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दवा लेने जा रही थी दलित महिला, अनवर ने साथियों संग मिल किया गैंगरेप, फिर बेरहमी से पीटा: लखनऊ पुलिस ने किया गिरफ्तार, 6 की तलाश जारी

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक दलित महिला से गैंगरेप का मामला सामने आया है। इस मामले में कुल 7 आरोपितों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज करवाई गई है। शिकायत में मोबाइल छीन लेने और बेरहमी से पिटाई किए जाने का भी आरोप है। मुख्य आरोपित का नाम अनवर है जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य 6 आरोपित फरार है जिनकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है। घटना मंगलवार (25 जून 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला लखनऊ के थानाक्षेत्र सुशांत गोल्फ सिटी का है। यहाँ 3 बच्चों की माँ ने मंगलवार को अपने साथ गैंगरेप का आरोप लगाकर कुल 7 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई है। शिकायत में 30 वर्षीया पीड़िता ने बताया है कि वह बेहद गरीब परिवार की है। उसका पति ऑटो चलाकर परिवार का गुजारा करता है।

दावा है कि मंगलवार (25 जून 2024) को वह दवा लेने सुशांत गोल्फ सिटी के सरकारी अस्पताल में जा रही थी। खुर्दही बाजार के पास पहले से मौजूद 7 लोगों ने पीड़िता को पकड़ लिया। इन सभी में पीड़िता ने अनवर को मुख्य आरोपित बताया है। सभी आरोपित महिला को पास की बाग़ में उठा ले गए। यहाँ इन्होने बारी-बारी महिला से गैंगरेप किया। जब पीड़िता ने आरोपितों की हरकतों का विरोध किया तो उसकी बेरहमी से पिटाई की गई। महिला का मोबाइल भी आरोपितों ने छीन लिया। जैसे-तैसे पीड़िता ने पुलिस स्टेशन पहुँच कर अपने साथ हुई घटना के बारे में बताया। पुलिस टीम ने फ़ौरन ही मामले का संज्ञान लिया और घटनास्थल की तरफ रवाना हुई। सभी आरोपित तब तक फरार हो चुके थे।

पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने 30 वर्षीय अनवर सहित कुल 7 आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज किया। इन सभी पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 (डी) और 506 के साथ SC/ST एक्ट के सेक्शन 3(2)(V) के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस टीमों का गठन कर के आरोपितों की तलाश में छापेमारी शुरू कर दी गई। आखिरकार 26 जून (बुधवार) को मुख्य आरोपित अनवर को लखनऊ के ही सुल्तानपुर रोड से तब दबोच लिया गया जब वो कहीं भागने की फिराक में था। आरोपित का रिमांड लेने के प्रयास किए जा रहे हैं जिससे घटना के बारे में विस्तार से पूछताछ की जा सके। फरार चल रहे अन्य आरोपितों की तलाश की जा रही है।

बीजेपी के वरिष्ठतम नेता लाल कृष्ण आडवाणी की तबियत खराब, दिल्ली के एम्स में भर्ती: तीन माह पहले ही उनके घर जाकर राष्ट्रपति ने दिया था ‘भारत रत्न’

भाजपा के वरिष्ठ नेता और भारत रत्न लाल कृष्ण आडवाणी को बुधवार को दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया है। उन्हें रात साढ़े 10 बजे एम्स लाया गया। वरिष्ठ नेता को एम्स के ओल्ड प्राइवेट वार्ड में रखा गया है। उन्हें यूरोलॉजी से संबंधित परेशानी है। यूरोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. अमलेश सेठ उनका इलाज कर रहे हैं। एम्स ने अपने बयान में बताया कि लाल कृष्ण आडवाणी की हालत स्थिर है और उन्हें निगरानी में रखा गया है।

जानकारी के मुताबिक, 96 वर्षीय आडवाणी उम्र संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं, इसलिए उनका समय-समय पर घर पर ही चेकअप किया जाता है। बुधवार (26 जून 2024) देर शाम को उन्हें कुछ दिक्कत महसूस हुई, जिसके बाद तुरंत उन्हें एम्स ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें अपनी निगरानी में भर्ती कर लिया। उनकी तबीयत अब ठीक बताई जा रही है।

बता दें कि लाल कृष्ण आडवाणी को इसी वर्ष भारत सरकार द्वारा देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिल्ली में आडवाणी को उनके आवास पर जाकर ‘भारत रत्न’ प्रदान किया था। औपचारिक समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और लालकृष्ण आडवाणी के परिवार के सदस्य शामिल हुए थे।

