मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ ही आधुनिक शिक्षा भी जरूरी है। मदरसों में सिर्फ मुस्लिम बच्चों को ही नहीं, बल्कि हिंदू व अन्य गैर मुस्लिम बच्चों को भी शिक्षा मिलनी चाहिए, इसके लिए जरूरी है कि मदरसों को शिक्षा के अधिकार कानून के दायरे में लाया जाए। ऐसा कहना है राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) का, जिसने यूपी सरकार के उस आदेश का समर्थन किया है, जिसमें राज्य के सभी मदरसों को शिक्षा के अधिकार कानून के दायरे में लाए जाने की बात कही है। हालाँकि यूपी सरकार के इस आदेश का जमीयत उलमा-ए-हिंद विरोध कर रहा है, जिस पर अब राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने पलटवार किया है।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने कहा कि उन्होंने मदरसों को अपग्रेड करने की बात कही है, जहाँ मजहबी शिक्षा के साथ आधुनिक पढ़ाई भी होनी चाहिए, साथ ही अन्य धर्मों के बच्चों को भी शिक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम बच्चों को भी स्कूलों में दाखिल कराया जाना चाहिए। NCPCR के अध्यक्ष ने दारुल उलूम देवबंद के साथ ही जमीयत उलमा-ए-हिंद को भी निशाने पर लिया है, जिसने सरकारी स्कूलों में बच्चों को गैर-मजहबी प्रार्थनाओं में शामिल होने के खिलाफ उन्हें भड़काने की कोशिश की है।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने एक्स पर लिखा, “मदरसा, इस्लामिक मज़हबी शिक्षा सिखाने का केंद्र होता है और शिक्षा अधिकार क़ानून के दायरे के बाहर होता है। ऐसे में मदरसों में हिंदू व अन्य ग़ैर मुस्लिम बच्चों को रखना न केवल उनके संवैधानिक मूल अधिकार का हनन है बल्कि समाज में धार्मिक वैमनस्य फैलने का कारण भी बन सकता है। इसलिए NCPCR ने देश की सभी राज्य सरकारों से आग्रह किया था कि संविधान के अनुरूप मदरसों के हिंदू बच्चों को बुनियादी शिक्षा का अधिकार मिले इसलिए उन्हें स्कूल में भर्ती करें और मुस्लिम बच्चों को भी धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ शिक्षा का अधिकार देने के लिए प्रबंध करें। तत्संबंध में उत्तरप्रदेश की राज्य सरकार के मुख्यसचिव महोदय ने आयोग की अनुशंसा के अनुरूप आदेश जारी किया था।”
प्रियंक कानूनगो ने आगे लिखा, “समाचार पत्रों के माध्यम से पता चला है कि जमीयत ए उलेमा ए हिन्द नामक इस्लामिक संगठन इस आदेश बारे में झूठी अफ़वाह फैला कर लोगों को गुमराह कर सरकार की ख़िलाफ़त में जन सामान्य की भावनाएँ भड़काने का काम कर रहा है, ये मौलवियों का एक संगठन है जो कि मदरसा दारुल उलूम देवबंद की एक शाखा ही है जो कि जिसके द्वारा गजवा ए हिन्द का समर्थन करने पर आयोग ने कार्रवाई की है। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष उत्तरप्रदेश के देवबंद से सटे हुए एक गाँव में चल रहे एक मदरसे में एक गुमशुदा हिंदू बच्चे की पहचान बदलने और ख़तना कर धर्मांतरण करने की घटना से सांप्रदायिक सामंजस्य बिगड़ा था। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी ये कार्रवाई ज़रूरी है।”
उन्होंने आगे लिखा, “उत्तरप्रदेश में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम भी लागू है, किसी को भी बच्चों की धार्मिक स्वतंत्रता उल्लंघन नहीं करना चाहिए। मेरी जनसामान्य से यह हाथ जोड़कर विनती है कि ये मामला बच्चों के अधिकार का है किसी भी कट्टरपंथी कठमुल्ले के बहकावे में न आयें और बच्चों के एक बेहतर भविष्य का निर्माण करने में सहभागी बनें। अफ़वाह फैलाने वालों पर कार्रवाई हेतु सरकार से पृथक निवेदन किया जा रहा है।”
मदरसा ,इस्लामिक मज़हबी शिक्षा सिखाने का केंद्र होता है और शिक्षा अधिकार क़ानून के दायरे के बाहर होता है। ऐसे में मदरसों में हिंदू व अन्य ग़ैर मुस्लिम बच्चों को रखना न केवल उनके संवैधानिक मूल अधिकार का हनन है बल्कि समाज में धार्मिक वैमनस्य फैलने का कारण भी बन सकता है। इसलिए… pic.twitter.com/YbY0fTMjuL
— प्रियंक कानूनगो Priyank Kanoongo (@KanoongoPriyank) July 13, 2024
बता दें कि मदरसों से जुड़े अवैध धर्म परिवर्तन के भी मामले सामने आते रहे हैं। वहीं, मदरसों के माध्यम से मुस्लिम बच्चों को सिर्फ धार्मिक शिक्षा दी जाती है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि मुस्लिम बच्चों को धार्मिक शिक्षा के साथ ही आधुनिक शिक्षा भी दी जाए, ताकि उनका समग्र विकास हो सके। लेकिन जमीयत जैसे संगठन मुस्लिम बच्चों की अलग पहचान और उनमें मजहबी कट्टरता भरने की कोशिश में लगे रहते हैं। हालाँकि यूपी सरकार ने साफ कर दिया है कि राज्य के 4 हजार से ज्यादा मदरसों को शिक्षा के अधिकार के तहत एक-समान शिक्षण नीति लागू करनी पड़ेगी।
ट्रेनिंग के दौरान ही VIP सुविधाओं की डिमांड कर नखरा करने वाली IAS पूजा खेडकर की नौकरी जा सकती है। पूजा ने खुद को दिव्यांग और OBC बता कर UPSC परीक्षा दी थी। अब केंद्र सरकार इस मामले की जाँच करेगी। केंद्र सरकार ने एक अधिकारी को इसकी जाँच सौंप दी है। इसके लिए एक सदस्यीय पैनल का गठन किया गया है। अगर गलत तथ्य पेश करने का आरोप सही पाया जाता है तो उन पर कार्रवाई होगी। ‘डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल एन्ड ट्रेनिंग (DoPT)’ के एडिशन सेक्रेटरी मनोज द्विवेदी इस मामले की जाँच करेंगे।
