Home Blog Page 839

आज ही काटा गया था कन्हैया लाल का गला, न्याय की प्रतीक्षा में 2 साल बाद भी 3 प्रण पर अटल है बेटा: जेल में भी हत्यारों के चेहरे पर शिकन नहीं, मिलने आते रहते हैं परिजन

तारीख थी 28 जून की। साल था 2022 का। शहर था राजस्थान का उदयपुर। मालदास स्ट्रीट की सुप्रीम टेलर्स में दो लोग आते हैं। कपड़ों की नाप देने। जैसे ही टेलर नाप लेने लगता है कस्टमर बनकर आए दोनों लोग हमला कर देते हैं। बर्बर तरीके से टेलर  (Kanhaiyalal Taylor Murder) का गला रेत देते हैं।

इस टेलर का नाम था- कन्हैया लाल तेली। उनकी हत्या को दो साल हो चुके हैं। मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने बीजेपी की पूर्व नेता नुपूर शर्मा का समर्थन करने के कारण उनकी हत्या की थी। इस हत्या (Udaipur Kanhaiyalal Murder) ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था। इस हत्या का खौफ आप इस बात से भी समझ सकते हैं कि दो साल बाद भी मालदास स्ट्रीट की उस गली में पुरानी रौनक नहीं लौटी है, जहाँ कन्हैया लाल की दुकान थी।

दूसरी ओर कन्हैया लाल परिवार आज भी न्याय की प्रतीक्षा में है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कन्हैया लाल के बड़े बेटे यश साहू आज भी उन तीन प्रण का पालन कर रहे हैं जो उन्होंने पिता की हत्या के बाद लिए थे। यश तेली ने प्रण लिया था कि हत्यारों को जब तक फाँसी नहीं मिलती वे पिता की अस्थियाँ विसर्जित नहीं करेंगे। साथ ही नंगे पैर रहने और बाल नहीं कटवाने का भी प्रण लिया था।

एनडीटीवी राजस्थान को यश ने बताया, “इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई होनी चाहिए थी। हमें उम्मीद थी कि तीन से 6 महीने में न्याय मिल जाएगा। लेकिन 2 साल बाद भी हमें न्याय का इंतजार है।” वहीं दैनिक भास्कर को यश ने बताया कि हत्या के बाद से जाँच के कारण उनके पिता की दुकान बंद थी। जब एनआईए ने उन्हें दुकान की चाबी सौंपी तो वो दुकान से वह सिलाई मशीन लेकर घर आ गए जो पिता ने उनके जन्म से पहले खरीदी थी। वे कहते हैं, “उस सिलाई मशीन को जब भी देखता हूँ तो मुझे पापा की याद आ जाती है। ऐसा लगता है कि पापा हमारे आसपास हैं।”

रिपोर्ट में बताया गया है कि ​मालदास स्ट्रीट की जिस गली में कन्हैया लाल की दुकान थी, वहाँ आज भी 10 से ज्यादा दुकानें बंद है। कारोबारी आज भी डरे हुए हैं। उनके बिजनेस में भी उस घटना के बाद गिरावट आई है। कन्हैया लाल की हत्या की जाँच NIA कर रही है। पीड़ित परिवार को राज्य सरकार ने सुरक्षा दे रखी है। 24 घंटे घर पर पुलिस की तैनाती रहती है। लेकिन हत्यारों को अब तक सजा नहीं मिलने से कन्हैया लाल की पत्नी भी मायूस हैं। वे कहती हैं कि बेटे को ​तपती गर्मी में नंगे पैर ड्यूटी पर जाते देखती हूँ तो मन व्यथित हो जाता है। अब इस मामले में और देरी नहीं होनी चाहिए। जल्द से जल्द सुनवाई पूरी कर हत्यारों को फाँसी दी जानी चाहिए।

ईटीवी भारत की रिपोर्ट के अनुसार रियाज और गौस मोहम्मद सहित इस मामले के 8 आरोपित अभी अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद हैं। इस मामले में एक आरोपित को जमानत भी मिल चुकी है। सभी आरोपितों को अलग-अलग कोठरी में रखा गया है और सीसीटीवी कैमरों के जरिए उनकी निगरानी की जाती है।

जेल सुपरिटेंडेंट के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि आरोपितों में से कुछ अब अपनी करतूत पर कभी-कभी रोने लगते हैं। लेकिन कुछ की बॉडी लैंग्वेज में अभी भी बदलाव नहीं आया है। आरोपितों से मिलने के लिए उनके परिवार के लोग भी आते रहते हैं।

T20 World Cup 2024 के खिताबी मुकाबले में भारत, इंग्लैंड को फिरकी के जाल में फंसाकर 68 रनों से हासिल की बड़ी जीत: फाइनल में दक्षिण अफ्रीका से टक्कर

वेस्टइंडीज-USA में खेले जा रहे टी-20 क्रिकेट विश्व कप के दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने इंग्लैंड को 68 रनों के बड़े अंतर से हरा दिया है। भारतीय टीम ने 171 रन बनाते हुए इंग्लैंड के सामने 172 रनों का लक्ष्य रखा था, जिसके जवाब में पूरी इंग्लिश टीम को फिरकी के जाल में फँसाकर महज 103 रनों पर समेट दिया। अक्षर पटेल को मैन ऑफ द मैच चुना गया।

इंग्लैंड के लिए हैरी ब्रूक ने सर्वाधिक 25 रनों का योगदान दिया, तो भारतीय टीम कुलदीप यादव ने 4 ओवरों में महज 19 रन देकर तीन विकेट और अक्षर पटेल ने 4 ओवरों में 23 रन देकर 3 विकेट निकाले। इस मैच में भारतीय स्पिनर पूरी तरह से हावी रहे। इसी के साथ भारतीय टीम ने साल 2022 के सेमीफाइनल मुकाबले की हार का बदला भी ले लिया है। तब इंग्लैंड ने भारत को 10 विकेट से हराया था और बाद में चैंपियन बना था। अब फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम बारबाडोस में दक्षिण अफ्रीकी टीम से भिड़ेगी।

