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पथराव करने वाले कॉन्ग्रेसियों को नहीं मिली जमानत, तस्वीरें- CCTV देखने के बाद कोर्ट ने कहा- यह हमले का स्पष्ट मामला: राहुल गाँधी के हिंदू विरोधी बयान का हो रहा था विरोध​

अहमदाबाद में हिंदुओं, बीजेपी कार्यकर्ताओं और पुलिस पर हमला करने वाले कॉन्ग्रेस के 5 कार्यकर्ताओं की जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। इन कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने 2 जुलाई को अहमदाबाद में पत्थरबाजी और दंगा किया था। बता दें कि राहुल गाँधी द्वारा संसद में हिंदुओं के खिलाफ की गई बयानबाजी के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था, जिसके बाद उनके विरोध प्रदर्शन पर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने हमला किया था। इस दौरान कॉन्ग्रेसियों ने बीजेपी कार्यकर्ताओं और पुलिस पर भी पत्थरबाजी की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अहमदाबाद के सेशन जज जयेशकुमार ईश्वरलाल पटेल की कोर्ट ने पाँचों कॉन्ग्रेसियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने घटना की तस्वीरें और सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद कहा कि यह “एक सरकारी कर्मचारी पर हमले का स्पष्ट मामला” और “पुलिस तंत्र पर हमले का स्पष्ट मामला” है। कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि घायल व्यक्ति के सिर पर आठ टांके भी लगे हैं। जज ने अपने आदेश में कहा कि कुछ “आरोपित किसी पार्टी से जुड़े हो सकते हैं, लेकिन उन्हें कानून और व्यवस्था अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती और न ही कानून में ऐसा कोई प्रावधान है।”

ये पाँच कॉन्ग्रेसी हुए थे गिरफ्तार

अहमदाबाद शहर में एक पुलिस कॉन्स्टेबल और भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) अध्यक्ष की दो शिकायतों के आधार पर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गईं थी। इस मामले में हर्ष ईश्वरभाई परमार (23), विमलभाई पंसारा (50), मनीष ठाकोर (47), संजय बारोट (57), और मुकेशभाई दतनिया (68) को पालडी पुलिस स्टेशन के कॉन्स्टेबल कर्मराज भगवतसिंह द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। कॉन्स्टेबल भी झड़प में घायल हो गए थे।

एफआईआर में भगवतसिंह ने कॉन्ग्रेस नेता शहजादखान पठान (जो अहमदाबाद नगर निगम में विपक्ष के नेता भी हैं) और प्रगतिबेन नंदनिया के साथ-साथ “लगभग 200-250 कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं” और “150-200 बीजेपी कार्यकर्ताओं की भीड़” के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत दंगा और पथराव के साथ-साथ अन्य अपराधों में मामला दर्ज कराया गया था।

बता दें कि मंगलवार (2 जुलाई, 2024) को राहुल गाँधी के लोकसभा में हिन्दुओं को हिंसक कहने के बाद बजरंग दल और भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने अहमदाबाद कॉन्ग्रेस दफ्तर पर विरोध करने का ऐलान किया था। यह सभी कार्यकर्ता जब प्रदर्शन करते हुए कॉन्ग्रेस दफ्तर के पास पहुँचे तो उन पर हमला चालू हो गया। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता हाथों में लाठी-डंडे लेकर पुलिस और BJP कार्यकर्ताओं की ओर दौड़ते दिख रहे थे। इस वीडियो में कुछ कार्यकर्ता पथराव भी करते नजर आए। सबसे खास बात ये है कि इस भीड़ के साथ कॉन्ग्रेस विधायक भी मार्च करते दिख रहे थे, तो उनके आसपास के लोग विरोधी पक्ष पर हमला करते दिखे।

एक पुलिसवाले की हवस ने तबाह कर दी वैज्ञानिक की जिंदगी, कमरा बंद कर की जोर-जबर्दस्ती: जिसे केरल पुलिस ने बताया ISRO की जासूसी, उसका नग्न सच CBI ने किया बेनकाब

CBI ने 1994 में ISRO वैज्ञानिक नम्बी नारायणन पर लगे विदेशी जासूस होने के आरोप के मामले में अब तिरुवनंतपुरम स्थित चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट के समक्ष 27 मार्च, 2024 को अंतिम चार्जशीट दायर की, जो बताता है कि कैसे एक IPS अधिकारी ने अपनी हवस के कारण बदले की पूरी साजिश रची और एक देशभक्त वैज्ञानिक को फँसा दिया। केरल का उक्त स्पेशल ब्रांच सर्किल इंस्पेक्टर S विजयन फ़िलहाल बरख़ास्त है। उसने मालदीव की एक महिला मरियम रशीदा को 1994 में 2 बार गिरफ्तार किया था।

इसने लिए उसने गलत इरादों से फर्जी रिपोर्ट दायर की थी। 20 अक्टूबर, 1994 को उन्हें पहली बार गिरफ्तार किया गया था। तब उस पर वीजा की अवधि खत्म होने के बावजूद भारत में रुकने का आरोप था। उसकी पुलिस हिरासत खत्म होने से 1 दिन पहले S विजयन ने उसके व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर उन्हें जासूस ठहरा दिया। इस तरह मरियम रशीदा 13 नवंबर को फिर गिरफ्तार की गई। विजयन ने अपनी पहली रिपोर्ट में बताया था कि 13 सितंबर से मरियम रशीदा तिरुवनंतपुरम के एक होटल में रह रही हैं।

