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हजारों को जेल, लाखों की नसबंदी: जो इमरजेंसी लोकतंत्र पर बनी घाव, उस पर बात नहीं चाहती कॉन्ग्रेस, सत्ता से हुई बाहर लेकिन तानाशाही रवैया बरकरार

लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के बाद अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी 1975 में इंदिरा गाँधी की कॉन्ग्रेस सरकार लगाई गई इमरजेंसी (आपातकाल) की आलोचना की है। राष्ट्रपति मुर्मू ने इसे देश का सबसे अंधकारमय समय बताया है। राष्ट्रपति और स्पीकर के इमरजेंसी की आलोचना पर अब कॉन्ग्रेस बिफर गई है। वह नहीं चाहती है कि कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा लोगों को दी गई प्रताड़नाओं और देश के संवैधानिक ढाँचे पर किए गए हमले को लेकर बात हो।

कॉन्ग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा स्पीकर को गुरुवार (27 जून, 2024) को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में ओम बिरला के इमरजेंसी की आलोचना करने पर आपत्ति जताई गई है। इस पत्र में केसी वेणुगोपाल ने लिखा, “इमरजेंसी की घोषणा के संबंध में आपके भाषण में जिक्र किया जाना बेहद चौंकाने वाला है। स्पीकर की ओर से इस तरह का राजनीतिक बयान देना संसद के इतिहास में अभूतपूर्व है।” केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि स्पीकर का ऐसा बयान देना दुर्भाग्यपूर्ण है।

खुद अपराध स्वीकार नहीं, दूसरों को भी नहीं बोलने देना चाहती कॉन्ग्रेस

केसी वेणुगोपाल के पत्र ने यह साफ कर दिया है कि कॉन्ग्रेस 1975 के इमरजेंसी के दौर पर खुद तो बात नहीं ही करना चाहती बल्कि बाकी लोगों को भी इस विषय में शांत करना चाहती है। केसी वेणुगोपाल का यह पत्र स्पीकर ओम बिरला के अपने पहले भाषण में इमरजेंसी के दौरान लोगों को दी गई यातनाओं के प्रति संवेदना व्यक्त करने के बाद आया है।

स्पीकर ओम बिरला ने बुधवार को संसद में इमरजेंसी के दौरान यातनाएँ सहकर जान गंवाने वालों के लिए 2 मिनट का मौन रखा था। इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी अभिभाषण के दौरान इमरजेंसी को देश का सबसे भयावह दौर और संविधान पर हमला बताया। पत्र के अलावा कॉन्ग्रेस नेता और लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी स्पीकर ओम बिरला से मिले और इमरजेंसी की आलोचना को ‘नजरअंदाज’ किया जा सकने वाला बताया।

कॉन्ग्रेस ने भाषण को लेकर पत्र के जरिए तो आपत्ति जताई ही है, उसने भाषण के दौरान भी सदन में खूब हंगामा किया था। जहाँ एक ओर NDA सांसद इमरजेंसी के पीड़ितों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे थे, वहीं कॉन्ग्रेस के सांसद शोर शराबा करने में व्यस्त थे।

यह दिखाता है कि इमरजेंसी के 50 वर्षों के बाद भी कॉन्ग्रेस को अपने कृत्यों पर कोई पछतावा नहीं है। पछतावा होना भी दूर की बात है, उसका पूरा ध्यान इस बात पर है कि बाकी देश को कैसे इस अपराध के बारे में बोलने से रोका जाए , यदि वह बोलें तो उनका मुंह बंद करवा दिया जाए, हल्ला गुल्ला किया जाए और ध्यान भटका दिया जाए।

वह संसदीय मर्यादाओं, परम्पराओं और पद की गरिमा जैसे चाशनी भरे शब्दों के बीच अपनी कुंठा छुपा रही है। उसका मूल उद्देश्य लोगों को इमरजेंसी के बारे में बात करने से रोकना है। इसके लिए देश के नेताओं को बेड़ियों में बाँधने वाली कॉन्ग्रेस नैतिकता की भी दुहाई दे रही है।

कॉन्ग्रेस का मन: यातनाओं पर ना हो बात

कॉन्ग्रेस भले कितना ही जोर इस बात पर लगा ले कि 1975 से 1977 के बीच चले इमरजेंसी के दौर की यातनाओं को छुपाया जाए, यह संभव नहीं दिखता है। इस इमरजेंसी के दौरान 140,000 से अधिक व्यक्तियों, जिनमें राजनीतिक विरोधी, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार, लेखक और असहमति व्यक्त करने वाले आम नागरिक शामिल थे, को मनमाने ढंग से गिरफ्तार करके जेलों में डाल दिया गया। इस दौरान देश में कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा लोगों को दी गई यातनाएँ के किस्से भी अनगिनत हैं।

इमरजेंसी के दौरान आम और ख़ास किसी को नहीं छोड़ा गया था। इसी में एक मामला स्नेहलता रेड्डी का था। स्नेहलता रेड्डी कन्नड़ अभिनेत्री थीं। उन्हें जॉर्ज फ़र्नान्डिस का दोस्त होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। स्नेहलता अस्थमा की मरीज थीं, बावजूद इसके उन्हें घोर यातनाएँ दीं जाती और जेल में उन्हें निरंतर उपचार भी नहीं दिया गया।

