Home Blog Page 855

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार की हाउस टैक्स और शराब-बीयर पर टैक्स बढ़ाने की तैयारी, ₹9.5 करोड़ खर्च करके अमेरिकी फर्म से लिया ‘आइडिया’

कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के दौरान कॉन्ग्रेस ने जनता से 5 वादे किए थे, जिन्हें पूरा करने के लिए अब भार कर्नाटक की जनता पर ही डालने की तैयारी की जा रही है। अभी हाल ही में कॉन्ग्रेस सरकार ने कर्नाटक में डीजल और पेट्रोल पर 3-3 रुपए टैक्स के बढ़ाए है, तो उसके बाद अब शराब-बीयर पर टैक्स बढ़ाने की तैयारी हो रही है। इसके अलावा हाउस टैक्स भी बढ़ाया जा रहा है, तो ईवी पर भी टैक्स लगाने की तैयारी है। इसके अलावा जनता से किस तरह से पैसे उगाहे जा सकते हैं, उसका ‘आइडिया’ देने के लिए एक अमेरिकी कंपनी को भी काम पर लगाया गया है, जिसे 6 महीने में 9.5 करोड़ रुपए बतौर फीस भी दी जाएगी।

अमेरिकी कम्पनी बताएगी, कैसे कमाए कॉन्ग्रेस सरकार

अब कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने अपनी कमाई बढ़ाने के लिए नई जुगत भिड़ाई है। कॉन्ग्रेस सरकार ने राज्य की आर्थिक स्थिति सुधारने और राजस्व बढ़ाने पर सुझाव देने के लिए एक अमेरिकी कम्पनी बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) को काम पर लगाया है। यह कंसल्टिंग कम्पनी अब राज्य सरकार को बताएगी कि वह अपना खजाना कैसे बढ़ा सकती है। यह निर्णय चुनावी गारंटियों के बढ़ते खर्चे के बीच लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि BCG ने सरकार को कुछ सुझाव भी इस संबंध में दिए हैं। इस काम के लिए बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप को 9.5 करोड़ रुपए 6 माह के काम के लिए दिए जाएँगे।

मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, कई लोगों ने निजी सलाहकार नियुक्त करने के सरकार के फैसले की आलोचना की। सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एमजी देवसहायम ने मनीकंट्रोल को बताया कि अधिकांश सलाहकारों के पास गहन ज्ञान की कमी होती है और वे मोटी फीस लेते हुए खोखली (खराब) रिपोर्ट तैयार करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि अनुभवी आईएएस अधिकारियों, जिनमें से कई आईआईटी और आईआईएम से पढ़े हैं, उन्हें इसके लिए नियुक्त किया जाना चाहिए। देवसहायम ने चेतावनी दी कि मुफ्त उपहार और गारंटी टिकाऊ नहीं हैं और राज्य की वित्तीय सेहत को नुकसान पहुँचाते हैं।

कर्नाटक की सरकार को कितने पैसों की जरूरत?

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस ने जो 5 गारंटियाँ दी हैं, उसमें सभी घरों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली (गृह ज्योति), परिवार की प्रत्येक महिला मुखिया को 2,000 रुपये प्रति माह (गृह लक्ष्मी), गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) परिवारों को 10 किलो खाद्यान्न (अन्न भाग्य), बेरोजगार स्नातकों को दो साल के लिए 3,000 रुपये प्रति माह, और बेरोजगार डिप्लोमा धारकों को दो साल के लिए 1,500 रुपये प्रति माह (युवनिधि), और राज्य भर में राज्य द्वारा संचालित गैर-एसी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा (शक्ति) शामिल हैं। इन पर काफी खर्च आएगा, लेकिन कर्नाटक सरकार का खजाना खाली है। यहाँ तक कि उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने विधायकों को विधायक निधि का फंड भी देने से मना कर दिया है।

कॉन्ग्रेस सरकार की इन पाँच गारंटियों से राज्य के 5.10 करोड़ लोगों को लाभ मिलेगा, लेकिन 2023-24 में इनसे सरकारी खजाने पर 36,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। सिद्धारमैया ने इस वित्तीय वर्ष में इन योजनाओं के लिए 52,009 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। 2024-25 के लिए उनका राजस्व घाटा बजट कुल 3,71,383 करोड़ रुपये है, और इसमें पहली बार 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वार्षिक उधारी की परिकल्पना की गई है।

वित्त वर्ष 2024-25 के लिए पाँच चुनावी गारंटियों पर ₹52,000 करोड़ खर्च करने की योजना का असर राज्य पर पड़ रहा है। इसकी वजह से कॉन्ग्रेस सरकार ने जुलाई 2023 में राज्य के SC-ST समुदाय के कल्याण के लिए खर्च किए जाने वाले ₹11,000 करोड़ को भी इन गारंटियों के लिए उपयोग करने का फैसला लिया था, जिसके कारण इसकी काफी आलोचना हुई थी।

इन गारंटियों को पूरा करने के लिए जरूरी अतिरिक्त राजस्व जुटाने के लिए कॉन्ग्रेस सरकार ने ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की। इससे पेट्रोल की कीमतें 102 रुपए प्रति लीटर से ज्यादा हो गई हैं। इसके साथ ही कर्नाटक सरकार ने संपत्तियों के मार्गदर्शन मूल्य में 15-30 प्रतिशत की वृद्धि की। सभी स्लैब में भारत में निर्मित शराब (आईएमएल) पर 20 प्रतिशत का अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एईडी) लगाया, बीयर पर एईडी को 175 प्रतिशत से बढ़ाकर 185 प्रतिशत किया, नए पंजीकृत परिवहन वाहनों पर 3 प्रतिशत अतिरिक्त उपकर लगाया, 25 लाख रुपये से अधिक कीमत वाले ईवी (इलेक्ट्रिक वाहनों) पर आजीवन कर लागू किया और पंजीकरण की आवश्यकता नहीं वाले सभी दस्तावेजों के लिए स्टांप शुल्क में 200 प्रतिशत से 500 प्रतिशत की वृद्धि की। राज्य सरकार ने संपत्ति कर, जल कर के साथ-साथ बस किराए में भी बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं।