लाल कृष्ण आडवाणी ने जून 2002 से मई 2004 तक भारत के उप-प्रधानमंत्री और अक्टूबर 1999 से मई 2004 तक केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में कार्य किया। लाल कृष्ण आडवाणी कई बार 1986-1990, 1993-1998 और 2004-2005 तक बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे।

लाल कृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को सिंध प्रांत (पाकिस्तान) में हुआ था। उन्होंने कराची के सेंट पैट्रिक्स स्कूल से पढ़ाई की है। 1942 में उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान गिडूमल नेशनल कॉलेज में दाखिला लिया। इसके बाद उन्होंने 1944 में कराची के मॉडल हाई स्कूल में बतौर शिक्षक नौकरी की। साल 1947 में देश का बंटवारा होने के बाद आडवाणी का परिवार भारत आ गया। उनके दो बच्चें हैं, जिनका नाम प्रतिभा और जयंत हैं।

सैम ‘हुआ तो हुआ’ पित्रोदा को फिर से बनाया गया ओवरसीज कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष, सच हुई PM मोदी की भविष्यवाणी: भारतीयों पर नस्लवादी टिप्पणी कर चुके हैं सत्यनारायण गंगाराम

कॉन्ग्रेस पार्टी ने एक बार फिर से सत्यनारायण गंगाराम पित्रोदा को अपनी ओवरसीज शाखा के अध्यक्ष के पद पर बहाल कर दिया है। लोकसभा चुनाव 2024 के प्रचार अभियान के दौरान उनके बयानों से पार्टी की जम कर भद्द पिटी थी, जिस कारण उनसे इस्तीफा दिलवा दिया गया था। अब फिर से वो ‘इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस’ के अध्यक्ष रह चुके हैं। बुधवार (26 जून, 2024) को ये ऐलान किया गया। सैम पित्रोदा ने भारत के नागरिकों पे आपत्तिजनक नस्लवादी टिप्पणी की थी।

उन्होंने भारत के नागरिकों की तुलना चीन, अरब, श्वेत और अफ़्रीका के लोगों से की थी। उन्होंने विविधता और लोकतंत्र की बातें करते हुए इसकी आड़ में ऐसा किया था। उन्होंने कहा था कि पूर्वी भारत के लोग चीनी जैसे दिखते हैं, पश्चिमी भारत के लोग अरबी जैसे, उत्तर भारतीय श्वेत जैसे और दक्षिण भारतीय अफ़्रीकी जैसे दिखते हैं। इसी तरह उन्होंने इनहेरिटन्स टैक्स लगाए जाने का भी समर्थन किया था। उनका कहना था कि किसी के मरने के बाद उसकी संपत्ति के एक बड़े हिस्से पर सरकार का कब्ज़ा होना चाहिए।

सैम पित्रोदा 1984 में हुए सिखों के नरसंहार को भी ‘हुआ तो हुआ’ कह कर जायज ठहरा चुके हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद कॉन्ग्रेस नेताओं ने सिखों का खूब बहाया था, उनके बेटे राजीव गाँधी ने कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है। राजीव गाँधी के काल में 1989 में उन्हें ‘टेलीकॉम कमीशन’ का पहला अध्यक्ष बनाया गया था। 2005 में तत्कालीन PM मनमोहन सिंह ने उन्हें ‘नेशनल नायलेज कमीशन’ का मुखिया बनाया। 2009 में उन्हें कैबिनेट मंत्री का रैंक देते हुए ‘इन्फॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर’ के क्षेत्र में प्रधानमंत्री का सलाहकार बनाया गया था

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही उन्हें पुनः स्थापित किए जाने की भविष्यवाणी कर दी थी। उन्होंने सैम पित्रोदा को अमेरिका में राहुल गाँधी का गुरु बताते हुए कहा था कि उनसे इस्तीफा दिलवा दिया गया है, लेकिन कुछ दिनों बाद उन्हें फिर से वापस ले लिया जाएगा। पीएम मोदी ने इसे सोची-समझी रणनीति बताते हुए कहा था कि वो देश में भ्रम का वातावरण फैलाते हैं, वो चालाकियाँ करते रहते हैं। 99 सीटें आने से उत्साहित कॉन्ग्रेस अब फिर से सैम पित्रोदा को वापस लाई है।

