कुल 79 ऐसी लोकसभा सीटें हैं, जो अल्पसंख्यक बहुल हैं। इन 79 में से 41 पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की है। अर्थात, कुल अल्पसंख्यक बहुल लोकसभा सीटों में से 51.8% पर भाजपा ने कब्ज़ा किया। ये पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन है।
"वीरगति को प्राप्त जवानों व उनके परिवारों के प्रति प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से यह सम्मान देना उनके लिए सरकार का रुख दिखाता है, जो देश की सेवा करते हुए बलिदानी हो गए। ये ममता बनर्जी के उन आरोपों को भी ध्वस्त करता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस समारोह को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।"
पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के नतीजों ने देशवासियों को चौंकाया है। सभी पूर्वग्रह और अपेक्षाओं को झूठा साबित करते हुए, भाजपा ने पश्चिम बंगाल राज्य में 40.25% वोट-शेयर हासिल किया, जबकि वाम दल दहाई अंक के वोट-शेयर तक पहुँचने में भी नाकाम रहे।
“यह हमारे संज्ञान में आया है कि मैनपुरी के लोकसभा क्षेत्र में एससी-एसटी लोगों के साथ हिंसा की गई थी, जिन्होंने चुनाव में सपा उम्मीदवार मुलायम सिंह यादव को वोट नहीं दिया था, उन्हें लाठी-डंडों से पीटा गया और बंदूक से हवाई फायर करके डराया गया। इसी समुदाय के सदस्यों में से एक, बीएसएफ जवान रामनरेश (रिंकू) ने घटनास्थल से भागने के बाद पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी।”
कैलाश विजयवर्गीय की उपस्थिति में तृणमूल कॉन्ग्रेस के विधायक मनिरुल इस्लाम ने बीजेपी जॉइन कर ली है। इसके अलावा टीएमसी नेता गदाधर हाज़रा, मोहम्मद आसिफ इकबाल और निमाई दास ने भी बीजेपी का दामन थाम लिया है।
ममता बनर्जी इस बात से नाराज हैं पीएम मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान मौत के घाट उतार दिए जाने वाले बीजेपी कार्यकर्ताओं के परिवार वालों को आमंत्रित किया गया है। ममता का कहना है कि ये राजनीतिक हत्या नहीं है, बल्कि आपसी रंजिशों के मामले हैं।
गाँधी परिवार ने इस बैठक में कुछ वरिष्ठ नेताओं द्वारा राहुल गाँधी को जरूरी समर्थन ना देने पर नाराजगी जाहिर की थी। परिवार की नाराजगी स्पष्ट थी, क्योंकि सोनिया भी पूरी बैठक के दौरान नहीं बोलीं और यह जाहिर किया कि उन्हें भी अपने विश्वस्त साथियों से निराशा हासिल हुई।
राहुल गाँधी जहाँ चुनाव से पहले लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस से लेकर जनसभाओं में चौकीदार चोर है जैसे नारे लगाते नहीं थक रहे थे, वहीं नतीजों के बाद उन्होंने अचानक से इतनी चुप्पी कैसे साध ली है यह सबके लिए हैरान कर देने वाला प्रश्न हो चुका है।
जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ के समक्ष कार्ति चिदंबरम की तरफ़ से दलील दी गई थी कि उन्होंने क़र्ज़ लेकर सिक्यूरिटी डिपोजिट की व्यवस्था की थी। उन्होंने अदालत को कहा था कि उन्हें उस कर्ज़े का ब्याज भी देना पड़ रहा है।
पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली ने शपथ ग्रहण से एक दिन पूर्व ही नई सरकार में स्वास्थ्य कारणों से कोई भी पद स्वीकार करने में अपनी असमर्थता जता दी है। अरुण जेटली ने अपने फैसले की जानकारी नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर दे दी है। उनके इस फैसले से...