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पंजाब की आर्थिक हालत खस्ता, फिर भी CM मान ने जालंधर में किराए पर लिया ‘आलीशान शीशमहल’, कहा- सेवा करूँगा: पहले चुनाव का दिया था हवाला

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राजधानी चंडीगढ़ के अलावा अब जालंधर में रहने के लिए एक आलीशान बंगला किराए पर लिया है। CM मान ने बंगला किराए पर लेने का उद्देश्य इस इलाके के लोगों की सेवा बताया है। इससे कुछ दिन पहले उन्होंने विधानसभा उपचुनाव की वजह से जालंधर में घर किराए से लेने की बात कही थी। आलीशान कोठी किराए पर लेने का यह फैसला तब लिया गया है जब पंजाब भारी आर्थिक संकट से जूझ रहा है और आए दिन केंद्र सरकार से मदद माँग रहा है।

CM भगवंत मान ने एक्स (पहले ट्विटर) पर बंगला किराए पर लेने सम्बन्धी जानकारी दी है। उन्होंने लिखा, “पिछले दिनों मैंने कहा था कि मैं जालंधर में एक मकान किराए पर ले रहा हूँ। मैं आज अपने परिवार के साथ जालंधर में एक मकान में आया गया हूँ। माझे और दोआब इलाके के लोगों को अब चंडीगढ़ नहीं जाना पड़ेगा, उनकी समस्याएँ यहीं से दूर हो सकेंगी। हम लोगों की परेशानी कम करने और सरकार से संपर्क स्थापित करने के हर संभव प्रयास कर रहे हैं।”

भगवंत मान ने इसके साथ कुछ तस्वीरें भी साझा की जिसमें वह अपनी पत्नी डॉ गुरप्रीत कौर और बेटी नियामत कौर के साथ नजर आए। उन्होंने बताया है कि वह अब प्रत्येक सप्ताह दो दिन इस मकान में रहेंगे। यह आलीशान बंगला लुधियाना के फगवाड़ा रोड पर स्थित है और इसमें पाँच बेडरूम हैं।

यह बंगला लगभग 32,000 स्क्वायर फीट (120 मारला) में बना है। बंगला जालंधर के डॉक्टर रणबीर सिंह का है और एक कॉलोनी में स्थित है, इस कॉलोनी में अभी और घर नहीं बने हैं। इसकी सुरक्षा बढ़ाने को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए हैं।

जहाँ पंजाब के मुख्यमंत्री ने इस कई एकड़ के बंगले को महीने के 8 दिन के लिए अपना आशियाना बनाने का निर्णय लिया है, वहीं राज्य की आर्थिक हालत सुधरने का नाम नहीं ले रही। पंजाब पर कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है।

AAP शासित पंजाब का कर्ज 2024-25 में ₹3.74 लाख करोड़ हो जाने का अनुमान है। जब AAP पंजाब की सत्ता में आई थी तो यह कर्ज ₹2.82 लाख करोड़ था। यानी इसमें AAP के तीन वर्ष के शासनकाल में लगभग ₹92,000 करोड़ की वृद्धि होती दिख रही है।

यह कर्ज पंजाब की जीडीपी का लगभग 46% है जो कि बड़े राज्य में सबसे अधिक है। नियमों के अनुसार इसे 20% के आसपास होना चाहिए। CM मान इससे पहले केंद्र सरकार को पत्र लिख कर पंजाब के कर्ज पर पाँच साल के लिए राहत की माँग कर चुके हैं। पंजाब सरकार केंद्र सरकार से आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए विशेष पैकेज की मांग करती आई है और अब यह नया आलीशान घर किराए पर लेने का फैसला लिया गया है।

पंजाब की आर्थिक हालत को देखते हुए प्रश्न उठ रहे है कि इस आलीशान बंगले का किराया भगवंत मान खुद देंगे या फिर इसका खर्च आर्थिक संकट में फंसी पंजाब सरकार देगी। इसके अलावा इस बंगले को किराए पर लेने की टाइमिंग और असल मकसद पर भी कयास लगाए जा रहे हैं।

दरअसल, जिस जालंधर शहर में CM मान ने यह बंगला किराए पर लिया है, वहीं की एक विधानसभा पर उपचुनाव हो रहा हैं। CM मान ने बंगला किराए पर लेने के बाद जहाँ कारण लोगों की सेवा बताया है, वहीं इससे पहले वह घर किराए पर का कारण उपचुनाव बता रहे थे।

नोएडा में इंटरनेशनल फिल्म सिटी का सपना साकार करेंगे बोनी कपूर, 1000 एकड़ में फैला होगा, ₹1500 करोड़ होंगे खर्च: YEIDA से समझौता हुआ, हजारों को मिलेंगे रोजगार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट फिल्म सिटी को बनाने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) में फिल्म सिटी बनाने को लेकर गुरुवार (27 जून 2024) को बेव्यू प्रोजेक्ट्स एवं भूटानी समूह ने यमुना विकास प्राधिकरण के साथ समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए। बेव्यूज प्रोजेक्ट्स फिल्ममेकर बोनी कपूर की कंपनी है।

बोनी कपूर गुरुवार (27 जून 2024) को ग्रेटर नोएडा आए। इस दौरान भूटानी समूह के आशीष भूटानी और बोनी कपूर ने ग्रेटर नोएडा में प्राधिकरण के कार्यालय में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) के सीईओ अरुण वीर सिंह और अतिरिक्त सीईओ शैलेन्द्र भाटिया की मौजूदगी में समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही फिल्म सिटी का मॉडल भी प्रस्तुत किया।

इस फिल्म सिटी को 1500 करोड़ रुपए की लागत से लगभग 1000 एकड़ में विकसित किया जाएगा। बोनी कपूर और भूटानी ग्रुप मिलकर आने वाले 6 महीनों के भीतर फिल्म सिटी के निर्माण का कार्य शुरू करेंगे। पहले फेज का काम शुरू करने के लिए आवंटित जमीन भी सौंप दी गई है। इस फेज में करीब 230 एकड़ जमीन को भूटानी समूह द्वारा विकसित किया जाएगा।

जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास ही नोएडा फिल्म सिटी बनेगी। वहाँ से फिल्म सिटी की दूरी सिर्फ 6 किलोमीटर है। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से इसकी दूरी सिर्फ 12 किलोमीटर है। नोएडा फिल्म सिटी के बनकर तैयार हो जाने से यहाँ रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इंडस्ट्री को नए टैलेंट भी मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही नोएडा नई फिल्म नगरी के रूप में उभरेगी।

इस फिल्म सिटी को विकसित करने के लिए बोनी कपूर ने कई देशों का दौरा किया और वहाँ की फिल्म सिटी का अध्ययन किया है। कंपनी ने फिल्म सिटी का नया मॉडल तैयार किया है। इसके डिजाइन और निर्माण का पूरा कार्य कंपनी की जिम्मेदारी है। कंपनी फिल्म सिटी के डिजाइन और तय प्रस्तावों में कोई बदलाव नहीं कर सकेगी।

फिल्म सिटी का निर्माण शुरू करने से पहले कंपनी को सुरक्षा राशि के रूप में प्राधिकरण में 80 करोड़ रुपए जमा करने होंगे। इससे वहाँ सड़क-बिजली सहित सुविधाएँ तैयार की जाएँगी। इसके अलावा, फिल्म सिटी से होने वाली आय का 18 फीसदी प्राधिकरण को मिलेगा।

जिसको तड़पा-तड़पाकर मारा उसकी गर्भवती पत्नी लगा रही न्याय की गुहार, इधर पुलिस की कैद में भी मेकअप कर रही हिरोइन पवित्रा: गिरफ्तारी के बाद मुस्कुराती दिखी थी

रेणुकास्वामी तड़प-तड़पकर मर गया। कन्नड़ हीरो दर्शन का फैन होना उसकी जिंदगी को लील गया। उसकी गर्भवती पत्नी न्याय की गुहार लगा रही है। दूसरी ओर इस हत्या में गिरफ्तार हिरोइन पवित्रा गौड़ पुलिस की हिरासत में भी मेकअप कर रही है। वैसे पवित्रा के लिए ये बेशर्मी नई नहीं है। जब उसे गिरफ्तार किया गया था वह तब भी मुस्कुरा रही थी।

पिछले दिनों कर्नाटक में हुए फैन मर्डर केस की मुख्य आरोपिता कन्नड़ एक्ट्रेस पवित्रा गौड़ा पुलिस की हिरासत में मेकअप में हँसते हुए मीडिया के सामने आई थीं। उनकी फोटो देखने के बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठे थे कि इतना बड़ा कांड करने के बाद उन्हें कोई पछतावा तक नहीं है। अब उनकी उसी फोटो को लेकर एक महिला सब-इंस्पेक्टर को कर्नाटक पुलिस ने नोटिस जारी किया है।

कर्नाटक पुलिस ने नोटिस में महिला पुलिस इंस्पेक्टर से जवाब माँगा है कि जिस दिन पवित्रा को उनके घर से थाने लेकर आना था उस दिन उन्होंने उसे मेक अप क्यों करने दिया। कर्नाटक पुलिस ने इस लापरवाही के लिए जवाब माँगा है। साथ ही कहा है कि जब पवित्रा ऐसा कर रही थीं तो उन्हें रोका जाना चाहिए था।

पुलिस ने बताया है कि उस दिन जब महिला पुलिस पवित्रा को लेने गई थीं तो उसने वॉशरूम जाने की परमिशन माँगी थी। इसके बाद वो जब निकली तो उसके चेहरे पर मेकअप था। उन्होंने यह भी बताया कि पवित्रा जब पुलिस कस्टडी के दौरान महिला राज्य गृह में सोने के लिए जाती है तो आते हुए मेक अप लगाती है।

ये भी जानकारी दी गई कि पवित्रा गौड़ा हर रात को स्टेट होम में रुकती थी, जहाँ वह शायद अपना मेकअप बैग रखती थी। महिला पीएसआई हर दिन सुबह वहाँ जाकर उसे एपी नगर पुलिस स्टेशन लेकर जाती थी। ऐसे में महिला पीएसआई पवित्रा को रोक सकती थी। उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया, इसीलिए उन्हें नोटिस भेजा गया है।

कर्नाटक रेणुकास्वामी मर्डर केस

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक में रेणुकास्वामी नाम के फैन को मारने के आरोप में कन्नड़ के मशहूर अभिनेता दर्शन, उनकी पत्नी पवित्रा और उनके अन्य 15 लोग न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस की जाँच में यही सामने आया है कि रेणुकास्वामी अपने पसंदीदा एक्टर दर्शन का घर टूटते नहीं देख सकता था, इसी खुंदस में उसने पवित्रा को गंदे मैसेज भेजना शुरू किया और जब दर्शन को इस बारे में पता चला तो उसने अपने साथियों से कहकर रेणुकास्वामी का अपहरण करवाया और फिर उसे निर्ममता से मौत के घाट उतार दिया गया। बाद में शव को नाले किनारे फेंक दिया गया।

अब मालदीव में बाहर आया ‘काला जादू’ का जिन्न, अपने ही राष्ट्रपति का ‘वशीकरण’ करने में लगी थी महिला मंत्री फातिमा: 2 साथियों के साथ हुई गिरफ्तार

