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टेलीग्राम पर ₹500 में मिल रहा था UGC-NET का पेपर, CBI कर रही जाँच: सॉल्वर गैंग का सरगना खुद पास नहीं कर पाया था NEET, कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाले में बाप भी जा चुका है जेल

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग-राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा ( UGC-NET ) के प्रश्न पत्र डार्कनेट पर लीक हो गए थे। ये आसानी से टेलीग्राम जैसे ऐप पर उपलब्ध थे, वो भी महज 500 से 5000 रुपए में। जब राष्ट्रीय साइबर अपराध निरोधक एजेंसी ने इसकी सूचना यूजीसी और शिक्षा मंत्रालय को दी, तब शिक्षा मंत्रालय ने यूजीसी-नेट की परीक्षा रद्द घोषित कर दी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रश्न पत्र लीक होने को स्वीकार किया है और कहा है कि ये प्रक्रिया का हिस्सा है कि अगर प्रश्न पत्र लीक हो जाते हैं, तो उक्त परीक्षा को रद्द कर दिया जाता है। इस मामले की जाँच अब सीबीआई कर रही है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार (20 जून 2024) को खुलासा किया कि प्रश्नपत्र “डार्कनेट” में लीक हो गए थे। यूजीसी-नेट मंगलवार (18 जून 2024) को आयोजित की गई थी, औत इसके तुरंत बाद सोशल मीडिया पर इस पेपर के लीक होने की बात कही जाने लगी थी। हालाँकि ये परीक्षा रद्द कर दी गई। इस मामले में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि परीक्षा रद्द अचानक नहीं की गई, बल्कि “भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) की राष्ट्रीय साइबर अपराध खतरा विश्लेषण इकाई से मिली जानकारी के आधार पर प्रथम दृष्टया पाया गया कि डार्कनेट में प्रश्नपत्र थे। टेलीग्रामपर भी प्रश्नपत्र प्रसारित किए जा रहे थे।” धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि लीक के नाम पर बिक रहे प्रश्न पत्रों का जब मूल प्रश्नपत्रों से मिलान किया गया, तो दोनों एक जैसे ही पाए गए, इसीलिए अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए परीक्षा रद्द करनी पड़ी।

क्या है डार्क नेट?

डार्क वेब इंटरनेट का एक एन्क्रिप्टेड हिस्सा है जो Google जैसे पारंपरिक सर्च इंजन के माध्यम से आम जनता को दिखाई नहीं देता है। डार्कनेट के रूप में भी जाना जाने वाला डार्क वेब इंटरनेट पर अवैध गतिविधि का एक बड़ा हिस्सा है। यूजीसी-नेट के लिए 11 लाख से अधिक छात्रों ने पंजीकरण कराया था। इससे पहले दिन में शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव गोविंद जायसवाल ने कहा कि जल्द ही एक नई परीक्षा आयोजित की जाएगी। हालाँकि, कोई समयसीमा घोषित नहीं की गई।

नीट-यूजी पेपर सॉल्वर गैंग के सरगना की नई कहानी

इस बीच, बिहार में लीक हुए नीट-यूजी परीक्षा ( NEET-UG Exam ) से जुड़ी नई जानकारी सामने आ रही है। बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (इओयू) वैशाली के अतुल वत्स और अंशुल सिंह को तलाश रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार अब तक की जाँच में मिले सुरागों के आधार पर अतुल और अंशुल को ही बिहार में नीट पेपर लीक का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। इन दोनों ने ही खेमनीचक में प्रश्न-पत्र रटवाने वाले अमित आनंद और नीतीश कुमार को प्रश्न-पत्र की प्रति वाट्सएप पर भेजी थी। पहले भी इन दोनों का नाम पेपर लीक मामले में आ चुका है। साल 2020 में भी अतुल वत्स का नाम सामने आया था।

पेपर लीक कराने वाला और एग्जाम की तैयारी कराने वाले सॉल्वर गैंग का सरगना अतुल वत्स कभी खुद भी नीट की तैयारी कर रहा था, लेकिन वो फेल हो गया था। वहीं, उसकी गर्लफ्रेंड पास हो गई थी और वो एमबीबीसी की परीक्षा पास कर डॉक्टर बन गई। उसने अतुल पर रेप का आरोप भी लगाया था, जिसमें अतुल को जेल जाना पड़ा था। बाद में अतुल ने उससे शादी कर ली। अतुल मूल रूप से जहानाबाद के बंधुगंज गाँव का निवासी है और उसने पिता अरुण केसरी का भी दारगार इतिहास रहा है। अरुण केसरी कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाले के समय डिप्टी डायरेक्टर था, जिसे सीबीआई ने गिरफ्तार किया था।

न्यूज 18 ने पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया है कि अतुल वत्स के साथी सौरभ सुमन की गर्लफ्रेंड BBA पास है। वो छात्राओं की काउंसिलिंग करके इस शातिरों से मिलाती थी। वहीं, अतुल की पत्नी एमबीबीएस है।

