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भगवान राम को माँ की गाली देते शेयर की रील: काँवड़ यात्रा से पहले तनाव फैलाने में लगे आमिर अली के खिलाफ यूपी पुलिस ने दर्ज की FIR, हिंदू संगठनों ने किया विरोध

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में मुहर्रम और काँवड़ यात्रा से पहले सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश का मामला सामने आया है। यहाँ आमिर अली नाम के युवक पर सोशल मीडिया पर भगवान राम के अपमान का आरोप लगा है। बुधवार (10 जुलाई, 2024) को हिन्दू संगठनों ने आमिर के खिलाफ थाने में तहरीर दे कर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। आमिर के खिलाफ FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी गई है।

यह मामला बरेली के थाना क्षेत्र बारादरी का है। यहाँ 10 जुलाई (बुधवार) को सब-इंस्पेक्टर पवन कुमार ने अपने थाने में तहरीर दी है। तहरीर में उन्होंने बताया है कि 9 जुलाई (मंगलवार) को उन्होंने हिमांशु पटेल नाम के ‘X’ हैंडल पर एक वीडियो देखा। इस वीडियो को बेहद आपत्तिजनक बताते हुए हिमांशु पटेल ने लिखा है कि इसमें भगवान राम के लिए बेहद आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया है। हिमांशु ने आरोप लगाया है कि आमिर अली ऐसे वीडियो शेयर कर के शहर का माहौल खराब करना चाहता था।

सब-इंस्पेक्टर पवन कुमार ने शिकायतकर्ता की शिकायत की जाँच की। उन्होंने आरोपों को सही पाया। पवन कुमार के मुताबिक, आपत्तिजनक वीडियो अकबर अली के बेटे आमिर ने शेयर किया था। आमिर बरेली के बारादरी क्षेत्र का ही रहने वाला है। पुलिस का आरोप है कि आमिर अली अपने फेसबुक पर ऐसे वीडियो डाल कर मुहर्रम और काँवड़ यात्रा से पहले तनाव फैलाना चाहता है। शिकायत में यह भी बताया गया है कि आमिर अली की हरकत से न सिर्फ एक वर्ग की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई है बल्कि उनमें काफी नाराजगी भी है।

जिस वीडियो को आमिर अली ने अपने फेसबुक पर शेयर किया है उसमें 3 लोग खड़े दिखाई दे रहे हैं। इन तीनों ने मिल कर एक रील बनाई है। रील में भगवान राम को माँ की गालियाँ दी गईं हैं। साथ ही इसको मजाकिया अंदाज में पेश किया गया है। बरेली पुलिस ने इस तहरीर पर आमिर अली को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत दर्ज हुई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिस ने बताया है कि मामले की जाँच और जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

‘बहू सब कुछ लेकर चली गई’: क्या है NOK, जिसमें बदलाव माँग रहे बलिदानी कैप्टन अंशुमान सिंह के माता-पिता, ‘कीर्ति चक्र’ लेती पत्नी का वीडियो हुआ था वायरल

हाल ही में बलिदानी कैप्टन अंशुमान सिंह को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘कीर्ति चक्र’ से सम्मानित किया। उनकी पत्नी स्मृति ने उनकी तरफ से ये सम्मान ग्रहण किया, साथ में कैप्टन अंशुमान सिंह की माँ मंजू सिंह भी थीं। देवरिया के रहने वाले अंशुमान सिंह ने सियाचिन स्थित आर्मी कैम्प में आग लगने के बाद अपने जान की परवाह किए बिना 4 साथियों को बचाया था। ‘कीर्ति चक्र’ ग्रहण करने के बाद स्मृति सिंह ने जो कहा था, उसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे और लोगों ने बलिदानी कैप्टन को श्रद्धांजलि देते हुए परिवार के प्रति संवेदना जताई थी।

स्मृति सिंह ने बताया था कि कैसे अंशुमान सिंह कहते थे कि वो साधारण मृत्यु नहीं मरेंगे, वो छाती पर गोली खाएँगे। स्मृति ने बताया था कि अंशुमान से उनकी मुलाकात कॉलेज के पहले ही दिन हुई थी, पहली नज़र में ही दोनों में प्यार हो गया था और 8 वर्षों तक लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में रहने के बाद दोनों ने शादी कर ली थी। अंशुमान सिंह के बलिदान से 1 दिन पहले ही दोनों में खूब बातें हुई थीं, वो प्लानिंग कर रहे थे कि उनकी आगे की ज़िंदगी कैसी होगी – बच्चों के जन्म से लेकर घर बनवाने तक की बातें हुईं।

अगले ही दिन उनके निधन का समाचार मिला। पूरे देश ने उनकी कहानी सुन कर उनकी वीरता को नमन किया। अब वीरगति को प्राप्त सैन्य अधिकारी के माता-पिता मीडिया के सामने आए हैं और उन्होंने जो कहा है वो चर्चा के साथ-साथ विवाद का भी विषय बन रहा है। एक पारिवारिक व निजी मामला सतह पर आ गया है। ध्यान देने वाली बात है कि कुछ दिनों पहले कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी भी इन दोनों से मिले थे। मंजू सिंह ने ‘अग्निवीर’ योजना का विरोध भी किया था।