दस्तावेजों की जाँच तक इसकी सत्यता की पुष्टि की जाएगी। जिस अथॉरिटी ने उन्हें दस्तावेज दिए हैं, पता लगाया जाएगा कि उसने बारीकी से जाँच की थी या नहीं। साथ ही पूजा खेडकर AIIMS में मेडिकल टेस्ट के लिए क्यों नहीं उपस्थित हुईं, इसे भी खँगाला जा रहा है। उन्हें ‘पर्सन्स विथ बेंचमार्क डिसैबिलिटीज (PwBD)’ कैटेगरी में रखा गया है। DoPT जाँच रिपोर्ट आने के बाद महाराष्ट्र सरकार से अनुशंसा करेगा कि इस मामले में क्या करना चाहिए। न सिर्फ उनकी नौकरी जा सकती है, बल्कि धोखाधड़ी का मामला भी दर्ज किया जा सकता है।
सामाजिक कल्याण मंत्रालय से भी DoPT इस मामले की जाँच के लिए सहयोग लेगा। पूजा खेडकर ने खुद को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से बताया है, लेकिन उनके पिता भी IAS रह चुके हैं और लोकसभा का चुनाव लड़ते वक्त उन्होंने अपनी संपत्ति 40 करोड़ रुपए की घोषित की थी। AIIMS के डॉक्टरों से सलाह ली जा रही है कि दृष्टि और मानसिक दिव्यांगता का पूजा खेडकर ने जो दावा किया है, वो सरकारी नौकरी के लिए लिए ज़रूरी मानक पूरा करता है या नहीं। बताया जा रहा है कि हर साल ऐसे कई मामले सामने आते हैं।
Over last 24 hrs, been flooded with msgs on dirt in IAS/UPSC. ALL who’ve reached out say they concur with point I made on show below — that Puja Khedkar couldn’t have acted alone. She succeeded because a FULL CHAIN of officials allowed her.
उधर किसानों को पिस्टल लेकर धमकाती हुई उनकी माँ का पुराना वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद उनके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। मुलशी में जमीन कब्जाने का आरोप झेल रहीं मनोरमा खेडकर को किसानों को धमकाते हुए देखा गया था। मामला 1 वर्ष पूर्व का है। किसानों का कहना है कि कई बार शिकायत दर्ज कराने की कोशिशों के बावजूद पुलिस ने उन्हें लौटा दिया था। पूजा के नाम पर 22 करोड़ रुपए की जमीन और 2 फ्लैट्स दर्ज हैं। 24 वर्षीय पूजा खेडकर का UPSC में 841 रैंक आया था। उनके पिता दिलीप IAS से रिटायर्ड हैं।
महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव के नतीजे आए थे, तो इंडी गठबंधन में शामिल पार्टियाँ (कॉन्ग्रेस, शिवसेना-यूबीटी, एनसीपी-शरद पवार) आगे निकल गई थी, लेकिन सवा महीने के अंदर हुए महाराष्ट्र के एमएलसी चुनाव में इस गठबंधन को जोरदार धक्का लगा है।
महाराष्ट्र में एमएलसी चुनाव के लिए 11 सीटों पर 12 उम्मीदवार खड़े थे। इसमें से बीजेपी की अगुवाई वाली महायुति (बीजेपी, शिवसेना-शिंदे और एनसीपी-अजित पवार) के पास 8 उम्मीदवारों को जिताने की ताकत थी, लेकिन उसने 9 उम्मीदवार खड़े किए और सभी जीत गए, जबकि संख्या बल होने के बावजूद इंडी गठबंधन के 4 में से 3 ही उम्मीदवार जीत सके। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि कॉन्ग्रेस के विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी।
ऐसा रहा एमएलसी चुनाव का हाल
गुरुवार (12 जुलाई, 2024) को आयोजित इन चुनावों में भाजपा महायुती ने 11 में से 9 सीटें हासिल की। उसने इन चुनावों के लिए 9 उम्मीदवार ही उतारे थे। इस प्रकार उसके सभी उम्मीदवारों को जीत हासिल हुई। इन 9 में 5 पर भाजपा जबकि 2 पर NCP (अजित पवार) और 2 पर शिवसेना (शिंदे) को जीत हासिल हुई। दूसरी तरफ INDI गठबंधन की तरफ से कॉन्ग्रेस, शिवसेना UBT और PWP पार्टी ने अपना एक-एक उमीदवार उतारा था। इनमें से PWP के उम्मीदवार जयंत पाटील को शरद पवार की NCP का समर्थन हासिल था। वोटों की गिनती के बाद शिवसेना और कॉन्ग्रेस उम्मीदवार जीत हासिल कर सके जबकि जयंत पाटील को हार का मुंह देखना पड़ा।
महायुती में भाजपा की तरफ से पंकजा मुंडे, परिणय फुल्के, अमित गोरखे, योगेश तिलेखर और सदाभाव खोत ने जीत हासिल की। वहीं NCP (अजित पवार) के राजेश विटेकर और शिवाजीराव गरजे भी जीत हासिल करने में सफल रहे। इसके अलावा शिवसेना की भावना गवली और कृपाल तमाने ने भी जीत हासिल की। कॉन्ग्रेस की तरफ से प्रज्ञा साटव जबकि शिवसेना (UBT) की तरफ से मिलिंद नार्वेकर भी जीत गए। लेकिन शरद पवार के समर्थन से चुनाव लड़ रहे जयंत पाटील को हार मिली।
एमएलसी चुनाव में वोटों का ऐसा रहा गणित
महाराष्ट्र विधान परिषद की 11 सीटों के लिए हुए इस चुनाव में प्रत्येक उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 23 विधायकों का वोट चाहिए था। महायुती की तरफ से उतारे गए उम्मीदवारों में से अधिकांश को 23 से अधिक वोट मिले। कुछ उम्मीदवारों को 26 तो कुछ को 24 वोट मिले। इस प्रकार उन्हें जीतने में कोई परेशानी नहीं हुई। वहीं दूसरी तरफ INDI गठबंधन के उम्मीदवारों को कुल मिलाकर 59 वोट मिले।
एमएलसी चुनाव में तीनों पार्टियों के पास इस चुनाव में 66 वोट थे, इस प्रकार इनका 7 वोट का नुकसान दिखा। इसी कारण से जयंत पाटील की हार भी हुई, वह 23 की जगह केवल 12 वोट पा सके। उन्हें इस गठबंधन ने इस उम्मीद में उतारा था कि अजित पवार की NCP के कुछ विधायकों का समर्थन मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इंडी गठबंधन के कथित चाणक्य शरद पवार की हार
