रोज धमाके और नक्सली हमले कॉन्ग्रेस सरकार की पहचान थे। लेकिन मोदी सरकार के दौर कश्मीर में इसमें बदलाव हुआ और अब नक्सली और आतंकी अंतिम साँसे गिन रहे हैं।
रोहिणी का कहना है कि शुरुआत में उन्होंने सोचा कि इस मामले को अधिक तूल न दिया जाए क्योंकि उनके मन में दलित एकता की बात थी, लेकिन फिर बोलने के अलावा कोई और चारा न रहा।