बलिदानी कैप्टन के पिता ने कहा कि राहुल गाँधी से बात करने के पीछे उनका जो उद्देश्य था, उस बारे में वो केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को भी बता चुके हैं। उन्होंने कहा, “NOK को लेकर जो भारतीय सेना के निर्धारित मापदंड हैं, वो ठीक नहीं हैं। 5 महीने की शादी थी, उनका कोई बच्चा नहीं है। माँ-बाप के पास सिर्फ उनकी तस्वीर है जो पीछे लटकी हुई है। वो (स्मृति सिंह) अपना पता भी बदलवा चुकी हैं, हमारे पास क्या है? NOK के नियमों में बदलाव होना चाहिए।”

उन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध की बात करते हुए कहा कि उसके बाद 67-33% वाला बदलाव हुआ था, इसमें होना चाहिए कि इसकी ठीक से परिभाषा हो – पत्नी परिवार में रहेंगी तो क्या होगा, बच्चे होंगे या नहीं होंगे तो क्या होगा, वो चली जाएँगी तो क्या होगा। उन्होंने कहा कि ये न हो कि पुरानी प्रथा चलती रहे। उन्होंने कहा कि अंशुमान सिंह की माँ ‘कीर्ति चक्र’ की सह-प्राप्तकर्ता हैं, लेकिन उनके पास बेटे की प्रतिमा पर लगाने के लिए वो चक्र नहीं है।

उन्होंने बताया कि राहुल गाँधी ने राजनाथ सिंह से इस संबंध में बात करने का आश्वासन दिया है। वहीं मंजू सिंह ने कहा, “बहुएँ भाग जाती हैं। बहुत से ऐसे मामले आ रहे हैं जहाँ बहुएँ माँ-बाप को छोड़ कर भाग जा रही हैं। मेरा तो हो गया, लेकिन आगे किसी माँ-बाप को हमलोगों की तरह दुःख न हो।” बता दें कि NOK का अर्थ होता है ‘नेक्स्ट ऑफ किन’, सैनिक के वीरगति को प्राप्त होने के बाद जो NOK होता है उसे ही मुआवजे की धनराशि व अन्य फायदे प्राप्त होते हैं।

इस मामले को समझने के लिए हमें सेना में काम कर रहे एक अधिकारी से बातचीत की, जिन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब कोई शख्स सेना में शामिल होता है तो उस प्रक्रिया के दौरान उससे विल भी भरवाया जाता है। इनमें से अधिकतर युवा व अविवाहित होते हैं, ऐसे में इसमें उनके अभिभावक ही सामान्यतः नॉमिनी होते हैं। सेना में एक ‘पार्ट 2’ नाम का दस्तावेज होता है, जिसमें सैनिक को अपने जीवन के घटनाक्रम के बारे में बताना होता है।

इसमें लंबी छुट्टियाँ इत्यादि की भी जानकारी देनी होती है। जब जवान की शादी होती है, तो इसी ‘पार्ट 2’ में उसे सूचित करना होता है कि उसका विवाह हो गया है और इससे संबंधित जानकारियाँ वो वहाँ भरते हैं। सेना में कार्यरत उक्त अधिकारी ने बताया कि अब एक नया ट्रेंड आ गया है कि जब जवान की शादी होती है तो सामान्यतः वह ‘पार्ट 2’ में सूचनाएँ भरने के बाद अपने विल में भी बदलाव करता है। सामान्यतः अपनी पत्नी को शत-प्रतिशत नॉमिनी बना दिया जाता है।

ऐसा कोई बाध्यकारी नियम नहीं है, सामान्यतः ऐसा होता है। कुछ जवान ऐसे भी आते हैं जो 70:30 का फॉर्मूला रखते हैं, यानी 70% नॉमिनी पत्नी होती हैं और 30% माता-पिता। ये सैनिक के विवेकाधिकार पर निर्भर करता है, ये सरकार नहीं बल्कि वही तय करते हैं। नियम के तहत तो 50:50 फॉर्मूले की व्यवस्था भी है, लेकिन कुछ ही जवान इसे चुनते हैं। इसके लिए उन्हें CO से अनुमति लेनी होती है। अतः, ये जवान पर ही होता है कि उसके वीरगति को प्राप्त होने के बाद मुआवजे में से परिवार में किसे क्या मिलेगा।