पुलिस अधिकारी ने दावा किया था कि विदेशी नागरिकों की रूटीन चेकिंग के दौरान उसे ये पता चला था। कुछ दिनों बाद वो मरियम रशीदा के उस घर में गया, जहाँ वो होटल से निकलने के बाद रह रही थीं, जहाँ उसने पाया कि उनका वीजा 17 अक्टूबर, 1994 को ही एक्सपायर हो चुका है। विजयन का कहना था कि मरियम रशीदा इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाईं कि भारत में रुकने के लिए उनके पास पैसे कहाँ से आ रहे हैं और वो फोन पर किन लोगों से क्या बात करती हैं।

इंस्पेक्टर ने इसे गिरफ़्तारी के लिए पर्याप्त आधार माना। हालाँकि, CBI जाँच में सामने आया कि विजयन ने फर्जी कहानी रची थी। इस कहानी में केवल यही बात सत्य है कि मरियम रशीदा और एक अन्य मालदीवियन महिला फौजिया हसन तिरुवनंतपुरम के उक्त होटल में रुकी हुई थीं। असल में विजयन उनके पास नहीं गया था बल्कि मरियम रशीदा ही उसके सामने पहुँची थीं। 10 अक्टूबर को वो अपने वीजा की अवधि बढ़वाने के लिए पुलिस कमिश्नर के दफ्तर पहुँची हुई थीं।

17 अक्टूबर, 1994 को उनकी श्रीलंका के लिए फ्लाइट थी। कमिश्नर के दफ्तर में ही उसे CI विजयन के केबिन में जाने के लिए कहा गया और विजयन ने उसका वीजा और विमान टिकट अपने पास रखते हुए बाद में आने के लिए कहा। 13 अक्टूबर को S विजयन उसके होटल और 20 अक्टूबर को उसके घर पहुँचा। उसने फौजिया हसन को बाहर जाने के लिए कहा और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। वहाँ उसने मरियम रशीदा के साथ जोर-जबरदस्ती की।

जब मरियम रशीदा ने विजयन के साथ शारीरिक संबंध बनाने से इनकार कर दिया तो वो वहाँ से जल्दी-जल्दी में निकल कर चला गया। इसे अपना अपमान समझ कर उसने उनका वीजा और टिकट्स नहीं लौटाए। मज़बूरी में मरियम रशीदा को यहाँ रुकना पड़ा और इसी को आधार बना कर विजयन ने उसके खिलाफ मामला चला दिया। उसके बारे में खोद-खोद कर जानकारियाँ निकालने लगा, जिस क्रम में उसे पता चला कि वो ‘लिक्विड प्रोपल्सन सिस्टम्स सेंटर (LPSC)’ के वैज्ञानिक D शशिकुमारन से संपर्क में हैं।

उसने तत्कालीन सिटी पुलिस कमिश्नर VR राजीवन को इसकी रिपोर्ट सौंपी। IB को सूचित किया गया, लेकिन जाँच एजेंसी को कुछ गड़बड़ मिला ही नहीं। फिर पुलिस कमिश्नर ने ISRO के गुप्त राज़ चोरी होने की खबरें मीडिया में प्लांट करवाईं। मरियम रशीदा को दोबारा जिस रिपोर्ट के आधार पर गिरफ्तार किया गया था, उसमें विजयन ने लिखा था कि दोनों महिलाएँ देश-विदेश में कई लोगों से मिल कर भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ काम कर रही हैं, इससे भारत के अपने पड़ोसी देशों के साथ जो संबंध हैं उस पर असर पड़ सकता है।

CBI ने इस रिपोर्ट को भी गलत बताया। विजयन ने अपनी रिपोर्ट का स्रोत बताया ही नहीं। असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर हबीब पिल्लई की सलाह पर उसने दूसरी गिरफ्तार की बात कही, लेकिन हबीब पिल्लई ने नकार दिया कि उन्होंने ऐसी कोई सलाह दी थी। इसका सीधा अर्थ है कि मरियन रशीदा से बदला लेने के लिए फर्जी मामले बनाए गए थे। यहाँ तक कि कुछ IB अधिकारी भी इसमें लिप्त पाए गए। जाँच एजेंसी द्वारा पूछताछ वाली 4 रिपोर्ट CBI के समक्ष आई, किसी पर भी हस्ताक्षर नहीं थे।

केरल पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में जो लोगों के बयान थे, उसके भी सिर का पाँव की कोई थाह नहीं थी। यानी, केरल पुलिस की रिपोर्ट भी फर्जी थी। रिपोर्ट में कहा गया कि मरियम और फौजिया ने कबूल किया है कि वो दोनों D शशिकुमारन के अलावा रूसी ख़ुफ़िया एजेंसी Glavkosmos के बेंगलुरु में स्थित एजेंट K चंद्रशेखर से संपर्क में थीं और उन्होंने विदेश में कुछ ‘महत्वपूर्ण जानकारियाँ’ भेजीं, लेकिन, केस डायरी में ये नहीं लिखा था कि वो इन्फॉर्मेशन क्या था जिसे विदेश पहुँचाया गया।

खास बात ये है कि उस दिन दोनों महिलाओं से पूछताछ हुई ही नहीं थी। इन्हीं में से एक हस्ताक्षर-विहीन रिपोर्ट में नम्बी नारायणन का भी नाम था। क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर S जोगेश ने नम्बी नारायणन को गिरफ्तार किया था, लेकिन उसने CBI को बताया कि उसे इंटेररोगेशन रूम के आसपास भी फटकने नहीं दिया जाता था। SIT के मुखिया सीबी मैथ्यूज ने उन्हें बिना हस्ताक्षर वाली रिपोर्ट दी थी, जिसे उन्होंने आगे बढ़ाया। केरल पुलिस को पता था कि सारे बयान और सबूत फर्जी हैं, फिर भी इस मामले में वो आगे बढ़ती रही।