4% जनसंख्या वाले मुस्लिमों ने गाँव का नाम बदल कर रख दिया ‘इस्लाम नगर’, ब्रह्म स्थान को बना चुके हैं मदरसा चौक: वामपंथी दल के शह पर हिंदुओं से मारपीट

नेपाल के रौतहट जिले में साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। यहाँ लगभग एक सप्ताह पहले मुस्लिमों ने एक गाँव का नाम इस्लाम नगर रखकर इससे बोर्ड लगवा दिया। जानकारी मिली तो हिन्दुओं ने इसका विरोध करते हुए 23 जून 2024 को इस बोर्ड को उखाड़ फेंका। इसके बाद मुस्लिमों हिन्दू समुदाय के कुछ युवाओं की पिटाई कर दी। इसकी जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची।

यह मामला रौतहट जिले के गरुडा नगरपालिका वॉर्ड नंबर 6 का है। यहाँ के गाँव पोठियाही में सप्ताह भर पहले मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक चौराहे पर इस्लाम नगर का बोर्ड लगा दिया। यह बोर्ड बाकायदा हरे रंग में रंगा गया था। इसके ऊपर अरबी और उर्दू भाषा में कई शब्द लिख दिए गए थे। बोर्ड के ऊपर दोनों तरफ इस्लामी इबादतगाहों की तस्वीरें भी छाप दी गई थीं।

यहाँ पर खड़े होकर एक मुस्लिम बुजुर्ग ने एक सेल्फी भी ली थी, बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। कहा जा रहा है कि स्थानीय मुस्लिम इस जगह को अपनी तरफ से इस्लाम नगर कह कर बुलाने भी लगे थे। घटना के दिन मौके पर पहुँचकर मुस्लिमों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। हिंदू पक्ष ने नेपाल प्रशासन पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाया है।

मुस्लिम आबादी महज 4%, लेकिन उनका ही दबदबा

ऑपइंडिया ने नेपाल के संगठन ‘हिन्दू सम्राट सेना’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश यादव से बात की। उन्होंने बताया कि पोठियाही गाँव में मुस्लिमों के महज 10 घर हैं, जो कि गाँव की कुल आबादी का महज 4% है। इसके बावजूद इन्होंने पूरे पोठियाही गाँव के नाम को बदलने की साजिश रच डाली थी। 23 जून को हिन्दू सम्राट सेना के सदस्यों ने स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर इस्लाम नगर वाले इस बोर्ड को उखाड़ दिया।

उन्होंने कहा कि उस दौरान मुस्लिम पक्ष के लोग खामोश रहे, लेकिन अंदर ही अंदर वो हिंसा फैलाने की साजिश रच रहे थे। 25 जून (मंगलवार) की रात को तीन हिन्दू युवक चौराहे से गुजर रहे थे। इस दौरान उनको लगभग एक दर्जन मुस्लिमों ने घेर लिया। उन पर इस्लाम नगर वाला बोर्ड उखाड़ने का आरोप लगाकर पहले गंदी-गंदी गालियाँ दी गईं और बाद में उनकी पिटाई कर दी गई।

इस हमले में हिंदू समुदाय के युवक बुरी तरह घायल हो गए। घायल हिन्दू युवकों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। हिंसक भीड़ को चाँद दीवान, रफीक, सिराजुल और मंजूर आदि लोग लीड कर रहे थे। इस हमले की जानकारी मिलते ही आसपास के हिन्दू नाराज हो गए। हिन्दुओं ने एकजुट होकर इस हमले का विरोध किया। इस बीच मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर प्रशासनिक अधिकारी पहुँच गए।

हमलावरों को ही मिल गई पुलिस सुरक्षा

हिंदू पक्ष का आरोप है कि पुलिस ने हमला करने वाले मुस्लिमों पर कोई कार्रवाई नहीं की। इतना ही नहीं, उन मुस्लिम परिवारों को ही पुलिस ने बजाय सुरक्षा दे दी, जिन्होंने हमला किया था। नेपाल प्रशासन इस घटना को आपसी विवाद बताकर मामले पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहा है। पुलिस का कहना है कि मामले में कोई साम्प्रदायिक एंगल नहीं है।

हालाँकि हिन्दू संगठनों ने इसे मामले को रफा-दफा करने की कोशिश बताया है। उनका कहना है कि अधिकारी नेपाल के वामपंथी राजनैतिक दल एमाले पार्टी के दबाव में काम कर रहे हैं। स्थानीय हिन्दुओं ने नेपाल सरकार की प्रचंड सरकार एवं वामपंथी पार्टी पर इस कदम को मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति बताया है। इस घटना के बाद से इलाके में तनाव है।

