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हज के लिए सऊदी अरब गए 90+ भारतीयों की मौत, अब तक 1000+ लोगों की भीषण गर्मी ले चुकी है जान: मिस्र के सबसे ज्यादा 658 जायरीनों का हुआ इंतकाल

सऊदी अरब में हज पर पहुँचे 1000 से ज्यादा जायरीनों की मौत हो चुकी है। अलग-अलग देशों से मिल रहे आँकड़ों के आधार पर ये संख्या निकली है। बताया जा रहा है कि हज पर जाने वाले कम से कम 90 भारतीयों की भी मौत हो चुकी है। सर्वाधिक मौतें मिस्र देश से हज यात्रा पर पहुँचे लोगों की हुई है।

एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब में अलग-अलग देशों से आए 1081 से ज्यादा जायरीनों की मौत भीषण गर्मी की वजह से हुई है। बताया जा रहा है कि मृतकों में ऐसे लोगों की संख्या अधिक है, जिन्होंने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था। बता दें कि सऊदी अरब सरकार ने हज यात्रा पर पहुँचने वाले लोगों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य बनाया हुआ है, इसके बावजूद भारी संख्या में बिना रजिस्ट्रेशन के भी लोग हज यात्रा में शामिल होने की कोशिश करते हैं।

सऊदी अरब में मिस्र से पहुँचे सर्वाधिक लोगों की मौत

एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, हज यात्रा पर पहुँचे लोगों में 1081 की मौत हो चुकी है, तो कई लोगों का इलाज चल रहा है। वहीं, बहुत लोग अभी लापता बताए जा रहे हैं। इस बीच, जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक, मृतकों की सर्वाधिक संख्या मिस्र देश से जुड़ी है। मिस्र से 658 लोग मारे जा चुके हैं, जिसमें से 630 लोग बिना रजिस्ट्रेशन के ही पहुँचे थे।

भारत के 90 से अधिक लोगों की मौत

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हज यात्रा पर इस साल 90 से अधिक भारतीयों की मौत हो चुकी है।, हालाँकि आधिकारिक रूप से मृतकों का आँकड़ा 68 ही बताया गया है। पिछले साल कुल मिलाकर 101 भारतीयों की मौत हुई थी। वहीं, पाकिस्तान के भी 35 से अधिक नागरिकों की मौत हो चुकी है।

बताया जा रहा है कि हर साल हजारों हज यात्री बिना परमिट के ही पहुँचते हैं, क्योंकि रजिस्ट्रेशन काफी महंगा है। ऐसे में सऊदी प्रशासन अवैध रूप से हज यात्रा करने के इच्छुक लोगों के खिलाफ अभियान चलाती रहती है। यही नहीं, इन लोगों को सऊदी सरकार द्वारा रजिस्ट्रेशन के माध्यम से आए लोगों की तरह एयर कंडीशन वाली सुविधाएँ भी नहीं मिल पाती और इन्हें घंटों तक पैदल चलते हुए बाहर ही नमाज पढ़नी पड़ती है।

एक अरब अधिकारी ने एएफपी से बताया कि सुरक्षा बलों द्वारा खदेड़े जाने जैसी घटनाओं की वजह से लोग थक चुके होते हैं, ऐसे में उन्हें बाहर रहकर नमाज पढ़ने और किसी सुविधा के न मिलने की वजह से काफी समस्याएँ झेलनी पड़ती हैं। चूँकि सऊदी अरब सरकार इस यात्रा से जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दे रही है, लेकिन माना जा रहा है कि अकेले बीते रविवार को ही 2700 से अधिक लोगों की हालत खराब हो गई थी, जिसकी मुख्य वजह भयंकर गर्मी थी।

गौरतलब है कि हज यात्रा इस्लाम के 5 प्रमुख स्तंभों में से एक है। आर्थिक और शारीरिक रूप से सक्षम हर मुसलमान के लिए जीवन में एक बार हज करना अनिवार्य माना जाता है। हालाँकि लोगों में इस बात की भी धारणा है कि हज पर जान गँवाने वालों को जन्नत नसीब होती है। वैसे, सऊदी में इस समय भयंकर गर्मी का प्रकोप रहता है। पिछले महीने प्रकाशित सऊदी अरब के एक शोध में कहा गया कि हज करने वाले इलाके का तापमान हर दशक 0.4 डिग्री सेल्सियस बढ़ रहा है। सऊदी के मौसम विभाग ने बताया कि 17 जून को मक्का की ग्रैंड मस्जिद के पास तापमान 51.8 डिग्री सेल्सियस पहुँच गया था।

सादिक ने बकरीद पर शराब पीने से रोका तो बड़े भाई शाहजहाँ ने कर दी हत्या, केरल के अलप्पुझा का मामला: गिरफ्तार

केरल के अलप्पुझा में शाहजहाँ ने बकरीद के मौके पर शराब पीने से रोके जाने पर छोटे भाई सादिक की चाकू मार कर हत्या कर दी। शाहजहाँ अपने भाई की हत्या करने के बाद फरार हो गया। केरल पुलिस ने शाहजहाँ को गिरफ्तार करके हत्या का मामला दर्ज कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अलप्पुझा के कयमकुलम में रहने वाला 42 वर्षीय शाहजहाँ शराब का आदी था। वह रोज शराब पीकर घर आके लड़ाई करता था। वह बकरीद (17 जून, 2024) को भी घर से शराब पीने जाने की जिद कर रहा था। इसके लिए उसने घर में लड़ाई भी की थी। उसका छोटा भाई सादिक (38), शाहजहाँ के शराब पीने के खिलाफ था।

