सुप्रीम कोर्ट ने बहुप्रतीक्षित फ़ैसला सुनाया दिया है। अयोध्या की पूरी विवादित ज़मीन रामलला की है। मंदिर वहीं बनेगा। मस्जिद के लिए अयोध्या में ही कहीं और 5 एकड़ ज़मीन दी जाएगी।
रिटायर होने से पहले जस्टिस गोगोई कई और अहम मामलों में फैसला सुना सकते हैं। इनमें सबरीमाला रिव्यू पिटिशन, राफेल रिव्यू पिटिशन, राहुल गाँधी पर अवमानना का मुकदमा, फाइनेंस एक्ट 2017 की वैधता जैसे मामले शामिल हैं।
असंतुष्ट पक्ष के पास दूसरा विकल्प क्यूरेटिव याचिका दाखिल करने का होगा। इसे उपचार याचिका भी कहा जाता है। पुनर्विचार याचिका ख़ारिज होने के 30 दिनों के भीतर क्यूरेटिव याचिका दायर की जा सकती है।
राम मंदिर के हक में फैसला आया तो यह पहला मौका नहीं होगा, जब हिंदुओं के दावे पर मुहर लगेगी। हाई कोर्ट ने भी विवादित स्थल को रामजन्भूमि माना था। अंग्रेजों के जमाने में भी अदालत ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने की बात मानी थी।
अक्टूबर 2019 तक पाकिस्तान को काले धन के जिहादियों के हाथ में पहुँचने पर नियंत्रण करके दिखाना था। ऐसा न करने पर उसके नार्थ कोरिया और ईरान की तरह ब्लैक लिस्ट में चले जाने का खतरा था। लेकिन.....
विवाद बढ़ता देख कर सोनी टीवी ने एक ट्वीट कर विवाद पर माफ़ी माँग ली है। साथ ही दावा किया है कि कल जिस एपिसोड की शूटिंग हुई है उसमें उन्होंने माफीनामे का एक 'स्क्रॉल' जोड़ दिया है।
इससे पहले इमरान खान ने ऐलान किया था कि करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन और गुरु नानक देव की 550वीं जयंती पर आने वाले श्रद्धालुओं से एंट्री फीस नहीं ली जाएगी, इसके बावजूद उन्हीं की सेना प्रमुख बाजवा ने पीएम की बात को खारिज कर दिया।
गुरुद्वारा परिसर में एक बोर्ड लगा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसमें लिखा है कि भारतीय वायुसेना ने 1971 में गुरुद्वारा दरबार साहिब श्री करतारपुर साहिब पर बमबारी की थी, लेकिन वाहे गुरुजी की कृपा से गुरुद्वारे को कोई नुकसान नहीं पहुँचा।
"मैं और एला उस दौरान बकिंग्घम पैलेस में महारानी के स्विमिंग पूल में नंगे तैरते थे। दोनों ने साथ में MDMA (एनर्जी और सेंसेशन बढ़ाने के लिए लिया जाने वाला एक तरह का ड्रग) भी लेते थे।" इसके बाद आतिश अपने लेख को थोड़ा एंगल देते हैं - भावनाओं का तड़का लगा कर। वो बताते हैं कि...
यदि वकीलों ने लॉकअप को पहले तोड़ने की कोशिश की और उसमें असफ़ल रहने पर आगजनी का सहारा लिया, जैसा कि एडिशनल डीसीपी (नॉर्थ) का दावा है, तो यह निष्पक्ष और बेहद गंभीर जाँच का विषय होना चाहिए कि यह जेल तोड़ने का प्रयास महज़ गुस्से की अभिव्यक्ति था, या इसके पीछे कोई ठंडे दिमाग से बनाई गई योजना थी।