"अवैध घुसपैठियों तक मैं एक सन्देश पहुँचाना चाहता हूँ। अगर आप चाहते हैं कि आपको पीछे न धकेला जाए, अगर आप गिरफ़्तारी से बचना चाहते हैं और अगर आप गोलियों का शिकार नहीं बनना चाहते हैं- तो हमारी सीमाओं की तरफ़ न आएँ।"
दंगाई भीड़ पूरी तैयारी के साथ आई थी। कुछ ने हेलमेट पहन रखे थे। कइयों ने अपना चेहरा छिपा रखा था। विकास ने बताया कि जब मुस्लिम भीड़ वापस चली गई, तब घायल हिन्दुओं को अस्पताल ले जाया जा सका।
ऑपइंडिया की टीम ने कई विडियो और फोटो जुटाए हैं, जो इस रिपोर्ट में संलग्न हैं। तबाही के इस मंजर में हिन्दुओं का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। इससे उबरने में उन्हें काफ़ी समय लग जाएगा। लोग अभी भी घरों में दुबके हुए हैं।
“डीसीपी अमित शर्मा के मुँह से खून निकल रहा था। आँखें ऊपर की ओर हो चुकी थी। भीड़ 5-10 मीटर पर थी। हम पर पथराव हो रहा था। जैसे-तैसे मैंने खुद को सॅंभाला और डीसीपी को डिवाइडर पर लगी ग्रिल के उस पार किया।"
इशरत जहाँ ने भड़काऊ भाषण देते हुए कहा था- "हम मर भी जाएँ लेकिन यहाँ से नहीं हटेंगे। हम आज़ादी लेकर रहेंगे।" इशरत के समर्थक खालिद ने भीड़ से पुलिस पर पत्थरबाजी करने को कहा था। साबू अंसारी उस भीड़ का नेतृत्व कर रहा था, जिसने पुलिस पर पत्थरबाजी की।
24 फरवरी को हिंसा भड़कने के बाद श्याम दुकान बंद ही कर रहे थे कि दंगाइयों की भीड़ अचानक से पत्थरबाजी करती हुई आई। दंगाइयों ने पहले लूटपाट और तोड़फोड़ की। इसके बाद दुकान को आग के हवाले कर दिया।
एक भारत की व्यवस्था को चीनी माओवादी बनाना चाहता है। दूसरा भारत को चूस-चूस के शरिया की ओर ले जाना चाहता है। वैश्विक स्तर पर एक-दूसरे को फूटी आँख ना सुहाने वाले इन दो दुश्मन गुटों का भारत में याराना देखिए।
शाकिर ने 2018 के अंत से फरवरी 2019 तक अपने घर में आदिल अहमद डार और पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद उमर फारूक को शरण दी थी। विस्फोटक जुटाने में मदद की थी। इस हमले 40 जवान बलिदान हो गए थे।
कन्हैया कुमार और उसके साथियों के खिलाफ बीते साल जनवरी में ही पुलिस ने आरोप पत्र दायर किया था। लेकिन केजरीवाल सरकार फाइल पर कुंडली मारे बैठी थी। दबाव बढ़ने पर अब उसने देशद्रोह का केस चलाने को मॅंजूरी दे दी है।
अंकित शर्मा को दंगाई घसीटकर ताहिर के घर में ले गए थे और उनकी निर्मम हत्या कर दी थी। उनका शव नाले से बरामद किया गया था। उन्हें 400 से ज्यादा बार चाकुओं से गोदा गया था।