ब्रह्म स्थान का नाम रख चुके हैं मदरसा चौक

राजेश यादव ने हमें बताया कि वो अपने संगठन हिन्दू सम्राट सेना व कुछ अन्य संगठनों के साथ 27 जून (गुरुवार) को शासन को ज्ञापन सौपेंगे। उन्होंने कहा कि इस ज्ञापन में गाँव का ना्म बदलकर इस्लाम नगर करने की साजिश का विरोध और 25 जून को हिन्दुओं पर हमला करने वाले मुस्लिमों पर कार्रवाई की माँग की जाएगी।

नेपाल में बना दिया मदरसा चौक

राजेश यादव ने हमें यह भी बताया कि 3 महीने पहले रौतहट जिले में ही इसी गरुडा नगर पालिका में जयनगर क्षेत्र में मुस्लिमों ने ऐसी ही साजिश रची थी। तब कुछ मुस्लिमों ने कदम चौक (ब्रह्म स्थान) का नाम बदलकर मदरसा चौक रख दिया था। यहाँ भी बाकायदा बोर्ड लगा दिया गया था, जो अभी तक ज्यों का त्यों लगा हुआ है। इस वार्ड का अध्यक्ष मुस्लिम है, जिसका नाम शेख वहाब है।


                

उधर सुप्रीम कोर्ट में दायर की अर्जी, इधर CBI ने किया गिरफ्तार… 3 दिनों के लिए जाँच एजेंसी की कस्टडी में भेजे गए अरविंद केजरीवाल, गवाहों से कराया जाएगा आमना-सामना

शराब घोटाले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 3 दिनों के लिए CBI की कस्टडी में रिमांड पर भेज दिया गया है। अदालत में पेशी के लिए लाए गए AAP संयोजक इस दौरान काफी निराश नज़र आए, साथ ही उनका चेहरा भी मुरझाया हुआ था। CBI ने उनके लिए 5 दिन की हिरासत माँगी थी, लेकिन 3 दिन की मिली। इसके साथ ही केंद्रीय जाँच एजेंसी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस पर सुरक्षित रखा अपना फैसला बुधवार (26 जून, 2024) को सुनाया।

बता दें कि निचली अदालत से अरविंद केजरीवाल को जमानत मिल गई थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने उनकी जमानत ख़ारिज कर दी थी। AAP कह रही है कि जानबूझकर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की थी। अरविंद केजरीवाल ने इससे मना किया है कि उन्होंने शराब नीति मनीष सिसोदिया द्वारा बनाए जाने की बात कही थी। सुप्रीम कोर्ट में मामला पेंडिंग है, इधर CBI ने एक्शन ले लिया। CBI द्वारा उन्हें गिरफ्तार किए जाने के पीछे गवाहों के बयान शामिल हैं।

वैकेशन जज अमिताभ रावल की कोर्ट ने ये फैसला सुनाया। अरविंद केजरीवाल की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम चौधरी ने कहा कि CBI पूर्व-नियोजित साजिश के तहत काम कर रही है, बिना किसी नोटिस के उन्हें इस मामले में आरोपित बना दिया गया जबकि वो जाँच में सहयोग कर रहे थे। CBI की तरफ से अधिवक्ता DP सिंह अदालत में पेश हुए और कहा कि साउथ लॉबी की मदद से बीच कोरोना महामारी में शराब नीति बनाई गई, पार्टी ने इसके लिए लोगों से टिप्पणियाँ माँगी लेकिन उसमें भी छेड़छाड़ की गई

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वो इस मामले में निर्दोष हैं और मनीष सिसोदिया भी निर्दोष हैं। पूर्व डिप्टी CM मनीष सिसोदिया भी जेल में बंद हैं। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दलाल विजय नायर मंत्रियों आतिशी और सौरभ भारद्वाज के अधीन काम कर रहा था। अब अरविंद केजरीवाल का अन्य गवाहों और सबूतों से सामने-सामना कराया जाएगा। इस मामले में बड़ी साजिश का पता लगाया जाएगा। रोज आधे घंटे के लिए केजरीवाल पत्नी और वकील से मिल सकेंगे, वो घर का खाना खा सकेंगे।