भारत ने रखा था 172 रनों का लक्ष्य, कभी मैच में दिखा नहीं इंग्लैंड

भारतीय टीम द्वारा रखे गए 172 रनों के लक्ष्य के सामने इंग्लैंड की टीम एक बार भी सहज नहीं दिखी। इंग्लिश टीम का पहला विकेट 26 रनों के योग पर गिरा, जब पहले बदलाव के तौर पर बॉलिंग पर आए अक्षर पटेल ने इंग्लैंड के कप्तान जोस बटलर को रिवर्स स्वीप की कोशिश के दौरान ऋषभ पंत के हाथों कैच करा दिया। बटलर 15 गेंदों पर आक्रामक 23 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद जसप्रीत बुमराह ने दूसरे ओपनर फिल साल्ट को 5 रनों के निजी स्कोर पर क्लीन बोल्ड कर दिया। इंग्लैंड का दूसरा विकेट 34 रनों के कुल योग पर गिरा। इसके तुरंत बाद 35 रनों के कुल योग पर ही अक्षर पटेल ने अपना दूसरा विकेट निकालते हुए जॉनी बैरिस्टॉ को क्लीन बोल्ड कर दिया, वो खाता भी नहीं खोल सके। इसके बाद पूरी इंग्लिश टीम की हालत ‘तू चल, मैं आया’ जैसी हो गई।

इंग्लैंड का चौथा विकेट 46 रनों के कुल योग पर गिरा। उनका विकेट भी अक्षर पटेल ने लिया। इसके बाद बॉलिंग के लिए आए कुलदीप यादव ने लगातार तीन विकेट लेकर अंग्रेजों की कमर ही तोड़ दी। रही सही कसर उनकी विकेटों के बीच में खराब दौड़ ने पूरी कर दी। इंग्लैंड के आठवें और नौंवे नंबर के बल्लेबाज रन आउट हो गए। पूरी इंग्लिश टीम 16.4 ओवरों में महज 103 रनों पर ऑल आउट हो गई। भारतीय टीम के लिए कुलदीप-अक्षर ने तीन-तीन विकेट लिए, तो जसप्रीम बुमराह ने 2 विकेट लिए। वहीं, 2 खिलाड़ी रन आउट हुए।

भारत ने खराब शुरुआत से उबरते हुए खड़ा किया बड़ा स्कोर

इससे पहले, इंग्लैंड की टीम ने टॉस जीता और भारतीय टीम को बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया। भारतीय टीम की भी शुरुआत खराब रही। विराट कोहली सिर्फ एक छक्का मार कर अगली ही गेंद पर बोल्ड हो गए। विराट कोहली ने महज 9 रन बनाए, वहीं पंत 4 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन इसके बाद कप्तान रोहित शर्मा (57) और सूर्य कुमार यादव (47) ने तीसरे विकेट के लिए बहुमूल्य 73 रन जोड़े। टीम के कुल 113 रनों के स्कोर पर रोहित शर्मा आउट हो गए। रोहित ने अपनी पारी में 6 चौके और 2 छक्के लगाए। इसके तुरंत बाद ही सूर्य कुमार यादव भी आउट हो गए। वहीं, शिवम दुबे खाता खोले बगैर पहली गेंद पर आउट हो गए। हालाँकि निचले क्रम के बल्लेबाजों ने अच्छा संघर्ष किया और टीम का स्कोर 171 रनों तक पहुँचा।

मध्य क्रम और निचले मध्य क्रम से हार्दिक पांडया ने 13 गेदों पर 23 रनों की बहुमूल्य पारी खेली, तो रविंद्र जड़ेजा 9 गेंदों पर 17 रन बनाकर नाबाद रहे। अक्षर पटेल 6 गेंदों पर 10 रन बनाकर आउट हुए और टीम को 171 रनों तक पहुँचा। इंग्लैंड के लिए क्रिस जॉर्डन ने सर्वाधिक 3 विकेट लिए। अक्षर पटेल को उनके आल-राउंड प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया। उन्होंने इंग्लैंड के टॉप ऑर्डर को तहस-नहस कर दिया।

इसी के साथ भारतीय टीम फाइनल मुकाबले में प्रवेश कर गई है, जहाँ उसका मुकाबला दक्षिण अफ्रीकी टीम से होगा। दक्षिण अफ्रीका की टीम पहली बार किसी आईसीसी ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में पहुँची है। उसने सेमीफाइनल मुकाबले में अफगानिस्तान की टीम को 9 विकेट से हराकर फाइनल मुकाबले में जगह बनाई है।

पुरुषों के खिलाफ ना हो ‘शादी का वादा करके रेप करने’ का दुरुपयोग: मद्रास हाई कोर्ट बोला- ये अदालत की जिम्मेदारी; राहुल गाँधी को किया बरी

मद्रास हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कोर्ट इस बात ध्यान रखें कि शादी के वादे के सहारे रेप वाले मामलों का इस्तेमाल पुरुषों के खिलाफ ना हो। हाई कोर्ट ने कहा कि पुरुषों को महिलाओं से जुड़े दुष्ट लोगों से बचाना कोर्ट का कर्तव्य है। कोर्ट ने इसी के साथ ही ऐसे ही एक मामले में आरोपित राहुल गाँधी नाम के शख्स को निर्दोष करार दिया।