बता दें कि नीट-यूजी का मामला सुप्रीम कोर्ट में है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एनटीए ने ग्रेस मार्क के प्रावधान को खत्म कर 1500 से अधिक अभ्यर्थियों को फिर से एग्जान देने को कहा है। वहीं, कुछ छात्रों ने मामले की सीबीआई जाँच की माँग की भी याचिका दायर की है। इस बीच, पूरे देश में छात्र फिर से नीट-यूजी की परीक्षा आयोजित कराने की माँग कर रहे हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने काउंसिलिंग पर रोक नहीं लगाई है।

इस मामले में अब तक कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसमें अमित आनंद, सिकंदर कुनार यादवेंदु, अनुराग यादव (अभ्यर्थी) भी शामिल हैं। बिहार में गिरफ्तार 7 अपराधियों ने अबतक अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। इस मामले में बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की संलिप्लता भी सामने आई है।

जिसे मुस्लिम कहते हैं ‘कमाल मौलाना मस्जिद’ वहाँ खुदाई में मिली काले पत्थर पर बनी भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति, भोजशाला के ASI सर्वे में मिले हैं पाषाण चिह्न भी

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित एतिहासिक धरोहर भोजशाला में इंदौर हाईकोर्ट के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) पिछले तीन महीने से सर्वे कर रहा है। इस दौरान तकनीक से लेकर श्रमिकों की मेहनत से 25 फीट नीचे तक मिट्टी हटाकर प्राचीन अवशेषों और मूर्तियों को निकाला गया है। 20 जून 2024 यानी सर्वे के 91 दिन भी इस भोजशाला के सर्वे के दौरान काले पत्थर पर भगवान कृष्ण की डेढ़ फीट की मूर्ति मिली, साथ ही दो अन्य पुरावशेष भी मिले हैं। भोजशाला मुक्ति यज्ञ के पदाधिकारियों ने दावा किया है कि इन अवशेषों पर सनातन धर्म के प्रतीक हैं।

जानकारी के मुताबिक एएसआई ने भोजशाला के उत्तरी भाग में खोदाई की थी। इसी दौरान उन्हें भगवान श्रीकृष्ण की खड़े स्वरूप वाली प्रतिमा मिली। इसके अलावा एक पुरावशेष में सनातन धर्म को चिह्नित करने वाले प्रतीक चिह्न हैं जबकि दूसरे पुरावशेष में दाईं और बाईं तरफ यक्ष बन रखे हैं। इन्हें सारे प्रतीकों को एएसआई द्वारा चिह्नित कर लिया गया है। भोजशाला में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति से पहले ऐसे पाषाणों के अवशेष मिले हैं जिसमें सूर्य के आठों पहर के चिन्ह बने हुए थे। यह अवशेष 1×3.5 वर्ग फीट आकार का था

बता दें कि पिछले तीन महीनों से भोजशाला में एएसआई की टीम मेहनत कर रही है। यहाँ होली से लेकर मतदान वाले दिन भी सर्वे चला है। इस सर्वेक्षण के दौरान खोदाई में मूर्तियों का और शिलालेखों का मिलना लगातार जारी है। पूरे मामले पर 4 जुलाई को इंदौर हाईकोर्ट सुनवाई करेगा। उससे पहले एएसआई सर्वे में जुटाए सबूतों की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करवाए तैयार है।

मालूम हो कि इस संबंध में हिंदू पक्ष ने याचिका डाली हुई है कि भोजशाला उनकी माँ वाग्देवी का मंदिर है। वहीं मुस्लिम पक्ष इसे अपना मजहबी स्थल बताकर सर्वे के खिलाफ बोल रहे हैं। इस मामले में 11 मार्च को इंदौर हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद सर्वे की अनमुति दी थी। 22 मार्च से सर्वे शुरू हुआ, 1 अप्रैल को मुस्लिम पक्ष इसे रोकने सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, 29 अप्रैल को एएसआई के आवेदन पर सर्वे की समयसीमा और बढ़ाई गई, अब 4 जुलाई को इंदौर हाईकोर्ट में सर्वे की अंतिम रिपोर्ट को पेश करना है।

