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4 साल बाद ट्रंप ने बायडेन से हिसाब किया चुकता, प्रेसिडेंशियल डिबेट में अबकी बार धो डाला: अमेरिकी राष्ट्रपति की कई बार जुबान लड़खड़ाई, टेंशन में डेमोक्रेट

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए होने वाली बहस में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने राष्ट्रपति जो बायडेन के छक्के छुड़ा दिए। डेमोक्रेट राष्ट्रपति बायडेन, रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रम्प के सामने कई मुद्दों पर अटकते नजर आए और बोल भी नहीं सके। इस बहस की कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं और बायडेन की आलोचना की जा रही है।

राष्ट्रपति पद के दोनों उम्मीदवारों के बीच यह बहस अमेरिकी मीडिया चैनल CNN ने आयोजित करवाई थी। इस दौरान हर मुद्दे पर ट्रम्प, बायडेन से आगे दिखे और स्पष्टता से अपनी बातें रखी। वहीं बायडेन अधिकांश मुद्दों पर बात करते हुए अटकते रहे और कई बार बोल ही नहीं पाए। यहाँ तक कि वह कई मुद्दों पर बात करते हुए काफी चीजें भूल भी गए।

ट्रम्प और बायडेन के बीच हुई बहस में अमेरिका में मेक्सिको की सीमा से घुसने वाले अवैध प्रवासियों का मुद्दा तेजी से उठा। इस पर बोलते हुए बायडेन ने दावा किया कि ट्रम्प के जाने के बाद यह घट गया है और इस पर वह एक्शन जारी रखेंगे। बायडेन ने दावा किया कि ट्रम्प के शासनकाल के मुकाबले अवैध प्रवासियों की संख्या में 40% की गिरावट आई है। इसके बाद जवाब देते हुए उनकी जुबान लड़खड़ा गई और वह कुछ देर तक बोल ही नहीं सके।

इसी मुद्दे पर ट्रम्प ने बायडेन को घेर लिया। उन्होंने कहा कि बायडेन ने जो कुछ भी कहा ना उन्हें समझ में आया, और शायद बायडेन खुद ना जान पाए हों। इसके बाद ट्रम्प ने कहा कि बायडेन ने अमेरिका की सीमा को मानसिक रोगियों और पागलों और यहाँ तक कि आतंकियों के लिए तक खोल दिया। ट्रम्प ने कहा कि वर्तमान में अमेरिका में सबसे अधिक संख्या में आतंकी मौजूद हैं। ट्रम्प ने कहा कि पूरी दुनिया से अवैध प्रवासी बायडेन के काल में अमेरिका में आए।

अवैध प्रवासियों के अलावा ट्रम्प ने बायडेन को अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर भी घेरा। बायडेन ने दावा किया कि उनके सत्ता में आने के दौरान अमेरिका में भारी बेरोजगारी थी। कोरोना महामारी के कारण देश पटरी से उतरा था, जिसे वापस लाया गया। वहीं इसी मुद्दे पर ट्रम्प ने बताया कि उन्होंने अपने शासनकाल में देश के टैक्स में सबसे बड़ी कमी की। इस कारण से लाखों नई नौकरियाँ पैदा हुईं।

ट्रम्प ने बताया कि उनके क़दमों के कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था संभल सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि बायडेन ने अर्थव्यवस्था सुधारने के नाम पर देश में खूब पैसा भाया जिससे महंगाई बढ़ गई और 14 महीने लगातार महंगाई का स्तर 9% रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि जितनी भी नौकरियाँ बायडेन काल में दी गई, वह सभी अवैध प्रवासी ले गए।

ट्रम्प इस दौरान अमेरिका में स्वास्थ्य के मुद्दे पर भी भारी पड़े। ट्रम्प ने कहा कि उनके शासनकाल में कोविड का सबसे बुरा दौर था लेकिन तब भी उतने लोगों की मौत नहीं हुई जितने बायडेन के शासनकाल में मरे। उन्होंने आरोप लगाया कि बायडेन शासनकाल में स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल हो गया। वहीं इस पर जवाब देते हुए बायडेन इधर उधर की बात करने लगे और थोड़ी देर में एक शब्द ‘मेडीकेयर’ पर अटक गए। उन्होंने अंत में कहा कि हमने मेडीकेयर को परास्त किया। ट्रम्प ने इसका फायदा उठाया और कहा कि बायडेन ने मेडीकेयर को खत्म कर दिया।

पूरी बहस के दौरान जहाँ ट्रम्प अपने जवाबों को लेकर पूरी तरह आत्मविश्वास में दिखे वहीं बायडेन ना ही स्पष्ट उत्तर दे सके और लगातार उनकी जुबान लड़खड़ाती रही। वह कई मुद्दों के दौरान बात करते हुए भटक भी गए। बायडेन के इस बहस में खराब प्रदर्शन के कारण अब उनकी पार्टी डेमोक्रेट्स चिंता में है।

डेमोक्रेट्स अब इस बात को लेकर भी बहस कर रहे हैं कि बायडेन को यह चुनाव भी लड़ना चाहिए या नहीं। उनकी आयु 81 वर्ष हो चुकी है और वह कई चीजे भूल गए। डेमोक्रेट्स इसके बाद लगातार बायडेन का बचाव भी करते दिखे। वहीं ट्रम्प के समर्थक सोशल मीडिया पर उनकी प्रशंसा करते दिखे। उन्होंने कहा कि बायडेन को पूरी तरह से ट्रम्प ने पराजित कर दिया। यह बहस देखने वाले 67% लोगों ने कहा कि ट्रम्प आगे रहे। वहीं 2020 में हुई ट्रम्प और बायडेन की बहस में बायडेन आगे रहे थे।

