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महाराष्ट्र में अर्बन नक्सलियों के खिलाफ विधेयक विधानसभा में पेश, वामपंथी आतंकवाद को ‘बुद्धिजीवी’ बन कर प्रश्रय देने वालों की अब खैर नहीं

महाराष्ट्र सरकार अर्बन नक्सलियों के खिलाफ कानून बनाने जा रही है, जिसका मसौदा विधानसभा में भी पेश गया है। ‘महाराष्ट्र स्पेशल पब्लिक सिक्योरिटी बिल, 2024’ के लागू होने के बाद से नक्सलियों के इकोसिस्टम में शामिल ऐसे लोगों पर कार्रवाई होगी जो ‘बुद्धिजीवी’ कहलाने की आड़ में बचते फिरते हैं। इसमें बताया गया है कि मुखौटा संगठनों के जरिए शहरी क्षेत्रों में नक्सली अपना प्रभाव बढ़ा रहे हैं। ये सशस्त्र नक्सलियों को शरण देते हैं, उन्हें संसाधन मुहैया कराते हैं।

नक्सलियों के पास से जब्त किए गए साहित्यों से पता चलता है कि शहरी क्षेत्रों में उनके कई गुप्त ठिकाने हैं। जो लोग अपना घर इन नक्सलियों को रहने के लिए देते हैं, वो सोशल मीडिया और आमजनों के बीच नक्सली विचारधारा को आगे बढ़ा रहे हैं, यानी सरकार के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह की आग जला रहे हैं और ये देश के खिलाफ है। छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा ऐसे 48 संगठनों को पहले ही प्रतिबंधित कर चुके हैं। अक्टूबर में इसी साल महाराष्ट्र में चुनाव भी होने हैं।

इस बिल में स्पष्ट कहा गया है कि ऐसे किसी भी संगठन की बैठकों या सभाओं में प्रतिबंधित संगठन का कोई सदस्य किसी भी माध्यम से भाग लेता है या मदद करता है, तो उसे 3 साल तक की जेल की सज़ा के साथ-साथ 3 लाख रुपए तक का जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। राज्य सरकार ऐसे संगठनों को चिह्नित करने के लिए एक सलाहकार समिति का गठन करेगी। इसके कानून बनने के बाद पुलिस शक के आधार पर किसी भी परिसर में घुस कर नक्सली विचारधारा वाले साहित्य को जब्त कर सकती है।

साथ ही अर्बन नक्सलियों की संपत्ति को जब्त करने का भी प्रावधान है। ऐसे संगठनों को प्रतिबंधित किए जाने का आदेश उसके अधिकारियों को दिया जाएगा वरना दफ्तर के बाहर चस्पाया जाएगा, दफ्तर न होने की स्थिति में अख़बारों में ये नोटिस छपेगा। सरकार द्वारा गठित एडवाइजरी बोर्ड में एक हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज भी होंगे। किसी प्रतिबंधित संगठन या उसके सदस्य की वित्तीय मदद करने पर भी जेल होगी। कोई संगठन नाम बदल कर भी नहीं बच सकता, क्योंकि जब तक वो ऐसी गतिविधियों में शामिल रहेगा वो प्रतिबंधित रहेगा।

‘रजत शर्मा वाला वीडियो एडिटेड नहीं’: हाईकोर्ट में ‘X’ के बयान पर प्रोपेगेंडा चला रही कॉन्ग्रेस, छिपा रही ट्वीट डिलीट करने वाला आदेश

वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा पर ऑन-एयर गाली देने का आरोप लगाने वाली कॉन्ग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक, पवन खेड़ा, जयराम रमेश के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। हाई कोर्ट ने पूछा कि जून में दिए गए आदेश पर अब तक अमल क्यों नहीं किया गया? फर्जी दावों वाले ट्वीट्स क्यों नहीं हटाए गए? इसके जवाब में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने हाई कोर्ट में दलील दी कि रजत शर्मा का जो वीडियो हमारे प्लेटफॉर्म पर डाला गया है, वो ‘एडिटेड नहीं लगता’। हालाँकि हाई कोर्ट ने साफ कर दिया कि सारे वीडियो और इससे जुड़े यूआरएल 13 जुलाई की शाम तक हट जाने चाहिए।

दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम सिर्फ ‘एक्स’ की ओर से कही गई बातों को आधार बनाकर मीडिया ट्रायल करने लगा। कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम इस पूरे मामले को डायवर्ट करते हुए सिर्फ ये फैलाने में जुट गया कि रजत शर्मा ने रागिनी नायक को ऑन एयर गाली दी थी। ऐसे में खुद रजत शर्मा आगे आए, और उन्होंने पूरे कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम को बेनकाब कर दिया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा, 13 जुलाई तक हटाओ सारे ट्वीट्स

दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले की कॉपी रजत शर्मा ने खुद एक्स पर शेयर किया है। रजत शर्मा ने लिखा, “झूठ की इंतहा हो गई है। सच मैं बताता हूँ: आज ही कोर्ट ने अपने ऑर्डर में रागिनी नायक, जयराम रमेश और पवन खेड़ा को निर्देश दिया है कि वो 14 जून 2024 के ऑर्डर के मुताबिक़ अपने ट्वीट डिलीट करें। आज ही अदालत ने ट्विटर को आदेश दिया है कि अगर कॉन्ग्रेस लीडर ऐसा नहीं करते तो ट्विटर इन ट्वीट्स को ब्लॉक करे। आज कोर्ट ने ये भी कहा कि कॉन्ग्रेस के ये लीडर इस डिबेट से संबंधित कोई पोस्ट ना करें जब तक अदालत अंतरिम आदेश पर फैसला नहीं कर लेती। अदालत का आज का ऑर्डर सामने है, कोई भी देख सकता है। अब आप ही बताइये इनका क्या करें?”

क्या प्रोपेगेंडा फैला रहा कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम?

दरअसल, गुरुवार (11 जुलाई 2024) को दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा था। ये केस रजत शर्मा द्वारा किए गए 100 करोड़ की मानहानि के मामले में भी है, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट ने पूछा कि ट्वीट्स अब तक क्यों नहीं हटाए गए, जैसा कि पिछली सुनवाई (16 जून 2024) के दौरान आदेश दिया गया था। कोर्ट ने कहा था कि कॉन्ग्रेसी नेता रजत शर्मा को लेकर किए जा रहे दावों वाले वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाएँ। कोर्ट ने ये भी कहा था कि अगर ये वीडियो खुद नहीं हटाए जाते हैं, तो सोशल मीडिया कंपनी एक्स (पूर्व में ट्विटर) खुद इन्हें ब्लॉक करे, लेकिन वीडियो न हटने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सवाल पूछा, तो एक्स ने अपनी तरफ से बात रखी।

एक्स ने दावा किया कि रजत शर्मा से जुड़ा वीडियो ‘एडिटेड नहीं हो सकता!’, क्योंकि मूल वीडियो अब भी इंडिया टीवी के यू-ट्यूब चैनल पर मौजूद है। दोनों की मिलावट से पता चलता है कि रजत शर्मा ने ‘कुछ तो’ कहा है। एक्स की इसी दलील को आधार बनाकर तमाम मीडिया हाउसों ने एकतरफा खबरें परोसनी शुरू कर दी। अदालती कार्यवाही को कवर करने वाली वेबसाइटों ने भी ‘अधूरी रिपोर्ट्स’ डाली, क्योंकि उनमें दिल्ली हाई कोर्ट की तरफ से दिए गए आदेश को जगह ही नहीं दी गई, जिसकी हेडलाइन्स कुछ इस तरह की रही-

ट्विटर ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा: रजत शर्मा द्वारा लाइव टीवी पर रागिनी नायक को गाली देने का वीडियो फर्जी या संपादित नही है – बार एंड बेंच की खबर

Video Posted By Ragini Nayak Alleging Abuse By Journalist Rajat Sharma Not Edited Or Fake: Twitter To Delhi High Court : लाइव लॉ की खबर

यही नहीं, लाइव हिंदुस्तान जैसे मुख्यधारा की मीडिया ने भी इसी तरह की खबरें छापी, जिसका शीर्षक दिया- ( रागिनी नायक को गाली देने वाला वीडियो ना फर्जी ना संपादित, दिल्ली HC में ट्विटर ने दी जानकारी )

इन तीनों ही रिपोर्ट्स को पढ़ेंगे, तो ये कहीं नहीं मिलेगा कि कोर्ट ने वीडियो और ट्वीट्स के यूआरएल को 13 जुलाई 2024 तक हटाने का आदेश दिया है। ये सारी रिपोर्ट्स सिर्फ एक्स के बयान के आधार पर छाप दी गई।

बस फिर क्या था, कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम मानो शिकार की तलाश में बैठा हो। तुरंत ही सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक्स के बयान को आधार बनाकर छापी गई रिपोर्ट्स शेयर की जाने लगी और रजत शर्मा को निशाना बनाया जाने लगा।

खुद रागिनी नायक ने लिखा, “‘X’ formerly ‘Twitter’ ने दिल्ली High Court को बताया कि मेरे द्वारा पोस्टेड वीडियो न तो ‘Fake’ है, न ही ‘Edited’ है !!!”

रागिनी नायक ने न तो दिल्ली हाई कोर्ट की बात का कोई जिक्र किया और न ही 13 जुलाई 2024 तक वीडियो और पोस्ट को हटाने के आदेश को लेकर। वहीं, कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और कम्युनिकेशन सेल के इन्चार्ज जयराम रमेश ने भी लाइव लॉ के ट्वीट को रीट्वीव कर इसी झूठ को आगे बढ़ाया। चूँकि उनका एजेंडा तो बढ़ ही रहा है, ऐसे में कौन 2 लाइन लिखकर सच्चाई को सामने रखने की जहमत उठाए।

देखते ही देखते एक्स पर कॉन्ग्रेसी और लेफ्ट इकोसिस्टम इस अधूरी रिपोर्ट को पूरी बताकर पेश करने लगा और रजत शर्मा पर निशाना साधने लगा। गुरप्रीत गैरी वालिया नाम के कथित ‘पत्रकार’ ने एक्स पर लिखा, “रजत शर्मा और इंडिया TV वालों अब क्या बोलोगे ? इस ट्वीट को जिसने रीट्वीट ना किया उसको ब्लॉक कर दूँगा।”

काव्या इंडिया नाम की एक्स यूजर ने लिखा, “रजत शर्मा पत्रकारिता को अब तक के सबसे निचले स्तर पर ले जा रहा है। ट्विटर ने कोर्ट मे कहा इसकी गाली वाली वीडियो फेक नही। अभी तक इसकी पत्रकारिता THE लाली के लिए जानी जाती थी, अब इसकी पत्रकारिता गाली की वजह से जानी जा रही है। शर्मनाक!”

