IIT, फैज, CAA, मोदी-शाह विरोध... मतलब गिरोह विशेष के लिए फेक न्यूज फैलाने का भरपूर मसाला। ऐसे में सिर्फ BBC ही इसमें क्यों आगे रहे! मीडिया के तमाम बड़े नामों ने 'फैज की नज्म हिंदू विरोधी' के टाइटल से खबर चलाई। किसी ने भी सच जानने की कोशिश नहीं की।
लिबरल गैंग को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनका कहा सच है या झूठ। वे केवल अपने एजेंडे की परवाह करते हैं। उसे आगे बढ़ाने के लिए हिंदुओं पर क्रूर अत्याचार करने वाले इस्लामी शासकों का महिमामंडन करते हैं।
यूपी में सीएए के विरोध में हुई हिंसा में पीएफआई की संलिप्तता सामने आई है। इस कट्टरपंथी संगठन के संबंध आतंकियों से बताए जा रहे हैं। इस पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेजा गया है। बावजूद बंगाल में उसे प्रदर्शन की इजाजत किसने दी?
सिंध से आई दमी कोहली जोधपुर के पास एक रिफ्यूजी कैंप में रहती है। सालभर से यहीं पढ़ाई कर रही है। 11वीं की परीक्षा भी यहीं से पास की। बावजूद इसके राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने उसका 12वीं का परीक्षा फॉर्म खारिज कर दिया है।
अब केरल विधानसभा में राज्य सरकार द्वारा पास किए गए प्रस्ताव का कोई अर्थ नहीं रहा। क्योंकि इस प्रस्ताव पर आगे काम करने के लिए पिनरई विजयन सरकार को राज्यपाल के हस्ताक्षर लेने अनिवार्य हैं, जो खुले तौर पर इसका विरोध कर चुके।
लगभग 1000 वहाबी प्रचारक (कट्टर इस्लाम के प्रचारक) केरल में आए। विचारधारा को फैलाया, पानी की तरह पैसा बहाया। कई नई मस्जिदों का निर्माण कराया, सब सऊदी अरब स्टाइल में। लेकिन यह सुनिश्चित किया कि इन मस्जिदों से कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार किया जाएगा।
कॉन्ग्रेस चाह कर भी नेहरू-गाँधी से ऊपर नहीं उठ पा रही। स्टेडियम, हॉस्टल, अस्पताल, सरकारी योजनाओं में इनके नाम के राजनीतिक इस्तेमाल के बाद अब जनता पर इनको थोपने की योजना। कमलनाथ सरकार ने MPPSC के परीक्षा पाठ्यक्रम में बदलाव करते हुए इसमें भी नेहरू को घुसा दिया।
"मेरी माँ ने 'डायरेक्ट एक्शन डे' के दौर को तब देखा था, जब वह एक बच्ची थीं और उन्हें गहरा आघात पहुँचा था। उन्होंने देखा था कि पार्क सर्कस में अपने घर के पास मुसलमानों द्वारा एक हिन्दू को कैसे मार दिया गया था।"
"कन्नन ने न सिर्फ़ पीएम मोदी और अमित शाह के ख़िलाफ़ अपमानजनक टिप्पणी की है, बल्कि उन्होंने पीएम और गृहमंत्री को जान से मारने की धमकी दी। कन्नन कुछ ऐसा करना चाहते हैं, जैसा तमिलनाडु में राजीव गाँधी के साथ हुआ था।"
"अति दुःखद है कॉन्ग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व व खासकर प्रियंका गाँधी की इस मामले में चुप्पी साधे रखना। अच्छा होता कि वह यूपी की तरह उन गरीब पीड़ित माँओं से भी जाकर मिलतीं, जिनकी गोद केवल उनकी पार्टी की सरकार की लापरवाही के कारण उजड़ गई हैं।"