मद्रास हाई कोर्ट ने यह टिप्पणियाँ एक मामले की सुनवाई के दौरान की जिसमें एक महिला ने राहुल गाँधी नाम के एक शख्स (कॉन्ग्रेस नेता नहीं, अन्य) पर शादी का वादा करके रेप करने के आरोप लगाए थे। महिला का आरोप था की उससे शादी का वादा करके संबंध बनाने के लिए दबाव डाला गया था।

इस मामले में राहुल गाँधी के खिलाफ बलात्कार और धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इन आरोपों को तथ्यपरक नहीं पाया और राहुल गाँधी को निर्दोष करार दिया। कोर्ट ने इस दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ भी की।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एम धन्धापानी ने कहा, “इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि झूठे वादों के बहाने महिलाओं का गलत तरीके से शोषण किया जाता है। इसमें कभी उनकी सहमति से भी और कई मामलों में उनकी सहमति के खिलाफ या तो मीठी-मीठी बातों से या फिर दबाव से पुरुषों की यौन इच्छाओं को संतुष्ट करना भी शामिल है।”

कोर्ट ने आगे कहा, “लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता। यह नहीं कहा जा सकता कि केवल पुरुष ही महिलाओं का दुरुपयोग करते हैं बल्कि कई कानूनी मामलों में महिलाओं से जुड़े दुष्ट लोग भी अपने लाभ के लिए कानून का दुरुपयोग करते हैं। इसलिए इस तरह के मामलों में कोर्ट पर दोहरा कर्तव्य होता है कि न केवल यह देखे कि महिलाओं का दुरुपयोग न हो, बल्कि पुरुषों के खिलाफ भी कानून का दुरुपयोग न हो।”

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में महिला को पहले ही पता था कि आरोपित शादीशुदा है, ऐसे में शादी नहीं हो सकती, तब फिर शादी के वादे का दावा नहीं टिकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपित को यह नहीं मालूम था कि पीड़िता मात्र शादी के भरोसे ही उसके साथ संबंध बना रही है। ऐसे में उसके खिलाफ रेप की सजा का मामला नहीं बनता।

मध्य प्रदेश में CAA के तहत 3 को मिली नागरिकता, CM मोहन यादव ने दिए प्रमाण पत्र: 2 पाकिस्तानी और 1 बांग्लादेशी बने भारतीय नागरिक

पाकिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए तीन लोगों को भारत की नागरिकता मिली है। इन तीनों को मध्य प्रदेश सरकार ने नागरिकता दी है। मध्य प्रदेश में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत नागरिकता लेने वाले यह पहले तीन आवेदक हैं।

इन तीनों को राज्य मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राजधानी भोपाल के सचिवालय में नागरिकता प्रदान की। नागरिकता पाने वालों में दो पाकिस्तानी आवेदकों समीर मेलवानी (12) और संजना मेलवानी (18) और एक बांग्लादेशी आवेदक राखी दास हैं। इन तीनों को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नागरिकता के प्रमाण पत्र सौंपे।

सीएम यादव ने राज्य में इन तीनों का स्वागत किया और यह भी कहा कि वह राज्य में आने वाले अन्य ऐसे लोगों का भी स्वागत करेंगे। उन्होंने कहा, “मैं इनका मध्य प्रदेश में स्वागत करता हूँ। हम यहाँ आने वाले अन्य लोगों का भी स्वागत करेंगे। आज हमें खुशी है कि दो युवा हमारे नागरिक बन रहे हैं और बांग्लादेश से आया एक परिवार हमारा नागरिक बन रहा है। आपको प्रशासन और सरकार की ओर से हर तरह की मदद मिलेगी।”

नागरिकता प्रमाण पत्र मिलने के बाद बांग्लादेश से आई राखी दास ने खुशी जताई। वह आठ साल पहले पढ़ाई के लिए बांग्लादेश से भोपाल आईं थीं। दास ने कहा, “यह मेरे लिए ख़ुशी की बात है कि मुझे भारतीय नागरिकता मिल गई है। अब से मैं यहाँ परीक्षा दे सकती हूँ और साथ ही सरकारी नौकरी के लिए प्रयास कर सकती हूँ। मैं बांग्लादेश से PHD करने के लिए यहाँ आई थी।”

दास ने बांग्लादेश में आने वाली समस्याओं के बारे में भी बात की और कहा कि वहाँ हिंदू महिलाओं के लिए थोड़ी समस्या है और उन्हें पढ़ाई और नौकरी करने की छूट नहीं मिलती। उन्होंने कहा, “बांग्लादेश में सब कुछ ठीक है, लेकिन हिंदू महिलाओं के लिए थोड़ी समस्या है। दरअसल, मुझे भारत में पढ़ाई और नौकरी के लिए जो स्वतंत्रता मिलती है, वह मुझे बांग्लादेश में नहीं मिली।”

वहीं पूर्व में पाकिस्तान की नागरिक और अब में भोपाल में रहने वाली संजना मेलवानी ने भारत की नागरिकता प्राप्त करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया। संजना ने कहा, “मैं पीएम मोदी को धन्यवाद कहना चाहूँगी कि मुझे CAA के माध्यम से भारतीय नागरिकता मिली। मैं खुश हूँ और अब मैं गर्व से कह सकती हूँ कि मैं एक भारतीय हूँ।”

संजना मेलवानी के पिता प्रदीप कुमार मेलवानी ने कहा, “मुझे 2012 में भारतीय नागरिकता मिल गई थी, लेकिन बच्चों (संजना मेलवानी और समीर मेलवानी) को नागरिकता नहीं मिली थी। अब मेरा परिवार पूरा हो गया है। पहले नागरिकता मिलने में कम से कम 2-3 साल लगते थे। हमने मई में बच्चों की नागरिकता के लिए आवेदन किया था और अब हमें प्रमाण पत्र मिल गया है। अब प्रक्रिया बहुत सरल हो गई है और इससे दूसरों को भी फायदा होगा।”

