हिमांत विश्व शर्मा ने कहा, “अगर राहुल गाँधी अध्यक्ष पद पर बने रहते हैं, तो विपक्ष के लिए कोई उम्मीद नहीं है, मगर यदि भाजपा के नजरिए से देखें, तो अगर राहुल गाँधी अगले 50 वर्षों तक अध्यक्ष रहेंगे, तो हमें खुशी होगी।”
अल्पेश ठाकोर ने कहा, “कॉन्ग्रेस इस बात को समझने में विफल रही कि वास्तव में लोग क्या चाहते हैं। वह सिर्फ ये नारा लगाते रहे- ‘घोटाला हुआ, घोटाला हुआ’। कोई घोटाला नहीं था, उनके दिमाग में घोटाला था, उनके दिमाग में कैमिकल लोचा था।”
रजनीकांत ने कहा कि यह जीत मोदी की जीत है और वह एक करिश्माई नेता हैं। कॉन्ग्रेस के ताज़ा नेतृत्व संकट पर उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी को पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा नहीं देना चाहिए क्योंकि लोकतंत्र में विपक्ष भी मज़बूत होना चाहिए।
"जैसे सात चरणों में लोकसभा का निर्वाचन हुआ, वैसे ही (दूसरी पार्टियों के नेताओं का) भाजपा में शामिल होना भी सात चरणों में होगा। आज तो केवल पहला चरण था।"
बढ़ती जनसंख्या विकास में बाधक है। ऐसे में जनसंख्या नियंत्रण कानून जरूरी है, ताकि देश का विकास किया जा सके। देश की आबादी को 150 करोड़ से अधिक नहीं होने दिया जाना चाहिए।
इसी क्षेत्र में अब तक 10 चुनाव जीत चुके गहलोत की 93 रैलियों का कोई असर नहीं हुआ और उनके ख़ुद के ही विधानसभा क्षेत्र में उनके बेटे लीड नहीं ले सके। सरदारपुरा में वैभव गहलोत लगभग 18,000 मतों से पीछे छूट गए। कुल पौने 3 लाख मतों के अंतर से उनकी बुरी हार हुई।
अकेले दिग्विजय सिंह को ही ₹90 लाख मिले। जिन अन्य लोकसभा प्रत्याशियों को फंड मिलने का आरोप हैं, उनमें मंदसौर से मीनाक्षी नटराजन, मंडला से कमल माडवी, शहडोल से प्रमिला सिंह, सिद्धि से अजय सिंह राहुल, भिंड से देवाशीष जरारिया, होशंगाबाद से शैलेंद्र सिंह दीवान, खजुराहो से कविता सिंह नटिराजा और दामोह से प्रताप सिंह लोधी शामिल हैं।
सुभ्रांशु रॉय के अलावा नोआपारा से विधायक सुनील सिंह और बैरकपुर के विधायक शीलभद्र दत्ता मुकुल रॉय के साथ दिल्ली पहुँच चुके हैं। इन तीनों नेताओं के आज शाम 4 बजे बीजेपी दफ्तर में पार्टी में शामिल होने की खबर है।
राज्य के कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने इस्तीफा दे दिया। वह अपना फोन बंद कर के नैनीताल रवाना हो गए हैं। मंत्री कटारिया की पत्नी गायत्री देवी ने अपने पति द्वारा इस्तीफा देने की बात की पुष्टि की है। गायत्री देवी ने बताया कि इस्तीफा के बाद लोगों के फोन कॉल से बचने के लिए उन्होंने अपना फोन स्विच ऑफ...
कॉन्ग्रेस इस समय बड़े ही विचित्र ऊहापोह में फँसी दिख रही है। राहुल गाँधी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना चाहते हैं। लेकिन कोई लेने को तैयार ही नहीं। इसी बीच राजस्थान में गुटबाजी और कर्नाटक में दल-बदल का संकट भी...