मालदीव में दावा किया जा रहा है कि महिला मंत्री अपने राष्ट्रपति पर ही काला जादू करवा रही थी, ताकि वो राष्ट्रपति के और भी करीब जा सके। यही नहीं, इन करीबियों का इस्तेमाल कर वो और भी ज्यादा ताकत हासिल करना चाहती थी, लेकिन अब उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित राज्यमंत्री का नाम फातिमाथ शमनाज है, जो मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की पुरानी सहयोगी है। वो मुइज्जू के माले के मेयर रहने के दौरान सिटी काउंसिल की सदस्य रह चुकी है और मौजूदा सरकार में मंत्री है, लेकिन और भी ज्यादा ताकतवर बनने की चाह में अब सलाखों के पीछे पहुँच चुकी है।

अल अरबिया ने एएफपी के हवाले से बताया है कि मालदीव की पर्यावरण राज्य मंत्री फातिमाथ शमनाज को राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू पर काला जादू करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। फातिमाथ के अलावा 2 और लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कोर्ट ने सभी को 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है। हालाँकि, मालदीव की सरकार की तरफ से अब तक इस मामले में कोई बयान नहीं दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने फातिमाथ के घर की तलाशी ली थी। इस दौरान वहाँ से काला जादू से जुड़ा काफी सामान बरामद हुआ था। फातिमाथ राष्ट्रपति कार्यालय में काम करने वाले मंत्री एडम रामीज की बीवी हैं। फातिमाथ इससे पहले भी राष्ट्रपति मुइज्जू के साथ माले की सिटी काउंसिल की सदस्य रह चुकी हैं। तब मुइज्जू राजधानी माले के मेयर थे। पिछले साल उनके राष्ट्रपति बनने के बाद फातिमाथ ने भी काउंसिल से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वह राष्ट्रपति के आधिकारिक निवास मुलिआज की राज्य मंत्री बन गई। बाद में उन्हें ट्रांसफर कर पर्यावरण मंत्रालय में शिफ्ट कर दिया गया।

बता दें कि मालदीव में काले जादू को फंदिता या सिहुरु नाम से जाना जाता है। इस्लामिक कानूनों में इसे हराम कहा गया है और काला जादू करने वालों के खिलाफ सख्ती से निपटा जाता है। हालाँकि बताया ये जा रहा है कि मालदीव में काला-जादू जैसी चीजों की जड़ें काफी गहरी हैं। ऐसे ही एक मामले में करीब एक महीने पहले मुइज्जू की पार्टी के एक नेता पर काला जादू करने के मामले में 60 साल के बुजुर्ग को गिरफ्तार किया था।

18 महीने में ₹19000 करोड़ कर्ज लिया, अब चाहिए वित्त आयोग से ‘विशेष मदद’: कॉन्ग्रेस ने हिमाचल को जिस दलदल में धकेला उसका कोई अंत नहीं

हिमाचल प्रदेश में सत्ता पाने के लिए कॉन्ग्रेस द्वारा किया गया पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) का वादा राज्य की आर्थिक स्थिति पर भारी पड़ने वाला है। OPS के कारण राज्य पर आर्थिक बोझ दोगुना हो जाएगा। यह जानकारी हिमाचल की कॉन्ग्रेस सरकार ने खुद दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार ने 16वें वित्त आयोग की टीम को बताया है कि आने वाले वर्षों में उसका पेंशन पर होने वाला खर्च लगभग दोगुना हो जाएगा। यह नई पेंशन स्कीम में शामिल कर्मचारियों के पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) में शामिल हो जाने के कारण होगा।

पेंशन का खर्च होगा दोगुना

राज्य सरकार ने बताया है कि वर्ष 2030-31 तक उसका पेंशन पर होने वाला खर्च ₹19,728 करोड़ हो जाएगा। यह वर्तमान में लगभग ₹10,000 करोड़ से भी कम है। वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच कुल ₹90,000 करोड़ का खर्चा हिमाचल प्रदेश को पेंशन पर ही करना पड़ेगा।

कॉन्ग्रेस के OPS के वादे से राज्य के अन्य विकास कार्यों के बजट में कटौती होने की आशंका है। ऐसा इसलिए है क्योंकि राज्य के बजट में पहले पेंशन का हिस्सा मात्र 13% था जो कि OPS के बाद बढ़कर 17% हो जाएगा। पुरानी पेंशन के कारण होने वाला यह खर्च राज्य सरकार के कर्मचारियों को दी जाने वाली तनख्वाह पर खर्च के लगभग बराबर होगा।

2026-27 में राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को ₹20,639 करोड़ तनख्वाह देगी। 2026-27 में दी जाने वाली पेंशन की धनराशि ₹16,728 करोड़ होगी। राज्य में पेंशन पाने वालों की संख्या भी आने वाले सालों में नौकरी कर रहे कर्मचारियों से ज्यादा हो जाने के कयास हैं।

यह भी बात सामने आई है कि 2030-31 तक राज्य में 2.38 लाख पेंशनर हो जाएँगे। यह संख्या आने वाले समय में राज्य कर्मचारियों से भी अधिक होगी क्योंकि औसतन हर वर्ष 10,000 कर्मचारी रिटायर हो रहे हैं। इसकी तुलना में नए कर्मचारी भर्ती नहीं हो रहे।

हिमाचल प्रदेश को 2026-27 से 2030-31 बीच तनख्वाह और पेंशन पर कुल मिलाकर ₹2.11 लाख करोड़ खर्चने पड़ेंगे। राज्य सरकार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह अनुमान लगाया गया है कि वह इस बोझ को अकेले सहन नहीं कर पाएगी। इसके लिए उसे विशेष मदद की जरूरत होगी।

कॉन्ग्रेस ने 2022 के हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में जोर-शोर से पुरानी पेंशन स्कीम का वादा किया था और इसे राजनीतिक हथियार बनाया था। हालाँकि, अब इसके दुष्परिणाम सामने दिखने लगे हैं। आर्थिक बोझ के कारण राज्य की अर्थव्यवस्था चरमराने के संकेत हैं।