अमेरिका में नवम्बर, 2024 में चुनाव होने हैं। जनवरी, 2025 में अमेरिका को नया राष्ट्रपति मिलेगा। वर्तमान राष्ट्रपति बायडेन और पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच राष्ट्रपति पद के लिए यह दूसरा मुकाबला होगा। पिछली बार बायडेन के हाथों ट्रम्प को शिकस्त झेलनी पड़ी थी। इस बार के चुनावों में ट्रम्प का पलड़ा भारी लग रहा है।

सागरिका घोष क्या आप इसी लिए संसद में आई हैं? राज्यसभा के वेल में हंगामे पर सभापति ने फटकारा, कहा- विपक्ष के नेता भी वेल में आ गए, यह भारतीय इतिहास का कलंकित दिन

संसद सत्र के पाँचवें दिन राज्यसभा में शुक्रवार (28 जून 2024) को विपक्ष ने NEET पेपर लीक मुद्दे पर खूब हंगामा किया। इस दौरान कई सांसद वेल में पहुँच गए। इससे राज्यसभा के चेयरमैन जगदीप धनखड़ ने भड़क गए और इसमें टीएमसी सांसद सागरिका घोष, डेरेक ओ ब्रायन सहित को फटकार लगाते हुए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।

सांसदों के व्यवहार को देखते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ कुर्सी छोड़कर खड़े हो गए। उन्होंने कहा, “जो लोग वेल में खड़े हैं, हम उनका नाम ले रहे हैं।” इसके बाद उन्होंने खड़े होकर उन सांसदों का नाम लेना शुरू किया जो हंगामा कर रहे थे। सबसे पहले टीएमसी सांसद सागरिका घोष का नाम लेते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “आप यहाँ सदन में हंगामे के मकसद से आई हैं?”

सभापति जगदीप धनखड़ यहीं नहीं रूके। कुछ देर के बाद तृणमूल कॉनग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन का नाम लेकर उन्होंने कहा, “मिस्टर डेरेक ओ ब्रायन, आप इस हंगामे के डायरेक्टर बन रहे हैं।” वहीं टीएमसी सांसद साकेत गोखले को लेकर कहा, “आप वर्चुअली अपने लिए ही परेशानी बन रहे हैं।” इस दौरान विपक्षी सांसद सदन में नारेबाजी करते रहे।

उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा, “आज भारतीय संसद के इतिहास में ऐसा कलंकित दिन है कि विपक्ष के नेता खुद वेल में आ गए हैं। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। मैं दुखी हूँ, स्तब्ध हूँ। भारतीय संसदीय परंपरा इस हद तक बिगड़ जाएगी कि विपक्ष के नेता वेल में आ जाएँगे, उपनेता वेल में आ जाएँगे।”

इसके कुछ देर बाद ही उपराष्ट्रपति धनखड़ ने सदन को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्‍थगित कर दिया। सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि बिजनेस एडवाइजरी कमेटी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के लिए 21 घंटे का समय निर्धारित किया है। सांसद इस समय को चर्चा के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

राज्यसभा में शुक्रवार को नीट से जुड़े मुद्दे पर चर्चा के लिए विपक्षी सांसदों ने नोटिस दिए। सभापति जगदीप धनखड़ ने बताया कि उन्हें इस विषय पर चर्चा के लिए कुल 22 नोटिस मिले हैं। इनमें नीट में अनियमितता, चीटिंग और पेपर लीक के विषय पर बहस के लिए नियम 267 के तहत नोटिस दिया गया था। हालाँकि, सभापति ने इन सभी नोटिस को अस्वीकार कर दिया। 

फारुख, आदिल और शाहरुख ने पीट-पीटकर चंद्रभान को मार डाला, क्योंकि कहा था- तुम लोग जानवर का भी मीट खा लेते हो: 2 गिरफ्तार-1 फरार, शव बरामद

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित अंसल कॉलोनी के रहने वाले चंद्रभान ने मेहनत करके ट्रांसपोर्ट का बिजनेस खड़ा किया। वो ड्राइवरों को रोजगार भी देता था। वो उनके साथ बैठकर खा-पी भी लेता था, लेकिन 3 मुस्लिमों के साथ शराब पीना और शराब पीने के दौरान माँस का जिक्र करना उसपर इतना भारी पड़ गया कि फारुख, शाहरुख और आदिल ने चंद्रभान को पीट-पीट कर ही मार दिया। इसके बाद शव को हरियाणा के सोनीपत जिले में ठिकाने लगा दिया और फिर कार खड़ी कर फरार हो गए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीते शनिवार (22 जून 2024) को सोनीपत में एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिला था। उसकी पहचान नहीं हो पाई थी। सोनीपत पुलिस ने तीन दिन बाद शव का पोस्टमार्टम कराया और बुधवार को अज्ञात (लावारिश) के रूप में शव का अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया, लेकिन तभी मौके पर लोनी-गाजियाबाद की पुलिस पहुँच गई। बताया गया कि ये शव चंद्रभान का है, जो शुक्रवार (21 जून 2024) से लापता था। वो ट्रांसपोर्ट का बिजनेस करता था और लोगों को अपनी कार किराए पर देता था, जो उसकी ही मौत की वजह बन गई।

जानकारी के मुताबिक, मूल रूप से महोबा के रहने वाले चंद्रभान 30 साल से गाजियाबाद की अंसल कॉलोनी में रहते थे। उनके भाई आनंद ने बताया कि शुक्रवार की सुबह ड्राइवर फारुख चंद्रभान को अपने साथ कार ठीक कराने की बात कहकर ले गया था। रास्ते में शाहरुख भी मिला और तीनों कार लेकर मिस्त्री आदिल के पास पहुँचे। यहीं किसी बात को लेकर उनमें बहस हो गई, तभी चंद्रभान ने उन्हें माँस खाने वाला कहा तो मामला गड़बड़ा गया।