वाग्देवी मंदिर कैसे बना कमालुद्दीन मस्जिद

गौरतलब है कि भोजशाला विवाद बहुत पुराना विवाद है। हिंदू पक्ष का मत है कि ये माता सरस्वती का मंदिर है जिसकी स्थापना राजा भोज ने सन् 1000-1055 के मध्य कराई थी। सदियों पहले मुसलमान आक्रांताओं ने इसकी पवित्रता भंग करते हुए यहाँ मौलाना कमालुद्दीन (जिस पर तमाम हिंदुओं को छल-कपट से मुस्लिम बनाने के आरोप हैं) की मजार बना दी थी जिसके बाद यहाँ मुस्लिमों का आना जाना शुरू हो गया और अब इसे नमाज के लिए प्रयोग में लाया जाता है। हालाँकि हिंदू पक्ष का कहना है कि ये उनका मंदिर ही है क्योंकि आज भी इसके खंभों पर देवी-देवताओं के चित्र और संस्कृत में श्लोक लिखे साफ दिखते हैं। इसके अलावा दीवारों पर ऐसी नक्काशी है जिसमें भगवान विष्णु के कूर्मावतार के बारे में दो श्लोक हैं।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस : श्रीनगर में बोले पीएम मोदी, मिलती है शक्ति, पूरी दुनिया से योग सीखने भारत आ रहे लोग’, योगी आदित्यनाथ बोले-ऋषि परंपरा का हिस्सा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दसवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर श्रीनगर पहुँचे। यहाँ से उन्होंने पूरी दुनिया को योग पर संदेश दिया और खुद भी शेर-ए-कश्मीर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में योग सत्र का नेतृत्व किया। पीएम मोदी ने कहा कि जम्मू कश्मीर योग-साधना की भूमि है। इससे उत्पादकता और सहनशक्ति बढ़ती है। योग से नए अवसर पैदा हुए हैं। योग केवल विद्या नहीं बल्कि विज्ञान है। योग से एकाग्रता बढ़ती है। योग पर अब रिसर्च हो रही है। योग टूरिज्म का नया ट्रेंड बन गया है। वहीं, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी योग किया और इसे ऋषि परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। इसके अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, सैन्य बलों ने भी योगाभ्यास किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन केन्द्र (SKICC) में योग किया।

लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा योग दिवस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे कश्मीर आने का सौभाग्य मिला है। हमें योग से जो शक्ति मिलती है, मैं श्रीनगर में उसे महसूस कर रहा हूँ। मैं देश के सभी लोगों और दुनिया के कोने-कोने में योग करने वालों को कश्मीर की धरती से योग दिवस की बधाई देता हूँ। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 10 वर्ष की ऐतिहासिक यात्रा पूरी कर चुका है।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “आज कश्मीर की धरती से मैं दुनिया भर के सभी लोगों को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की बधाई देता हूँ। दस साल पहले मैंने संयुक्त राष्ट्र में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था। भारत के प्रस्ताव को 177 देशों ने समर्थन दिया था, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। 2015 में दिल्ली के कर्तव्यपथ पर 35,000 लोगों ने एक साथ योग किया…”

प्रधानमंत्री मोदी ने 10वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर कहा कि जम्मू कश्मीर योग-साधना की भूमि है। इससे उत्पादकता और सहनशक्ति बढ़ती है। योग से नए अवसर पैदा हुए हैं। योग केवल विद्या नहीं बल्कि विज्ञान है। योग से एकाग्रता बढ़ती है। योग पर अब रिसर्च हो रही है। योग टूरिज्म का नया ट्रेंड बन गया है।

पीएम मोदी ने कहा कि इस साल भारत में फ्रांस की 101 साल की महिला योगा शिक्षिका को पद्मश्री से सम्मानित किया गया। वह कभी भारत नहीं आई लेकिन उन्होंने पूरा जीवन योग को लेकर जागरूकता फैलाने में लगा दिया। आज देश-दुनिया की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज और संस्थानों में योग पर रिसर्च हो रही है। योग पर रिसर्च पेपर पब्लिश हो रहे हैं।

देश के अलग-अलग हिस्सों में केंद्रीय मंत्रियों ने किया योग

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा, “मुझे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में योग प्रेमियों के साथ योग करने का अवसर मिला…प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में योग दुनिया के हर कोने तक पहुँच गया है।”

10वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने योग किया।

10वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर लेह के पैंगोंग त्सो में ITBP के जवानों ने योग किया।

योग भारतीय ऋषि परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा

इस मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 10वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर प्रदेशवासियों को बधाई दी और पीएम मोदी के प्रयासों की तारीफ की। उन्होंने योग को भारतीय ऋषि परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया और कहा कि योग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरत है। सीएम योगी ने कहा कि पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति और परंपरा का सम्मान हो रहा है।

सितंबर 2014 को पीएम मोदी ने UNGA में रखा था प्रस्ताव, मिला भारी समर्थन

गौरतलब है कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस योग के अनेक लाभों के बारे में दुनिया भर में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। यह उस प्राचीन भारतीय प्रथा को मान्यता देने का दिन है, जो मानसिक और शारीरिक कल्याण पर केंद्रित है। सितंबर 2014 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए उन्होंने प्रतिवर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था। प्रधानमंत्री मोदी ने योग के कल्याणकारी लाभों तथा स्वास्थ्य के प्रति इसके समग्र दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस उत्सव के लिए 21 जून को आदर्श तिथि बताया, क्योंकि यह कई संस्कृतियों में महत्व रखती है और उत्तरी गोलार्ध में ग्रीष्म संक्रांति का दिन है। इस प्रस्ताव ने गति पकड़ी और संयुक्त राष्ट्र ने दिसंबर 2014 में एक प्रस्ताव पारित कर आधिकारिक तौर पर 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित कर दिया। वहीं, रिकार्ड तोड़ 175 सदस्य देशों ने प्रस्ताव का समर्थन किया।

