वकील के एक साथी को भी पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। आशंका है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है और इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।
जबलपुर में सैकड़ों रोहिंग्या-बांग्लादेशी परिवार का पता चला है। ये लोग सरकारी जमी पर कब्जा कर सालों से रह रहे थे। मध्य प्रदेश में SIR की कवायद से खुलासा हुआ।
1983 में असम में हुए 3 महीने के हिंसक आंदोलन के पीछे तिवारी रिपोर्ट में आसु और एजेएसपी को जिम्मेदार ठहराया है। हालाँकि मूल वजह असमियों के मन में बैठ गया 'भय' था।