“आज CAA लागू हो गया । मोदी को बोलो पहले अपने कागज, अपनी डिग्री इन “entire political science” दिखाए, और अपने बाप का और ख़ानदान का birth सर्टिफ़िकेट दिखाए सारे हिंदुस्तान को। फिर हमसे माँगे। #f**k CAA”
बीवी और कॉलेज जाने वाले 2 बच्चे। सब-इंस्पेक्टर विल्सन का यही परिवार था। लेकिन उन्हें पूरी प्लानिंग के तहत मार डाला गया। क्यों? क्योंकि शमीम और तौफिक गुस्सा में थे। गुस्सा इसलिए कि उनके आतंकी दोस्तों को गिरफ्तार क्यों किया गया! बदला लेने के लिए दोनों ने साजिश रची और...
जम्मू-कश्मीर में कभी पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाते तो कभी सेना पर पत्थरबाजी का सीन आम है। लेकिन ऐसा पहली बार हुआ जब कश्मीरी पंडित ने 'फ्री कश्मीर फ्रॉम इस्लामिक टेररिज़्म' का पोस्टर लहराया हो, विदेशी दल को जमीनी हकीकत से वाकिफ कराया हो।
IIM अहमदाबाद के 90 से अधिक छात्रों ने CAA के समर्थन में एक याचिका दायर की है। इन पूर्व छात्रों का कहना है कि CAA के साथ NRC लागू किए जाने से देश में किसी भी समुदाय को कोई खतरा नहीं है और इसके विरोध में झूठ और अफवाहें सिर्फ हिंसा फैलाने के लिए गढ़े जा रहे हैं।
2017-18 की तुलना में कॉन्ग्रेस पार्टी के चुनावी बॉन्ड की बात करें तो यह 5 करोड़ रुपए से बढ़कर साल 2018-19 में 383 करोड़ रुपए पर पहुँच गई है। सभी पार्टियों ने अपनी-अपनी ऑडिट रिपोर्ट चुनाव आयोग को सौंप दिया है, वहीं से यह डेटा लिया गया है।
इंडिया टुडे समूह के पत्रकार राहुल कंवल इस वीडियो में बता रहे हैं कि किस प्रकार उनके 2 खोजी पत्रकारों- जमशेद खान और नितिन जैन की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने कथित ABVP कार्यकर्ता अक्षत अवस्थी का पर्दाफाश किया है।
जम्मू के जगती कैंप जाइए, दिल्ली के मजनू का टीला जाइए। देखिए वहाँ के कश्मीरी पंडितों के कुछ परिवारों की हालत। देखिए उनकी महिलाएँ क्या काम करने को मजबूर हैं! इनके लिए संविधान क्या कहता था 1990 में? इनके लिए संविधान अब क्या कहता है? इसके लिए न्यायपालिका क्या कह रही थी 1990 में? इनके लिए न्यायपालिका अब क्या कह रही है?
पुलिस ने बताया कि पीड़िता और इस अपराध के पीछे का मास्टमाइंड महबूर मियाँ खान पिछले एक साल से संबंध में थे। रविवार को लड़की अपने घर से बाजार जाने को कहकर निकली थी। लेकिन महबूर उसे अपने साथ बेलखोर इलाके में सुनसान जगह ले गया और...
उस समय के कैबिनेट मंत्री मोरारजी देसाई ने तो विपक्षी दलों को भी इस संधि के खिलाफ एकसाथ होने की सलाह दे डाली थी। तत्कालीन गृहमंत्री गोविन्द बल्लभ पन्त भी पाकिस्तान को दी जाने वाली इस आर्थिक राशि से नाखुश थे। वो चाहते थे कि इस आर्थिक राशि का उस धन के साथ सामन्जस्य बैठाया जाए, जो हिन्दू शरणार्थी पाकिस्तान में छोड़ कर आ चुके थे।
JNU में हुई हिंसा में छात्र संघ प्रेसीडेंट आइशी घोष समेत चुनचुन कुमार, पंकज मिश्रा, प्रियरंजन, योगेंद्र भारद्वाज, वास्कर विजय मेक, सुचिता तालुकदार, डोलन सामंता और विकास पटेल का नाम शामिल है। हिंसा के पीछे एक व्हाट्सएप ग्रुप का भी हाथ है, जिसका नाम है- यूनिटी अगेन्स्ट लेफ्ट।