जामिया अरबिया मदरसे के मौलवी अजीजुल रहमान ने नाबालिग बच्चे से किया कुकर्म, मुँह खोलने पर जान से मारने की देता था धमकी: रामपुर पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में एक मदरसे के अंदर नाबालिग छात्र से अप्राकृतिक रेप किए जाने का मामला सामने आया है। कुकर्म का आरोप मौलाना अजीजुल रहमान पर लगा है। अजीजुल इस मदरसे में बच्चों को दीनी तालीम दिया करता था। कुकर्म के बाद वह छात्र को कहीं मुँह खोलने पर जान से मारने की धमकी देता था। आरोपित ने छात्र को अपने घर ले जाने की भी कोशिश करता था।

पीड़ित छात्र के पिता की तहरीर पर पुलिस ने मंगलवार (25 जून 2024) को FIR दर्ज कर ली। इसके बाद मौलाना अजीजुल को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला रामपुर जिले के अजीमनगर थाना क्षेत्र का है। यहाँ के गाँव नांगलिया अंकिल में जामिया अरबिया सिराजुल उलूम नाम का एक मदरसा है। इस मदरसे में रामपुर के ही मिलक खानम इलाके का एक 15 वर्षीय छात्र भी पढ़ता है।

मंगलवार (25 जून) को छात्र के पिता ने थाने में तहरीर दी। इसमें पिता ने कहा कि उसका बेटा मदरसे में मज़हबी तालीम लेता है। वहाँ मौलाना अजीजुल रहमान दीनी तालीम देता है। मौलाना उसी गाँव का निवासी है, जहाँ मदरसा बना हुआ है। शिकायत में पीड़ित छात्र के पिता ने बताया कि पिछले एक साल से मौलाना ने कई बार उसके बेटे का पैजामा उतार कर उसके साथ अप्राकृतिक रेप किया।

कुकर्म करने के लिए मौलाना कभी बच्चे को लालच देता था तो कभी धमकियाँ। कुकर्म के बाद अजीजुल बच्चे को मुँह बंद रखने की धमकी देते हुए कहता था कि किसी को बताने पर वो जान से मार देगा। सोमवार 24 जून को मौलाना पीड़ित छात्र पर अपने घर चलने का दबाव बनाने लगा। जैसे-तैसे छात्र मौलाना के चंगुल से छूटकर अपने घर पहुँचा।

घर पहुँच कर उसने अपने परिजनों को पूरी बात बता दी। पीड़ित छात्र के अब्बा ने अगले दिन मामले की शिकायत पुलिस में की। पुलिस ने शिकायतकर्ता की तहरीर पर मौलाना अजीजुल को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है। उस पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 और 506 के साथ पॉक्सो एक्ट के सेक्शन 3/4 के तहत कार्रवाई की गई है।

पुलिस टीमों का गठन कर के फ़ौरन ही मौलाना की तलाश शुरू कर दी गई। केस दर्ज होने के कुछ ही घंटों बाद 25 जून (मंगलवार) को आरोपित मौलाना को गिरफ्तार कर लिया गया। मामले में जाँच व अन्य कानूनी कार्रवाई की जा रही है। ऑपइंडिया के पास इस मामले से संबंधित शिकायत की कॉपी मौजूद है।

मणिपुर में फर्जी आधार कार्ड और वोटर आईडी बना-बना कर बसाए जा रहे घुसपैठिए, कार्रवाई में जुटी सरकार और जाँच एजेंसियाँ:

पिछले साल मणिपुर में कई महीनों तक हिंसा और आपसी संघर्ष का माहौल रहा। अब पुलिस ने वहाँ एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जो फर्जी आधार और वोटर आईडी कार्ड बना कर विदेशी घुसपैठियों को बसा रहा है। एक विशेष पुलिस टीम इन्हें ट्रैक कर रही थी, और हाल ही में कई आरोपित गिरफ्तार हुए हैं। पुलिस ने चुराचांदपुर से म्यांमार के 2 अवैध घुसपैठियों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से 2 फर्जी आईडी कार्ड मिले। पुलिस ऐसे कई मामलों की जाँच कर रही है।

ये अपराधी घुसपैठियों को बताते हैं कि उन्हें दस्तावेज में अपने पते के रूप में किस जगह का नाम लिखना है। दक्षिणी मणिपुर सरकार द्वारा कफ्रजी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का केंद्र है। राज्य सरकार कह चुकी है कि ये सिर्फ मणिपुर ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए खतरा हैं। म्यांमार में तानाशाही जुंटा सेना और लोकतंत्र समर्थकों के बीच हिंसा चल रही है। उसमें से कई भाग कर भारत पहुँच रहे हैं। मणिपुर में इनका बायोमेट्रिक्स रिकॉर्ड किए जाते हैं।