इस पूरे मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने 12 जुलाई तक नेताओं को खुद से वीडियो हटाने होंगे, वर्ना एक्स को 13 जुलाई 2024 तक का समय इन्हें हटाने के लिए दिया गया है। ये पूरा मामला ही वीडियो को हटाने के लिए दिए आदेश पर अमल न करने का है, जिसे लेकर मीडिया में किसी भी तरफ से एक शब्द नहीं लिखा गया। हर तरफ, एकतरफा तौर पर सिर्फ एक्स के बयान को प्राथमिकता के साथ छापा गया, जिसका इस्तेमाल कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम ने अपने प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाने में किया। बहरहाल, अगर 13 जुलाई की शाम तक ये सारे ट्वीट्स और वीडियो नहीं हटाए गए, तब दिल्ली हाई कोर्ट अवमानना की कार्रवाई करता है, या कोई अन्य कदम उठाता है, अब इस पर सभी की निगाहें रहेंगी।

तेलंगाना के सरकारी स्कूल के हॉस्टल में परोसा गया छिपकली वाला नाश्ता, 35 बच्चे उल्टी-दस्त के बाद बीमार पड़े: अधिकारियों पर कार्रवाई

तेलंगाना के एक सरकारी स्कूल के हॉस्टल में उपमा का नाश्ता करने के बाद 35 छात्र बीमार पड़ गए। पूछताछ हुई तो पता चला कि उन्होंने नाश्ते में छिपकली पड़ी देखी थी। घटना मंगलवार (9 जून 2024) की है। छात्रों ने बताया कि उन्हें खाने के बाद उल्टी और दस्त के लक्षण दिखाई दिए। इसी के चलते वह बीमार पड़ गए।

बच्चों के बीमार पड़ने के बाद के बाद स्कूल के अधिकारियों ने तुरंत उन्हें चिकित्सा सहायता प्रदान की। वहीं खाने को भी जाँच के लिए भेजा गया। शुरुआती जाँच में सामने आया है कि खाना बनाने के दौरान छिपकली गलती से गिरी होगी, लेकिन इस गलती से चूँकि इतने बच्चे बीमार पड़ गए इसलिए भारत सरकार के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है।

शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि तेलंगाना राज्य सरकार ने सूचित किया है कि यह घटना तेलंगाना सरकार के मॉडल स्कूल के छात्रावास में हुई है। राज्य सरकार अपनी स्वयं की योजना के तहत मॉडल स्कूलों को नाश्ता उपलब्ध कराती है और यह पीएम पोषण योजना के अंतर्गत नहीं आती है। राज्य सरकार ने यह भी सूचित किया है कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ गंभीर कार्रवाई की है।

शिक्षा मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि पीएम पोषण योजना स्कूलों में गर्म पका हुआ मध्याह्न भोजन प्रदान करती है और सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सुरक्षा मानदंडों को सुनिश्चित करने और छात्रों के लिए ठीक से पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने के लिए उचित कदम उठाने की सलाह दी गई है।

बता दें कि ये हैदराबाद में हुई कोई पहली घटना नहीं है। हैदराबाद के सुल्तानपुरा स्थित जवाहरलाल नेहरू टेक्निकल यूनिवर्सिटी में भी इस तरह का मामला सामने आया था। हॉस्टल के मेस में परोसी गई चटनी के साथ कथिततौर पर चूहा तैयता मिला था। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद मामले में तमाम सवाल खड़े हुए थे। अब इस मामले में भी प्रश्न खड़े हो रहे हैं इसीलिए स्कूल मैनेजमेंट ने घटना की गहन जाँच करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने का वादा किया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन को कमला हैरिस में दिख रहे डोनाल्ड ट्रम्प, यूक्रेन के राष्ट्रपति में दिख रहे पुतिन: वीडियो आने के बाद हो रही बेइज्जती

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन के किस्म-किस्म के वीडियो सामने आते रहते हैं, जिसमें वो खोए-खोए से नज़र आते हैं। कभी वो बाकी लोगों को नज़रअंदाज़ कर विपरीत दिशा में मुड़ जाते हैं तो कभी किसी ओर अचानक ही चल निकलते हैं। इसी साल नवंबर में अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं और सामने रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प होंगे जो पहले भी राष्ट्रपति रह चुके हैं, ऐसे में जो बायडेन का स्वास्थ्य डेमोक्रेट्स के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है।

अब तो कुछ ऐसा हुआ है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन देश की उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की को ही पहचानने में नाकामयाब रहे। वो भी तब जब कमला हैरिस ने उनके साथ मिल कर ही ही चुनाव लड़ा था, और यूक्रेन को तो अमेरिका रूस से युद्ध के बीच करोड़ों डॉलर की मदद कर रहा है। असल में नया ड्रामा NATO नेताओं के समिट के दौरान हुए न्यूज़ कॉन्फ्रेंस में हुआ। पहले ही सवाल के जवाब में जो बायडेन ने कमला हैरिस को ‘उप-राष्ट्रपति ट्रम्प’ बता दिया।