सादिक शाहजहाँ को शराब पीने नहीं जाने देना चाहता था। शाहजहाँ शराब पीने ना सजा सके, इसके लिए सादिक ने उसकी मोटरसाइकिल के तार काट दिए थे। इसके बाद भी शाहजहाँ नहीं माना और बकरीद के दिन शराब पीने बाहर चला गया। वह थोड़ी देर बाद शराब पीकर लौटा।

शराब पीकर लौटने के बाद शाहजहाँ घर पर लड़ाई-झगड़ा करने लगा। उसने अपने छोटे भाई सादिक से मारपीट भी चालू कर दी। दोनों भाईयों की लड़ाई यहाँ तक बढ़ी कि शाहजहाँ ने अपने छोटे भाई सादिक पर चाकू से वार कर दिया। शाहजहाँ ने सादिक के छाती के नीचे चाकू मारा जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

सादिक को इसके बाद अस्पताल ले जाया गया जहाँ अगली सुबह उसकी मौत हो गई। दूसरी तरफ हत्या करने के बाद शाहजहाँ मौके से फरार हो गया था। पुलिस ने उसकी तलाश की और उसे पास के ही इलाके के एक बार से गिरफ्तार कर लिया, उसे कोर्ट में पेश करके आगे की कार्रवाई की जा रही है। कोर्ट ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

बताया गया कि दोनों भाई यहाँ अपनी माँ के साथ रहते थे। छोटा भाई सादिक का निकाह हुआ था लेकिन वह अपनी पत्नी से अलग हो चुका था।

पहले फिल्म देखेंगे, फिर देंगे फैसला: गुजरात हाई कोर्ट में ‘महाराज’ पर सुनवाई, आमिर खान के बेटे की डेब्यू फिल्म में हिंदू संतों को दिखाया गया है यौनाचारी

आमिर खान के बेटे जुनैद खान की आने वाली फिल्म ‘महाराज’ की रिलीज रोकने को लेकर उठ रही माँग पर गुजरात हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने इस दौरान कहा कि वो पहले ये फिल्म देखेंगे उसके बाद निर्णय लेंगे कि फिल्म पर रोक लगाई जानी चाहिए या फिर नहीं।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार संगीता विशेन की एकल पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करने के बाद कहा कि उन्होंने कोई भी निर्णय लेने से पहले फिल्म देखनी होगी, ताकि पता चले कि फिल्म में कहीं कोई धार्मिक भावनाएँ आहत तो नहीं की गईं, जैसा कि याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा है।

उल्लेखनीय है कि जुनैद खान की यह फिल्म ‘महाराज’ 14 जून को रिलीज होने वाली थी, लेकिन मामला अदालत जाने के बाद फिल्म पर अस्थायी रोक लगा दी गई। बाद में  यशराज फिल्म्स और नेटफ्लिक्स ने भी ‘महाराज’ की स्ट्रीमिंग रोकने के गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी जहाँ सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील शालीन मेहता और जल उनवल्ला ने जज को इस केस पर कोई फैसला देने से पहले फिल्म देखने को कहा था। वहीं अदालत ने पिछली सुनवाई में कहा था कि वे कि वे यशराज फिल्म्स और नेटफ्लिक्स के सुझावों के बाद फिल्म देखेंगे। आज न्यायाधीश ने इस सुझाव को स्वीकार कर लिया और कहा कि वह फिल्म देखकर ही निर्णय लेंगी।

बता दें कि ये फिल्म ‘महाराज लिबेल केस’ पर बन रही है। ये मामला धर्मगुरु जदुनाथजी बृजरतनजी महाराज से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने सन् 1862 में गुजराती अख़बार ‘सत्यप्रकाश’ नामक अख़बार में करसंदास मूलजी द्वारा लिखे गए एक लेख को लेकर मानहानि का मामला दर्ज करवाया था। इस लेख में वैष्णव पंथ के ‘पुष्टिमार्ग’ (वल्लभ संप्रदाय) के साधुओं के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए थे। आरोप लगाया गया था कि जदुनाथजी के कई महिलाओं से यौन संबंध हैं और लोगों को अपनी भक्ति साबित करने के लिए अपनी पत्नी साधुओं को सौंपनी पड़ती है।

जहाँ जुनैद खान इस फिल्म में उक्त पत्रकार का रोल करेंगे और हीरो होंगे, वहीं विलेन के रूप में एक हिन्दू साधु को दिखाया जाएगा जिसका रोल जयदीप अहलावत अदा करेंगे। फिल्म का पोस्टर रिलीज करते हुए बताया गया है कि आखिरकार 162 वर्षों बाद दिखाया जाएगा कि कैसे एक व्यक्ति ने अपने संकल्प की शक्ति से यथास्थिति को चुनौती दी। 1994 में जन्मे जुनैद खान आमिर खान और उनकी पहली पत्नी रीना दत्ता के बेटे हैं। आमिर खान अपने बेटे और साई पल्लवी को लेकर एक और फिल्म बना रहे हैं।