कॉन्ग्रेस सरकार ने लिया ₹19,000 करोड़ कर्ज

OPS के कारण हिमाचल प्रदेश पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ के बीच राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्कू ने 16वें वित्त आयोग से मदद की मांग भी कर दी है। उन्होंने कहा है कि राज्य को विकास के लिए विशेष आर्थिक मदद दी जाए।

इन सबके बीच कॉन्ग्रेस सरकार का धुआंधार तरीके से कर्ज लेने का मुद्दा भी जोर पकड़ रहा है। हिमाचल प्रदेश पर वर्तमान में ₹88,000 करोड़ से भी अधिक का कर्ज है। कॉन्ग्रेस सरकार बीते डेढ़ वर्ष में ही लगभग ₹19,000 करोड़ का कर्ज राज्य पर चढ़ा दिया है।

राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने खुद माना है कि उनके राज्य को कर्ज चुकाने के लिए ही नया कर्ज लेना पड़ रहा है। राज्य का कर्ज उसकी GDP का 40% से अधिक हो चुका है। उसका राजकोषीय घाटा भी GDP के 5% के ऊपर है। जबकि नियमों के मुताबिक़, किसी भी राज्य का कर्ज GDP का 20% जबकि राजकोषीय घाटा 3% से अधिक नहीं होना चाहिए।

प्रोफेसर साहब जिसे समझते थे ‘प्रतिभा’, वह निकली ‘मेहनाज हसन’: बेडरूम से 14 साल बाद खुला बीवी के धर्म परिवर्तन का राज, दर्ज कराया धोखा देने और उत्पीड़न का केस

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एक असिस्टेंट प्रोफेसर के साथ बहुत बड़ा फरेब हुआ है। वो जिसे अपनी जीवन संगिनी मान कर घुटन भरी जिंदगी जीने को मजबूर थे, पता चला उनकी पत्नी प्रतिभा तिवारी उनसे शादी से पहले ही मुस्लिम बन चुकी थी। उसने मेहनाज हसन बनकर किसी मुस्लिम के साथ 4 साल तक निकाह वाली जिंदगी भी जी, फिर अपने घर आ गई। इसके बाद प्रतिभा उर्फ मेहनाज हसन के माता-पिता और बहन ने उसकी असिस्टेंट प्रोफेसर के साथ पिछली जिंदगी को छिपाते हुए शादी करा दी। अब जब असिस्टेंट प्रोफेसर साहब को हकीकत पता चली, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित असिस्टेंट प्रोफेसर का नाम अमरेंद्र त्रिपाठी है। उनकी शादी साल 2011 में असम की रहने वाली प्रतिभा से हुई थी। प्रतिभा से उनकी शादी झूठ बोलकर कराई गई। उनके दो बच्चे भी हो गए, लेकिन उन्हें पता ही नहीं चला कि उनकी शादीशुदा जिंदगी एक फरेब है। पीड़ित अमरेंद्र त्रिपाठी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि उनकी शादी झूठ बोलकर कराई गई और उनका जीवन नर्क बना दिया गया। छोटी-छोटी बातों पर उनकी पत्नी झगड़ती थी और जान देने की धमकी देती थी, यही नहीं, वो अपने माता-पिता के साथ रहकर उन्हें बदनाम करती थी और उनके चरित्र को दारदार बनाने के लिए छात्राओं और विश्वविद्यालय के सहकर्मियों के साथ वीडियो बनाकर वायरल करती थी। यही नहीं, कुछ समय पहले भी उसने एक एसोसिएट प्रोफेसर के साथ उनकी फोटो सोशल मीडिया पर वायरल की थी।

पीड़ित अमरेंद्र ने आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी ने घर में इतना बवाल मचाया कि वो अपनी माँ के साथ अलग रहने को मजबूर हो गए। लेकिन 13 मई 2024 को ऐसे कागजात उनके हाथ लगे कि उनके होश ही उड़ गए। उन्हें अब पता चला है कि जिसे वो प्रतिभा तिवारी मानकर किसी तरह से अपनी जिंदगी गुजार रहे थे, वो प्रतिभा तिवारी तो उनसे शादी से 4 साल पहले ही मेहनाम हसन बन चुकी थी।

पीड़ित का आरोप है कि मेहनाज हसन उर्फ प्रतिभा के धर्म परिवर्तन, पिछले निकाह के कागज उन्हें बेडरूम में मिले। मेहनाज हसन ने दिल्ली के मुस्लिम लड़के के साथ 2007 में ही निकाह कर लिया था, लेकिन उसके बाद उसके घर वालों ने उनके साथ शादी करा दी। इसके बाद से प्रतिभा उन्हें परेशान करती थी। वो उनके और उनकी माँ के साथ मारपीट भी करती थी। अब परेशान शिक्षक ने अपनी पत्नी प्रतिभा उर्फ मेहनाज हसन, उनके माता-पिता यानी अपने सास-ससुर और साली के खिलाफ सिविल लाइन्स थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।

पीड़ित असिस्टेंट प्रोफेसर ने आरोप लगाया है कि विवाह के एक साल बाद सन् 2012 में पता चला कि वह गुटखा खाती है, जिसके विरोध पर कलाई की नस काटकर खुदकुशी का प्रयास किया। इसके बाद से लगातार गलत आदतों के विरोध पर उनसे व उनकी माता से मारपीट करती रही। वह लगातार उनके चरित्र के बारे में अनर्गल बातें फैला रही है और बदनाम करने की धमकी दे रही है। छोटी छोटी बातों पर आत्महत्या की धमकी और प्रयास से उनके साथ रहना मुश्किल हो गया है।

यही नहीं मेहनाज ने उन्हें क्लाइव रोड स्थित घर से 23 मई को बाहर निकाल दिया और तब से वह सैनिक कॉलोनी, धूमनगंज में रह रहे हैं। मेहनाज कई बाहर लंबे समय तक गायब रहती है। वो वाराणसी के युवक के संपर्क में है। उन्होंने न्याय की माँग की है। इस मामले में सिविल लाइंस प्रभारी रामाश्रय यादव ने बताया कि पति-पत्नी के बीच विवाद की बात सामने आई है। तहरीर के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जाँच की जा रही है।