शराब से कमाई बढ़ाने की तैयारी, जनता बने शराबी

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने शराब-बीयर पर सेस लगाकर कमाई तो बढ़ाई ही है, साथ ही अब विदेशी और महँगे ब्रांड्स को भी सस्ता करके बेचने की तैयारी हो रही है। कर्नाटक में 1 जुलाई से महँगी यानी प्रीमियम शराब की कीमतों को कम किया जा रहा है। यही नहीं, हर तरफ शराब और बीयर की सप्लाई बढ़ सके, इसके लिए नई कंपनियों को भी मैदान में उतारा जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, कर्नाटक में शराब की कीमत कम करने का फैसला लिया गया है। इस फैसले का उद्देश्य राज्य में शराबियों को शराब खरीदने के लिए प्रोत्साहित करना है। राज्य सरकार ने 1 जुलाई से राज्य में बीयर समेत प्रीमियम शराब ब्रांडों की कीमतों में उल्लेखनीय कमी की घोषणा की है।

कॉन्ग्रेस सरकार के इन कामों का उद्देश्य किसी तरह से जनता की जेब पर डाका डालकर रेवड़ी योजनाओं को जारी रखना है, भले ही उसके लिए दूसरे तरीकों से पैसा खुद जनता ही क्यों न दे। बता दें कि बीजेपी सरकारी खजाने पर विपरीत असर डालने वाली ऐसी योजनाओं का विरोध करती आई है। हालाँकि, आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस ने इन योजनाओं को चुनावी हथियार की तरह इस्तेमाल किया है। हालिया लोकसभा चुनावों में भी कॉन्ग्रेस ने हर महिला को प्रतिमाह ₹8500 देने की बात कही थी।

फैन की हत्या करवाने के लिए हीरो ने दोस्त से लिया ₹40 लाख का कर्जा, काम पूरा होने के बाद की शॉपिंग: दर्शन के कमरे में ही रची गई थी बॉडी को ठिकाने लगाने की साजिश

कर्नाटक में हुए फैन मर्डर केस में पुलिस द्वारा की जा रही छानबीन से रोज नए खुलासे हो रहे हैं। इसी क्रम में पता चला है कि दर्शन थुगुदीपा ने अपने फैन रेणुकास्वामी की हत्या करवाने के लिए आरोपित को जो पैसे दिए उसके लिए उसने अपने दोस्त से 40 लाख रुपए का लोन लिया था। इसके अलावा रेणुकास्वामी को मारकर कहाँ फेंका जाएगा, इसकी साजिश भी उसके होटल वाले कमरे में बैठकर ही रची गई थी।

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट में ये खुलासा एक्टर की रिमांड कॉपी देखने के बाद किया गया है। इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है दर्शन ने अपने बयान में दोस्त से 40 लाख लेने की बात स्वीकार ली है। उसने मान लिया है कि उसने सबूत मिटवाने के लिए और बाकी चश्मदीदों को चुप कराने के लिए 40 लाख रुपए लिए थे।पुलिस ने अभी तक छानबीन में एक्टर के घर से 37.4 लाख रुपयों को बरामद कर लिया है। इसमें पुलिस ने 4.5 लाख रुपए दर्शन फैन असोसिएशन राघवेंद्र के घर से भी बरामद किए हैं। इससे पहले दर्शन ने माना था कि उसने आरोपित प्रदोष को 30 लाख रुपए दिए थे ताकि वो बॉडी को ठिकाने लगा दे।

पुलिस ने बताया कि आरोपितों ने रेणुकास्वामी को जान से मारने के बाद पास के फैशन स्टोर से शॉपिंग की थी और बॉडी फेंकने से पहले उसके शरीर से सोने की चेन और अंगूठी को भी उतार लिया था। पुलिस की जाँच में आरोपितों की गाड़ी से खून के धब्बे मिले हैं जिसमें रखकर उन्होंने रेणुकास्वामी के शव को नाले किनारे कुत्तों के आगे बहाया था।

पुलिस ने दर्शन की पत्नी के आवास पर जाकर भी अपनी छानबीन की थी। वहाँ विजयलक्ष्मी से करीबन 5 घंटे चली पूछताछ में पुलिस ने जानना चाहा ता कि कहीं दर्शन ने इस मामले में उनसे तो पहले कोई बात नहीं की थी, अगर की थी तो वो क्या थी। इसके अलावा पुलिस के मुख्य सवाल यही थे कि आखिर दर्शन हत्या को अंजाम देने के बाद उनके पास क्यों आया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि दर्शन ने विजयलक्ष्मी के साथ जाकर उनके आवास पर पूजा की थी बाद में मैसूर के लिए निकल गए थे।

दिल्ली की अदालत ने ED के दस्तावेज पढ़े बिना ही CM केजरीवाल को दे दी थी जमानत, कहा- हजारों पन्ने पढ़ने का समय नहीं: गिरफ्तारी को बताया था ‘दुर्भावनापूर्ण

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गुरुवार (20 जून 2024) की शाम राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश नियाय बिंदु ने जमानत दे दी। कोर्ट का आदेश शुक्रवार (21 जून) को अपलोड किया गया। निचली अदालत ने ED द्वारा केजरीवाल की गिरफ्तारी को ‘दुर्भावनापूर्ण’ बताया और दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों को पढ़े बिना ही जमानत दे दी। जमानत के आदेश के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हाई कोर्ट का रुख किया है।