याचिकाकर्ताओं का इस विषय पर कहना है कि 1862 के मामले में, जिसका निर्णय बॉम्बे सुप्रीम कोर्ट के अंग्रेज न्यायाधीशों द्वारा किया गया था, हिंदू धर्म, भगवान कृष्ण और भक्ति गीतों और भजनों के बारे में गंभीर रूप से ईशनिंदा वाली टिप्पणियाँ की गई थीं। इसके अलावा याचिकाकर्ताओं ने ये भी कहा कि फिल्म को बिन किसी ट्रेलर या प्रमोशन कार्यक्रम के रिलीज किया जा रहा है ताकि इसकी कहानी लोगों से छिपी रहे। अगर फिल्म रिलीज हुई तो उनकी धार्मिक भावनाएँ आहत होंगी। फिल्म की रिलीज को रोकने के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से तत्काल अपील करने के बावजूद उन्हें कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली

तमिलनाडु की प्राइवेट कंपनी में दिहाड़ी मजदूरी कर रहे थे बांग्लादेशी, पुलिस ने 7 को किया गिरफ्तार: उनके पास से आधार बरामद, कई संदिग्धों की निगरानी

बांग्लादेशी घुसपैठिए देश के कोने-कोने में फैल चुके हैं। समय-समय पर विभिन्न राज्यों की पुलिस इनकी पहचान करके गिरफ्तार कर रही है। तमिलनाडु के इरोड में पुलिस ने 7 बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया है। ये सभी बिना किसी कागजात के अवैध रूप से वहाँ रह रहे थे। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इनके अलावा और कौन-कौन से घुसपैठिए यहाँ छिपे हुए हैं।

इरोड जिले की पुलिस ने बुधवार (19 जून 2024) को जिन सात बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया, वे पेरुंदुरई के पणिक्कम्पालयम में रह रहे थे। पुलिस इन सबकी जाँच कर रही है। गिरफ्तार किए गए के नाम- 26 वर्षीय एस मोनिरा, 24 वर्षीय जे मेगामुथा, 33 वर्षीय एस शेखली, 26 वर्षीय बी जाहिद मिया, 35 वर्षीय एम अनारुल इस्लाम, 40 वर्षीय एम मोनिरुल खाजी और 45 वर्षीय एन मेटून हैं।

पुलिस ने बताया, “पेरुंदुरई में SIPCOT कॉम्प्लेक्स में कई उत्तर भारतीय मजदूर काम कर रहे हैं। पेरुंदुरई पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि इनमें कई बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल हैं और वे बिना उचित दस्तावेजों के यहाँ रह रहे हैं और काम कर रहे हैं। मंगलवार (18 जून 2024) को हमने पणिक्कम्पलायम इलाके में जाँच की, जहाँ कई उत्तर भारतीय मजदूर रहते हैं।”

पुलिस ने आगे बताया, “प्रारंभिक जाँच के आधार पर पुलिस ने दो महिलाओं समेत 13 लोगों को उचित दस्तावेजों के बिना क्षेत्र में रहने के संदेह में हिरासत में लिया। इसके बाद सभी को पुलिस स्टेशन लाया गया। जाँच में पुष्टि हुई कि मोनिरा और मेगामुथा समेत सात लोग उचित दस्तावेजों के बिना भारत में अवैध रूप से रह रहे थे। जाँच के बाद बुधवार को सभी सातों को गिरफ्तार कर लिया गया।”

तमिलनाडु पुलिस ने यह भी बताया कि इन 13 लोगों में 6 लोगों ने कहा कि उनके पास रहने और काम करने के लिए उचित दस्तावेज हैं। उन्होंने दस्तावेज जमा करने के लिए थोड़ा समय माँगा है। पुलिस का कहना है कि अगर वे दस्तावेज जमा नहीं करते हैं तो उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं, कुछ बांग्लादेशियों के पास भारत का आधार कार्ड भी मिला है।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया, “गिरफ्तार किए गए लोग पेरुंदुरई में एक निजी कंपनी में काम कर रहे थे। उनके पास पासपोर्ट, वीजा आदि जैसे आवश्यक दस्तावेज नहीं थे। इस कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया है। ये लोग दिहाड़ी मजदूरी करते थे। कुछ के पास भारत द्वारा जारी आधार कार्ड भी मिले हैं, जिन्हें जब्त कर लिया गया। आगे की जाँच जारी है।”

पत्रकार अजीत भारती को ‘नोटिस’ देने के लिए चोरों की तरह आई कर्नाटक पुलिस, UP पुलिस ले गई अपने साथ: बेंगलुरु में FIR दर्ज कर राष्ट्रवादी आवाज को दबाना चाहती है कॉन्ग्रेस

कॉन्ग्रेस सरकारे राष्ट्रवादी आवाजों को दबाने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है। अब कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने पत्रकार अजीत भारती के घर पुलिस भेजी है। कर्नाटक पुलिस के कुछ जवान सादी वर्दी में बिना किसी पूर्व सूचना के अजीत भारती के घर पहुँचे हैं।

