इशारा साफ़ था, हमारी हैसियत बन्दूक खरीदने की है, हमने चाहा तो पत्रकारों को मार देंगे। इससे पहले भी लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी की दुहाई देने वाले जेएनयू के छात्रों ने रिपब्लिक भारत के मीडियाकर्मियों से काफी बदतमीजी की थी।
लड़के ने पीड़िता के पिता से कहा था कि उसके बाप ने दूसरी शादी कर ली और सौतेली माँ ने उसे घर से निकाल दिया है। इसके बाद रियाज़ ने लड़की से हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार शादी कर ली थी।
"मैं एक 18 वर्षीय बेटी का लाचार पिता हूँ। मेरी मासूम बेटी को लव जिहाद के जाल में फँसा लिया गया है। वह लड़का पाकिस्तान से है, जो मेरी बेटी से पिछले कुछ समय से रोमियो बनकर बात कर रहा था। मेरी बेटी को बहला फुसलाकर दुबई ले गया है। न जाने मेरी बेटी किस हाल में होगी।"
प्रभु चावला ने बताया है कि मुस्लिमों व ईसाइयों द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों में उसी ख़ास महजब के लोगों को विभिन्न पदों पर नियुक्त किया जाता है। इसके लिए बाकायदा विज्ञापन भी निकाले जाते हैं। यह सब खुल्लम-खुल्ला होता है और कोई मुँह नहीं खोलता।
हिंदुओं की भावना आहत करने के इरादे से मंदिर में देवी-देवताओं की मूर्ति खंडित करने का ये पहला मामला नहीं है। आगरा के पड़ोसी जिलों से ही कम से कम 15 ऐसी घटना हाल में सामने आ चुकी है।
छात्रों की संख्या लगभग 8,000 है। कुल ख़र्च 556 करोड़ है। कैलकुलेट करने पर पता चलता है कि जेएनयू हर एक छात्र पर सालाना 6.95 लाख रुपए ख़र्च करता है। क्या इसके कुछ सार्थक परिणाम निकल कर आते हैं? ये जानने के लिए रिसर्च और प्लेसमेंट के आँकड़ों पर गौर कीजिए।
विश्वविद्यालय के पब्लिक रिलेशन ऑफिसर ने कहा है कि यह कोरी अफवाह है। उन्होंने आगे बताया कि कोर्स में किसी भी तरह का बदलाव एकेडमिक काउंसिल करती है, और ऐसा अभी कुछ नहीं हुआ है। उनके अनुसार यह सब विश्वविद्यालय को बदनाम करने की साजिश है।
शिक्षकों के प्रति मध्य-प्रदेश सरकार के उदासीन रवैये के खिलाफ लम्बे समय से वहाँ के शिक्षक अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। 5 सितम्बर को भी कई शिक्षक अपना विरोध जताने के लिए भोपाल में इकठ्ठा हुए थे।
पहले मुस्लिम पक्षकारों को मस्जिद के लिए 5 एकड़ राम जन्मभूमि के 67 एकड़ जमीन के भीतर चाहिए था, मगर अब उनकी ये माँग हिंदुओं को वैकल्पिक 5 एकड़ जमीन देने पर स्थानांतरित हो गई है।
वीर सावरकर की फोटो को दीवार से उखाड़ कर पहली बेंच पर पटक दिया गया था। फोटो पर स्याही लगी हुई थी। इसके बाद छात्र आक्रोशित हो उठे और धरने पर बैठ गए। छात्रों के आक्रोश को देख कर एचओडी वहाँ पर पहुँचे। उन्होंने तीन सदस्यीय कमिटी गठित कर जाँच का आश्वासन दिया।