जज ने अपने फैसले में कहा कि इस समय हजारों पन्नों के दस्तावेजों को देखना संभव नहीं है। इसके बावजूद कोर्ट ने ईडी की कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण पाया और अरविंद केजरीवाल को जमानत दे दी। कोर्ट ने जमानत के खिलाफ ईडी की दलीलें सुनने से भी इनकार कर दिया और ईडी के वकील से कहा कि वे अपनी दलीलें बहुत संक्षेप में पेश करें। कल रात करीब 8 बजे जल्दबाजी में जमानत आदेश जारी किया गया और समय की कमी के कारण आदेश अपलोड नहीं किया जा सका।

निचली अदालत के जमानत आदेश के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में दलील देते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने ईडी की दलीलें नहीं सुनीं। ईडी द्वारा दिए गए दस्तावेजों को नहीं देखा और कहा कि यह बहुत बड़ा है। एएसजी ने कहा, “कोर्ट का कहना है कि बहुत बड़े दस्तावेज दाखिल किए गए हैं। इससे ज्यादा गलत आदेश कोई नहीं हो सकता।”

ASG राजू ने कहा कि कोर्ट का यह कर्तव्य है कि वह प्रस्तुत दस्तावेजों को देखे। ईडी के वकील ने कहा, “दोनों पक्षों द्वारा दायर दस्तावेजों को देखे बिना, हमें मौका दिए बिना मामले का फैसला किया गया। कानून के अनुसार आदेश पारित करना अदालत का कर्तव्य है। दस्तावेजों को देखे बिना आप कैसे कह सकते हैं कि यह प्रासंगिक है या अप्रासंगिक है?”

एएसजी ने यह भी कहा कि केजरीवाल की ओर से गलत बयान दिया गया और अदालत ने इसे स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश में उल्लेख है कि ईसीआईआर 22 अगस्त 2022 की है, लेकिन यह जुलाई 2022 में पंजीकृत हुई थी। राजू ने तर्क दिया, “यदि आप दस्तावेजों पर गौर करते तो आपको पता चल जाता कि ईसीआईआर अगस्त में पंजीकृत हुई थी। इसलिए जुलाई में सामग्री उपलब्ध होने का कोई सवाल ही नहीं था। गलत तथ्यों, गलत तारीखों पर, आप इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि यह दुर्भावनापूर्ण है।”

ईडी ने हाईकोर्ट में यह भी दलील दी कि निचली अदालत ने इस मामले में हाईकोर्ट के पिछले आदेश की अवहेलना की। इसमें गिरफ्तारी को उचित पाया गया था और दिल्ली के सीएम को ईडी की हिरासत में और फिर जेल में भेज दिया गया था। एएसजी ने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक नहीं लगाई। इसलिए निचली अदालत अरविंद केजरीवाल के पक्ष में फैसला नहीं दे सकती।

एएसजी ने कहा, “फैसले की तुलना निष्कर्षों से करें। यह अदालत कहती है कि कोई दुर्भावना नहीं है। वह उन्हीं तथ्यों पर दुर्भावना पर निष्कर्ष देती है। सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं कहा है कि आप उस फैसले से प्रभावित हुए बिना फैसला करें।” उन्होंने कहा कि जमानत दो आधारों पर रद्द की जा सकती है, यदि प्रासंगिक तथ्यों पर विचार नहीं किया जाता है और अप्रासंगिक तथ्यों पर विचार किया जाता है।

ASG राजू ने कहा कि हाईकोर्ट ने केजरीवाल की गिरफ्तारी को उचित ठहराया था, क्योंकि उन्होंने ईडी के 9 समन को नजरअंदाज किया था। अब निचली अदालत ने विपरीत फैसला देते हुए कहा कि यह ‘पूरी तरह से विपरीत आदेश’ है।

हाईकोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि निचली अदालत ने जमानत आदेश जारी करते समय मामले में उसके फैसले पर विचार नहीं किया। पीठ ने पूछा, “आप कह रहे हैं कि इन सभी बिंदुओं पर विचार नहीं किया गया? आप कह रहे हैं कि हाईकोर्ट द्वारा जिन बिंदुओं पर विस्तार से विचार किया गया था, उन पर विचार नहीं किया गया?”

हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सुधीर कुमार जैन और न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की अवकाश पीठ ने केजरीवाल की जेल से रिहाई पर रोक लगा दी थी। इसके बाद जमानत के खिलाफ ईडी की याचिका पर तत्काल सुनवाई करने पर सहमति जताई थी। ईडी का कहना है कि अदालत ने बिना सुनवाई किए और एजेंसी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों को पढ़े बिना ही केजरीवाल को जमानत दे दी।

दिल्ली ही नहीं आंध्र प्रदेश में भी है एक ‘शीशमहल’, जगन मोहन रेड्डी ने CM रहते पहाड़ को काटकर खड़ा कर दिया ₹500 करोड़ का महल: ड्रोन की तस्वीरों से हुआ खुलासा

आंध्र प्रदेश में तेलुगु देशम पार्टी की सरकार आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। टीडीपी का कहना है कि जगन ने विशाखापत्तनम में 500 करोड़ रुपए खर्च कर आलीशान महल बनवाया है और ये महल बना है कि रुशिकोंडा हिल पर।