यह बातें स्वयं स्नेहलता ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के समक्ष रखीं थीं। जेल में मिलने वाली क्रूर यातनाओं ने और उस वास्तविकता ने स्नेहलता को बेहद कमजोर कर दिया और उनकी हालत गंभीर हो गई। जनवरी 15, 1977 को उन्हें पैरोल पर रिहा कर दिया गया। और रिहाई के 5 दिन बाद ही 20 जनवरी को हार्ट अटैक के कारण उनकी मृत्यु हो गई।

बताया जाता है कि देश में इमरजेंसी के दौरान 60 लाख से अधिक लोगों की नसबंदी करवाई गई थी। देश का कोई भी ऐसा विपक्षी नेता नहीं था जो गिरफ्तार ना किया गया हो। बड़े से बड़े नेताओं को जेलों में बंदी बना कर रखा गया। आज देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी तब जेल में बंद थे, उनकी माँ की इसी सदमे के कारण मृत्यु हो गई थी और वह उन्हें अंतिम समय देख ना सके। वह अपने इन अपराधों पर पर्दा डालना चाहती है।

सत्ता गई, तानाशाही नहीं

कॉन्ग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल का पत्र और इमरजेंसी के पीड़ितों के लिए मौन के दौरान कॉन्ग्रेस सांसदों का हंगामा दिखाता है कि भले ही वह पिछले 10 वर्षों से सत्ता में नहीं है और अगले पाँच वर्षं के लिए भी जनता द्वारा नकार दी गई है, लेकिन उसके तेवर अब भी तानाशाहों वाले हैं।

इमरजेंसी के दौरान कॉन्ग्रेस ने प्रेस की स्वतंत्रता खत्म कर दी थी, इंडियन एक्सप्रेस जैसे अखबारों को विरोध में सादा छापा गया था। कई अखबारों पर छापे पड़े थे, पत्रकारों को मारा पीटा गया था। एक बार फिर से वह यही प्रयास कर रही है।

इस बार सत्ता ना होने के कारण उसके निशाने पर प्रेस के अलावा राजनीतिक शख्सियतें हैं। केसी वेणुगोपाल का पत्र, मात्र उनका पत्र ही नहीं बल्कि इस हंगामे और लोगों को चुप कराने के प्रयास में गाँधी परिवार की सहमति भी समझा जाना चाहिए। वेणुगोपाल गाँधी परिवार के सबसे निकटतम लोगों में से एक हैं। इमरजेंसी को भले 50 वर्ष हो गए हैं, लेकिन दरबारी राजनीति यदि आज भी मौक़ा मिले तो उसी समय की तरह अपनी वफादारी साबित करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

‘सनातन का अपमान सपा का एजेंडा’: अखिलेश यादव ने अवधेश प्रसाद को बताया ‘राजा अयोध्या’ तो बिफरी भाजपा, कहा- भगवान राम हैं अयोध्या के महाराज

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के पाँव आजकल जमीन पर नहीं हैं। लोकसभा में उनकी पार्टी के सांसदों की संख्या 5 से बढ़कर 37 हो गई है। इसके बाद से वे और उनकी पार्टी के नेता लगातार अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने भगवान राम का अपमान करते हुए फैजाबाद से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद को ‘राजा अयोध्या’ बताया है। भाजपा ने इसे सपा का अहंकार बताया है।

दरअसल, अखिलेश यादव गुरुवार (27 जून 2024) को फैजाबाद के सांसद अवधेश प्रसाद के साथ संसद पहुँचे। अखिलेश फैजाबाद की सीट पर समाजवादी पार्टी की जीत के बारे में बता रहे थे। उसी दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा ने अयोध्या यानी फैजाबाद को केवल बर्बाद किया, लेकिन सपा वाले लोकतंत्र रक्षक सेनानी हैं।

इस दौरान अखिलेश यादव भावनाओं में बहकर दो कदम और आगे चले गए। मीडिया से बातचीत के दौरान भीड़ में पीछे खड़े फैजाबाद के सांसद अवधेश प्रसाद को आवाज देकर आगे बुलाते हुए अखिलेश यादव ने कहा, “लोकतंत्र रक्षक सेनानी अवधेश जी हमारे साथ खड़े हैं। राजा अयोध्या।” बता दें कि अयोध्या का राजा भगवान श्रीराम को कहा जाता है।

अखिलेश यादव के इस बयान पर भाजपा ने हमला बोला है। भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने कहा, “सपा के सिर पर अहंकार सवार हो गया है। अयोध्या के सांसद को ‘अयोध्या का राजा’ कहना शर्मनाक व्यवहार है। ‘राजा अयोध्या’ सिर्फ प्रभु श्रीराम हैं! सनातन और हिंदू धर्म एवं रामचरितमानस का लगातार अपमान करने के बाद अब ऐसा बयान।”