गौरतलब है कि भारत सरकार ने नागरिकता संसोधन विधेयक को 2019 में ही पारित कर दिया था और इस साल मार्च से इसे कानून के तौर पर लागू कर दिया। सीएए के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न का शिकार होकर आए अल्पसंख्यकों को नागरिकता दी जानी है। इन अल्पसंख्यकों में हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के लोग हैं। सरकार ने इस साल मार्च में इस कानून को लागू करते समय इसके प्रावधानों के बारे में भी बताया था।

NEET पेपर लीक मामले में CBI ने दो को दबोचा: सरगना संजीव मुखिया के यूपी की भर्ती परीक्षा में धांधली से भी जुड़े तार, सीलबंद पेपर बॉक्स तोड़ने का है उस्ताद

NEET पेपर लीक मामले की जाँच कर रही सीबीआई ने गुरुवार (27 जून 2024) को मनीष प्रकाश और उसके दोस्त आशुतोष को गिरफ्तार कर लिया। इन दोनों ने ‘सेफ हाउस’ में कमरा बुक कराया था। सीबीआई ने पेपर लीक के दो अन्य आरोपित चिंटू और मुकेश को भी रिमांड लिया है। वहीं, सीबीआई की एक टीम हजारीबाग में ओएसिस स्कूल के प्रिंसिपल सहित कुल 8 लोगों से पूछताछ कर रही है।

वहीं, बिहार पुलिस की EOU टीम से पेपर लीक जाँच की रिपोर्ट और सबूत हासिल करने के बाद अब CBI पेपर लीक के मुख्य आरोपित संजीव मुखिया को दबोचने की दिशा में काम कर रही है। संजीव मुखिया यूपी पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले के मुख्य आरोपित रवि अत्री भी संजीव मुखिया से जुड़ा है। इसके अलावा, कई परीक्षाओं के पेपर लीक से भी मुखिया जुड़ा हो सकता है।

सीबीआई द्वारा गिरफ्तार मनीष प्रकाश ने अपने दोस्त आशुतोष से कहकर परीक्षार्थियों के लिए ‘लर्न एंड प्ले स्कूल’ को बुक कराया था। पटना के खेमनी चक स्थित लर्न एंड प्ले स्कूल में NEET का जला हुआ प्रश्न पत्र मिला था, जो इस घटना का प्रमुख सबूत है। इस पेपर पर दी गई जानकारी से पता चला था कि ये प्रश्न पत्र हजारीबाग के ओएसिस स्कूल के परीक्षा केंद्र से लीक हुआ था।

मनीष प्रकाश ने इस स्कूल में 20 से 25 NEET परीक्षार्थियों को रुकवाकर उन्हें प्रश्न पत्र दिया था और उन्हें आंसर शीट रटवाया था। कहा जा रहा है कि मनीष प्रकाश ने संजीव मुखिया के कहने पर परीक्षार्थियों के लिए इसका इंतजाम किया था। मनीष नालंदा का रहने वाला है। उसका परिवार पटना के बहादुरपुर थाना क्षेत्र के संदलपुर इलाके में रहता है।

उधर, यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा की जाँच कर रही यूपी एसटीएफ ने रवि अत्री से पूछताछ की। उसने बताया है कि संजीव मुखिया का गैंग पेपर लीक में माहिर है। उसका नेटवर्क यूपी, बिहार, गुजरात, दिल्ली-NCR समेत कई राज्यों में फैला हुआ है। संजीव मुखिया ब्लूटूथ के जरिए अलग-अलग परीक्षाओं में सॉल्वर बैठाता था। संजीव और उसका बेटा शिव कुमार पेपर लीक के सबसे बड़े मास्टरमाइंड हैं।

दरअसल, यूपी पुलिस भर्ती पेपर लीक का मुख्य आरोपित रवि अत्री बिहार के संजीव मुखिया और अतुल वत्स के साथ जुड़ा हुआ है। रवि अत्री और संजीव मुखिया का बेटा डॉक्टर शिव कुमार एक साथ पढ़ाई कर चुके हैं। संजीव मुखिया का बेटा बीपीएससी टीचर परीक्षा का पेपर लीक करने के मामले में पहले से ही जेल में है।

सूत्रों के हवाले से आजतक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रवि अत्री ने पूछताछ में बताया है कि 12वीं पास करके वह मेडिकल की तैयारी के लिए राजस्थान के कोटा शहर गया था। वहाँ पर पेपर लीक कराने वाले गिरोह के वह संपर्क में आ गया था। रवि अत्री पहले भी पीएमटी पेपर लीक मामले में जेल जा चुका है। उसका साथी राजीव नयन मिश्रा भी गिरफ्त में है।

रवि अत्री की इंटेरोगेशन रिपोर्ट के अनुसार, संजीव मुखिया का गैंग सीलबंद पेपर का बॉक्स तोड़ने में उस्ताद है। देश में कहीं भी पेपर लीक करवाना हो, सील बॉक्स तोड़ने के लिए संजीव मुखिया गैंग की मदद ली जाती है। संजीव मुखिया के गैंग के डॉक्टर शुभम मंडल ने यूपी पेपर लीक में पटना से फ्लाइट पकड़ कर अहमदाबाद जाकर पेपर का बॉक्स तोड़ा था।

हजारों को जेल, लाखों की नसबंदी: जो इमरजेंसी लोकतंत्र पर बनी घाव, उस पर बात नहीं चाहती कॉन्ग्रेस, सत्ता से हुई बाहर लेकिन तानाशाही रवैया बरकरार

लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के बाद अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी 1975 में इंदिरा गाँधी की कॉन्ग्रेस सरकार लगाई गई इमरजेंसी (आपातकाल) की आलोचना की है। राष्ट्रपति मुर्मू ने इसे देश का सबसे अंधकारमय समय बताया है। राष्ट्रपति और स्पीकर के इमरजेंसी की आलोचना पर अब कॉन्ग्रेस बिफर गई है। वह नहीं चाहती है कि कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा लोगों को दी गई प्रताड़नाओं और देश के संवैधानिक ढाँचे पर किए गए हमले को लेकर बात हो।

कॉन्ग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा स्पीकर को गुरुवार (27 जून, 2024) को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में ओम बिरला के इमरजेंसी की आलोचना करने पर आपत्ति जताई गई है। इस पत्र में केसी वेणुगोपाल ने लिखा, “इमरजेंसी की घोषणा के संबंध में आपके भाषण में जिक्र किया जाना बेहद चौंकाने वाला है। स्पीकर की ओर से इस तरह का राजनीतिक बयान देना संसद के इतिहास में अभूतपूर्व है।” केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि स्पीकर का ऐसा बयान देना दुर्भाग्यपूर्ण है।

खुद अपराध स्वीकार नहीं, दूसरों को भी नहीं बोलने देना चाहती कॉन्ग्रेस

केसी वेणुगोपाल के पत्र ने यह साफ कर दिया है कि कॉन्ग्रेस 1975 के इमरजेंसी के दौर पर खुद तो बात नहीं ही करना चाहती बल्कि बाकी लोगों को भी इस विषय में शांत करना चाहती है। केसी वेणुगोपाल का यह पत्र स्पीकर ओम बिरला के अपने पहले भाषण में इमरजेंसी के दौरान लोगों को दी गई यातनाओं के प्रति संवेदना व्यक्त करने के बाद आया है।

स्पीकर ओम बिरला ने बुधवार को संसद में इमरजेंसी के दौरान यातनाएँ सहकर जान गंवाने वालों के लिए 2 मिनट का मौन रखा था। इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी अभिभाषण के दौरान इमरजेंसी को देश का सबसे भयावह दौर और संविधान पर हमला बताया। पत्र के अलावा कॉन्ग्रेस नेता और लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी स्पीकर ओम बिरला से मिले और इमरजेंसी की आलोचना को ‘नजरअंदाज’ किया जा सकने वाला बताया।

कॉन्ग्रेस ने भाषण को लेकर पत्र के जरिए तो आपत्ति जताई ही है, उसने भाषण के दौरान भी सदन में खूब हंगामा किया था। जहाँ एक ओर NDA सांसद इमरजेंसी के पीड़ितों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे थे, वहीं कॉन्ग्रेस के सांसद शोर शराबा करने में व्यस्त थे।

यह दिखाता है कि इमरजेंसी के 50 वर्षों के बाद भी कॉन्ग्रेस को अपने कृत्यों पर कोई पछतावा नहीं है। पछतावा होना भी दूर की बात है, उसका पूरा ध्यान इस बात पर है कि बाकी देश को कैसे इस अपराध के बारे में बोलने से रोका जाए , यदि वह बोलें तो उनका मुंह बंद करवा दिया जाए, हल्ला गुल्ला किया जाए और ध्यान भटका दिया जाए।

वह संसदीय मर्यादाओं, परम्पराओं और पद की गरिमा जैसे चाशनी भरे शब्दों के बीच अपनी कुंठा छुपा रही है। उसका मूल उद्देश्य लोगों को इमरजेंसी के बारे में बात करने से रोकना है। इसके लिए देश के नेताओं को बेड़ियों में बाँधने वाली कॉन्ग्रेस नैतिकता की भी दुहाई दे रही है।

कॉन्ग्रेस का मन: यातनाओं पर ना हो बात

कॉन्ग्रेस भले कितना ही जोर इस बात पर लगा ले कि 1975 से 1977 के बीच चले इमरजेंसी के दौर की यातनाओं को छुपाया जाए, यह संभव नहीं दिखता है। इस इमरजेंसी के दौरान 140,000 से अधिक व्यक्तियों, जिनमें राजनीतिक विरोधी, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार, लेखक और असहमति व्यक्त करने वाले आम नागरिक शामिल थे, को मनमाने ढंग से गिरफ्तार करके जेलों में डाल दिया गया। इस दौरान देश में कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा लोगों को दी गई यातनाएँ के किस्से भी अनगिनत हैं।

इमरजेंसी के दौरान आम और ख़ास किसी को नहीं छोड़ा गया था। इसी में एक मामला स्नेहलता रेड्डी का था। स्नेहलता रेड्डी कन्नड़ अभिनेत्री थीं। उन्हें जॉर्ज फ़र्नान्डिस का दोस्त होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। स्नेहलता अस्थमा की मरीज थीं, बावजूद इसके उन्हें घोर यातनाएँ दीं जाती और जेल में उन्हें निरंतर उपचार भी नहीं दिया गया।

यह बातें स्वयं स्नेहलता ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के समक्ष रखीं थीं। जेल में मिलने वाली क्रूर यातनाओं ने और उस वास्तविकता ने स्नेहलता को बेहद कमजोर कर दिया और उनकी हालत गंभीर हो गई। जनवरी 15, 1977 को उन्हें पैरोल पर रिहा कर दिया गया। और रिहाई के 5 दिन बाद ही 20 जनवरी को हार्ट अटैक के कारण उनकी मृत्यु हो गई।

बताया जाता है कि देश में इमरजेंसी के दौरान 60 लाख से अधिक लोगों की नसबंदी करवाई गई थी। देश का कोई भी ऐसा विपक्षी नेता नहीं था जो गिरफ्तार ना किया गया हो। बड़े से बड़े नेताओं को जेलों में बंदी बना कर रखा गया। आज देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी तब जेल में बंद थे, उनकी माँ की इसी सदमे के कारण मृत्यु हो गई थी और वह उन्हें अंतिम समय देख ना सके। वह अपने इन अपराधों पर पर्दा डालना चाहती है।