वांचियूर पुलिस थाने में मरियम रशीदा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। फौजिया हसन को भी गिरफ्तार किया गया था। D शशिकुमारन, K चंद्रशेखर और नम्बी नारायणन के अलावा बेंगलुरु स्थित लेबर कॉन्ट्रैक्टर सुधीर कुमार शर्मा को भी गिरफ्तार किया गया था। अंततः 1994 में ही दिसंबर में CBI ने मामले को हाथ में लिया। अप्रैल 1996 में एर्नाकुलम के CJM के समक्ष दायर रिपोर्ट में ही CBI ने बता दिया था कि आरोपितों के खिलाफ जो आरोप हैं वो साबित नहीं हो रहे।

अप्रैल 1998 में सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार द्वारा दोबारा जासूसी काण्ड की जाँच वाले निर्णय को रद्द कर दिया। जून 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमान चांडी की सरकार ने CBI द्वारा दोषी पाए गए तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई से इनकार कर दिया। सिरांबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने 50 लाख रुपए मुआवजा देने के लिए केरल सरकार को आदेश दिया। अप्रैल 2021 में जैन कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने CBI से केरल पुलिस के 7 और IB के 11 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा।

जिस राज्य में हिंदुओं की शोभायात्रा पर होता था पथराव, उसी राज्य में अब 600 मंदिरों का होगा पुर्नोद्धार-खाटू श्याम का बनेगा कॉरिडोर: वे कौन हैं जो कहते हैं कि BJP के आने से नहीं बदलते हालात?

राजस्थान की भजनलाल शर्मा की भाजपा सरकार ने अपना पहला पूर्ण बजट पेश कर दिया है। राज्य की उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री दीया कुमारी ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए राज्य का यह बजट पेश किया। इस बजट में महिलाओं और हिन्दू आस्था पर भी विशेष ध्यान रखा गया है।

राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने बुधवार (11 जुलाई, 2024) को यह बजट राजस्थान विधानसभा में पेश किया। इस बजट में कई महत्वपूर्ण योजनाओं और कामों का ऐलान किया गया। इसमें राजस्थान में महिलाओं के विकास को लेकर विशेष प्रावधान किए गए हैं।

बजट में महिलाओं के लिए लखपति दीदी योजना लाने की घोषणा की गई है। इस योजना के तहत राजस्थान में 15 लाख महिलाओं को फायदा पहुँचेगा। इस योजना के अंतर्गत महिलाओं को कौशल विकास से जोड़ा जाएगा। हर साल 3 लाख महिलाओं को इससे सशक्त किया जाएगा।

महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ कर उन्हें कौशल सिखाए जाएँगे। इसके बाद उन्हें अपना काम चालू करने के लिए आसान कर्ज दिलाया जाएगा। यह कर्ज ₹1 लाख का होगा और इसे छोटे उद्योग के लिए दिया जाएगा। यह योजना केंद्र सरकार की है, जिसे अब और आगे बढ़ाया जा रहा है।

राजस्थान सरकार ने कामकाजी महिलाओं के लिए जिलों में हॉस्टल बनाने की घोषणा की है। इसके अलावा बालिका सैनिक स्कूल भी बनाए जाएँगे। गर्भवती महिलाओं के लिए भी मुफ्त जाँच के लिए वाउचर दिए जाएँगे। महिलाओं के अन्य भी कई योजनाओं की घोषणा की गई है।

मंदिरों के लिए विशेष बजट

राजस्थान की भजनलाल सरकार ने राज्य में मंदिरों के पुनरोत्थान के लिए भी विशेष बजट जारी किया है। राजस्थान के इस बजट में ₹100 करोड़ की धनराशि सीकर में स्थित खाटू श्याम मंदिर के विकास के लिए दी गई है। यहाँ देश भर से करोड़ों श्रृद्धालु आते हैं। इस मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इन्फ्रा बनाया जाएगा। यहाँ खाटू श्याम कॉरिडोर विकसित होगा, इसे काशी विश्वनाथ और महाकाल कॉरिडोर के तर्ज पर बनाया जाएगा।

इसके अलावा राजस्थान के प्रसिद्ध मंदिर जीनमाता का भी विकास किया जाएगा। शाकम्भरी मंदिर का भी पुनरोद्धार होगा। राज्य के 600 मंदिरों के लिए भी ₹13 करोड़ का बजट पेश किया गया है। मंदिरों में दीपावली और रामनवमी त्योहारों के मौके पर सजावट की जाएगी।

कॉन्ग्रेस ने भगवा पर लगाई थी रोक

2024 लोकसभा चुनाव के दौरान जयपुर शहर लोकसभा क्षेत्र से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार प्रताप सिंह खाचरियावास ने वकील मंगल सिंह के माध्यम से जिला मजिस्ट्रेट में लिखित शिकायत दायर कर दावा किया था कि परकोटा के बाजारों में लोकसभा चुनाव 2024 में एक विशेष पार्टी को फायदा पहुँचाने के लिए भगवा ध्वज लगाए गए हैं। उन्होंने इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करार दिया था।

इसके बाद रातोंरात नगर निगम ने झंडे उतरवा दिए थे। हवामहल से बिधायक बालमुकुंदाचार्य ने ने कलक्टर से शिकायत कर ये ध्वज वापस लगाने की माँग की थी। उन्होंने कहा था कि कॉन्ग्रेस को भगवा ध्वज और राम नाम से आपत्ति है। इस मामले में हिन्दू संगठनों ने जम कर विरोध किया था। इससे पहले कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान राजस्थान में हिन्दू शोभा यात्राओं पर पथराव भी होता था।

बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंदुओं पर किया हमला, 60 घायल: आवामी लीग का नेता कर रहा था हिंसक भीड़ की अगुवाई