बता दें कि यह पहली बार नहीं है कि समाजवादी पार्टी ने भगवान राम का इस तरह अपमान किया हो। मेरठ से भाजपा के सांसद अरुण गोविल ने संस्कृत में शपथ ग्रहण के बाद जय श्रीराम के नारे लगाए थे। इसके बाद सदन में बैठे समाजवादी पार्टी के नेताओं ने ‘जय अवधेश’ के नारे लगाए थे। इस दौरान फैजाबाद से सांसद अवधेश प्रसाद ने सदन में खड़े होकर सपा के नेताओं का अभिवादन भी किया था।

समाजवादी पार्टी में रहते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। स्वामी प्रसाद ने कहा कि वो रामचरितमानस को धर्म ग्रंथ मानते ही नहीं हैं, क्योंकि इस किताब को तुलसीदास ने अपनी खुद की ख़ुशी के लिए लिखा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि रामचरितमानस में कुछ ऐसी चौपाइयाँ हैं, जिनमें शूद्रों को अधम होने का सर्टिफिकेट दिया गया है।

मौर्या ने उन चौपाइयों को एक वर्ग के लिए गाली जैसे बताया था। उन्होंने कहा था कि रामचरितमानस के हिसाब से ब्राह्मण भले ही कितना गलत करे वो सही और शूद्र कितना भी सही करे वो गलत होता है। मौर्य के अनुसार, अगर उसे ही धर्म कहते हैं वो ऐसे धर्म का सत्यानाश हो और ऐसे धर्म को वो दूर से नमस्कार करते हैं।

समीर ने नरेश बन युवती को फँसाकर किया रेप, मंदिर में ले जाकर किया शादी का नाटक: मामला खुला तो धर्मांतरण का बनाने लगा दबाव, पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में धर्म छुपाकर समीर ने एक हिंदू लड़की से शादी कर ली और उसके साथ दुष्कर्म किया। इतना ही नहीं, जब मामला खुला और लड़की ने विरोध किया तो आरोपित समीर ने लड़की की बेरहमी से पिटाई कर दी। इस मामले में पीड़िता ने थाने में शिकायत की। इसके आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज करके आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

मामला गाजियाबाद के अंकुर विहार एरिया का है। यहाँ की एक हिंदू युवती ने बताया कि एक साल पहले उसकी नरेश नाम के एक युवक से दोस्ती हुई थी। उस समय समीर ने अपना नाम बदलकर खुद को नरेश बताया था। उसने यह भी कहा था कि वह दिल्ली के सीमापुरी का रहने वाला है। बाद में दोनों की मुलाकातें होने लगी। समीर हर रोज लड़की से फोन पर बात करने लगा। 

पीड़िता शाहदरा के मानसरोवर कॉलोनी स्थित एक फैक्ट्री में नौकरी करती थी। बाद में आरोपित ने पीड़िता को अपने साथ फैक्ट्री में नौकरी लगवा दी। इसके बाद वह पीड़िता के घर आने-जाने लगा। युवती ने आरोप लगाया है कि समीर ने पिछले 13 मार्च को शादी करने का वादा करके उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और किसी को नहीं बताने की धमकी दी।

लड़की ने शादी का दबाव बनाया तो आरोपित समीर उसे लेकर हरिद्वार गया और वहाँ के एक शिव मंदिर में जाकर युवती की माँग में सिंदूर लगा दिया। इस दौरान उसने ना ही अग्नि के फेरे लिए और ना ही किसी तरह का मंत्रोच्चार आदि हुआ। इसके बाद उसने लड़की को झाँसा देते हुए कहा कि अब दोनों की शादी हो गई।

करीब एक महीने के बाद लड़की आरोपित के साथ नंदनगरी उसके घर गई तो कुछ लोगों ने उसे समीर कह कर पुकारा। जब लड़की को शक हुआ तो उसने इसकी जाँच पड़ताल की तो उसकी असलियत सामने आ गई। युवती को पता चला कि खुद को नरेश बताने वाला युवक दरअसल समीर है और उसका धर्म मुस्लिम है।

इतना ही नहीं, यह भी पता चला कि समीर वास्तव में गाजियाबाद के शहीदनगर का रहने वाला है। मामला खुलने के बाद युवती ने इसका विरोध किया तो आरोपित समीर ने उसकी खूब पिटाई की। युवती का आरोप है कि समीर ने उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया। जब वह उसकी बात नहीं मानी तो उसने जान से मारने की धमकी भी दी।

युवती का कहना है कि वह किसी तरह समीर के चंगुल से बचकर वह अपने घर आ गई। इसके बाद पुलिस में शिकायत की। इस संबंध में युवती ने नरेश उर्फ समीर के खिलाफ धर्म छिपाकर दुष्कर्म करने की रिपोर्ट दर्ज कराई है। एसीपी भास्कर वर्मा ने बताया कि पुलिस ने आरोपित समीर को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है।

9 से ज्यादा SIM खरीदे तो लग सकता है ₹2 लाख का जुर्माना, गड़बड़ करके लिया तो देने पड़ सकते हैं ₹50 लाख: जानें नए टेलीकॉम बिल से क्या-क्या बदला

टेलीकम्यूनिकेशंस एक्ट, 2023 के कुछ हिस्से बुधवार (26 जून, 2024) से लागू कर दिए गए हैं। इसके अंतर्गत कई नए नियम देश में SIM लेने और उसके उपयोग के संबंध में लागू किए गए है। गड़बड़ी के संबंध में सजा और जुर्माने का प्रावधान भी इस कानून में किया गया है।

