"लोनी घटना के बाद आए ट्विट्स के मद्देनजर योगी सरकार ने ट्विटर के विरुद्ध मुकदमा दायर किया है और कहा है कि ट्विटर ऐसे ट्वीट पर मैनिपुलेटेड मीडिया का टैग नहीं लगा पाया। राजदंड कैसा होना चाहिए, महाराज ने दिखा दिया है।"
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले विपक्ष एक गैर जरूरी मुद्दे को उठाने की कोशिश कर रहा है। राम मंदिर के निर्माण में बाधाएँ पैदा करने के लिए कई राजनीतिक दल घटिया राजनीति कर रहे हैं।
राहुल गाँधी ने ट्वीट में लिखा था, “मैं ये मानने को तैयार नहीं हूँ कि श्रीराम के सच्चे भक्त ऐसा कर सकते हैं। ऐसी क्रूरता मानवता से कोसों दूर है और समाज व धर्म दोनों के लिए शर्मनाक है।"
हमें लगता है कि जिस ताकत का सामना हमें करना पड़ रहा है, वह लगभग हर हफ्ते हम पर पूरी ताकत के साथ हमला बोलती है। हम लड़ेंगे। लेकिन हम अपनी मर्यादा के साथ लड़ेंगे और अपने सम्मान को बरकरार रखेंगे।
10 मिनट 34 सेकंड के इस ऑडियो में सांसद डॉ. एस.टी. हसन कह रहे हैं, "तुम मुझे बेवकूफ समझ रहे हो या तुम अधिक चालाक हो... अगर तुम बिक गए हो तो बताया क्यों नहीं कि मैं भी बिक गया।
कितने प्यारे दिन थे जब हर दस-पंद्रह दिन में एक बार शर्मिंदा हो लेते थे। जब मन कहता नारे लगा लेते। धमकी दे लेते थे कि टुकड़े होकर रहेंगे, इंशा अल्लाह इंशा अल्लाह।
सिख सम्राट रणजीत सिंह जब तक जीवित थे, तब तक उनके साम्राज्य में गोहत्या पर प्रतिबंध रहा। लेकिन, हिन्दुओं और सिखों के लिए दुर्भाग्य ये रहा कि महाराजा का 1839 में निधन हो गया।
मीडिया को हिन्दू प्रतीक चिह्नों से इतनी नफरत है कि 'जय श्री राम' जैसे पवित्र शब्द को बदनाम करने के लिए कई सालों से कोशिश की जा रही है, खासकर भाजपा के सत्ता में आने के बाद से।
इस अवधि में जिन लोगों ने चीनी सामान खरीदे भी, उनमें से भी 60% का कहना है कि उन्होंने चीन में बने 1-2 से ज्यादा उत्पाद नहीं खरीदे। गलवान संघर्ष के बाद ये बदलाव आया।