यह पहली बार नहीं है जब राहुल गाँधी ने किसी लोकतांत्रिक संस्था पर हमला किया है। अनाप-शनाप बोलने की इस लंपट प्रवृत्ति को रोकने के लिए दंड के नए विधान लिखने होंगे।
नब्बे के दशक में भी देश में तीन-तीन बार SIR किया जा चुका है, फिर हंगामा सिर्फ़ अभी क्यों? 1957 और 1961 में जब SIR हुआ था, तब जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री थे।