कैप्टन अंशुमान सिंह के मामले में उनके पिता खुद एक पूर्व-सैनिक हैं, ऐसे में उन्हें कैंटीन व मेडिकल सुविधाएँ नियम के तहत प्राप्त हो रही हैं। बता दें कि ‘पार्ट 2’ में ही प्रमोशन, ट्रांसफर-पोस्टिंग, अनुशासनात्मक कार्यवाही व अन्य सूचनाएँ भी होती हैं। कमांडिंग ऑफिसर द्वारा इसे मैनेज किया जाता है। वहीं ग्रीटिंग्स, सम्मान व बधाई सन्देश जैसी अन्य चीजें ‘पार्ट 1’ का हिस्सा होती हैं, जिससे जवानों का उत्साह बढ़ा रहे। ‘पार्ट 2’ के बारे में कहा जाता है कि सेना में अनुशासन बनाए रखने के लिए इसे ज़रूरी माना जाता है।

बीवी ने मुस्लिम बनने से किया इनकार तो एजाज ने शोएब के साथ मिल कर दिया सर कलम, झाड़ियों में मिली थी प्रिया की लाश: हाईकोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस्लाम ना मानने पर एक हिन्दू लड़की प्रिया की गला काट कर हत्या करने वाले मुस्लिम सह आरोपित को जमानत देने से मना कर दिया। इलाहाबाद हाई कोर्ट में एजाज अहमद ने अपनी जमानत याचिका लगाई थी, जिसे रद्द कर दिया गया। कोर्ट ने मामले में राज्य का पक्ष मान लिया।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के सामने शोएब ने जमानत की याचिका लगाई हुई थी। शोएब इस मामले में सह आरोपित है। इस मामले में मुख्य आरोपित एजाज को कुछ दिन पहले जमानत दे दी गई थी, इसी आधार पर एजाज ने जमानत की माँग की थी। हालाँकि, राज्य की तरफ से उसकी जमानत का विरोध किया गया।

राज्य ने कहा कि एजाज ने अपनी जमानत याचिका में कई जानकारियाँ छुपाई थीं। इसी को आधार मानते हुए हाई कोर्ट ने एजाज को कोई भी राहत देने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उसे जमानत देने के लिए कोई मजबूत आधार नहीं दिखता।

क्या है पूरा मामला?

सोनभद्र जिले के प्रीत नगर इलाके में 21 सितंबर,2020 की शाम को झाड़ियों में एक युवती की सिर कटी लाश मिली थी। इसके बाद पुलिस ने युवती का सिर भी बरामद किया था, उसकी पहचान चोपन थाना क्षेत्र निवासी प्रिया सोनी के रूप में हुई थी। पुलिस का इस मामले में कहना था कि लगभग 1 महीने पहले प्रिया ने पड़ोस में रहने वाले एजाज़ नाम के युवक से कोर्ट मैरिज की थी। युवती के परिजन इस बात से बिलकुल भी सहमत नहीं थे। 

कुछ दिन तक दोनों के बीच हालात सामान्य थे। थोड़े ही समय बाद एजाज़ ने प्रिया पर धर्म परिवर्तन इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया लेकिन युवती ने इससे साफ़ इनकार कर दिया था। इस मुद्दे पर प्रिया और एजाज़ के बीच काफी विवाद हुआ था, एजाज़ ने इस बात पर कई बार प्रिया से मारपीट भी की थी। आखिरकार एजाज़ ने अपने एक साथी शोएब के साथ मिल कर प्रिया का गला काट कर हत्या कर दी और शव झाड़ियों में फेंक दिया। 

इस मामले में पुलिस की जाँच पूरी होने के बाद एसपी आशीष श्रीवास्तव ने घटनाक्रम की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था, “एजाज़ के परिवार वाले प्रिया को बिना धर्म परिवर्तन के स्वीकार नहीं करना चाहते थे। इसके चलते एजाज़ ने प्रिया पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाना शुरू किया। एजाज़ ने प्रिया को एक लॉज में बंद करके रखा था, वह प्रिया पर लगातार धर्म परिवर्तन का दबाव बनाता था। जब वह अपने इरादों में कामयाब नहीं हुआ तो उसने चोपन में दोस्त शोएब को बुलाया और उसके साथ मिल कर प्रिया का गला रेत दिया।”

‘शरीर पर कई घाव, ठुड्डी के बगल में छेद, आँख-नाक-दाँत से बहता खून, मुड़ा हुआ हाथ’: MLA नितेश राणे पुलिस को देंगे सबूत, 14वीं मंजिल से गिरी थी सुशांत की मैनेजर

दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर रहीं दिशा सालियान की संदिग्ध मौत के मामले में अब मुंबई पुलिस ने अब भाजपा विधायक नितेश राणे को नोटिस जारी किया है। मुंबई पुलिस ने कहा है कि नितेश राणे शुक्रवार (12 जुलाई, 2024) को पूछताछ के लिए हाजिर हों। पुलिस उनसे पूछेगी कि उनके पास इस घटना को लेकर क्या सबूत हैं, क्योंकि वो मीडिया में ऐसे दावे कर चुके हैं। नितेश राणे ने कहा कि उन्हें समन प्राप्त हो गया है। उन्होंने फिर से दोहराया कि वो पहले दिन से ही ये कह रहे हैं कि ये मामला हत्या का है।