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर अत्याचार लगातार जारी है। बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हिंदुओं पर ताजा हमला हुआ है, जिसमें 60 लोग घायल हो गए हैं। ये हमला ढाका की मीरांजिला कॉलेनी में हुआ। जहाँ हिंदुओं के घरों को तोड़ दिया गया और मंदिर को भी निशाना बनाया गया।

जानकारी के मुताबिक, बुधवार (10 जुलाई 2024) को दोपहर करीब 1.30 बजे मजिस्ट्रेट मुहम्मद मोनिरुज्जमाँ ने हिंदू अल्पसंख्यकों के पुनर्वास के लिए ढाका में बनाई गई मीरांजिला कॉलोनी का दौरा किया। इस कदम का स्थानीय पार्षद मुहम्मद औवाल हुसैन और उनके समर्थकों ने विरोध किया और हिंदुओं पर हमला बोल दिया। जमकर पत्थरबाजी हुई और घरों में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने हमले कर उन्हें तहस-नहस कर दिया। इस दौरान मंदिर को भी निशाना बनाया गया। इस्लामिक कट्टरपंथियों के हमले में कम से कम 60 हिंदू घायल हो गए, जिन्हें ढाका मेडिकल कॉलेज और आसपास के अस्पताल में ले जाया गया है।

जानकारी के मुताबिक, ढाका साउथ सिटी कॉरपोरेशन मीरांजिला कॉलोनी इलाके की देखरेख करता है। यहाँ एक माह पहले स्थानीय लोगों को बाहर निकालने का फैसला लिया गया था और कई घरों को तोड़ा गया था, लेकिन देश में इसका विरोध और प्रदर्शनों को देखते हुए प्रशासन ने घरों को खाली कराने का अभियान बंद कर दिया था। इस दौरान सिटी कॉरपोरेशन ने उन लोगों की मदद का फैसला किया, जिनके घरों को तोड़ा गया था और उन्हें मीरांजिला कॉलोनी से निकाला गया था। इन लोगों में अधिकाँश हिंदू थे। यही वजह रही कि विपक्षी दल आवामी लीग के नेता और इस्लामिक कट्टरपंथी इस बात से नाराज हो गए कि हिंदुओं को फिर से क्यों इस जगह पर बसाया जा रहा है।

बता दें कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले आम हो चुके हैं। इस साल की शुरुआत में 7 जनवरी को बांग्लादेश के चुनाव के बाद बहुत सारे हिंदुओं को अपने घर छोड़ने पड़े थे। उनके घरों को आग के हवाले कर दिया गया था और घरों को लूट लिया गया। बांग्लादेश में इस तरह के हमले फरीदपुर, सिराजगंज, बागेरहाट, झेनाइदाह, पिरोजपुर, कुश्तिया, मदारीपुर, लालमोनिरहाट, दाउदकांडी, ठाकुरगांव, मुंशीगंज और गैबांधा समेत कई जगहों पर हुए।

ज्वाइनिंग से पहले ही IAS पूजा खेडकर को चाहिए था गाड़ी-चेंबर, WhatsApp चैट आई सामने: OBC दर्जे पर भी विवाद, निजी ऑडी पर लाल-नीली बत्ती लगाकर घूमती थी

महाराष्ट्र की महिला ट्रेनी IAS पूजा खेडकर इन दिनों खूब सुर्खियों में हैं। अपनी ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने बत्ती वाली गाड़ी, वीआईपी नंबर, अलग चैंबर और पर्सनल स्टाफ की माँग की थी। इन माँगों से परेशान होकर पुणे जिलाधिकारी ने उनकी शिकायत मुख्य सचिव को भेजी और अब उनका ट्रांसफर वाशिम कर दिया गया है। फिलहाल उनके ओबीसी दर्जे पर भी विवाद है और उनके मानसिक रूप से अक्षम होने के दावे पर भी सवाल उठ रहे हैं। इस बीच पूजा खेडकर के ट्रांसफर के बाद उनकी अधिकारी के साथ व्हॉट्सएप चैट सामने आई है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट में जोड़े गए स्क्रीनशॉट से चैट से पता चलता है कि पूजा असिस्टेंट कलेक्टर बनने से पहले ही अधिकारियों को मिलने वाली सेवाओं की डिमांड करने लगी थीं। इसके अलावा ये भी पता चला है कि पूजा ने ट्रेनिंग पीरियड के दौरान कितने नखरे दिखाए। उन्हें जो सेवा दी गई वो उन्होंने ली नहीं, उलटा अपनी ही डिमांड करना जारी रखा व अपने पिता के साथ जाकर खनन विभाग के बगल में स्थित वीआईपी हॉल को अपने केबिन के रूप में इस्तेमाल करने का प्रस्ताव रखा।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट में प्रकाशित पूजा खेडकर के साथ बातचीत के स्क्रीनशॉट

रिपोर्ट में लगे स्क्रीनशॉट के मुताबिक पूजा खेडकर ने अधिकारी को मैसेज भेजे हुए थे कि वो उनके बैठने के प्रबंध और गाड़ी के बारे में उन्हें जानकारी दें ताकि वो उस हिसाब से चीजें मैनेज करें। स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं कि अधिकारी ने उन्हें बराबर रिस्पांस किया, लेकिन फिर भी पूजा उनके पीछे पड़ी रहीं। आगे देख सकते हैं कि वो अपनी ज्वानिंग से पहले सारी सेवाओं की माँग करने पर अड़ी थीं। कह रही थीं कि 3 जून की ज्वाइनिंग से पहले उनके बैठने के लिए चैंबर और आने-ले जाने के लिए गाड़ी की व्यवस्था हो

