तीनों भाइयों ने अपने गुनाह को मान लिया है। इन्होंने बताया है कि उनकी बहन एक गैर-मुस्लिम और शादीशुदा व्यक्ति के साथ संबंध में थी। परिवार इस रिश्ते के ख़िलाफ़ था। इन लोगों ने सलमा को कई बार उस आदमी से दूर रहने के लिए कहा लेकिन...
मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप केस में एक अज्ञात "तोंद वाले अंकल नेताजी" और एक "मूछ वाले अंकल जी" की भूमिका सामने आई है। पीड़ित बच्चियों ने इन दोनों ही अज्ञात 'अंकलों' पर उनका यौन शोषण करने का आरोप लगाया है। CBI ने जाँच के लिए 6 महीने का समय माँगा था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 3 महीने का अल्टीमेटम दिया है।
गोला इलाके में कुछ अराजक तत्व मूर्ति को बुर्का पहनाकर वहाँ से चले गए। जब सोमवार सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों ने इंदिरा पार्क में पूर्व पीएम की मूर्ति पर बुर्का चढ़ा हुआ देखा तो वह दंग रहे गए। यह खबर पूरे इलाके में आग की तरह फैल गई।
एअरपोर्ट पर जब अतीक अहमद उतरा, तो साथ में पुलिस होने के बावजूद उसके समर्थकों ने उसका स्वागत किसी बड़े नेता की तरह किया। अतीक अहमद की जेब में 2000 रुपए के नोटों की गड्डियाँ साफ़-साफ़ झलक रही थीं। वह शान से फूलों की माला पहन हाथ हिलाता चल रहा था।
दोनों महिलाओं ने एनजीओ के शुरुआती समय में उसे आगे बढ़ाने में किए गए अपने प्रयासों और संघर्षों के बारे में बात की। किस प्रकार बिना सैलरी के भी उन्होंने इस एनजीओ के लिए काम किया। कभी-कभी उन्हें 6,000 रुपए मिले, जो पर्याप्त नहीं होते थे लेकिन फिर भी उन्होंने एनजीओ के लिए काम करना नहीं छोड़ा।
बच्ची अपने भाई-बहनों के साथ जन्नति दरवाजे के सामने बैठी थी जहाँ पर तीनों खेल रहे थे। तभी शाम करीब 7 बजे रोजा इफ्तारी के समय 3 साल की छोटी बेटी गायब हो गई। इसके बाद बच्ची की माँ ने दरगाह में मौजूद लोगों की सहायता से गुम हुई बेटी की तलाश शुरू की।
23 साल का राकेश राजस्थान में नागौर जिले के पुंदलोता का निवासी है। 2019 में IIT दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद आरोपित अपनी फर्जी वेबसाइट के जरिए लोगों को हैदराबाद में नौकरी का ऑफर देकर ठगता था।
ईडी ने कहा कि वाड्रा जानबूझ कर लन्दन जाना चाहते हैं क्योंकि वहाँ इस मामले से जुडी कई चीजें हैं। अदालत ने यह भी कहा कि वाड्रा के ख़िलाफ़ जारी किया गया 'लुक आउट सर्कुलर' भी इस अवधि के दौरान लागू नहीं होगा।
एक जाँच अधिकारी ने आरोपित के ख़िलाफ़ 2011 में हलफनामा दर्ज करवाया था, लेकिन सही प्रक्रिया फॉलो न करने के कारण उसे प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दिया गया था। इसके बाद ये मामला उस समय सुर्खियों में आया जब दोबारा मनोज को 2012 में सपा से टिकट मिला और साथ ही उन्हें मंत्री भी बनाया गया।
स्थिति को गंभीर समझते हुए रिटायर्ड सीजेआइ लोढ़ा ने एक लाख रुपए तुरंत उस बैंक खाते पर भेज दिए। इसके बाद 30 मई को जब जस्टिस बीपी सिंह से उनकी बात हुई तो पता चला कि उन्होंने ऐसा कोई मेल भेजा ही नहीं था। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ ठगी हुई है।