सलमान रुश्दी के 'दोस्त' ये नहीं बताते हैं कि भारत में 'प्रेस की आजादी' और 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' ही है कि मोदी सरकार के हर काम पर संसद के अंदर और बाहर बहस होती है।
शीतकालीन सत्र की शुरुआत होते ही सदन में हंगामा और सत्र नहीं चलने देने का 'सियासी दांव' शुरू हो गया है। अच्छा होता अगर विपक्ष सरकार को संसद में सवाल पूछता।
'सीने पर गोली खाएँगे' के सहारे मुस्लिमों को भड़काने की कोशिश कर रहे मदनी ने सुप्रीम कोर्ट से वंदे मातरम तक पर सवाल उठाए हैं। वह 'जिहाद' में इसका हल ढूँढ रहे हैं।
भारत ने 2025-26 की दूसरी तिमाही (Q2) में 8.2 % की रफ्तार से बढ़कर यह सिद्ध कर दिया है कि उसकी आर्थिक नींव न केवल मजबूत है बल्कि निरंतर व्यापक होती जा रही है।
आरफा को कभी भी हलाला, तीन तलाक जैसे मुद्दे विरोध के लायक नहीं लगे, उन्हें दिक्कत हुई तो राम मंदिर से, वहाँ फहराते केसरिया झंडे से और भगवा कपड़ों में वहाँ पहुँचे भक्तों से।
पाकिस्तान से लेकर भारत में बैठे वामपंथी और कथित लिबरल्स के गुट को राम मंदिर में धर्म ध्वज की स्थापना से मिर्ची लग गई है। वो इसके बहाने प्रधानमंत्री मोदी तक को घेरने की कोशिश में लगे हैं।