खास बात ये है कि आखिरी समय में उद्धव ठाकरे ने अपने पीए-मिलिंद नार्वेकर को मैदान में उतारा और उन्हें जिता भी लिया, लेकिन जिस जयंत पाटील के पक्ष में महाराष्ट्र की राजनीति के कथित चाणक्य और गठबंधन के अगुवा शरद पवार खुद खड़े थे, उन्हें ही हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में मान सकते हैं कि क्रॉस वोटिंग करने वाली कॉन्ग्रेस में तो गड़बड़ दिख ही रही है, लेकिन एमएलसी चुनाव में हार हुई है सीधे-सीधे शरद पवार की।
दरअसल, शरद पवार का खेमा दावा कर रहा था कि उसके पक्ष में एनसीपी-अजित पवार गुट के भी विधायक हैं। लेकिन अजित गुट के तो छोड़िए, खुद एमवीए के अपने सहयोगी यानी कॉन्ग्रेस के ही वोट शरद पवार के समर्थन वाले जयंत पाटील को नहीं मिले।
खुद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस बात पर मुहर लगाई कि इंडी गठबंधन के विधायकों ने उनके प्रत्याशी के लिए वोट किया। ऐसे में साफ दिख रहा है कि जिस इंडी गठबंधन को लोकसभा चुनाव में सफलता मिली थी, वो एमएलसी चुनाव आते-आते तक महज सवा महीनों में ही बिखर गया है।
…तो फिर बिखर जाएगा इंडी गठबंधन?
अगले 2-3 माह बाद ही राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। कॉन्ग्रेस के जिन विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है, माना जा रहा है कि उन्हें अब कॉन्ग्रेस से कोई मौका नहीं मिलने वाला। वो शिंदे या अजित पवार के गुट में जाएँगे, अगर सीधे बीजेपी में नहीं आ सके तो, इससे फायदा तो महायुती गठबंधन यानी एनडीए का ही होना है। वहीं, इस चुनाव से पहले जहाँ शिंदे गुट और अजित पवार गुट में सेंध लगाने के दावे किए जा रहे थे, उसकी भी सच्चाई सामने आ चुकी है।
एमएलसी चुनावों के नतीजे साफ बताते हैं कि इस चुनाव में बीजेपी गठबंधन को फायदा ही फायदा हुआ है, तो इंडी गठबंधन को नुकसान ही नुकसान। ऐसे में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में इंडी गठबंधन कैसे खुद को एकजुट रख पाएगा, अभी तो यही सवाल खड़ा हो गया है।
कॉन्ग्रेस के पूर्व मंत्री B नागेंद्र को ED ने 13 घंटे की पूछताछ के बाद आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। 52 वर्षीय नेता को 94.73 करोड़ रुपए की हेराफेरी के मामले में गिरफ्तार किया गया है। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। मामला ‘कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि शेड्यूल्ड ट्राइब्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KMVSTDCL)’ से जुड़ा हुआ है। यानी, जो पैसा अनुसूचित जनजाति के कल्याण के लिए था, उसमें कॉन्ग्रेस नेता ने गड़बड़ी की। बता दें कि कॉन्ग्रेस अक्सर खुद को दलितों और जनजातीय समाज का रहनुमा बता कर पेश करती है।
शनिवार (13 जुलाई, 2024) को ही 4 बार के विधायक B नागेंद्र को अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 18 जुलाई तक ED की कस्टडी में भेज दिया गया। कॉन्ग्रेस के ही एक अन्य विधायक बसनगौड़ा दद्दल KMVSTDCL के अध्यक्ष रहे हैं। उनके ठिकानों पर भी ED ने छापेमारी की थी। ED ने दोनों कॉन्ग्रेस नेताओं के निजी सहायकों से भी इस संबंध में पूछताछ की थी। ये मामला निगम के पूर्व कर्मचारी K चंद्रशेखरन की आत्महत्या के बाद सामने आया था।
K चंद्रशेखरन कॉर्पोरेशन की ऑडिटिंग में शामिल थे और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के साथ मिल कर काम कर रहे थे। 26 मई को उन्होंने आत्महत्या की थी। उन्होंने 6 पन्नों का एक नोट भी छोड़ा है, जिसमें ‘कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि शेड्यूल्ड ट्राइब्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ में हुई वित्तीय गड़बड़ियों और इसमें शामिल लोगों के बारे में बताया गया है। उस दौरान B नागेंद्र कर्नाटक के जनजातीय कल्याण मंत्री थे। उन्हें इस घोटाले के सामने आने के बाद इस्तीफा देना पड़ा था।
कर्नाटक पुलिस ने मामले की जाँच के लिए CID SIT का गठन किया था। अब तक इस मामले में 11 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं और 18 बैंक खातों में भेजे गए 40 करोड़ रुपए जब्त किए जा चुके हैं। सीधे शब्दों में समझें तो पूरा मामला ये है कि ST निगम के कुछ अधिकारियों ने फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर के अवैध रूप से 94,73,08,500 रुपए विभिन्न बैंक खातों में भेज दिए। कॉर्पोरेशन के बाद इस लेनदेन से संबंधित कोई भी सूचना उपलब्ध नहीं थी।
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के डिप्टी जनरल मैनेजर और बेंगलुरु के रीजनल ईस्ट के हेड ने CBI के समक्ष इस मामले में एक अलग शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने सरकारी खजाने से 89.63 करोड़ रुपए की गड़बड़ी का आरोप लगाया है, जिसमें से मात्र 5 करोड़ रुपए ही वापस जब्त किए जा सके हैं। जिन 18 बैंक खातों में पैसे भेजे गए, उनमें से आधे हैदराबाद स्थित RBL बैंक खाते के हैं और 31 मार्च को इन्हें खोला गया था। UBI अधिकारियों की शिकायत पर CBI ने अलग मामला दर्ज कर रखा है।
Trouble increases for Congress govt in Karnataka.