आरोप है कि अपना ये 500 करोड़ रुपए का महल खड़ा करने में रेड्डी ने पहाड़ पर लगे आधे से ज्यादा पेड़ों का सफाया कर डाला। गुरुवार (20 जून 2024) को इसकी ड्रोन से बनाई वीडियो और तस्वीर भी खूब वायरल हुई। कुछ लोग अब इन तस्वीरों को 2021 में रुशिकोंडा पहाड़ वाली फोटो से तुलना करके दिखा रहे हैं कि रेड्डी ने अपने महल के लिए प्रकृति के साथ कितना घिनौना खेल खेला है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, रुशिकोंडा हिल पर बनाया गया पैलेस का विवाद उस समय शुरू हुआ था जब भीमिली के विधायक गंटा श्रीनिवास राव ने पिछली वाईएसआरसी सरकार द्वारा रुशिकोंडा हिल के ऊपर बनाए गए महलों का दौरा किया था। उन्होंने इन बिल्डिंगों को ‘राज महल’ बताया था। साथ ही टीडीपी नेता ने परियोजना को लेकर चिंता जताई थी।

रुशिकोंडा पहाड़ की तस्वीरें देखने के बाद लोग जगन मोहन रेड्डी की तुलना दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल से कर रहे हैं। रुशिकोंडा पर बने ‘महल’ की तुलना दिल्ली वाले ‘शीशमहल’ से हो रही है। कहा जा रहा है कि पहाड़ा पूरा पेड़ों से घिरा था तो हरा भरा लगता था लेकिन अपने बड़े बड़े घर बनाने के लिए राजनेताओं ने सब बर्बाद कर दिया। लोग माँग कर रहे हैं कि ग्रीन ट्रिब्यूनल को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए। कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर महल के भीतर की भी सामने आई हैं। इसमें चमचमाते पत्थर और इंटीरियर दिखाई दे रहा है।

‘हलाल प्रोडक्ट का विरोध करने के कारण हम निशाने पर’: जिस चोर औरंगजेब की मौत को ‘मॉब लिंचिंग’ बता बवाली हुए मुस्लिम, उसकी सच्चाई अलीगढ़ के कारोबारियों ने बताई

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में मंगलवार (18 जून 2024) को औरंगज़ेब उर्फ़ मोहम्मद फरीद की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने इसे हत्या बताकर 10 नामजद आरोपितों के खिलाफ तहरीर दी है। अब तक 6 आरोपित गिरफ्तार कर लिए गए हैं। वहीं, आरोपितों के परिजन औरंगजेब को चोर बता रहे हैं, जो उनके घर में चोरी करने के उद्देश्य से घुसा था।

अलीगढ़ के मामू-भांजा इलाके के उद्योग युवा व्यापर मंडल ने आरोपित हिन्दुओं के समर्थन में मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार (20 जून 2024) को कई व्यापारियों ने स्थानीय भाजपा सांसद को ज्ञापन देकर खुद को चोरों से पीड़ित बताया। उन्होंने आरोपित हिन्दुओं पर गलत धाराओं में कार्रवाई किए जाने का आरोप लगाया और कहा कि हलाल प्रोडक्ट के बहिष्कार की वजह से वे मुस्लिमों के निशाने पर हैं।

अलीगढ़ का मामू-भांजा इलाका गाँधी पार्क थाना क्षेत्र में पड़ता है। इसी क्षेत्र में रेडियो मार्केट नाम का क्षेत्र है, जहाँ सैकड़ों व्यापारियों के प्रतिष्ठान हैं। यहाँ के अधिकांश व्यापारी हिंदू हैं। फरीद उर्फ़ औरंगज़ेब की हत्या में नामजद किए गए लगभग आधे दर्जन आरोपित इसी बाजार के कारोबारी हैं और वे अलग-अलग तरह के कारोबार में संलग्न हैं।

अलीगढ़ से भाजपा सांसद सतीश गौतम 20 जून (गुरुवार) को इस बाजार में गए थे। यहाँ दर्जनों व्यापारियों ने एकजुट होकर उन्हें ज्ञापन दिया। ज्ञापन में कहा गया है कि जिस घटना में IPC की धारा 304 के तहत कार्रवाई की जानी थी, उसमें मुस्लिमों के दबाव की वजह से भारतीय दंड संहिता की धारा 302 लगाई गई है।

लगे गैर-इरादतन हत्या की धाराएँ

राजेश गर्ग, राहुल गर्ग, सुनील राजनी, पंकज अग्रवाल, किशन अरोड़ा सहित कई व्यपारियों का कहना है कि मृतक औरंगजेब से नामजद लोगों की पहले से कोई दुश्मनी नहीं थी। जिन व्यापारियों को इस मामले में आरोपित किया गया है, उनका भी कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। इसलिए यह घटना जानबूझकर अंजाम नहीं दिया गया है।

कहा जा रहा है कि औरंगज़ेब चोरी करते हुए पकड़ा गया था। इसके बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा था और लोगों ने उसकी पिटाई कर दी थी। आरोपितों का दावा है कि औरंगज़ेब को जीवित हालत में पुलिस को सौंपा गया था। ऐसे में बाद में किसी हालात में औरंगजेब की मौत हो जाती है तो अधिक से अधिक गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा चलना चाहिए, ना कि 302 IPC में।

कारोबारियों द्वारा भाजपा सांसद को दिया गया ज्ञापन

हलाल प्रोडक्ट पर कार्रवाई के समर्थन के बाद निशाने पर

बीजेपी सांसद को दिए गए ज्ञापन में व्यापारियों ने इस बात को प्रमुखता से बताया है कि वो सभी देश और विदेश के साजिशकर्ताओं के निशाने पर हैं। अपने खिलाफ साजिश की मूल वजह व्यापर युवा मंडल ने हलाल प्रोडक्ट का बहिष्कार करना बताया है। व्यापारियों के मुताबिक, फरवरी 2024 में जब उत्तर प्रदेश शासन ने हलाल उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी, तब बाजार ने पूरा समर्थन दिया था।