‘राहुल गाँधी विदेशी नागरिक, वे कैसे बन गए सांसद’: हाई कोर्ट में चल रही थी सुनवाई, जज ने पत्रकार को बाहर निकाला, याचिकाकर्ता से कहा- ₹25 हजार जमा करवाइए

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) के रायबरेली लोकसभा सीट से सांसद के रूप में चुनाव को रद्द करने की माँग को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि राहुल गाँधी भारतीय नागरिक नहीं, बल्कि ब्रिटिश नागरिक हैं। इसलिए वे देश में वे चुनाव लड़ने के अयोग्य हैं। इसे कर्नाटक के रहने वाले विग्नेश शिशिरा ने दाखिल किया है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में 22 जून को दाखिल याचिका में कहा गया है कि लोकसभा स्‍पीकर राहुल गाँधी को संसद सदस्य के रूप में कार्य की अनुमति तब तक न दें, जब तक गृह मंत्रालय की तरफ से उनकी विदेशी नागरिकता के मुद्दे का निपटारा नहीं कर दिया जाता। जनहित याचिका में यह भी पूछा गया है कि राहुल गाँधी किस कानूनी अधिकार के तहत लोकसभा सदस्य के रूप मे काम कर रहे हैं।

याचिका में यह भी कहा गया है कि सूरत की एक अदालत से राहुल गाँधी को दो साल की हुई है। इसलिए वे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत राहुल गाँधी सांसद चुने जाने के अयोग्य हैं। बता दें कि राहुल गाँधी अपनी माँ सोनिया गाँधी की सीट रायबरेली से इस बार सांसद का चुनाव जीते हैं। वे वायनाड से भी चुनाव जीते हैं, लेकिन इस सीट को उन्होंने छोड़ दिया है।

याचिका में दावा किया गया है कि यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) सरकार के कंपनी हाउस में दायर वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि राहुल गाँधी 21/08/2003 से 17/02/2009 तक मेसर्स बैकॉप्स लिमिटेड नामक कंपनी के निदेशक थे। इस कंपनी का नंबर 04874597 था। 31/10/2006 को दाखिल एक रिटर्न में उन्होंने अपनी राष्ट्रीयता ब्रिटिश बताई थी।

याचिका में उल्लेख किया गया है कि यह जानकारी कंपनी हाउस, यूनाइटेड किंगडम सरकार से उपलब्ध रिकॉर्ड पर आधारित है। याचिका में राहुल गाँधी द्वारा साल 2004 में अमेठी के रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष दायर चुनावी हलफनामे का भी जिक्र किया गया है। इसमें राहुल गाँधी ने घोषणा की थी कि यूनाइटेड किंगडम में उनके कई बैंक खाते हैं और मेसर्स बैकअप्स लिमिटेड का स्वामित्व है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गुरुवार (27 जून 2024) को सुनवाई करते हुए इस मामले के गुण-दोष पर विचार किए बिना सुनवाई स्थगित कर दी। अब इसकी सुनवाई 1 जुलाई 2024 को उच्च न्यायालय की नियमित पीठ करेगी। सुनवाई के दौरान जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की अवकाश पीठ ने लाइव लॉ के रिपोर्टर को कोर्ट रूम से बाहर जाने को कह दिया।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे ही जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू हुई इलाहाबाद हाई कोर्ट की अवकाश पीठ ने जनहित याचिका दाखिल करने वाले विग्नेश शिशिरा की ओर से पेश वकील अशोक पांडे से सवाल किया। बेंच ने पूछा कि क्या उन्होंने याचिका के साथ 25,000 रुपए का डिमांड ड्राफ्ट रजिस्ट्री में दाखिल करा दी गई है।

कोर्ट ने कहा, “आपकी (एडवोकेट अशोक पांडे की) कोई भी जनहित याचिका 25,000 रुपए की लागत जमा किए बिना दायर नहीं की जा सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि साल 2016 के हाईकोर्ट के आदेश में अनिवार्य किया गया है।” न्यायालय ने याचिकाकर्ता शिशिरा को मंच के पास वकील के बहुत करीब खड़े होने के लिए फटकार भी लगाई।

दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने साल 2016 में अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया था कि प्रत्येक याचिका (एडवोकेट पांडे या हिंदू पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा दायर) को तभी दाखिल करने के लिए स्वीकार किया जाए जब उसके साथ 25,000 रुपए का डिमांड ड्राफ्ट हो। वहीं, वकील पांडे ने दलील दिया कि डीडी जमा किए बिना याचिका दाखिल करने का उनका अधिकार है।

इसी बीच न्यायालय का ध्यान रिपोर्टिंग के लिए कोर्ट में मौजूद लाइव लॉ के रिपोर्टर स्पर्श उपाध्याय की ओर गया। कोर्ट ने कहा, “यह रिपोर्टिंग आप बाहर जाकर करें।” इसके बाद रिपोर्टर कोर्ट रूम से बाहर चला गया। इसको लेकर लाइव लॉ का तर्क है कि रिपोर्टर कोई व्यवधान नहीं पैदा कर रहा था। वह केवल अपने मोबाइल फोन से लाइव लॉ के ट्विटर हैंडल पर कार्यवाही लाइव अपडेट पोस्ट कर रहा था।

कोर्ट ने जनहित याचिका दाखिल करने वाले विग्नेश शिशिरा को अपने वकील पांडे के साथ डायस के पास खड़े होने पर आपत्ति जताई। इस दौरान जस्टिस माथुर ने कहा, “ये जनहित याचिका याचिकाकर्ता आपके साथ क्यों खड़े हैं? ये क्या नाटकीय दृश्य कोर्ट में बन रहा है? आपको (याचिकाकर्ता विग्नेश) खुद बहस करनी है क्या? नहीं ना तो जाए पीछे जाकर बैठिए।”