ED gets the coustody of Former Congress Minister Nagendra till July 18 in the Valmiki Development Corporation Scam. pic.twitter.com/MY5d8wFWYk
जहाँ तक B नागेंद्र की बात है, उन्होंने 2008 में कर्नाटक के विजयनगर जिले के कुडलिगी विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की थी। 2013 में भी वो अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे। उस समय वो भाजपा में हुआ करते थे, लेकिन 2018 में पाला बदलते हुए उन्होंने कॉन्ग्रेस का रुख किया और बेल्लारी ग्रामीण क्षेत्र से जीत दर्ज की। 2023 में वो फिर यहीं से जीते और उन्हें मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की सरकार में युवा मामलों, खेल और जनजातीय कल्याण जैसे मंत्रालय सौंपे गए। हालाँकि, 1 वर्ष ही वो इस पद पर रह सके।
महाराष्ट्र विधान परिषद चुनावों में NDA गठबंधन (महायुती) ने बड़ी जीत हासिल की है। इस चुनाव में उतरे उसके सभी उम्मीदवार जीत गए हैं। INDI गठबंधन को इन चुनावों में एक सीट पर हार झेलनी पड़ी है। INDI गठबंधन के कुछ विधायकों के सत्ता पक्ष के लिए वोट करने की भी सूचना है।
गुरुवार (12 जुलाई, 2024) को आयोजित इन चुनावों में भाजपा महायुती ने 11 में से 9 सीटें हासिल की। उसने इन चुनावों के लिए 9 उम्मीदवार ही उतारे थे। इस प्रकार उसके सभी उम्मीदवारों को जीत हासिल हुई। इन 9 में 5 पर भाजपा जबकि 2 पर NCP (अजित पवार) और 2 पर शिवसेना (शिंदे) को जीत हासिल हुई।
दूसरी तरफ INDI गठबंधन की तरफ से कॉन्ग्रेस, शिवसेना UBT और PWP पार्टी ने अपना एक-एक उमीदवार उतारा था। इनमें से PWP के उम्मीदवार जयंत पाटील को शरद पवार की NCP का समर्थन हासिल था। वोटों की गिनती के बाद शिवसेना और कॉन्ग्रेस उम्मीदवार जीत हासिल कर सके जबकि जयंत पाटील को हार का मुंह देखना पड़ा।
महायुती में भाजपा की तरफ से पंकजा मुंडे, परिणय फुल्के, अमित गोरखे, योगेश तिलेखर और सदाभाव खोत ने जीत हासिल की। वहीं NCP (अजित पवार) के राजेश विटेकर और शिवाजीराव गरजे भी जीत हासिल करने में सफल रहे। इसके अलावा शिवसेना की भावना गवली और कृपाल तमाने ने भी जीत हासिल की।
कॉन्ग्रेस की तरफ से प्रद्न्य साटव जबकि शिवसेना (UBT) की तरफ से मिलिंद नार्वेकर भी जीत गए। इस चुनाव में क्रॉस वोटिंग की भी सूचना है। बताया गया कि INDI गठबंधन में शामिल कॉन्ग्रेस के 7 विधायकों ने महायुती को वोट दिया है।
इस चुनाव में प्रत्येक उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 23 विधायकों का वोट चाहिए था। महायुती की तरफ से उतारे गए उम्मीदवारों में से अधिकांश को 23 से अधिक वोट मिले। कुछ उम्मीदवारों को 26 तो कुछ को 24 वोट मिले। इस प्रकार उन्हें जीतने में कोई परेशानी नहीं हुई।
वहीं दूसरी तरफ INDI गठबंधन के उम्मीदवारों को कुल मिलाकर 59 वोट मिले। इन तीनों पार्टियों के पास इस चुनाव में 66 वोट थे, इस प्रकार इनका 7 वोट का नुकसान दिखा। इसी कारण से जयंत पाटील की हार भी हुई, वह 23 की जगह केवल 12 वोट पा सके। उन्हें इस गठबंधन ने इस उम्मीद में उतारा था कि अजित पवार की NCP के कुछ विधायकों का समर्थन मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
विधानसभा चुनावों से ठीक पहले हुए इन विधानपरिषद के इन चुनावों से महायुती को बढ़त मिली है। इन चुनावों से उसकी लोकसभा चुनावों में हुई बड़ी हार का असर भी कम होते हुए दिख रहा है। ऐसे में अब देखना होगा कि आगे विधानसभा चुनावों क्या माहौल रहता है।
केरल के कासरगोड जिले में स्थित एक मंदिर के ट्रस्ट में पद लेना कॉन्ग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं को भारी पड़ गया है। कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपने पाँच नेताओं और कार्यकर्ताओं को पद छोड़ने सम्बन्धी अल्टीमेटम थमा दिया है। कासरगोड के कॉन्ग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा है कि इन नेताओं ने मंदिर ट्रस्ट में पद लेकर अच्छा नहीं किया है।
ऑनमनोरमा की रिपोर्ट के अनुसार, कासरगोड में भगवान शिव को समर्पित मल्लिकार्जुन मंदिर के ट्रस्ट में हाल ही में 2 कॉन्ग्रेस नेताओं और 3 कार्यकर्ताओं को नियुक्त किया गया था। इनमें कासरगोड के जिला सचिव गोविंदन नायर, महिला कॉन्ग्रेस सचिव उषा एस, जिला परिषद की सदस्य अर्जुनन थयलंगादी और उमेश के समेत मनोज एसी को मंदिर के ट्रस्ट में जगह दिया गया था। इनमें से गोविंदन नायर को ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया गया है।
इन लोगों की नियुक्त के बाद स्थानीय कॉन्ग्रेस नेतृत्व भड़क गया है। उसने इन नेताओं पर प्रश्न उठाए हैं और कार्रवाई की माँग की है। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस कदम को वामपंथी सरकार द्वारा दी गई पोस्ट माना है। कॉन्ग्रेस नेतृत्व ने अब इन नेताओं को इन पदों से हटने को कहा है। अगर यह नेता ऐसा नहीं करते तो इन पर पार्टी कार्रवाई होगी।
इस मामले में कासरगोड के कॉन्ग्रेस जिलाध्यक्ष पीके फैसल ने बताया कि इन नेताओं ने यह पद लेकर सही काम नहीं किया है। उन्होंने कहा कि इसकी कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता लगातार शिकायत कर रहे थे। फैसल ने बताया इससे यह सन्देश जा रहा था कि इस सीट पर जीत के लिए वामपंथी सरकार ने यह पद उपहार में दिए हैं।
