बीसीसीआई ने इस बात का भी खुलासा किया कि धोनी के दस्तानों के लिए बीसीसीआई ने आईसीसी से पहले ही इजाजत माँग ली थी। ऐसे में सवाल उठता है कि इजाजत देने के बाद आपत्ति क्यो जताई जा रही है।
अब उज्ज्वला के एक ऐसे फायदे के बारे में पता चला है, जो एक रिसर्च के बाद सामने आया है। इसनें स्वास्थ्य में भी योगदान दिया है। जहाँ-जहाँ एलपीजी का प्रयोग होता है, वहाँ श्वाँस रोगियों की संख्या में 20% कमी पाई गई।
आँखों के सामने पति को खो देने के एहसास ने दिल और दिमाग पर जो गहरा असर छोड़ा होगा वो संध्या के लिए किसी सदमें से कम तो बिल्कुल नहीं होगा। वहीं दूसरी तरफ़ आशीष की माँ की निगाहें बेटे की घर वापसी की आस लगाए बैठी थीं, जो अब कुछ बोलने की स्थिति में नहीं। एक माँ का इस क़दर चुप हो जाना उनके अपार दु:ख को प्रकट करने के लिए काफ़ी है।
पैरा स्पेशल फ़ोर्स के लिए धोनी का प्यार कोई नई बात नहीं है। वर्ल्ड कप से पहले IPL के दौरान भी धोनी ने इनके बलिदान बैज वाली टोपी पहनी थी। धोनी के पास एक मोबाइल केस भी है, जिसके पीछे यह बैज बना हुआ है।
59 वर्षीय प्रकाश पंत ने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ टैक्सस के अस्पताल में अपनी आखिरी साँस ली। 30 मई को उन्हें कैंसर के इलाज के लिए अमेरिका ले जाया गया था।
मोदी इससे पहले भी लोगों को योग करने के लिए कई तरीके से प्रोत्साहित कर चुके हैं। इससे पहले पिछले वर्ष भी उन्होंने विभिन्न आसनों को करने का तरीका सिखाते अपने कार्टून जारी किए थे।
30 मई को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आयोजित हुए शपथ-ग्रहण समारोह में NCP नेता शरद पवार इस नाराजगी के चलते शामिल नहीं हुए थे क्योंकि उन्हें लगा था कि समारोह में उन्हें पाँचवीं पंक्ति में सीट दी गई है। जबकि उनकी सीट V-सेक्शन मतलब VVIP सेक्शन में थी।
आमिर से जब वर्ल्ड कप 2019 में पाकिस्तान के जीतने की संभावनाओं के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बड़े ही आत्मविश्वास के साथ कहा, "वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के जीतने की बहुत बढ़िया संभावना है। ये निर्भर करता है कि कैसे 'मैच फिक्सिंग' की गई है और उन्होंने खेल को कैसे फिक्स किया है।"
अगले 5 सालों में 5 करोड़ अल्पसंख्यक छात्रों को 'प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति' दी जाएगी। जिसमें 50 प्रतिशत छात्रवृत्ति छात्राओं को दी जाएगी। 3E यानी एजुकेशन, एम्प्लॉयमेंट और एम्पावरमेंट के लक्ष्य के तहत...
मार्क्स कभी उसे देखने भी नहीं जाते थे, जिस कारण फ्रेडिक देमुथ की शिक्षा-दीक्षा अच्छे से नहीं हो पाई। वो जिंदगी भर मजदूर और कल-पूर्जे बनाने वाला काम करता रहा। आखिरकार 1929 में 78 वर्ष की उम्र में फ्रेडिक देमुथ की मृत्यु हुई, लंदन की एक ग़रीब बस्ती में - वो भी इस विश्वास के साथ कि उसकी माँ...