शराब घोटाले के आरोपित दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल को जमानत: जाँच एजेंसी ED बोली- AAP मुखिया के रूप में उन पर चल सकता है केस

दिल्ली के मुख्यमंत्री और AAP के मुखिया अरविन्द केजरीवाल को दिल्ली की राउज अवेन्यु कोर्ट ने शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत दे दी है। CM केजरीवाल को प्रर्वतन निदेशालय ने दिल्ली शराब घोटाला मामले में 21 मार्च, 2024 को गिरफ्तार किया था।

दिल्ली की राउज अवेन्यु कोर्ट में एक विशेष अदालत ने इस मामले सुनवाई की। CM केजरीवाल ने इस अदालत के सामने नियमित जमानत के लिए याचिका लगाई हुई थी। इस मामले की सुनवाई जज नियय बिंदु ने की। उन्होंने पहले इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

गुरुवार (20 जून, 2024) को इस मामले का फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने केजरीवाल को जमानत दे दी। CM केजरीवाल को कोर्ट ने ₹1 लाख के मुचलके पर जमानत दी है। उनके शुक्रवार (21 जून, 2024) को जेल से बाहर आने के कयास हैं। वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं।

इस मामले की सुनवाई के दौरान ED ने कोर्ट से माँग की कि केजरीवाल का मुचलका तब तक ना जमा किया जाए जब तक इस मामले के खिलाफ उच्च न्यायालय में चुनौती दी सके। इसके लिए ED ने 48 घंटों की माँग की थी। हालाँकि, कोर्ट ने एजेंसी की यह माँग मानने से इनकार कर दिया।

इस मामले की सुनवाई के दौरान ED ने स्पष्ट किया कि उसके पास दिल्ली शराब घोटाला के पक्के सबूत हैं। एजेंसी ने कहा कि उसके पास इस मामले में पैसे के लेनदेन तक की फोटो हैं। एजेंसी ने यह भी कहा कि CM केजरीवाल ने अपने फ़ोन का पिन बताने से भी मना किया, जो इस मामले में शंका पैदा करता है।

एजेंसी ने यह भी साफ़ कर दिया कि अगर केजरीवाल निजी तौर पर इस मामले में नहीं भी शामिल हैं तो भी उन पर मुकदमा चल सकता है क्योंकि AAP के मुखिया वही हैं और मामले में AAP को भी आरोपित बनाया गया है। वहीं केजरीवाल के पक्ष ने कहा कि उन पर लगाए आरोपों का कोई सबूत मौजूद नहीं है।

गौरतलब है कि दिल्ली शराब घोटाला मामले में CM केजरीवाल को ED ने 21 मार्च, 2024 को गिरफ्तार कर लिया था। एजेंसी ने आरोप लगाया था कि केजरीवाल ही इस पूरे मामले के सरगना हैं। एजेंसी का आरोप है कि दिल्ली में शराब नीति बदल कर निजी विक्रेताओं को फायदा पहुँचाया और उनसे बदले में लाभ प्राप्त कि।

जिस नाबालिग से किया था दुष्कर्म, उससे शादी के लिए कोर्ट ने आरोपित को दी अंतरिम जमानत: कर्नाटक हाई कोर्ट ने बताया विशेष परिस्थिति, जानिए पूरा मामला

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने हाल ही में बच्चों के यौन अपराध से संबंधित पॉक्सो अधिनियम के आरोपित को पीड़िता से विवाह करने के लिए 15 दिनों की अंतरिम जमानत दे दी है। पीड़िता अब वयस्क हो चुकी है और उसने एक बच्चे को भी जन्म दिया है, जिसकी उम्र एक साल है। कोर्ट ने कहा कि यह आदेश मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए पारित किया गया है।

कर्नाटक हाई कोर्ट की न्यायाधीश एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने कहा कि इस आदेश में उस माँ का भाग्य भी शामिल है, जिसे कम उम्र में ही बच्चे का पालन-पोषण करना होगा। यह एक माँ के लिए बेहद कठिन परिस्थिति है। इसलिए पीड़िता से विवाह के लिए आरोपित को अंतरिम जमानत दी जाती है। यह याचिका आरोपित ने दाखिल की थी।

कोर्ट ने कहा, “इन विशेष परिस्थितियों में माँ को इतनी कम उम्र में बच्चे का पालन-पोषण करना है, जो बेहद कठिन परिस्थितियों में है। इसलिए माँ और बच्चे की स्थिति को देखते हुए मैं याचिकाकर्ता को पीड़िता से विवाह करने की अनुमति देकर परिवारों की शिकायतों को दूर करना उचित समझता हूँ। पीड़िता अब 18 वर्ष से अधिक की हो चुकी है।”

न्यायाधीश ने आगे कहा, “उक्त विवाह के उद्देश्य से मैं सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए याचिकाकर्ता को अंतरिम जमानत देना उचित समझता हूँ, ताकि याचिकाकर्ता बाहर आकर पीड़िता से विवाह कर सके। मामले में मौजूद विशेष परिस्थितियों के कारण यह कदम उठाया गया है, क्योंकि माँ को बच्चे का पालन-पोषण करना है।”

