14 फरवरी को हुए पुलवामा अटैक के बाद पूरे देश में जवानों के लिए डोनेशन में काफी वृद्धि दर्ज की गई है। इस साल 18 जून तक ₹242.15 करोड़ की सहायता राशि मिल चुकी है। वीरों के लिए दिए जाने वाले डोनेशन में 12 गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।
2018 में सुरक्षाबलों ने कुल 257 आतंकी मारे। इनमें 146 कश्मीरी थे, जबकि 111 आतंकी दूसरे मुल्क के थे। जबकि 2016 और 2017 में ये आँकड़े उलटे देखने को मिले थे। इन वर्षों में सुरक्षाबल द्वारा दूसरे मुल्कों के आतंकी ज्यादा मारे गए थे और स्थानीय कम।
सभी गाड़ियों को रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टैग (RFI) से सुसज्जित किया गया है। इससे सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धालुओं की सही लोकेशन पता चलती रहेगी। मानवरहित एरिअल व्हीकल (UAVs) का भी सहारा लिया जा रहा है। इससे श्रद्धालुओं की पूरी स्थिति पता चलती रहेगी।
वे खराब मौसम में एक पहाड़ी पर फँस गए हैं, जहाँ से उन्हें न तो वायु सेना हेलीकॉप्टरों की मदद से एयरलिफ्ट कर सकती है और न ही वह खुद बारिश के कारण खतरनाक हो गए रास्ते पर पूरे दिन भर की जोखिम-भरी ट्रेकिंग कर के निकटतम गाँव तक पहुँच सकते हैं।
ये वही जाकिर मूसा है जिसे सुरक्षा बलों ने एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया था, उसके बाद से ही अंसार गजवातुल हिंद बदला लेने पर उतारू है। सुरक्षा बलों ने इन खुफिया इनपुट्स के बाद अमरनाथ यात्रा को लेकर चौकसी कड़ी कर दी है।
सामंत गोयल R&AW में अनिल धसमाना का स्थान लेंगे जबकि अरविन्द कुमार इंटेलिजेंस ब्यूरो के प्रमुख के रूप में राजीव जैन का स्थान लेंगे। जैन और धसमाना को 2016 में नियुक्ति दी गई थी। बाद में उन्हें छः महीने का कार्यकाल विस्तार दिया गया था।
हमले की सफलता का कोई वीडियो न होने के बावजूद पायलटों के मन में सफलता को लेकर कोई संदेह नहीं है। “मुझे स्पाइस बमों के निशाने पर गिरने में कोई संदेह नहीं है।”
गिरफ्तार हुए तीनों बांग्लादेशी भारत में अपने संगठन के लिए धन जुटाने और बाकी लोगों को अपने संगठन में भर्ती करने के इरादे से आए थे और चौथा संदिग्ध इनकी इस काम में मदद कर रहा था। फिलहाल ये चारों पुलिस की हिरासत में हैं और कोलकाता पुलिस इनसे पूछताछ कर रही है।
इंटेलिजेंस को संदेह है कि 'ओए सौम्या' नाम का अकॉउंट दुश्मनों के जासूस का है जो सेना अधिकारियों एवं स्पेशल फोर्स के जवानों को निशाना बनाने की कोशिश में है।
नए संशोधन के बाद एनआईए को किसी भी राज्य में सर्च के लिए वहाँ के शीर्ष पुलिस अधिकारी की अनुमति लेने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। हालाँकि, अभी भी एनआईए को ऐसी कार्रवाई के लिए अनुमति की ज़रूरत नहीं पड़ती लेकिन क़ानून व्यवस्था ख़राब होने की स्थिति में ऐसा करना होता है।