Homeफ़ैक्ट चेकमीडिया फ़ैक्ट चेकमंदिर और सेवा भारती के कम्युनिटी किचेन को 'आज तक' ने बताया केजरीवाल का,...

मंदिर और सेवा भारती के कम्युनिटी किचेन को ‘आज तक’ ने बताया केजरीवाल का, रोज 30 हजार लोगों को मिल रहा खाना

'सेवा भारती' ने भी साफ कर दिया है कि इस कम्युनिटी किचेन को चलाने में उसे सिर्फ़ झंडेवालान मंदिर का सहयोग प्राप्त है और उसके अलावा किसी का भी सहयोग नहीं मिला है। वहाँ प्रतिदिन 30,000 लोगों को खाना खिलाया जा रहा है।

‘आजतक’ ने एक बार फिर से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का महिमामंडन करने के लिए एक मंदिर के योगदान को छिपा दिया। दरअसल, आजतक ने एक मंदिर द्वारा चलाए जा रहे कम्युनिटी किचेन को ‘केजरीवाल का कम्युनिटी किचेन’ कह कर न सिर्फ़ प्रचारित किया बल्कि इस उपलब्धि के लिए दिल्ली सरकार की ही पीठ थपथपाई। नीचे संलग्न किए गए ट्वीट में आप आजतक की वो ख़बर देख सकते हैं, जिसमें मंदिर के कम्युनिटी किचेन के लिए केजरीवाल की वाहवाही की गई है:

आजतक ने लिखा कि कोरोना वायरस से बचाव के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए गए 21 दिनों के लॉकडाउन के बाद अपने गाँव को पलायन करने वाले मजदूरों और गरीबों की भारी भीड़ बॉर्डर पर रोजाना देखने को मिलती है। इन्ही मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए दिल्ली सरकार ने पूरा जोर लगा दिया है। इसके बाद लिखा गया कि केजरीवाल सरकार मजदूरों के रहन-सहन के इंतजाम में जुटी है और ऐसे ही एक कम्युनिटी किचेन को झंडेवालान में चलाया जा रहा है।

जबकि सच्चाई ये है कि इस कम्युनिटी किचेन को ‘झंडेवालान मंदिर कमिटी’ और समाजसेवा संगठन ‘सेवा भारती’ मिल कर चला रही है। इसीलिए आजतक ने बाद में हेडिंग को बदल दिया और ‘कैसा है केजरीवाल का कम्युनिटी किचेन’ की जगह ‘कैसा है मंदिर का कम्युनिटी किचेन’ कर दिया। साथ ही लेख के भीतर भी लिख दिया गया कि पलायन करने वाले मजदूरों के रहने-खाने के इंतजामों में कई गैर सरकारी संस्थान भी सरकार की मदद के लिए आगे आ रहे हैं।

सेवा भारती का बयान

‘सेवा भारती’ ने भी साफ कर दिया है कि इस कम्युनिटी किचेन को चलाने में उसे सिर्फ़ झंडेवालान मंदिर का सहयोग प्राप्त है और उसके अलावा किसी का भी सहयोग नहीं मिला है। वहाँ प्रतिदिन 30,000 लोगों को खाना खिलाया जा रहा है।

बता दें कि इस आपदा के समय देश भर के मंदिर आगे आकर न सिर्फ़ वित्तीय सहयोग कर रहे हैं बल्कि ग़रीबों तक समुचित संसाधन पहुँचाने में भी लगे हुए हैं। कई समाजिक संगठन भी जनसेवा में रत हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी लगातार इसी काम में लगा हुआ हैं। जबकि अरविन्द केजरीवाल की पार्टी के नेता आरोप-प्रत्यारोप खेल रहे हैं और मीडिया इससे इतर दिल्ली सरकार के महिमामंडन में लगा है। साथ ही मंदिरों के योगदान को भी जानबूझ कर छिपाया जा रहा है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -