पत्रकार वीर सांघवी ने 'द प्रिंट' में छपे अपने लेख में तर्क दिया है कि 'गोडसे की महिमा गाने की कोशिशें इसलिए बढ़ गई हैं क्योंकि देश में हिंदुत्व का असर बढ़ा है'।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्य को सौ वर्ष पूर्ण हुए है। यह यात्रा परिश्रम पूर्ण और कुछ संकटों से अवश्य घिरी रही, परंतु सामान्य जनों का समर्थन उसका सुखद पक्ष रहा।
आरफा खानम और राणा अय्यूब जैसी कथित पत्रकार जो पत्रकारिता की आड़ में इस्लामी प्रोपेगेंडा फैलाती हैं, वो सीएम योगी के डेंटिंग-पेंटिग वाले तीखे बयानों से खफा है।
ममता बनर्जी एक दुर्गा पंडाल में TMC नेता के 'काबा-मदीना' गाने पर ताली बजाती दिखी हैं। इसे लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। देश में बार-बार हिंदू आस्था पर हमले किए जा रहे हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। क्या यह भविष्य में किसी सुधार का संकेत है?