जब एडवोकेट पांडे ने कोर्ट की आपत्ति के कारणों के बारे में पूछा तो जस्टिस माथुर ने कहा कि यह क्षेत्र वकीलों के उपयोग के लिए है। इसके बाद मामले को लंच के बाद के सत्र में उठाए जाने के लिए स्थगित कर दिया गया। बाद में कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई स्थगित कर दी और इसकी नियमित सुनवाई 1 जुलाई को करने को कहा।

हे भारत के विपक्ष! माना तुम खलिहर हो पर ‘राजा का डंडा’ नहीं है सेंगोल, भारत की स्वतंत्रता का वह प्रतीक है जिसे तुष्टिकरण के लिए नेहरू ने कर दिया था दफन

लोकसभा सदन शुरू होने के बाद विपक्ष द्वारा हाल में सेंगोल को संसद से हटाने की माँग उठाई गई है। बहस छेड़ने वाले समाजवादी पार्टी के सांसद आर के चौधरी हैं। उन्होंने सेंगोल को ‘राजा का डंडा’ बताया है और पूछा है कि क्या इससे सरकार चलेगी। उन्होंने स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर कहा कि सेंगोल संसद में नहीं होना चाहिए। संसद लोकतंत्र का मंदिर है किसी राजे-रजवाड़े का महल नहीं। इसे हटाकर वहाँ भारतीय संविधान की विशालकाय प्रति स्थापित की जानी चाहिए।

सपा सांसद द्वारा उठाए गए इस मुद्दे पर कॉन्ग्रेस पार्टी के नेताओं द्वारा इस माँग का समर्थन किया गया है। इसी तरह सेंगोल को हटाने की माँग आरजेडी लीडर मीसा भारती ने भी की। उन्होंने कहा कि ये लोकतंत्र है राजतंत्र नहीं… सेंगोल हटना चाहिए। उद्धव ठाकरे की शिवसेना के नेता संजय राउत ने इस मुद्दे पर कहा कि वो अपने गठबंधन के साथ बैठ इस पर निर्णय लेंगे। संविधान अहम है। वहीं भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं ने विपक्ष की ऐसी बातों को सुन हैरानी जताई और ‘बेतुकी’ बताते हुए कहा कि सेंगोल किसी कीमत में संसद से नहीं हट सकता।

अब पक्ष-विपक्ष में सेंगोल पर छिड़ी बहस में आगे बढ़ने से पहले समझते हैं कि आखिर ये है क्या और इसकी महत्वता क्या है, भारत के प्राचीन इतिहास में इसे क्यों इतना जरूरी माना गया और क्यों इसे स्वतंत्रता का प्रतीक कहते हैं।

सेंगोल का प्राचीन इतिहास

सेंगोल का इतिहास भारत में चोल वंश के साथ जुड़ा हुआ है। चोल साम्राज्य भारत के सबसे प्राचीन और सबसे लंबे समय तक राज करने वाले राजवंशों में से एक रहा है। 300 ईसापूर्व में भी इसका वर्णन मिलता है। 1500 से भी अधिक वर्षों तक इस राजवंश ने शासन किया। बताया जाता है कि चोल राजा शिवभक्त होते थे इसीलिए इनके राजदंड यानी सेंगोल में सबसे ऊपर भगवान शिव के वाहन नंदी की प्रतिमा है।

सेंगोल को शुरुआती काल से ही सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक माना जाता रहा है। पुराने सय में पुरोहितों द्वारा इसे उस शासक को सौंपा जाता था जब उसके शासन का शुभारंभ होता था। भारत में इसकी महत्वता उसी काल से थी। बीच में मुगल काल और अंग्रेजों का राज शुरू होने के बाद इस पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन जैसे ही देश को स्वतंत्रता मिली ‘सेंगोल’ दोबारा प्रासंगिक हुआ।

स्वतंत्रता का प्रतीक है सेंगोल, जवाहरलाल नेहरू ने तुष्टिकरण के चलते नहीं दी तवज्जो

1947 में जब देश को आजादी मिली उस समय में एक विडंबना ये खड़ी हुई कि आखिर सत्ता हस्तांतरण होगा कैसे? इसका प्रतीक क्या होगा? कैसे पता चलेगा कि अंग्रेजों ने भारत को छोड़ दिया है? इसी समस्या के समाधान के लिए अंग्रेजों के अंतिम गवर्नर-जनरल लॉर्ड माउंटबेटन, जवाहरलाल नेहरू के पास गए। उन्होंने उनसे पूछा कि आखिर आपके देश में सत्ता हस्तांतरण को लेकर क्या रीति-रिवाज हैं, वो उसके मुताबिक आगे की प्रक्रिया करेंगे।

अब जवाहरलाल नेहरू, इस सवाल का जवाब कैसे देते, उन्होंने तो देखा ही सिर्फ अंग्रेजों का रहन-सहन था। यही वजह है कि सत्ता हस्तांतरण के बारे में जानकारी लेने की जगह वह ‘स्वतंत्रता पार्टी’ के संस्थापक रहे चक्रवर्ती राजगोपालचारी से इस बारे में पूछा, जो भारतीय संस्कृति की गहरी समझ रखते थे।

उन्होंने नेहरू को पुरानी संस्कृति के बारे में बताया और समस्या का समाधान ‘सेंगोल’ के रूप में किया। इसके बाद करीबन 15 हजार रुपए में इसे मद्रास के प्रसिद्ध ज्वैलर्स वुम्मिडी बंगारू चेट्टी एंड सन्स द्वारा तैयार किया गया। फिर आखिर में विधि अनुष्ठान करवाकर, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ये सेंगोल जवाहरलाल नेहरू को सौंपा गया और 14 अगस्त 1947 को सत्ता हस्तांतरण का अनुष्ठान पूरा हुआ … भारत में लोकतंत्र कायम हुआ। आगे देश का दुर्भाग्य कहिए या फिर सेकुलर नेताओं की हिंदूविरोधी मानसिकता कि आजादी के इस प्रतीक को न तो नेहरू ने खुद तवज्जो दी न कि कॉन्ग्रेस ने।