नितेश राणे ने कहा कि वो और उनके पिता नारायण राणे पुलिस के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं, इससे पहले जो MVA की सरकार थी उसने इस मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की ताकि वो आदित्य ठाकरे को बचा सके। नितेश राणे ने कहा कि अब जब सरकार बदल गई है, पारदर्शी जाँच होगी। उन्होंने कहा कि वो पुलिस को सच्चाई बताएँगे। बता दें कि ‘महा विकास अघाड़ी’ सरकार में उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे और उनके बेटे आदित्य मंत्री। नितेश राणे का कहना है कि आदित्य भी उस पार्टी में मौजूद थे।

मुंबई पुलिस ने दिसंबर 2023 में इस मामले की जाँच के लिए SIT का गठन किया था। 8 जून, 2020 को दिशा सालियान को मृत पाया गया था। इसके मात्र 6 दिन बाद ही सुशांत सिंह राजपूत की भी संदिग्ध मौत हो गई थी। बांद्रा स्थित फ़्लैट में वो फंदे पर लटके हुए मिले थे। वहीं दिशा सालियान मलाड स्थित एक इमारत (गैलेक्सी रीजेंट बिल्डिंग) के 14वीं फ्लोर से नीचे कूद गई थीं। इन दोनों ही मौतों को आत्महत्या बताया गया था। सुशांत सिंह राजपूत जहाँ 34 वर्ष के थे, वहीं दिशा सालियान की उम्र मात्र 28 वर्ष थी।

एक चश्मदीद ने आरोप लगाया था कि घटना की रात दिशा से चार लोगों ने रेप किया था। बाद में उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी बताया था कि इस मामले में पुलिस को नए सबूत मिले हैं। एंबुलेंस के ड्राइवर पंकज सैदन ने रिपब्लिक भारत के साथ बातचीत में कहा था, “दिशा सालियान के पूरे शरीर पर घाव थे। उनकी ठुड्डी के बगल में 1.5 इंच का छेद था। उनकी आँख, नाक, दाँत से खून बह रहा था। उनका हाथ भी मुड़ गया था।”

SC आयोग ने कर्नाटक सरकार को किया तलब: दलित कल्याण का फंड झटक कर अपनी गारंटियों पर खर्च कर रही कॉन्ग्रेस, अब 7 दिन में देना होगा जवाब

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार को दलित आदिवासियों का फंड लेने के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने तलब किया है। कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने अपनी चुनावी गारंटियां पूरी करने के लिए दलित और आदिवासियों के विकास के लिए दिया गया फंड ले लिया था।

NCSC के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने इस मामले में बताया, “कर्नाटक सरकार ने अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए जारी किया गया फंड अन्य कार्य के लिए लेकर इसका दुरुपयोग किया है। यह अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए उठाए गए कदम के विरुद्ध है। इसका NCSC ने संज्ञान लिया है और इस मामले में कर्नाटक सरकार को नोटिस भेजा है। कर्नाटक सरकार को इस मामले में नोटिस भी भेजा गया है। यदि कर्नाटक सरकार इस मामले में जवाब नहीं देती तो कार्रवाई की जाएगी।”

गौरतलब है कि हाल ही में कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने फैसला लिया था कि वह राज्य के दलित-आदिवासियों के दिए गए ₹14,730 करोड़ फंड को अब अपनी गारंटियों में खर्च करेगी।कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए ₹39,121 करोड़ की धनराशि दलित और आदिवासियों के फंड के रूप में जारी किया था। कर्नाटक में नियमों के अनुसार ऐसा करना आवश्यक है। लेकिन कॉन्ग्रेस सरकार ने इसमें से लगभग एक तिहाई फंड काटने का इरादा कर लिया है। वह पहले भी ऐसा ही कर चुकी है।

कॉन्ग्रेस सरकार ने जुलाई 2023 में राज्य के SC-ST समुदाय के कल्याण के लिए खर्च किए जाने वाले ₹11,000 करोड़ को भी इन गारंटियों के लिए उपयोग करने का फैसला लिया था, जिसके कारण इसकी काफी आलोचना हुई थी। कॉन्ग्रेस सरकार ने यह कह कर अपना बचाव करने का प्रयास किया था कि यह दूसरी योजनाओं को दिया जाने वाला यह पैसा भी गरीबों के विकास में लगेगा। हालाँकि, दलित संगठनों ने उसकी इस दलील को स्वीकार नहीं किया था।

मुफ्त वाली गारंटी ले गईं बजट का बड़ा हिस्सा

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार की यह गारंटियाँ बजट का एक बड़ा हिस्सा ले जा रही हैं। इससे बाकी के विकास कामों के लिए पैसा नहीं बच रहा है। वित्त वर्ष 2023-24 में इन पाँच चुनावी गारंटियों पर ₹39,825 करोड़ का खर्चा किया गया था। यह कर्नाटक के 2023-24 के बजट का लगभग 17% था। वित्त वर्ष 2024-25 में गारंटियों का यह खर्चा और बढ़ गया है। 2023-24 के मुकाबले इसमें लगभग एक तिहाई की वृद्धि हुई है।