असल में Reuters के पत्रकार ने जो बायडेन से पूछा था कि अगर वो इस चुनाव से हट जाते हैं तो क्या कमला हैरिस के पास डोनाल्ड ट्रम्प को हराने की क्षमता है? हालाँकि, बायडेन कई बार इनकार कर चुके हैं कि वो चुनाव से हट रहे हैं। सवाल के जवाब में बायडेन ने कहा, “देखिए, मैं उप-राष्ट्रपति ट्रम्प को उप-राष्ट्रपति बनने के लिए नहीं चुनता, अगर मुझे ऐसा लगता कि वो राष्ट्रपति बनने के योग्य नहीं हैं।” बता दें कि जो बायडेन 81 वर्ष के हैं और अमेरिका के सबसे उम्रदराज़ राष्ट्रपति बन गए हैं।

वाशिंगटन में NATO नेताओं की बैठक के बाद USA के राष्ट्रपति जो बायडेन ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की को दृढ़संकल्पित और साहसी बताते हुए उन्हें ‘राष्ट्रपति पुतिन’ कह कर संबोधित किया। जबकि, व्लादमीर पुतिन रूस के राष्ट्रपति हैं, जिसके साथ यूक्रेन का युद्ध चल रहा है। गलती का एहसास होते ही जो बायडेन ने कहा कि हम प्रेसिडेंट पुतिन को हराने वाले हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने भी जो बायडेन के ऐसे वीडियोज को लेकर उनका मजाक बनाया है।

पूजा खेड़कर कैसे बनी IAS, मोदी सरकार की समिति करेगी जाँच: मीडिया पर भड़की माँ, चुनाव लड़ चुके पिता के पास है 110 एकड़ जमीन

फर्जीवाड़े के आधार पर IAS बनने के आरोपों में घिरी पूजा खेडकर पर केंद्र सरकार ने एक्शन लिया है। पूजा खेडकर के IAS में चयन को लेकर जाँच होने जा रही है। इसको लेकर मोदी सरकार ने एक सदस्यीय कमेटी गठित की है। यह दो सप्ताह के भीतर अपनी जाँच रिपोर्ट केंद्र सरकार को देगी।

केंद्र सरकार के कार्मिक विभाग द्वारा जारी की गई एक प्रेस रिलीज में बताया गया है, “केंद्र सरकार ने सिविल सेवा परीक्षा-2022 और इससे पहले की परीक्षाओं की उम्मीदवार सुश्री पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर की उम्मीदवारी के दावों और अन्य जानकारियों की जाँच के लिए भारत सरकार के एडिशनल सेक्रेटरी स्तर के एक वरिष्ठ अधिकारी की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति 2 सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देगी।”

केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई इस समिति की रिपोर्ट के बाद पूजा खेडकर के OBC प्रमाण पत्र और मानसिक अक्षमता को लेकर किए गए दावों की सच्चाई बाहर आ सकेगी। उन्होंने अपने चयन के लिए खुद को नॉन क्रीमी लेयर OBC नॉन क्रीमी लेयर और मानसिक रूप से अक्षम बताया था।

पूजा खेडकर ने साल 2023 में IAS परीक्षा को पास किया था उसमें उनकी 841 रैंक आई थी। अपने आपको उन्होंने इस सिलेक्शन प्रोसेस में मानसिक रूप से बीमार होने का दावा भी किया था। हालाँकि बाद में जब मेडिकल चेक अप की बारी आई तो वो अपनी ही बीमारी का सत्यापन करवाने के लिए 6 बार नहीं गईं।

ऐसे में ये अब भी एक सवाल बना हुआ है कि अगर पूजा ने चेक अप कराने से मना किया तो फिर कैसे उनका सिलेक्शन हुआ। ये भी कहा जा रहा है कि 2021 में पूजा को OBC PwBD 1 में खेल प्राधिकरण में सहायक निदेशक के रूप में चुना गया था, लेकिन 2023 में, उन्होंने रहस्यमय तरीके से अपनी श्रेणी 4 एम PwBD 1 को PwBD 5 में बदल दिया और IAS के रूप में चयनित हो गईं।

वहीं उनके OBC आरक्षण के दावे पर भी प्रश्न उठे हैं। उन्होंने नॉन क्रीमी लेयर OBC के तौर पर आरक्षण लिया है। इस आरक्षण का लाभ लेने वालों की आय ₹8 लाख से कम होनी चाहिए। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि उनके माता पिता के पास करोड़ों की सम्पत्ति है। उनके पिता दिलीप खेडकर ने हाल ही में अहमदनगर से चुनाव लड़ा था जबकि उनकी माता वर्तमान में सरपंच हैं। उनके माता-पिता के पास ₹20 करोड़ की तो केवल कृषि भूमि ही है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि पूजा के पास खुद ₹17 करोड़ की सम्पत्ति है।

ऐसे में उनके OBC आरक्षण के दावे पर प्रश्न उठे हैं। पूजा खेडकर का यह मामला उनके द्वारा पुणे में अपने प्रशिक्षण के दौरान लग्जरी गाड़ी और केबिन की माँग किए जाने के बाद खुला है। पुणे कलेक्टर ने उनकी गलत माँगों के चलते उनकी शिकायत मुख्य सचिव को भेजी। अपने शिकायत पत्र में उन्होंने बताया था कि कैसे पूजा खेडकर वीआईपी ट्रीटमेंट पाने के लिए अधिकारियों को धमका रही हैं और परेशान कर रही हैं। उन्होंने अधिकारी अजय मोरे के चैंबर तक में कब्जा कर लिया था। वहीं अपनी निजी कार में वीआईपी नंबर लगाकर उसे चला रही थीं।