सत्ता गई, तानाशाही नहीं

कॉन्ग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल का पत्र और इमरजेंसी के पीड़ितों के लिए मौन के दौरान कॉन्ग्रेस सांसदों का हंगामा दिखाता है कि भले ही वह पिछले 10 वर्षों से सत्ता में नहीं है और अगले पाँच वर्षं के लिए भी जनता द्वारा नकार दी गई है, लेकिन उसके तेवर अब भी तानाशाहों वाले हैं।

इमरजेंसी के दौरान कॉन्ग्रेस ने प्रेस की स्वतंत्रता खत्म कर दी थी, इंडियन एक्सप्रेस जैसे अखबारों को विरोध में सादा छापा गया था। कई अखबारों पर छापे पड़े थे, पत्रकारों को मारा पीटा गया था। एक बार फिर से वह यही प्रयास कर रही है।

इस बार सत्ता ना होने के कारण उसके निशाने पर प्रेस के अलावा राजनीतिक शख्सियतें हैं। केसी वेणुगोपाल का पत्र, मात्र उनका पत्र ही नहीं बल्कि इस हंगामे और लोगों को चुप कराने के प्रयास में गाँधी परिवार की सहमति भी समझा जाना चाहिए। वेणुगोपाल गाँधी परिवार के सबसे निकटतम लोगों में से एक हैं। इमरजेंसी को भले 50 वर्ष हो गए हैं, लेकिन दरबारी राजनीति यदि आज भी मौक़ा मिले तो उसी समय की तरह अपनी वफादारी साबित करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

‘सनातन का अपमान सपा का एजेंडा’: अखिलेश यादव ने अवधेश प्रसाद को बताया ‘राजा अयोध्या’ तो बिफरी भाजपा, कहा- भगवान राम हैं अयोध्या के महाराज

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के पाँव आजकल जमीन पर नहीं हैं। लोकसभा में उनकी पार्टी के सांसदों की संख्या 5 से बढ़कर 37 हो गई है। इसके बाद से वे और उनकी पार्टी के नेता लगातार अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने भगवान राम का अपमान करते हुए फैजाबाद से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद को ‘राजा अयोध्या’ बताया है। भाजपा ने इसे सपा का अहंकार बताया है।

दरअसल, अखिलेश यादव गुरुवार (27 जून 2024) को फैजाबाद के सांसद अवधेश प्रसाद के साथ संसद पहुँचे। अखिलेश फैजाबाद की सीट पर समाजवादी पार्टी की जीत के बारे में बता रहे थे। उसी दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा ने अयोध्या यानी फैजाबाद को केवल बर्बाद किया, लेकिन सपा वाले लोकतंत्र रक्षक सेनानी हैं।

इस दौरान अखिलेश यादव भावनाओं में बहकर दो कदम और आगे चले गए। मीडिया से बातचीत के दौरान भीड़ में पीछे खड़े फैजाबाद के सांसद अवधेश प्रसाद को आवाज देकर आगे बुलाते हुए अखिलेश यादव ने कहा, “लोकतंत्र रक्षक सेनानी अवधेश जी हमारे साथ खड़े हैं। राजा अयोध्या।” बता दें कि अयोध्या का राजा भगवान श्रीराम को कहा जाता है।

अखिलेश यादव के इस बयान पर भाजपा ने हमला बोला है। भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने कहा, “सपा के सिर पर अहंकार सवार हो गया है। अयोध्या के सांसद को ‘अयोध्या का राजा’ कहना शर्मनाक व्यवहार है। ‘राजा अयोध्या’ सिर्फ प्रभु श्रीराम हैं! सनातन और हिंदू धर्म एवं रामचरितमानस का लगातार अपमान करने के बाद अब ऐसा बयान।”

बता दें कि यह पहली बार नहीं है कि समाजवादी पार्टी ने भगवान राम का इस तरह अपमान किया हो। मेरठ से भाजपा के सांसद अरुण गोविल ने संस्कृत में शपथ ग्रहण के बाद जय श्रीराम के नारे लगाए थे। इसके बाद सदन में बैठे समाजवादी पार्टी के नेताओं ने ‘जय अवधेश’ के नारे लगाए थे। इस दौरान फैजाबाद से सांसद अवधेश प्रसाद ने सदन में खड़े होकर सपा के नेताओं का अभिवादन भी किया था।

समाजवादी पार्टी में रहते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। स्वामी प्रसाद ने कहा कि वो रामचरितमानस को धर्म ग्रंथ मानते ही नहीं हैं, क्योंकि इस किताब को तुलसीदास ने अपनी खुद की ख़ुशी के लिए लिखा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि रामचरितमानस में कुछ ऐसी चौपाइयाँ हैं, जिनमें शूद्रों को अधम होने का सर्टिफिकेट दिया गया है।

मौर्या ने उन चौपाइयों को एक वर्ग के लिए गाली जैसे बताया था। उन्होंने कहा था कि रामचरितमानस के हिसाब से ब्राह्मण भले ही कितना गलत करे वो सही और शूद्र कितना भी सही करे वो गलत होता है। मौर्य के अनुसार, अगर उसे ही धर्म कहते हैं वो ऐसे धर्म का सत्यानाश हो और ऐसे धर्म को वो दूर से नमस्कार करते हैं।

समीर ने नरेश बन युवती को फँसाकर किया रेप, मंदिर में ले जाकर किया शादी का नाटक: मामला खुला तो धर्मांतरण का बनाने लगा दबाव, पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में धर्म छुपाकर समीर ने एक हिंदू लड़की से शादी कर ली और उसके साथ दुष्कर्म किया। इतना ही नहीं, जब मामला खुला और लड़की ने विरोध किया तो आरोपित समीर ने लड़की की बेरहमी से पिटाई कर दी। इस मामले में पीड़िता ने थाने में शिकायत की। इसके आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज करके आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

मामला गाजियाबाद के अंकुर विहार एरिया का है। यहाँ की एक हिंदू युवती ने बताया कि एक साल पहले उसकी नरेश नाम के एक युवक से दोस्ती हुई थी। उस समय समीर ने अपना नाम बदलकर खुद को नरेश बताया था। उसने यह भी कहा था कि वह दिल्ली के सीमापुरी का रहने वाला है। बाद में दोनों की मुलाकातें होने लगी। समीर हर रोज लड़की से फोन पर बात करने लगा। 

पीड़िता शाहदरा के मानसरोवर कॉलोनी स्थित एक फैक्ट्री में नौकरी करती थी। बाद में आरोपित ने पीड़िता को अपने साथ फैक्ट्री में नौकरी लगवा दी। इसके बाद वह पीड़िता के घर आने-जाने लगा। युवती ने आरोप लगाया है कि समीर ने पिछले 13 मार्च को शादी करने का वादा करके उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और किसी को नहीं बताने की धमकी दी।

लड़की ने शादी का दबाव बनाया तो आरोपित समीर उसे लेकर हरिद्वार गया और वहाँ के एक शिव मंदिर में जाकर युवती की माँग में सिंदूर लगा दिया। इस दौरान उसने ना ही अग्नि के फेरे लिए और ना ही किसी तरह का मंत्रोच्चार आदि हुआ। इसके बाद उसने लड़की को झाँसा देते हुए कहा कि अब दोनों की शादी हो गई।

करीब एक महीने के बाद लड़की आरोपित के साथ नंदनगरी उसके घर गई तो कुछ लोगों ने उसे समीर कह कर पुकारा। जब लड़की को शक हुआ तो उसने इसकी जाँच पड़ताल की तो उसकी असलियत सामने आ गई। युवती को पता चला कि खुद को नरेश बताने वाला युवक दरअसल समीर है और उसका धर्म मुस्लिम है।

इतना ही नहीं, यह भी पता चला कि समीर वास्तव में गाजियाबाद के शहीदनगर का रहने वाला है। मामला खुलने के बाद युवती ने इसका विरोध किया तो आरोपित समीर ने उसकी खूब पिटाई की। युवती का आरोप है कि समीर ने उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया। जब वह उसकी बात नहीं मानी तो उसने जान से मारने की धमकी भी दी।

युवती का कहना है कि वह किसी तरह समीर के चंगुल से बचकर वह अपने घर आ गई। इसके बाद पुलिस में शिकायत की। इस संबंध में युवती ने नरेश उर्फ समीर के खिलाफ धर्म छिपाकर दुष्कर्म करने की रिपोर्ट दर्ज कराई है। एसीपी भास्कर वर्मा ने बताया कि पुलिस ने आरोपित समीर को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है।

9 से ज्यादा SIM खरीदे तो लग सकता है ₹2 लाख का जुर्माना, गड़बड़ करके लिया तो देने पड़ सकते हैं ₹50 लाख: जानें नए टेलीकॉम बिल से क्या-क्या बदला

टेलीकम्यूनिकेशंस एक्ट, 2023 के कुछ हिस्से बुधवार (26 जून, 2024) से लागू कर दिए गए हैं। इसके अंतर्गत कई नए नियम देश में SIM लेने और उसके उपयोग के संबंध में लागू किए गए है। गड़बड़ी के संबंध में सजा और जुर्माने का प्रावधान भी इस कानून में किया गया है।

टेलीकम्यूनिकेशंस बिल, 2023 को दिसम्बर, 2023 में संसद में पास किया गया था। इसके बाद इस पर राष्ट्रपति ने अपनी सहमति दे दी थी। इस कानून में 60 से अधिक खंड हैं। इस कानून से सरकार देश में संचार माध्यमों के नियमन को नए तरीके से नियमित करना चाहती है, अभी तक यह काम एक सदी पुराने क़ानून के सहारे होता था।

इस कानून में संचार माध्यम (फोन नेटवर्क, इंटरनेट) लगाने, उनके उपयोग, उनमें गड़बड़ी पर सजा और उनके नियमन सम्बन्धी प्रावधान हैं। इससे संचार माध्यमों का कोई दुरूपयोग ना करे, इसके लिए भी प्रावधान किए गए हैं। कानून के तहत अब भारत में कोई भी व्यक्ति तय सीमा से अधिक SIM अपने पास नहीं रख पाएगा।

SIM खरीदने को लेकर क्या है कानून?

इस कानून के तहत भारत में एक व्यक्ति जीवन भर में अब 9 SIM ही खरीद सकेगा। यह SIM उसके आधार कार्ड अथवा अन्य पहचान पत्र से जुड़े होंगे। इस सीमा को जम्मू कश्मीर और उत्तरपूर्व में 6 ही रखा गया है। इस नियम का उल्लंघन करने पर पहली बार ₹50,000 और फिर प्रत्येक बार ₹2 लाख का जुर्माना देना पड़ेगा।

हालाँकि, SIM खरीदने की सीमा का उल्लंघन करने पर सजा नहीं होगी। SIM खरीदने पर सीमा लगाने के पीछे इसके दुरूपयोग को रोकने की मंशा है। आतंकियों समेत तमाम देश विरोधी ताकतें इससे पहले एक ही पहचान पत्र के आधार पर कई SIM चालू कर लेती थीं, अब ऐसा नहीं हो सकेगा।