जी बायोमेट्रिक्स रिकॉर्ड कराने से बच जाते हैं, वो फर्जी आधार और वोटर आईडी बनाने वाले गिरोह से संपर्क करते हैं। सीमा पर स्थित जिलों जिरबाम और मोरेह जिलों से 2018 में 2 ऐसे गिरोह पकड़ाए थे। 10 गिरफ्तार आरोपितों में से 9 म्यांमार के मुस्लिम घुसपैठिए थे। वहीं तमिलनाडु की परिथा बेगम नामक एक महिला भी गिरफ्तार हुई थी। मोरेह में मोहम्मद तोम्बा के घर पर छापेमारी कर पुलिस ने 2 लैपटॉप, 4 आधार कार्ड, एक प्रिंटर मशीन, एक लैमिनेटिंग फिल्म मशीन, प्लास्टिक शीट्स, कई DVD और फोटो पेपर जब्त किया था।

मई 2018 में तो सिर्फ राजधानी इम्फाल में ही 98 घुसपैठियों को चिह्नित किया गया था। इसी तरह अक्टूबर 2021 में मणिपुर के टेंगनौपल में म्यांमार के 24 घुसपैठिए फर्जी दस्तावेजों के साथ धराए थे। इससे एक सप्ताह पहले इम्फाल एयरपोर्ट से फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल कर के दिल्ली जाने की कोशिश कर रहे थे। इसी तरह 2023 में 22-23 जुलाई को मात्र 2 दिनों में 700 से भी अधिक घुसपैठिए मणिपुर में घुस गए थे। फर्जी दस्तावेज वाले गिरोह से न सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा, बल्कि चुनावी प्रक्रिया को भी खतरा है।

2023 में कक्चिंग में कुकी ईसाइयों के ध्वस्त हुए घरों में से 1000 से भी अधिक फर्जी आईकार्ड जब्त किए गए थे। UIDAI ने आधार कार्ड्स की वेरिफिकेशन की प्रक्रिया तेज़ कर दी है। चुनाव आयोग से लेकर पुलिस तक सब मिल कर इस समस्या से निपटने के लिए काम कर रहे हैं। मणिपुर के 8 गाँवों में शेल्टर होम में रह रहे घुसपैठियों की संख्या उन गाँवों की जनसंख्या से भी ज़्यादा है। 2021 से ही म्यांमार से चीन-कुकी समुदाय के लोग पलायन कर मणिपुर में आ रहे हैं।

इससे वहाँ की डेमोग्राफी बदल रही है, खुद संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इसकी चर्चा कर चुके हैं। कुकी-जो समुदाय अपने लिए अलग केंद्र शासित प्रदेश माँग रहा है। ‘इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (ITLF)’ ने अमित शाह से मिल कर ये माँग रखी थी। Zo लोगों को ज़ोमी या चीन-कुकी-मिजो भी कहा जाता है। इनमें से अधिकतर म्यांमार के चीन पहाड़ी से आए हैं। कई अपराधों में ये शामिल रहे हैं। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना कह चुकी हैं कि अमेरिका इन ईसाइयों के लिए अलग मुल्क बनाने की साजिश रच रहा है।

बुर्कानशीं लड़की से बात कर रहा था आकाश, कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने घेर कर मारा-पीटा: लड़की का बाल पकड़कर खींचा, वीडियो वायरल

महाराष्ट्र के संभाजीनगर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में कुछ लोगों द्वारा एक युवक को बेरहमी से पीटते देखा जा सकता है। पास ही में एक बुर्कानशीं महिला भी खड़ी दिख रही है। कहा जा रहा है कि पीड़ित हिन्दू युवक है। इस बुर्के वाली महिला से बात करने के कारण मुस्लिम भीड़ उसे पीट रही है। घटना मंगलवार (25 जून 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला संभाजीनगर के थाना क्षेत्र सिटी चौक के लेबर कॉलोनी का है। दावा किया जा रहा है कि यहाँ मंगलवार की दोपहर को 22 साल का एक हिन्दू युवक सूबेदारी रेस्ट हाउस के पास किसी मुस्लिम महिला से सड़क पर खड़े होकर बात कर रहा था। इसी बीच 40-50 मुस्लिम युवकों का एक झुंड वहाँ पहुँच गया। झुंड को देखकर मुस्लिम युवती ने लड़के को भागने के लिए कहा।