पूजा खेडकर के विषय में प्रश्न उठाने वालों पर उनकी माँ भी हमलावर हो गई हैं। पूजा खेडकर के पुणे स्थित घर के बाहर कवरेज करने पहुँचे मीडिया कर्मियों से पूजा की माँ ने अभद्रता की। पूजा की माँ ने मीडियाकर्मियों को जेल में डालने तक की धमकी दी। आरोपों के सामने आने के बाद पूजा खेडकर का पुणे से वाशिम ट्रांसफर कर दिया गया था जहाँ उन्होंने ड्यूटी ज्वाइन कर ली है।

‘अग्निवीरों’ के लिए खुशखबरी: बिना फिजिकल टेस्ट RPF, BSF और CISF में 10% आरक्षण, आयु सीमा में भी छूट

भारतीय सेना में 4 वर्ष की अग्निवीर के तौर पर सेवा देने के बाद केन्द्रीय सुरक्षाबलों में नौकरी के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को 10% आरक्षण दिया जाएगा। इस आरक्षण को तीन केन्द्रीय सुरक्षाबलों ने लागू भी कर दिया है। इस आरक्षण का ऐलान केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने 2022 में किया था।

रेलवे पुलिस बल (RPF), सीमा सुरक्षा बल (BSF) और केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने अग्निवीरों को 10% आरक्षण देने के निर्णय को लागू कर दिया है। यह भी बताया गया है कि पूर्व अग्निवीरों को इन भर्तियों में 10% सीटों पर आरक्षण के अलावा शारीरिक मापदंडों में भी छूट मिलेगी।

इस मामले को लेकर RPF के डायरेक्टर जनरल मनोज यादव ने बताया, “भविष्य में RPF में जो भी भर्ती होगी, उसमें 10% आरक्षण का प्रावधान पूर्व अग्निवीरों को दिया जाएगा। ना सिर्फ उन्हें 10% आरक्षण बल्कि उन्हें आयु सीमा में भी छूट दी जाएगी।”

उन्होंने बताया कि 2026-27 में जो अग्निवीर सेना से सेवा पूरी करके आएँगे उन्हें 5 वर्ष की छूट मिलेगी और इसके बाद के बैच को 3 वर्ष की छूट मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि RPF भर्ती में पूर्व अग्निवीरों को कोई भी शारीरिक मापदंड का टेस्ट नहीं देना होगा।

वहीं इस मामले पर CISF की डायरेक्टर जनरल नीना गुप्ता ने कहा, “CISF ने पूर्व अग्निवीरों की CISF में भर्ती हेतु सभी तैयारियाँ कर ली हैं। इसके अंतर्गत CISF में कॉन्स्टेबल के 10% पद अग्निवीरों के लिए भर्ती किए गए हैं। इसके अलावा उन्हें शारीरिक परीक्षण और आयु सीमा में छूट प्रदान की गई है। इससे CISF के ऑपरेशन में भी बेहतरी आएगी।”

BSF के डायरेक्टर जनरल नितिन अग्रवाल ने बताया, “इन अग्निवीरों ने 4 साल मेहनत मशक्कत की होगी, ऐसे में यह BSF के लिए एकदम अनुरूप होंगे। हमें तैयार सेना मिलेंगे, ऐसे में इन्हें हम जल्दी सेना में तैनात कर सकेंगे। जैसे ही अग्निवीर आते हैं, हम इनकी भर्ती करेंगे। जितनी हमारी भर्तियाँ होंगी, उसमें 10% पद आरक्षित होंगी और आयु की छूट होगी।”

गौरतलब है कि अग्निवीरों को सेना में 4 वर्ष के लिए भर्ती किया जा रहा है। सेना में भर्ती होंगे वाले अग्निवीरों में से 25% को 4 साल के बाद भी सेवा देने के लिए रखा जाएगा जबकि बाकियों को अन्य फायदों के साथ सेवानिवृत्त कर दिया जाएगा। सरकार ने इन अग्निवीरों के कल्याण के लिए ही केन्द्रीय सुरक्षाबलों में आरक्षण का यह फार्मूला 2022 में लागू किया था। अब इस पर अमल किया जा रहा है।

भगवान राम को माँ की गाली देते शेयर की रील: काँवड़ यात्रा से पहले तनाव फैलाने में लगे आमिर अली के खिलाफ यूपी पुलिस ने दर्ज की FIR, हिंदू संगठनों ने किया विरोध

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में मुहर्रम और काँवड़ यात्रा से पहले सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश का मामला सामने आया है। यहाँ आमिर अली नाम के युवक पर सोशल मीडिया पर भगवान राम के अपमान का आरोप लगा है। बुधवार (10 जुलाई, 2024) को हिन्दू संगठनों ने आमिर के खिलाफ थाने में तहरीर दे कर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। आमिर के खिलाफ FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी गई है।