वित्त वर्ष 2024-25 के लिए पेश किए गए बजट में कर्नाटक ने इन पाँच चुनावी गारंटियों पर ₹52,000 करोड़ खर्च करने की योजना बनाई है। राज्य की कई अन्य योजनाओं का असर इस खर्च के कारण पड़ रहा है।

जुलाई 2023 में ही कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी अपने विधायकों से स्पष्ट कर दिया था कि उन्हें कोई भी फंड नहीं दिए जाएँगे और पूरा फोकस गारंटियों को पूरा करने पर लगाया जाएगा। भाजपा ने कॉन्ग्रेस सरकार पर आरोप लगाया है कि वह राज्य के विकास का सारा पैसा अपने चुनावी वादे पूरे करने में फूँक रही है जिससे राज्य पिछड़ रहा है।

राज्य में जीत को कॉन्ग्रेस ने किए थे ‘रेवड़ी’ वादे

2023 में विधानसभा चुनाव जीतने के लिए कॉन्ग्रेस ने पाँच गारंटी दी थी। इन्हें ‘रेवड़ी’ कहा गया था। कॉन्ग्रेस ने 2023 विधानसभा चुनाव में वादा किया था कि सत्ता में आने पर वह हर घर को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देगी। इसे गृह ज्योति योजना का नाम दिया गया था। इसके अलावा गृह लक्ष्मी नाम की योजना का भी एक वादा किया गया था। इसके अंतर्गत कॉन्ग्रेस ने वादा किया था कि वह राज्य की महिलाओं को ₹2000 प्रतिमाह देगी।

कॉन्ग्रेस ने कर्नाटक की आर्थिक स्थिति और मुफ्त सुविधाओं के वादों से अर्थव्यस्था पर पड़ने वाले बोझ को दरकिनार करते हुए हर परिवार को 10 किलो अनाज देने का भी वादा किया था, इसे अन्न भाग्य योजना का नाम दिया गया था। कॉन्ग्रेस ने राज्य में महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा का भी वादा किया था। इसके अलावा राज्य के बेरोजगार युवाओं को भी ₹1500 देने की बात कही गई थी। इनमें से कुछ योजनाएँ पूरी तरह से लागू कर दी गई हैं तो कुछ को आंशिक रूप से लागू किया गया है।

कॉन्ग्रेस के इन ‘रेवड़ी’ वादों का असर अब राज्य के खजाने पर दिख रहा है और वह राजस्व बढ़ाने के लिए नई-नई जुगत भिड़ा रही है। वह राज्य की आम जनता को अब नए कर और बढ़े करों से लादना चाह रही है। साथ ही वह कमाई के नए जुगाड़ भी लगा रही है।

ncsc issues notice to karnataka congress government for using sc st funds to fulfill electoral guarantees

‘क्लासमेट जोया और उसकी अम्मी करती थी तंग’: हिंदू लड़की ने की आत्महत्या, 1 हफ्ते बाद खुला मामला; जाँच में जुटी कर्नाटक पुलिस

कर्नाटक के हावेड़ी जिले में एक 14 साल की बच्ची ने अपनी क्लासमेट के टॉर्चर से तंग आकर एक हफ्ते पहले आत्महत्या कर ली थी, लेकिन मामला अब जाकर प्रकाश में आया है। लड़की का नाम अर्चना था और क्लासमेट की पहचान जोया के तौर पर हुई है। अर्चना ने सुसाइड से पहले एक नोट लिखा था जिसमें उसने जोया और उसकी अम्मी को अपनी मौत का जिम्मेदार बताया है।

अर्चना डोड्डाननवर जिले के हिरेकेरुर तालुक में मोरारजी देसाई सरकारी आवासीय विद्यालय में पढ़ती थी। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस पर प्रकाशित खबर के अनुसार, एक हफ्ते पहले अर्चना ने अपने घर पर आत्महत्या की तो घरवालों ने पुलिस को बताने की बजाय खुद उसका अंतिम संस्कार कर दिया। साथ ही स्कूल प्रबंधन और जोया के परिवार के साथ बैठकर मुआवजे की रकम भी तय कर ली। अर्चना के घरवालों ने इस मामले को रफा-दफा करने के लिए 10 लाख माँगे थे। हालाँकि सहमति एक लाख रुपए में बनी।

बताया जा रहा है कि जब कुछ ग्रामीणों को इन रुपयों में से हिस्सा नहीं मिला तो उन्होंने इस आत्महत्या की बात को फैला दिया और बात पुलिस तक पहुँची। ग्रामीणों ने बताया कि अर्चना की मौत में कुछ तो गड़बड़ थी। वह एक होनहार छात्रा थी। वहीं कुछ लोग अर्चना की फोटो लेने भी सफल हो गए थे। उन्होंने वो सारी तस्वीरें आदि दिखाते हुए स्कूल प्रबंधन और लड़की के माता-पिता का एक्शन लेने की माँग की।

