एक तरफ शिवसेना अपनी सत्ता में साझीदार कॉन्ग्रेस और एनसीपी को ख़ुश रखने में लगी है, वहीं दूसरी तरफ़ वो भाजपा को देशहित और हिंदुत्व के मुद्दों पर अकेले क्रेडिट लेने भी नहीं देना चाहती। मौजूदा स्थिति में पार्टी पेंडुलम की तरह हो गई है- कभी इधर तो कभी उधर।
इस हड़ताल को एमके फैजी की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) ने बुलाया है। एसडीपीआई के आतंकियों से कनेक्शन सामने आते रहते हैं और कन्नूर के नारथ इलाक़े में इसके नेताओं के यहाँ पुलिस की रेड में कई ख़तरनाक हथियार मिले थे। ये संगठन चोरी-छिपे हथियारों का प्रशिक्षण देता है।
गिनती के लोगों के साथ धरने पर बैठी प्रियंका की हालत देख महिला कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव से रहा नहीं गया। उन्होंने आनन-फानन में किसी को फोन लगाया और फटकारने वाले अंदाज़ में पूछा- "हमारे लीडर्स कहाँ हैं? आओ भेजिए, वेणुगोपाल वगैरह को भेजिए। आप समझ गए न?"
कॉन्ग्रेस के लोग जिस तरह से व्हाट्सप्प ग्रुप बना कर कॉलेज कैम्पस में उपद्रव की साज़िश रच रहे हैं, उसका पर्दाफाश होना ज़रूरी है। इन ग्रुप्स में कॉन्ग्रेस से जुड़ाव छिपा कर उपद्रव को न्यूट्रल प्रोटेस्ट साबित करने की कोशिश की जाती है। जानिए उस ग्रुप के एडमिन्स और मैसेजों के बारे में।
ममता ने इन वारदातों के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि उन्हें हिंसा फैलाने के लिए भाजपा से रुपए मिले थे। उन्होंने आरोप लगाया कि 'राज्य की बाहरी ताक़तों' ने मुस्लिम समुदाय का हितैषी होने का दावा करते हुए ये तड़फोड़ मचाई।
"शनिवार को ही राहुल गाँधी की रीलॉन्चिंग के लिए रैली हुई थी और अगले ही दिन हिंसा भड़क गई। उनके मुताबिक विपक्ष नागरिकता कानून पर हिंदू-मुस्लिम कर विभाजनकारी नीति अपना रहा है और लोगों को गलत जानकारी दी जा रही है।"
''उन्होंने मेरा मोबाइल फोन भी छीन लिया था क्योंकि मैंने उनके दुर्व्यवहार का वीडियो बना लिया था। ऐसा उन्होंने इसलिए किया जिससे वो सबूतों को मिटा सकें। इससे पहले सितंबर महीने में भारी बारिश के दौरान भी मुझे घर से निकाल दिया था पर अदालत के हस्तक्षेप के बाद वे अपने घर में वापस लौट पाई थीं।''
अपने ट्वीट में अपर्णा यादव ने जामिया मिलिया, NRC बिल, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और 16 दिसंबर के हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए लिखा, “जो भारत का है उसे रजिस्टर में अंकित होने में क्या समस्या है?”