अभी हाल ही में सीपीएम और डीवाईएफआई के गुंडों ने चुनावी कैंपेनिंग पर आपत्ति जताते हुए कासरगोड के भाजपा प्रत्याशी रवीश तांत्री कुंतारु के साथ मारपीट की थी।
घर के अंदर स्थानीय भाजपा नेता प्रदीप बनर्जी सहित कुछ लोग थे, जिन्होंने कहा कि वे पार्टी की बैठक शुरू करने वाले थे। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि बैठक में आरएसएस नेता और बंगाल के भाजपा के सह-प्रभारी अरविंद मेनन ने भी भाग लिया।
ऐसे में, इस सीट को लेकर अभी तक संशय बना हुआ है। वाराणसी से ख़ुद पीएम मोदी मैदान में हैं और काशी से सटी गाज़ीपुर सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का विषय है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मनोज सिन्हा की लोकप्रियता में बढ़ोतरी हुई है।
वीडियो के वायरल होने के बाद कॉन्ग्रेस की महिला विधायक के इस रवैये पर पार्टी की फजीहत होने लगी तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि अधिकारी पानी की समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे थे, जिस वजह से उन्हें गुस्सा आ गया।
मणिशंकर अय्यर ने एक लेख में मोदी की रैलियों और उनके बयानों का हवाला देते हुए कहा, "याद है 2017 में मैंने मोदी को क्या कहा था?" अपने लेख में अय्यर ने पूछा कि क्या उनकी भविष्यवाणी सही नहीं थी?
शिकायत मिलने पर चुनाव आयोग ने जाँच के आदेश दिए। राँची के कार्यपालक दंडाधिकारी ने मामले की जाँच की और आरोप को सही पाया। इस के बाद हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी के खिलाफ रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट 1951 एवं 188 आईपीसी के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
"मैं कमल हासन के बयान का समर्थन करता हूँ। मैं उनके बयान से 100 नहीं 1000 फीसदी सहमत हूँ। जैसे हिंदू धर्म में आरएसएस है, वैसे इस्लाम में इस्लामिक स्टेट है।" तमिलनाडु के कॉन्ग्रेस प्रमुख केएस अलागिरी के इस बयान से...
बंगाल ने इस बार हिंसा और हत्या की हर हद को पार कर दिया है। आखिरी चरण में कोई बड़ी गड़बड़ी न हो, इससे बचने के लिए बंगाल में महज 9 सीटों पर मतदान के लिए 700 से ज्यादा कम्पनियाँ केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती होगी।
"पुलिस, प्रशासन, जिला अधिकारी रत्नाकर राव, तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के दलाल बन चुके हैं। राज्य चुनाव आयोग पक्षपात कर रही है और टीएमसी की दलाली कर रही है। पश्चिम बंगाल में गणतन्त्र नहीं, दीदी का गुण्डातन्त्र चलता है! विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष को ममता बनर्जी के बंगाल में जनसभा करने की इजाज़त नहीं है!"
"पाठ्यक्रम की पुस्तकों में वीर सावरकर जैसे लोगों की प्रशंसा की गई थी, जिन्होंने देश के स्वतंत्रता संग्राम में कोई योगदान नहीं दिया। जब हमारी सरकार ने सत्ता संभाली, तब पुस्तकों में पढ़ाई जा रहीं इन चीजों का विश्लेषण करने के लिए एक समिति बनाई, जिसके बाद पुख्ता सबूतों के आधार पर ये बदलाव किए गए।"