यह मामला बरेली के थाना क्षेत्र बारादरी का है। यहाँ 10 जुलाई (बुधवार) को सब-इंस्पेक्टर पवन कुमार ने अपने थाने में तहरीर दी है। तहरीर में उन्होंने बताया है कि 9 जुलाई (मंगलवार) को उन्होंने हिमांशु पटेल नाम के ‘X’ हैंडल पर एक वीडियो देखा। इस वीडियो को बेहद आपत्तिजनक बताते हुए हिमांशु पटेल ने लिखा है कि इसमें भगवान राम के लिए बेहद आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया है। हिमांशु ने आरोप लगाया है कि आमिर अली ऐसे वीडियो शेयर कर के शहर का माहौल खराब करना चाहता था।

सब-इंस्पेक्टर पवन कुमार ने शिकायतकर्ता की शिकायत की जाँच की। उन्होंने आरोपों को सही पाया। पवन कुमार के मुताबिक, आपत्तिजनक वीडियो अकबर अली के बेटे आमिर ने शेयर किया था। आमिर बरेली के बारादरी क्षेत्र का ही रहने वाला है। पुलिस का आरोप है कि आमिर अली अपने फेसबुक पर ऐसे वीडियो डाल कर मुहर्रम और काँवड़ यात्रा से पहले तनाव फैलाना चाहता है। शिकायत में यह भी बताया गया है कि आमिर अली की हरकत से न सिर्फ एक वर्ग की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई है बल्कि उनमें काफी नाराजगी भी है।

जिस वीडियो को आमिर अली ने अपने फेसबुक पर शेयर किया है उसमें 3 लोग खड़े दिखाई दे रहे हैं। इन तीनों ने मिल कर एक रील बनाई है। रील में भगवान राम को माँ की गालियाँ दी गईं हैं। साथ ही इसको मजाकिया अंदाज में पेश किया गया है। बरेली पुलिस ने इस तहरीर पर आमिर अली को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत दर्ज हुई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिस ने बताया है कि मामले की जाँच और जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

‘बहू सब कुछ लेकर चली गई’: क्या है NOK, जिसमें बदलाव माँग रहे बलिदानी कैप्टन अंशुमान सिंह के माता-पिता, ‘कीर्ति चक्र’ लेती पत्नी का वीडियो हुआ था वायरल

हाल ही में बलिदानी कैप्टन अंशुमान सिंह को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘कीर्ति चक्र’ से सम्मानित किया। उनकी पत्नी स्मृति ने उनकी तरफ से ये सम्मान ग्रहण किया, साथ में कैप्टन अंशुमान सिंह की माँ मंजू सिंह भी थीं। देवरिया के रहने वाले अंशुमान सिंह ने सियाचिन स्थित आर्मी कैम्प में आग लगने के बाद अपने जान की परवाह किए बिना 4 साथियों को बचाया था। ‘कीर्ति चक्र’ ग्रहण करने के बाद स्मृति सिंह ने जो कहा था, उसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे और लोगों ने बलिदानी कैप्टन को श्रद्धांजलि देते हुए परिवार के प्रति संवेदना जताई थी।

स्मृति सिंह ने बताया था कि कैसे अंशुमान सिंह कहते थे कि वो साधारण मृत्यु नहीं मरेंगे, वो छाती पर गोली खाएँगे। स्मृति ने बताया था कि अंशुमान से उनकी मुलाकात कॉलेज के पहले ही दिन हुई थी, पहली नज़र में ही दोनों में प्यार हो गया था और 8 वर्षों तक लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में रहने के बाद दोनों ने शादी कर ली थी। अंशुमान सिंह के बलिदान से 1 दिन पहले ही दोनों में खूब बातें हुई थीं, वो प्लानिंग कर रहे थे कि उनकी आगे की ज़िंदगी कैसी होगी – बच्चों के जन्म से लेकर घर बनवाने तक की बातें हुईं।

अगले ही दिन उनके निधन का समाचार मिला। पूरे देश ने उनकी कहानी सुन कर उनकी वीरता को नमन किया। अब वीरगति को प्राप्त सैन्य अधिकारी के माता-पिता मीडिया के सामने आए हैं और उन्होंने जो कहा है वो चर्चा के साथ-साथ विवाद का भी विषय बन रहा है। एक पारिवारिक व निजी मामला सतह पर आ गया है। ध्यान देने वाली बात है कि कुछ दिनों पहले कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी भी इन दोनों से मिले थे। मंजू सिंह ने ‘अग्निवीर’ योजना का विरोध भी किया था।

बलिदानी कैप्टन के पिता ने कहा कि राहुल गाँधी से बात करने के पीछे उनका जो उद्देश्य था, उस बारे में वो केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को भी बता चुके हैं। उन्होंने कहा, “NOK को लेकर जो भारतीय सेना के निर्धारित मापदंड हैं, वो ठीक नहीं हैं। 5 महीने की शादी थी, उनका कोई बच्चा नहीं है। माँ-बाप के पास सिर्फ उनकी तस्वीर है जो पीछे लटकी हुई है। वो (स्मृति सिंह) अपना पता भी बदलवा चुकी हैं, हमारे पास क्या है? NOK के नियमों में बदलाव होना चाहिए।”