गौरतलब है कि जिस मंदिर ट्रस्ट में यह पद दिए गए हैं, वह मालाबार देवास्वम बोर्ड के अंतर्गत आता है। उसने इन पदों के लिए आवेदन माँगे थे। इन पदों के लिए भाजपा कार्यकर्ताओ ने भी आवेदन दिए थे लेकिन उन्हें साक्षात्कार में चयनित नहीं किया गया। ऐसे में कॉन्ग्रेस नेता बोर्ड में शामिल हो गए। इन पदों पर कॉन्ग्रेस नेताओं की नियुक्ति को लेकर अन्य कई प्रश्न भी उठे हैं। दरअसल, नियमानुसार यह पद नेताओं को नहीं दिए जाते, लेकिन इस बार इन सभी पर कॉन्ग्रेस नेताओं की नियुक्ति हुई है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 9 जुलाई को एक हिंदू लड़की की हत्या के आरोपित शोएब अख्तर को जमानत देने से इनकार कर दिया। दरअसल, लड़की ने साल 2020 में इस अपराध के सह-आरोपित एजाज अहमद से शादी की थी, लेकिन शादी के बाद उस पर इस्लाम अपनाने का दबाव बनाया जा रहा था। लड़की ने जब धर्मांतरण से इनकार कर दिया तो उसकी हत्या कर दी गई।
न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने अपराध की प्रकृति, आवेदक शोएब अख्तर को सौंपी गई भूमिका और मुकदमे के चरण को ध्यान में रखते हुए आरोपित को जमानत पर रिहा करने का कोई ठोस कारण नहीं पाया। शोएब अख्तर पर उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में चोपन पुलिस ने IPC की धारा 302 और 201 (सबूतों को छिपाना) के तहत मामला दर्ज किया था।
सुनवाई के दौरान कोर्ट में अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपित शोएब अख्तर ने प्रिया की इसलिए हत्या कर दी, क्योंकि उसने सह-आरोपित उसके दोस्त एजाज अहमद से शादी करने के बाद इस्लाम धर्म अपनाने से इनकार कर दिया था। जैसा कि ऑपइंडिया ने 2020 में बताया था कि आरोपित एजाज प्रिया सोनी को तब तक अपने घर नहीं लाना चाहता था जब तक कि वह इस्लाम धर्म नहीं अपना ले।
चूँकि पीड़िता अपनी हिंदू पहचान छोड़ने के लिए राजी नहीं थी, इसलिए एजाज ने उसे ओबला इलाके में एक किराए के कमरे में रखा। यहाँ वह पीड़िता पर इस्लाम अपनाने का लगातार दबाव बना रहा था। जब मृतका ने धर्म परिवर्तन करने से इनकार कर दिया तो गुस्साए एजाज ने अपने एक अन्य दोस्त शोएब अख्तर को बुलाया। दोनों मुस्लिम युवक प्रिया को पास के जंगल में ले गए और वहाँ उसकी हत्या कर दी।
दरअसल, सिंदुरिया गाँव के एक चौकीदार को 21 सितंबर 2020 को सूचना मिली कि नाले में एक सिर कटी एक लाश पड़ी है। पुलिस ने लाश को कब्जे में लेकर उसकी पहचान शुरू कर दी। बाद में पता चला कि यह लाश प्रिया नाम की एक हिंदू महिला की थी। प्रिया ने कुछ दिनों पहले ही एजाज अहमद उर्फ आसिफ के साथ शादी की थी। हालाँकि, वह धर्मांतरण नहीं करना चाहती थी।
मृतका की बहन शर्मिला ने कहा कि प्रिया उसे बताती थी कि एजाज अहमद और उसका दोस्त शोएब अख्तर उस पर इस्लाम अपनाने का लगातार दबाव बना रहे थे, जबकि वह ऐसा करने के लिए तैयार नहीं थी। अदालत के आदेश में कहा गया है, “दोनों आरोपियों को एक साथ पकड़ा गया और उनके खुलासे पर आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई।”
यह दूसरी बार है जब शोएब अख्तर ने जमानत की अर्जी दाखिल की है। इसी साल जनवरी महीने में हाईकोर्ट ने यह अर्जी खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। यह उसकी दूसरी जमानत अर्जी है। इसे भी इसी आधार पर कोर्ट ने खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को इस मामले का निपटारा जल्द करने का आदेश दिया है।
हिमाचल प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार ने राज्य में मुफ्त बिजली योजना बंद करने का निर्णय लिया है। कॉन्ग्रेस सरकार ने निर्णय लिया है कि राज्य में आयकर भरने वालों को मुफ्त बिजली नहीं मिलेगी। यह निर्णय राज्य की आर्थिक हालत पतली होने के कारण लिया गया है।
गुरुवार (12 जुलाई, 2024) को शिमला में हुई सुक्खू सरकार की कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया है। सरकार ने यह निर्णय लिया है कि राज्य के आयकर दाता परिवारों को मासिक तौर पर 125 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ नहीं मिलेगा। अब तक इन परिवारों को भी 125 यूनिट मुफ्त बिजली मिला करती थी।
इस योजना को केवल आयकर भरने वाले परिवारों के लिए ही हटाया गया है। आयकर ना भरने वाले परिवारों और गरीबी की रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों के लिए महीने की 125 यूनिट मुफ्त बिजली मिलती रहेगी।
कॉन्ग्रेस सरकार ने इस निर्णय के पीछे राज्य की आर्थिक हालत बताई है। कॉन्ग्रेस सरकार ने कहा है कि राज्य की आर्थिक हालत खराब है और बिजली कर्मचारियों को तनख्वाह देने के लिए भी पैसे नहीं हैं, ऐसे में इन परिवारों के लिए सब्सिडी हटा दी गई है।
हिमाचल प्रदेश के सभी परिवारों को जयराम ठाकुर की भाजपा सरकार ने 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने का ऐलान किया था। उन्होंने राज्य के 14 लाख परिवारों को मुफ्त बिजली दी थी। अब कॉन्ग्रेस सरकार कह रही है कि यह सब्सिडी उसके लिए बोझ है।
