लोटन के भाई बिरजू का कहना है कि उनका परिवार तभी तक सुरक्षित है, जब तक गाँव में पुलिस है। बिरजू ने कहा-"दुश्मनी बढ़ ही गई है। अब जाना ही पड़ेगा। हम 3-4 महीनों में गाँव छोड़ देंगे। दूसरा कोई विकल्प नहीं बचा है। पुलिस तो आज है, कल नहीं रहेगी।"
"कोरोना वायरस पर दिल्ली सरकार के डेली बुलेटिन में 'मरकज़ रिलेटेड' वाला कॉलम इस्लामोफोबिया को बढ़ावा देने वाला है। ऐसा बेहूदा वर्गीकरण गोदी मीडिया और हिंदुत्ववादी ताकतों के आगे सरेंडर करने के सामान होगा।"
ये तथाकथित वैज्ञानिक ध्रुव राठी की तरह हैं। यूट्यूबर ध्रुव राठी 'फिलीपींस को आज़ादी कैसे मिली' से लेकर 'कोरोना वायरस कैसे काम करता है' तक, हर मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। तभी उसकी तुलना 'राजा बाबू' फिल्म के गोविंदा से होती है।
इस हत्याकांड को 15 अगस्त 1975 को अंजाम दिया गया था। सजा सुनाए जाने के बाद से मजीद फरार चल रहा था। उसे 7 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में उसने बताया कि वह बीते 4 साल से कोलकाता में छिपा था। फरारी के दौरान वह पाकिस्तान और लीबिया में भी कुछ दिन रहा था।
मदरसों में छात्रों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। कोरोना जैसी महामारी के बीच उन्हें जानवरों की तरह रखा जा रहा है। लेकिन वामपंथी कविता कृष्णन चाहती हैं कि मदरसों की इस हरकत पर मीडिया चुप्पी साध ले और बच्चों को मरने दे।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लॉकडाउन के उल्लंघन और सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों का पालन नहीं होने पर जवाब मॉंगा है। कहा है कि राज्य में गैर जरूरी चीजों की दुकाने खोलने और मजहबी जमावड़े के लिए इजाजत दिए जाने की सूचना मिली है। राशन प्रशासन की बजाए नेता बॉंट रहे हैं।
प्रवासियों की कठिनाई को देख कर 'मगध-मित्र' का सोशल मीडिया पर जन्म हुआ। इसका उद्देश्य राजनैतिक दलों की सीमाओं से उठ कर, जिस राज्य अथवा शहर में जिस किसी वालंटियर या स्वयंसेवक समूह का कार्यक्षेत्र हो, उससे वहाँ फँसे श्रमिकों तक सहायता पहुँचाना था।
एक जिला जहॉं 93 फीसदी आबादी हिंदू है, संक्रमण पर काबू पाने के तरीकों से मॉडल बन जाता है। एक इलाका जहॉं 90 फीसद मुस्लिम हैं वहॉं लॉकडाउन फेल हो जाता है। फिर कर्फ्यू और उसके बाद महाकर्फ्यू लगाना पड़ता है। बावजूद वह संक्रमण का एपिसेंटर बना हुआ है। जबाव कड़वा है, पर सच यही है।
अब आप समझ जाइए कि जब 'ऑल्टन्यूज़' के कर्ताधर्ता ऐसे काम करते हैं तो उनका प्रोपेगेंडा पोर्टल कैसे चलाया जाता होगा। बैनर पर आमजनों और पशु-पक्षियों को खाना खिलाने की बात स्पष्ट लिखी हुई है फिर भी...