न्यायालय ने कहा कि नवजात शिशु को नहीं पता है कि क्या हुआ है और उसे भविष्य में किसी भी तरह की बदनामी नहीं झेलनी चाहिए। आदेश में आगे कहा गया है, “इसलिए, बच्चे के हितों की रक्षा करने और बच्चे के पालन-पोषण में माँ की जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए यह निर्देश जारी करना आवश्यक पाया गया है।”

दरअसल, पीड़िता की माँ ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि उसकी बेटी और आरोपित याचिकाकर्ता के बीच स्कूल में प्रेम संबंध थे। दोनों अक्सर मिलते थे। 15 फरवरी 2023 को आरोपित उसकी बेटी को अपनी बाइक पर बैठाकर एक सुनसान जगह पर ले गया और उसका यौन उत्पीड़न किया। शिकायत में कहा गया है कि घटना के समय पीड़िता की उम्र 16 साल और 9 महीने थी।

शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपित के खिलाफ पॉक्सो सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। जाँच के बाद पुलिस ने आरोपित के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। तब से वह न्यायिक हिरासत में है। इस दौरान न्यायालय ने पाया कि पीड़िता ने एक बच्चे को जन्म दिया है। दोनों पक्षों के वकील ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता और पीड़िता एक-दूसरे से प्यार करते हैं।

दोनों पक्षों के वकीलों का यह भी तर्क था कि दोनों के माता-पिता ने उनके रिश्ते में हस्तक्षेप किया था। साथ ही यह भी कहा गया कि यौन क्रिया के परिणामस्वरूप एक बच्चा पैदा हुआ, जो अब एक साल का है। याचिकाकर्ता पीड़िता से विवाह करना चाहता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उसे और बच्चे के सामने मुश्किल स्थिति ना आए।

इस मामले में दोनों पक्षों के बीच समझौते के कारण अपराध को कम करने की माँग करते हुए याचिका दायर की गई थी। न्यायालय ने पाया कि पीड़िता अब वयस्क हो गई है और डीएनए रिपोर्ट से साबित हुआ कि आरोपित ही बच्चे का पिता है। इन सब तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने लड़की से शादी करने के लिए आरोपित को 15 दिनों की अंतरिम बेल दे दी।

राजू बन कर शाबिर ने किया हिन्दू महिला का शारीरिक शोषण, धर्म ना बदलने पर दी बेटे को मारने की धमकी: मध्य प्रदेश के ग्वालियर का मामला, गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के ग्वालियर से लव जिहाद का एक मामला सामने आया है। यहाँ एक मुस्लिम युवक एक हिन्दू महिला से 11 वर्षों तक एक युवक अपनी असल पहचान छुपा कर शारीरिक शोषण करता रहा। वह स्वयं को हिन्दू बताता रहा। अपना भेद खुलने पर उसने महिला पर भी इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाया। ऐसा ना करने पर उसने हिन्दू महिला और उसके नाबालिग बेटे को मारने की धमकी दी। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के के अनुसार, ग्वालियर शहर के गोला थाना क्षेत्र की रहने वाली एक 36 वर्षीय हिन्दू महिला ने शाबिर उर्फ़ शराफत अली के खिलाफ लव जिहाद का मामला दर्ज करवाया है। महिला ने बताया कि वह लगभग एक दशक से अपने पति से अलग रहती है। इस बीच ही उसकी पहचान शाबिर से हो गई। शाबिर ने हिन्दू महिला को अपना नाम राजू उर्फ़ राजकुमार बताया था। शाबिर मध्य प्रदेश के ही भिंड का ही रहने वाला है।

शाबिर ने महिला को प्यार का झाँसा दिया और उसके साथ शारीरिक शोषण किया। शाबिर से जब महिला ने शादी की बात चलाई तो असलियत सामने आई। महिला को पता लगा कि खुद को राजू बताने वाला युवक शाबिर है। अपनी पोल खुलने के बाद शाबिर ने महिला पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाना चालू कर दिया। उसने महिला के बिंदी लगाने और सिन्दूर लगाने पर भी प्रश्न खड़े किए और इससे मना किया। वह लगातार महिला पर इस्लाम कबूल करके निकाह की बात कहता रहा।

जब महिला को सच्चाई पता लगी उसने इस बारे में में शाबिर से पूछा। इसके बाद वह महिला को धमकाने लगा। शाबिर ने महिला को धमकी दी कि यदि वह इस्लाम कबूल नहीं करती तो वह उसे और उसके 13 वर्षीय बेटे को मार देगा। इसके बाद पीड़िता पुलिस के पास पहुँची और शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने जाँच के बाद आरोपित शाबिर को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में जाँच करके आगे की कार्रवाई की जा रही है।

‘3.5 साल की बच्ची शायद ही समझ पाए कि कोई व्यक्ति उसके निजी अंगों को क्यों छू रहा’: POCSO के आरोपित को सिक्किम हाई कोर्ट ने किया बरी