कॉन्ग्रेस सरकार जहाँ अब मुफ्त बिजली बंद करने जा रही है, तो वहीं वह इससे पहले राज्य 300 यूनिट मुफ्त बिजली वादा कर रही थी। कॉन्ग्रेस ने 2022 के विधानसभा चुनाव में राज्य में गारंटी दी थी कि वह सभी परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त देगी। यह वादा अभी तक पूरा नहीं कर पाई है।
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश से पहले कर्नाटक में गारंटी स्कीम लाई गईं थी। इनमें भी मुफ्त बिजली, मुफ्त राशन, महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा और बेरोजगारी भत्ता समेत महिलाओं को नकदी हस्तांतरण योजना शामिल थी। इन गारंटियों के कारण अब राज्य की आर्थिक हालत पर असर पड़ रहा है, राज्य के अधिकारी भी मान रहे हैं कि इसके कारण विकास कार्य नहीं हो रहे।
कॉन्ग्रेस सरकार ने लिया ₹19,000 करोड़ कर्ज
बिजली सब्सिडी बंद करने के बीच कॉन्ग्रेस सरकार का धुआंधार तरीके से कर्ज लेने का मुद्दा भी जोर पकड़ रहा है। हिमाचल प्रदेश पर वर्तमान में ₹88,000 करोड़ से भी अधिक का कर्ज है। कॉन्ग्रेस सरकार बीते डेढ़ वर्ष में ही लगभग ₹19,000 करोड़ का कर्ज राज्य पर चढ़ा दिया है।
राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने खुद माना है कि उनके राज्य को कर्ज चुकाने के लिए ही नया कर्ज लेना पड़ रहा है। राज्य का कर्ज उसकी GDP का 40% से अधिक हो चुका है। उसका राजकोषीय घाटा भी GDP के 5% के ऊपर है। जबकि नियमों के मुताबिक़, किसी भी राज्य का कर्ज GDP का 20% जबकि राजकोषीय घाटा 3% से अधिक नहीं होना चाहिए।
ब्रिटेन के ग्रेवसेंड स्थित एक गुरुद्वारे में 17 साल के एक नाबालिग ने श्रद्धालुओं पर चाकू से हमला कर दिया। इस हमले में 2 पंजाबी युवतियाँ घायल हो गई हैं। उनके हाथों में चोट आई हैं। बाद में पुलिस ने श्रद्धालुओं की मदद से आरोपित नाबालिग को दबोच लिया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है। इस दिख रहा है कि नाबालिग जमीन पर गिरा हुआ है और पुलिस वाले उसे दबोच रहे हैं।
केंट पुलिस ने बताया कि गुरुवार (11 जुलाई 2024) की रात 8.10 बजे अधिकारियों को सिरी गुरु नानक दरबार गुरुद्वारा में यह घटना हुई। घटना के दौरान कोई भी गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ, लेकिन दो महिलाओं को चोट लगीं, जिसके कारण अस्पताल में उनका इलाज करवाया गया। घटनास्थल से एक धारदार हथियार बरामद किया गया है।
सामने आए फुटेज में दिख रहा है कि खून से लथपथ एक व्यक्ति को पुलिस अधिकारी और गुरुद्वारा के श्रद्धालु पकड़े हैं। बाद में पुलिस ने शख्स को गिरफ्तार कर लिया। माना जाता है कि नाबालिग ने इस घटना को हेट क्राइम के तहत अंजाम दिया है। इस मामले में पुलिस का कहना है कि किसी और की तलाश नहीं की जा रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों कहना है कि गुरुद्वारा परिसर में श्रद्धालु माथा टेक रहे थे। इसी दौरान आरोपित किशोर सिख श्रद्धालु बनकर गुरुद्वारा परिसर में घुसा। उसने माथा टेकते समय वहीं रखी कृपाण उठा ली और श्रद्धालुओं की बढ़कर उन पर हमला करना शुरू कर दिया। इस घटना में दो पंजाबी युवतियां घायल हो गई। एक युवती के हाथ पर चोट आई, जबकि दूसरी की बाजू और हाथ से खून बह रहा था।
केंट पुलिस के डिटेक्टिव सुपरिटेंडेंट इयान डायबॉल ने कहा, “हम गुरुद्वारे में हुई इस घटना के संबंध में सिख समुदाय की चिंताओं को समझते हैं। हालाँकि, हम इसे एक अलग घटना के रूप में देख रहे हैं। हम लोगों को आश्वस्त कर रहे हैं कि गश्ती दल इलाके में रहेंगे। हम सिख समुदाय को उनके निरंतर समर्थन और सहायता के लिए धन्यवाद देते हैं।”
इस घटना को लेकर ग्रेवेसेंड के लेबर सांसद लॉरेन सुलिवन ने कहा, “मैं आज शाम ग्रेवसेंड के गुरुद्वारे में हुई घटना से स्तब्ध और दुखी हूँ। मेरी संवेदनाएँ उन लोगों, उनके परिवार और उनके समुदाय के साथ हैं।मैं इस भयानक घटना पर उनकी त्वरित प्रतिक्रिया के लिए आपातकालीन सेवाओं को धन्यवाद देना चाहूँगी।”
गोंडल और जूनागढ़ के दो नेताओं के बीच का झगड़ा राजनीति से होते हुए सामाजिक और अब धर्म तक पहुँच गया है। मामला गोंडल के पूर्व भाजपा विधायक जयराज सिंह जाडेजा और जूनागढ़ के कॉन्ग्रेस नेता एवं दलित समाज के अध्यक्ष राजू सोलंकी के बेटों के बीच का है। दोनों परिवारों के बीच विवाद इस हद तक बढ़ गया है कि दलित नेता राजू सोलंकी ने परिवार समेत इस्लाम धर्म अपनाने की धमकी दी है।
आगे बढ़ने से पहले संजय सोलंकी और उनके पिता राजू सोलंकी एवं उनके परिवार के बारे में जानते हैं। संजय सोलंकी जूनागढ़ से NSUI के नेता हैं। उनके पिता राजू सोलंकी दलित समुदाय के नेता एवं कॉन्ग्रेस से पूर्व पार्षद हैं। राजू सोलंकी की पत्नी यानी संजय सोलंकी की माँ गीताबेन सोलंकी भी नेता हैं। वह जूनागढ़ में पार्षद रह चुकी हैं।
वह एक बार भाजपा से पार्षद बने और बाद में पार्टी बदलकर दो बार कॉन्ग्रेस से चुनाव लड़े। राजू सोलंकी खुद को अंबेडकरवादी बताते हैं। उन्होंने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की है और सार्वजनिक मंचों पर अपने पूर्वजों को क्षत्रिय बताते हुए दलित समुदाय को शिक्षित और संगठित होने का संदेश देते रहते हैं। अखबार दिव्य भास्कर से बात करते हुए राजू सोलंकी ने अपने परिवार को पूँजीपति बताया है।
कहाँ से शुरू हुआ पूरा विवाद?