जानकारी के अनुसार, कर्नाटक पुलिस के तीन जवान गुरुवार (20 जून, 2024) को नोएडा स्थित अजीत भारती के आवास पर पहुँचे। यहाँ वह लोग कुछ देर खड़े रहे। इसके बाद उन्होंने एक नोटिस अजीत भारती को दिया। कर्नाटक पुलिस के जवानों के साथ स्थानीय पुलिस भी नहीं थी।

इस विषय में ऑपइंडिया को अजीत भारती ने बताया कि कर्नाटक पुलिस के इन जवानों ने स्थानीय यूपी पुलिस के थाने को सूचना दी थी लेकिन बिना साथ लिए ही वह उनके आवास पर पहुँच गए थे। यह तीनों अजीत भारती के घर एक कैब से पहुँचे थे और उन्होंने वर्दी भी नहीं पहन रखी थी। अपने घर के आसपास अजीत भारती और उनके परिवार ने संदिग्ध गतिविधि देख कर स्थानीय पुलिस थाने को सूचना दी।

इसके बाद स्थानीय पुलिस यहाँ पहुँची और कर्नाटक पुलिस के इन तीनों जवानों को अपने साथ ले गई। कर्नाटक पुलिस के इन जवानों ने अजीत भारती को हाल ही में उनके खिलाफ दर्ज किए गए मामले में एक नोटिस भी थमाया है। यह नोटिस बेंगलुरु के हाई ग्राउंड थाने से जारी किया गया है।

अजीत भारती को कर्नाटक पुलिस ने यह नोटिस दिया है
अजीत भारती को कर्नाटक पुलिस ने यह नोटिस दिया है

नोटिस में कहा गया है कि अजीत भारती ने समाज में घृणा और शत्रुता बढ़ाने के उद्देश्य से राहुल गाँधी को लेकर एक वीडियो बनाया है। इसी को लेकर उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है। अजीत भारती को कर्नाटक पुलिस ने आदेश दिया है कि वह नोटिस मिलने के सात दिनों के भीतर हाई ग्राउंड थाने में पेश हों।

गौरतलब है कि अजीत भारती के खिलाफ यह FIR 15 जून, 2024 को दर्ज करवाई गई थी। ये एफआईआर कॉन्ग्रेस कर्नाटक के कॉग्रेस कमेटी के लीगल सेल सचिव और सचिव बेके बोपन्ना ने कराई थी। FIR दर्ज कराते समय दावा किया गया था कि अजीत भारती ने 13 जून, 2024 को राहुल गाँधी को लेकर एक झूठा वीडियो बनाया जबकि गुरूवार (20 जून, 2024) को उनको दिए गए नोटिस में कहा गया है उनका वीडियो घृणा फैला रहा है इसलिए FIR दर्ज हुई है।

इजरायली मिले तो ‘मानवतावादी’ हो गए शाहिद अफरीदी, इस्लामी कट्टरपंथियों की गाली पड़ते ही जागा ‘उम्माह’: ली थी सेल्फी, दावा- मैंने फैन समझ फोटो खिंचवा ली

पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शाहिद अफरीदी को एक सेल्फी के कारण अपने मुल्क के लोगों से गाली पड़ रही है। ये सेल्फी उन्होंने इजरायल के लोगों के साथ खिंची थी। बाद में इसे फ्रेंड्स ऑफ इजरायल की ओर से इसे सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया तो पाकिस्तानी इसे देख अफरीदी से नाराज हो गए कि आखिर उन्होंने इजरायल को समर्थन क्यों किया। अब इतने बवाल के बाद इस मामले में अफरीदी ने अपनी सफाई दी कि फोटो खिंचाते टाइम उन्हें लगा था कि वो लोग उनके फैन हैं। हालाँकि, अफरीदी की पोल फिर तब खुली जब ‘फ्रेंड्स ऑफ इजरायल’ अकॉउंट ने ही रिप्लाई देकर बताया कि फोटो खिंचाने वो लोग नहीं गए थे, बल्कि अफरीदी उनके पास आए थे।

क्या है मामला

अफरीदी की वायरल तस्वीर को ‘फ्रेंड्स ऑफ इजरायल’ ने अपने अकॉउंट पर साझा किया था। तस्वीर के साथ पोस्ट में लिखा था कि हमास द्वारा बंधक बनाए गए इजरायली को छुड़ाने के लिए पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद अफरीदी ने अपना समर्थन दिया है। इसी पोस्ट के नीचे तमाम पाकिस्तानी और मुस्लिमों ने उन्हें लानत भेजी थी। किसी ने उन्हें यहूदियों का एजेंट कहा था। किसी ने कहा कि उसे अफरीदी से घृणा आती है।

इन्हीं लानतों के बाद शाहिद अफरीदी ने लिखा, “कल्पना कीजिए कि आप मैनचेस्टर (यूके) की किसी सड़क पर टहल रहे हैं और तथाकथित प्रशंसक आपके पास सेल्फी लेने के लिए आते हैं। आप उनकी बात मान लेते हैं और कुछ ही क्षणों बाद, वे इसे ज़ायोनी समर्थन के रूप में अपलोड कर देते हैं। विश्वास नहीं होता! कृपया अपलोड की गई हर चीज़ पर विश्वास न करें।”

