समर्थकों और तिब्बती अमेरिकियों का व्यापक समर्थन प्राप्त था, रिज़ॉल्व तिब्बत एक्ट कानून बन गया। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन और आईसीटी बोर्ड तथा कर्मचारियों के वरिष्ठ नेताओं ने कॉन्ग्रेस के नेताओं से मुलाकात की और उन्हें तिब्बत की स्थिति के बारे में जानकारी दी तथा चर्चा की कि किस तरह से नई पहल से मदद मिल सकती है। प्रतिनिधि जिम मैकगवर्न (डी-एमए) और माइकल मैककॉल (आर-टीएक्स) ने सदन में नेतृत्व किया, जबकि सीनेटर जेफ मर्कले (डी-ओआर) और टॉड यंग (आर-आईएन) ने सीनेट में विधेयक पेश किया। सभी चार प्रमुखों और उनके कर्मचारियों ने इस कानून को लागू करने के लिए अथक प्रयास किया।

यह अधिनियम तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र और चीन के अन्य तिब्बती क्षेत्रों को पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) के हिस्से के रूप में मान्यता देने की अमेरिका की लंबे समय से चली आ रही नीति में कोई बदलाव नहीं करता है। इस नीतिगत निर्णय के बारे में बायडेन ने कहा कि यह विदेशी राज्यों और ऐसे राज्यों की क्षेत्रीय सीमाओं को मान्यता देने के उनके अधिकार में आता है। अमेरिका पहले की तरह ही वन-चाइना नीति का समर्थन करता रहेगा, इसके बावजूद कि वो ताइवान के साथ भी संबंध रखता है और उसे सैन्य साजो-सामान से लेकर आर्थिक मदद तक पहुँचाता है।

गौरतलब है कि 14वें दलाई लामा 1959 में तिब्बत से भागकर भारत आ गये, जहाँ उन्होंने हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में निर्वासित सरकार स्थापित की थी। साल 2002 से 2010 तक दलाई लामा के प्रतिनिधियों और चीनी सरकार के बीच नौ दौर की वार्ता हुई, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। चीन भारत में रहने वाले 89 वर्षीय तिब्बती आध्यात्मिक नेता को एक “अलगाववादी” मानता है, जो तिब्बत को देश के बाकी हिस्सों से अलग करने के लिए काम कर रहा है।

दमोह के जिस कॉन्वेंट स्कूल ने TC में छात्राओं का बदला धर्म, वह माता-पिता पर ईसाई बनने का बनाता था दबाव: इनकार करने पर मैनेजर करता था प्रताड़ित

मध्य प्रदेश के एक नामी अंग्रेजी स्कूल में छात्राओं की स्कूल स्थानांतरण सर्टिफिकेट (TC) में उनका धर्म बदलने का आरोप लगाया है। छात्राओं के अभिभावक ने मध्य प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग से इसकी शिकायत की है। अब यह बात सामने आई है कि स्कूल प्रशासन ने छात्राओं के परिजन पर धर्मांतरण का दबाव बनाया था। जब वे तैयार नहीं हुए तो उनके बच्चों का धर्म सर्टिफिकेट पर बदल दिया।

मध्य प्रदेश के दामोह में स्थित गुड शेफर्ड इंग्लिश मीडियम स्कूल की दो छात्राओं के स्थानांतरण प्रमाण पत्र पर हिंदू धर्म की जगह ईसाई धर्म लिखे जाने का आरोप लगाया है। छात्राओं का कहना है कि स्कूल प्रशासन की इस गलती के कारण उन्हें नए स्कूल में नामांकन लेने में समस्या हो रही है। छात्राओं के अभिभावक ने इस मामले की लिखित शिकायत राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के समक्ष दर्ज कराई है।

इस मामले का संज्ञान लेते हुए आयोग ने जिलाधिकारी को कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा है। मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष द्रविंद्र मोरे ने कलेक्टर को लिखे पत्र में कहा है कि उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के रहने वाले रवि शंकर ने शिकायत दर्ज कराई है कि गुड शेफर्ड स्कूल द्वारा उनकी दो बेटियों के स्थानांतरण प्रमाण पत्र में धर्म हिंदू की स्थान ईसाई लिख दिया गया है।

