भारी संख्या में मामले दर्ज होने के बावजूद किसी को दोषी इसलिए नहीं करार दिया जा पाता है क्योंकि माँस के बीफ़ होने का पता उसके सड़ने के पहले ही लगाया जा सकता है।
"अगर ग़ैर-हिन्दू BHU का कुलपति नहीं हो सकता और यह वर्तमान एक्ट में है, तो धर्म विज्ञान संकाय के लिए बनाए विशेष अधिनियम एक्ट से बाहर कैसे हो गए? 1904, 1906, 1915, 1951 और 1969 के BHU के एक्ट में अगर धर्म विज्ञान संकाय के लिए विशेष अधिनियम बनाये गए थे तो उसको महामना के उद्देश्यों के विपरीत क्यों बदला गया?"
पूरे थाने को ही पता नहीं था कि जिस व्यक्ति की इसी थाने में हत्या के प्रयास में तलाश है, वह सामने ही खड़ा है। जब मीडिया ने पूछा था तो इसी पुलिस ने कहा था कि वह हमलावरों की तलाश में हैं।
“यह प्रियंका की सुरक्षा के लिए नहीं है और ना ही मेरी बेटा-बेटी या फिर गाँधी परिवार के लिए है। यह हमारे नागरिकों के लिए है विशेषकर देश की महिलाओं को सुरक्षा देने की बात है ताकि वो खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें। देश भर में महिलाओं को सही तरीके से सुरक्षा नहीं मिल रही है…"
नक्सली हिंदूवादी संगठनों के विस्तार को रोकने के लिए बड़ी साज़िश कर रहे हैं। इसके लिए गुरिल्ला युद्धनीति और लैंडमाइंस का प्रयोग करने की योजना नक्सलियों द्वारा बनाई जा रही है। नक्सली बिहार के विभिन्न जिलों में घूम कर संगठन को मजबूत करने में लगे हुए हैं।
ड्राइवर देवेंद्र भावसार दुर्घटना के बाद से ही फ़रार बताया जा रहा है। वहीं आज तक की रिपोर्ट में यह भी दावा किया हग्या है कि गाड़ी को पुलिस ने बरामद कर लिया है।
“आखिरी बार जब उसने मुझसे बात की थी, तो वो रास्ते में थी। उसने मुझसे फल काटकर रखने के लिए कहा था। उसने कहा था कि उसे बहुत भूख लगी है। लेकिन... मैं चाहती हूँ कि वे उसी तरह से जले, जैसे उसने मेरी बेटी को जलाया।”
जिस तरह से किशोरी का शव खेत में जिस वीभत्स हालत में मिला है। उससे गैंगरेप और हत्या की बातें रिपोर्टों में की जा रही हैं लेकिन अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। यदि सभी आशंकाएँ सही साबित होती हैं तो एक तरह से हैदराबाद की घटना को दोहराने की कोशिश के रूप में इसे देखा जा रहा है।