सिक्किम उच्च न्यायालय ने हाल ही में लगभग 3 वर्षीय बच्ची से छेड़छाड़ के आरोपित को बरी कर दिया। न्यायालय ने गवाहों के इस दावे पर संदेह व्यक्त किया कि बच्ची को घबराया हुआ पाया गया था, क्योंकि आरोपित ने उसके निजी अंगों को छुआ था। इस पर कोर्ट ने कहा कि 3.5 साल की बच्ची को शायद ही यह समझ हो कि कोई उसके निजी अंगों को छू रहा है, जिससे वह घबरा जाए।

न्यायमूर्ति भास्कर राज प्रधान और न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय की खंडपीठ ने 5 जून के अपने फैसले में कहा, “गवाहों ने नाबालिग बच्ची पर कथित यौन हमले के बारे में अलग-अलग बयान दिए हैं। हमारी राय में साढ़े तीन साल की बच्ची मुश्किल से ही समझ पाएगी कि कोई व्यक्ति उसके निजी अंग को कैसे छू रहा है। वह यह समझकर कैसे घबरा जाएगी कि यह यौन हमला है। यह अविश्वसनीय है।”

इसके बाद न्यायालय ने आखिरकार उस आरोपित को बरी कर दिया, जिस पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत आरोप लगाया गया था। न्यायालय ने यह भी बताया कि अपराध किए जाने की संभावना को स्थापित करने के लिए कोई सबूत नहीं था। कोर्ट ने यह भी पाया कि अपराध के तीन सप्ताह पर इस मामले में शिकायत दर्ज कराई गई थी।

दरअसल, इस मामले में निचली अदालत ने आरोपित को पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी ठहराया था और बीस साल जेल की सजा सुनाई थी। निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ आरोपित ने सिक्किम हाई कोर्ट में याचिका दी थी। इस मामले में बच्ची के नाबालिग भाई के आरोप के आधार पर 25 जून 2021 को मामला दर्ज कराया गया था।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, नाबालिग लड़के ने दावा किया था कि उसने अपीलकर्ता को उसकी बहन के मुँह और गुदा में उँगली डालते देखा था। अदालत को बताया गया कि उसने बाद में अपने माता-पिता को इसके बारे में बताया। बच्ची के पिता ने कोर्ट को बताया कि लड़के ने उसे बताया कि अपीलकर्ता ने उसकी बच्ची के निजी अंगों को छुआ था।

दूसरी ओर, बच्ची की माँ ने कहा कि अपीलकर्ता ने उसकी बेटी की फ्रॉक उतारी और उसके पूरे शरीर को छुआ। उसकी बच्ची की योनि से खून बह रहा था। बच्ची की माँ ने यह भी कहा कि उसने देखा कि उसकी नादान बेटी घबराई हुई थी और इसके बारे में बताने में असमर्थ थी। कोर्ट ने माता-पिता के बयान में कई खामियाँ पाईं। इसके आधार पर अपीलकर्ता को बरी कर दिया।

तमिलनाडु में जहरीली शराब पीने से 30+ की मौत, 100+ अस्पताल में भर्ती: पिछले साल भी मरे थे 22, लोगों ने पुलिस पर लगाया लापरवाही का आरोप

तमिलनाडु के कल्लाकुरुची जिले में जहरीली शराब पीने के कारण 30 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। जहरीली शराब पीने वाले कई लोग अभी भी अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती हैं। राज्य में जहरीली शराब से मौतों के बाद अब एमके स्टालिन की अगुवाई वाली DMK सरकार की किरकिरी हो रही है। वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाए हैं कि पुलिस शराब के इस धंधे के बारे में जानती थीं लेकिन वह अनजान बनी रही और यह घटना हो गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चेन्नई से 240 किलोमीटर दूर राज्य के बीचोंबीच स्थित कल्लाकुरुची शहर में यह घटना हुई। यहाँ बुधवार (19 जून, 2024) को जहरीली शराब पीने के बाद लोग बीमार पड़ना चालू हुए। बताया गया कि इस जहरीली शराब का सेवन करने वाले अधिकांश लोग मजदूर थे और उन्होंने करुनापुरम इलाके से यह कच्ची शराब खरीदी थी। इन्होने यह शराब मंगलवार (18 जून, 2024) को पी थी। इसके बाद इन्हें सांस लेने में तकलीफ, दिखाई ना देना और डायरिया जैसी समस्याएँ होने लगीं।

इसके बाद मौतों का आँकड़ा लगातार बढ़ता गया। गुरुवार (20 जून, 2024) तक इस त्रासदी में 38 लोगों की मौत की सूचना है जबकि 100 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं। बताया गया कि मरने वालों में कुछ महिलाएँ भी शामिल हैं। आशंका जताई जा रही है कि इस कच्ची शराब में मेथनॉल मिला हुआ था, जिसके कारण मौतें हुई हैं। राज्य में जहरीली शराब से हुई इस घटना के बाद DMK सरकार लीपापोती में जुटी है। कल्लाकुरुची जिले के डीएम का तबादला कर दिया है जबकि एसपी को निलम्बित कर दिया गया है।