अधिकारी ने उन्हें कहा कि वो उनकी डिमांड को एक बार उनके आने पर चेक कर लेंगे। हालाँकि पूजा खेडकर कहने लगीं कि ये सब कुछ उनके ऑफिस ज्वाइन करने से पहले होना चाहिए न कि बाद में। उन्होंने लिखा कि उन्हें ये सब मिल जाने के बाद बहुत सारी चीजें प्लान करनी हैं जो बाद के लिए नहीं छोड़ी जा सकती हैं।

बता दें कि ये सारी डिमांड पूजा खेडकर ट्रेनिंग पीरियड में करने लगी थीं जबकि एक ट्रेनी को ये सारी सुविधाएँ नहीं दी जाती हैं। इसके अलावा ये भी पता हो कि अधिकारियों ने शुरू में पूजा खेडकर से पूरी तरह डील करने का प्रयास किया था। उन्हें बार बार माँगने पर एक चैंबर भी दे दिया गया, लेकिन बाद में पता चला कि उन्होंने उस चैंबर में बाथरूम न होने की वजह से ही उसे लेने से मना कर दिया और अपनी डिमांड करना जारी रखा। वहीं अपनी निजी ऑडी कार में वह लाल-नीली बत्ती लगाकर, वीआईपी नंबर के साथ उसका इस्तेमाल करती थीं। इस पर उन्होंने महाराष्ट्र सरकार का बोर्ड भी लगाया हुआ था।

शादी से इनकार करने पर फयाज ने चाकुओं से नेहा को गोद डाला, पर कर्नाटक पुलिस ने ‘लव जिहाद’ मानने से किया इनकार: कॉलेज के बाहर कॉन्ग्रेस पार्षद की बेटी की हुई थी हत्या

कर्नाटक के हुबली में कॉन्ग्रेस पार्षद की बेटी नेहा हिरेमठ की हत्या के मामले में सीआईडी ने अपनी चार्जशीट दाखिल कर दी है। कर्नाटक के आपराधिक जाँच विभाग (सीआईडी) ने अप्रैल 2024 में हुबली में हुई नेहा हिरेमठ की हत्या के मामले में कहा है कि आरोपित फैयाज खोंडुनायक ने ‘लव जिहाद‘ के चक्कर में नहीं, बल्कि शादी से मना करने पर नेहा की हत्या की।

नेहा की हत्या के बाद पिता निरंजन हिरेमठ ने कहा था कि फैयाज ने उनकी बेटी को फंसाया था और धर्म परिवर्तन कर निकाह का दबाव डाल रहा था, लेकिन सीआईडी ने अपनी चार्जशीट में शादी के लिए दबाव डालने की बात तो कही है, पर लव जिहाद के एंगल को नकार दिया है। नेहा हिरेमठ हत्याकांड में पुलिस ने 10 लोगों को हिरासत में लिया था। लोकसभा चुनाव के दौरान हुए विवाद ने राजनीतिक रूप ले लिया था क्योंकि भाजपा ने आरोप लगाया था कि यह लव जिहाद का मामला है। बता दें कि 18 अप्रैल को हुबली धारवाड़ नगर निगम (एचडीएमसी) के पार्षद निरंजन हिरेमठ की 23 वर्षीय बेटी नेहा हिरेमठ को उसके पूर्व सहपाठी खोंडुनायक ने केएलई टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के परिसर में चाकू मार दिया था।

नेहा हिरेमठ एमसीए प्रथम वर्ष की छात्रा थी। शुरू में मामला विद्यानगर पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। लेकिन भाजपा द्वारा इसे ‘लव जिहाद’ का मामला बताए जाने के बाद इस मामले ने राजनीतिक मोड़ ले लिया और इसे सीआईडी ​​को सौंप दिया गया। सीआईडी ​​के पुलिस उपाधीक्षक एमएच पाइका ने 483 पन्नों की चार्जशीट दाखिल दी है, जिसमें 99 गवाह, सीसीटीवी फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट और अन्य सबूत शामिल हैं।

चार्जशीट के मुताबिक, खोंडुनायक और हिरेमठ 2020-21 में पीसी जाबिन साइंस कॉलेज में बैचलर ऑफ कंप्यूटर साइंस (बीसीए) की पढ़ाई के दौरान सहपाठी थे। बाद में वे दोस्त बन गए और 2022 तक वे रिलेशनशिप में थे। इस साल मार्च में दोनों के बीच झगड़े होने लगे और नेहा हिरेमठ ने खोंडुनायक से दूरी बनानी शुरू कर दी। 18 अप्रैल को शाम करीब 4.40 बजे खोंडुनायक ने एक मंकी कैप और चाकू खरीदा था और कॉलेज के बाहर उसका इंतजार किया और मौके पर ही उसकी हत्या कर दी।

चार्जशीट में सीआईडी ​​ने कहा चाकू मारते हुए उसने कहा था, “इतने समय तक मुझसे प्यार करने के बाद तुम मुझे धोखा कैसे दे सकती हो? मैं तुम्हें नहीं छोडूँगा।” पुलिस ने खोंडुनायक के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 341 (गलत तरीके से रोकना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया है।

’95 परीक्षा सेंटरों से हैं शीर्ष 100 टॉपर, लीक वाला वीडियो एडिटेड’: NTA ने सुप्रीम कोर्ट को बताया – Answer Key के रिवीजन के बाद मात्र 17 छात्रों को फुल मार्क्स

NEET की परीक्षा आयोजित करने वाली ‘राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी’ (NTA) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि एग्जाम से 1 दिन पहले 4 मई को जिस सामूहिक पेपर लीक के वीडियो को सबूत के रूप में पेश किया गया था, वो एडिटेड था और पेपर पहले आउट होने का भ्रम इससे फैला। NTA द्वारा दायर किए गए एफिडेविट में बताया गया है कि टेलीग्राम पर पेपर लीक की जो तस्वीर है वो 5 मई को 17:40 बजे का टाइम स्टाम्प दिख रहा है, 4 मई का नहीं।