PM मोदी ने पता लगते ही सेंगोल को दिया सम्मान

साल 2021 में प्रधानमंत्री मोदी को एक खत के जरिए सेंगोल के बारे में पता चला। यह खत चर्चित डांसर पद्म सुब्रमण्यम ने उन्हें लिखा था। अपने लेटर में उन्होंने पीएम मोदी को सेंगोल के बारे में बताया था। पीएमओ ने इस लेटर को गंभीरता से लिया और संस्कृति मंत्रालय इस सेंगोल की खोज में जुटी। आखिरकार पता चला कि ये सेंगोल इलाहाबाद के म्यूजियम में रखा हुआ है। सेंगोल के अस्तित्व को कंफर्म करने के लिए मंत्रालय की टीम वुम्मिडी बंगारू चेट्ठी परिवार से भी मिली जिन्होंने कंफर्म किया कि सेंगोल तैयार किया गया था।

सेंगोल की महत्वता जानने के बाद ही पीएम मोदी ने इसे संसद में अहम स्थान देने का संकल्प लिया और 2023 में नए संसद के उद्घाटन के साथ इसे भी वहाँ स्थापित किया गया और जन-जन को मीडिया के जरिए इसकी महत्वता के बारे में पता चला।

मुद्दे नहीं बचे तो सेंगोल के पीछे पड़ा विपक्ष

आज सदन में संख्या बढ़ने के बाद विपक्ष नेता जो सवाल खड़े कर रहे हैं कि ये ‘सेंगोल’ राजतंत्र में इस्तेमाल होता था लोकतंत्र में इसकी जरूरत नहीं, उन्हें ये सारा इतिहास पढ़ने-समझने की जरूरत है, ताकि उन्हें भी पता रहे कि भारत की संस्कृतियों से नफरत करने में वो इतना न गिरें कि स्वतंत्रता के प्रतीक को संसद से हटाने की बात छेड़ें। उनके लिए इस चिन्ह से नफरत केवल इसलिए है क्योंकि इसका संबंध प्राचीन भारत से है जहाँ वेदों का महत्व था।

विपक्ष द्वारा अचानक सदन की शुरुआत होने के बाद सेंगोल हटाने की माँग उठना सिर्फ ये दिखाती है कि उनके पास राष्ट्रहित से जुड़े या जनता से संबंधिक कोई मुद्दा नहीं बचा है। वो सत्ताधारी पक्ष को जनता के हित में काम करने की सलाह या तरीके बताने की बजाय अपने में ही उलझे हुए हैं। हाल में उन्होंने इमरजेंसी का विरोध करने पर संसद के बाहर जाने का प्रयास किया। मानो वो ठहरा रहे हो कि इमरजेंसी लोकतंत्र पर धब्बा नहीं था। उस मुद्दे के बाद वो अब सेंगोल का मुद्दा लेकर आए हैं। वो सेंगोल, जिसे लेकर सारी पार्टियों को कॉन्ग्रेस से सवाल करना चाहिए कि उन्होंने इतने वर्ष उसपर क्यों ध्यान नहीं दिया, वो पार्टियाँ अब एकजुट होकर आजादी के प्रतीक को गलत दिखाने की कोशिशों में हैं।

टैंक-पलटन लेकर तख्तापलट करने निकला सैन्य कमांडर, पुलिस ने धर दबोचा: बोलीविया में तानाशाही लाने का जनरल का प्लान फेल, लोकतंत्र के समर्थन में सड़क पर जनता

दक्षिण अमेरिकी देश बोलीविया में सैन्य तख्तापलट का प्रयास विफल हो गया है। सैन्य तख्तापलट की कोशिश करने वाले बोलिवीयाई जनरल को भी गिरफ्तार कर लिया है। बोलीविया के लोकतंत्र समर्थकों और विपक्ष के समर्थन से यह तख्तापलट का प्रयास विफल हो पाया है। तख्तापलट विफल होने के बाद बोलीविया के राष्ट्रपति ने जनता का धन्यवाद किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बोलीविया में तख्तापलट का यह प्रयास बुधवार (26 जून, 2024) को चालू हुआ। इस दौरान राजधानी लापाज में सेना की कुछ टुकड़ियों ने राष्ट्रपति आवास समेत तमाम सरकारी इमारतों पर कब्जा करना चालू कर दिया। यह सैनिक सड़कों पर भी बख्तरबंद वाहन लेकर उतर गए।

सैन्य तख्तापलट का नेतृत्व बोलीविया का सैन्य कमांडर जनरल जुआन जोस जुनीगा कर रहा था। जुनीगा ने इस प्रयास के दौरान कहा कि वह देश में लोकतंत्र का ढाँचा सुधारना चाहता है और इस सैन्य तख्तापलट के बाद वर्तमान राष्ट्रपति लुईस आसे को पद से हटा दिया जाएगा। उसने इस सैन्य तख्तापलट के प्रयास के दौरान मीडिया से बातचीत भी की।

जनरल जुनीगा को इससे पहले मंगलवार (25 जून, 2024) को सैन्यप्रमुख के पद से हटाया गया था। उसे बोलीविया के पूर्व राष्ट्रपति मोरालेस पर भड़काऊ भाषण देने के कारण पद से हटाया गया था और इसी के बाद उसने तख्तापलट की कोशिश की। हालाँकि, उसे इसमें सफलता नहीं मिली।