भास्कर की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल प्रशासन ने मूल रूप से वाराणसी के रहने वाली छात्राओं के माता-पिता पर धर्मांतरण पर पहले दबाव डाला था। उन्होंने जब इनकार किया तो प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। इसके बाद स्कूल की टीसी पर छात्राओं की धर्म ईसाई लिख दिया गया। छात्राएँ अनुसूचित जाति वर्ग की है। इसके कारण उन्हें दूसरे स्कूलों में नामांकन करने में परेशानी आ रही है।

पथरिया स्थित गुड शेफर्ड स्कूल के खिलाफ साल 2023 में भी शिकायत हो चुकी है। तब स्कूल का मैनेजर और उसकी पत्नी फरार हो गए थे। इस बार हुई शिकायत के बाद बाल आयोग ने स्कूल की मान्यता रद्द करने की सिफारिश की है। शिकायत के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने गुड शेफर्ड स्कूल की मान्यता रद्द कर दी है।

दरअसल, वाराणसी से 30 किलोमीटर दूर बरजी गाँव के रहने वाले रविशंकर भारती साल 2011 में दमोह गए थे। वहाँ गुड शेफर्ड मिडिल स्कूल में शिक्षक के रूप में उनकी जॉब लग गई। कुछ दिनों बाद उन्हें मौखिक तौर पर स्कूल का प्रिंसिपल भी बना दिया। साल 2014 के बाद रवि शंकर अपने परिवार को भी दमोह लेकर गए। वहाँ उनकी पत्नी किरण को भी स्कूल ने शिक्षक की नौकरी दे दी।

इसके बाद रविशंकर और किरण ने अपने चारों बच्चों का इसी स्कूल में नाम लिखवा दिया। रविशंकर का कहना है कि 2014-15 में जब उन्होंने अपने बच्चों का इस स्कूल में नामांकन कराया तो फॉर्म में धर्म के कॉलम में हिन्दू लिखा था। इस पर स्कूल की मैनेजर की पत्नी स्मिता मोल नाराज हो गईं। उन्होंने दूसरा फॉर्म देते हुए कहा कि इसमें ईसाई लिखना होगा। यह सिर्फ कागजी होगा, ताकि नौकरी बची रहे।

रविशंकर का कहना है कि नौकरी जाने के डर से वे मानसिक दबाव में आ गए और फॉर्म में अपने बच्चों का धर्म ईसाई लिख दिया। उनका कहना है कि बच्चों का नामांकन होने के बाद मैनेजर शेर तेरंग ने उनसे चर्च जाने के लिए कहने लगा। बच्चों को भी रविवार की प्रार्थना के लिए चर्च भेजने के लिए कहा। इस पर रविशंकर ने मना कर दिया। उनका कहना है कि स्कूल दूसरे सभी टीचर ईसाई थे।

रविशंकर का यह भी आरोप है कि क्लास के नैतिक शिक्षा की पीरियड में ईसाई धर्म से संबंधित चीजें बच्चों को पढ़ाने के लिए कहा जाता था। जब वे विरोध किए तो वे निशाने पर आ गए। उन्हें परेशान करने के उद्देश्य से उनका खुलवाए गए EPF खाते में उनके नाम की स्पेलिंग ही बदल दी गई। इसकी शिकायत रविशंकर ने मैनेजर से की तो उसने कहा कि ‘तुम ईसाई नहीं बन रहे हो। इसलिए मदद नहीं मिलेगी।’

रविशंकर ने कहा कि साल 2022-23 में उन्हें प्रिंसिपल के पद से भी हटा दिया गया। यहाँ तक कि स्कूल की ओर से बीआरसी कार्यालय में शिक्षकों की भेजी गई सूची और टीचर अटेंडेंस रजिस्टर से भी उनका और उनकी पत्नी का नाम भी हटा दिया गया। इसके बाद रविशंकर ने इसकी शिकायत एसडीएम से की और कहा कि उन पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

शिकायत के बाद एसडीएम की ओर से जाँच शुरू हुई तो मैनेजर शेर सिंह तेरंग और उसकी पत्नी स्मिता मोल फरार हो गईं। रविशंकर ने बताया कि बड़ी बेटी प्रज्ञा 12वीं में पथरिया में ही दूसरे स्कूल में पढ़ रही थी। वहीं, रिया 8वीं में और सृष्टि 5वीं में इसी स्कूल में पढ़ती थीं। तीनों का बोर्ड का एग्जाम था। इसलिए स्कूल नहीं छोड़ा। परीक्षा खत्म होने के बाद टीसी लेने गए तो वहाँ यह घटना हुई।