उक्त टेलीग्राम चैनल में हुए डिस्कशन से भी पता चलता है कि उसके सदस्यों ने ही इस वीडियो को फेक बताया था। NTA का कहना है कि टाइम स्टाम्प के साथ छेड़छाड़ की गई, ताकि ऐसा लगे कि 1 दिन पहले पेपर लीक हुआ। NTA ने बताया है कि उसने पेपर लीक की जाँच के लिए जो कमिटी बनाई है, उसने गड़बड़ियों के 153 मामले पाए हैं। अब तक 81 अभ्यर्थियों के परिणाम स्थगित करने का निर्णय लिया गया है, वहीं 54 छात्रों को अगले 3 साल के लिए प्रतिबंधित किया गया है।

अब तक NEET UG पेपर लीक को लेकर 16 FIR दर्ज की गई है। पटना और सवाई माधोपुर में पेपर लीक होने के दावों का भी NTA ने जवाब दिया है। 67 छात्रों को पूर्ण अंक यानी 720 मार्क्स मिलने के संबंध में कहा कि 6 को ग्रेस मार्क्स दिए गए थे तभी उन्हें इतने अंक मिले, ग्रेस मार्क्स रद्द कर रिटेस्ट लिया गया तो अब ये आँकड़ा 61 है। वहीं उत्तर कुंजी के पुनः परीक्षण के बाद केवल 17 छात्र ही हैं, जिन्हें 720 मार्क्स मिले हैं।

NTA ने बताया है कि 32 अलग-अलग स्कूल बोर्ड्स के प्रतिनिधियों वाली विशेषज्ञ समिति की सलाह पर पिछले साल के मुकाबले इस बार NEET UG के सिलेबस में 22-25% की कटौती की गई है। शीर्ष 100 अभ्यर्थियों के संबंध में NTA ने बताया कि ये 18 प्रदेशों के 56 शहरों और 95 परीक्षा केंद्रों से ताल्लुक रखते हैं। NTA ने ये बताने की चेष्टा की है कि शीर्ष 100 टॉपर एक ही जगह से नहीं हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इसमें कोई शक नहीं है कि परीक्षा में धाँधली हुई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 जुलाई को होगी।

चैंपियस ट्रॉफी का शेड्यूल तो आ गया, पर टीम इंडिया के पाकिस्तान नहीं जाने के आसार: BCCI ने दुबई-श्रीलंका में मैच कराने का आईसीसी को दिया प्रस्ताव

पाकिस्तान में अगले साल फरवरी-मार्च में आयोजित होने जा रही चैंपियंस ट्रॉफी को लेकर बीसीसीआई ने बड़ा फैसला लिया है। बीसीसीआई के सूत्रों ने कहा है कि भारतीय टीम पाकिस्तान नहीं जाएगी। बीसीसीआई इसके लिए आईसीसी से कहेगी, कि वो पाकिस्तान पर पिछले टूर्नामेंट्स की तरह हाई ब्रिड मोड पर आयोजित कराए और भारतीय टीम के मैचों का आयोजन श्रीलंका या फिर यूएई में कराए। बता दें कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने चैंपियंस ट्रॉफी का शेड्यूल आईसीसी के पास भेजा है, जिसमें भारत के सभी मुकाबले लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में कराने की बात कही है। हालाँकि इसे अभी मंजूरी नहीं मिली है।

बीसीसीआई के सूत्रों के मुताबिक, भारतीय क्रिकेट टीम पाकिस्तान दौरे पर नहीं जाएगी। भारतीय टीम सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान नहीं जाएगी। बता दें कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने सोमवार को आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का शेड्यूल आईसीसी को सौंपा था। पीसीबी ने आईसीसी को जो शेड्यूल सौंपा है, उसमें सुरक्षा और ‘लाजिस्टिकल’ कारणों से भारत के मैच लाहौर में ही रखे गए। यह शेड्यूल तभी फाइनल होगा, जब इस पर आईसीसी की मुहर लगेगी। इससे पहले ही भारतीय टीम के पाकिस्तान ना जाने की खबरें आ गई हैं।

पाकिस्तान को फिर से झटका

भारतीय क्रिकेट टीम पाकिस्तान का दौरा नहीं करेगी, ये बात अब साफ हो चुकी है। बीते कई सालों से भारतीय टीम ने पाकिस्तान का दौरा नहीं किया है। भारत अपने मुकाबले किसी तीसरे देश में खेलता रहा है। चैंपियंस ट्रॉफी के लिए एक बार फिर से इसी हाईब्रिड मोड को अपनाया जा सकता है। भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) एक बार फिर से आईसीसी से हाइब्रिड मॉडल के तहत अपने मैच यूएई या श्रीलंका में कराने की माँग करेगा।

गौरतलब है कि भारतीय टीम ने पाकिस्तान का आखिरी दौरा 2008 में किया था, तब भारतीय क्रिकेट टीम पाकिस्तान में आयोजित एशिया कप खेलने गई थी। पाकिस्तान ने पिछले साल एशिया कप की मेजबानी हाइब्रिड मॉडल में ही की थी। इसके तहत भारत को छोड़कर सभी टीमों के मुकाबले पाकिस्तान में खेले गए थे। वहीं, इस बार चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में भारत-पाकिस्तान समेत 8 टीमों को हिस्सा लेना है। इन 8 टीमों के बीच कुल 15 मैच खेले जाएँगे।