पुलिस ने जानकारी होने पर इलाके का दौरा किया। वह अर्चना के घर गए। उस विद्यालय में गए जहाँ वो पढ़ती थी। पता लगने पर पुलिस ने घटना की जाँच शुरू कर दी है। अर्चना के परिजनों के अलावा ग्रामीणों और स्कूल प्रबंधन से भी पूछताछ की जा रही है। वो सुसाइड नोट भी मिला है जिसमें लड़की ने लिखा था कि उसकी मौत की जिम्मेदार क्लासमेट जोया और उसकी अम्मी हैं जिन्होंने उसे प्रताड़ित किया।

BMW से महिला को कुचलकर गर्लफ्रेंड के घर गया था मिहिर शाह, 40 बार किए थे कॉल: पुलिस के सामने कबूला गुनाह, मुंबई की सड़क पर डेढ़ किमी घिसटती रही थी मृतका

मुंबई में BMW गाड़ी से महिला कावेरी नखवा को कुचलने और घसीटने वाले मिहिर शाह को अब अपने करियर की चिंता हो रही है। मिहिर शाह का कहना है कि उसने यह दुर्घटना करके अपना करियर बर्बाद कर लिया है। उससे पुलिस पूछताछ में हुए और खुलासे भी लगातार सामने आ रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उसने पुलिस को पूछताछ में अपने करियर को लेकर चिंता जताई है। उसने कहा है कि यह दुर्घटना उसके लिए एक बड़ी गलती है और इसके कारण उसका करियर खत्म हो गया है। उसने इस पूछताछ में और भी कई खुलासे किए हैं।

उसकी पूछताछ के बाद बुधवार (10 जुलाई, 2024) को मुंबई पुलिस ने हादसे वाली जगह पर दुर्घटना का नाट्य रूपांतरण करके देखा। इस दौरान उसके अलावा मुंबई पुलिस उसके साथ उसके ड्राइवर राजेश बिदावत को ले गई थी। राजेश बिदावत भी घटना के दौरान गाड़ी में ही मौजूद था।

मिहिर शाह से हुई पूछताछ में और भी कई खुलासे हुए हैं। पता चला है कि घटना के बाद मिहिर शाह ने अपनी गर्लफ्रेंड को 40 बार फोन किया था। वह घटनास्थल से सीधे गर्लफ्रेंड के ही घर गया था। इसके बाद उसने अपने घर पर सूचना दी थी।

 मिहिर की बहन ने उसे गर्लफ्रेंड के घर से ले आई थी। इसके बाद राजेश शाह को छोड़ कर पूरा परिवार शाहपुर के एक रिजॉर्ट में चला गया था। यहाँ मिहिर शाह के साथ उसकी दोनों बहने, माँ और एक दोस्त भी गया था। यह वाकया 7 जुलाई को हुआ था।

इसके बाद अगले ही दिन मिहिर शाह 8 जुलाई, 2024 को वापस मुंबई के विरार आ गया था। यहाँ वह अपने एक दोस्त के पास आया था। उसके दोस्त ने अपना फोन ऑन किया था तो पुलिस को उसकी लोकेशन मिल गई। पूछताछ में खुद ही गाड़ी से महिला को घसीटने और कुचलने बात भी कबूली है।

गौरतलब है कि 7 जुलाई, 2024 को रात में मिहिर शाह ने अपनी BMW गाड़ी से स्कूटी पर जा रहे एक दंपती को टक्कर मार दी थी। इस टक्कर में महिला की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके बाद भी मिहिर शाह अपनी गाड़ी से महिला कावेरी को 1.5 किलोमीटर तक घसीटता रहा था। घटना के बाद फरार हो गया था। मुंबई पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई थी। उसको मंगलवार को गिरफ्तार किया गया था। मिहिर शाह के पिता राजेश शाह को भी गिरफ्तार किया गया था लेकिन उन्हें जमानत मिल गई थी।

राहुल गाँधी-ध्रुव राठी-उद्धव ठाकरे के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका, जिस स्टोरी के लिए ‘मिड डे’ को माँगनी पड़ी थी माफी, उसका हवाला दे फैलाया था ‘ईवीएम हैकिंग’ का झूठ

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी, शिवसेना-यूबीटी नेता उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे, संजय राउत और यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की माँग को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका में इन नेताओं के खिलाफ EVM को लेकर झूठी कहानियाँ फैलाने और जनता में भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया गया है।

याचिका में कहा गया है कि उक्त लोगों ने अपने ‘छिपे लक्ष्यों’ की प्राप्ति के लिए ईवीएम को लेकर अलग-अलग धारणाएँ बनाई और लोगों को गुमराह कर नागरिकों को गलत तरीके से प्रभावित किया।