टेलीकम्यूनिकेशंस बिल, 2023 को दिसम्बर, 2023 में संसद में पास किया गया था। इसके बाद इस पर राष्ट्रपति ने अपनी सहमति दे दी थी। इस कानून में 60 से अधिक खंड हैं। इस कानून से सरकार देश में संचार माध्यमों के नियमन को नए तरीके से नियमित करना चाहती है, अभी तक यह काम एक सदी पुराने क़ानून के सहारे होता था।

इस कानून में संचार माध्यम (फोन नेटवर्क, इंटरनेट) लगाने, उनके उपयोग, उनमें गड़बड़ी पर सजा और उनके नियमन सम्बन्धी प्रावधान हैं। इससे संचार माध्यमों का कोई दुरूपयोग ना करे, इसके लिए भी प्रावधान किए गए हैं। कानून के तहत अब भारत में कोई भी व्यक्ति तय सीमा से अधिक SIM अपने पास नहीं रख पाएगा।

SIM खरीदने को लेकर क्या है कानून?

इस कानून के तहत भारत में एक व्यक्ति जीवन भर में अब 9 SIM ही खरीद सकेगा। यह SIM उसके आधार कार्ड अथवा अन्य पहचान पत्र से जुड़े होंगे। इस सीमा को जम्मू कश्मीर और उत्तरपूर्व में 6 ही रखा गया है। इस नियम का उल्लंघन करने पर पहली बार ₹50,000 और फिर प्रत्येक बार ₹2 लाख का जुर्माना देना पड़ेगा।

हालाँकि, SIM खरीदने की सीमा का उल्लंघन करने पर सजा नहीं होगी। SIM खरीदने पर सीमा लगाने के पीछे इसके दुरूपयोग को रोकने की मंशा है। आतंकियों समेत तमाम देश विरोधी ताकतें इससे पहले एक ही पहचान पत्र के आधार पर कई SIM चालू कर लेती थीं, अब ऐसा नहीं हो सकेगा।

वहीं किसी ऐसे SIM या इंटरनेट का उपयोग करने पर, जिसको सरकार ने अनुमति नहीं दी है, भारी जुर्माना होगा। नए कानून के अनुसार, ऐसी स्थिति में ₹10 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यानि अब बिना कानूनी अनुमति के इंटरनेट या अन्य ऐसी ही किसी सुविधा का इस्तेमाल करना मुश्किल कर दिया गया है।

इसके अलावा SIM खरीदने या इंटरनेट का उपयोग करने के लिए यदि कोई व्यक्ति फर्जी जानकारी देता है, तो इसके लिए उस पर ₹50 लाख तक जुर्माना और 3 वर्ष की सजा हो सकती है। फर्जी SIM से होने वाले अपराधों को देखते हुए इस नियम को इतना कठोर बनाया गया है।

अपने नाम से चल रहे SIM भी जानें

जहाँ एक ओर सरकार ने लोगों के SIM खरीदने को लेकर सीमा लगाई है, वहीं दूसरी तरफ उसने कुछ सुविधाएँ भी दी हैं। सरकार ने हाल ही में संचार सारथी नाम से वेबसाइट भी चालू की थी, इस पर आप उन नम्बरों को जान सकते हैं जो आपके आधार से जुड़े हुए हैं। इसके लिए आपको Sancharsaathi.gov.in पर जाकर अपना फोन नम्बर देना होगा। यह वेबसाइट आपके नंबर पर एक OTP भेजेगी, जिसके बाद आपको पता चल जाएगा कि आपके आधार पर कितने SIM चलाए जा रहे हैं।

इस वेबसाइट में उपयोग में ना लाए जाने वाले SIM को बंद करने और अपने आधार से हटाने की सुविधा भी है। साथ ही इस वेबसाइट से अपने खोए हुए मोबाइल को भी ढूँढने के लिए IMEI नम्बर ब्लॉक करवाया जा सकता है। इससे फोन का दुरूपयोग नहीं हो सकेगा।

‘आरोपितों के मौलिक अधिकारों के पक्ष में अदालत’: केरल हाई कोर्ट ने प्रतिबंधित इस्लामी संगठन PFI के 17 संदिग्धों को दी बेल, RSS नेता की हत्या में UAPA के तहत थे बंद

केरल हाई कोर्ट ने प्रतिबंधित इस्लामी कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के 17 संदिग्धों को जमानत दे दी है। इन चरमपंथियों के खिलाफ पलक्कड़ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नेता ए श्रीनिवासन की हत्या का आरोप है। साल 2022 में हुई इस हत्या के मामले में इन आरोपितों के खिलाफ UAPA के तहत आरोप पत्र दायर किया गया था।

जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार (25 जून 2024) को न्यायमूर्ति एके जयशंकरन नांबियार और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वीएम की पीठ ने कहा, “इस विश्वास पर पहुँचते हुए कि आरोपित व्यक्तियों के खिलाफ आरोप प्रथम दृष्टया सत्य हैं, अदालत को आरोपित के मौलिक अधिकारों के पक्ष में झुकना होगा, न कि उन अधिकारों पर लगाए जा सकने वाले प्रतिबंधों के पक्ष में।”

