दुर्भाग्य यह है कि बिहार में शायद कुछ भी सही नहीं है। इसलिए हमें बुद्ध और चाणक्य की शरण में जाना पड़ता है। लेकिन अशोक स्तम्भ और गरुड़ध्वज की छाया क्षीण हो चुकी है। नितीश और लालू जैसे नेता यह बताते हैं कि हम चुनने में भी गलती करते हैं, और उसके बाद काम करवाने के लिए प्रयास भी नहीं करते।
देश के विभाजन के बाद हैदराबाद के निजाम उस्मान अली खान ने 1948 में लंदन के नेशनल वेस्टमिंस्टर बैंक में 10 लाख पाउंड (क़रीब 8.87 करोड़ रुपए) जमा किए थे। इस पर दावे को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले 70 सालों मुक़दमा चल रहा था। अब यह रकम बढ़कर करीब 35 मिलियन पाउंड (करीब 306 करोड़ रुपए) हो चुकी है।
एएसआई की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट के सवालों का साफ-साफ जवाब नहीं दे पाईं मुस्लिम पक्ष की वकील मीनाक्षी अरोड़ा। कमल के निशान, खुदाई में वराह की मूर्ति मिलने जैसे कई सबूतों पर अदालत ने पूछे थे सवाल। अष्टकोणों को भी हिन्दू धर्म का मानने से कर दिया इनकार।
जम्मू-कश्मीर के 310 ब्लॉकों में ब्लॉक विकास परिषदों के अध्यक्षों के चुनाव के लिए मंगलवार को अधिसूचना जारी की गई थी। अधिसूचना के मुताबिक 24 अक्टूबर को चुनाव होंगे। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख नौ अक्टूबर है।
"महात्मा गाँधी सिर्फ़ स्वतंत्रता की ही लड़ाई नहीं लड़ रहे थे बल्कि भारतीय सभ्यता के मूल तत्व को आधार बनाकर पश्चिमी सभ्यता की राक्षसी प्रकृति जिसमें दमन, अमानवीयता, संसाधनों की लूट, विस्तारवाद, ताक़तवर होने का अहम, व्यक्तिवाद और ‘हम और तुम’ की खाई अंतर्निहित है, को भी चुनौती दे रहे थे।"
मौसम विभाग ने भारी बारिश को लेकर 72 घंटे पहले चेताया था। बैठक भी हुई थी। मंत्री-अफसर सब जुटे थे। नाश्ते में काजू भी रहा होगा मगर उस बैठक का नतीजा क्या हुआ? बारिश होती रही और ढीठ सिस्टम मुॅंह ताकता रहा।
देश लौटने के बाद नौक्षम ने महसूस किया कि उनके घर, परिवार, राज्य को उन जैसे लोगों की जरूरत हैं। उन्होंने एक महीने पहले भाजपा की सदस्यता ली थी। उनकी मानें तो वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से काफी प्रभावित हैं।
घर में फँसे डिप्टी सीएम को रेस्क्यू करना पड़ा और मुख्यमंत्री अमेरिका की बातें कर रहे। अधिकारियों के सामने केंद्रीय मंत्री लाचार हैं और सीएम मुंबई की याद दिला रहे। शायद, नीतीश भूल चुके हैं कि बिहार के लिए उनकी जिम्मेदारी बनती है और सवाल उनसे पूछे ही जाएँगे।
गाँधी के कई नकली बयान आ गए हैं। ये हँसी-मज़ाक के लिए होते हैं। ये गाँधी के असली वक्तव्य नहीं होते। अब ये तो पता ही है कि जीवनपर्यन्त शाकाहारी रहे बापू आपको बटर-चिकन खाने की सलाह तो देंगे नहीं। लेकिन, मीम्स के द्वारा सब संभव है।
महात्मा गाँधी का मांनना था कि मुस्लिमों को गोहत्या से वंचित करने का अर्थ है उनसे जबरन हिन्दू धर्म कबूल करवाना। राष्ट्रपिता के अनुसार, अगर मुस्लिम बात नहीं मानते हैं तो गाय को मरने देना चाहिए। महात्मा गाँधी गोहत्या पर बिना मुस्लिमों की सहमति के प्रतिबन्ध लगाने के विरोधी थे।