लोनी एसीपी भास्कर वर्मा ने बताया कि चंद्रभान की हत्या के मामले में उनके बेटे रवि ने फारुख, शाहरुख और आदिल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने फारुख और शाहरुख को गिरफ्तार कर लिया है। आदिल फरार चल रहा है। गिरफ्तार आरोपी फारुख ने बताया कि वह और उनका भाई शाहरुख चंद्रभान की कार चलाते थे। आदिल फरार है।

ऐसा हुई हत्या

बीते शुक्रवार को सुबह करीब 11 बजे फारुख चंद्रभान के घर आया था। उसने चंद्रभान को कार में बैठाया। कार में कुछ खराबी आ रही थी। दोनों कार को सही कराने और सीएनजी भरवाने के लिए निकल गए थे। यहाँ से लोकर आदिल के पास पहुँचे और सभी शराब पीने लगे। इस दौरान किसी बात को लेकर बहस हो गई, जिसमें चंद्रभान ने माँस का जिक्र किया। इसके बाद इसके बाद तीनों ने चंद्रभान के साथ मारपीट कर हत्या कर दी और शव को ठिकाने लगाने के लिए हरियाणा की तरफ चल दिए। उन्होंने जखोली टोल प्लाजा से कुछ दूर पहले चंद्रभान के शव को पेरिफेरल हाईवे से नीचे फेंक दिया था।

हत्यारों ने चंद्रभान का फोन अलीपुर से पहले भलस्वा डेरी कूड़ा अड्डा में फेंक दिया था। शव को ठिकाने लगाने के बाद फारूख, आदिल और शाहरुख वापस आ गए थे। आदिल को राशिद गेट पर उतार दिया और गाड़ी फारुख ने मृतक के घर के पास खड़ी कर दी थी। इस मामले में पुलिस ने सबसे पहले फारुख को पकड़ा, फिर शव को बरामद किया। इसके बाद शाहरुख को भी गिरफ्तार कर लिया। अभी आदिल फरार है।

पहचान छुपा रिक्शा चालक सलमान ने हिंदू महिला को फँसाया, जबरन धर्मांतरण-निकाह के बाद अब्बू और भाइयों से भी करवाया रेप

लखनऊ के मोहनलालगंज में लव जिहाद का एक भयानक मामला सामने आया है। सलमान राईन नाम के एक मुस्लिम ने ना सिर्फ नाम एवं पहचान बदलकर एक हिंदू महिला को शादी कर ली, बल्कि उसका जबरन धर्मांतरण भी करवा दिया। इस दौरान ससुर और देवर ने ने उसके साथ रेप किया। महिला की 12 वर्षीय बेटी के साथ सलमान अश्लील हरकतें करने लगा तो महिला ने पुलिस से मदद ली।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की रहने वाली 28 साल की हिंदू पीड़िता ने बताया कि मोहनलालगंज का रहने सलमान राईन ई-रिक्शा चलाता है। उसने साल 2009 में अपना नाम और धर्म बदलकर उससे जान-पहचान बढ़ाई थी। उसके बाद उसे अपने प्यार के जाल में फँसाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया। इस दौरान आरोपित ने उसका अश्लील वीडियो भी बना लिया।

पीड़िता ने आगे बताया कि साल 2011 में आरोपित सलमान राईन ने उसे शादी करने के लिए कोर्ट में बुलाया। महिला जब कोर्ट पहुँची तब उसे सलमान राईन की हकीकत का पता चली और उसने शादी से मना कर दिया। तब आरोपित ने अश्लील वीडियो वायरल कर बदनाम करने की धमकी दी। इसके बाद पीड़िता को मजबूरन उससे शादी करनी पड़ी।

महिला ने आरोप लगाया कि शादी के बाद जब वह ससुराल पहुँची तो उसका जबरन धर्म परिवर्तन करा दिया गया और उसे हिंदू से मुस्लिम बना दिया गया। जब उसने विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की गई। इतना ही नहीं, वहाँ सलमान राईन के अब्बू और भाइयों ने उसके साथ गैंगरेप किया। महिला का कहना है कि इस दौरान कई बार उसका गर्भपात भी कराया गया।

महिला की वर्तमान में तीन बेटियाँ हैं। उसकी सबसे बेटी 12 साल की है। सलमान और उसके परिजनों ने उसकी बड़ी बेटी को भी अपनी बुरी नजर डाली। महिला का कहना है कि वह किसी तरह मोहनलालगंज थाने पहुँची, लेकिन वहाँ मदद नहीं मिली। इसके बाद महिला ने लखनऊ के पुलिस कमिश्नर से मुलाकात करके अपनी व्यथा सुनाई।

पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर मोहनलालगंज कोतवाली पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। इसके बाद पुलिस ने आरोपित सलमान राईन को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया। वहीं, दोनों देवरों और ससुर की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। पुलिस का कहना है कि दोनों को जल्दी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

पहले हैदराबाद में घुसकर दी चुनौती, अब ओवैसी की लोकसभा सदस्यता खत्म करवाने को आईं आगे: राष्ट्रपति को लिखा- फिलिस्तीन का नारा संविधान का उल्लंघन, यह राष्ट्रद्रोह जैसा

महाराष्ट्र के अमरावती की पूर्व सांसद नवनीत राणा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने माँग की है कि जय फिलिस्तीन का नारा लगाने के कारण AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी की सदस्यता रद्द की जाए। उन्होंने जय फिलिस्तीन का नारा लगाने को राष्ट्रद्रोह बताया है।

नवनीत राणा ने गुरुवार (27 जून, 2024) को राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए यह पत्र लिखा है। उन्होंने लिखा कि सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में शपथ लेने के बाद ‘जय फिलिस्तीन’ के नारे लगाए। फिलिस्तीन वह देश है, जिसका भारतीय नागरिक या भारतीय संविधान से कोई लेना-देना है।