इन आरोपियों को जमानत देते हुए हाई कोर्ट ने उन पर कड़ी शर्तें लगाई हैं। उन्हें अपने मोबाइल नंबर और रियल-टाइम जीपीएस लोकेशन जाँच अधिकारी के साथ साझा करने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा, आरोपितों से कहा गया है कि वे केरल नहीं छोड़ेंगे। अपने पासपोर्ट जमा करवाएँगे और अपने मोबाइल फोन को चौबीसों घंटे चालू रखेंगे।

हालाँकि, पीठ ने इस के से जुड़े नौ अन्य आरोपितों को जमानत देने से इनकार कर दिया है। बता दें कि 51 आरोपितों में से अब तक केवल 44 को ही गिरफ्तार किया जा सका है। ये सभी श्रीनिवासन की हत्या में शामिल थे। जाँच एजेंसी NIA के अनुसार, गिरफ्तार किए गए कुछ लोग आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए PFI कैडरों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देने में शामिल थे।

दरअसल, श्रीनिवासन की हत्या 16 अप्रैल 2022 को कर दी गई थी। इस हत्या में प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और उसकी राजनीतिक शाखा सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) से जुड़े लोगों की संलिप्तता सामने आई थी। श्रीनिवासन की हत्या पीएफआई नेता सुबैर की हत्या के प्रतिशोध में की गई थी।

आरएसएस पदाधिकारी श्रीनिवासन पर एक गिरोह ने मेलमुरी में उनकी मोटरसाइकिल की दुकान के पास उनपर तलवार और चाकुओं से हमला कर दिया था। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया था कि श्रीनिवासन पर 20 बार तलवार से वार किए गए थे। उनके पूरे शरीर में जख्म के निशान थे।

आरएसएस नेता की हत्या के बाद स्थानीय लोगों ने आसपास के इलाकों में दुकानें बंद करा दी और पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी थी। टीवी चैनल द्वारा प्रसारित आस-पास की दुकानों के सीसीटीवी फुटेज से पता चला था कि हमलावर तीन मोटरसाइकिल पर सवार होकर दुकान पर पहुँचे थे और उनमें से तीन ने श्रीनिवासन पर हमला किया था।

इससे पहले, 15 नवंबर, 2021 को, आरएसएस कार्यकर्ता संजीत पर SDPI के कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया था। उस समय वह अपनी पत्नी के साथ बाइक पर जा रहे थे। पलक्कड़ जिले के एल्लापल्ली में चार लोगों ने उनकी बेरहमी से हत्या कर दी।

अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में योग करने वाली इंस्टाग्राम इंफ्ल्यूएंसर ने SGPC को ललकारा, FIR वापस नहीं लेने पर कानूनी कार्रवाई की दी चेतावनी: कहा- मेरा काम प्रभावित हो रहा

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के दिन अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में योग करने वाली जिस लड़की अर्चना मकवाना को रेप और हत्या की धमकी दी जा रही है और एफआईआर दर्ज करा दी गई है, वो अब खुलकर लड़ाई का ऐलान कर चुकी है। अर्चना मकवाना ने डरने की जगह कहा है कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी उनके खिलाफ दर्ज कराई शिकायत वापस ले, वर्ना वो कानूनी कार्रवाई करेगी। बता दें कि अर्चना मकवाना ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के दिन स्वर्ण मंदिर में योग किया था, जिसका वीडियो उन्होंने शेयर किया था। इसके बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

अर्चना मकवाना ने इंटाग्राम पर वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, “जब मैं 21 जून 2024 को स्वर्ण मंदिर अमृतसर में शीर्षासन कर रही थी, तो 1000 सिख लोग मुझे देख रहे थे। किसी ने भी मुझे नहीं रोका या इस पर आपत्ति नहीं जताई। वास्तव में जिन सज्जन ने मेरी तस्वीर ली, वे स्वयं एक सरदारजी थे, उन्हें यह अपमानजनक नहीं लगा, उन्होंने मुझे ऐसा करने से नहीं रोका, जो लोग इसे लाइव देख रहे थे, वे भी नाराज नहीं हुए, फिर मैं सोच रही हूँ कि यह गलत कैसे हो सकता है और इससे किसी की धार्मिक भावनाओं को कैसे ठेस पहुँची है?”

उन्होंने आगे लिखा, “स्थानीय लोग जो हर रोज मंदिर आते हैं, वे नियमों को नहीं जानते हैं, फिर वे कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि पहली बार पंजाब की यात्रा करने वाली एक हिंदू लड़की नियमों को जानती होगी, खासकर जब किसी ने मुझे नहीं रोका। मुझे नहीं पता कि इसके पीछे एसजीपीसी का क्या प्रोपेगेंडा है, लेकिन मैं परेशान हो रही हूँ। मेरे खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को रद्द की जानी चाहिए, क्योंकि इस एफआईआर का कोई आधार नहीं है, ये सिर्फ इसलिए है क्योंकि एसजीपीसी कमेटी ने पुलिस को सही तथ्य नहीं बताए इसलिए उन्होंने (पुलिस ने) इसे स्वीकार कर लिया।”