बाजार में सभी व्यापारियों ने हलाल सामान लेने और देने पर रोक लगा दी थी। व्यापारियों का आरोप है कि इसी बॉयकॉट का गुस्सा उनको कातिल और अन्य आरोप लगाकर उतारा जा रहा है। उनका यह भी कहना है कि विदेशों से हो रहे ट्वीट और स्थानीय कुछ संदिग्धों की हरकतें उनके आरोपों को मजबूती देते हैं।

व्यापारियों ने अपने ज्ञापन में यह भी आशंका जताई है कि आने वाले भविष्य में भी मामू-भांजा इलाके के कारोबारियों को किसी ना किसी साजिश का शिकार बनाया जा सकता है। उन सभी ने सामूहिक तौर पर शासन से संरक्षण की माँग की है। उन्होंने व्यापारियों को बदनाम करने के लिए प्रोपेगेंडा फैलाने का भी आरोप लगाया।

चोर और डकैत हमें आराम से लूट सकें, इसलिए सारा प्रोपोगेंडा

अलीगढ़ के स्थानीय व्यापारियों द्वारा भाजपा सांसद को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि इस तरह का प्रोपेगेंडा फैलाने का उद्देश्य यह भी है कि भविष्य में यदि उनके यहाँ चोरी आदि की घटनाएँ होती हैं तो वे डर कर शिकायतें ना करें। इन सभी ने एकजुट होकर बताया है कि यहाँ पहले भी कई चोर पकड़े गए है, जिनमें अधिकतर वर्ग विशेष (मुस्लिम समुदाय) से हैं।

व्यापारियों का कहना है कि एक साजिश के तहत फैलाए जा रहे इस तरह के साम्प्रदायिक एंगल से उनके कारोबार को काफी नुकसान हो रहा है। व्यापारियों ने यह भी दावा किया है कि यहाँ घटना को लेकर हंगामा इसलिए भी किया जा रहा है, जिससे वो चोरी आदि की घटनाओं को व्यापारी नजरअंदाज करते रहें और कोई ऐक्शन ना लें।

लगातार तीसरी बार नरेंद्र मोदी बने हैं PM, पर ‘पत्रकार’ बिल मेर लोकसभा चुनावों में ‘बड़ी हार’ बता अमेरिकी दर्शकों को बना रहा पोपट

अमेरिकी टीवी प्रेजेंटेटर बिल मेर ( Bill Maher ) ने एक शो के दौरान भारत के लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर बड़ा ही बकवास और झूठा दावा कर विवाद खड़ा कर दिया। लोकसभा चुनाव में बीजेपी और एनडीए की प्रचंड जीत के तथ्य की अनदेखी करते हुए बिल मेर ने लाइव शो के दौरान कह दिया कि ‘पीएम मोदी को बड़ी हार’ मिली है।

बिल मेर ने अपने शो के दौरान ये विवादित दावे किए, जो गुरुवार (20 जून) को प्रसारित हुआ। शो के एक अतिथि ‘पत्रकार’ जोएल स्टीन थे, जिन्होंने दावा किया कि संयुक्त राज्य अमेरिका में बड़े पैमाने पर अप्रवास का मुद्दा दक्षिणपंथियों का प्रोपेगेंडा है। जोएल स्लीन ने कहा, “अप्रवासन के अलावा दक्षिणपंथी पार्टियों के कई लोक लुभावन वादे भी अहम है। मेरा मतलब है कि भारत में अति दक्षिणपंथी पॉपुलिज्म है।” ठीक उसी समय बिल मेर ने हस्तक्षेप किया और दावा किया कि भारत में लोगों ने ‘दक्षिणपंथी राजनीति’ को अस्वीकार कर दिया है।

बिल मेर ने अपनी अज्ञानता दिखाते हुए कहा, “अभी खारिज (दक्षिणपंथ) हो गया, मोदी ने उन चुनावों में बड़ी हार का सामना किया।” बिल माहेर जो दावा कर रहे हैं, वो पूरी तरह से गलत है, क्योंकि पीएम मोदी की अगुवाई में बीजेपी ने लोकसभा चुनाव 240 सीटें हासिल की है और सबसे बड़ी पार्टी है। ये किसी भी राजनीतिक पार्टी का 1983 से 2013 के बीच सबसे बड़ी चुनावी जीत है। साल 2014 और 2019 में बीजेपी को ही इससे बड़ी जीत मिली थी।

भारत के कुल 230 मिलियन लोगों ने पीएम मोदी के नेतृत्व वाले बीजेपी को वोट दिया है, जो कि साल 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में जो बायडेन और डोनाल्ड ट्रम्प को मिले कुल वोटों से भी अधिक है। हालाँकि यह सच है कि बीजेपी पूर्ण बहुमत के आँकड़े से 32 सीटें पीछे रह गई, लेकिन भगवा पार्टी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के अपने सहयोगियों और स्वतंत्र उम्मीदवारों की मदद से आसानी से बहुमत हासिल करने में सफल रही।

‘नैतिक जीत’ का भ्रम फैला रही कॉन्ग्रेस

मौजूदा समय में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास लोकसभा में 300 से अधिक सीटें हैं। वहीं, इसके उलट कॉन्ग्रेस और इंडी उसका महागठबंधन 4 जून 2024 को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से ही ‘नैतिक जीत’ का दावा कर रहा है। कॉन्ग्रेस और इंडी गठबंधन का दावा न सिर्फ पूरी तरह से गलत है, बल्कि ये दुष्प्रचार के सिवा कुछ भी नहीं है।

जिन्हें नहीं पता, उन्हें बता दें कि पिछले 28 सालों (1985-2013) में किसी भी राजनीतिक दल को 240 या उससे ज़्यादा सीटें नहीं मिली थीं। बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में 282 सीटें और 2019 के लोकसभा चुनाव में 303 सीटें जीतकर इस ट्रेंड को पलट दिया था। हालाँकि इस चुनाव में पिछले 2 चुनावों की तरह बीजेपी को प्रचंड बहुमत तो नहीं मिला है, लेकिन बीजेपी की वर्तमान 240 सीटें भी कॉन्ग्रेस पार्टी के पिछले 40 साल के चुनावी प्रदर्शन से भी काफी बेहतर है।