सांसद नवनीत राणा ने आगे अपने पत्र में लिखा कि असदुद्दीन ओवैसी ने फिलिस्तीन के नारे संसद में लगा कर अपनी निष्ठा और लगाव इस देश के प्रति स्पष्ट कर दिया है और यह संविधान का उल्लंघन है। नवनीत राणा ने इसे देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा भी बताया है। उन्होंने कहा है कि ओवैसी का यह बयान राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए खतरा है।

पूर्व सांसद नवनीत राणा ने अपने पत्र में संविधान के अनुच्छेद 102 का हवाला भी दिया है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से संविधान के अनुच्छेद 102 और 103 के तहत कार्रवाई करते हुए ओवैसी की सांसदी खत्म करने की माँग की है।

क्या कहता है अनुच्छेद 102 और 103

संविधान के अनुच्छेद 102 में वह स्थितियाँ बताई गई हैं, जिनके अंतर्गत किसी संसद सदस्य को अयोग्य घोषित किया जा सकता है। अनुच्छेद 102 के भाग ‘घ’ में लिखा है कि ऐसे संसद सदस्य को अयोग्य घोषित किया जा सकता है जो भारत का नागरिक नहीं है या उसने किसी दूसरे राष्ट्र की नागरिकता ले ली है। इसके अलावा उसे इस आधार पर भी अयोग्य घोषित किया जा सकता है यदि वह दूसरे राष्ट्र के प्रति श्रृद्धा रखता है।

वहीं संविधान का अनुच्छेद 103, अनुच्छेद 102 के तहत किसी संसद सदस्य को अयोग्य ठहराए जाने को लेकर फैसला सम्बन्धी शक्तियाँ देश के राष्ट्रपति को देता है। इसमें कहा गया है कि यदि अनुच्छेद 102 के तहत अयोग्यता का मामला उठता है इस मामले में इसे राष्ट्रपति को भेजा जाना चाहिए और उसका ही निर्णय अंतिम होगा। इसी अनुच्छेद में कहा गया है कि अयोग्य घोषित करने के लिए राष्ट्रपति चुनाव आयोग की सलाह लेगा और उसी के अनुसार निर्णय लेगा।

ओवैसी ने ‘जय फिलिस्तीन’ के लगाए थे नारे

हैदराबाद से सांसद चुने गए असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार (26 जून, 2024) को लोकसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद जय फिलिस्तीन के नारे लगाए। उन्होंने अपनी शपथ उर्दू में ली। उर्दू में शपथ लेने वाले असदुद्दीन ओवैसी ने अंत में ‘जय भीम, जय मीम’ कहा और ‘अल्लाह-हू-अकबर’ का नारा भी लगाया, लेकिन अंत में उन्होंने ‘जय फिलिस्तीन’ भी कहा। इस दौरान पूर्वी चम्पारण से भाजपा के सांसद राधामोहन सिंह पीठासीन थे और नव-निर्वाचित सांसदों को शपथ दिला रहे थे। 

जब असदुद्दीन ओवैसी से जब इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ये संविधान के खिलाफ कैसे हुआ, ये संविधान के कौन से प्रावधान के हिसाब से गलत है? G किशन रेड्डी के विरोध पर उन्होंने कहा कि उनका काम है विरोध करना, हम उन्हें खुश करने के लिए क्यों बोलेंगे। उन्होंने इस दौरान फिलिस्तीन को लेकर महात्मा गाँधी के विचार पढ़ने की सलाह भी दी।

इससे पहले वकील हरि शंकर जैन ने असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ इस मामले में राष्ट्रपति से संविधान के अनुच्छेद 102 और 103 के तहत शिकायत की थी। हरि शंकर जैन ने ओवैसी की सदस्यता संसद सदस्य के रूप में खत्म करने की माँग की है। ऐसी ही एक शिकायत एक और वकील विभोर आनंद ने भी लोकसभा सचिवालय से की है।

नवनीत राणा इससे पहले भी असदुद्दीन ओवैसी को चुनौती दे चुकी हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान हैदराबाद में कहा था, “एक छोटा भाई है, एक बड़ा भाई है…छोटा (अकबरुद्दीन ओवैसी) बोलता है कि पुलिस को 15 मिनट हटा दो तो हम दिखाएंगे की क्या कर सकता है। छोटे को मेरा कहना है कि तेरे को 15 मिनट लगेंगे और हमको सिर्फ 15 सेकेंड लगेंगे। 15 सेकेंड पुलिस को हटाया तो छोटे और बड़े (असदुद्दीन ओवैसी) को पता नहीं लगेगा कि कहाँ से आया और कहाँ से गया। सिर्फ 15 सेकेंड लगेंगे।”

IGI एयरपोर्ट की जो छत गिरी वह मनमोहन सिंह की UPA सरकार में बनी, लेकिन कॉन्ग्रेस ने PM मोदी से उद्घाटन करवाया: रमेश की लाश पर विपक्ष बना गिद्ध, जानिए सच

शुक्रवार (28 जून) को दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 पर छत गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई और छह लोग घायल हो गए। ऐसे में विपक्षी दलों को केंद्र सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया। खासकर कॉन्ग्रेस के नेताओं ने आईजीआई एयरपोर्ट टर्मिनल-1 पर हुए हादसे में पीएम मोदी का नाम घसीटा। इस हादसे में जिस व्यक्ति की मौत हुई, उनका नाम रमेश (45) बताया जा रहा है। वो रोहिणी में रहते थे और कैब चलाते थे।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दावा किया कि इस साल मार्च में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली हवाई अड्डे के टर्मिनल-1 का उद्घाटन किया था, जिसकी छत आज गिर गई। खड़गे ने लिखा, “10 मार्च को जब मोदी जी ने दिल्ली एयरपोर्ट टी1 का उद्घाटन किया, तो उन्होंने खुद को “दूसरी मिट्टी का इंसान” कहा था। यह सब झूठी शेखी बघारना और बयानबाजी केवल चुनाव से पहले रिबन काटने के समारोहों में शामिल होने के लिए थी! दिल्ली एयरपोर्ट त्रासदी के पीड़ितों के प्रति हमारी हार्दिक संवेदना। उन्होंने एक भ्रष्ट, अयोग्य और स्वार्थी सरकार का खामियाजा भुगता है।”

कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी पीएम मोदी पर आरोप लगाते हुए लिखा, “दिल्ली एयरपोर्ट टर्मिनल-1, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री ने मार्च में किया था, आज छत गिर गई, जिसके परिणामस्वरूप एक कैब ड्राइवर की दुखद मौत हो गई… यह भाजपा का “दान लो और व्यापार दो” का भ्रष्ट मॉडल है, जो अब उजागर हो गया है। सवाल यह है कि क्या मुख्य उद्घाटन मंत्री इस घटिया निर्माण कार्य और इस भ्रष्ट मॉडल की जिम्मेदारी लेंगे?”

इस बीच, तृणमूल कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता रिजु दत्ता ने इस घटना का इस्तेमाल पीएम मोदी पर हमला करने के लिए किया और दावा किया कि पीएम मोदी ने चुनाव प्रचार के लिए जल्दबाजी में दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 का उद्घाटन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि छत गिरने से तीन लोगों की मौत के लिए पीएम मोदी “सीधे तौर पर जिम्मेदार” हैं।

दत्ता ने एक्स पर लिखा, “दिल्ली टर्मिनल 1 एयरपोर्ट के प्रस्थान क्षेत्र में छत ढह गई। पिलर गिरने से कैब ड्राइवर समेत 3 लोगों की मौत, कम से कम 6 घायल। त्रासदी और राष्ट्रीय शर्म। उड़ानें निलंबित। चुनाव प्रचार के लिए, पीएम मोदी ने मार्च में टी1 का जल्दबाजी में “उद्घाटन” किया था, जबकि यह निर्माणाधीन था। जबलपुर एयरपोर्ट से अयोध्या स्टेशन और अब नई दिल्ली एयरपोर्ट तक, राजनीतिक लाभ के लिए परियोजनाओं के पूरा होने से पहले उद्घाटन करने की “फोटोजीवी” पीएम की हताशा ऐसे हादसों की मुख्य वजह है। वह 3 लोगों की मौत के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं, जिन्होंने अपनी जान इसलिए गवाँ दी, क्योंकि पीएम मोदी चुनाव प्रचार के लिए बेताब थे।”

तमिलनाडु कॉन्ग्रेस महासचिव लक्ष्मी रामचंद्रन ने दावा किया कि दिल्ली एयरपोर्ट कोई पुराना एयरपोर्ट नहीं है, बल्कि इसका “अभी-अभी उद्घाटन हुआ है”। उन्होंने लिखा, “हे भगवान…एयरपोर्ट की छत गिर गई? यह कोई पुराना एयरपोर्ट भी नहीं है, अभी-अभी उद्घाटन हुआ है! हम कब जागेंगे? एकाधिकार का यही नतीजा होता है…3 लोगों की जान चली गई।”

क्या दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 का उद्घाटन तीन महीने पहले पीएम मोदी ने किया था?

विपक्षी दलों द्वारा शुरू किए गए राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नैदर ने कहा कि जो इमारत ढही है, वह पुरानी है और इसका उद्घाटन 2009 में हुआ था। मंत्री ने कहा, “हम इस घटना को गंभीरता से ले रहे हैं…मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन की गई इमारत दूसरी तरफ है और जो इमारत यहाँ गिरी है वह एक पुरानी इमारत है और 2009 में खोली गई थी…”

कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा फैलाए गए फेक न्यूज पर इंटरनेट यूजर्स ने करारा प्रहार किया। मोहित बाबू ने उस समय की मीडिया रिपोर्ट्स को सामने रखा।

वहीं, कंचन गुप्ता नाम के यूजर ने कॉन्ग्रेसी दावों का भंडाफोड़ किया और बताया कि इसका निर्माण 2008-9 में हुआ था। तरुण नाम के यूजर ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस नेताओं ने जीएमआर ग्रुप को फायदा पहुँचाया, जिसने इसका निर्माण किया था। उसका रॉबर्ड वाड्रा से भी संबंध बताया।

हालाँकि सच यह है कि फरवरी 2009 में तत्कालीन दिल्ली की मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता शीला दीक्षित ने इंदिरा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उक्त टर्मिनल का उद्घाटन किया था, उस समय प्रफुल्ल पटेल नागरिक उड्डयन मंत्री थे। पीएम मोदी ने जिस बिल्डिंग का उद्घाटन किया है, वो दूसरी ओर है। उसका हादसे वाली जगह से कोई लेना-देना नहीं।

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को हाई कोर्ट से जमानत: ED ने किया था विरोध, कहा था- प्रभावशाली व्यक्ति हैं, जाँच कर सकते हैं प्रभावित

झारखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार (28 जून 2024) को राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत दे दी। आदेश की कॉपी जेल में पहुँचते ही हेमंत सोरेन के बाहर आने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी और वे 29 जून को जेल से बाहर आ सकते हैं। हेमंत सोरेन को इस मामले में 31 जनवरी 2024 की रात को प्रवर्तन निदेशाललय (ED) ने गिरफ्तार किया था।

इस मामले में सुनवाई 13 जून को सुनवाई पूरी हो चुकी थी। जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की अदालत ने दोनों पक्षों के दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया, वह दोषी नहीं हैं और जमानत पर रिहा किए जाने दौरान याचिकाकर्ता द्वारा कोई अपराध किए जाने की कोई आशंका नहीं है।