आगे अफरीदी ने कहा, “फिलिस्तीन में मासूम लोगों की जान जाते देखना वाकई दिल दहला देने वाला है। इसलिए, मैनचेस्टर में मेरे द्वारा शेयर की गई कोई भी तस्वीर या एसोसिएशन किसी भी ऐसी स्थिति के लिए मेरे समर्थन को नहीं दर्शाती है, जहाँ मानव जीवन दाँव पर लगा हो। मैं दुनिया भर के प्रशंसकों के साथ तस्वीरें लेता हूँ, और यह स्थिति भी अलग नहीं थी। मैं शांति के लिए दुआ करता हूँ, मैं इस जंग के अंत के लिए दुआ करता हूँ, मैं आजादी के लिए दुआ करता हूँ।”

उनके इस ट्वीट के बाद भी मुस्लिमों को यकीन नहीं हुआ कि वो सच बोल रहे हैं। सवाल हुआ कि क्या वो पढ़ नहीं पाए कि उनके फैंस के हाथ में क्या है। इधर ‘फ्रेंड ऑफ इजरायल’ ने भी कहा, “शाहिद अफरीदी तुमने खुद तस्वीर ली थी हमारे प्लेकार्ड के साथ, फिर हमारे साथ पोज करने को तैयार हुए। आप खुद से आए थे और अपनी मर्जी से सेल्फी दी थी। ये बेहद निराशजनक है कि आपउसमें से हैं जो मासूम बच्चों, महिलाओं और पुरुषों की रिहाई का विरोध कर रहे हैं जिन्हें हमास के आतंकियों ने बंधक बनाया हुआ है।”

इस ट्वीट के सामने आने के बाद शाहिद अफरीदी की और भी ज्यादा फजीहत हो रही है। अकॉउंट से कहा गया कि ये सब शाहिद अफरीदी इस्लामवादियों के दबाव में आकर बोल रहे हैं। अकॉउंट से कहा गया कि ये सब शाहिद अफरीदी इस्लामवादियों के दबाव में आकर बोल रहे हैं। अन्य पोस्ट में भी कहा गया है कि जब अफरीदी उनसे मिलने आए थे उन्होंने मास्क लगाया ता। उन्होंने खुद हमारे समूह के लोगों से एक लीफलेट लिया और फिर फोटो खींची। अफरीदी को अंग्रेजी पढ़नी आती है। पूरा समूह बड़े-बड़े पोस्टर लेकर खड़ा था। साफ लिखा था कि वो इजरायली हैं जो बंधक बनाए गए। उन्होंने फिर भी फोट खिंचाई। उन्होंने सब कुछ अपनी मर्जी से किया। अब इस्लामी कट्टरपंथियों की वजह से मुकर रहे हैं।

एक ने परीक्षा से पहले ही सॉल्व कर लिए सवाल, दूसरी परीक्षा देने ही नहीं गई… फिर भी कॉन्ग्रेस राज में बन गईं लेक्चरर: RPSC पेपर लीक में चार्जशीट से चौंकाने वाले खुलासे

कॉन्ग्रेस के शासनकाल में राजस्थान में पुलिस से लेकर हिंदी लेक्चरर की हुई भर्ती परीक्षा में पेपरलीक से लेकर तमाम अनियमितताएँ सामने आई हैं। सब इंस्पेक्टर भर्ती, सीएचओ भर्ती, लाइब्रेरियन भर्ती और वरिष्ठ अध्यापक भर्ती सहित कई परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की लेक्चरर भर्ती परीक्षा 2022 में भी पेपर लीक और फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है।

इस परीक्षा में फर्जी डिग्री सर्टिफिकेट के जरिए नौकरी लेने और डमी कैंडिडेट बैठाकर परीक्षा पास करने का खुलासा हुआ है। करीब तीन महीने पहले अजमेर की सिविल लाइन थाना पुलिस ने दो युवतियों- ब्रह्मा कुमारी और कमला को गिरफ्तार किया था। इस मामले में जाँच करने वाले एसओजी ने कोर्ट में चार्जशीट पेश की है। चार्जशीट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

चार्जशीट से पता चला है कि फर्जी डॉक्यूमेंट पेश करने वाली युवती ब्राह्मा कुमारी ने परीक्षा से पहले ही सॉल्व पेपर हासिल कर लिया था। उसने गंगरार (चित्तौड़गढ़) की मेवाड़ यूनिवर्सिटी की फर्जी डिग्री से नौकरी हासिल करने की कोशिश थी। सांचौर निवासी ब्रह्मा कुमारी ने सुरेश बिश्नोई और ओमप्रकाश मांजू के साथ मिलकर परीक्षा से पहले ही पेपर सॉल्व कर लिया था।

इस परीक्षा में ब्रह्मा कुमारी और कमला का चयन भी हो गया और वे मेरिट में आ गईं। इसके बाद RPSC ने दोनों के दस्तावेज चेक किए तो उसमें गड़बड़ी मिली। आवेदन के समय किसी अन्य विश्वविद्यालय से डिग्री हासिल करना बताया था, जबकि चयन होने के बाद किसी दूसरे विश्वविद्यालय की डिग्री पेश की थी। इसके बाद RPSC ने इस मामले में सिविल लाइन थाने में FIR दर्ज करा दी।