हालाँकि, मुस्लिमों की भीड़ ने आकाश को घेर लिया और उसे गालियाँ देते हुए पिटाई शुरू कर दी। इस दौरान महिला से भी अभद्रता की गई। आरोपितों द्वारा पीड़िता के बालों को पकड़ा गया और उसे अपशब्द बोले गए। युवक को पीटते हुए यह भीड़ सड़क से हट कर पार्क तक पहुँच गई। पीड़ित को पूरे शरीर में घूँसे और पैरों से मारा गया। पीड़िता की पहचान आकाश के रूप में हुई है।

इस दौरान पीड़ित युवक और महिला हमलावरों को समझाने की कोशिश करते रहे, लेकिन उन पर कोई असर नहीं पड़ा। बताया जा रहा है कि घटना से इलाके में तनाव फैल गया है। इस हमले की वीडियो किसी ने बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दी। कुछ ही देर में यह वीडियो वायरल हो गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हमलावरों पर कड़ी कार्रवाई की माँग उठने लगी।

वायरल वीडियो का पुलिस ने भी संज्ञान लेकर जाँच-पड़ताल शुरू कर दी है। इलाके के पुलिस उपायुक्त (DCP) नितिन बगाटे ने इंस्पेक्टर निर्मला परदेशी के साथ घटनास्थल का दौरा किया और इस मामले के संबंध में जानकारी जुटाई। वायरल वीडियो के आधार पर हमलावरों और पीड़ित की पहचान के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।

इंस्पेक्टर निर्मला परदेशी ने कहा कि जाँच के बाद घटना की FIR दर्ज करके आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल किसी गिरफ्तारी की सूचना नहीं है। बताते चलें कि इससे पहले भी देश के कई हिस्सों में मुस्लिम लड़कियों साथ बात करने पर कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने पीटा था।

‘भारतीय टीम में गया तब मुझे नहीं आती थी हिंदी, साथियों ने सिखाया’: R आश्विन ने हिंदी विरोधियों को दिखाया आईना, कहा – सीखनी चाहिए

भारत के महान क्रिकेट खिलाड़ियों में से एक रविंचंद्रन अश्विन ने तमिलनाडु में सत्ताधारी डीएमके की तरफ से हिंदी भाषियों, हिंदुओं और हिंदी भाषा को लेकर खड़े किए जा रहे विवाद के बीच ऐसी बात कही है, जिस पर सभी को गौर करना चाहिए। उन्होंने भाषाई विवाद पर पानी डालते हुए कहा है कि हम जिस भी समूह के बीच रहते हैं, उसके बारे में थोड़ा-बहुत जानना हमारे ही फायदे में होता है, लेकिन इसके लिए किसी तरह का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। अश्विन ने कहा कि लोग ‘हिंदी नहीं जानते’ कहकर अपना सीना गर्व से चौड़ा करते हैं, लेकिन ये सही बात नहीं है। अश्विन ने इससे जुड़ा एक घटनाक्रम भी साझा किया।

आर अश्विन ने क्रिकेट के शुरुआती दिनों को लेकर एक किताब लिखी है, जिसे पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने “आई हैव द स्ट्रीट्स: ए कुट्टी क्रिकेट स्टोरी” नाम से प्रकाशित किया है। आज भी अश्विन को अपने शुरुआती दिन याद हैं, जब वो गलियों में क्रिकेट खेला करते थे। उनके अनुभवों और यादों को ESPNCricinfo से जुड़े स्पोर्ट्स राइटर सिद्धार्थ मोंगा ने किताब की शक्ल दी है। इस किताब को लेकर आयोजित एक कार्यक्रम में अश्विन ने वो बात कही, जिसे मान लिया जाए तो पूरे देश से भाषाई विवाद ही खत्म हो जाए।

सीएसके के कंटेंट हेड राधाकृष्णन के साथ बातचीत में अश्विन ने हिंदी में बातचीत न करने की चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए और एक व्यावहारिक दृष्टिकोण पेश किया। अश्विन ने कहा कि तमिलानाडु में लोग ‘हिंदी न जानने को गर्व से ‘हिंदी थेरियाडू पोडा’ कहकर खुद का सीना चौड़ा करते हैं, लेकिन लोगों को इससे किनारा करना चाहिए। लोगों को चाहिए कि वो जिनके बीच भी हैं, उनकी भाषा को थोड़ा बहुत जानें-समझें। इससे उन्हीं को आसानी होगी।’ अश्विन ने कहा कि वो जब भारतीय टीम से जुड़े थे, तो उन्हें हिंदी बिल्कुल नहीं आती थी, लेकिन अब वो चीजों को समझ लेते हैं। बोल भी लेते हैं, हाँ, लिख नहीं पाते। उन्होंने कहा कि लोगों को थोड़ा बहुत एडजस्ट करना चाहिए। आप अकड़ के चलते बहुत कुछ सीखने और बड़े मौकों से वंचित रह सकते हैं।