हेमंत सोरेन के वरिष्ठ वकील अरुणाभ चौधरी ने बताया कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकारी अध्यक्ष सोरेन को जमानत दे दी गई है। आज कोर्ट के आदेश की कॉपी चली जाएगी और कल वे बाहर आ सकते हैं। बता दें कि 48 वर्षीय हेमंत सोरेन इस समय राँच के बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं।

बता दें कि हेमंत सोरेन की रिहाई का ED ने विरोध किया था। सुनवाई के दौरान 13 जून को ईडी की ओर से पेश वकील एसवी राजू ने कहा था कि हेमंत सोरेन को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। वे प्रभावशाली व्यक्ति हैं और अगर उन्हें जमानत मिली तो वे राज्य की मशीनरी का इस्तेमाल करके जाँच को प्रभावित कर सकते हैं।

वहीं, हेमंत सोरेन की ओर से पेश सुप्रीम कोर्ट की वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि इस केस में मनी लॉन्ड्रिंग​​​​​​ का मामला नहीं बनता है। उन्होंने तर्क दिया कि यह पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध का मसला है। ED ने अपनी चार्जशीट में जिस जमीन पर बैंक्वेट हॉल बनाने की बात कही है, वह सिर्फ अनुमान पर आधारित है।

इससे पहले हेमंत सोरेन के वकील ने कोर्ट को बताया कि जिस 8.86 एकड़ जमीन को लेकर ईडी कार्रवाई कर रही है, वह उनके नाम है ही नहीं। वकील ने तर्क दिया ईडी सिविल मामले को क्रिमिनल बना रही है। ऐसे में उन्हें दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की तर्ज पर जमानत दी जाए।

वहीं, प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत में तर्क दिया था कि मंत सोरेन ने अवैध तरीके से बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन पर कब्जा किया है। यह पीएमएलए-2002 में निहित प्रावधानों के अनुसार मनी लॉन्ड्रिंग है। एसवी राजू ने कहा था कि जिस जमीन को लेकर जानकारी नहीं होने की बात बता रहे हैं, दरअसल वह जमीन उनके नाम से ही है।

बताते चलें कि यह पूरा मामला राँची के बरियातू में स्थित 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है। ईडी का आरोप है कि इस जमीन पर हेमंत सोरेन ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। एजेंसी ने हेमंत सोरेन, राज कुमार पाहन, हिलारियास कच्छप तथा बिनोद सिंह के खिलाफ 30 मार्च को विशेष पीएमएलए अदालत में आरोपपत्र दायर किया गया था।

30+ मुस्लिम गौ मूत्र से स्नान कर मंदिर पहुँचे, हवन कर बन गए हिंदू: कहा- सनातन से श्रेष्ठ कुछ नहीं, इंदौर के खजराना मंदिर में घर वापसी का Video देखा आपने?

मध्य प्रदेश के इंदौर में 30 लोगों ने इस्लाम छोड़ सनातन में घर वापसी कर ली। इन्होने इसी के साथ अपने इस्लामी नाम छोड़ कर हिन्दू नाम अपना लिए हैं। इनकी हिन्दू धर्म में घर वापसी के लिए विशेष अनुष्ठान का आयोजन किया गया। इन सभी ने कानूनी रूप से भी धर्म छोड़ने का आवेदन दे दिया है।

घर वापसी के अनुष्ठान का यह आयोजन इंदौर के खजराना मंदिर में किया गया। यहाँ यज्ञ भी किया गया। इसमें हिन्दू धर्म में प्रवेश करने वाले सभी लोग शामिल हुए। इससे पहले इन्हें गंगाजल-गोमूत्र समेत देश की 10 विभिन्न नदियों से जल से स्नान भी करवाया गया।

हिन्दू धर्म में घर वापसी करने वालों में कई महिलाएँ भी शामिल हैं। इन लोगों ने अपने धर्म परिवर्तन को कानूनी रूप देने के लिए भी इंदौर के कलेक्टर को आवेदन दिया है। इससे आगे पहचान पत्रों में भी इनकी पहचान बदली जा सकेगी। हिन्दू धर्म में घर वापसी करने वालों ने नाम भी बदले हैं।

घर वापसी करने वालों में निलोफर शेख से निकिता, अख्शा शेख से आकांक्षा, रज्जाक से रोहित, अबरार से अभिषेक, मुबारिक से मनीष और रुकैय्या से रुकमनी समेत सभी लोगों ने अपने नाम बदले हैं। इनकी घर वापसी विश्व हिन्दू परिषद के नेताओं की संरक्षा में हुई है। इन्होंने कहा है कि सनातन से श्रेष्ठ कुछ नहीं है।

विश्व हिन्दू परिषद के मालवा प्रांत प्रमुख संतोष शर्मा ने इस विषय में ऑपइंडिया को बताया, “यह सभी लोग स्वेच्छा से हिन्दू धर्म में घर वापसी कर रहे हैं। इन लोगों ने हमसे कुछ समय पहले हिन्दू धर्म में शामिल होने के लिए सम्पर्क साधा था। इसके बाद इनके लिए इंतजाम करवाए गए। यह सभी जन्म से ही मुस्लिम थे और अब हिन्दू बन रहे हैं।”

संतोष शर्मा ने बताया कि वह पहले भी हिन्दू धर्म में प्रवेश लेने वालों की सहायता करते आए हैं। उन्होंने कहा कि अभी भी उनके सम्पर्क में काफी ऐसे लोग हैं जो हिन्दू धर्म में शामिल होना चाहते हैं, उनकी भी घर वापसी जल्द ही करवाई जाएगी।