गुड शेफर्ड स्कूल में LKG से लेकर 8वीं तक की पढ़ाई होती थी। इस साल फरवरी तक इस स्कूल में लगभग 450 बच्चे पढ़ते थे। विवाद के बाद बच्चों की संख्या घटकर 215 रह गई है। प्रशासन ने जब स्कूल में जाँच की तो इस दौरान ऐसी पुस्तकें और दस्तावेज मिले, जिससे बच्चों और टीचिंग स्टाफ का धर्मांतरण कराने की कोशिश का पता चला है।

बिहार में निर्दलीय शंकर सिंह ने जदयू-राजद को हराया, बंगाल में 25 साल की मधुपूर्णा बनीं MLA, हिमाचल में CM सुक्खू की पत्नी जीतीं: जानें 13 सीटों पर उपचुनाव के परिणाम

देश भर में 13 सीटों पर हुए विधानसभा चुनाव में I.N.D.I. गठबंधन को सफलता मिली है, वहीं NDA गठबंधन को झटका लगा है। 4 सीटें कॉन्ग्रेस, इतनी ही सीटें TMC और एक-एक सीट DMK और AAP के खाते में गई गई है। निर्दलीय ने भी एक सीट झटकने में कामयाबी पाई। वहीं भाजपा को मात्र 2 सीटों से ही संतोष करना पड़ा है। इस तरह 13 में से 10 सीटें I.N.D.I. गठबंधन वालों के खाते में गई। विपक्ष इसके बाद मोदी सरकार पर हमला और तेज़ कर सकता है।

बसबसे पहले बात करते हैं बिहार के पूर्णिया स्थित रुपौली की, जहाँ बड़ा उलटफेर हुआ। लोकसभा चुनाव हारने वाली RJD की बीमा भारती को उन्हें निर्दलीय हराने पप्पू यादव का भी समर्थन हासिल था, फिर भी वो हार गईं। वहीं जदयू के कलाधर मंडल दूसरे स्थान पर तरहे, जो NDA के उम्मीदवार थे। जीत दर्ज की शंकर सिंह ने, जो ‘नॉर्थ बिहार लिबरेशन आर्मी’ नामक संगठन के मुखिया रहे हैं। जहाँ बीमा भारती के पति अवधेश मंडल र 46 मुकदमे दर्ज हैं, शंकर सिंह पर भी 16 FIR दर्ज हैं। दशकों तक दोनों में खूनी संघर्ष चला है। उप-मुख्यमंत्री व भाजपा नेता विजय सिन्हा ने कहा कि शंकर सिंह भी हमलोग से ही जुड़े हुए उम्मीदवार थे।

भाजपा ने जिन 2 सीटों पर जीत दर्ज की हैं, उनमें से एक है हिमाचल प्रदेश का हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र। अनुराग सिंह ठाकुर के गढ़ में पार्टी इज्जत बचाने में कामयाब रही। यहाँ से आशीष शर्मा जीते हैं। उन्होंने 2022 में भी यहाँ से निर्दलीय जीत दर्ज की थी। वहीं भाजपा को दूसरी सीट मिली है मध्य प्रदेश के अमरवाड़ा में, जहाँ उसके उम्मीदवार कमलेश प्रताप शाह विजयी रहे। पश्चिम बंगाल की चारों सीटें मानिकतला, रायगंज, बागदा और राणाघाट में TMC की जीत हुई। बागदा से मात्र 25 वर्ष की मधुपूर्णा ठाकुर ने जीत दर्ज की। उनकी माँ ममताबाला ठाकुर राज्यसभा सांसद हैं।

चारों सीटों पर भाजपा ही दूसरे नंबर की पार्टी रही। कॉन्ग्रेस पार्टी ने जो सीटें अपने नाम की हैं, वो हैं उत्तराखंड का मंगलपुर, बद्रीनाथ और हिमाचल प्रदेश का हिमाचल प्रदेश का नालागढ़ और देहरा। मंगलौर से काजी मुहम्मद निजामुद्दीन, बद्रीनाथ से लखपत सिंह बुटोला, नालागढ़ से हरदीप संघ बावा और देहरा से मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर ने जीत दर्ज की। पंजाब के जालंधर पश्चिम से AAP के मोहिंदर भगत जीते, वहीं तमिलनाडु विकरावंडी से DMK ने जीत दर्ज की।