मकवाना ने आगे लिखा, “मैंने इस मुद्दे को शांतिपूर्वक सुलझाने की कोशिश की, लेकिन वे इसे समझते नहीं दिख रहे हैं। इससे मेरा व्यवसाय प्रभावित हो रहा है और मैं इसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करूँगी। जो भी मुझसे सहमत हैं और मेरा समर्थन करना चाहते हैं, कृपया उनके खिलाफ आवाज उठाएँ और पंजाब पुलिस को लिखकर एफआईआर को रद्द करने की माँग करें। आपका समर्थन बहुत सराहनीय होगा। हर हर महादेव।”

बता दें कि योग दिवस (21 जून) के मौके पर श्री हरमिंदर साहिब गुरुद्वारे (स्वर्ण मंदिर) के भीतर जाकर ‘शीर्षासन’ करने वाली इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर अर्चना मकवाना के विरुद्ध अमृतसर में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने शिकायत दर्ज कराई थी। संगठन ने अर्चना पर धार्मिक भावनाएँ आहत करने का आरोप लगाकर उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। इसके अलावा उनकी तस्वीरें वायरल होने के बाद उन्हें रेप और जान से मारने की धमकियाँ भी मिल रही हैं। इस सबंध में इन्फ्लुंसर ने खुद अपने सोशल मीडिया पर आकर बताया। साथ ही जानकारी दी कि इन धमकियों के मद्देनजर उन्हें गुजरात की वडोदरा पुलिस ने बिन माँगे सुरक्षा मुहैया कराई है जिसके लिए वह उनकी आभारी हैं।

पंजाब की आर्थिक हालत खस्ता, फिर भी CM मान ने जालंधर में किराए पर लिया ‘आलीशान शीशमहल’, कहा- सेवा करूँगा: पहले चुनाव का दिया था हवाला

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राजधानी चंडीगढ़ के अलावा अब जालंधर में रहने के लिए एक आलीशान बंगला किराए पर लिया है। CM मान ने बंगला किराए पर लेने का उद्देश्य इस इलाके के लोगों की सेवा बताया है। इससे कुछ दिन पहले उन्होंने विधानसभा उपचुनाव की वजह से जालंधर में घर किराए से लेने की बात कही थी। आलीशान कोठी किराए पर लेने का यह फैसला तब लिया गया है जब पंजाब भारी आर्थिक संकट से जूझ रहा है और आए दिन केंद्र सरकार से मदद माँग रहा है।

CM भगवंत मान ने एक्स (पहले ट्विटर) पर बंगला किराए पर लेने सम्बन्धी जानकारी दी है। उन्होंने लिखा, “पिछले दिनों मैंने कहा था कि मैं जालंधर में एक मकान किराए पर ले रहा हूँ। मैं आज अपने परिवार के साथ जालंधर में एक मकान में आया गया हूँ। माझे और दोआब इलाके के लोगों को अब चंडीगढ़ नहीं जाना पड़ेगा, उनकी समस्याएँ यहीं से दूर हो सकेंगी। हम लोगों की परेशानी कम करने और सरकार से संपर्क स्थापित करने के हर संभव प्रयास कर रहे हैं।”

भगवंत मान ने इसके साथ कुछ तस्वीरें भी साझा की जिसमें वह अपनी पत्नी डॉ गुरप्रीत कौर और बेटी नियामत कौर के साथ नजर आए। उन्होंने बताया है कि वह अब प्रत्येक सप्ताह दो दिन इस मकान में रहेंगे। यह आलीशान बंगला लुधियाना के फगवाड़ा रोड पर स्थित है और इसमें पाँच बेडरूम हैं।

यह बंगला लगभग 32,000 स्क्वायर फीट (120 मारला) में बना है। बंगला जालंधर के डॉक्टर रणबीर सिंह का है और एक कॉलोनी में स्थित है, इस कॉलोनी में अभी और घर नहीं बने हैं। इसकी सुरक्षा बढ़ाने को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए हैं।

जहाँ पंजाब के मुख्यमंत्री ने इस कई एकड़ के बंगले को महीने के 8 दिन के लिए अपना आशियाना बनाने का निर्णय लिया है, वहीं राज्य की आर्थिक हालत सुधरने का नाम नहीं ले रही। पंजाब पर कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है।

AAP शासित पंजाब का कर्ज 2024-25 में ₹3.74 लाख करोड़ हो जाने का अनुमान है। जब AAP पंजाब की सत्ता में आई थी तो यह कर्ज ₹2.82 लाख करोड़ था। यानी इसमें AAP के तीन वर्ष के शासनकाल में लगभग ₹92,000 करोड़ की वृद्धि होती दिख रही है।

यह कर्ज पंजाब की जीडीपी का लगभग 46% है जो कि बड़े राज्य में सबसे अधिक है। नियमों के अनुसार इसे 20% के आसपास होना चाहिए। CM मान इससे पहले केंद्र सरकार को पत्र लिख कर पंजाब के कर्ज पर पाँच साल के लिए राहत की माँग कर चुके हैं। पंजाब सरकार केंद्र सरकार से आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए विशेष पैकेज की मांग करती आई है और अब यह नया आलीशान घर किराए पर लेने का फैसला लिया गया है।