इसकी जाँच एसओजी को सौंपी गई थी। जाँच में एसओजी को पता चला कि आरोपित युवती कमला ने खुद लिखित परीक्षा नहीं दी थी। इसके लिए उसने अपने स्थान पर उर्मिला पत्नी पूनमा राम नाम की एक युवती को डमी कैंडिडेट के रूप में इस्तेमाल किया था। उर्मिला खुद एक शिक्षिका है। डमी कैंडिटे के रूप में बैठने के लिए उर्मिला ने कमला से 10 लाख रुपए लिए थे।

एसओजी की जाँच में यह भी पता चला कि दोनों आरोपितों को फर्जी डिग्री उनके भाइयों ने उपलब्ध कराए थे। इनमें से एक आरोपित का भाई शिक्षक है, जबकि दूसरे का भाई डॉक्टर है। जाँच में स्थिति स्पष्ट होने के बाद एसओजी ने आरोपित ब्रह्मा कुमारी और कमला को गिरफ्तार कर लिया था। इसके साथ ही उनके दोनों भाइयों को भी गिरफ्तार कर लिया गया था।

कमला के मौसेरे भाई दलपत फर्जी डिग्री का इंतजाम किया था। ब्रह्मा कुमारी का भाई सुरेश कुमार जोधपुर के मथुरादास माथुर हॉस्पिटल में डॉक्टर है। फर्जी डिग्री के लिए दलपत ने सुरेश कुमार से और सुरेश ने भीनमाल निवासी परिचित महेंद्र सिंह बिश्नोई से संपर्क किया। महेन्द्र ने अपने मित्र अशोक चोटिया से बात की। सुरेश ने पीजी हॉस्टल स्थित कमरे में बैठकर फर्जी डिग्री बनाने की साजिश रची थी।

इसके बाद अशोक चोटिया ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी से सत्र 2017-19 की डिग्री के बदले 70-70 हजार रुपए में सौदा तय किया। अब एसओजी परीक्षा से पहले पेपर लीक कर अभ्यर्थी को सॉल्व कराने वाले सांचौर के मांजू और दूसरी अभ्यर्थी कमला की जगह परीक्षा देने वाली टीचर उर्मिला और परीक्षा नियंत्रक सुशील शर्मा सहित इस गिरोह में शामिल कई लोगों की तलाश कर रही है।

ग्रेड सेकेंड टीचर भर्ती में दाखिल हो चुकी है चार्जशीट

इससे पहले ग्रेड सेकेंड टीचर भर्ती पेपर लीक मामले में ईडी ने कोर्ट में तीन आरोपियों के खिलाफ जयपुर कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी। ईडी ने अपनी चार्जशीट में कहा था कि ग्रेड सेकेंड टीचर भर्ती के अलावा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर भी लीक हुए थे। इन आरोपितों में राजस्थान लोक सेवा आयोग से निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा ने प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक किए थे।

उसने ग्रेड सेकेंड परीक्षा के पेपर की सौदेबाजी अपने भतीजे विजय डामोर के जरिए की थी। एक करोड़ रुपए में आरपीएससी का पेपर लीक कर गिरोह के सरगना शेर सिंह मीणा उर्फ अनिल मीणा को बेचा था।बाद में सरगना अनिल मीणा ने गिरोह के साथी सरगना भूपेंद्र सारण को को पेपर बेचा था।

ऑपइंडिया इंपैक्ट: जामनगर में रंजीत सागर बाँध के पास बनी अवैध दरगाह पर चला बुलडोजर, OpIndia की रिपोर्ट के बाद जागे प्रशासन ने ढाँचे को किया समतल

जामनगर में रंजीत सागर बांध के पास बने अवैध दरगाह को बुलडोजर एक्शन में ध्वस्त कर दिया गया है। इस अवैध दरगाह के बारे में ऑपइंडिया ने स्पेशल रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी, जिसके बाद इस पर तेजी से काम शुरू हुआ। हालाँकि इसे हटाने का आदेश पहले ही जारी हो चुका था, लेकिन प्रशासन इसे हटा नहीं पाई थी, लेकिन ऑपइंडिया द्वारा मई 2024 में स्पेशल रिपोर्ट करने के बाद जागे प्रशासन ने आखिरकार इस अवैध दरगाह को ध्वस्त कर दिया।

स्थानीय प्रशासन ने बुधवार (19 जून 2024) की रात को इस दरगाह को ध्वस्त किया। इस दौरान भारी संख्या में जामनगर की पुलिस तैनात रही और ध्वस्तीकरण की साइट पर ट्रैफिक को रोक दिया गया। इस कार्रवाई के दौरान नायब मामलतदार और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

