चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई को कुछ आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए विदेश जाना था। लेकिन कुछ 'अनिवार्य कार्यों' का हवाला देकर उन्होंने इस यात्रा को रद्द कर दिया।
"सुन्नी वक्फ बोर्ड और अन्य मुस्लिम पक्षकार यह साबित करने में विफल रहे हैं कि विवादित स्थल पर बाबर ने मस्जिद का निर्माण किया था। उनका दावा था कि मस्जिद का निर्माण शासन की जमीन पर हुकूमत (बाबर) द्वारा किया गया था।"
अयोध्या मामले की सुनवाई 40 दिन चली है जो न्यायिक इतिहास में दूसरी सबसे लंबी सुनवाई है। दशकों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित राम मंदिर मसले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के लिए अब आपको बस 23 दिन और इंतजार करना पड़ेगा।
स्क्रॉल ने अपनी ख़बर की हेडलाइन और सोशल मीडिया में शेयर टेक्स्ट ऐसा रखा, जिससे धवन की पहचान उजागर न हो। इसी तरह 'आउटलुक' ने भी सोशल मीडिया पर टेक्स्ट में कहीं भी धवन या सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड का जिक्र नहीं किया।
अयोध्या मामले में फ़ैसले की घड़ी समीप आने के साथ ही यूपी सरकार भी एक्शन के मोड में आ गई है। अधिकारियों को अपने मुख्यालय में ही रहने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस को किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया गया है।
एक शख्स हाथ में पानी से भरे लौटे को पकड़ता है। दूसरे हाथ से उसमें नमक डालता है। इस दौरान वह अपनी जुबान से एक वादा या वचन देता है, जिसे पूरा करने की वो कसम खाता है। लौटे में नमक डालने के बाद वो किसी भी सूरत में अपने वचन को पूरा करने से पीछे नहीं हट सकता है। यही प्रथा कहलाती है- लूण लोटा। हिमाचल प्रदेश के कई भागों में यह प्रथा आज भी प्रचलित है।
"ये वीर सावरकर के ही संस्कार हैं कि राष्ट्रवाद को हमने राष्ट्र निर्माण के मूल में रखा है। वीर सावरकर को आए दिन गालियाँ देने वाले, उनका अपमान करने वाले, वही लोग हैं जिन्होंने बाबा साहेब आंबेडकर का कदम-कदम पर अपमान किया। उनको दशकों तक भारत रत्न से वंचित रखा।"
शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान हिन्दू महासभा ने कुछ कागज़ात और नक़्शे दिए थे। अदालत में ही धवन ने उन्हें एक-एक कर फाड़ना शुरू कर दिया। जब मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने उन्हें टोका तो उन्होंने कुछ और पन्ने फाड़ डाले।
पार्ले के अधिकारी मयंक शाह ने कर्मचारियों की छॅंटनी की खबरों का आधारहीन बताया है। उनका कहना है कि चीजों को गलत तरीके से पेश कर नकारात्मकता फैलाई गई। उन्होंने माना कि छॅंटनी इंडस्ट्री के विकास दर और बिक्री पर निर्भर करता है।
दावे से पीछे हटने के बदले में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने तीन शर्तें रखी है। उसने कहा है कि एएसआई के नियंत्रण में जितने भी धार्मिक स्थल हैं, उनकी स्थिति की जाँच करने के लिए सुप्रीम कोर्ट एक समिति बनाए।