पंजाब की आर्थिक हालत को देखते हुए प्रश्न उठ रहे है कि इस आलीशान बंगले का किराया भगवंत मान खुद देंगे या फिर इसका खर्च आर्थिक संकट में फंसी पंजाब सरकार देगी। इसके अलावा इस बंगले को किराए पर लेने की टाइमिंग और असल मकसद पर भी कयास लगाए जा रहे हैं।

दरअसल, जिस जालंधर शहर में CM मान ने यह बंगला किराए पर लिया है, वहीं की एक विधानसभा पर उपचुनाव हो रहा हैं। CM मान ने बंगला किराए पर लेने के बाद जहाँ कारण लोगों की सेवा बताया है, वहीं इससे पहले वह घर किराए पर का कारण उपचुनाव बता रहे थे।

नोएडा में इंटरनेशनल फिल्म सिटी का सपना साकार करेंगे बोनी कपूर, 1000 एकड़ में फैला होगा, ₹1500 करोड़ होंगे खर्च: YEIDA से समझौता हुआ, हजारों को मिलेंगे रोजगार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट फिल्म सिटी को बनाने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) में फिल्म सिटी बनाने को लेकर गुरुवार (27 जून 2024) को बेव्यू प्रोजेक्ट्स एवं भूटानी समूह ने यमुना विकास प्राधिकरण के साथ समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए। बेव्यूज प्रोजेक्ट्स फिल्ममेकर बोनी कपूर की कंपनी है।

बोनी कपूर गुरुवार (27 जून 2024) को ग्रेटर नोएडा आए। इस दौरान भूटानी समूह के आशीष भूटानी और बोनी कपूर ने ग्रेटर नोएडा में प्राधिकरण के कार्यालय में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) के सीईओ अरुण वीर सिंह और अतिरिक्त सीईओ शैलेन्द्र भाटिया की मौजूदगी में समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही फिल्म सिटी का मॉडल भी प्रस्तुत किया।

इस फिल्म सिटी को 1500 करोड़ रुपए की लागत से लगभग 1000 एकड़ में विकसित किया जाएगा। बोनी कपूर और भूटानी ग्रुप मिलकर आने वाले 6 महीनों के भीतर फिल्म सिटी के निर्माण का कार्य शुरू करेंगे। पहले फेज का काम शुरू करने के लिए आवंटित जमीन भी सौंप दी गई है। इस फेज में करीब 230 एकड़ जमीन को भूटानी समूह द्वारा विकसित किया जाएगा।

जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास ही नोएडा फिल्म सिटी बनेगी। वहाँ से फिल्म सिटी की दूरी सिर्फ 6 किलोमीटर है। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से इसकी दूरी सिर्फ 12 किलोमीटर है। नोएडा फिल्म सिटी के बनकर तैयार हो जाने से यहाँ रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इंडस्ट्री को नए टैलेंट भी मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही नोएडा नई फिल्म नगरी के रूप में उभरेगी।

इस फिल्म सिटी को विकसित करने के लिए बोनी कपूर ने कई देशों का दौरा किया और वहाँ की फिल्म सिटी का अध्ययन किया है। कंपनी ने फिल्म सिटी का नया मॉडल तैयार किया है। इसके डिजाइन और निर्माण का पूरा कार्य कंपनी की जिम्मेदारी है। कंपनी फिल्म सिटी के डिजाइन और तय प्रस्तावों में कोई बदलाव नहीं कर सकेगी।

फिल्म सिटी का निर्माण शुरू करने से पहले कंपनी को सुरक्षा राशि के रूप में प्राधिकरण में 80 करोड़ रुपए जमा करने होंगे। इससे वहाँ सड़क-बिजली सहित सुविधाएँ तैयार की जाएँगी। इसके अलावा, फिल्म सिटी से होने वाली आय का 18 फीसदी प्राधिकरण को मिलेगा।

जिसको तड़पा-तड़पाकर मारा उसकी गर्भवती पत्नी लगा रही न्याय की गुहार, इधर पुलिस की कैद में भी मेकअप कर रही हिरोइन पवित्रा: गिरफ्तारी के बाद मुस्कुराती दिखी थी

रेणुकास्वामी तड़प-तड़पकर मर गया। कन्नड़ हीरो दर्शन का फैन होना उसकी जिंदगी को लील गया। उसकी गर्भवती पत्नी न्याय की गुहार लगा रही है। दूसरी ओर इस हत्या में गिरफ्तार हिरोइन पवित्रा गौड़ पुलिस की हिरासत में भी मेकअप कर रही है। वैसे पवित्रा के लिए ये बेशर्मी नई नहीं है। जब उसे गिरफ्तार किया गया था वह तब भी मुस्कुरा रही थी।

पिछले दिनों कर्नाटक में हुए फैन मर्डर केस की मुख्य आरोपिता कन्नड़ एक्ट्रेस पवित्रा गौड़ा पुलिस की हिरासत में मेकअप में हँसते हुए मीडिया के सामने आई थीं। उनकी फोटो देखने के बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठे थे कि इतना बड़ा कांड करने के बाद उन्हें कोई पछतावा तक नहीं है। अब उनकी उसी फोटो को लेकर एक महिला सब-इंस्पेक्टर को कर्नाटक पुलिस ने नोटिस जारी किया है