ऑपइंडिया ने प्रकाशित की थी विशेष रिपोर्ट

बता दें कि 12 मई 2024 को ऑपइंडिया ने एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में इस अवैध दरगाह के बारे में बताया था। इस रिपोर्ट में लिखा था, जामनगर में प्रसिद्ध रंजीत सागर बाँध के बाद अवैध दरगाह का निर्माण किया गया है। साल 2022 में इस अवैध कब्जे को हटाने का लिखिति आदेश भी जारी किया गया था, लेकिन उसे हटाया नहीं गया था। स्थानीय हिंदू कार्यकर्ताओं ने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा था कि इस दरगाह को पहले ही हटाया जाना था, लेकिन प्रशासन ध्यान नहीं दिया था, जिसके बाद ऑपइंडिया ने जिला कलेक्टर से लेकर मामलातदार और अन्य अधिकारियों से संपर्क कर कार्रवाई के बारे में सवाल पूछा था। जिसमें ये आश्वासन दिया गया था कि जल्द ही कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी और अब आखिरकार प्रशासन ने अवैध ढाँचे को नेस्तनाबूद करके हटा दिया है।

जानकारी के मुताबित, ये दरगाह काफी पहले से यहाँ पर है। इसकी देखरेख कासम नाम का व्यक्ति करता है। ये दरगाह बाँध के बिल्कुल करीब बनाया गया था, जो मानसून के समय 4 माह पानी में डूबा रहता है और 8 माह तक दिखता है। सितंबर 2022 में स्थानीय हिंदुओं ने इसे हटाने के लिए याचिका दाखिल की थी। इसके बाद मामलतदार ने सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर कासम हसन उड़िया को नोटिस जारी किया था और लिखित में आदेश दिया था कि अवैध ढाँचे को हटाया जाए। इस आदेश के बावजूद कासम के परिवार ने कोई कदम नहीं उठाया, जिसके बाद प्रशासन ने मानसून आने से ठीक पहले अब पूरे ढाँचे को जमींदोज करते हुए उस जगह को समतल कर दिया है।

ऑपइंडिया की खबर हुई वायरल तो जुबैर एंड गैंग पर दर्ज हुई FIR, मेवात की बड़ी मस्जिद के पास दलित की बेटी को गाड़ी से खींचने का मामला

हरियाणा के नूंह में दलित महिला और उसके परिवार की पिटाई करने वाली मुस्लिम भीड़ पर FIR दर्ज की गई है। यहाँ मुस्लिमों ने दलितों को गाड़ी में बैठने को लेकर मारा पीटा था। उन्होंने एक दलित महिला के साथ भी मारपीट की थी और जातिसूचक गालियाँ दी थीं। यह कार्रवाई ऑपइंडिया के दलितों के साथ मारपीट की खबर प्रकाशित करने के बाद हुई है। पीड़ित ने स्वयं ऑपइंडिया को इस कार्रवाई के लिए धन्यवाद दिया है।

ऑपइंडिया को फोन करके पीड़ित के बड़े भाई ने बताया, “ऑपइंडिया द्वारा खबर प्रकाशित होने की वजह से ही इस मामले में FIR दर्ज हो सकी है। इससे पहले दूसरे पक्ष की तरफ से स्थानीय स्तर पर मामला सुलझाए जाने का प्रयास हो रहा था।” उन्होंने बताया कि ऑपइंडिया की खबर के बाद 18 जून, 2024 को यह FIR दर्ज की गई। उन्होंने ऑपइंडिया को इस मामले में आगे कार्रवाई के विषय में सूचित करने की बात कही है।

ऑपइंडिया ने इस घटना के विषय में 18 जून, 2024 को पीड़िता से बात करने के बाद खबर प्रकाशित की थी, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए FIR दर्ज की है। ऑपइंडिया के पास इस मामले की FIR कॉपी भी मौजूद है।

ऑपइंडिया की खबर

पुलिस ने FIR में घटना के आधार पर जुबैर, अंसार, इम्तियाज, कामिल, जाबिर, शकील और 3 अन्य के विरुद्ध मामला दर्ज किया है। यह सभी नूंह के बिछौर थाना क्षेत्र के बिछोरडी गाँव के रहने वाले हैं। पुलिस ने इन सभी के विरुद्ध बलवा, रास्ता रोकने, गालियाँ देने, मारपीट और नुकसान पहुँचाने समेत SC/ST एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया है।

क्या थी घटना?

इस घटना की पीड़िता अर्चना ने बताया था कि वह 16 जून को अपनी ससुराल से अपने पति परवीन राय के साथ मायके झारोकड़ी गाँव आ रहीं थीं। जैसे ही वो गाँव की बड़ी मस्जिद के पास पहुँची तो उनकी कार को जुबैर, अंसार, इम्तियाज, कामिल, जाबिर और शकील ने रोक लिया। इनके साथ 3 अन्य अज्ञात लोग भी थे। इन सभी ने अर्चना को कार में से खींच लिया। हमलावरों द्वारा अर्चना के पति परवीन को भी लात घूँसों से पीटा जाने लगा।

इसके कुछ देर बाद आरोपितों ने अर्चना के कपड़े फाड़ डाले। पीड़िता ने अपने पिता डालचंद को फोन कर के मदद के लिए बुलाया। इस दौरान आरोपितों ने एकजुट हो कर लड़की के पिता को फिर से पीटा। तब तक हमलावरों की तादाद लगभग 20 हो चुकी थी। परिवार वालों को पिटता देख कर अर्चना का भाई भी बीच-बचाव में पहुँचा तो उसकी भी पिटाई हुई। अर्चना ने बताया कि कि इस दौरान हमलावरों ने अर्चना का मंगलसूत्र और अंगूठी के साथ उनके पति के गले से सोने की चेन खींच ली।

