NCPCR ने मदरसों में गैर-मुस्लिमों के दाखिले मामले पर जाँच के आदेश दिए थे। लेकिन फैलाया ये गया कि जाँच के आदेश देकर अल्पसंख्यकों के स्कूलों को टारगेट किया जा रहा है।
गुलजार आजमी ने कहा, "मोहब्बत जवानी में एक हवस होती है, असल मोहब्बत नहीं होती है, खाली हवस होती है। मोहब्बत उस वक्त होती है, जब 40 की उम्र पार हो जाती है।"
टीपू सुल्तान के समय में शुरू हुआ ये रिवाज कोल्लूर के सुब्रमण्या में पुत्तुर के मंदिरों में किया जाता था। इसे बदलने की घोषणा कर्नाटक धर्मिका परिषद द्वारा की गई।