घटना 30 मई 2024 की है। गोंडल के रहने वाले भाजपा के पूर्व विधायक जयराज सिंह जडेजा के बेटे ज्योतिरादित्य सिंह उर्फ गणेश जड़ेजा किसी काम से जूनागढ़ गए थे। इसी दौरान ट्रैफिक में गाड़ी चलाने को लेकर कॉन्ग्रेस नेता राजू सोलंकी के बेटे संजय सोलंकी से उनका विवाद हो गया। इस बीच दोनों के बीच तीखी नोक-झोंक हो गई और मामला मारपीट तक पहुँच गया।
इस घटना के बाद संजय सोलंकी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। संजय ने दावा किया कि ज्योतिरादित्य सिंह उर्फ गणेश जड़ेजा ने कार में उनके साथ मारपीट की और उनका वीभत्स वीडियो बनाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें गोंडल ले जाया गया, जहाँ उनके साथ मारपीटा की गई, जातीय दुर्व्यवहार किया गया और धमकी दी गई।
शिकायत के बाद जूनागढ़ ए डिवीजन पुलिस ने गणेश जड़ेजा समेत 8 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद सभी को कोर्ट में पेश किया गया और उनकी रिमांड माँगी गई। हालाँकि, कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए सभी को न्यायिक हिरासत (जेल) भेज दिया। इस बीच गणेश समेत तमाम लोगों ने कोर्ट में जमानत की अर्जी दी, लेकिन वह खारिज हो गई। सभी फिलहाल जेल में हैं।
झगड़े को पहले सामाजिक और फिर राजनीतिक रंग दिया गया
इस मामले में न्यायपालिका अपना काम कर रही है। दूसरी ओर, कॉन्ग्रेस नेता राजू सोलंकी और उनके द्वारा संचालित दलित संगठन लगातार शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है। दो व्यक्तियों के झगड़े को लेकर दो समाजों को आमने-सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। राजू सोलंकी और कई अन्य तथाकथित दलित नेताओं के नेतृत्व में जूनागढ़ से गोंडल तक रैलियाँ निकाली गईं।
इस बीच गोंडल की सड़कों पर घूम-घूम कर दोनों समुदायों के बीच तनाव पैदा करने वाली हरकतें की गईं। राजू सोलंकी ने गोंडल में दलित समाज का महासम्मेलन आयोजित किया, जहाँ मंच से कई ऐसी बातें कही गईं जिससे दोनों समाज के बीच विवाद कम होने की बजाय और बढ़ गया। इतना ही नहीं, इस पूरे प्रदर्शन को राजनीतिक रंग देने की भी कोशिश की गई।
राजू सोलंकी ने माँग की है कि इस मामले में गोंडल के पूर्व विधायक और गणेश के पिता जयराज सिंह जड़ेजा को भी गिरफ्तार किया जाए। राजू ने दावा किया कि जयराज सिंह की शह पर ही गणेश ने उनके बेटे को पीटा है। राजू ने माँग की कि उनके खिलाफ धारा 120 बी के तहत कार्रवाई की जाए। हालाँकि, उन्होंने अभी तक अपनी बात साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है।
मामला यहीं नहीं खत्म हुआ। जयराज सिंह को गिरफ्तार कर जेल में डालने की माँग चल ही रही थी कि राजू सोलंकी ने गणेश की माँ और गोंडल की मौजूदा विधायक गीताबा जड़ेजा से इस्तीफे की माँग कर दी। उन्होंने कहा कि अगर गीताबा जाडेजा ने बीजेपी विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया या राज्य सरकार ने उनका पद वापस नहीं लिया तो वह गाँधीनगर पहुँचकर दलित समुदाय के साथ उग्र प्रदर्शन करेंगे।
राजू सोलंकी ने कहा कि उन्हें सार्वजनिक रूप से किसी भी पार्टी से समर्थन नहीं मिल रहा है। दिव्य भास्कर को राजू सोलंकी ने बताया कि वह कॉन्ग्रेस नेता जिग्नेश मेवाणी और उत्तर प्रदेश के तथाकथित दलित नेता चंद्रशेखर रावण उनके संपर्क में हैं। इस तरह वे मामले को सुलझाने के बजाय वह राज्य में दो समाज के बीच खाई पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
इस्लाम कबूल करने की धमकी देकर धार्मिक रंग देने की कोशिश
एक तरफ ये माँगें की जा रही हैं तो दूसरी तरफ कानून गणेश जड़ेजा कानून का सामना कर रहे हैं। हालाँकि, अपनी दाल नहीं गलते देख राजू सोलंकी ने विभिन्न सोशल मीडिया अकाउंट और मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा कि अगर उनकी माँग नहीं मानी गई तो वे अपने परिवार सहित इस्लाम अपना लेंगे। उन्होंने दावा किया कि उनके परिवार के करीब 150 परिवार भी उनके साथ इस्लाम कबूल करेंगे।
राजू सोलंकी हाल ही में अपने दो-तीन साथियों के साथ कलेक्टर कार्यालय जाकर वहाँ से धर्मांतरण के लिए फॉर्म भी लाए हैं। समाज में बदलाव लाने की अपनी इच्छा के बारे में अक्सर मंच से बोलने वाले राजू को हाल ही में यह कहते हुए सुना गया कि वह हिंदू धर्म से तंग आ चुके हैं। उनका कहना है कि हिंदू धर्म में उन्हें अधिकार नहीं है। वे सरकार और प्रशासन पर लगातार दबाव बना रहे हैं।