उन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध की बात करते हुए कहा कि उसके बाद 67-33% वाला बदलाव हुआ था, इसमें होना चाहिए कि इसकी ठीक से परिभाषा हो – पत्नी परिवार में रहेंगी तो क्या होगा, बच्चे होंगे या नहीं होंगे तो क्या होगा, वो चली जाएँगी तो क्या होगा। उन्होंने कहा कि ये न हो कि पुरानी प्रथा चलती रहे। उन्होंने कहा कि अंशुमान सिंह की माँ ‘कीर्ति चक्र’ की सह-प्राप्तकर्ता हैं, लेकिन उनके पास बेटे की प्रतिमा पर लगाने के लिए वो चक्र नहीं है।

उन्होंने बताया कि राहुल गाँधी ने राजनाथ सिंह से इस संबंध में बात करने का आश्वासन दिया है। वहीं मंजू सिंह ने कहा, “बहुएँ भाग जाती हैं। बहुत से ऐसे मामले आ रहे हैं जहाँ बहुएँ माँ-बाप को छोड़ कर भाग जा रही हैं। मेरा तो हो गया, लेकिन आगे किसी माँ-बाप को हमलोगों की तरह दुःख न हो।” बता दें कि NOK का अर्थ होता है ‘नेक्स्ट ऑफ किन’, सैनिक के वीरगति को प्राप्त होने के बाद जो NOK होता है उसे ही मुआवजे की धनराशि व अन्य फायदे प्राप्त होते हैं।

इस मामले को समझने के लिए हमें सेना में काम कर रहे एक अधिकारी से बातचीत की, जिन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब कोई शख्स सेना में शामिल होता है तो उस प्रक्रिया के दौरान उससे विल भी भरवाया जाता है। इनमें से अधिकतर युवा व अविवाहित होते हैं, ऐसे में इसमें उनके अभिभावक ही सामान्यतः नॉमिनी होते हैं। सेना में एक ‘पार्ट 2’ नाम का दस्तावेज होता है, जिसमें सैनिक को अपने जीवन के घटनाक्रम के बारे में बताना होता है।

इसमें लंबी छुट्टियाँ इत्यादि की भी जानकारी देनी होती है। जब जवान की शादी होती है, तो इसी ‘पार्ट 2’ में उसे सूचित करना होता है कि उसका विवाह हो गया है और इससे संबंधित जानकारियाँ वो वहाँ भरते हैं। सेना में कार्यरत उक्त अधिकारी ने बताया कि अब एक नया ट्रेंड आ गया है कि जब जवान की शादी होती है तो सामान्यतः वह ‘पार्ट 2’ में सूचनाएँ भरने के बाद अपने विल में भी बदलाव करता है। सामान्यतः अपनी पत्नी को शत-प्रतिशत नॉमिनी बना दिया जाता है।

ऐसा कोई बाध्यकारी नियम नहीं है, सामान्यतः ऐसा होता है। कुछ जवान ऐसे भी आते हैं जो 70:30 का फॉर्मूला रखते हैं, यानी 70% नॉमिनी पत्नी होती हैं और 30% माता-पिता। ये सैनिक के विवेकाधिकार पर निर्भर करता है, ये सरकार नहीं बल्कि वही तय करते हैं। नियम के तहत तो 50:50 फॉर्मूले की व्यवस्था भी है, लेकिन कुछ ही जवान इसे चुनते हैं। इसके लिए उन्हें CO से अनुमति लेनी होती है। अतः, ये जवान पर ही होता है कि उसके वीरगति को प्राप्त होने के बाद मुआवजे में से परिवार में किसे क्या मिलेगा।

कैप्टन अंशुमान सिंह के मामले में उनके पिता खुद एक पूर्व-सैनिक हैं, ऐसे में उन्हें कैंटीन व मेडिकल सुविधाएँ नियम के तहत प्राप्त हो रही हैं। बता दें कि ‘पार्ट 2’ में ही प्रमोशन, ट्रांसफर-पोस्टिंग, अनुशासनात्मक कार्यवाही व अन्य सूचनाएँ भी होती हैं। कमांडिंग ऑफिसर द्वारा इसे मैनेज किया जाता है। वहीं ग्रीटिंग्स, सम्मान व बधाई सन्देश जैसी अन्य चीजें ‘पार्ट 1’ का हिस्सा होती हैं, जिससे जवानों का उत्साह बढ़ा रहे। ‘पार्ट 2’ के बारे में कहा जाता है कि सेना में अनुशासन बनाए रखने के लिए इसे ज़रूरी माना जाता है।

बीवी ने मुस्लिम बनने से किया इनकार तो एजाज ने शोएब के साथ मिल कर दिया सर कलम, झाड़ियों में मिली थी प्रिया की लाश: हाईकोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस्लाम ना मानने पर एक हिन्दू लड़की प्रिया की गला काट कर हत्या करने वाले मुस्लिम सह आरोपित को जमानत देने से मना कर दिया। इलाहाबाद हाई कोर्ट में एजाज अहमद ने अपनी जमानत याचिका लगाई थी, जिसे रद्द कर दिया गया। कोर्ट ने मामले में राज्य का पक्ष मान लिया।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के सामने शोएब ने जमानत की याचिका लगाई हुई थी। शोएब इस मामले में सह आरोपित है। इस मामले में मुख्य आरोपित एजाज को कुछ दिन पहले जमानत दे दी गई थी, इसी आधार पर एजाज ने जमानत की माँग की थी। हालाँकि, राज्य की तरफ से उसकी जमानत का विरोध किया गया।

राज्य ने कहा कि एजाज ने अपनी जमानत याचिका में कई जानकारियाँ छुपाई थीं। इसी को आधार मानते हुए हाई कोर्ट ने एजाज को कोई भी राहत देने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उसे जमानत देने के लिए कोई मजबूत आधार नहीं दिखता।

क्या है पूरा मामला?