घटना में मरने वालों के लिए राज्य सरकार ने ₹10 लाख का मुआवजा घोषित किया है। मामले की जाँच CB-CID को सौंपी गई है। कुछ लोगों को शुरूआती जाँच के बाद गिरफ्तार भी किया गया है। जहरीली शराब से मौत के मामले में पुलिस की लापरवाही की बात भी सामने आ रही है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि पुलिस को कल्लाकुरुची में कच्ची शराब की बिक्री की जानकारी थी लेकिन वह मूकदर्शक बनी रही और घटना हो गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग मारे गए।

तमिलनाडु में हुई इस घटना के बाद राज्य सरकार के कच्ची शराब पर रोक के दावे भी फेल हो गए हैं। जहाँ एक ओर तमिलनाडु की DMK सरकार विकास और कानून व्यवस्था के दावे करती आई वहीं 2023 के बाद फिर से यह बड़ी घटना हो गई है। तमिलनाडु में मई, 2023 में भी जहरीली शराब पीने के कारण तमिलनाडु के चेंगलपट्टू और विल्लुपुरम जिले में 22 लोगो की मौत हो गई थी। बताया गया था कि उन लोगों ने शराब की जगह मेथनॉल पी लिया था जो कि जहरीला होता है।

2023 की इस घटना के बाद भी सरकार की हीलाहवाली के चलते यह बड़ी घटना फिर से घटित हो गई। अब राज्य का विपक्ष सरकार पर हमलावर हो गया है। AIADMK के मुखिया E पलानीसामी ने कहा है कि उनके विधायक इस बात को लेकर चेता रहे थे लेकिन राज्य सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया। वहीं भाजपा ने इस मामले में केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि शराब से हुई मौतों की जाँच CBI को सौंपी जाए। तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष भी कल्लाकुरुची पहुँचे हैं।

ABC पत्रकार अवनी डायस की रिपोर्ट भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को नुकसान पहुँचाने वाला: पूर्व ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त बैरी ओ’फैरेल ने की निंदा

ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (ABC) न्यूज़ ने रविवार (16 जून) को भारत पर एक और हमला किया। इसमें मीडिया हाउस ने मोदी सरकार पर ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले खालिस्तानियों की हत्या की योजना बनाने का आरोप लगाया है। इस तरह का दुष्प्रचार अभियान चलाने वाले लोगों में एक अवनी डायस हैं। अवनी पहले भारत सरकार द्वारा अपना वीज़ा रद्द किए जाने को लेकर झूठ बोला था।

एबीसी की उस रिपोर्ट को भारत में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व उच्चायुक्त बैरी ओ’फैरेल ने दोनों देशों के संबंधों को कमजोर करने वाला प्रयास बताया है। इंडियनलिंक से बात करते हुए ओ’फैरेल ने कहा, “एबीसी का चार्टर है कि उसे निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ होना चाहिए और उसके पत्रकारों को उन मानकों को बनाए रखना चाहिए।” मुझे चिंता है कि इस तरह के कार्यक्रम के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया-भारत संबंधों को संभावित नुकसान हो सकता है।”

उन्होंने आगे कहा, “रिपोर्ट निराशाजनक थी, क्योंकि ऐसा लग रहा था कि यह आलोचनाओं का एक समूह है, जिसमें दर्शकों को प्रस्तुत मुद्दों पर निर्णय लेने में सक्षम बनाने का प्रयास नहीं किया गया है। चाहे वह सांप्रदायिकता हो, खालिस्तान हो या कनाडा और अमेरिका के आरोप हों।” उन्होंने आगे कहा, “ऑस्ट्रेलिया का कनाडा से स्पष्ट रूप से अलग दृष्टिकोण है, जो भारत के साथ संवाद पसंद करता है। ऑस्ट्रेलिया भारत के साथ अपने संबंधों में अपने मूल्यों को लाना जारी रखता है।”

ओ’फैरेल ने आगे कहा, “प्रधानमंत्री ट्रूडो द्वारा पहली बार लगाए गए आरोपों (खालिस्तानी आतंकवादी निज्जर की मौत के संबंध में) के लगभग एक साल बाद हमने कनाडा में कोई अदालती कार्रवाई नहीं देखी है। जहाँ तक ​​मेरी जानकारी है, हमने संयुक्त राज्य अमेरिका में भी कोई अदालती कार्रवाई नहीं देखी है।”

पूर्व उच्चायुक्त ने कहा कि यह सुझाव देना कि भारतीयों का ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में शामिल होना, उनकी अपनी उन्नति के लिए है या फिर ऑस्ट्रेलियाई सरकार के भारत के साथ संबंधों को प्रभावित करने के लिए है, उन नागरिकों के खिलाफ पूरी तरह से कलंक है जो उद्यमी और शांतिपूर्ण हैं।

