सच्चाई ये है कि इस कम्युनिटी किचेन को 'झंडेवालान मंदिर कमिटी' और समाजसेवा संगठन 'सेवा भारती' मिल कर रही है। इसीलिए आजतक ने बाद में हेडिंग को बदल दिया और 'कैसा है केजरीवाल का कम्युनिटी किचेन' की जगह 'कैसा है मंदिर का कम्युनिटी किचेन' कर दिया।
मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए क्विंट ने गिरधर ज्ञानी को डॉक्टर बताया। टास्क फ़ोर्स का संयोजक तक बता डाला। जबकि वे ना मेडिकल प्रैक्टिस करते हैं और ना कोई महामारी विशेषज्ञ हैं। यहॉं तक कि ऐसा कोई टास्क फोर्स भी नहीं है जिसका वामपंथी वेबसाइट ने दावा किया।
CNBC-TV18 से बातचीत में विप्रो ने कहा, “यह ऐलान मार्च 2019 में हुआ था। आज ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है।” करीब एक साल पहले मार्च 2019 में जब अजीम विप्रो के चेयरमैन थे, तो उन्होंने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के लिए 52750 करोड़ रुपए दान किया था।
जोस ने एक ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर किया है। जिसमें दावा किया गया है कि अन्य मुल्कों में कोरोना का टेस्ट फ्री है, जबकि भारत में नहीं। हकीकत यह है कि सरकारी लैब में टेस्ट फ्री हो रहे हैं। 4500 रुपए का जो अधिकतम शुल्क तय किया गया है वह प्राइवेट लैब के लिए है।
केन्या रिपोर्ट की खबर में इस घटना की जाँच कर रही पुलिस का हवाला दिया गया था और बताया गया था कि पादरी ने पहले अनुयायियों को यह विश्वास दिलाया कि कोरोनावायरस के खतरे को कीटाणुनाशक द्वारा खत्म किया जा सकता है। उसके बाद उसने सभी को मुँह से...
इस बात के कोई स्पष्ट साक्ष्य नहीं है कि इस 'हग अ चायनीज' कैम्पेन के कारण ही इटली में कोरोना वायरस का संक्रमण फैला, क्योंकि सभी चीनी नागरिक इस वायरस से संक्रमित नहीं हैं, जिसके कारण उनसे भेदभाव किया जाए। साथ ही यह भी सही है कि इस तरह के कैम्पेन को कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए फिलहाल टाला जा सकता था।
दंगाई भीड़ ने बिजेंद्र के घर की छत को ही हमले के लिए बेस बना लिया और वहाँ कब्ज़ा कर लिया। छत पर क़रीब 90 आदमी थे। पत्थर ढो-ढो कर लाए जा रहे थे। मंदिर पर पूरे 6 घंटे तक हमले किए गए लेकिन वामपंथी मीडिया (ख़ासकर न्यूज़लॉन्ड्री) ने "मंदिर पर हमला हुआ ही नहीं" का नैरेटिव गढ़ा।
आसमानी गुलेलों और पेट्रोल बम की पड़ताल करना न्यूज़लॉन्ड्री जैसों के लिए अपने अन्नदाताओं को निराश करने वाली बात होगी। इसलिए अपने अन्नदाताओं के खिलाफ जाकर पतझड़ कुमार को कोई कदम नहीं उठाना चाहिए, ऐसा न हो कि उनके खिलाफ जाते ही भारत में बेरोजगारी के आँकड़ों में पतझड़ कुमार भी योगदान करते हुए नजर आएँ।
'द वायर' ने इन दोनों स्कूलों को लेकर अपनी 'ग्राउंड रिपोर्टिंग' में झूठ फैलाया है। प्रोपेगंडा पोर्टल ने दावा किया है कि दोनों स्कूलों के मालिक समुदाय विशेष से ही हैं। बता दें कि डीआरपी स्कूल के ओनर पंकज शर्मा हिन्दू हैं।
भाषण के शुरू में ही मोहन भागवत स्पष्ट कहते सुने जा सकते हैं कि शब्दों का अर्थ बदलता जा रहा है। इसके बाद ही उन्होंने बताया है कि राष्ट्रवाद शब्द के इस्तेमाल करने पर आपके कथन का सीधा अर्थ फासीवाद और नाजीवाद से जोड़ दिया जाता है।