वे न्याय नहीं मिलने की बात कहकर मीडिया में को बता रहे हैं कि अगर उनकी माँग नहीं मानी गई और जयराज सिंह को गिरफ्तार नहीं किया गया और गीताबा का विधायक पद नहीं लिया गया तो वे अपने परिवार के 150 लोगों के साथ इस्लाम कबूल कर लेंगे। हालाँकि, उनके इस बयान से मुस्लिम समाज में नाराजगी है और मुस्लिम नेताओं ने व्यक्तिगत झगड़ों के बीच में इस्लाम को न लाने को कहा है।
हम ‘डेढ़ दरबार’, हमारे दादाजी ने जूनागढ़ नवाब के आदमियों को नंगा करके मारा था: राजू सोलंकी
इन सबके बीच राजू सोलंकी का एक वीडियो भी सामने आया है। इस वीडियो में कॉन्ग्रेस नेता राजू सोलंकी मंच से दो समाजों के बीच जहर घोलने वाला बयान देते सुनाई दे रहे थे। उन्होंने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा, “आप संविधान के आने के बाद लड़ रहे हैं, मेरे दादाजी ने आजादी से पहले नवाबशाही के दौरान नवाब के लोगों को मारा था।”
वीडियो में राजू सोलंकी आगे कहते दिख रहे हैं, “मेरे दादाजी के पिता बेचर बापा की वर्षों पहले जूनागढ़ में हत्या कर दी गई थी, क्या हुआ होगा? नवाबशाही काल में मेरे दादा सोमभाई नवाब के आदमियों को नंगा करके मारते थे। मेरा रुतबा उससे (पूर्व विधायक जयराजसिंह) ज्यादा है। उससे सवा गुना ज्यादा है, इसलिए मैं गोंडल आया हूँ।”
खुद को बाबासाहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का अनुयायी बताते हुए कॉन्ग्रेस नेता राजू सोलंकी ने जयराज सिंह जडेजा को चुनौती दी। राजू सोलंकी ने जाति की बात करते हुए कहा, “तू भले ही दरबार हो (गुजरात में क्षत्रिय ठाकुरों को दरबार कहकर बुलाया जाता है), हम तुझसे डेढ़ गुना ज्यादा दरबार हैं।” इसके अलावा, वीडियो में इस्लाम अपनाने और राजू को रफीक बनाने की भी बात कही गई है।
पुलिस पर हमला, हत्या की धमकी, अपहरण: राजू सोलंकी और बेटे संजय का आपराधिक प्रोफ़ाइल
दबाव की राजनीति करने वाले राजू सोलंकी पर ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के कुछ सदस्यों पर भी गंभीर अपराध दर्ज हैं। भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, राजू सोलंकी के खिलाफ साल 2014 से साल 2023 तक राजू पर पुलिस पर हमला, हत्या की धमकी, मारपीट, डकैती, सूदखोरी, अवैध हथियार, अपहरण और जुआ जैसे मामले दर्ज हैं।
वहीं, राजू सोलंकी के बेटे और एनएसयूआई नेता संजय सोलंकी का भी आपराधिक इतिहास है। संजय सोलंकी के खिलाफ 3 अलग-अलग अपराध दर्ज हैं। इसके साथ ही राजू पुत्र देव सोलंकी के खिलाफ भी 2 अपराध दर्ज हैं। राजू सोलंकी पर मारपीट और अपहरण का पहला मामला 8 जुलाई 2014 को दर्ज किया गया था। फिर 8 अक्टूबर 2014 को पुलिस कॉन्स्टेबल से मारपीट का मामला दर्ज किया गया।
अक्टूबर माह में ही 29 तारीख को राजू सोलंकी के खिलाफ जुआ खेलने का अपराध दर्ज किया गया था। इस बार छापेमारी के दौरान उन्होंने एक बार फिर पुलिस पर हमला किया और एक सरकारी वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया। इसे एक अलग अपराध के रूप में भी दर्ज किया गया। इसके बाद 12 मार्च 2016 को उनके खिलाफ मारपीट और हत्या की धमकी का मामला दर्ज किया गया।
रिपोर्ट (आर्काइव) के मुताबिक, राजू सोलंकी की करमकुंडली यहीं खत्म नहीं होती। साल 2016 में 4 अप्रैल को उनके खिलाफ अपहरण, गंभीर मारपीट और डकैती का अपराध दर्ज किया गया था। इसके बाद 23 सितंबर 2017 को उनके खिलाफ मारपीट का अपराध दर्ज किया गया। इस दौरान उनके पास से अवैध हथियार मिला था और आर्म्स एक्ट के तहत भी अपराध दर्ज किया गया।
फिर 14 दिसंबर 2017 को राजू सोलंकी पर मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का अपराध दर्ज किया गया। 2 जून 2020 को सूदखोरी और रंगदारी वसूलने, 1 फरवरी 2022 को मारपीट और जान से मारने की धमकी देने, 16 अगस्त 2022 को मारपीट करने का मामला दर्ज हुआ। 27 सितंबर 2023 को हत्या के प्रयास के लिए राजू सोलंकी के खिलाफ 12वाँ अपराध दर्ज किया गया था।
(इस खबर को क्रुणाल सिंह राजपूत ने मूल रूप से गुजराती में लिखा है। आप इस लिंक को क्लिक करके पढ़ सकते हैं।)