जुनीगा की जगह राष्ट्रपति आसे ने नया सैन्यप्रमुख नियुक्त कर दिया जिसने राष्ट्रपति आवास में घुसे सैनिकों को वापस बाहर निकल जाने का आदेश दिया। खुद को घिरता देख सैनिक बाहर चले गए और इसके बाद जुनीगा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

बोलीविया के इस सैन्य तख्तापलट को नाकाम करने के लिए राष्ट्रपति लुईस आसे ने लोकतंत्र समर्थकों से अपील की कि वह सड़कों पर उतरें। राष्ट्रपति आसे ने लोकतंत्र समर्थकों को टीवी पर एक सन्देश दिया। इसमें उन्होंने कहा कि हम एक बार फिर देश में तख्तापलट से लोगों की जानें जाते हुए नहीं देख सकते।

उनके कहने पर हजारों लोग लापाज में इकट्ठा हो गए। वह स्वयं अपने समर्थकों के बीच आए और जुनीगा का सामना किया। आसे के प्रतिद्वंदी और राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे मोरालेस ने भी इस तख्तापलट के प्रयास का विरोध किया।

बोलीविया के इस तख्तापलट के प्रयास पर दुनिया भर के देश नजर बनाए हुए हैं। बोलीविया के पड़ोसी देशों ने सेना के इस्तेमाल को लेकर आलोचना की है। अमेरिका समेत तमाम देशों ने कहा है कि वह स्थिति का जायजा ले रहे हैं और आगे उस हिसाब से कदम उठाएँगे।

बोलीविया में रहा है सैन्य शासन इतिहास

बोलीविया दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप में स्थित एक देश है। इसकी जनसंख्या 1.2 करोड़ है। यह ब्राजील सरीखे देशों से अपनी सीमा साझा करता है। बोलीविया दक्षिण अमेरिका की प्रख्यात एंडीज पहाड़ियों के बीच स्थित है और इसकी कोई भी सीमा समुद्र से नहीं लगती है। 92% ईसाईयत वाला यह देश पहले स्पेन के कब्जे में था। यह देश 1960 के दशक से ही राजनीतिक अस्थिरता का शिकार रहा है। यहाँ 1962 में पहली बार सेना ने तख्तापलट किया था।

यह सैन्य शासन अलग-अलग शासकों के अंतर्गत 1982 तक चला जिसके बाद देश में लोकतंत्र की बहाली हुई। बोलीविया में लोकतंत्र की बहाली के बाद भी बड़े स्तर पर सेना का राजनीति पर प्रभाव है। पिछले कुछ वर्षों से बोलीविया महँगाई और आर्थिक संकट से जूझ रहा है। यहाँ बड़ी संख्या में लोग इससे परेशान हैं। इसी का सहारा लेकर जनरल जुनीगा ने फिर से सैन्य शासन लगाने का प्रयास किया लेकिन विफल हो गया। अब आगे सभी की नजरें बोलीविया के राष्ट्रपति के अगले कदम पर हैं।

रामायण पार्क में खेलने के लिए घुस गए मदरसे के बच्चे, तोड़ दी हनुमान जी की मूर्ति: हिंदू युवकों ने भगाया तो इकट्ठा हो गई मुस्लिम भीड़, रामपुर की घटना

उत्तर प्रदेश के रामपुर में हनुमान जी की प्रतिमा क्षतिग्रस्त कर दी गई, जिसके बाद इलाके में तनाव फैल गया। आरोप मदरसे के छात्रों पर लगा है। हनुमान जी की मूर्ति टूटने के बाद मौके पर पहुँचे हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने जमकर हँगामा किया, जिसके बाद इलाके में तनाव फैल गया। बताया जा रहा है कि हिंदू संगठन से जुड़े व्यक्ति ने मूर्ति को तोड़ते हुए देखा और विरोध किया, जिसके बाद उसे तोड़ने वाले भाग खड़े हो गए। इस बीच, हल्ला मचते ही मुस्लिमों की भीड़ मौके पर जुट गई। वहीं, किसी ने इसकी सूचना पुलिस और प्रशासन को दे दी, जिसके बाद मौके पर भारी पुलिस बल और स्थानीय विधायक आकाश सक्सेना भी पहुँच गए। लोगों ने आरोपितों पर कार्रवाई की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के पनवड़िया में स्थित नुमाइश मैदान में बने रामायण पार्क बना है, जहाँ मदरसे में पढ़ने वाले लड़कों ने हनुमान जी की मूर्ति खंडित कर दी। इसकी जानकारी मिलने पर हिंदू संगठन के लोगों ने हँगामा किया। सूचना पर तीन थानों की फोर्स के साथ पुलिस अफसर पहुँच गए। विधायक आकाश सक्सेना भी मौके पर पहुँचे और कड़ी कार्रवाई की माँग की। ये घटना बुधवार (26 जून 2024) की शाम की है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि मूर्ति को तोड़ते समय का एक वीडियो भी सामने आया है।

इस घटना को लेकर विधायक आकाश सक्सेना ने कहा कि पनवड़िया स्थित रामायण पार्क में क्षतिग्रस्त भगवान की मूर्तियों के लिए पूरी तरह से रामपुर विकास प्राधिकरण जिम्मेदार है, क्योंकि पार्क चार साल पहले प्राधिकरण द्वारा बनवाया गया है। उन्हें इन प्रतिमाओं के संरक्षण के इंतजाम भी करने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसके कारण शरारती तत्वों ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को अंजाम दे दिया। उन्होंने कहा कि हमने इस संबंध में जिलाधिकारी से बात की है और प्रतिमाओं के संरक्षण के लिए पुख्ता इंतजाम करने के लिए कहा है।

अलीगढ़ के एएसपी अतुल श्रीवास्तव ने कहा, “मूर्ति खंडित होने की सूचना मिलने पर मौके पर जाकर निरीक्षण किया है। मामले की जाँच की जा रही है। तहरीर मिलने पर मुकदमा दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”