पीड़िता के मुताबिक, उनको पीटने के दौरान आरोपितों ने उन्हें गंदी-गंदी गालियाँ दीं और जातिसूचक शब्द बोले। हमलावरों ने कहा, “च$रों, तुम्हारी इतनी औकात कहाँ है तुम गाड़ी में बैठ कर हमारे सामने निकलो। च$रों जो तुम पर हो वो कर लेना।” पीड़ित परिवार ने जान बचाने के लिए 112 नंबर डायल कर के पुलिस को बुलाया। पुलिस को आता देख कर आरोपित भाग निकले। अब इस मामले में पुलिस FIR दर्ज करके शिकायत पर कार्रवाई कर रही है।

जयपुर के शिव मंदिर के बाहर स्कूटी सवार युवकों ने फेंके मांस के टुकड़े, वीडियो आया सामने: तनाव के बाद इलाके में पुलिस फोर्स तैनात

राजस्थान की राजधानी जयपुर के एक शिव मंदिर के सामने फिर से मांस का टुकड़ा फेंकने का मामला सामने आया है। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया है। वे मंदिर के इकट्ठा होने लगे। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुँची और लोगों को शांत कराया। तनाव को देखते हुए इलाके में पुलिस फोर्स तैनात किया गया है।

जयपुर के सुभाष चौक के चाणक्य मार्ग पर स्थित मंदिर के सामने मांस के टुकड़े डालने का मामला सामने आया है। मंगलवार (18 जून 2024) को कुछ अज्ञात स्कूटी सवार युवाओं ने शिव मंदिर के सामने शाम लगभग 4:30 बजे पर मांस के टुकड़े डाल गए। स्थानीय लोगों ने इस मामले को लेकर सुभाष चौक थाने में में मामला दर्ज करवाया है।

लोगों का कहना है कि असामाजिक तत्वों द्वारा इलाके की धार्मिक एवं सामाजिक सद्भावना को बिगाड़ने के लिए यह काम किया गया है। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें मंदिर के सामने मांस के बड़े-बड़े टुकड़े पड़े दिखाई दे रहे हैं। यह घटना गंगा एकादशी के दिन की बताई जा रही है।

स्थानीय लोगों ने पुलिस को इस संबंध में घटना का सीसीटीवी फुटेज भी उपलब्ध करवाए हैं। सुभाष चौक थाना प्रभारी धर्म सिंह ने कहा कि इसको लेकर स्थानीय लोगों ने लिखित में शिकायत दी है। मामले की जाँच की जा रही है। उन्होंने बताया कि मामले की गंभीरता को लेकर इलाके में पुलिस की तैनाती की गई है।

वहीं, राजस्थान के अजमेर स्थित एक बाजार में बुधवार (19 जून 2024) को मांस बिखेरने पर तनाव फैल गया। CCTV फुटेज में एक व्यक्ति को बाइक से यह हरकत करते देखा गया। हिन्दू संगठनों ने इसे गोमांस बताया और प्रदर्शन शुरू कर दिया। नाराज लोगों ने बाजार बंद करवा दिया। हालात तनावपूर्ण होता देखकर पुलिस ने लाठीचार्ज करके भीड़ को तितर-बितर किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अजमेर के मदनगंज इलाके के ओसवाल मोहल्ले में सब्जी मंडी लगती है, जहाँ भीड़भाड़ बनी रहती है। बुधवार को लगभग 11:45 बजे एक बाइकसवार मंडी से गुजरा। उसने रास्ते में मांस बिखेर दिए और फरार गया। आरोप है कि इन अवशेषों में कटे पैर और कुछ अन्य अंग थे। इसको लेकर बाजार में गुस्सा और तनाव फैल गया।

कुछ ही देर में वहाँ हिन्दू संगठनों का जमावड़ा शुरू हो गया। आक्रोशित हिन्दू संगठन बाजार बंद करवाने लगे। घटना की जानकारी मिलते ही भारी संख्या में पुलिस बल और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुँचे। इस दौरान हिंदू संगठनों से पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों से नोकझोंक भी हुई। नाराज लोगों ने डिप्टी एसपी की गाड़ी में तोड़फोड़ शुरू कर दी।

लोगों द्वारा गुस्से में की गई तोड़फोड़ के कारण डिप्टी एसपी की गाड़ी का शीशा टूट गया और गाड़ी के ड्राइवर को चोटें भी आईं। हालात को गंभीर होता देखकर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। बल प्रयोग के बाद प्रदर्शनकारियों में आफरा-तफरी मच गई। लगभग डेढ़ घंटे तक हुए हंगामे के बाद बाजार फिर से खोल दिए गए।

इस घटना को लेकर DSP सिटी महिपाल सिंह ने बताया कि बिखरे मांस का परीक्षण करवाया गया, जो कि भैंस का निकला। फ़िलहाल आरोपित को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। SDM अर्चना चौधरी के मुताबिक, मांस जानबूझ कर नहीं बल्कि अनजाने में गिरा था। फ़िलहाल पुलिस पूरे मामले की जाँच कर रही है।