शायद राहुल गाँधी को यह नहीं पता कि विदेशों में भी रेप होते हैं और बहुत ही विभत्स होते हैं। लेकिन नहीं! इन्हें तो सिर्फ राजनीति करनी है। मुद्दा फिर चाहे रेप जैसा गंभीर ही क्यों न हो, ये करेंगे राजनीति ही! तभी तो विदेशी मीडिया की बातों को...
"रिव्यू पिटिशन पर जो भी फ़ैसला होगा, वो चाहे हमारे हक़ में आए या न आए, हमको वो फ़ैसला भी क़बूल है। लेकिन, यह भी एक हक़ीक़त है कि क़यामत तक बाबरी मस्जिद जहाँ थी, वहीं रहेगी। चाहे वहाँ पर कुछ भी बन जाए। वो मस्जिद थी, मस्जिद है... मस्जिद ही रहेगी।"
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता कि न्याय त्वरित रूप से किया जा सकता है या फिर ऐसा होना चाहिए। जस्टिस बोबडे ने कहा कि न्यायिक सुधार की प्रक्रिया जुडिशरी ख़ुद करेगी और इसे सार्वजनिक रूप से करना है या नहीं, इसपर बहस हो सकती है।
“.....सबसे पहले आज जो खबर मिली उस खबर से दिल को बड़ा सुकून मिला। हैदराबाद पुलिस ने गैंगरेप के चारों आरोपितों को एनकाउंटर में मार गिराया। पुलिस ने बड़ा ही साहसिक निर्णय लिया है और मैं पुलिस के इस निर्णय के साथ हूँ।”
उन्होंने कहा कि उनके साथ वही हो रहा है, जो औरंगज़ेब ने छत्रपति शिवाजी के साथ किया था। राज्यपाल ने कहा कि सरकार में पाँच-छह ऐसे मंत्री हैं जो उन्हें लगातार परेशान कर रहे हैं। राज्यपाल ने आरोप लगाया कि उन्हें सूचित किए बिना ही विश्वविद्यालयों में वीसी की नियुक्ति कर दी जा रही है।
सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह का बयान भी इस आरोप की पुष्टि करता है कि अगर राजीव गाँधी ने कॉन्ग्रेस नेताओं के नेतृत्व में किए जा रहे दंगे को रोकने के लिए सेना को बुलाने की अपील पर ध्यान दिया होता तो 1984 के सिख नरसंहार को रोका जा सकता था।
यूपी में कॉन्ग्रेसी भी योगी सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करते हुए सड़कों पर निकल गए। लेकिन उत्तर प्रदेश विधानसभा के बाहर कॉन्ग्रेस के झंडे लेकर पहुँचे कार्यकर्ताओं ने तब भागना शुरू कर दिया, जब यूपी पुलिस ने लाठियों से उन्हें जम कर पीटा। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी वायरल हो गया।
''सप्ताहांत के दिनों में यह 22,430 हो गई है। अमेरिका के न्यू यॉर्क में स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी को देखने रोजाना 10000 पर्यटक पहुँचते हैं। पर्यटकों की संख्या में औसतन 74 फीसदी वृद्धि हुई है और अब दूसरे साल के पहले महीने में पर्यटकों की संख्या औसतन 15036 पर्यटक प्रतिदिन हो गई है।"
'द न्यूजरूम' जैसे अमेरिकी टीवी शो में NDTV के नाम का मजाक उड़ाया जाना एक ऐसा कारनामा था, जिसने लोगों का काफी ध्यान खींचा, NDTV का भी। इसके बाद NDTV का वापस से प्रतिष्ठा हासिल करना असंभव सा लगता है।