अश्विन ने इस बातचीत के दौरान तमिलनाडु से बाहर करियर बनाने की इच्छा रखने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए संवादी हिंदी सीखने के महत्व पर जोर दिया। अश्विन ने हिंदी बोलने वाले लोगों से भाषा सीखने वालों के साथ सहानुभूति रखने और भाषाई बाधाओं से परे समावेशिता को बढ़ावा देने का भी आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने यह पुस्तक इस बात पर जोर देने के लिए लिखी है कि भाषा सीखने से दूसरों से स्वीकृति पाने और बातचीत का हिस्सा बनने/योगदान देने में काफी मदद मिलेगी।

बता दें कि तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके से जुड़े नेता अक्सर हिंदी भाषियों का मजाक उड़ाते हैं और हिंदी बोलने वालों को नफरत की नजर से देखते हैं। वो अक्सर ‘हिंदी थेरियाडू पोडा’ जैसे तकिया-कलाम इस्तेमाल करते हैं, ताकि खुद को हिंदी न जानने वाला बताकर गर्व का अहसास कर सकें। यही नहीं, डीएमके के लोग उत्तर भारतीयों को “वडक्कन”, “पानीपुरी बेचने वाला” जैसी बातों से अपमानित करने का भी प्रयास करते हैं। डीएमके सांसद दयानिधि मारन तो ‘हिंदी भाषी शौचालय साफ करते हैं।’ बोल चुके हैं, तो डीएमके के पूर्व सांसद सेंथिलकुमार ने हिंदी पट्टी के राज्यों को ‘गौमूत्र’ राज्य कह दिया था।

‘राहुल गाँधी हाजिर हों’: जिस दिन बने नेता प्रतिपक्ष उसी दिन सुल्तानपुर की कोर्ट ने सुनाया आदेश, जमानत पर बाहर चल रहे पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर स्थित अदालत ने व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। MP-MLA कोर्ट ने बुधवार (26 जून, 2024) को कहा कि 2 जुलाई से पहले राहुल गाँधी अदालत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएँ। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दाखिल किया गया है। वकील संतोष कुमार पांडेय ने ये शिकायत दर्ज कराई थी।

राम प्रताप नामक एक शख्स ने इस मामले में पार्टी बनने के लिए आवेदन दिया है। इस याचिका का विरोध करते हुए पांडेय ने कहा कि राम प्रताप न तो इस मामले में पीड़ित है और न ही उसका इस मामले से कोई लेना-देना है। काशी प्रसाद शुक्ला इस केस में राहुल गाँधी के अधिवक्ता हैं। उन्होंने भी इस याचिका का विरोध किया। हालाँकि, अदालत ने राम प्रताप के आग्रह को कबूल नहीं किया और राहुल गाँधी को व्यक्तिगत पेशी का आदेश दिया। ये मामला 2018 से ही चला आ रहा है।

भाजपा नेता विजय मिश्रा ने इस संबंध में शिकायत दायर की थी। वो जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष भी रहे हैं। इससे पहले फरवरी 2024 में राहुल गाँधी को अमेठी में अपनी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ रोक कर कोर्ट में पेश होना पड़ा था, जहाँ से उन्हें अंतरिम जमानत मिली थी। उसी समय से वो इस मामले में जमानत पर ही चल रहे हैं। 2 जुलाई को फिर इस मामले की सुनवाई होगी। मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं।

राहुल गाँधी इसी तरह मोदी सरनेम पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी कर के फँसे थे। गुजरात की जनता के खिलाफ उनकी टिप्पणी भी अदालत तक पहुँची थी। राहुल गाँधी को इसी दिन लोकसभा में भी नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी गई है। उन्होंने इस लोकसभा चुनाव में रायबरेली व वायनाड से जीत दर्ज की। उन्होंने वायनाड की सीट खाली कर दी है, जहाँ से अब उनकी बहन प्रियंका गाँधी लड़ेंगी। राहुल गाँधी का विवादों से पुराना नाता रहा है।