धर्म और संस्कृति

नेताजी बोस के हमउम्र ‘पद्म श्री’ शिवानंद बाबा, भूख से चल बसे थे माता-पिता और बहन: सुबह 3 बजे योग और पूजा, कर रहे...

शिवानंद बाबा प्रतिदिन तड़के तीन बजे उठ जाते हैं और एक घंटे योग का अभ्यास करते हैं। इसके बाद वे माँ चंडी और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करते हैं।

सालभर बाद ईडाणा माता का अग्निस्नान, देखिए Video: श्रृंगार-चढ़ावा-वस्त्र जलकर भस्म, मूर्ति को कोई नुकसान नहीं

राजस्थान के उदयपुर में ईडाणा माता का शक्तिपीठ है। यह जगह माता के अग्निस्नान के लिए प्रसिद्ध है। अग्निस्नान की कोई तिथि तय नहीं है।

2.5 लाख टन कृष्णशिला से बना यदाद्रि का लक्ष्मी नरसिंह मंदिर: हजारों साल पुरानी गुफाओं में स्वयंभू भगवान, 125 Kg सोने का गोपुरम

तेलंगाना में 2000 करोड़ रुपए की लागत से बने यदाद्रि के लक्ष्मी नरसिंह मंदिर का उद्घाटन किया गया। शास्त्रों के हिसाब से कृष्णशिला से निर्माण।

फगुआ, दोल जात्रा, होला मोहल्ला, भगोरिया… हर राज्य में उल्लास का अलग है रंग: भारत की विविधता, संस्कृति, लोक कला, साहित्य को समेटती होली

होली का वर्णन जैमिनी के पूर्व मीमांसा-सूत्र और कथा गार्ह्य-सूत्र, नारद पुराण और भविष्य पुराण जैसे कई पुराणों में इस पर्व का उल्लेख मिलता है।

होली पर महादेव की काशी से कृष्ण की नगरी तक छाया है उल्लास: होलिका, होलाका, धुलेंडी, धुरड्डी, धुरखेल, धूलिवंदन… हर नाम में छिपा है...

कृष्ण की नगरी मथुरा, वृन्दावन और राधा के बरसाने में होली कई दिन पहले से ही खेली जाती है। तो वहीं बनारस में भी होली रंगभरी एकादशी से बुढ़वा मंगल तक मनाई जाती है।

45 सालों से बंद है राजस्थान का देवनारायण मंदिर, मुस्लिमों ने ठोक रखा है दावा: खुलवाने के लिए हिन्दुओं का प्रदर्शन, गुर्जर समाज मैदान...

भीलवाड़ा के हिन्दुओं की माँग है कि 45 वर्षों से बंद देवनारायण मंदिर को खोला जाए और उसमें पूजा-अर्चना की जाए। हिन्दू समाज का विरोध प्रदर्शन।

खेले मसाने में होरी दिगंबर… : काशी में महाश्मशान मणिकर्णिका पर खेली जाती है चिता-भस्म की अनोखी होली, तारक मन्त्र देने आते हैं महादेव

काशी में महादेव के साथ होली खेलने और उत्सव मनाने के लिए भूत-प्रेत, पिशाच, चुड़ैल, डाकिनी-शाकिनी, औघड़, सन्यासी, कपालिक, शैव-शाक्त सब आते हैं।

रंगभरी एकादशी: कश्मीरी पंडितों की रजत पालकी पर विराजमान महादेव कराएँगे माँ गौरा का गौना, 358 वर्षों से जीवंत है काशी की यह परम्परा,...

काशी में रंगभरी एकादशी 358 वर्षों से अपने भव्यतम स्वरूप में निरंतर निभाई जा रही है। इसके पहले कहा जाता है कि मुग़लों के शासन में लम्बे समय तक यह परंपरा बाधित रही।

महाशिवरात्रि पर ‘अली मौला’ पर नाचते सद्गुरु, ‘बाबा फरीद’ के बारे में बताता गायक: वीडियो देख लोगों ने पूछा – ‘पीर फकीर बनने की...

वीडियो में 'अली मौला' पर नाचते सद्गुरु को देख कर लोग खुश नहीं हैं। लोगों का सवाल है कि महाशिवरात्रि में 'बाबा फरीद' और 'मस्त कलंदर' का क्या काम?

स्थापना के 99 सालों बाद हाईटेक हुआ गोरखपुर का गीताप्रेस: जर्मनी-जापान की मशीनें, रोज छप रहीं 50000 पुस्तकें

गीताप्रेस गोरखपुर की स्थापना के 99 वर्षों बाद उसका कायाकल्प होने जा रहा है। हाईटेक होने के बाद जर्मन और जापानी मशीनों से छपेंगी धार्मिक पुस्तकें।

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