साढ़े 5 घंटे की ड्यूटी में ढाई घंटे मोबाइल में बिजी, सवा घंटा कैंडी क्रश खेलते हैं मास्टरसाहब… जिस राज्य में ‘डिजिटल अटेंडेस’ पर हुई राजनीति, वहाँ के शिक्षक का रिपोर्ट कार्ड देख चौंक जाएँगे

उत्तर प्रदेश में पिछले दिनों योगी आदित्यनाथ सरकार एक नियम लेकर आई थी जिसमें हर सरकारी टीचर को समय पर स्कूल में उपस्थित होकर डिजिटल हाजिरी लगाने को कहा गया था। टीचरों ने इस बदलाव के बारे में सुना तो हंगामा कर दिया, विपक्ष भी फौरन मौके का फायदा उठाते हुए केस में कूद गया। हालाँकि बाद में टीचरों की दलीलें समझते हुए सरकार ने इस डिजिटल हाजिरी के लिए टीचरों को आधे घंटे ज्यादा तक समय दे दिया।

अब सरकार के इस फैसले से शिक्षा स्तर पर क्या फर्क पड़ता, क्या नहीं, ये अलग चर्चा का विषय है, लेकिन संभल से एक ऐसा मामला सामने आया है जो बताता है कि टीचरों पर प्रशासन द्वारा सख्ती किया जाना कितना जरूरी है। दरअसल, संभल के एक सरकारी स्कूल में डीएम औचक निरीक्षण करने पहुँचे तो उन्होंने पूरा स्कूल घूमते हुए टीचरों की गतिविधियाँ देखी। इसी दौरान डीएम को एक टीचर दिखे जो वहाँ पर कैंडी क्रश खेल रहे थे।

डीएम ने जब मोबाइल चेक किया तो पता चला कि साढे 5 घंटे के स्कूल टाइम में उन्होंने एक घंटा 17 मिनट तक कैंडी क्रश खेला था और इसके अलावा वो स्कूल टाइम में ही सोशल मीडिया भी चला रहे थे। कुल मिलाकर उन्होंने करीबन ढाई घंटे इन्हीं सब पर खर्च किए थे। डीएम ने बिन देरी किए डीएम ने फौरन कैंडी क्रश खेलने वाले टीचर को ड्यूटी से सस्पेंड कर दिया। टीचर का नाम प्रेम गोयल है।

जानकारी के मुताबिक ये स्कूल शरीफपुर ग्राम पंचायत का सरकारी स्कूल है जहाँ संभल में डीएम ने औचक निरीक्षणक किया तो पता चला कि स्कूल में कुल 101 छात्र हैं, लेकिन आए सिर्फ 47 ही थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने टीचरों का कार्य देखा और बच्चों को पढ़ाने के तरीके पूछे। इसके बाद उन्होंने 6 छात्रों की कॉपियों के 6 पेज चेक किए और कुछ ही देर में उसमें से 95 गलतियाँ छाँट दी। आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, पहले पेज पर 9 गलतियाँ थीं, दूसरे पर 23, तीसरे पर 11, चौथे पर 21, पाँचवे पर 18 और छठे पेज पर 13 गलतियाँ थीं। डीएम ने छात्रों की कॉपी चेक करने के बाद उन्हें फटकारा और सिर्फ एक शिक्षक और एक शिक्षिका के पढ़ाने के तरीके की तारीफ की। उन्होंने स्कूल में निरीक्षण के बाद मिली कमियों को देखते हुए खराब एजुकेशन क्वालिटी पर नाराजगी भी जताई।

जिनकी कोचिंग में भारत बना क्रिकेट का वर्ल्ड चैंपियन, उनके साथ शाहीन अफरीदी ने की बदतमीजी: बोले पूर्व क्रिकेटर- तबाह हो जाएगा पाकिस्तान का क्रिकेट

पाकिस्तान की क्रिकेट टीम टी-20 विश्वकप में भारत और अमेरिका से हार कर बुरी तरह से बाहर हो गई। पाकिस्तानी टीम के विश्व कप से बुरी तरह से हारने की वजह से पाकिस्तान क्रिकेट में भूचाल आ चुका है। बलि का बकरा खोजने की कोशिशें की जा रही हैं। कुछ पर गाज गिरा दी गई है, तो अब शाहीन शाह अफरीदी और मोहम्मद रिजवान जैसे सीनियर खिलाड़ियों पर गाज गिराने की तैयारी हो रही है। इस बीच, पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर बासित अली ने कहा है कि बाबर आजम को बचाने के लिए ‘कुर्बानी के बकरे’ ढूँढे जा रहे हैं। वहीं, एक रिपोर्ट कोच गैरी कर्स्टन ने सौंपी है, जिसमें उन्होंने शाहीन शाह अफरीदी पर बदतमीजी के आरोप लगाए हैं।

जिसने बनाया भारत को चैंपियन, उसके साथ बदतमीजी

पाकिस्तानी टीम के विश्व कप से बाहर होने के बाद अब कोच और स्टाफ की तरफ से एक रिपोर्ट सौंपी गई है। इस रिपोर्ट में गुटबाजी के आरोप लगाए गए हैं और शाहीन शाह अफरीदी को मुख्य खिलाड़ी बताया गया है। ये रिपोर्ट गैरी कर्स्टन की ओर से बनाई गई है। दरअसल, शाहीन शाह अफरीदी को पाकिस्तानी टी-20 टीम की कमान दी गई थी, लेकिन 5 मैचों के बाद ही उनसे विश्व कप से ठीक पहले कप्तानी छीन ली गई और बाबर आजम को फिर से कप्तान बना दिया गया। अब शाहीन शाह अफरीदी पर आरोप लग रहे हैं कि वो टीम में गुटबाजी कर रहे हैं। इसमें बदतमीजी के भी आरोप लगे हैं।

टीम के सीनियर मैनेजर वहाब रियाज और मैनेजर मंसूर राणा ने भी उसका साथ दिया। यानी यह दोनों शिकायत के बावजूद मामले में कुछ बोले ही नहीं। अब इन खुलासों के बाद पाकिस्तान टीम की बुरी तरह बेइज्जती हो रही है। यही कारण रहा है कि पीसीबी ने वहाब और मंसूर को निकाल दिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि टी20 वर्ल्ड कप 2024 के दौरान शाहीन ने गैरी कर्स्टन और सहायक कोच अजहर महमूद के साथ बुरा बर्ताव किया था। दूसरी ओर वहाब और मंसूर ने भी उन्हें गलत तरीके से गाइड किया। पाकिस्तान टीम में फूट पड़ने और खिलाड़ियों की लॉबिंग करने वाली बात गैरी कर्स्टन पहले भी कह चुके हैं। बता दें कि गैरी के कोच रहते हुए ही भारत ने साल 2011 का क्रिकेट विश्वकप जीता था।

अफरीदी के समर्थन में आए पूर्व खिलाड़ी, बाबर आजम पर साधा निशाना

बासित अली पाकिस्तान के लिए 19 टेस्ट मैच और 50 वनडे मैच खेल चुके हैं। उनका दावा गंभीर नजर आता है। एक तरफ तो शाहीन शाह अफरीदी पर गुटबाजी के आरोप वाली रिपोर्ट सामने आ चुकी है, तो वहाब रियाज-अब्दुल रज्जाक जैसे सीनियर खिलाड़ियों को चयनसमिति से ही हटा दिया गया है।

बासित अली ने एक शो में कहा, “तैयारी जो की जा रही है, जो रिपोर्ट बनाई जा रही है, वो है शाहीन शाह अफरीदी और रिजवान के खिलाफ। इन्होंने ग्रुपिंग कर दी है, जो गलत है। ये जो रिपोर्ट बना रहे हैं, जिनके दिमाग में ये चीज है कि वो अपना मलबा इन पर डाल दें। ऐसा मत करिएगा, पाकिस्तान की क्रिकेट तबाह हो जाएगी।”

बासित अली ने कहा कि बाबर आजम को खास मदद की जाती है, तो शाहीन और रिजवान के साथ सही व्यवहार नहीं होता। उन्होंने कहा, “अल्लाह न करे कि ये चीज (अफरीदी-रिजवान पर कार्रवाई, बाबर का बचाव) हो गई, आप की भूल है। अगर आप समझते हैं कि रिजवान, शाहीन शाह अफरीदी और बाबर आजम एक पिच पर नहीं है। अगर आपने हटाना है तो तीनों की छुट्टी करें, ये नहीं कि 2 को आप कुर्बानी का बकरा बनाएँ और तीसरे को आप हीरो बना दें।”

बासित अली बाबर आजम की कप्तानी पर भी सवाल खड़े करते रहे हैं। उन्होंने न सिर्फ टी-20 विश्वकप बल्कि ऑस्ट्रेलिया में भी बाबर की सोचने की क्षमता पर सवाल उठाए। इसके साथ ही उन्होंने शाहीन शाह अफरीदी का ये कहकर बचाव किया कि उनसे अचानक कप्तानी छीन लेने से भी चीजें गड़बड़ हुई होंगी। यहाँ लोगों की बैठने की जगह पर कुर्सी बदल जाती है, तो दिक्कत होती है।

चयनकर्ता वहाब रियाज और अब्दुल रज्जाक पर गिराई जा चुकी है गाज

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन मोहसिन नकवी ने पाकिस्तानी टीम की बुरी गत के बाद सबसे पहली गाज गिराई चयनकर्ताओं के 7 सदस्यीय पैनल में मुख्य वहाब रियाज और अब्दुल रज्जाक पर। दोनों को चयनसमिति से बाहर कर दिया गया। इस बारे में भी खूब बवाल हुआ। दरअसल, वहाब रियाज को 4 महीने पहले मुख्य चयनकर्ता बनाया गया था, लेकिन बाद में एक कमेटी गठित कर सातों सदस्यों को बराबर अधिकार दे दिए गए थे। इसके बाद भी गाज सिर्फ रियाज और अब्दुल रज्जाक जैसे खिलाड़ियों पर गिराई गई। वहाब रियाज ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है, लेकिन उन्होंने चुप रहने में ही भलाई समझी है। उन्होंने कहा कि वो आरोप-प्रत्यारोप में नहीं पड़ना चाहते। वहाब रियाज ने कहा कि उन्होंने अपनी क्षमता में टीम के लिए 100 प्रतिशत योगदान दिया है।

बता दें कि पाकिस्तान क्रिकेट टीम में अक्सर भाई-भतीजावाद का खेल चलता रहा है। मौजूदा कप्तान बाबर आजम अकमल बंधुओं के परिवार से हैं, तो शाहीन शाह अफरीदी दिग्गज आलराउंडर शाहिद अफरीदी के दामाद हैं। शाहिद अफरीदी इमरान खान के प्रधानमंत्री रहते काफी ताकतवर हुआ करते थे, लेकिन देश में सरकार बदलने के बाद से शाहीन शाह अफरीदी के भी बुरे दिन शुरू हो गए। इसके अलावा बीच में इंजमाम उल हक को भी मुख्य चयनकर्ता बनाया गया था, तो उस पर अपने परिवार के इमाम उल हक को आगे बढ़ाने का आरोप लगा। मोइन खान पर अपने बेटे आजम खान को। इसी तरह से पाकिस्तान क्रिकेट में लगातार उलट-पुलट चलता रहा है।