अप्रैल में भी हुई थी घर वापसी

इससे पहले अप्रैल माह में भी खजराना मंदिर में 8 मुस्लिमों ने हिन्दू धर्म में घर वापसी की थी। घर वापसी करने वाले 8 लोगों में 3 महिलाएँ भी शामिल थीं। हिन्दू धर्म में घर वापसी करने वाले लोगों ने अपने नाम भी बदले थे।

इन आठ लोगों में हैदर शेख भी शामिल थे। उन्होंने हरि नारायण नाम अपनाया था। इसके बाद उन्हें फ़ोन पर लगातार धमकियाँ मिल रहीं थी। कुछ बदमाशों ने हरि नारायण के घर पर हमला भी कर दिया था। उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई थी।

हरि नारायण ने अब इस मामले में थाने में शिकायत दी थी। इस शिकायत में हरि नारायण ने कहा था कि धर्म परिवर्तन करने की वजह से मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने उनको धमकी दी गई और उनके घर पर पत्थर से हमला किया गया।

लड़की को नंगा कर बॉडी की पेंट, फिर नग्न पीठ पर खाना रखकर परोसा: ताइवान में अजीबोगरीब डिनर पार्टी, एक व्यक्ति की एंट्री ₹2.5 लाख में

ताइवान के प्राइवेट क्लब में खाना परोसने का अजीबोगरीब तरीका सामने आया है। पता चला है कि तायचुंग के एक प्राइवेट क्लब में नंगी महिला को सुशी बोट बनाकर लोगों को डिनर सर्व किया गया है। इस रात्रिभोज को उन्होंने ‘न्योताइमोरी डिनर’ का नाम दिया। इस दौरान नग्न युवती के ऊपर ‘साशिमी’ परोसी गई। उससे पहले उसके शरीर पर बॉडी पेंट आदि किया गया था ताकि वो दिखने में अट्रैक्टिव लगे। रिपोर्ट्स के अनुसार इस कार्यक्रम के लिए महिला ने करीबन दो घंटे काम किया।

ऑनलाइन सामने आई तस्वीरों में एक युवती के शरीर पर फूलों की सजावट देखी जा सकती है। साथ ही देख सकते हैं कि खाना परोसते टाइम युवती को टेबल पर लिटा दिया गया। फिर उसे उलटा करके खाने की वस्तु रखी गई। खबरों के मुताबिक ये खाना सिर्फ विवादस्पद नहीं बल्कि महंगा भी था। इस कार्यक्रम में जाने की कीमत करीबन 3100 डॉलर (2,58,734.06) थी। वहीं इसमें आने वाले मेहमानों की संख्या 20 थी।

कार्यक्रम में जुड़ने वाले एक अज्ञात व्यक्ति ने इस संबंध में स्थानीय मीडिया से बात करते हुए बताया कि उन्होंने पहली बार महिला के शरीर के ऊपर इतनी हाई क्वालिटी साशिमी देखी, बस उन्हें ये याद नहीं है उन्होंने वास्तव में कार्यक्रम में खाया क्या था।

प्राइवेट क्लब द्वारा आयोजित ऐसी खबर के बारे में जानने के बाद स्थानीय अधिकारियों ने इसकी जाँच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि इस तरह नग्नता का सार्वजनिक प्रदर्शन कानून का उल्लंघन है। वे मामले की जाँच कर रहे हैं। वहीं ताइचुंग सिटी हेल्थ ब्यूरो ने कहा कि उन्हें कोई शिकायत नहीं मिली है, लेकिन यदि कोई समस्या हुई तो वो त्वरित कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं।

बता दें कि ताइवना इस तरह के डिनर कार्यक्रम आयोजित करना कोई नया नहीं। साल 2022 में ऐसा एक कार्यक्रम आयोजित कराने की घटना सामने आई थी जिसके बाद उसकी काफी आलोचना भी हुई थी। वहीं इस दृश्य को देखने वाले एक व्यक्ति ने कहा, “यह देखना बहुत भयानक है। इसे इंसान को खाने से अलग नहीं देख सकते। सिर्फ खाने वालों को लुभाने के लिए एक युवा महिला के शरीर का उपयोग करना बहुत गलत लगा। इससे साबित होता है कि लोग अगर अमीर हो जाएँ तो वो अपनी इंसानियत खो देते हैं।”

PM मोदी को बदनाम करने के लिए अवनी डायस ने डॉक्यूमेंट्री में भारत के संविधान को लेकर बोला झूठ, अपनी ‘पत्रकार’ की करतूत ABC News ने कबूली

एबीसी की ‘पत्रकार’ अवनी दास के फैलाए फेक न्यूज पर ऑपइंडिया की रिपोर्ट के 2 सप्ताह बाद आखिरकार एबीसी न्यूज ने मान लिया कि उसकी कथित ‘पत्रकार’ अवनी डायस ने भारत के संविधान के बारे में दर्शकों को गुमराह किया है। अब एबीसी न्यूज ने अपनी सफाई दी है।

गुरुवार (27 जून 2024) को एबीसी न्यूज ने स्वीकार किया कि अवनी डायस ने ‘भारत की आजादी के साथ ही ‘सेकुलर’ शब्द संविधान का हिस्सा है’ का जो दावा किया है, वो झूठा है। एबीसी न्यूज ने अवनी दास के फेक न्यूज पर सफाई देते हुए कहा कि ‘नरेंद्र मोदी पर बने डॉक्यूमेंट्री, जिसे 5 जून को पब्लिश किया गया था, उसमें ‘भारत के मूल संविधान में सेकुलर’ होने का दावा गलत था।’

अपनी इज्जत बचाने के क्रम में एबीसी न्यूज ने लिखा, ‘भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 1960 के दशक के दौरान पुष्टि की थी कि धर्मनिरपेक्षता भारत के 1950 के संविधान की एक बुनियादी विशेषता है, इस शब्द को 1976 में एक संवैधानिक संशोधन में जोड़ा गया, जिससे भारत का वर्णन “संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य” से बदलकर “संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य” हो गया।’

ये मामला कैसे शुरू हुआ?

