कहीं विरोध प्रदर्शन किए जा रहे थे कर्मचारियों द्वारा तो कहीं कई लोग अनिश्चितकाल के लिए अनशन पर थे, लेकिन विजय माल्या पार्टियों में मशगूल थे। कर्मचारियों से PF और टैक्स के पैसे भी लिए, लेकिन सरकार को नहीं दिए।
रोज धमाके और नक्सली हमले कॉन्ग्रेस सरकार की पहचान थे। लेकिन मोदी सरकार के दौर कश्मीर में इसमें बदलाव हुआ और अब नक्सली और आतंकी अंतिम साँसे गिन रहे हैं।