वहीं किसी ऐसे SIM या इंटरनेट का उपयोग करने पर, जिसको सरकार ने अनुमति नहीं दी है, भारी जुर्माना होगा। नए कानून के अनुसार, ऐसी स्थिति में ₹10 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यानि अब बिना कानूनी अनुमति के इंटरनेट या अन्य ऐसी ही किसी सुविधा का इस्तेमाल करना मुश्किल कर दिया गया है।

इसके अलावा SIM खरीदने या इंटरनेट का उपयोग करने के लिए यदि कोई व्यक्ति फर्जी जानकारी देता है, तो इसके लिए उस पर ₹50 लाख तक जुर्माना और 3 वर्ष की सजा हो सकती है। फर्जी SIM से होने वाले अपराधों को देखते हुए इस नियम को इतना कठोर बनाया गया है।

अपने नाम से चल रहे SIM भी जानें

जहाँ एक ओर सरकार ने लोगों के SIM खरीदने को लेकर सीमा लगाई है, वहीं दूसरी तरफ उसने कुछ सुविधाएँ भी दी हैं। सरकार ने हाल ही में संचार सारथी नाम से वेबसाइट भी चालू की थी, इस पर आप उन नम्बरों को जान सकते हैं जो आपके आधार से जुड़े हुए हैं। इसके लिए आपको Sancharsaathi.gov.in पर जाकर अपना फोन नम्बर देना होगा। यह वेबसाइट आपके नंबर पर एक OTP भेजेगी, जिसके बाद आपको पता चल जाएगा कि आपके आधार पर कितने SIM चलाए जा रहे हैं।

इस वेबसाइट में उपयोग में ना लाए जाने वाले SIM को बंद करने और अपने आधार से हटाने की सुविधा भी है। साथ ही इस वेबसाइट से अपने खोए हुए मोबाइल को भी ढूँढने के लिए IMEI नम्बर ब्लॉक करवाया जा सकता है। इससे फोन का दुरूपयोग नहीं हो सकेगा।

‘आरोपितों के मौलिक अधिकारों के पक्ष में अदालत’: केरल हाई कोर्ट ने प्रतिबंधित इस्लामी संगठन PFI के 17 संदिग्धों को दी बेल, RSS नेता की हत्या में UAPA के तहत थे बंद

केरल हाई कोर्ट ने प्रतिबंधित इस्लामी कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के 17 संदिग्धों को जमानत दे दी है। इन चरमपंथियों के खिलाफ पलक्कड़ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नेता ए श्रीनिवासन की हत्या का आरोप है। साल 2022 में हुई इस हत्या के मामले में इन आरोपितों के खिलाफ UAPA के तहत आरोप पत्र दायर किया गया था।

जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार (25 जून 2024) को न्यायमूर्ति एके जयशंकरन नांबियार और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वीएम की पीठ ने कहा, “इस विश्वास पर पहुँचते हुए कि आरोपित व्यक्तियों के खिलाफ आरोप प्रथम दृष्टया सत्य हैं, अदालत को आरोपित के मौलिक अधिकारों के पक्ष में झुकना होगा, न कि उन अधिकारों पर लगाए जा सकने वाले प्रतिबंधों के पक्ष में।”

इन आरोपियों को जमानत देते हुए हाई कोर्ट ने उन पर कड़ी शर्तें लगाई हैं। उन्हें अपने मोबाइल नंबर और रियल-टाइम जीपीएस लोकेशन जाँच अधिकारी के साथ साझा करने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा, आरोपितों से कहा गया है कि वे केरल नहीं छोड़ेंगे। अपने पासपोर्ट जमा करवाएँगे और अपने मोबाइल फोन को चौबीसों घंटे चालू रखेंगे।

हालाँकि, पीठ ने इस के से जुड़े नौ अन्य आरोपितों को जमानत देने से इनकार कर दिया है। बता दें कि 51 आरोपितों में से अब तक केवल 44 को ही गिरफ्तार किया जा सका है। ये सभी श्रीनिवासन की हत्या में शामिल थे। जाँच एजेंसी NIA के अनुसार, गिरफ्तार किए गए कुछ लोग आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए PFI कैडरों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देने में शामिल थे।

दरअसल, श्रीनिवासन की हत्या 16 अप्रैल 2022 को कर दी गई थी। इस हत्या में प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और उसकी राजनीतिक शाखा सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) से जुड़े लोगों की संलिप्तता सामने आई थी। श्रीनिवासन की हत्या पीएफआई नेता सुबैर की हत्या के प्रतिशोध में की गई थी।

आरएसएस पदाधिकारी श्रीनिवासन पर एक गिरोह ने मेलमुरी में उनकी मोटरसाइकिल की दुकान के पास उनपर तलवार और चाकुओं से हमला कर दिया था। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया था कि श्रीनिवासन पर 20 बार तलवार से वार किए गए थे। उनके पूरे शरीर में जख्म के निशान थे।

आरएसएस नेता की हत्या के बाद स्थानीय लोगों ने आसपास के इलाकों में दुकानें बंद करा दी और पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी थी। टीवी चैनल द्वारा प्रसारित आस-पास की दुकानों के सीसीटीवी फुटेज से पता चला था कि हमलावर तीन मोटरसाइकिल पर सवार होकर दुकान पर पहुँचे थे और उनमें से तीन ने श्रीनिवासन पर हमला किया था।

इससे पहले, 15 नवंबर, 2021 को, आरएसएस कार्यकर्ता संजीत पर SDPI के कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया था। उस समय वह अपनी पत्नी के साथ बाइक पर जा रहे थे। पलक्कड़ जिले के एल्लापल्ली में चार लोगों ने उनकी बेरहमी से हत्या कर दी।