कर्नाटक पुलिस ने नोटिस में महिला पुलिस इंस्पेक्टर से जवाब माँगा है कि जिस दिन पवित्रा को उनके घर से थाने लेकर आना था उस दिन उन्होंने उसे मेक अप क्यों करने दिया। कर्नाटक पुलिस ने इस लापरवाही के लिए जवाब माँगा है। साथ ही कहा है कि जब पवित्रा ऐसा कर रही थीं तो उन्हें रोका जाना चाहिए था।

पुलिस ने बताया है कि उस दिन जब महिला पुलिस पवित्रा को लेने गई थीं तो उसने वॉशरूम जाने की परमिशन माँगी थी। इसके बाद वो जब निकली तो उसके चेहरे पर मेकअप था। उन्होंने यह भी बताया कि पवित्रा जब पुलिस कस्टडी के दौरान महिला राज्य गृह में सोने के लिए जाती है तो आते हुए मेक अप लगाती है।

ये भी जानकारी दी गई कि पवित्रा गौड़ा हर रात को स्टेट होम में रुकती थी, जहाँ वह शायद अपना मेकअप बैग रखती थी। महिला पीएसआई हर दिन सुबह वहाँ जाकर उसे एपी नगर पुलिस स्टेशन लेकर जाती थी। ऐसे में महिला पीएसआई पवित्रा को रोक सकती थी। उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया, इसीलिए उन्हें नोटिस भेजा गया है।

कर्नाटक रेणुकास्वामी मर्डर केस

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक में रेणुकास्वामी नाम के फैन को मारने के आरोप में कन्नड़ के मशहूर अभिनेता दर्शन, उनकी पत्नी पवित्रा और उनके अन्य 15 लोग न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस की जाँच में यही सामने आया है कि रेणुकास्वामी अपने पसंदीदा एक्टर दर्शन का घर टूटते नहीं देख सकता था, इसी खुंदस में उसने पवित्रा को गंदे मैसेज भेजना शुरू किया और जब दर्शन को इस बारे में पता चला तो उसने अपने साथियों से कहकर रेणुकास्वामी का अपहरण करवाया और फिर उसे निर्ममता से मौत के घाट उतार दिया गया। बाद में शव को नाले किनारे फेंक दिया गया।

अब मालदीव में बाहर आया ‘काला जादू’ का जिन्न, अपने ही राष्ट्रपति का ‘वशीकरण’ करने में लगी थी महिला मंत्री फातिमा: 2 साथियों के साथ हुई गिरफ्तार

मालदीव में दावा किया जा रहा है कि महिला मंत्री अपने राष्ट्रपति पर ही काला जादू करवा रही थी, ताकि वो राष्ट्रपति के और भी करीब जा सके। यही नहीं, इन करीबियों का इस्तेमाल कर वो और भी ज्यादा ताकत हासिल करना चाहती थी, लेकिन अब उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित राज्यमंत्री का नाम फातिमाथ शमनाज है, जो मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की पुरानी सहयोगी है। वो मुइज्जू के माले के मेयर रहने के दौरान सिटी काउंसिल की सदस्य रह चुकी है और मौजूदा सरकार में मंत्री है, लेकिन और भी ज्यादा ताकतवर बनने की चाह में अब सलाखों के पीछे पहुँच चुकी है।

अल अरबिया ने एएफपी के हवाले से बताया है कि मालदीव की पर्यावरण राज्य मंत्री फातिमाथ शमनाज को राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू पर काला जादू करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। फातिमाथ के अलावा 2 और लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कोर्ट ने सभी को 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है। हालाँकि, मालदीव की सरकार की तरफ से अब तक इस मामले में कोई बयान नहीं दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने फातिमाथ के घर की तलाशी ली थी। इस दौरान वहाँ से काला जादू से जुड़ा काफी सामान बरामद हुआ था। फातिमाथ राष्ट्रपति कार्यालय में काम करने वाले मंत्री एडम रामीज की बीवी हैं। फातिमाथ इससे पहले भी राष्ट्रपति मुइज्जू के साथ माले की सिटी काउंसिल की सदस्य रह चुकी हैं। तब मुइज्जू राजधानी माले के मेयर थे। पिछले साल उनके राष्ट्रपति बनने के बाद फातिमाथ ने भी काउंसिल से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वह राष्ट्रपति के आधिकारिक निवास मुलिआज की राज्य मंत्री बन गई। बाद में उन्हें ट्रांसफर कर पर्यावरण मंत्रालय में शिफ्ट कर दिया गया।

बता दें कि मालदीव में काले जादू को फंदिता या सिहुरु नाम से जाना जाता है। इस्लामिक कानूनों में इसे हराम कहा गया है और काला जादू करने वालों के खिलाफ सख्ती से निपटा जाता है। हालाँकि बताया ये जा रहा है कि मालदीव में काला-जादू जैसी चीजों की जड़ें काफी गहरी हैं। ऐसे ही एक मामले में करीब एक महीने पहले मुइज्जू की पार्टी के एक नेता पर काला जादू करने के मामले में 60 साल के बुजुर्ग को गिरफ्तार किया था।