विचार

‘पाकिस्तान में आतंकियों को मरवा रहा है भारत’: चुनाव के समय ‘प्रोपेगेंडा’ खड़ा करने चला था हिंदू विरोधी विदेशी मीडिया, आम लोगों में PM...

द गार्जियन ने आर्टिकल लिखा था ये सोचकर कि इससे मोदी सरकार पर सवाल उठेंगे लेकिन सवाल उठना तो दूर, लोग अब पीएम मोदी की जमकर तारीफ कर रहे हैं।

‘बहरों को सुनाने के लिए ऊँची आवाज़ की ज़रूरत’: ब्रिटिश सरकार को नाकों चने चबवा दिए थे भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु, शहीद दिवस...

सैंडर्स की हत्या के लिए भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव को आज ही के दिन यानी 23 मार्च 1931 को फाँसी दे दी गई थी।

रमजान में हिंदू बच्चों के हत्यारे को बचाने निकली RJ सायमा निभा रही मुस्लिम ब्रदरहुड, ‘काफिर’ अजीत अंजुम लेकिन क्यों कर रहा ऐसा?

आरजे सायमा का मतलब इससे नहीं है कि बदायूँ में जो हुआ वो किस कारण हुआ, उनका मकसद है कि कैसे लोग इस पर बात करना बंद करें कि हत्यारा साजिद है।

चाटुकार अपूर्वानंद, कितना भी लगा लो पोछा नहीं धुलेंगे पप्पू के दाग पर हिंदी का प्रोफेसर होने के नाते ‘राम की शक्ति पूजा’ का...

भगवान राम जीत को लेकर आश्वस्त नहीं है, एक आम आदमी की तरह वो कह रहे हैं कि ये सिर्फ नर-वानर बनाम राक्षस का युद्ध नहीं है बल्कि रावण ने महाशक्ति का भी आह्वान कर दिया है।

जिनको ‘पाकिस्तानी’ कह जेल में ठूँसना चाहते हैं केजरीवाल, मानवीय रूप से वो सब भारतीय… 1955-86-92-2003-05 का इतिहास पढ़ ले AAP

घोर धार्मिक प्रताड़ना के कारण विस्थापित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देना गलत कैसे? राजनीतिक कारणों से इसका विरोध करना अमानवीय और असंवैधानिक है।

मतुआ, राजबंशी, नामशूद्र: पश्चिम बंगाल में रहने वाले 4 करोड़ प्रताड़ित हिंदुओं पर नहीं जागी ‘ममता’, PM मोदी बने आवाज – मना रहे दूसरा...

सीएए लागू होने के बाद बंगाल के मतुआ, नामशूद्र और राजबंशी समुदाय के लोग खुशी मना रहे हैं। मतुआ समुदाय ने इसे दूसरा स्वतंत्रता दिवस बताया है।

चुनाव आयुक्त के इस्तीफे पर कॉन्ग्रेस बनी पत्रकार, नेता बन कर सामने आए रवीश कुमार

रवीश कुमार अब स्थाई तौर पर राजनीति में आ गए लगते हैं। यूँ तो बिलो-दि-बेल्ट हमले की उनकी पुरानी आदत रही है, लेकिन इस बार उन्होंने अलग ही रवैया अपनाया है।

भारत की स्त्रियों का गरिमामयी और सशक्त इतिहास: पुरुषों के साथ मिलकर रची हैं सफलता की कहानियाँ, आवश्यकता है संपूरकता के विमर्श की

यदि रावण ने सीता माता का हरण किया तो उनकी रक्षा के लिए पुरुषों ने योगदान दिया। यदि स्त्रियों ने जौहर किया तो साका भी हजारों पुरुषों ने किया।

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’: बार-बार चुनावों से अर्थव्यवस्था पर वित्तीय बोझ; जानिए क्यों जरूरी है चुनाव सुधार, लोगों को भी मिलेगी राहत

एक साथ विभिन्न चुनाव कराने से देश की अर्थव्यवस्था पर वित्तीय बोझ कम हो जाएगा। इसके साथ ही बार-बार वोटर लिस्ट अपडेट कराने से मुक्ति मिलेगी।

राम मंदिर अपवित्र… जय श्रीराम बोलो, भूखे मरो… राम को भगवान मानना बेवकूफी: 4 नेता, चारों हिंदू-घृणा से सने, मोदी को हराने की राजनीति...

राहुल गाँधी से लेकर ए राजा, शत्रुघ्न सिन्हा हो या रामेंदु सिन्हा राय, उनकी कोशिश यही है कि वो बीजेपी पर हमला बोलें और आम जनता के मन में बीजेपी को लेकर खटास पैदा करें।

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