बैरी ओ’फैरेल की टिप्पणी ऑस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (एबीसी) में छपे लेख के जवाब में आई है, जिसका शीर्षक है – नरेंद्र मोदी की भारत सरकार और उसके सहयोगियों पर जासूसी करने, सिख आलोचकों को चुप कराने और ऑस्ट्रेलिया में अपनी दूर-दराज़ की विचारधारा को आगे बढ़ाने का आरोप।

बिहार का 65% आरक्षण खारिज लेकिन तमिलनाडु में 69% जारी: इस दक्षिणी राज्य में क्यों नहीं लागू होता सुप्रीम कोर्ट का 50% वाला फैसला

पटना हाई कोर्ट ने बिहार सरकार के राज्य में आरक्षण सीमा को 50% से बढ़ा कर 65% करने के फैसले पर रोक लगा दी है। पटना हाई कोर्ट ने आरक्षण सीमा को 50% पर ही रखने का फैसला दिया है। बिहार ने आरक्षण सीमा को 50% से 65% करने का यह निर्णय 2023 में लिया था। इसे कोर्ट में चुनौती दी गई थी। जहाँ बिहार के 65% आरक्षण को कोर्ट ने समाप्त कर दिया है, वहीं तमिलनाडु में पिछले तीन दशकों से लगातार 69% आरक्षण दिया जा रहा है और यह कोर्ट के फैसले से भी प्रभावित नहीं होता है।

बिहार ही नहीं इससे पहले महाराष्ट्र और हरियाणा के भी आरक्षण सीमा को 50% से अधिक करने के निर्णयों को कानूनी रूप से चुनौती मिल चुकी है। इनमें से किसी भी राज्य को आरक्षण सीमा को 50% से अधिक नहीं करने दिया गया है। इसके पीछे सुप्रीम कोर्ट का एक निर्णय है जो सरकारों को यह करने से रोकता है। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट ने 1992 में दिया था और इसे अब इंदिरा साहनी मामले के नाम से जाना जाता है। हालाँकि, तमिलनाडु के मामले में यह इंदिरा साहनी मामला लागू नहीं हो रहा।

ऐसा तमिलनाडु में आरक्षण को लेकर बनाए गए कानूनों और कोर्ट के निर्णयों के कारण है। तमिलनाडु में वर्ष 1971 तक कुल 41% आरक्षण लागू था। लेकिन जब 1969 के में DMK के पूर्व मुखिया एम करूणानिधि पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने आरक्षण का ढाँचा बदलने का निर्णय लिया। उन्होंने इसके लिए सत्तानाथान आयोग बनाया। यह राज्य के सभी वर्गों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को देख कर आरक्षण की सलाह देने के लिए बनाया गया था।

इस आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही करूणानिधि की सरकार ने राज्य में पिछड़े वर्ग का आरक्षण 25% से 31%, अनुसूचित जातियों और जनजातियों का आरक्षण 16% से 18% कर दिया। इसी के साथ राज्य में दिया जाने वाला आरक्षण 49% पहुँच गया। इसने 50% का आँकड़ा 1980 में पार किया जब तत्कालीन AIADMK सरकार के मुखिया एमजी रामचन्द्रन ने राज्य में पिछड़े वर्ग का आरक्षण 31% से बढ़ा कर 50% कर दिया। ऐसे में यह आरक्षण 68% पहुँच गया।

यह आरक्षण लगातार ऐसे ही चलता रहा और इसमें मद्रास हाई कोर्ट के एक फैसले के बाद अनुसूचित जनजातियों के 1% आरक्षण और जोड़ दिया गया और उन्हें अनुसूचित जातियों से अलग कर दिया गया। इस प्रकार राज्य का आरक्षण 69% हो गया। इसमें दिक्कत इंदिरा साहनी निर्णय के बाद आना चालू हुई जब सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के 50% आरक्षण सीमा तोड़ने पर रोक लगा दी। तमिलनाडु ने इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई भी लड़ी। हालाँकि, अदालतों ने उन्हें राहत देने इनकार कर दिया।

इसके बाद तमिलनाडु ने अपने 69% आरक्षण के निर्णय को बचाने के लिए अपनी विधायी शक्तियों का सहारा लिया। 1993 में तत्कालीन AIADMK सरकार ने इसके लिए एक कानून पास करने का निर्णय लिया। तब जयललिता राज्य की मुख्यमंत्री थीं। उन्होंने 1993 में तमिलनाडु विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर इस आरक्षण को 69% कर दिया और फिर इस पर तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा की मंजूरी भी ले ली। इस 69% आरक्षण को आगे कोर्ट में चुनौती ना दी जा सके, इसका भी उन्होंने प्रबंध कर दिया।

जयललिता ने इस 69% आरक्षण वाले कानून को संविधान की नौवीं अनुसूची में डाल दिया। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा संविधान की नौवीं अनुसूची में डाले जाने वाले कानूनों को तब कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती जब तक इससे संविधान के मूल ढाँचे में बदलाव ना हो रहा हो। ऐसे में तमिलनाडु का 69% आरक्षण लगातार चल रहा है।