वैसे कॉन्ग्रेस जोकि बीजेपी के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है, ने साल 2014 में 44 सीटें, साल 2019 में 52 सीटें और साल 2024 यानी अभी के चुनाव में 99 सीटें ही जीती हैं। पिछले तीनों चुनाव को मिला लें, तब भी कॉन्ग्रेस सिर्फ 195 सीटें ही जीत पाई है, जबकि इसकी तुलना में अकेले 2024 में ही बीजेपी ने 240 सीटें जीती हैं, जो कॉन्ग्रेस के तीन चुनावों की तुलना में अकेले एक बार में 55 सीटें ज्यादा हैं।

बिल माहेर को भारतीय लोकतंत्र की समझ ही नहीं?

अमेरिटी टीवी प्रेजेंटर बिल मेर को लगता है कि भारतीय लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया की समझ ही नहीं है और न ही वो इसके बारे में कोई रिसर्च करते हैं। ऐसे में बता दें कि पीएम मोदी साल 1962 के बाद पहले ऐसे नेता हैं, जिन्होंने लगातार तीन लोकसभा चुनाव जीता और तीन बार प्रधानमंत्री बने हैं। यह बहुत बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि पिछले 52 सालों में ऐसा कभी नहीं हुआ। वो भी तब, जब इंडी गठबंधन में 20 से अधिक पार्टियाँ नरेंद्र मोदी का रास्ता रोकने के लिए पूरा दमखम लगाए हुई थी। उन सभी पार्टियों के गठबंधन की तुलना में अकेले बीजेपी ने ज्यादा सीटें जीती हैं, ऐसे में ये नरेंद्र मोदी या बीजेपी की हार कैसे हो गई?

इसके बावजूद बिल मेर ने सभी तथ्यों को नजरअंदाज करते हुए ये घोषणा कर दी कि ‘पीएम मोदी भारत के लोकसभा चुनाव में हार गए हैं।’ बिल मेर ने जो कुछ भी कहा, वो न सिर्फ कॉन्ग्रेस के नैतिक जीत के भ्रम में आने की बात है, बल्कि तथ्यों की जानकारी न होना भी है। ऐसे में बिल माहेर को चाहिए कि वो किसी भी जानकारी को दर्शकों के सामने ‘परोसने’ से पहले उसकी जाँच कर लें, वर्ना खिल्ली उड़नी भी तय है।

‘जब शेर दहाड़ेगा तब मोदी छुल-छुल कर…’: PM पर अपमानजनक टिप्पणी करने वाले सपा नेता हाजी रजा को खोज रही पुलिस, जमीन कब्जाने से लेकर गैंगस्टर एक्ट तक में दर्ज है मुकदमा

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में समाजवादी पार्टी के नेता और कुख्यात हिस्ट्रीशीटर भूमाफिया हाजी रजा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की है। इसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद भाजपा नेताओं में आक्रोश है। भाजपा की ओर से तहरीर मिलने के बाद पुलिस ने रजा के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

यह वायरल वीडियो जिले के सुल्तानपुर घोष थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। यहाँ पर लोकसभा चुनाव जीतने के बाद समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश उत्तम पटेल का स्वागत कार्यक्रम रखा गया था। उसमें नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष के प्रतिनिधि एवं सपा नेता हाजी रजा भी मौजूद थे। इस दौरान उन्होंने मंच से बोलते हुए यह आपत्तिजनक बयान दिया।

हाजी रजा ने कहा, “हम आपको इस मंच के माध्यम से बताना चाहते हैं और सांसद जी तरफ से भी आश्वस्त करना चाहते हैं कि अब ये फतेहपुर जनपद में नहीं, पूरे उत्तर प्रदेश में नहीं चलने वाले। जिस समय हमारा सांसद लोकसभा में शेर की तरह दहाड़ेगा ना मोदी छुल-छुल करके मूतेगा। बोलने वाला चाहिए। अपनी बात रखने वाला चाहिए।”

हाजी रजा का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद पुलिस ने इस वायरल वीडियो का संज्ञान लिया। फतेहपुर पुलिस ने अपने सोशल मीडिया एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, “प्रकरण में थानाध्यक्ष सुल्तानपुर घोष को जांचकर आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया।”

हाजी रजा सपा नेता के साथ-साथ भूमाफिया एवं हिस्ट्रीशीटर भी है। उस पर जमीनों पर अवैध कब्जे के दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं। सदर कोतवाली से रजा पर गैंगस्टर, हत्या के प्रयास समेत विभिन्न धाराओं के 23 मुकदमे दर्ज हैं। करीब 17 मुकदमों में उसे क्लीन चिट मिल चुकी है। लगभग 6 माह पहले नगरपालिका चुनाव के दौरान उसे जिला बदर किया गया था। वह फरवरी 2024 में वापस आया है।

थाना प्रभारी राजेन्द्र त्रिपाठी ने बताया कि युवा मोर्चा भाजपा मंडल संयोजक आलोक सिंह ने तहरीर दी। उसमें सपा नेता हाजी रजा द्वारा प्रधानमंत्री के खिलाफ अमर्यादित बयान देने की बात कही है। बयान वाले वीडियो के आधार पर 153A, 505/2, 294, 188 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। सपा नेता को गिरफ्तार कर जेल भेजने की कार्यवाही जल्द होगी।