इस विवाद की शुरुआत 5 जून को हुई थी, जब एक तरफ पीएम मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने की तैयारी कर रहे थे, तो दूसरी तरफ भारत विरोधी शक्तियाँ भारत सरकार और खासकर मोदी सरकार को बदनाम करने के प्रयास में लगातार जुटे हुए थे। इन्हीं प्रयासों में एक है ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (एबीसी) की कथित ‘पत्रकार’ अवनी डायस द्वारा झूठ फैलाने का प्रयास, जिसमें अवनि ने 5 जून 2024 को भारत के संविधान के बारे में फर्जी बातें प्रसारित की।

अवनी डायस ने कुछ समय पहले ही ये फर्जी खबर फैलाई थी कि ‘निगेटिव रिपोर्टिंग’ की वजह से भारत सरकार ने उनका वीजा रद्द कर दिया है, जबकि वो दावा फर्जी निकला था। इस बार अवनि ने दावा किया है कि ‘धर्मनिरपेक्षता’ भारतीय संविधान का अहम हिस्सा है, वो भी अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद यानी 1947 से। अवनी ने ‘नरेंद्र मोदी से पहले के भारत की कहानी’ हेडलाइन के साथ एक वीडियो बनाकर ये बताने की कोशिश की कि भारत में पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की धर्मनिरपेक्षता किस तरह के खतरे में है।

अपने वीडियो के 9.19 मिनट पर अवनी डायस ने कहा, “आपको बता दें कि जब 1947 में अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद भारत की स्थापना हुई थी, तो इसके संविधान में लिखा गया था कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जिसका मतलब है कि धर्म के आधार पर देश में सभी को आजादी होनी चाहिए।” अवनी ने दावा किया कि भारत के संविधान में सेक्युलर शब्द पेज नंबर 33 पर बड़े अक्षरों में लिखा है।

हालाँकि अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही ‘पत्रकार’ अवनी ये भूल गई कि भारत का संविधान 1947 में लागू नहीं हुआ और जब भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ, तब सेक्युलर शब्द उस संविधान का हिस्सा ही नहीं था। बता दें कि भारत का संविधान 1947 में नहीं, बल्कि तीन साल बाद 1950 में लागू हुआ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द को संविधान की प्रस्तावना का हिस्सा 1976 में (आपातकाल के काले दिनों के दौरान) बनाया गया।

तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने संसद को दरकिनार कर संविधान में ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द शामिल करने के लिए 42वाँ संविधान संशोधन पारित किया था। अवनी डायस के दावों के विपरीत, संविधान यह बताने के लिए नहीं लिखा गया था कि भारत एक ‘धर्मनिरपेक्ष देश’ है। पूरे वीडियो में एबीसी न्यूज के ‘पत्रकार’ ने वैश्विक स्तर पर देश की छवि को धूमिल करने के लिए अटकलों, अनुमानों और मान्यताओं पर भरोसा किया।

पहले भी विवादों में रही हैं अवनी डायस

बता दें कि इसी साल अप्रैल में अवनी डायस ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर दावा किया था कि मोदी सरकार ने उनका वीजा नहीं बढ़ाया, जिसकी वजह से उन्हें भारत छोड़ना पड़ा। अवनी ने दावा किया कि ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि उनकी रिपोर्टिंग सरकार को पसंद नहीं आ रही थी। हालाँकि ये पूरी तरह से झूठ था, क्योंकि उन्होंने जैसे ही वीजा के लिए अप्लाई किया, उनका वीजा 2 माह के लिए बढ़ा दिया गया। इसके बावजूद एबीसी न्यूज ने एक आर्टिकल प्रकाशित किया और दावा किया कि भारत के विदेश मंत्रालय ने फोन करके अवनी को सूचित किया था कि उनका वीजा नहीं बढ़ाया जा रहा।

खैर, इस प्रोपेगेंडा से इतर अवनी डायस से जुड़ा एक और मामला भी है। उसने कनाडा में हरदीप निज्जर की हत्या को भारत से जोड़ने की कोशिश करते हुए एक डॉक्यूमेंट्री बनाई थी, जिस पर भारत सरकार रोक लगा चुकी है और यू-ट्यूब पर पर भी उसके मामले में नोटिस दिख रहा है। दरअसल, यो डॉक्यूमेंट्री न सिर्फ तथ्यात्मक रूप से गलत थी, बल्कि भारत के संवेदनशील सीमाई इलाकों में गलत तरीके से फिल्माई गई थी। उन लोकेशन पर शूट करने के लिए गलत तरीके से अनुमति हासिल की गई थी, जिसका बीएसएफ ने भी विरोध किया था।

पहले भी भारत को लेकर प्रोपेगेंडा फैलाती रही हैं अवनि डायस

अवनी डायस भारत विरोधी, सनातन विरोधी लेखों के लिए जानी जाती है। उसने कई बार प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश की, लेकिन हर बार एक्सपोज होती रही। इसी साल मार्च में अवनी डायस ने ब्रिसबेस में स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर पर खालिस्तानी कट्टरपंथियों के हमले को नकारते हुए कट्टरपंथियों को क्लीनचिट देने की कोशिश की थी। उन्हें इसे हिंदू समूहों का ही हमला करार दे दिया था। उनके दावों को खुद ऑस्ट्रेलियन हिंदू मीडिया ने एक्सपोज कर दिया था। एक फेसबुक पोस्ट में ऑस्ट्रेलियन हिंदू मीडिया ने अवनी डायस और उनकी साथी नाओमी सेल्वारत्नम को ‘ब्राउन सिपाही’ की संज्ञा दी थी।