सोनभद्र जिले के प्रीत नगर इलाके में 21 सितंबर,2020 की शाम को झाड़ियों में एक युवती की सिर कटी लाश मिली थी। इसके बाद पुलिस ने युवती का सिर भी बरामद किया था, उसकी पहचान चोपन थाना क्षेत्र निवासी प्रिया सोनी के रूप में हुई थी। पुलिस का इस मामले में कहना था कि लगभग 1 महीने पहले प्रिया ने पड़ोस में रहने वाले एजाज़ नाम के युवक से कोर्ट मैरिज की थी। युवती के परिजन इस बात से बिलकुल भी सहमत नहीं थे। 

कुछ दिन तक दोनों के बीच हालात सामान्य थे। थोड़े ही समय बाद एजाज़ ने प्रिया पर धर्म परिवर्तन इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया लेकिन युवती ने इससे साफ़ इनकार कर दिया था। इस मुद्दे पर प्रिया और एजाज़ के बीच काफी विवाद हुआ था, एजाज़ ने इस बात पर कई बार प्रिया से मारपीट भी की थी। आखिरकार एजाज़ ने अपने एक साथी शोएब के साथ मिल कर प्रिया का गला काट कर हत्या कर दी और शव झाड़ियों में फेंक दिया। 

इस मामले में पुलिस की जाँच पूरी होने के बाद एसपी आशीष श्रीवास्तव ने घटनाक्रम की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था, “एजाज़ के परिवार वाले प्रिया को बिना धर्म परिवर्तन के स्वीकार नहीं करना चाहते थे। इसके चलते एजाज़ ने प्रिया पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाना शुरू किया। एजाज़ ने प्रिया को एक लॉज में बंद करके रखा था, वह प्रिया पर लगातार धर्म परिवर्तन का दबाव बनाता था। जब वह अपने इरादों में कामयाब नहीं हुआ तो उसने चोपन में दोस्त शोएब को बुलाया और उसके साथ मिल कर प्रिया का गला रेत दिया।”

‘शरीर पर कई घाव, ठुड्डी के बगल में छेद, आँख-नाक-दाँत से बहता खून, मुड़ा हुआ हाथ’: MLA नितेश राणे पुलिस को देंगे सबूत, 14वीं मंजिल से गिरी थी सुशांत की मैनेजर

दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर रहीं दिशा सालियान की संदिग्ध मौत के मामले में अब मुंबई पुलिस ने अब भाजपा विधायक नितेश राणे को नोटिस जारी किया है। मुंबई पुलिस ने कहा है कि नितेश राणे शुक्रवार (12 जुलाई, 2024) को पूछताछ के लिए हाजिर हों। पुलिस उनसे पूछेगी कि उनके पास इस घटना को लेकर क्या सबूत हैं, क्योंकि वो मीडिया में ऐसे दावे कर चुके हैं। नितेश राणे ने कहा कि उन्हें समन प्राप्त हो गया है। उन्होंने फिर से दोहराया कि वो पहले दिन से ही ये कह रहे हैं कि ये मामला हत्या का है।

नितेश राणे ने कहा कि वो और उनके पिता नारायण राणे पुलिस के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं, इससे पहले जो MVA की सरकार थी उसने इस मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की ताकि वो आदित्य ठाकरे को बचा सके। नितेश राणे ने कहा कि अब जब सरकार बदल गई है, पारदर्शी जाँच होगी। उन्होंने कहा कि वो पुलिस को सच्चाई बताएँगे। बता दें कि ‘महा विकास अघाड़ी’ सरकार में उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे और उनके बेटे आदित्य मंत्री। नितेश राणे का कहना है कि आदित्य भी उस पार्टी में मौजूद थे।

मुंबई पुलिस ने दिसंबर 2023 में इस मामले की जाँच के लिए SIT का गठन किया था। 8 जून, 2020 को दिशा सालियान को मृत पाया गया था। इसके मात्र 6 दिन बाद ही सुशांत सिंह राजपूत की भी संदिग्ध मौत हो गई थी। बांद्रा स्थित फ़्लैट में वो फंदे पर लटके हुए मिले थे। वहीं दिशा सालियान मलाड स्थित एक इमारत (गैलेक्सी रीजेंट बिल्डिंग) के 14वीं फ्लोर से नीचे कूद गई थीं। इन दोनों ही मौतों को आत्महत्या बताया गया था। सुशांत सिंह राजपूत जहाँ 34 वर्ष के थे, वहीं दिशा सालियान की उम्र मात्र 28 वर्ष थी।

एक चश्मदीद ने आरोप लगाया था कि घटना की रात दिशा से चार लोगों ने रेप किया था। बाद में उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी बताया था कि इस मामले में पुलिस को नए सबूत मिले हैं। एंबुलेंस के ड्राइवर पंकज सैदन ने रिपब्लिक भारत के साथ बातचीत में कहा था, “दिशा सालियान के पूरे शरीर पर घाव थे। उनकी ठुड्डी के बगल में 1.5 इंच का छेद था। उनकी आँख, नाक, दाँत से खून बह रहा था। उनका हाथ भी मुड़ गया था।”