एफआईआर दर्ज होते ही एएसपी विजय शंकर मिश्रा, सीओ सिटी वीर सिंह, सर्किल का फोर्स, एक कंपनी पीएसी के साथ हाजी रजा के आवास पनी व चौधराना मोहल्ल में दबिश दी गई। एएसपी ने बताया कि हाजी रजा की तलाश में ताबड़तोड़ दबिश दी जा रही है। उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

पास में थी सिर्फ 11 बोतल इसलिए छोड़ दिया… तमिलनाडु में जिसने घर-घर बाँटा ‘जहर’, उसे गिरफ्तारी के तुरंत बाद छोड़ा गया था: रिपोर्ट, जहरीली शराब से मरने वालों की संख्या 47 हुई

तमिलजनाडु के कल्लाकुरुची जिले में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों का आँकड़ा बढ़ता जा रहा है। ताजा अपडेट के अनुसार, अब तक मृतकों की संख्या 30 से बढ़कर 47 हो गई है। अभी भी बाकी 30 की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। प्रशासन ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए तीन आरोपितों को 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इनके नाम गोविंदराज, दामोदरम और विजया है। इन्हें 5 जुलाई तक हिरासत में रखा जाएगा।

बता दें कि तमिलनाडु से आए जहरीली शराब मामले में एक अन्य जानकारी भी सामने आई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार इस केस का मुख्य आरोपित गोविंदराज उर्फ ​​कन्नुकुट्टी को घटना से कुछ दिन पहले भी शराब की बोतलों की अवैध बिक्री के लिए गिरफ्तार किया गया था, लेकिन रिपोर्ट दावा करती है कि वहाँ उसे तुरंत छोड़ दिया गया क्योंकि उसके पास से केवल 180 मिलीलीटर की 11 शराब की बोतलें थीं।

ये भी कहा जा रहा है कि गोविंदराज की गिरफ्तारी कोई नई बात नहीं है। उसका अवैध रूप से शराब बेचने का ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। उसे पहले भी गुंडा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया था। हालाँकि, यह पहली बार है जब उसे अपने ग्राहकों की मौत का कारण गिरफ्तार किया गया हो। इस बार उसे, उसकी पत्नी विजय समेत 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

जाँच कर रही टीम को इस मामले में दो और संदिग्धों पर शक है। पुलिस ने कहा कि केवल वरिष्ठ नागरिकों, शारीरिक रूप से विकलांग और महिलाओं को ही खुदरा शराब बेचने के लिए मजबूर किया जाता था ताकि पुलिस उनके खिलाफ सख्त एक्शन ले न सकें। इस मामले में जो व्यक्ति गिरफ्तार हुआ है उनमें एक शारीरिक रूप से दिव्यांग भी है, वहीं गोविंदराज की बाईपास सर्जरी हो चुकी है।

उल्लेखनीय है कि इस मामले की जाँच को राज्य सरकार ने सीबी-सीआईडी को सौंप दिया है। साथ ही कल्लाकुरिची DM श्रवण कुमार जाटवथ का ट्रांसफर किया है, जबकि SP समय सिंह मीना को सस्पेंड किया है। इसके अलावा कल्लकुरिची जिले की निषेध शाखा के पुलिसकर्मियों समेत 9 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया है।

पाली, सूरत, वडोदरा… हर जगह एक जैसा तनाव: कहीं सड़क पर फेंके मवेशी के सिर, कहीं झील में मिले मांस के टुकड़े

राजस्थान के पाली शहर में 4 मवेशियों के सिर मिलने से तनाव फैल गया। इन सिरों पर चमड़ी नहीं थी, ऐसे में स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि ये सिर गौवंश के हैं। स्थानीय लोगों ने कार्रवाई की माँग करते हुए जयपुर-जोधपुर हाईवे को भी ब्लॉक कर दिया। इस बीच राजस्थान पुलिस ने जमकर लाठियाँ भाँजी और करीब 3 घंटे की मशक्कत के बाद हाईवे को खुलवाया। वहीं, दूसरी तरफ गुजरात के सूरत में मांस के बड़े टुकड़े मिलने से तनाव फैल गया, तो वडोदरा की मशहूर सूर सागर झील में भी मांस का बड़ा टुकड़ा मिलने से सनसनी फैल गई। इस सूर सागर झील में भगवान शिव की प्रतिमा भी स्थापित है, जिसके बाद लोगों ने कार्रवाई की माँग की है।

पाली में जमकर बवाल, जाँच जारी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजस्थान के पाली शहर के बजरंग बाड़ी इलाके में बांडी नदी के पास गुरुवार (20 जून 2024) रात को मवेशियों के शवों के कटे अवशेष पड़े होने की सूचना पर मस्तान बाबा क्षेत्र में हंगामा हो गया। गौभक्तों के साथ हिन्दूवादी संगठनों ने मवेशी के अवशेष को देखकर हंगामा किया। भीड़ मस्तान बाबा चौराहे पर जमा हो गई और टायर जला कर विरोध जताया। चौराहे पर लोग धरना देकर बैठ गए। इस दौरान पुलिस ने हल्का बल प्रयोग भी किया, जिसमें चार लोग घायल हो गए।

एएसपी विपिन कुमार शर्मा ने बताया कि बांडी नदी के पास चार से ज्यादा सिर मिले हैं, जिन पर चमड़ी नहीं थी। अब जाँच के बाद ही यह पता चलेगा कि ये सिर किस जानवर के हैं। हिंदू संगठनों का कहना है कि ये गोवंशों के अवशेष हैं। मवेशियों के कटे सिर मिलने की सूचना के बाद लोग बजरंग बाड़ी इलाके में एकत्र हो गए। इस बीच, रात 11 बजे मवेशियों के अवशेष का पोस्टमार्टम करने वाली टीम को लेकर लौट रहे पशुपालन विभाग के ड्राइवर देवीलाल स्कार्पियो को अचानक भीड़ के पास ले आया, जिससे लोग और ज्यादा आक्रोशित हो गए। भीड़ ने स्कार्पियो को घेर लिया और ड्राइवर से मारपीट कर दी।

