प्रदर्शनकारियों ने अब उपनिवेशवाद और अश्वेतों की गुलामी को समर्थन देने वालों की मूर्तियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है और उन्हें हटाए जाने की माँग भी जोर-शोर से उठ रही हैं।
भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पाक सेना की दो चौकियाँ पूरी तरह नष्ट कर दिन। साथ ही पाक सेना के एक मेजर रैंक के अधिकारी सहित पाँच सैनिकों के मारे जाने की सूचना है।
इस कदम ने इंदिरा गाँधी को और भी अधिक निरंकुश बना दिया था। फिर पत्रकारों की गिरफ्तारी से लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं के खून से लोकतंत्र के इतिहास का सबसे कलंकित अध्याय लिखा गया।
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों ने इस साल अब तक 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया। इनमें से 68 को 1 अप्रैल से 10 जून के बीच मार गिराया गया, जब कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन लागू था।
बहुत ही बारीकी से कभी प्रतीकात्मक तस्वीर के नाम पर तो कभी सीधे खुल्ले में खेलते हैं कि कौन सी जनता जा रही है तहकीकात करने? अगर बाद में पता भी चला तो क्या हो जाएगा? क्योंकि आजतक कभी इन्हें अपनी इन हरकतों पर कोई बड़ा आउटरेज नहीं झेलना पड़ा।