दरअसल, मिडडे अखबार ने 16 जून 2024 को एक खबर छापी थी, जिसमें ईवीएम मशीन को ओटीपी के जरिए अनलॉक करने का दावा किया गया था। विपक्षी नेताओं ने उसका इस्तेमाल देश के लोकतंत्र पर सवाल खड़ा करने के लिए किया। 16 जून को मिड डे समाचार पत्र में प्रकाशित 5 कॉलम की रिपोर्ट में दावा किया गया था पुलिस ने अपनी जाँच में पाया है कि एनडीए के प्रत्याशी रवींद्र वायकर के रिश्तेदार ने मतदान के वक्त फोन इस्तेमाल कर रहे थे जो कि ईवीएम से कनेक्ट था।

इस रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से कहा गया था कि प्रत्याशी का रिश्तेदार ओटीपी के जरिए ईवीएम अनलॉक कर रहा था। पुलिस उसका फोन फॉरेंसिक जाँच को भेज चुकी है। हालाँकि बाद में मिड-डे ने अपनी खबर का खंडन छापा था और कहा था कि ये खबर गलत थी। ऐसा होना मुमकिन नहीं है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि ध्रुव राठी और अन्य लोग लगातार फेक न्यूज फैलाकर आम जनता को भ्रमित करते हैं, ये उनकी आदत में शुमार है। ऐसा करना नीलेश नवलखा बनाम भारत संघ (2021) में बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। उक्त आदेश में मीडिया को ‘मीडिया ट्रायल’ का सहारा लेने से बचने के लिए दिशा-निर्देश दिए गए थे। याचिका के अनुसार, राहुल गाँधी, ध्रुव राठी समेत सभी आरोपितों ने उस आदेश का उल्लंघन किया है, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि जिन मामलों की सुनवाई चल रही हो, उस पर कोई राय बनाकर जनता के बीच गलत बातें फैलाने पर आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आएगा। ऐसा करना कोर्ट की अवमानना अधिनियम की धारा 2(सी) के तहत दंडनीय अपराध है।

इस मामले की सुनवाई बॉम्बे हाई कोर्ट में जस्टिस श्याम चांडक और जस्टिस मोहिते-डेरे की बेंच में हुई। जिसमें याचिकाकर्ता ने कोर्ट की अवमानना अधिनियम 1971 की धारा 2(बी) और 12 के तहत राहुल गाँधी, उद्धव ठाकरे, ध्रुव राठी, आदित्य ठाकरे और संजय राउत के खिलाफ कार्यवाही की माँग की। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट से पुलिस को आईपीसी की धारा 192, 193, 107, 409, 120(बी) और 34 के तहत लंबित जाँच के संबंध में सार्वजनिक मशीनरी का दुरुपयोग करने और झूठे सबूत बनाने के लिए उपरोक्च लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में CBI, IB और ED सहित विशेष जाँच दल (SIT) के गठन की भी माँग की है, ताकि राहुल गाँधी, ध्रुव राठी, उद्धव ठाकरे व अन्य लोगों की ‘छिपी मंशा’ की जाँच की जा सके।

इस दौरान याचिकाकर्ता ने जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे से इस मामले की सुनवाई से अलग होने की भी अपील की, क्योंकि जस्टिस डेरे की बहन शरद पवार की एनसीपी से जुड़ी हुई हैं। हालाँकि, पीठ ने इस मामले की सुनवाई करने से इनकार किया। साथ ही कहा कि इसे गलत तरीके से उसके समक्ष रखा गया। याचिकाकर्ताओं से कहा गया कि वे चीफ जस्टिस से संपर्क करें और अपनी याचिका को उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का अनुरोध करें।

सोने के पाउडर में मिलाते थे केमिकल, फिर ट्रॉली बैग से लेकर अंडरवियर तक में कर देते स्प्रे: दुबई से सूरत हो रही थी तस्करी, मियाँ-बीवी हनीफ-उमेमा सहित 4 गिरफ्तार

गुजरात में दुबई से सोने की तस्करी के लिए अजोबोग़रीब तकनीक अपनाने का मामला सामने आया है। सूरत पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने एक शादीशुदा जोड़े समेत 4 तस्करों को गिरफ्तार किया है। साथ ही 927 ग्राम सोना भी जब्त किया गया है, बाजार में जिसकी कीमत 64.89 लाख रुपए आँकी गई है। असल में ये तस्कर सोने के ऊपर एक केमिकल का छिड़काव करते थे, फिर फिर इसे बैग के भीतर साट देते थे।

हवाई अड्डे पर सिक्योरिटी चेक के दौरान भी पता नहीं चल पाता था कि बैग में सोना है। एक जोड़ा इसी तरह तस्करी कर के सोना ला रहा था और उसे जहाँगीरपुरा सायन हजीरा रोड पर स्थित एक होटल में इस सोने की डिलीवरी देनी थी। पुलिस ने सूचनाओं के आधार पर रात के समय नईम मोहम्मद नामक शख्स के घर पर छापेमारी की। हनीफ सालेह और उसकी बीवी उमेमा नईम को भी गिरफ्तार किया गया है। वहीं अब्दुल समेत फारूक बेमत और फिरोज इब्राहिम नूर फरार होने में कामयाब रहे।

