भावनाओं का उद्वेग कभी-कभी नेत्रों पर पट्टी बाँध देता है। जब से भारत-पाकिस्तान के बीच तत्काल और पूर्ण युद्ध विराम की खबर आई है, ऐसा ही देखने को मिल रहा है।
इससे पहले नेहरू ने एक बार कश्मीर का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाने की गलती की थी। इसके चलते 7 दशक के बाद भी कश्मीर का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के पास है।
मृत शरीर के भी कुछ अधिकार होते हैं, सम्मानजनक अंतिम संस्कार के। दुर्भाग्य से, भारत देश में ये आतंकियों को तो सहज उपलब्ध है लेकिन बेचारे हिन्दुओं को नहीं।
कश्मीर से हिन्दुओं को भगा दिया गया, तो क्या उनकी संपत्तियाँ 'वक़्फ़ बाय यूजर' हो गईं? कल को मुर्शिदाबाद में भी यही होगा। सुप्रीम कोर्ट हिन्दुओं के मामले में क्यों माँगता है काग़ज़?
क्या बिहार में इस बार एक त्रिकोणीय मुक़ाबला देखने को मिलेगा, जहाँ कॉन्ग्रेस पार्टी PK के साथ गठबंधन में होगी? राहुल गाँधी ने शक्ति-प्रदर्शन के जरिए राजद को दिया सन्देश?