सूरत के पाल में मिला पशु का सिर

इस बीच, सूरत में जैन देरासर के पास एक जानवर का कटा हुआ सिर मिलने से हड़कंप मच गया। यह मामला सूरत के पाल इलाके में मणिभद्रा रेजीडेंसी के पास का है। आसपास डेरासर हैं और यहाँ जैनियों की अच्छी आबादी रहती है। यहाँ बुधवार (19 जून) सुबह सरेआम एक जानवर का कटा हुआ सिर मिला। तभी जैन समुदाय के महाराजा, नेता और स्थानीय लोग इकट्ठा हो गए और पुलिस को भी सूचना दी गई।

मौके पर पहुँचे जैन मुनि ने कहा, ”पाल में हिंदू-जैन बड़ी संख्या में रहते हैं, इस तरह से गाय का गला काटने का प्रयास करना एक बुरा कृत्य है। एक वर्ग को उकसाने के लिए यह कृत्य किया गया है। इसके अलावा अन्य संत और जैन समुदाय के अन्य सदस्य भी मौके पर पहुँचे और पुलिस से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले अपराधियों का पता लगाने और उन्हें कड़ी सजा देने की अपील की। पुलिस ने बताया है कि इस मामले में एफएसएल अधिकारी को बुलाकर अवशेष सौंप दिया गया है। जाँच के बाद पता चलेगा कि अवशेष किस पशु का है।

वडोदरा के सूर सागर में मिला जानवर का टुकड़ा

वडोदरा की प्रसिद्ध सूरसागर झील में बुधवार (19 जून) को जानवर के मांस का एक टुकड़ा मिला, जिसके गाय का होने का संदेह है। सूचना मिलते ही हिंदू संगठन मौके पर पहुंचे और फिर पुलिस को भी सूचना दी गई।

वडोदरा बजरंग दल के एक कार्यकर्ता ने कहा कि जानवर के मांस का टुकड़ा गोमांस जैसा लग रहा है। यह वडोदरा शहर की शांति भंग करने का प्रयास है। हम माँग करते हैं कि जिसने भी यह कृत्य किया है उसका पता लगाकर उसे गिरफ्तार किया जाए और कड़ी कार्रवाई की जाए।।

बता दें कि सूरसागर झील के मध्य में भगवान शिव की एक विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है। वहीं पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए सैंपल एफएसएल को भेज दिए हैं। एफएसएल जाँच के बाद पता चलेगा कि टुकड़ा गोमांस का है या नहीं। फिलहाल आगे की जाँच चल रही है।

अभी तिहाड़ जेल से बाहर नहीं आ पाएँगे दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल, हाई कोर्ट ने बेल पर लगाई रोक: ED ने बताया- अब तक मोबाइल का पासवर्ड नहीं दिया

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जमानत पर दिल्ली हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। इससे पहले राउज एवेन्यू कोर्ट ने उनकी बेल को मंजूरी दी थी, जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय इस फैसले को चुनौती देने हाई कोर्ट पहुँचा और वहाँ बेल पर रोक लगी।

मामले की सुनवाई जस्टिस सुधीर जैन और जस्टिस रविंदर डुडेजा की बेंच ने की। इस दौरान ई़डी की ओर से एएसजी राजू पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उन्हें मामले में दलीलें रखने का मौका नहीं मिला। वहीं केजरीवाल के वकील कहते रहे कि फैसले को शालीनता से मान लेना चाहिए।

दोनों पक्षों के सुनने के बाद हाई कोर्ट ने कहा की याचिका पर सुनवाई होने तक ट्रायल कोर्ट के आदेश को प्रभावी नहीं माना जाएगा। यानी हाई कोर्ट का जब तक फैसला नहीं आ जाता तब तक केजरीवाल जेल में ही रहेंगे।

केजरीवाल ने अभी तक नहीं दिया मोबाइल का पासवर्ड

बता दें कि इस मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने कल (20 जून 2024) केजरीवाल को बेल दी थी। तब, ईडी की ओर से पेश वकील ने कहा था कि ईडी ने अपनी जाँच हवा में नहीं की है। केजरीवाल के खिलाफ ईडी को पुख्ता सबूत मिले हैं।

इसके अलावा बेल रिजेक्ट करने का मजबूत आधार यह है कि केजरीवाल ने अभी तक अपने मोबाइल का पासवर्ड नहीं दिया है। उन्हें केस में बेल नहीं मिलनी चाहिए। वहीं केजरीवाल के वकील ने मामला को कल्पना पर आधारित बनाया था।

इन दलीलों के बाद कोर्ट ने केजरीवाल को बेल देने का फैसला दिया था लेकिन 2 शर्तों के साथ। पहली वह मामले की जाँच में बाधा डालने या गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे। दूसरा जरूरत पड़ने पर वह अदालत में पेश होंगे और जाँच में हर तरह से सहयोग करेंगे। कोर्ट का फैसला सुन पार्टी सदस्यों ने सड़कों पर पटाखे फोड़कर जश्न भी मनाया था।

कब हुए थे केजरीवाल गिरफ्तार

उल्लेखनीय है कि दिल्ली शराब घोटाला के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 21 मार्च को अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया था। 1 अप्रैल को उन्हें तिहाड़ में डाला गया था। फिर 10 मई को उन्हें चुनावों के लिए 21 दिन जमानत मिली थी और 2 जून को फिर से तिहाड़ पहुँच गए थे। 19 जून को उनकी न्यायिक हिरासत को 3 जुलाई तक बढ़ा दिया गया था।