पुलिस ने जब इनके पास मौजूद 4 ट्रॉली बैग को चेक किया तो उनमें से उन्हें 927 ग्राम सोना मिला। साथ ही उसमें 76.14 लाख रुपए की अन्य वस्तुएँ भी मिलीं। केमिकल स्प्रे कर के इन्हें बैग में छिपाया गया था। तस्करी के लिए ये सबसे पहले सोने को पाउडर के रूप में परिवर्तित करते थे, उसके बाद उसमें केमिकल मिलाते थे, फिर छोटे-छोटे पाउच में भर कर फिर उस पाउच को अपने अंडरवियर ये मोज़े में डाल लेते थे। 2023 में भी 4 लोगों को 4.30 करोड़ रुपए के तस्करी के सोने के साथ पकड़ा गया था।

उस समय ये तस्कर सोने के पेस्ट का इस्तेमाल कर रहे थे, हालाँकि, उन्होंने फिर नया तरीका निकाल लिया। सोना का पेस्ट बनाने के बाद वो उसमें केमिकल का मिश्रण करते हैं, फिर केमिकल वाले उस सोने के पेस्ट को लिक्विड फोम की शक्ल में लाया जाता है। इसके बाद फिर ट्रॉली बैग में इसे रखा जाता था। मेटल डिवाइस डिटेक्टर से भी इसे नहीं पकड़ा जा सकता है। सोने की इस तरह की तस्करी से भारत सरकार को भी नुकसान होता है, क्योंकि कस्टम विभाग को एक्साइज ड्यूटी टैक्स नहीं मिलता है।

जिस स्कूल में पढ़ती थी 8 साल की बच्ची, उससे उसी के स्कूल के 12-13 साल के 3 लड़कों ने किया गैंगरेप: शव नहर में फेंका, खोजी कुत्तों ने सुलझाई हत्या की गुत्थी

आंध्र प्रदेश के नंदयाल में 8 साल की लड़की के साथ 3 नाबालिग लड़कों ने सामूहिक दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी। घटना रविवार (7 जुलाई 2024) को मुचुमरी गाँव में हुई और बुधवार (10 जुलाई 2024) को इसका खुलासा हुआ। पुलिस के अनुसार, रेप के आरोपित लड़के (12-13 साल) पीड़िता के साथ एक ही स्कूल में पढ़ते थे। तीनों उसे खिलाने के बहाने सुनसान जगह पर ले गए। वहाँ उन्होंने उसका पहले रेप किया और फिर डर से उसकी हत्या कर दी। बाद में उसकी पहचान मिटाने के लिए शव को नहर में फेंक दिया। उधर शाम तक बच्ची के घर न लौटने पर उसके परिजनों ने पुलिस थाने में शिकायत दी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, घरवालों ने रविवार को बच्ची की गुमशुदगी की रिपोर्ट कराई। इस संबंध में पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया, नाबालिग लड़की के पिता ने रविवार को थाने शिकायत लेकर आए। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनकी बेटी पास के मुचुमरी पार्क में खेल रही थी लेकिन अचानक लापता हो गई। उन्होंने उसे हर जगह ढूँढा मगर उसका कुछ पता नहीं चला। शिकायत के बाद पुलिस ने मुचुमरी में हर जगह तलाश की और स्थानीय लोगों से जानकारी के लिए पूछताछ की, लेकिन लड़की नहीं मिली।

पुलिस ने शिकायत दर्ज करके डॉग स्क्वॉयड को भी जाँच में शामिल किया। इसके बाद वो खोजी कुत्तों की मदद से तीन आरोपितों तक पहुँचे। खोजी कुत्ते न केवल पुलिस को अपराध स्थल तक ले गए बल्कि उन्होंने पुलिस को आरोपितों के घर भी पहुँचाया। पुलिस ने पूछताछ की तो एक आरोपित ने जुर्म कबूल लिया।

आरोपितों ने बताया है कि उन्होंने बच्ची को मुचुमरी पार्क के पास खेलते हुए देखा था। वह उनके स्कूल में पढ़ती थी इसलिए उन्हें चेहरे से पहचानती थी। लड़कों ने उसे अपने साथ खेलने के लिए कहा, फिर लुकाछिपी के खेल के बहाने तीनों बच्ची को मुचुमरी सिंचाई परियोजना के पास एक सुनसान जगह पर ले गए। वहाँ उन्होंने बच्ची का मुँह बंद किया और फिर एक के बाद एक उसके साथ बलात्कार किया। लड़की बेहोश हुई तो तीनों डर गए इसलिए उसे मारकर नहर में फेंककर वह वहाँ से फरार हो गए। पुलिस ने तीनों की बात सुनने के बाद इनके विरुद्ध केस दर्ज किया। अब पुलिस लड़की का शव ढूँढने के साथ केस की आगे जाँच कर रही है। स्थानीय लोगों में बच्ची के साथ हुई निर्ममता की खबर सुनने के बाद काफी गुस्सा है